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जानिए अपनी हस्तरेखाओं से अपने जीवन के राज और अपने भविष्य की संभावनाएं…

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नवीन समाचार, 16 अप्रैल 2019। अपनी हथेली में मौजूद रेखा आपके बारे में ऐसे रहस्य खोलती है जिसके बारे में आप कभी सोच भी नहीं सकते। अगर आप इन रेखाओं का मतलब जान लें तो संभव है कि भविष्य में होने वाली घटनाओं से बचने का उपाय कर सकते हैं। खासतौर पर अगर आप यह जान लें कि आपकी स्थ्य रेखा आपकी सेहत के बारे में क्या कह रही है तो रोग के प्रति सजग रहकर परेशानियों से बच सकते हैं।

समझें हस्त रेखाओं और पर्वतों के हिन्दी नाम और इंग्लिश नाम….

जीवन रेखा- Life Line
हृदय रेखा- Heart Line
मस्तिष्क रेखा- Head Line
सूर्य रेखा- Sun Line or Fame Line
भाग्य रेखा- Fate Line
शुक्र पर्वत- Venus Mount
चंद्र पर्वत- Moon Mount
गुरु पर्वत- Jupiter Mount
मंगल पर्वत- Mars Mount
शनि पर्वत- Saturn Mount
सूर्य पर्वत- Sun Mount
बुध पर्वत- Mercury Mount
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भाग्य योग–
हस्तरेखा सिद्धांत के अनुसार जो रेखा मणिबंध से निकलकर शनि पर्वत तक जाती है वही भाग्य रेखा कहलाती है, लेकिन भाग्य योग का निर्माण तब होता है जब कोई पुष्ट, पतली और लालिमा लिए हुए भाग्य रेखा शनि पर्वत से चलकर गुरु पर्वत के नीचे समाप्त होती है और जहां रेखा समाप्त होती है वहां एक सफेद बिंदु हो तो भाग्य योग का निर्माण होता है। प्रसिद्ध हस्तरेखा कीरो ने भाग्य योग की कुछ अन्य स्थितियां भी बताई हैं। जिनके अनुसार पुष्ट भाग्य रेखा सूर्य पर्वत पर पहुंचती हो। भाग्य रेखा गुरु पर्वत से प्रारंभ होती हो। दोनों हाथों में स्पष्ट और लंबी भाग्य रेखाएं हों। भाग्य रेखा चंद्र पर्वत से प्रारंभ होती हो तो भाग्य योग बनता है। जिनके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति अपार धन अर्जित करता है। उसकी ख्याति चारों ओर फैलती है, अनेक भवन और वाहन का स्वामी होता है। पत्नी के सहयोग से जीवन में शिखर पर पहुंचता है।
हंस योग :
यदि तर्जनी अंगुली अनामिका से लंबी हो, गुरु पर्वत पूर्ण विकसित तथा लालिमा लिए हुए हो, उस पर क्रॉस के चिन्ह के अलावा और अन्य कोई चिन्ह न हो तो उसके जीवन में हंस योग का निर्माण होता है। जिसके हाथ में ऐसा संयोग देखा जाता है वह व्यक्ति लंबे डीलडौल वाला आकर्षक, सुंदर शरीर का मालिक होता है। ऐस योग वाली स्त्रियों के आकर्षण प्रभाव से प्रत्येक व्यक्ति मोहित रहता है। अभिनेता-अभिनेत्री, चित्रकार, लेखक, मॉडल आदि के हाथों में इसी तरह का योग देखा गया है। इस योग वाला व्यक्ति मधुरभाषी और सभी के साथ श्रेष्ठ व्यवहार करने वाला होता है। यह योग गुरु के प्रभाव से बनता है और यह पंचमहापुरुष योग में से एक होता है इसलिए ऐसा व्यक्ति सफल न्यायाधीश भी होता है।
राजनेता योग :
यदि मध्यमा अंगुली का अग्र भाग नुकीला हो तथा सूर्य रेखा विकसित और लंबी हो। उस पर कोई नक्षत्र, क्रॉस या तिल का निशान न हो। गुरु और शनि पर्वत भी पुष्ट और लाल हों तो व्यक्ति के हाथ में राजनेता योग बनता है। जिनके हाथ में ऐसा योग बनता है वे एक सफल राजनेता बनते हैं। उनका राजनीतिक करियर तेजी से उंचाइयां छूता है और मंत्री, प्रधानमंत्री पद तक पहुंचते हैं। ऐसे लोगों की लोकप्रियता का दायरा आयु बढ़ने के साथ-साथ बढ़ता जाता है। ऐसे लोग सदाचारी, सत्यभाषी और ईमानदार होते हैं।
बुधादित्य योग :
जिस तरह जन्म कुंडली में सूर्य और बुध मिलकर बुधादित्य योग बनाते हैं उसी तरह हस्तरेखा में भी सूर्य और बुध की शुभ युति से बुधादित्य योग का निर्माण होता है। हथेली में बुध और सूर्य पर्वत पास-पास होते हैं। यदि ये दोनों पर्वत एक-दूसरे से जुड़ जाएं, इनके बीच में कोई गैप न रहे और देखने में एक ही प्रतीत हों। साथ ही बुध और सूर्य रेखाओं कोई रेखा न काटती हो तो बुधादित्य योग बनता है। जिन लोगों के हाथ में ऐसा देखा जाता है वे कुशल वक्ता, चतुर, बुद्धिमान और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने वाले होते हैं। अपने तर्कों से बड़े-बड़ों को परास्त कर देते हैं। एक तरह से बिना हथियार के ये समस्त युद्धों में विजयी होते हैं। आर्थिक तरक्की के सारे मार्ग इनके लिए सदा खुले रहते हैं।
तडि़त योग :
यदि चंद्र पर्वत से कोई पतली रेखा गुरु पर्वत की ओर जाती हो तथा कनिष्ठिका अंगुली अनामिका के लगभग बराबर हो तो तडि़त योग बनता है। इस योग वाले व्यक्ति राजा के समान जीवनयापन करते हैं। परिवार और समाज में इन्हें पूरा यश-सम्मान मिलता है। समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति होते हैं। जिन लोगों के हाथों में तडि़त योग होता है वे प्रायः अपनी मेहनत से आगे बढ़ने वाले होते हैं। किसी बिजनेसमैन के हाथ में यह योग हो तो वह दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति भी बन सकता है।
हस्तरेखा के विद्वानों ने तडि़त योग की कुछ अन्य स्थितियां भी बताई हैं जैसे:–
1. हाथ की समस्त अंगुलियां पतली और लंबी हों तथा नुकीली हों और तर्जनी अंगुली के तीसरे पर्व तिल हो।
2. कनिष्ठिका अंगुली का झुकाव अनामिका की ओर हो तथा सभी पर्वत पूर्ण मजबूत हों।
3. चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलकर सूर्य पर्वत तक पहुंचे और वह रेखा सीढ़ीदार हो।
शुभकर्तरी योग :
यदि हथेली के बीच का हिस्सा दबा हुआ गहरा हो। सूर्य और गुरु पर्वत पुष्ट, मजबूत और उभरे हुए हों। भाग्य रेखा शनि पर्वत के मूल को छूती हो तो हाथ में शुभकर्तरी योग बनता है। जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह तेजस्वी और चुंबकीय व्यक्तित्व का धनी होता है। उसके आसपास ऐश्वर्य और भौतिक सुध-सुविधाएं स्वयं चले आते हैं। एक से अधिक साधनों से आय प्राप्त करता है तथा अपने पूर्वजों से मिली संपत्ति में वृद्धि करने वाला होता है। शारीरिक दृष्टि से ऐसा व्यक्ति आकर्षक होता है। विपरीत लिंगी व्यक्तियों की इनके जीवन में भरमार होती है। कहीं-कहीं ऐसा व्यक्ति घमंडी भी देखा गया है।
गजलक्ष्मी योग :
यदि दोनों हाथों में भाग्य रेखा मणिबंध से प्रारंभ होकर सीधी शनि पर्वत पर जाती हो तथा सूर्य पर्वत पूर्ण विकसित, लालिमा लिए हुए हो और उस पर सूर्य रेखा भी बिना कटी-फटी, पतली और स्पष्ट हो। इनके साथ मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा तथा आयु रेखा स्पष्ट हो तो इसे गजलक्ष्मी योग कहा जाता है। जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह साधारण परिवार में जन्म लेकर भी अपने शुभ कर्मों से उच्च स्तरीय जीवनयापन करता है। उसके जीवन में मान-सम्मान की कोई कमी नहीं होती और वह समस्त ऐश्यर्व, सुख भोगता है। ऐसे व्यक्ति समुद्र पार व्यापार करते हैं और यदि नौकरीपेशा है तो उच्च पदों पर आसानी से पहुंच जाते हैं। जीवन में कोई अभाव नहीं रहता और सुंदर जीवनसाथी का साथ मिलता है।
गजलक्ष्मी योग :
यदि दोनों हाथों में भाग्य रेखा मणिबंध से प्रारंभ होकर सीधी शनि पर्वत पर जाती हो तथा सूर्य पर्वत पूर्ण विकसित, लालिमा लिए हुए हो और उस पर सूर्य रेखा भी बिना कटी-फटी, पतली और स्पष्ट हो। इनके साथ मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा तथा आयु रेखा स्पष्ट हो तो इसे गजलक्ष्मी योग कहा जाता है। जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह साधारण परिवार में जन्म लेकर भी अपने शुभ कर्मों से उच्च स्तरीय जीवनयापन करता है। उसके जीवन में मान-सम्मान की कोई कमी नहीं होती और वह समस्त ऐश्यर्व, सुख भोगता है। ऐसे व्यक्ति समुद्र पार व्यापार करते हैं और यदि नौकरीपेशा है तो उच्च पदों पर आसानी से पहुंच जाते हैं। जीवन में कोई अभाव नहीं रहता और सुंदर जीवनसाथी का साथ मिलता है।
समझें हस्तरेखा में शुभ संकेत : 
  • यदि किसी व्यक्ति की हथेली में सूर्य रेखा से निकलकर कोई शाखा गुरु पर्वत की ओर जाती है तो व्यक्ति शासकीय अधिकारी बनता है।
  • यदि हथेली में शुक्र पर्वत शुभ हो, विस्तृत हो और इस पर कोई अशुभ लक्षण ना हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। शुक्र पर्वत अंगू‌‌ठे नीचे वाले भाग को कहते हैं, इस पर्वत को जीवन रेखा घेरे हुए दिखाई देती है।
  • बुध पर्वत पर एक छोटा सा त्रिभुज हो तो व्यक्ति प्रशासनिक विभाग में उच्च पद प्राप्त कर सकता है।
  • स्वास्थ्य रेखा की लंबाई मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा तक ही सीमित हो तो यह शुभ संकेत है। ऐसी स्वास्थ्य रेखा वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य उत्तम रहता है। शुक्र पर्वत, जीवन रेखा के आसपास से प्रारंभ होकर बुध पर्वत की ओर जाने वाली रेखा को स्वास्थ्य रेखा कहते हैं। बुध पर्वत सबसे छोटी उंगली के नीचे होता है।
  • यदि नाखून एकदम साफ और स्वच्छ दिखाई देते हैं तो यह शुभ लक्षण है। नाखूनों पर कोई दाग-धब्बा, कालापन न हो तो शुभ रहता है। शुभ नाखून अच्छे स्वास्थ्य की ओर इशारा करते हैं।
  • अंगूठा मजबूत, लंबा, सुंदर हो तथा मस्तिष्क रेखा भी शुभ हो तो व्यक्ति नौकरी से लाभ प्राप्त करता है। शुभ मस्तिष्क रेखा यानी ये रेखा कटी हुई या टूटी हुई न हो, अन्य रेखाएं इसे काटती न हो, लंबी और सुंदर दिखाई देती हो।
हस्तरेखा के अशुभ संकेत को समझें :
  • यदि दोनों हथेलियों में हृदय रेखा कमजोर और अस्पष्ट दिखाई देती है तो व्यक्ति आलसी और कामचोर हो सकता है।
  • यदि मणिबंध पर एक ही रेखा हो और वह भी अधूरी हो तो व्यक्ति का जीवन निरस होता है और इनके जीवन कोई उत्साह नहीं होता है।
  • हथेली के दोनों मंगल पर्वत दबे हुए दिखाई दे रहे हों तो व्यक्ति कोई उपलब्धि हासिल नहीं कर पाता है। ये लोग किसी भी काम में उत्सुकता नहीं दिखाते हैं।
  • यदि किसी व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा के पास धन यानी जोड़ (+) का निशान हो तो जीवन में कष्ट प्राप्त होते हैं।
  • यदि मस्तिष्क रेखा बहुत ही छोटी है तो व्यक्ति मृत्यु समान कष्ट पाता है।
हस्तरेखा से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी :
  • यदि किसी व्यक्ति की हथेली में चक्र जैसा कोई निशान बना हुआ है तो वह काफी महत्वपूर्ण है। हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार हथेली में चक्र का निशान अंगूठे पर हो तो व्यक्ति बहुत भाग्यशाली माना जाता है। इस प्रकार के निशान वाले व्यक्ति धनवान होते हैं। अंगूठे पर चक्र का निशान होने पर व्यक्ति ऐश्वर्यवान, प्रभावशाली, दिमाग से संबंधित कार्य में योग्य होता है। ऐसे लोग बुद्धि का प्रयोग करते हुए काफी धन लाभ प्राप्त करते हैं। ये लोग पिता के सहयोगी होते हैं। घर-परिवार एवं समाज में इन्हें पूर्ण मान-सम्मान प्राप्त होता है।
  • यदि किसी व्यक्ति के दोनों हाथों में भाग्य रेखा मणिबंध से शुरू होकर सीधी शनि पर्वत तक जा रही हो, साथ में सूर्य रेखा भी पतली लम्बी, शुभ हो और मस्तिष्क रेखा, आयु रेखा भी अच्छी है तो उस हाथ में गजलक्ष्मी योग बनता हैं। ये योग अचानक धन लाभ दे सकता है।
  • यदि शनि पर्वत यानी रिंग फिंगर के नीचे वाला क्षेत्र और शुक्र पर्वत अधिक भरा हुआ हो, सुंदर हो और भाग्य रेखा शुक्र पर्वत यानी अंगूठे के पास वाले क्षेत्र से आरंभ होकर शनि क्षेत्र के मध्य तक पहुंचती है तो ऐसे लोगों के जीवन में कभी भी धन संबंधी कमी नहीं होती है। ये लोग काफी पैसा कमाते हैं।
  • यदि किसी व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा व चन्द्र रेखा मिलकर एक साथ शनि पर्वत पर पहुंचे तो ऐसे लोग भी धनवान रहते हैं। हथेली में अंगूठे के ठीक नीचे शुक्र पर्वत होता है और शुक्र पर्वत की दूसरी ओर हथेली के अंतिम भाग पर चंद्र पर्वत होता है। इस चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलती है तो उसे चंद्र रेखा कहा जाता है।
  • यदि भाग्य रेखा लिटिल फिंगर के नीचे के क्षेत्र से प्रारंभ होकर किसी भी रेखा से कटे बिना शनि पर्वत तक पहुंचती हो तो यह रेखा भी शुभ होती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति धन संबंधी कार्यों में विशेष लाभ प्राप्त करता है।
पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार हस्तरेखा विज्ञान में बताया गया है कि हथेली में स्वास्थ्य रेखा किसी भी स्थान से निकल सकती है लेकिन इसका अंत बुध पर्वत पर ही होता है। बुध पर्वत छोटी उंगली के ऊपरी भाग को कहा जाता है। यहां तक पहुंचने वाली रेखा स्वास्थ्य रेखा कहलाती है। यह रेखा जिनती साफ, स्पष्ट और सुंदर होती है स्वास्थ्य उतना ही उत्तम होता है।
  • जिस जातक की हथेली में स्वास्थ्य रेखा पीले रंग की होती है उन्हें गुप्त रोग या यौन रोग होने की संभावना रहती है।
  • जिस जातक की हथेली में हृदय रेखा और स्वास्थ्य रेखा बुध पर्वत के पास मिलती है उन्हें हार्ट अटैक होने की संभावना रहती है।
  • जिन जातक की हथेली में अगूठे के नीचे का भाग जिसे शुक्र पर्वत कहते हैं वह अधिक उठा हुआ हो और स्वास्थ्य रेखा लहरदार हो उन्हें प्रजनन संबंधी यानी यौन रोग की आशंका रहती है।
  • यदि अंगूठे के जोड़ पर आपके यव का चिन्ह है तो आप धनवान होंगे। यह चिन्ह पूर्वजन्म के अच्छे कर्मों से ही किसी व्यक्ति की हथेली में आते हैं। जिन व्यक्तियों की हथेली में यह चिन्ह होता है वह गरीबी में पैदा होकर भी अमीर बनता है। कमल का पुष्प देवी लक्ष्मी का आसान है। जिनकी हथेली में कमल पुष्प का निशान होता है उन पर लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। ऐसे व्यक्ति लखपति करोड़पति होते हैं।
  • जिन जातक की हथेली में सूर्य पर्वत पर त्रिभुज का चिन्ह होता है वह सरकारी क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करते हैं। यह धनवान और प्रभावशाली व्यक्ति होते हैं।
अमीर लोगों को देखकर अगर आपके मन में टीस उठती है कि काश आप भी अमीर होते। आपके पास भी बड़ा सा बंगला, गाड़ी होती है तो निराशा और ख्यालों के भंवर से निकलिए। देखिए अपनी हथेली और जानिए कि आपकी किस्मत में करोड़पति बनना लिखा है या नहीं। यहां हम आपको हथेली में मौजूद कुछ ऐसे चिन्हों के बारे में बता रहे हैं जो लखपति और करोड़पति लोगों की हथेली में पाए जाते हैं।
  • हथेली में अनामिका उंगली के ठीक ऊपर सूर्य पर्वत स्थित होता है। यहां तक आने वाली रेखा सूर्य रेखा कहलाती है जिनकी हथेली में इस रेखा के ऊपर स्टार यानी सितारे का चिन्ह होता है वह धनवान होने के साथ ही सम्मानित और मशहूर होते हैं।
  • यदि मध्यमा ऊंगली के ऊपर शनि का स्थान होता है। इस स्थान तक पहुंचने वाली रेखा भाग्य रेखा कहलाती है। जिनकी हथेली में भाग्य रेखा पर त्रिशूल का निशान बना होता है वह बड़े ही भाग्यशाली होते हैं। किस्मत इन्हें लखपति, करोड़पति बनने में पूरी मदद करती है।
  • अंग्रेजी में धन को मनी कहा जाता है। मनी अंग्रेजी में M से शुरू होता है। जिनकी हथेली में मनी का पहला लेटर यानी M चिन्ह बना होता है वह भी आर्थिक मामलों में भाग्यशाली होते हैं।
  • यदि आपकी हथेली में भाग्य रेखा से निकलकर कोई रेखा सूर्य पर्वत तक आ रही है या सूर्य रेखा का स्पर्श कर रही है तो यह शुभ चिन्ह है, आप बनेंगे करोड़पति। दुनिया भर में फैलेगी आपकी ख्याति।
  • हथेली के अंत में देखिए, अगर आपको वहां मछली का चिन्ह नजर आ रहा है तो यह आपके लिए बहुत ही शुभ चिन्ह है। यह संकेत है कि आप धार्मिक व्यक्ति होंगे। ईश्वर की सहायता और पूर्वजन्म के कर्मों से धनवान बनेंगे।
पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि सूर्य रेखा के बारे में पहले भी बात कर चुके हैं कि यह अनामिका उंगली के ऊपर होता है। जिनकी हथेली में सूर्य रेखा पर त्रिशूल का चिन्ह मौजूद होता है वह जीवन में अपने प्रयास से ख्याति और खूब धन अर्जित करते हैं।

हस्तरेखा से जाने दांपत्य जीवन में आपसी तालमेल और प्रेमी की कमी..

विवाह रेखा हथेली में सबसे छोटी उंगली के पास होती है। जिनकी हथेली में यह रेखा हृदय रेखा की ओर बढ़ा हुआ होता है और आगे जाकर इस रेखा से दो तीन रेखाएं निकल रही होती है तो यह वैवाहिक जीवन के लिए सुखद नहीं होता है।
जिनकी हथेली में ऐसी रेखाएं होती है उन्हें वैवाहिक जीवन का सुख नहीं मिल पाता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति के दांपत्य जीवन में आपसी तालमेल और प्रेमी की कमी रहती है।तब नही रहता पति पत्नी का साथ जीवन भर…
  • समुद्रशास्त्र के अनुसार जिनकी हथेली में विवाह रेखा हृदय रेखा की ओर बहुत अधिक झुकी होती है उनका दांपत्य जीवन बहुत ही कष्टकारी होता है।
  • माना जाता है कि ऐसी विवाह रेखा लड़की की हथेली में होने पर पत्नी को पति का वियोग सहना पड़ता है। अगर लड़के की हथेली में ऐसी रेखा हो तो उन्हें जीवन भर पत्नी का साथ नहीं मिल पाता है। तब आजीवन कुंवारा रहना पड़ता है
  • विवाह रेखा अगर बढ़कर छोटी उंगली के तीसरे या दूसरे पोर तक पहुंच जाती है तो यह वैवाहिक जीवन के लिए बड़ा ही अशुभ माना जाता है।
  • पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते है कि इस तरह की विवाह रेखा बहुत कम लोगों की हथेली में पायी जाती है। लेकिन जिनकी हथेली में ऐसी विवाह रेखा होती है उन्हें आजीवन कुंवारा रहना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति में विवाह की इच्छा नहीं रहती है। अगर विवाह की इच्छा करें भी तो किसी न किसी कारण से विवाह का संयोग नहीं बन पाता है।
  • हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार जिनकी हथेली में विवाह रेखा बीच में टूटी होती है उनका वैवाहिक जीवन लंबे समय तक नहीं चल पाता है।
  • ऐसी विवाह रेखा होने पर तलाक या जीवनसाथी की मृत्यु तक की संभावना रहती है। विवाह रेखा पर क्रास का चिन्ह होना भी कष्टकारी होता है।
पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार ऐसी स्थिति में वैवाहिक जीवन का अंत बहुत ही दुखदायी होता है। अगर विवाह रेखा के साथ एक अन्य रेखा चल रही हो तब जीवनसाथी के अलावा भी व्यक्ति का अन्य किसी से संबंध होता है।

समझें हस्तरेखा में चन्द्र रेखा के प्रभाव और परिणाम…

पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि हथेलियों में बुध पर्वत के नीचे चन्द्रमा का पर्वत होता है। यह हथेली के जड़ को स्पर्श करता है। इस पर्वत से व्यक्ति के मन और आर्थिक स्थिति को जान सकते हैं। इस पर्वत से आकस्मिक दुर्घटनाओं को भी जान सकते हैं। यह पर्वत व्यक्ति के स्वभाव और सोच को भी बताता है।चंद्र पर्वत की शुभ स्थिति में व्यक्ति लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
जब चंद्र क्षेत्र अथवा चंद्र पर्वत से निकलकर कोई निर्दोष और स्पष्ट रेखा यदि बुध क्षेत्र अथवा पर्वत की ओर पहुंचती हो तो जातक निश्चयपूर्वक अपने जीवनकाल में विदेश यात्रा अथवा यात्राएं करता है।
पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली का चंद्र पर्वत धन-संपत्ति के योग को भी दर्शाता है। हथेली का चंद्र पर्वत हथेली के चंद्र पर्वत से ऊपर उठकर कोई रेखा सूर्य पर्वत तक पहुंच जाए तो व्यक्ति को धन लाभ के प्रबल योग बनते हैं। साथ ही व्यक्ति को विदेश यात्रा के दौरान धन लाभ के भरपूर अवसर मिलते हैं। इसके अलावा व्यक्ति को मान-सम्मान भी अत्यधिक मिलता है।
हस्तरेखा में ग्रहों के पर्वत, उनके उभार, विभिन्न रेखाओं पर मौजूद त्रिकोण, क्रॉस, बिंदु, चतुर्भुज, नक्षत्र या अन्य चिन्ह देखकर भविष्य कथन किया जाता है। जैसे व्यक्ति आमतौर पर जीवन में तरक्की, धन की स्थिति, नौकरी में प्रमोशन, विवाह, संतान सुख, स्वास्थ्य जैसी बातें सहज जिज्ञासावश पूछता है। हाथ देखकर इन सब बातों का सटीक समय बताना संभव है।
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार यदि  पर्वत के मूल में कोई रेखा जीवन रेखा की ओर से आकर मिलती है।हथेली की पूर्ण विकसित चंद्र पर्वत व्यक्ति को कला प्रेमी बनाता है। हथेली की ऐसी चंद्र पर्वत वाले लोग संगीतकार, कलाकार और प्रख्यात् लेखक बनते हैं।

चन्द्रमा के पर्वत को कैसे जानें?

– अगर चन्द्रमा का पर्वत उभार लिए हुए है तो उत्तम है
– ऐसे लोगों का मन मजबूत होता है
– सोचे हुए कार्य को करने की ताक़त इनके अंदर होती है
– अगर चन्द्रमा का पर्वत ज्यादा उभार लिए हुए है तो व्यक्ति कल्पनाशील होता है
– इनकी ज्यादातर योजनाएं धरी रह जाती हैं, क्रियान्वित नहीं हो पाती
– इस पर्वत का दबा होना मन को कमजोर करता है
– व्यक्ति मलिन और उदास रहता है
– ज्यादातर नकारात्मक विचारों से घिरा रहता है
चंद्र से शुरू होकर शुक्र के निचले हिस्से से संपर्क साधती हुई इस रेखा को विष रेखा कहा जाता है। जातक को पेट के नीचे के अंगों संबंधित बीमारियों की संभावना है जैसे किड़नी, प्रोस्टेट, यूरेटर व जन्मांगो संबंधित अंग। जीवन रेखा पर जहां तिल है, उस आयु पर जातक को सावधान रहने की आवश्यकता है। यह रेखा कुछ हद्द तक जातक में पूर्वाभास या पराविज्ञान संबंधी योज्ञता अथवा रूचि भी देती है। चन्द्र पर्वत से शुरू हुई यह रेखा विदेश से धन प्राप्ति के साथ साथ जातक की मानसिक स्थिति को भी दर्शाती हैं। मनोबल उत्तम ।विदेश यात्रा भी सम्भव। मेरे निजी अनुभवों के आधार पर जिनके हाथों में यह रेखा रहती है उन्हें अपने आवेश, भावुकता पर नियंत्रण करना चाहिए ।
इसके अतिरिक्त पेट-पेशाब, अंडकोष एवं फेफड़ों पर ध्यान देना चाहिए।
इसे विष रेखा तो कुछ एलर्जी लाइन भी कहते है । खैर इस हाथ मे बड़ी समस्या शुक्र का अधिक बहुत अधिक उठा होना है जो दोष है साथ ही मंगल भी। मेरे हिसाब से मंगल की दृष्टि युति है जिससे खान पान पर काबू नही होने से यह लाइन बन गयी है।
मोती धारण लाभदायक।
आत्मबल बढ़ाइए और हर विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और आत्मविश्वास से आगे बढ़ने से सर्वोत्तम भाग्योदय होता है ।

चन्द्रमा के पर्वत के चिन्ह क्या बताते हैं?

– चंद्र पर्वत पर बहुत सारी रेखाएं व्यक्ति को चिंतित रखती हैं
– हालांकि इससे व्यक्ति की रचनात्मक क्षमता भी पता चलती है
– चंद्र पर्वत पर क्रॉस हो तो व्यक्ति को जल से भय होता है
– इस पर्वत पर तिल हो तो व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर होता है
– इस पर्वत पर ज्यादा क्रॉस हों या कालापन हो तो मानसिक बीमारी होती है
– इस पर्वत पर वर्ग होने से व्यक्ति हर तरह के अनिष्ट से बच जाता है

अगर हाथ में चन्द्रमा ख़राब हो तो क्या उपाय करें?

– पूर्णिमा का उपवास जरूर रखें।।
– शिव जी की अधिक से अधिक उपासना करें।।
– चांदी के पात्र से जल पीएं।।
– रात्रि में देर तक न जगें।।
– भोजन में दूध वाली चीज़ों का प्रयोग बढ़ा दें।।
– अपनी माता का अधिक से अधिक सम्मान करें।।

हस्तरेखा से जानिए धन सम्पत्ति योग….

कुछ लोग अपना भाग्य जानने के लिए हाथों की रेखाएं भी देखते हैं, लेकिन हाथों में फैली कई रेखाओं के बीच उन्हें पता नहीं चल पाता कि आखिर उन्हें धन लाभ होगा या नहीं।
किसी भी धनी जातक की हथेली में धन रेखा, जीवन रेखा की तरह हर व्यक्ति की हथेली में एक स्‍थान से शुरू नहीं होती है। व्यक्ति की हथेली में धन की रेखा अलग-अलग स्‍थानों से और अलग-अलग  रेखाओं और पर्वतों से म‌िलकर बनी होती है।
भाग्य और हृदय रेखा को काटने  वाली रेखा को भी धन रेखा माना जाता है। इसके अलावा आपके हाथ में छोटी-छोटी  रेखाओं में भी धन प्राप्ति की संभावनाएं छुपी होती है।
पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि यदि गौर से हस्तरेखा को समझा जाए तो बिना ज्योतिषि को दिखाए आप जान सकते हैं कि आपके हाथ में धन योग है या नहीं। साथ ही किस उम्र में धन लाभ की संंभावनाएं

कौन सा हाथ को देखकर जानें धन रेखा

बहुत से लोग यह मानते हैं कि‌ पुरुषों का दायां हाथ देखना चाहि‌ए और लड़कियों की बायां, लेकिन आप ऐसा न करें। पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार हस्त परीक्षण में उस हथेली को देखना चाहिए जो जातक का कर्म हाथ है  यानी अगर आप दाएं हाथ से जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों को करते हैं तो दाईं हथेली और बाएं हाथ से काम करते हैं तो बाईं हथेली देखिए। यह बात स्त्री पुरूष दोनों के लिए समान रूप से लागू होती है।
👉🏻👉🏻अगर आपकी हथेली में जीवन रेखा, भाग्य रेखा और मस्ति‌ष्क रेखा से मि‌लकर एम आकृति बन रही है, तो यह संकेत है कि‌ आप 35 से 55 साल के बीच खूब धन कमाएंगे। इस रेखा का मतलब यह भी होता है कि आपके जीवन में धन का आगमन विवाह के बाद तेजी से होगा। वि‌वाह के बाद ही आप नौकरी या व्यवसाय में उन्नति‌ की ओर बढऩा शुरू करेंगे।
👉🏻👉🏻अंगूठे के पास से नि‌कलकर रेखा बुध पर्वत यानी छोटी उंगली की जड़ तक पहुंचे तो इसका मतलब है कि‌ आप अपने परिवार के सदस्यों की पैतृक संंपत्ति कि‌सी स्‍त्री के सहयोग से प्राप्त कर सकते हैं। इसक अर्थ ये है कि आप 20-25 वर्ष की उम्र में अमीर बन सकते हैं।
👉🏻👉🏻आपकी हथेली में भाग्य रेखा से नि‌कलकर एक रेखा सूर्य पर्वत पर पहुंच रही है तो आप आर्थि‌क मामलों में भाग्यशाली होंगे। आप सामाज‌िक क्षेत्र में प्रत‌िष्ठ‌ित भी होंगे। साथ ही किसी भी उम्र में धन आगमन की संभावनाएं खुली रहेगी।
✍🏻✍🏻🌹🌹👉🏻👉🏻
किसी जातक की धन सम्पत्ति के लिए हाथ की रेखाएं भी इशारा करती हैं।
जैसे —
–जब जातक का हाथ भारी, गुदगुदा, अंगुलियां सीधी, जीवन रेखा गोल, भाग्य रेखा मोटी से पतली या इसका अंत सीधे शनि ग्रह पर हो और हाथ में सभी ग्रह उन्नत हों तो यह धनपति योग या करोड़पति व्यक्ति का हाथ कहलाता है किन्तु  कई बार ऐसा देखा गया है ऐसा योग होने पर भी लक्ष्मी रूठ जाती है। इसके लिए दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश का पूजन विधिवत करने से मनुष्य को इस योग (धनपति) का फल मिलने लगता है।
– जीवन रेखा के साथ पूरी मंगल रेखा, भाग्य रेखाओं की संख्या एक से अधिक, अंगूठा पीछे की तरफ, गुरु ग्रह, शनि ग्रह, बुध ग्रह या अन्य ग्रहों का प्रबल होना, हाथ मुलायम होने से भी धनपति योग बनता है। इस फल में और अधिक बरकत लाने के लिए नित्य लक्ष्मी मंत्र का हवन और गायत्री मंत्र का पाठ करना चाहिये।
👉🏻👉🏻👉🏻सूर्य पर्वत का स्‍थान उठा हुआ हो और सूर्य रेखा हथेली के मध्य में आकर शुक्र की ओर मुड़ रही है तो आप राजराजेश्वर योग वाले व्यक्त‌ि हैं। आपका जीवन सुख-संपत्त‌ि और धन-धान्य से पूर्ण होगा।
– मस्तिष्क रेखा जितनी ही निर्दोष और सीधी होती है, व्यक्ति उतना ही स्वतंत्र मस्तिष्क का होता है तथा जीवन बिना किसी संकट के आगे बढ़ता है। ऐसे व्यक्ति धनवान होते हैं। यदि इस लक्षण के साथ शुक्र ग्रह उठा हुआ हो, तो कार्य में बाधाएं बहुत अधिक आती हैं। धनपति योग को भी पूरी तरह से सफल करने में रुकावट आती है। इसकी शांति के लिए यंत्र स्थापना विधिवत करवानी चाहिए।
👉🏻👉🏻👉🏻हथेली में तराजू का च‌िन्ह श्रीमहालक्ष्मी योग कहलाता है। ऐसे व्यक्त‌ि आर्थ‌िक रूप से समृद्ध‌ होने के साथ ही प्रस‌िद्ध और धार्म‌िक व‌िचारों वाले होते हैं। इनमें न्याय की भावना होती है। ऐसे व्यक्त‌ि व्यवसाय में बहुत ही सफल होते हैं।
– भाग्य रेखा का जीवन रेखा से दूर होना बहुत ही उत्तम लक्षण माना जाता है। ये व्यक्ति सदैव कार्य करने वाले होते हैं। इनका रहन-सहन बड़े व्यक्तियों जैसा होता है और खर्चे भी इसी के अनुरूप होते हैं। यह एक धनपति योग का लक्षण माना जाता है। किंतु कई बार देखा जाता है कि भाग्य रेखा हृदय रेखा या मस्तिष्क रेखा पर रुक जाने से धनपति योग में बहुत रुकावट आती है। इस दोष को दूर करने के लिए कुबेर पूजन करवाना चाहिए जिससे व्यक्ति के धनवान बनने के बीच की रुकावटें दूर हों।
👉🏻👉🏻👉🏻जब हथेली में भाग्य रेखा साफ और स्पष्ट रूप से आकर सूर्य पर्वत पर आकर ठहरती है तो इसे भाग्य योग और भाग्य लक्ष्‍मी योग कहते हैं। ऐसे व्यक्त‌ि बचपन से ही धन और वैभव में जीवन बीताते हैं।
– भारी हाथ होने पर रेखाएं जितनी ही पतली, सुडौल और दोषरहित होती हैं, व्यक्ति सुखी, धनवान, स्वस्थ तथा गुणसंपन्न होते हैं। इनकी गिनती गिने चुने धनिको में होती है पर जीवन भर मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस दोष की मुक्ति विपासना साधना द्वारा संभव है।
👉🏻👉🏻👉🏻हथेली में भाग्यरेखा शन‌ि पर्वत से आगे बढ़कर मध्यमा के दूसरे पोर तक पहुंचती हैं वह भाग्योदय योग वाले व्यक्त‌ि होते हैं। ऐसे व्यक्त‌ि का भाग्योदय बचपन में ही हो जाता है और पूरा जीवन धन धान्य से भरपूर होता है।
– मुख्य भाग्य रेखा का अंत बृहस्पति ग्रह पर बहुत देखने को मिलता है। या तो यह भाग्य रेखा जीवन रेखा से निकल कर बृहस्पति पर जाती है या भाग्य रेखा ही शाखान्वित होकर बृहस्पति पर पहुंचती है। 2 रेखाएं जीवन रेखा से निकल कर गुरु पर जाएं तो व्यक्ति भाग्यशाली होता है और 22 वर्ष की आयु से ही धनी होना शुरू हो जाता है। यदि इस रेखा पर क्राॅस बन जाए तो यह धनवान बनने के योग को कम कर देता है। इसके लिए बृहस्पति पूजन, बृहस्पति यंत्र और बृहस्पति साधना करनी आवश्यक है।
– जीवन रेखा के अंत में कोई रेखा यदि चंद्र पर्वत की तरफ आती हो तो ऐसे व्यक्ति वृद्धावस्था में धनी होते हैं। इस योग का फल कुछ समय पहले भी मिल सकता है। यदि लक्ष्मी पूजन करें और 42 दिन तक लक्ष्मी मंत्र का जाप करें तो धन आयु सीमा से पहले ही आने लगता है।
– हाथ में जीवन रेखा के साथ एक दूसरी समानांतर जीवन रेखा भी देखने में आती है। कई बार यह रेखा पूरी जीवन रेखा के साथ चलती है। यह दोहरी जीवन रेखा कहलाती है। दोहरी जीवन रेखा निर्दोष होने पर व्यक्ति को जीवन में सुख-शांति, धन और प्रतिष्ठा देती है।

हर किसी के हाथ में होती है अलग-अलग धन रेखा–

👉🏻👉🏻यदि किसी जातक की हथेली में गुरु, चन्द्रमा, शुक्र और बुध पर्वत उन्नत एवं लाल‌िमा ल‌िए हो तो आप राजलक्ष्मी योग वाले व्यक्त‌ि हैं। अपने नाम के अनुसार यह योग व्यक्त‌ि को राजा के समान सुख और वैभव द‌िलाता है।
👉🏻👉🏻अगर आपकी हथेली में मण‌िबंध यानी हथेली के अंत‌िम स‌िरे शुरु होकर कोई रेखा सीधे शन‌ि पर्वत तक पहुंचे साथ ही चन्द्र पर्वत से शुरु होकर एक रेखा सूर्य पर्वत यानी अनाम‌िका उंगली तक आए तो यह महालक्ष्मी योग बनाता है। ऐसी रेखा बहुत ही दुर्लभ होती है। ज‌िनकी हथेली में पायी जाती है वह धनवान और हर प्रकार के सुख-साधनों को पाने वाले होते हैं।
👉🏻👉🏻हथेली में धन रेखा जीवन रेखा की तरह हर व्यक्ति की हथेली में एक स्‍थान से शुरू नहीं होती है। व्यक्ति की हथेली में धन की रेखा अलग-अलग स्‍थानों से और अलग-अलग  रेखाओं और पर्वतों से म‌िलकर बनी होती है। भाग्य और हृदय रेखा को काटने  वाली रेखा को भी धन रेखा माना जाता है। इसके अलावा आपके हाथ में छोटी-छोटी  रेखाओं में भी धन प्राप्ति की संभावनाएं छुपी होती है।
👉🏻👉🏻यदि किसी जातक की हथेली में शन‌ि पर्वत यानी मध्यमा उंगली और बुध पर्वत यानी छोटी उंगली के पास एक वलय यानी र‌िंग बना हो। यह वलय एक रेखा से जुड़ा हो तो आपकी हथेली में लक्ष्मी योग बनता है। ऐसे व्यक्त‌ि चतुर और बोल-चाल की कला में न‌िपुण होते हैं। यह अपने व्यक्त‌ित्व से प्रशंसा और ख्यात‌ि पाते हैं। धन के मामले भी यह संपन्न होते हैं।
👉🏻👉🏻इस दशा में यदि हाथ का आकार चैड़ा, भारी और मांसल हो तो विपुल धन-संपत्ति प्राप्त होती है। व्यक्ति जीवन में असाधारण उन्नति करने वाला होता है।
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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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