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परम्परागत तौर पर कैसे मनाई जाती थी दिवाली ? कैसे मनाएं दीपावली कि घर में वास्तव में लक्ष्मी आयें, क्यों भगवान राम की जगह लक्ष्मी-गणेश की होती है पूजा ?

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      बिन पटाखे, कुमाऊं में ‘च्यूड़ा बग्वाल’ के रूप में मनाई जाती थी परंपरागत दीपावली -कुछ ही दशक पूर्व से हो रहा है पटाखों का प्रयोग -प्राचीन लोक कला ऐपण से होता है माता लक्ष्मी का स्वागत और डिगारा शैली में बनती हैं महालक्ष्मी नवीन जोशी, नैनीताल। वक्त के साथ हमारे परंपरागत त्योहार अपना स्वरूप बदलते […]

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आज उत्तराखंड की ऐतिहासिक रक्तहीन क्रांति के 100 वर्ष पूरे होने पर विशेष : कुमाऊं का ऋतु पर्व ही नहीं ऐतिहासिक व सांस्कृतिक लोक पर्व भी है घुघुतिया-उत्तरायणी

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       1921 में इसी त्योहार के दौरान बागेश्वर में हुई प्रदेश की अनूठी रक्तहीन क्रांति, कुली बेगार प्रथा से मिली थी निजात घुघुतिया के नाम से है पहचान, काले कौआ कह कर न्यौते जाते हैं कौए और परोसे जाते हैं पकवान नवीन जोशी, नैनीताल। दुनिया को रोशनी के साथ ऊष्मा और ऊर्जा के रूप में […]

साफ-सफाई का सन्देश देता ‘खतडु़वा’ आया, सर्दियां लाया

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       -विज्ञान व आधुनिक बौद्धिकता की कसौटी पर भी खरा उतरता है यह लोक पर्व, साफ-सफाई, पशुओं व परिवेश को बरसात के जल जनित रोगों के संक्रमण से मुक्त करने का भी देता है संदेश नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों, खासकर कुमाऊं अंचल में चौमांस-चार्तुमास यानी बरसात के बाद सर्दियों की शुरुआत एवं […]

कुमाऊं में परंपरागत तौर पर ‘जन्यो-पुन्यू’ के रूप में मनाया जाता है रक्षाबंधन

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       वैश्वीकरण के दौर में लोक पर्व भी अपना मूल स्वरूप खोकर अपने से अन्य बड़े त्योहार में स्वयं को विलीन करते जा रहे हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों का सबसे पवित्र त्यौहार माना जाने वाला ‘जन्यो पुन्यू’ यानी जनेऊ पूर्णिमा और देवीधूरा सहित कुछ स्थानों पर ‘रक्षा पून्यू’ के रूप में […]

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का लोकपर्व घी-त्यार, घृत संक्रांति, ओलगिया…

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       प्रकृति एवं पर्यावरण से प्रेम व उसके संरक्षण के साथ ही अभावों में भी हर मौके को उत्साहपूर्वक त्योहारों के साथ ऋतु व कृर्षि पर्वों के साथ मनाना देवभूमि उत्तराखंड की हमेशा से पहचान रही है। यही त्योहारधर्मिता उत्तराखंड के कमोबेश सही लोक पर्वों में दृष्टिगोचर होती है। यहां प्रचलित हिंदू विक्रमी संवत की […]

नवीन समाचार एक्सक्लूसिव: कालीचौड़ मंदिर के पास मिले प्राचीन शिलालेख

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       नवीन समाचार, नैनीताल, 6 अगस्त 2019। जनपद के गौलापार खेड़ा स्थित कालीचौड़ मंदिर में प्राचीन शिलालेख मिलने का खुलासा हुआ है। क्षेत्रवासी साहित्यकार दामोदर जोशी ‘देवांशु’ ने बताया कि कालीचौड़ मंदिर के पैदल मार्ग पर मंदिर से करीब 50 मीटर पहले मार्ग किनारे के एक पत्थर पर शिलालेख देखे गये हैं, जबकि क्षेत्र में […]

गौरा-महेश को बेटी-जवांई के रूप में विवाह-बंधन में बांधने का पर्व: सातूं-आठूं (गंवरा या गमरा)

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       गौरा से यहां की पर्वत पुत्रियों ने बेटी का रिश्ता बना लिया हैं, तो देवों के देव जगत्पिता महादेव का उनसे विवाह कराकर वह उनसे जवांई यानी दामाद का रिश्ता बना लेती हैं। यहां बकायदा वर्षाकालीन भाद्रपद मास में अमुक्ताभरण सप्तमी को सातूं, और दूर्बाष्टमी को आठूं का लोकपर्व मना कर (गंवरा या गमरा) […]

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