डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 2 मई 2022। अधिवक्ता डॉ. भूपाल भाकुनी ने मुख्यमंत्री द्वारा शीघ्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय शुरू करने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को प्राग फार्म किच्छा से इतर कहीं स्थापित करना उच्चतम न्यायालय तथा माननीय उच्च न्यायालय दोनों की अवमानना होगी। साथ ही याद दिलाया कि इस मामले में उच्चतम न्यायालय में आज भी विशेष अनुमति याचिका विचाराधीन है।

शुरू से नैनीताल में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए संघर्षरत डॉ. भाकुनी ने बताया कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय उत्तराखंड को उच्च न्यायालय के नजदीक तहसील किच्छा के निकट प्राग फॉर्म में स्थापित करने का आदेश जारी किया था, तथा इसके लिए सरकार द्वारा जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर के माध्यम से 25 एकड़ भूमि प्राग फॉर्म में आवंटित की गई थी जो आज भी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय उत्तराखंड के नाम पर दर्ज है।
किंतु तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने निजी स्वार्थों के तहत इसे अपने विधानसभा क्षेत्र डोईवाला स्थित रानी धारा में स्थापित करने का प्रयास किया। इस पर उन्होंने 2018 में उच्च न्यायालय में दो अवमानना याचिका दायर कीं। इसे 6 जनवरी 2022 को उच्च न्यायालय ने इस स्वतंत्रता के साथ निस्तारित कर दिया कि यदि याचिकाकर्ता चाहे तो कभी भी अवमानना याचिका पुनः दाखिल कर सकता है।
इस बीच न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते हुए 3 मार्च 2019 को गुपचुप तरीके से रानीधारा डोईवाला में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का उद्घाटन भी कर दिया। उन्होंने बताया कि इस मामले में उच्चतम न्यायालय में आज भी इस बारे में एक विशेष अनुमति याचिका विचाराधीन है। इस प्रकार यदि सरकार इसे कहीं और स्थापित करने का प्रयास करती है तो यह उच्च एवं उच्चतम न्यायालय यानी दोनों की अवमानना होगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
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-नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी प्राग फार्म किच्छा से रानीपोखरी डोईवाला खोलने के प्रयास के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका
नवीन समाचार, नैनीताल, 14 सितंबर 2019। मूल रूप से भवाली नैनीताल के लिए स्वीकृत राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को पहले प्राग फार्म किच्छा के बाद अब प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा अपनी विधानसभा में खोलने की घोषणा कर दी गयी। अब यह मामला इसी बिंदु पर विरोध जताते हुए सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया है। इस मामले में उत्तराखंड सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में की गई ‘पिटिसन फॉर स्पेसल लीव टू अपील संख्या 12359-12362 ऑफ 2019 उत्तराखंड सरकार बनाम डॉक्टर भूपाल सिंह भाकुनी’ में पैरवी करते हुवे डॉ. भाकुनी ने बताया कि अवमानना याचिका में अब राज्य के मुख्यमंत्री को भी व्यक्तिगत पार्टी बनाये जाने की याचना की जा रही है ।
डा. भाकुनी ने बताया कि पूर्व में भवाली, नैनीताल के लिए स्वीकृत राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को नैनीताल के तत्कालीन डीएम द्वारा जरूरी भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई। इस कारण उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 19 जून 2018 को ऊधम सिंह नगर जनपद के डीएम को प्राग फार्म में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय खोलने हेतु 25 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने के आदेश दिए। डीएम ऊधमसिंह नगर ने इस पर उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखंड को मुख्य मार्ग से लगती हुई भूमि आवंटित कर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के नाम हस्तांतरित भी कर दी थी। यह भूति तहसील के राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज हो चुकी है। लेकिन इसी बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के द्वार गुपचुप तरीके से इस विवि को किच्छा के स्थान पर अपनी विधान सभा क्षेत्र डोइवाला के रानीपोखरी में खोलने की घोषणा करने के साथ ही 3 मार्च 2019 को गुपचुप तरीके से इसका उद्घाटन भी कर दिया गया। मुख्यमंत्री यहाँ भी नहीं रुके, बल्कि उन्होंने उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय में अपील करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन अपील के निर्णय का इंतेजार किए बिना ही 13 अगस्त 2019 को कैबिनेट की बैठक में इस विवि को रानीपोखरी में मात्र 10 एकड़ भूमि में खोलने सम्बंधी प्रस्ताव पारित करवा लिया जब कि इसे विधान सभा में रख कर प्रस्ताव पारित होना चाहिये था। डा. भाकुनी का कहना है कि सरकार का यह कदम उच्च न्यायालय के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की भी स्पष्ट अवहेलना है।
मुख्यमंत्री पर लगाया क्षेत्रवाद का आरोप

नैनीताल। याचिकाकर्ता डा. भाकुनी ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की ऊधम सिंह नगर में स्थापना किए जाने की बजाय उच्च न्यायालय उत्तराखंड के आदेशों की जानबूझ कर अवहेलना तथा सरकार की शक्ति का दुरुपयोग करने का आरोप मुख्यमंत्री रावत पर लगाते हुए ऐसे प्रयासों की कड़ी निंदा करते हुवे मुख्यमंत्री पर क्षेत्रवाद फैलाने का गम्भीर आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को केवल गढ़वाल का हीं नहीं कुमाऊँ का भी मुख्यमंत्री होने की याद दिलाते हुवे पूछा है कि आखिर वह कुमाऊँ मंडल की उपेक्षा क्यों करते रहते हैं ? कोई भी छोटा बड़ा शिक्षा संस्थान, उद्योग, विकास कार्य हो या कोई केंद्र की योजना हो सभी कुछ देहरादून या गढ़वाल मंडल में स्थापित क्यों करना चाहते हैं व भेदभाव करते हुवे कुमाऊँ की घोर उपेक्षा करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए मुख्यमंत्री के साथ ही यहाँ के नेता भी उतने ही जिम्मेदार है जो कि जनहित के मामलों में चुप्पी साधे रहते हैं। कहा कि अपवाद स्वरूप एक मात्र राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ही जनहित के कार्यों में दोनो मंडलों में संतुलन बना कर चलते हैं।
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नवीन समाचार, नैनीताल, 18 जनवरी, 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय खोलकर 16 अगस्त 2018 से कक्षाएं प्रारम्भ करने को लेकर आदेश पारित किये थे। इस आदेश का क्रियान्वयन नहीं होने पर मुख्य सचिव समेत अन्य पक्षकारों को अवमानना नोटिस जारी कर छह मार्च को व्यक्तिगत रूप से प्रगति रिपोर्ट के साथ पेश होने के आदेश पारित किए हैं।
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने किच्छा के खुरपिया व प्राग फार्म में सीलिंग से निकली 3600 एकड़ भूमि में से 25 एकड़ भूमि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को हस्तांतरित करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। छह माह बीत जाने के पश्चात भी सरकार द्वारा कोई कार्यवाही ना किये जाने से क्षुब्ध नैनीताल निवासी याचिकाकर्ता डॉ. भूपाल सिंह भाकुनी ने अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया कि सरकार की मंशा उत्तराखंड के युवाओं को रोजगार आधारित शिखा देने के बजाय बेशकीमती जमीन को बेचने की है। कहा कि राष्ट्रीय विधि विवि के खुलने से यहाँ के लोगों को न्यायिक क्षेत्र में रोजगार के साथ ही उच्च शिक्षा प्राप्त हो सकेगी ओर उत्तराखंड की एक अलग पहचान बनेगी। अवमानना याचिका में प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा, प्रमुख सचिव न्याय तथा डीएम ऊधमसिंह नगर को पक्षकार बनाया गया है।
पूर्व समाचार : आखिर अध्यादेश के आठ साल बाद जगी उत्तराखंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय बनने की उम्मींद
-2010 में हुआ था भवाली में स्थापित करने के लिये शासनादेश, 2015 में पहले तत्कालीन उच्च शिक्षा निदेशक अग्रवाल एवं फिर कुमाऊं विवि के तत्कालीन कुलपति प्रो. धामी को बनाया था प्रस्तावित विवि का ओएसडी
-गत दिवस केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने देहरादून में स्थापना करने की की थी घोषणा
नवीन जोशी, नैनीताल, , 19 जून 2018। आखिर अध्यादेश के आठ सालों के बाद उत्तराखंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय बनने की उम्मींद फिर से बन गयी है। अलबत्ता पूर्व में नैनीताल जिले के भवाली में प्रस्तावित और इधर गत दिवस केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा देहरादून में स्थापना करने की घोषणा वाला राष्ट्रीय महत्व का यह विश्वविद्यालय नैनीताल जिले के हाथ से खिसक गया है। इसका कारण नैनीताल के डीएम द्वारा प्रस्तावित विवि के लिए जरूरी भूमि उपलब्ध न करा पाना बताया जा रहा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह खंडपीठ ने ऊधमसिंह नगर जिले के प्राग व खुरपिया फार्म में इसे स्थापित कर बकायदा 16 अगस्त से कक्षाएं शुरू करने के आदेश दे दिये हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में 4 अक्टूबर 2015 को मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता डा. भूपाल सिंह भाकुनी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की संयुक्त खंडपीठ ने अपर शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा अजय अग्रवाल को भवाली में प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विवि का विशेष कार्याधिकारी नियुक्त कर दिया था, और बाद में कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी को यह दायित्व दे दिया गया था।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय विधि विवि का शासनादेश चार नवम्बर 2010 में जारी हा गया था। तभी से वरिष्ठ अधिवक्ता डा. भूपाल सिंह भाकुनी व वरिष्ठ अधिवक्ता तथा पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल भवाली में राष्ट्रीय विधि विवि की स्थापना के लिए प्रयासरत थे। 2014 तक इसकी स्थापना के लिए सरकार के स्तर पर कोई प्रयास नहीं होने पर उन्होंने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका डाली। डा. भाकुनी ने मंगलवार को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब इसकी स्थापना हो जाने का विश्वास जताते हुए बताया कि नैनीताल के डीएम के द्वारा आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं करायी गयी। इस पर उन्होंने नैनीताल जिले में पटवाडांगर, टीवी सैनिटोरियम भवाली, भवाली-भीमताल के बीच फरसौली, कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालीकोट, आर्मी कैंप नेपा फार्म मालधनचौड़ व एचएमटी रानीबाग तथा ऊधमसिंह नगर जिले में किच्छा के खुरपिया फार्म, प्राग फार्म में सीलिंग की निकली 1800 एकड़ भूमि के स्थानों के विकल्प उच्च न्यायालय को सुझाये थे। जिनमें से प्राग फार्म के विकल्प को स्वीकार कर लिया गया है।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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