नवीन समाचार, नैनीताल, 5 फरवरी 2026 (HC gave Security to Couple)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जनपद से एक महत्वपूर्ण संवैधानिक और मानवीय अधिकारों से जुड़ा मामला सामने आया है। नैनीताल हाईकोर्ट (Nainital High Court) ने दो अलग-अलग धर्मों के बालिग प्रेमी जोड़े को जान-माल की सुरक्षा उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता, विवाह की स्वतंत्रता और कानून के तहत सुरक्षा के अधिकार को रेखांकित करता है।
हाईकोर्ट का आदेश: जान-माल की सुरक्षा अनिवार्य
नैनीताल हाईकोर्ट में दायर याचिका पर अवकाशकालीन न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह (Justice Siddarth Sah) की एकलपीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के बाद न्यायालय ने उधम सिंह नगर (Udham Singh Nagar) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और रुद्रपुर (Rudrapur) के थाना प्रभारी को निर्देश दिए कि प्रेमी जोड़े को तत्काल और प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों याचिकाकर्ताओं की जान-माल की रक्षा सुनिश्चित की जाए और किसी भी प्रकार की धमकी या उत्पीड़न को रोका जाए। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार (State Government) समेत अन्य विपक्षियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च 2026 की तिथि निर्धारित की गई है।
क्या है पूरा मामला
मामले में मुस्लिम समुदाय की युवती और सिख समुदाय के युवक ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में बताया गया कि दोनों एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हैं और अब विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के अंतर्गत विवाह करना चाहते हैं।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार युवती के परिजन इस विवाह के लिए सहमत नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें जान-माल का खतरा उत्पन्न हो गया है। दोनों बालिग हैं और अपने भविष्य को लेकर स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि सुरक्षा के लिए उन्होंने पूर्व में उधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा (SSP Manikant Mishra) को प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
राज्य सरकार का पक्ष
5 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया कि प्रेमी जोड़ा बालिग है और अलग-अलग धर्मों से होने के बावजूद विवाह करने की उनकी मंशा पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि कानून के दायरे में रहते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आदेश
यह आदेश न केवल अंतरधार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि यह संविधान प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समानता और गरिमा के अधिकार को भी मजबूती देता है। ऐसे मामलों में न्यायालय का हस्तक्षेप यह संदेश देता है कि कानून किसी भी नागरिक की पसंद और सुरक्षा के साथ खड़ा है।
आगे अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और अन्य विपक्षी अपने जवाब में क्या रुख अपनाते हैं और प्रशासन इस आदेश को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू करता है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।














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