नवीन समाचार, देहरादून, 3 मार्च 2026 (Govt Deptt owe 104 Crore Electricity)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) से राज्य की विद्युत व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण समाचार है। राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों और कुछ निजी औद्योगिक इकाइयों पर 104.57 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया हो गया है। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (Uttarakhand Power Corporation Limited – UPCL) ने सख्त रुख अपनाते हुए बकाएदारों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी है। निगम ने निर्णय लिया है कि अब प्रत्येक माह बकाया राशि की अद्यतन सूची प्रकाशित की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। देखें 1 लाख से अधिक अवशेष वाले विभागों की पूरी सूची यहाँ क्लिक करके।
किन विभागों पर सबसे अधिक बकाया
2 मार्च 2026 तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जल संस्थान और सिंचाई विभाग पर सर्वाधिक बकाया दर्ज है। अल्मोड़ा (Almora) जनपद में जल संस्थान के एक ही खाते पर 10.34 करोड़ रुपये लंबित हैं, जो राज्य में सर्वाधिक बकाया खातों में शामिल है। टिहरी (Tehri) जनपद में पेयजल निगम पर 4.52 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी है।
हरिद्वार (Haridwar) जनपद के ज्वालापुर डिवीजन में एक गंगा परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर पर 4.49 करोड़ तथा एक अन्य परियोजना प्रबंधक पर 2.16 करोड़ रुपये का बकाया है। रुड़की (Roorkee) क्षेत्र में एक निजी औद्योगिक इकाई पर 3.75 करोड़ रुपये की देनदारी दर्ज की गई है। इसी तरह देहरादून में जलकल अभियंता के एक खाते पर 1.63 करोड़ रुपये से अधिक लंबित हैं, जबकि गंगा प्रदूषण नियंत्रण परियोजना पर भी एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि शेष है।
शिक्षा और सिंचाई क्षेत्र भी प्रभावित
चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में सोबन सिंह जीना मेडिकल कॉलेज (Soban Singh Jeena Medical College) अल्मोड़ा पर 14.64 लाख रुपये का बिल बकाया है। नैनीताल (Nainital) जनपद में नलकूप खंड पर 44.78 लाख रुपये शेष हैं। चंपावत (Champawat) में अधिशासी अभियंता नलकूप खंड के कई खातों पर लाखों रुपये लंबित हैं, जबकि बड़कोट (Barkot) में जल संस्थान पर 25.90 लाख रुपये का भुगतान शेष है।
क्यों गंभीर है स्थिति
विद्युत निगम के अनुसार बढ़ते बकाये से निगम पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। इससे बिजली आपूर्ति, रखरखाव, अवसंरचना उन्नयन और नई परियोजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो संबंधित विभागों की विद्युत आपूर्ति प्रभावित की जा सकती है।
आगे क्या
UPCL प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि भुगतान में लापरवाही बरतने वाले विभागों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निगम की अगली समीक्षा रिपोर्ट अप्रैल 2026 के प्रथम सप्ताह में जारी की जाएगी।
यह प्रकरण शासन-प्रशासन की वित्तीय अनुशासन प्रणाली, सार्वजनिक संसाधनों के प्रबंधन और उत्तरदायित्व पर महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है। क्या समय पर भुगतान सुनिश्चित कर राज्य की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकेगा, यह आने वाला समय बताएगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
