‘आई लव मोहम्मद मार्च’ प्रकरण में आरोपित को सशर्त अग्रिम जमानत, जांच में सहयोग की शर्त

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नवीन समाचार, नैनीताल, 25 फरवरी 2026 (Anticipatory Bail for I Love Mohammed)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के ऊधमसिंह नगर (Udham Singh Nagar) जनपद के काशीपुर (Kashipur) क्षेत्र से जुड़े चर्चित ‘आई लव मोहम्मद मार्च’ (I Love Mohammad March) प्रकरण में नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court of Uttarakhand) ने एक आरोपित को सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। न्यायालय के इस आदेश को कानून व्यवस्था, अभिव्यक्ति और आपराधिक प्रक्रिया के संतुलन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है पूरा मामला

काशीपुर में जुलूस के दौरान बवाल, उपद्रवियों ने पुलिस पर किया पथराव, गाड़ी  का शीशा टूटान्यायमूर्ति आलोक मेहरा (Justice Alok Mehra) की एकलपीठ में आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। अभियोजन के अनुसार 21 सितंबर 2025 की रात बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के नदीम, हनीफ, दानिश सहित लगभग 400-500 अज्ञात व्यक्तियों ने मोहम्मद के समर्थन में मार्च निकाला था।

उत्तराखंड: काशीपुर में 'आई लव मोहम्मद' जुलूस के दौरान हिंसा भड़क उठीआरोप है कि मार्च में शामिल कुछ लोग लाठी-डंडों व अन्य हथियारों से लैस थे और इस दौरान सार्वजनिक शांति भंग हुई तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की विभिन्न धाराओं, आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम (Criminal Law Amendment Act) तथा सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण से संबंधित प्रावधानों के तहत अभियोग दर्ज किया गया था।

बचाव पक्ष और राज्य का पक्ष

आरोपित की ओर से अधिवक्ता ने न्यायालय में कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है और प्राथमिकी (FIR) में उसका नाम भी दर्ज नहीं है। दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया और प्रकरण की गंभीरता का उल्लेख किया गया।

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न्यायालय ने क्या कहा

एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों, आरोपों की प्रकृति तथा प्राथमिकी में नाम न होने जैसे तथ्यों पर विचार करते हुए अग्रिम जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी की स्थिति में आवेदक को व्यक्तिगत मुचलका और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाएगा।

साथ ही न्यायालय ने सख्त शर्त लगाई कि आवेदक को जांच अधिकारी के समक्ष जब भी बुलाया जाए, उपस्थित होना होगा और जांच में पूर्ण सहयोग देना होगा।

क्यों महत्वपूर्ण है निर्णय

यह आदेश दर्शाता है कि न्यायालय जमानत मामलों में आरोपों की प्रकृति, साक्ष्यों की स्थिति और आरोपित (Accused) की भूमिका का संतुलित परीक्षण करता है। साथ ही यह भी संकेत है कि बिना अनुमति जुलूस और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में जांच जारी रहेगी, लेकिन प्रक्रिया के दौरान विधिक अधिकारों की भी रक्षा की जाएगी। मामले की आगे की विवेचना संबंधित पुलिस द्वारा जारी है।

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