चमोली में गुलदार के बढ़ते हमलों से आक्रोश, देरी से पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों ने रस्सी से बांधा

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नवीन समाचार, चमोली, 2 जनवरी 2026 (Villagers Tied Forest Team)। उत्तराखंड के चमोली जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों के लगातार बढ़ते हमलों ने लोगों के सब्र की सीमा तोड़ दी है। सिलंगा ग्राम पंचायत के उजिटिया गांव में गुलदार द्वारा मवेशियों को मार डाले जाने के बाद जब वन विभाग की टीम देरी से पहुंची तो आक्रोशित महिलाओं और ग्रामीणों ने वन कर्मियों को रस्सी से बांधकर करीब दो घंटे तक एक घर के आंगन में खड़ा रखा। यह घटना वन्यजीव संघर्ष, प्रशासनिक प्रतिक्रिया और ग्रामीण असुरक्षा के सवालों को एक बार फिर केंद्र में ले आई है।

वन्यजीव संघर्ष और ग्रामीणों का बढ़ता असंतोष-गुलदार के हमले की पृष्ठभूमि

(Villagers Tied Forest Team) यूपी में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए बनेगी रैपिड रिस्पांस टीम, ट्रेंड  कर्मी व डॉक्टर होंगे तैनात - Rapid response team to be formed to stop human  wildlife conflict ...जानकारी के अनुसार मंगलवार की रात उजिटिया गांव में गुलदार ने राजेंद्र सिंह मेहरा की गोशाला का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसकर गर्भवती गाय और उसके दो वर्ष के बछड़े को मार डाला। बुधवार सुबह जब राजेंद्र सिंह की पत्नी कस्तूरा देवी गोशाला में चारा देने पहुंचीं तो दोनों मवेशियों को मृत अवस्था में देखा। इस दृश्य से पूरे गांव में भय और आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि बीते कई दिनों से गुलदार गांव और आसपास के क्षेत्रों में लगातार मवेशियों को निशाना बना रहा है।

देरी से पहुंची वन विभाग की टीम

घटना की सूचना मिलने के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग को अवगत कराया, लेकिन विभागीय टीम सुबह करीब नौ बजे गांव पहुंची। इस देरी को लेकर महिलाएं और ग्रामीण भड़क गए। उनका कहना था कि लगातार हो रहे हमलों के बावजूद वन विभाग समय पर कार्रवाई नहीं कर रहा है, जिससे लोगों की आजीविका और सुरक्षा दोनों खतरे में हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने फारेस्टर सहित छह वन कर्मियों को रस्सी से बांधकर एक आंगन में खड़ा कर दिया और विभाग पर अनदेखी का आरोप लगाया।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका और प्रशासन की प्रतिक्रिया

ग्राम प्रधान दीपा देवी और क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र नेगी ने कहा कि अल्मोड़ा जनपद में हाल की घटनाओं के बाद तत्काल पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ लिया गया, जबकि उनके क्षेत्र में अनुमति और कार्रवाई में लगातार देरी हो रही है। दो घंटे बाद गांव पहुंचे जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि बुधवार शाम तक गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिला वनाधिकारी से वार्ता हो चुकी है और गुलदार के बढ़ते हमलों को देखते हुए उसके नरभक्षी होने की भी आशंका जताई जा रही है। आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने वन कर्मियों को छोड़ा।

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पांच दिनों में छह मवेशियों पर हमले

ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में गुलदार का आतंक लगातार बना हुआ है। बीते शनिवार को भंडारीखोड में कृष्णानंद थपलियाल की तीन गायों को गुलदार ने मार डाला था। रविवार को उजिटिया गांव में मोहन सिंह के पालतू कुत्ते पर हमला कर उसे घायल कर दिया गया। सोमवार को रंगचौणा में लीला देवी की गाय को भी गोशाला में मार दिया गया। इसके अलावा कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जनपद के पसारागांव, पुरानालोहबा और नवाण गांवों में भी पिछले सप्ताह गुलदार पांच गायों को अपना शिकार बना चुका है।

यह घटनाक्रम केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि पूरे पर्वतीय उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर पेश करता है। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या केवल आश्वासन से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी या वन्यजीव प्रबंधन के लिए ठोस और स्थायी नीति की आवश्यकता है।

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