(Treatment in Animal Attacks)
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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जनवरी 2026 (Nainital-Woman Killed-Leopard)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद अंतर्गत धारी विकासखंड (Dhari Block) के खटियाखाल (Khatiyakhal) गांव से मानव–वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई है। रविवार दोपहर घर के पास घास काट रही 35 वर्षीय गंगा देवी (Ganga Devi) पर गुलदार (Leopard) ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।

यह घटना केवल एक परिवार का दुःख नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी है, क्योंकि पहाड़ी इलाकों में 15 दिन के भीतर गुलदार के हमलों में यह तीसरी महिला की मृत्यु बताई जा रही है। लगातार बढ़ती घटनाओं से ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना गहरी हुई है और वन विभाग (Forest Department) व प्रशासन (Administration) से ठोस सुरक्षा कदमों की मांग तेज हो गई है।

घर के पास घास काटते समय हमला, दो किलोमीटर तक जंगल की ओर घसीटा

(Nainital-Woman Killed-Leopard) प्राप्त जानकारी के अनुसार गंगा देवी, पत्नी जीवन चन्द्र (Jeevan Chandra) अपने घर के पास घास काट रही थीं। इसी दौरान घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया। बताया गया कि गुलदार महिला को पकड़कर लगभग दो किलोमीटर तक घसीटते हुए जंगल की ओर ले गया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और खोज एवं बचाव अभियान (Search and Rescue Operation) चलाया गया। इसके बाद जंगल क्षेत्र से महिला का शव बरामद किया गया।

घटना की प्रकृति ने ग्रामीणों को भीतर तक हिला दिया है। पहाड़ के जिन रास्तों और खेत–घास के इलाकों को लोग दैनिक जीवन का हिस्सा मानते हैं, वहां यदि इस तरह की असुरक्षा बन जाए तो सामान्य जीवन कैसे चलेगा—यह सवाल अब हर घर में उठ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप, लगातार दिख रहा था गुलदार फिर भी कार्रवाई नहीं हुई

घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश देखने को मिला। लोगों ने कहा कि क्षेत्र में गुलदार लगातार दिखाई दे रहा था, लेकिन वन विभाग द्वारा समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन के विरुद्ध नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि सक्रियता के संकेत पहले से होने के बावजूद सुरक्षा इंतजाम कमजोर रहे। ग्रामीणों की मांग है कि क्षेत्र में सक्रिय गुलदार, जिसे वे आतंकी गुलदार कह रहे हैं, को जल्द से जल्द पकड़कर इलाके को सुरक्षित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

प्रशासन की प्रतिक्रिया, एसडीएम घटनास्थल के लिए रवाना

धारी के उप जिलाधिकारी अंशुल भट्ट (Sub Divisional Magistrate – Anshul Bhatt) ने बताया कि उन्हें महिला की गुलदार के हमले में मृत्यु की सूचना मिली है और वह घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। प्रशासन ने मृतक महिला के परिजनों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है। वहीं वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कानून-व्यवस्था की तरह ही “पर्यावरण–सुरक्षा व्यवस्था” का प्रश्न बनता जा रहा है। वन्यजीवों का संरक्षण आवश्यक है, लेकिन मानव जीवन की सुरक्षा भी उतनी ही प्राथमिकता है। ऐसे में संतुलन बनाना प्रशासन और नीति दोनों के लिए बड़ी चुनौती है।

15 दिनों में तीसरी घटना, पहले भी हो चुकी हैं मौतें

स्थानीय जानकारी के अनुसार, नैनीताल जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में 15 दिनों के भीतर गुलदार के हमलों में यह तीसरी घटना है। इससे पहले 26 दिसंबर 2025 को धारी क्षेत्र के दीनी तल्ली (Deeni Talli) में हेमा बरगली (Hema Bargali) की गुलदार के हमले में मृत्यु हुई थी। इसके बाद 30 दिसंबर 2025 को खन्स्यू (Khansyu) क्षेत्र के चमोली गांव (Chamoli Village) में चारा और लकड़ी लेने गई एक महिला पर गुलदार ने हमला कर दिया था, जिसमें उनकी मृत्यु हुई।

वन विभाग ने यह भी बताया था कि पिछले दिनों पहाड़पानी (Paharpani) क्षेत्र में पिंजरा लगाकर एक गुलदार को बचाव (Rescue) कर पकड़ा गया था, फिर भी धारी, भीमताल (Bhimtal) और ओखलकांडा (Okhalkanda) विकासखंडों के कई गांवों में गुलदार और बाघ (Tiger) की दहशत बनी हुई है। यही कारण है कि ग्रामीण अब अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी सुरक्षा रणनीति की मांग कर रहे हैं।

आगे क्या, सुरक्षा रणनीति और नीति की जरूरत

मानव–वन्यजीव संघर्ष अब केवल वन विभाग का विषय नहीं रह गया है। यह ग्रामीण आजीविका, महिला सुरक्षा, बच्चों की दैनिक गतिविधियां, खेती–पशुपालन और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था तक को प्रभावित कर रहा है। ऐसे मामलों में कई कदम जरूरी होते हैं—जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, नियमित गश्त, रात के समय निगरानी, सामुदायिक सतर्कता दल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षित मार्ग, त्वरित बचाव दल और समयबद्ध मुआवजा प्रक्रिया। साथ ही यह भी आवश्यक है कि वन विभाग द्वारा पिंजरे, कैमरा (Camera Trap) और वैज्ञानिक निगरानी जैसे उपाय तेजी से बढ़ाए जाएं।

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गांवों में सबसे बड़ा प्रश्न यही है—क्या महिलाएं अब घास काटने, खेत जाने या लकड़ी लेने भी भय के साथ जाएंगी। यदि स्थिति ऐसे ही बनी रही तो पहाड़ का दैनिक जीवन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित होंगे।

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By डॉ.नवीन जोशी

डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, 'कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन 'नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड' के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।

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