बड़ा समाचार: कोरोना महामारी के चलते उत्तराखंड के राष्ट्रीय स्मारक आम लोगों के लिये बंद

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रवींद्र देवलियाल @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 अप्रैल 2021। केन्द्र सरकार की ओर से कोरोना महामारी के प्रभावी रोकथाम के दृष्टिगत उत्तराखंड के समस्त राष्ट्रीय स्मारकों व पुरास्थलों को पर्यटकों व आम लोगों के लिये बंद कर दिया गया है। फिलहाल 15 मई तक इन पर रोक रहेगी।
Ravindra Devaliyalभारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से देहरादून मंडल को विगत 15 अप्रैल को इस आशय का एक पत्र जारी किया गया है। इसके बाद एएसआई के देहरादून मंडल की ओर से शुक्रवार 16 अप्रैल को उत्तराखंड के सभी उपमंडलों व जिलाधिकारियों को एक पत्र जारी कर सभी राष्ट्रीय स्मारकों को 15 मई बंद करने के निर्देश जारी किये गये हैं। पिथौरागढ़ जिला प्रशासन की ओर से एएसआई के इस आदेश का तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित कर दिया गया है। जिला प्रशासन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अनुसार राष्ट्रीय स्मारकों व स्थलों पर आगामी 15 मई अथवा अग्रिम आदेशों तक रोक रहेगी। इस अवधि में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण व चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी गाइड लाइन के तहत स्मारकों का रखरखाव, मरम्मत, सुरक्षा व अन्य दैनिक कार्य पूर्व की भांति संपादित किये जाते रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के दस जनपदों में राष्ट्रीय महत्व के 42 संरक्षित स्मारक व पुरास्थल मौजूद हैं। इनमें 30 मंदिर मौजूद हैं। बताया जाता है कि जिनमें से 24 में आज भी पूजा अर्चना होती है। इनमें से देहरादून व गोपेश्वर उपमंडलों में 6-6, अल्मोड़ा उपमंडल में सबसे अधिक 25, व काशीपुर उपमंडल में तीन मंदिर, किला, पुरास्थल, शैलाश्रय, जल संरचनायें, गुफायें आदि राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारक व पुरास्थल मौजूद हैं। इनमें शामिल हैं।

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-राज्य में स्थित प्राचीन स्मारकों व पुरातात्विक क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने व अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगाने के निर्देश
-इंटेक’ की सलाह से उत्तराखंड के स्मारकों को संरक्षित करने कें लिये छः माह के भीतर नियमावली बनाने को भी कहा
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Bhimeshwar Temple, Kashipur
balsundari mandir kashipur
Balsundari Mandir kashipur

नैनीताल, 7 सितंबर 2018। उत्तराखंड की कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने काशीपुर के पुरातात्विक महत्व के गौविषाण किले को दो माह के भीतर राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने तथा राज्य में स्थित प्राचीन स्मारकों व पुरातात्वि क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने व अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगाने के निर्देश दिए है।
साथ ही खंडपीठ ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के महानिदेशक को इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज यानी ‘इंटेक’ की सलाह से उत्तराखंड के स्मारकों को संरक्षित करने कें लिये छः माह के भीतर नियमावली बनाने को कहा है। खण्डपीठ ने यह भी निर्देश दिए है कि नियमावली को बनाने के बाद रास्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के समुख पेश करें।
मामले के अनुसार काशीपुर निवासी अनिल कुमार माहेश्वरी ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि काशीपुर स्थित राष्ट्रीय स्मारकों के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाने व इन स्मारकों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया को निर्देश दिया है कि वे काशीपुर स्थित द्रोण सागर, चैती मंदिर व भगवान मोटेश्वर महादेव मंदिर को अपनी देख रेख व नियंत्रण में लें साथ ही केंद्र सरकार को निर्देश दिए है कि वे काशीपुर स्थित गौविषाण किला परिसर को राष्ट्रीय धरोहर दो माह के भीतर घोषित करें

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