EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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पर्यटन नगरी नैनीताल के निकटवर्ती पर्वतीय गांव देवीधूरा में हाथियों का झुंड देखा गया है। इससे स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने वन कर्मियों की मदद से शोर मचाकर व टिन पीटकर हाथियों के झंुड को गांव से दूर भगाया। यह भी पढ़ें : नाबालिग किशोरी को भगाने के प्रयासों से लोग हुए आक्रोशित, आक्रोश देख दूसरे समुदाय के 42 व्यापारी गायब !http://deepskyblue-swallow-958027.hostingersite.com/king-cobra/समुद्र सतह से करीब 1600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवीधूरा ग्राम निवासियों के अनुसार शनिवार रात्रि करीब 12 बजे फतेहपुर, धापला, जमीरा गांव की ओर से करीब एक दर्जन हाथियों का झुंड गांव में पहुंचा। इससे गांव में हड़कंप मच गया। रात्रि तीन बजे ग्रामीणों ने किसी तरह हाथियों के झुंड को गांव से भगाया, लेकिन सुबह करीब सात बजे यह झुंड वापस लौट आया। इस पर वनाधिकारियों को भी सूचना दी गई। इस पर वन कर्मी भी गांव में पहुंचे और हाथियों को भगाया। क्षेत्रीय वन क्षेत्राधिकारी भूपाल सिंह मेहता ने बताया कि दो बच्चे व 5 बड़े यानी सात हाथियों का झंुड देवीधूरा गांव में आया था। फिलहाल उन्हें गांव से जंगल की ओर भगा दिया गया है। अलबत्ता ग्रामीणों में अभी भी दहशत बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार झुंड अभी भी गांव के आसपास ही बना हुआ है। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड: कैबिनेट बैठक में लिए 7000 पदों पर भर्ती व दर्जनों नए पदों, नई तहसील आदि के 52 बड़े निर्णय उल्लेखनीय है कि करीब दो वर्ष पूर्व भी मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर ज्योलीकोट के निकट चोपड़ा गांव में और इससे पूर्व 15 जनवरी 2015 को निकटवर्ती बल्दियाखान क्षेत्र में समुद्र सतह से करीब 1850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बसगांव के बुड़ भूमिया मंदिर के पास हाथियों का झुंड देखा गया था। अलबत्ता इस बार पहली बार स्थानीय लोग हाथियों के झुंड का वीडियो बनाने में भी सफल रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों के मन में यह सवाल भी कौंध रहा है कि हाथी पहाड़ की ओर क्यों चढ़ रहे हैं। यह भी पढ़ें : अल्मोड़ा में बारात के लिए आए 16 साल के नाबालिग की नदी में डूबने से मौत, हल्द्वानी में युवक का शव मिलने से सनसनी अलबत्ता, प्रदेश के वन्य जीव प्रतिपालक डा. पराग मधुकर धकाते के अनुसार पूर्व में नैनीताल जनपद में ही, करीब इसी ऊंचाई वाले घटगढ़ और पटवाडांगर क्षेत्र में भी हाथियों को देखा गया था, जबकि इतिहास में, अंग्रेजी दौर में, करीब 1950 मीटर की ऊंचाई पर नैनीताल की नैनी झील में पानी पीने के लिए हाथियों के आने की बात एक पुस्तक में दर्ज होने की बात कही जाती है। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में 26 साल की शिक्षिका की संदिग्ध मौत, मौत से पहले दी जानकारी डा. धकाते के अनुसार हाथी अपने याददाश्त के लिए जाने जाते हैं। यदि बचपन में भी वे किसी मार्ग से गुजरे हों, तो वापस उन पारंपरिक मार्गों पर लौटते हैं। संभव है कि ये हाथी भी पहले कभी यहां आए हों। इस प्रकार वन विभाग के आला अधिकारी इसे पूर्व के संदर्भों व प्रमाणों के आधार पर इसे हाथियों का यहां पहली बार आना नहीं वरन अपने पुराने रास्तों पर वापस लौटना मान रहे हैं। यानी, कह सकते हैं कि हाथियों का झुंड नैनीताल को देखने अथवा पुरानी यादें ताजा करने की चाह में पहाड़ों पर चढ़ आया होगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : सांपों के बारे में भ्रम दूर किया, बताया-हर साँप नहीं होता जहरीला, उत्तराखंड में मात्र 10 प्रजातियां ही जहरीलीयह भी पढ़ें :यह भी पढ़ें : पहाड़ पर पहली बार वन विभाग ने रिपोर्ट किया अजगर, पहले निगल-फिर उगल गया सांभर को..यह भी पढ़ें : नैनीताल में मिला 5 फिट लंबा खतरनाक ब्राउन पिंकेट सांप..यह भी पढ़ें : शाबास ! जंगल में बुरी तरह से घायल मिले भालू का नैनीताल जू कर्मियों ने किया रेसक्यूयह भी पढ़ें : घर में घुसे 12 फिट लंबे किंग कोबरा ने दबोच दिया रेस्क्यू करने गये वन कर्मी का गला, और…यह भी पढ़ें : डोलमार में एनएच पर दिखा विशालकाय अजगर, कौतूहल का केंद्र बनायह भी पढ़ें : अब हिमालयन बॉटनिकल गार्डन में मिला ‘हिमालयन पिट वाइपर’यह भी पढ़ें : जंगल में पग चिन्ह देख सहमे पौधे लगाने गए सभासद व अन्यनैनीताल देखने की चाह में पहाड़ चढ़ आया हाथियों का झुंडरॉयल बंगाल टाइगर भी देखे जा चुके हैं नैनीताल मेंयह भी पढ़ें :जिम कार्बेट के घर नैनीताल में फिर दिखाई दिया ‘रॉयल बंगाल टाइगर’नैनीताल में किंग कोबरा के बाद दिखी सतरंगी इंडियन पिट्टाLike this:Relatedयह भी पढ़ें : सांपों के बारे में भ्रम दूर किया, बताया-हर साँप नहीं होता जहरीला, उत्तराखंड में मात्र 10 प्रजातियां ही जहरीलीनवीन समाचार, नैनीताल, 19 मार्च 2021। सेन्ट्रल हिमालयन इन्वायरमेन्ट एसोसियेशन-चिया नैनीताल तथा सोसाइटी फॉर माउंटेन डेवलपमेंट एंड कंजरवेशन-एसएमडीसी नैनीताल के संयुक्त तत्वाधान में मुख्यालय स्थित चिया कार्यालय में शुक्रवार को सांपों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर पिछले एक दशक से साँपों पर अध्ययन व भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से किंग कोबरा सांप पर अपना शोध कर रहे कर रहे विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय फेलाशिप एवं सम्मान प्राप्त सर्प विशेषज्ञ जिग्नासु डोलिया ने हिमालयी क्षेत्रों में पाये जाने वाले सांपों के विषय में विस्तार से जानकारी दी, और समाज में सांपों के विषय में व्याप्त अनेक भ्रान्तियों को भी दूर किया। उन्होंने बताया कि दुनिया में पाये जाने वाले कुल सांपों में कुल 10 प्रतिशत सांप ही जहरीले एवं घातक होते हैं। उत्तराखण्ड में 35 प्रकार के साँपों की प्रजातियां पायी जाती हैं, जिसमें से 10 प्रजातियां ही जहरीली हैं। इन 10 जहरीली प्रजातियों में से भी केवल 8 प्रजातियां ही घातक है। यह भी पढ़ें : पर्यटन नगरी में बड़ा हादसा, स्कूटी सहित खाई में गिरी युवती, मौतयह भी पढ़ें : 25 वर्षीय आईएएस अंशुल भट्ट ने ग्राहक बनकर पकड़ा बिना पंजीकरण के चल रहा होटल और किया सील, प्रश्न-जनपद मुख्यालय में प्रशासन ऐसी ही स्थितियों में मौन क्यों...?कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे चिया के सचिव डा. आशीष तिवारी ने श्री डोलिया जी के अध्ययन की सराहना करते हुए कहा कि आज के कार्यक्रम से हम सभी लोगों का ज्ञानवर्धन हुआ है जो कि भविष्य मे हमारे लिए अवश्य लाभकारी होगा। इस दौरान श्री डोलिया और उनकी धर्मपत्नी दिव्या डोेलिया को संयुक्त रूप से सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन चिया के कुंदन बिष्ट ने और धन्यवाद ज्ञापन डा. श्रुति शाह ने किया। कार्यक्रम में दीपा उपाध्याय, डा. बीना फुलारा, डा. भावना कर्नाटक, डा. कृष्ण कुमार टम्टा, डा. नीता आर्या, डा. नन्दन सिंह, धीरज जोशी, ज्योत्सना टम्टा, चिया एवं एसएमडीसी के कार्मिक उपस्थित रहे। यह भी पढ़ें : 14 वर्षीय बच्ची के शव को कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया गया, पिता पर हत्या का आरोप यह भी पढ़ें : यह भी पढ़ें : पहाड़ पर पहली बार वन विभाग ने रिपोर्ट किया अजगर, पहले निगल-फिर उगल गया सांभर को..नवीन समाचार, नैनीताल, 25 सितंबर 2019। जनपद के बेतालघाट क्षेत्र के दूरस्थ गाँव हरचनोली में बुधवार की सुबह हिरन प्रजाति के एक सांभर को निगलते हुए अजगर को देखा गया। लोगों ने शोर मचाया तो अजगर ने आधे निगले चीतल को बाहर उगल दिया, किंतु तब तक चीतल की मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद लोगों ने वन व राजस्व विभाग को घटना की जानकारी दी। वन विभाग के कर्मी अजगर को अपने साथ रानीबाग स्थित रेसक्यू सेंटर ले गए, जहां से उसे बाद में जंगल में छोड़ दिया जाएगा। जबकि चीतल को वहीं दफना दिया गया। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के व्यवसायी की बालाजी से लौटते हुए यूपी में दुर्घटना में मौत, पत्नी-बच्चे भी थे साथ में वन संरक्षक दक्षिणी कुमाऊं डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि अजगर को पहली बार बेतालघाट में करीब 1100 मीटर की ऊंचाई पर रिपोर्ट किया गया है, जबकि सांभर यहां मिलते हैं। हालांकि क्षेत्रवासियों के अनुसार अजगर को यहां पहले भी देखा गया है। उल्लेखनीय है कि पहले सांभर को चीतल बताया जा रहा था। माना जा रहा है जिम कार्बेट पार्क क्षेत्र में पाया जाने वाला अजगर कोसी नदी से होते हुए क्षेत्र में पहुंच गया होगा। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष हल्द्वानी-नैनीताल रोड पर डोलमार के पास भी एक अजगर देखा गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार सबसे पहले हरचनोली गांव निवासी गणेश ने सुबह छोटी नहर के पास चीतल को निगलते अजगर को देखा। गणेश ने ही आवाज लगाकर ग्रामीणों को एकत्र किया और शोर मचाकर चीतल को अजगर की गिरफ्त से छुड़वाया। माना जा रहा है सांभर नहर में पानी पीने आया होगा और तभी अजगर की गिरफ्तर में आ गया होगा। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड : मौलवी ने महिलाओं के लिए जारी किया फरमान, मोबाइल के इस्तेमाल, शादी-विवाह के कार्यक्रम में जाने और वहां लड़कों के स्वागत करने पर रोक लगाने को कहा…यह भी पढ़ें : नैनीताल में मिला 5 फिट लंबा खतरनाक ब्राउन पिंकेट सांप..नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जुलाई 2019। रविवार दोपहर नगर के मल्लीताल शेरवानी कंपाउंड के पास वेभरली कॉटेज क्षेत्र में बच्चों द्वारा एक विशाल सांप देखे जाने से हड़कंप मच गया। इस पर क्षेत्रीय लोगों का जमावड़ा लग गया। कुछ लोगों ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी। इस पर वन विभाग के सांप पकड़ने के विशेषज्ञ संविदा कर्मी निमिष दानू ने करीब 5 फिट लंबे भूरे रंग के सांप को सड़क पर रखे बड़े डस्टबिन के नीचे से पकड़ लिया। तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। नगर के वन क्षेत्राािधकारी प्रमोद तिवारी ने बताया कि सांप ब्रांउन पिंकेट प्रजाति का था। यह किंग कोबरा की तरह ही फन युक्त होता है, परंतु उससे कम जहरीला होता है। बाद में उसे नारायण नगर के नीचे जंगल में छोड़ दिया। यह भी पढ़ें : पर्यटन नगरी में बड़ा हादसा, स्कूटी सहित खाई में गिरी युवती, मौतयह भी पढ़ें : शाबास ! जंगल में बुरी तरह से घायल मिले भालू का नैनीताल जू कर्मियों ने किया रेसक्यूनवीन समाचार, नैनीताल, 29 मई 2019। नैनीताल चिड़ियाघर की बचाव टीम के द्वारा बुधवार को कालाढुंगी रोड पर बजून चक के जंगल से एक बुरी तरह से घायल भालू को बचा कर मुख्यालय लाया गया और यहां से रानीबाग स्थित रेसक्यू सेंटर भेजा गया है। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के व्यवसायी की बालाजी से लौटते हुए यूपी में दुर्घटना में मौत, पत्नी-बच्चे भी थे साथ में यह भी पढ़ें : हल्द्वानी : गौलापार के होटल में काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले, फेसबुक लाइव वीडियो में 4 करोड़ रुपये के भूमि विवाद और उत्पीड़न के आरोपप्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह बजून क्षेत्र के ग्रामीणों ने पास के जंगल में घायल भालू की चीत्कार सुनी। इससे ग्रामीण घायल भालू द्वारा हमला किये जाने की आशंका से भयभीत हो गये। ग्राम प्रधान ने नैनीताल चिड़ियाघर को इसकी सूचना दी। इस पर चिड़ियाघर के निदेशक डीएफओ बीजू लाल टीआर के निर्देशन में चिड़ियाघर एवं नैना रेंज की वन क्षेत्राधिकारी ममता चंद के नेतृत्व में चिड़ियाघर के पशु चिकित्सा अधिकारी डा. हिमांशु पांगती एवं अन्य कर्मी तथा उधर जिम कार्बेट पार्क से डा. दुश्यंत के साथ मौके पर पहुंचे एवं सड़क से दूर एक चट्टानी गुफा के पास घायल अवस्था में मिले हिंसक भालू को उसकी तथा स्वयं की सुरक्षा करते हुए बचाकर साथ ले आये। सुश्री चंद ने बताया कि यह करीब सात-आठ वर्ष की उम्र का नर भालू है। यह समय भालुओं के प्रजनन का होता है। संभवतया इसी कारण वह आपसी संघर्ष में घायल हुआ होगा।यह भी पढ़ें : घर में घुसे 12 फिट लंबे किंग कोबरा ने दबोच दिया रेस्क्यू करने गये वन कर्मी का गला, और…नवीन समाचार, नैनीताल, 24 मई 2019। मुख्यालय के निकट गेठिया पड़ाव में कुंदन सिंह जीना के घर के भीतर एक करीब 12 फिट सांप घुस गया था। इससे जीना के परिवार में भय व्याप्त हो गया। उन्होंने वन विभाग का इसकी सूचना दी। सूचना मिलने पर पहुंचे सांप विशेषज्ञ निमिश दानू ने करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद सांप को बमुश्किल काबू में पाया। इस दौरान सांप ने निमिष को भी गर्दन से बुरी तरह से अपनी जकड़ में ले लिया। निमिश ने बताया कि हमेशा ही सांप मुंह पकड़े जाने पर स्वयं को छुड़ाने के लिए पकड़ने वाले को इतनी बुरी तरह से जकड़ लेते हैं कि वह उन्हें छोड़ने को मजबूर हो जाए। बहरहाल अब वे बिल्कुल ठीक हैं। पकड़ा गया सांप करीब दो से ढाई वर्ष की उम्र का सांपों का राजा कहा जाने वाला नर किंग कोबरा था। पकड़े गये सांप को कालाढुंगी के जंगल में छोड़ दिया गया। किंग कोबरा को पकड़ने में रजत कुमार व गौरी पंडित आदि ने भी उनका सहयोग किया।सांप पकड़ने के शौक ने दिलाई नौकरी, अब तक आठ हजार से अधिक सांप पकड़ने का दावानैनीताल। सांप पकड़ने के विशेषज्ञ निमिश दानू ने बताया कि वे वर्ष 2012 से सांप पकड़ रहे हैं, और अब तक करीब ढाई हजार किंग कोबरा सहित 8165 सांपों को पकड़ चुके हैं। इनमें किंग कोबरा के अलावा हिमालय किट वाइपेर, बैंबो किट वाइपर, ब्राउन टिंकेट व रसल वाइपर आदि प्रजातियों के सांप भी शामिल हैं, जो नैनीताल मुख्यालय के कृष्णापुर व अन्य क्षेत्रों में आम तौर पर पाये जाते हैं। इनमें सांपों के अंडों से निकले बच्चे भी शामिल होते हैं, जिन्हें पकड़ना भी कम खतरनाक नहीं होता। उन्होंने बताया कि बचपन में मस्ती में सांप पकड़ते थे। बाद में टीवी पर डिस्कवरी चैनल देखकर उन्होंने स्वयं को सांप पकड़ने में पारंगत बनाया। उनकी सांप पकड़ने की खासियत देखकर ही तत्कालीन वन क्षेत्राधिकारी केसी सुयाल ने उन्हें वन विभाग में नौकरी दिलवा दी। इसके बाद जहां भी सांप घुसने की खबर मिलती है, उन्हें ही सांप पकड़ने के लिए बुलाया जाता है।यह भी पढ़ें : डोलमार में एनएच पर दिखा विशालकाय अजगर, कौतूहल का केंद्र बनानैनीताल, 12 अक्तूबर 2018। शुक्रवार को जनपद के हल्द्वानी रोड पर मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर डोलमार नाम के स्थान के पास एक विशालकाय अजहर राष्ट्रीय राजमार्ग पर देखा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अपराह्न करीब एक बजे करीब 12 से 14 फिट लंबे अजगर ने राष्ट्रीय राजमार्ग को एक ओर से दूसरी ओर पार किया और इसके बाद वह झाड़ियों में छुप गया। संभवतया उसने इसी दौरान किसी खरगोश जैसे छोटे जंगली जीव को अपना निवाला भी बनाया था। अजगर के इस स्थान पर देखे जाने की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय लोगों का कौतूहलवश जमावड़ा लग गया, और लोग झाड़ियों के बीच छुपे अजगर की फोटो लेने का प्रयास करने लगे। वन संरक्षक डा. पराग मधुकर धकाते ने संभावना जताई कि इंडियन पाइकॉन रहा होगा। उल्लेखनीय है कि डोलमार से लगा ज्योलीकोट क्षेत्र किंग कोबरा के प्राकृतिक आवास के रूप में स्थापित हो चुका है, जबकि अजगर को इस क्षेत्र में पहली बार देखे जाने की बात क्षेत्रवासियों द्वारा कही जा रही है।यह भी पढ़ें : अब हिमालयन बॉटनिकल गार्डन में मिला ‘हिमालयन पिट वाइपर’-वन रक्षक अरविंद कुमार ने रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ानैनीताल, 21 अगस्त 2018। मुख्यालय में कांग्रेस नेता के घर में बिस्तर पर किंग कोबरा को देखे जाने के बाद मुख्यालय के निकट नारायण नगर में वन विभाग द्वारा विकसित हिमालयन बॉटनिकल गार्डन में ‘हिमालयन पिट वाइपर’ प्रजाति का सांप रिकॉर्ड किया गया है। इसे हिमालयन बॉटनिकल गार्डन के वन रक्षक अरविंद कुमार ने जांबाजी दिखाते हुए पकड़ लिया, और बाद में जंगल में ले जा कर छोड़ दिया गया। वन संरक्षक दक्षिणी कुमाऊं डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि यह सांप जहरीला होता है, और मूलतः भारत, पाकिस्तान व नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। निचले पहाड़ों-मैदानों में नहीं मिलता है। नैनीताल में यह पहले भी देखा गया है किंतु सामान्यतया यह दिखता नहीं है। पीले रंग के इस सांप की नाक के नीचे एक पिट यानी गड्ढा होता है, जिसमें ‘थर्मल सेंसर’ लगे होते हैं, जिससे यह मौसम में ठंड-गर्मी को एवं अपने शिकार को भांपता है, साथ ही यह गड्ढों में रहता है, इसलिए इसका नाम पिट वाइपर है।यह भी पढ़ें : जंगल में पग चिन्ह देख सहमे पौधे लगाने गए सभासद व अन्यनवीन समाचार, नैनीताल, 13 सितंबर 2020। नगर के अयारपाटा वार्ड के सभासद मनोज साह जगाती अपनी संस्था ‘जय जननी जय भारत’ के सदस्यों के साथ रविवार सुबह आठ बजे अपने वार्ड के ही जंगल में पौधारोपण करने गए थे किंतु इस दौरान समरफील्ड के पास किसी पशु के पग चिन्ह देखकर सहम उठे। जगाती का कहना था कि समरफील्ड जंजीर वाली कोठी के पास तालाब की हल्की दलदली भूमि पर उन्हें वन्य जीव के काफी बड़े पैरों के निशान मिले। जगाती का दावा है कि वह निशान गुलदार अथवा बाघ के रहे होंगे। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में अक्सर गुलदार दिखते हैं। करीब 6-7 माह पूर्व यहां वन्य जीव गाय की एक बछिया को खा गया था, जिसके बाद यहां वन विभाग ने पिंजरा भी लगाया गया था। वहीं इस बारे में वन विभाग के डीएफओ बीजू लाल टीआर सहित अन्य अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, किंतु उन्होंने जवाब नहीं दिया। वहीं नैनीताल चिड़ियाघर के डिप्टी रेंजर दीपक तिवारी ने फोटो के आधार पर संभावना जताई कि पैरों के निशान बड़े कुत्ते के भी हो सकते हैं। इधर पौध रोपण अभियान के तहत जगाती, पवन आर्या व कक्षा दो की छात्रा हिमांगी बिष्ट आदि ने जंजीर वाली कोठी के पास जंगल में पांगर के 20 पौधे लगाए।यह भी पढ़ें : नैनीताल में फर्जी गाइड ने पर्यटक की कार लेकर की क्षतिग्रस्त, मालरोड पर पेड़ और डस्टबिन से टकराकर हुआ फरार, पुलिस तलाश में जुटी नैनीताल देखने की चाह में पहाड़ चढ़ आया हाथियों का झुंड-पूर्व में भी सूखाताल एवं नैनी झील के पास हाथियों के पहुंचने हैं प्रमाणनवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, आश्चर्य होगा। किंतु यह सच है। मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर ज्योलीकोट के निकट चोपड़ा गांव में हाथियों का झुंड देखे जाने की अभूतपूर्व घटना हुई है। ज्ञात इतिहास में पहली बार, शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे ग्रामीणों ने जिम कार्बेट पार्क से अलग, समुद्र सतह से करीब 1500 मीटर की ऊंचाई वाले चोपड़ा गांव में चार वयस्क हाथियों का झुंड देखा गया। उत्साही ग्रामीण युवा इन हाथियों की फ़ोटो लेने में भी सफल रहे। क्षेत्रीय निवासी एवम वन क्षेत्राधिकारी कैलाश चंद्र सुयाल ने बताया कि इतिहास में यहां हाथियों के देखे जाने की कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों के मन में यह सवाल भी कौंध रहा है कि हाथी पहाड़ की ओर क्यों चढ़ रहे हैं। अलबत्ता, पश्चिमी वृत्त के वन संरक्षक डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि पूर्व में नैनीताल जनपद में ही, करीब इसी ऊंचाई वाले घटगढ़ और पटवाडांगर क्षेत्र में भी हाथियों को देखा गया था, जबकि इतिहास में, अंग्रेजी दौर में, करीब 1950 मीटर की ऊंचाई पर नैनीताल की नैनी झील में पानी पीने के लिए हाथियों के आने की बात एक पुस्तक में दर्ज होने की बात कही जाती है। गौरतलब है कि घटगढ़ और पटवाडांगर जिम कार्बेट पार्क से लगे क्षेत्र हैं, जबकि चोपड़ा पूरी तरह से पार्क से अलग क्षेत्र है। इसलिये यहां हाथियों का आना अपने आप में अनूठी घटना है।डा. धकाते के अनुसार हाथी अपने याददाश्त के लिए जाने जाते हैं। यदि बचपन में भी वे किसी मार्ग से गुजरे हों, तो वापस उन पारंपरिक मार्गों पर लौटते हैं। संभव है कि ये हाथी भी पहले कभी यहां आए हों। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 15 जनवरी 2015 के आसपास भी नैनीताल के निकटवर्ती बल्दियाखान क्षेत्र में समुद्र सतह से करीब 1850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बसगांव के बुड़ भूमिया मंदिर के पास हाथियों का झुंड देखे जाने का दावा किया गया था। वन विभाग के आला अधिकारी इसे पूर्व के संदर्भों व प्रमाणों के आधार पर इसे हाथियों का यहां पहली बार आना नहीं वरन अपने पुराने रास्तों पर वापस लौटना मान रहे हैं। यानि, कह सकते हैं कि हाथियों का झुंड नैनीताल को देखने अथवा पुरानी यादें ताजा करने की चाह में पहाड़ों पर चढ़ आया होगा।देश में बाघों की संख्या (ऑल इंडिया टाइगर एक्सपीडिशन 2014 के मुताबिक) बीते चार वर्ष में 30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ (2010 में 1520-1909) औसत अनुमानित 1706 से बढ़कर अब 1,945 से 2,491 के बीच (औसत अनुमानित 2226) हो जाने और उत्तराखंड के इस मामले में राष्ट्रीय औसत से भी आगे करीब 50 प्रतिशत के साथ देश में में नंबर 2 रहने (यहां पिछले चार वर्षो में बाघों की संख्या में 113 यानी करीब 50 फीसद की बढ़ोतरी के साथ 340 हो गई है, और वह कर्नाटक (406) तथा मध्यप्रदेश (308) के बीच दूसरे स्थान पर है।) की खुशखबरी के बीच यह एक और अच्छी खबर है।नगर के खोजी युवक दीपक बिष्ट ने क्षेत्र से लौटने के बाद बसगांव के बुड़ भूमिया मंदिर के पास अनेक स्थानों पर यहां से हाथियों का बड़ी मात्रा में मल देखे जाने की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि वन्य जीवों की गतिविधियां जानने के लिए वन्य जीव शोधकर्ता उनके पद चिन्हों व मल आदि से ही पुष्टि व पहचान करते हैं।बल्दियाखान निवासी खीमराज सिंह बिष्ट ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बड़ी मान्यता वाले बुड़ भूमिया मंदिर के पास गत दिवस हाथियों का झुंड देखा गया था। इसने ग्रामीणों की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है। पहाड़ की इतनी ऊंचाई पर हाथियों के चढ़ आने से जहां ग्रामीणों में फसलों के नुकसान की चिंता के साथ ही आश्चर्य भी है, वहीं वन्य जीव विशेषज्ञ के तौर पर प्रभागीय वनाधिकारी डा. पराग मधुकर धकाते ने माना कि ऐसा संभव है। उनका कहना था कि हालांकि हाथी मैदानी क्षेत्रों में ही रहने वाला प्राणी है, और जिम कार्बेट पार्क और जनपद मे भाबर क्षेत्र के हाथी कॉरीडोर क्षेत्र में इसकी काफी उपस्थिति है, लेकिन उन्होंने स्वयं वर्ष 2006 में एक जीर्ण-शीर्ण पुरानी पुस्तक में १०-१५ हाथियों के झुंड के नैनीताल के संभवतया नैनी झील के पास का चित्र देखा है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष कालाढुंगी रोड पर मंगोली के निकट भी हाथियों का झुंड देखा गया था, जो कि खासा चर्चा में रहा था। वहीं दीपक बिष्ट ने बताया कि हैनरी रैमजे की 1892 में लंदन से प्रकाशित पुस्तक-अपर इंडिया फॉरेस्ट में हाथियों के नैनीताल की सूखाताल झील के पास तक पहुंचने का जिक्र मिलता है। इस आधार पर डा. धकाते कहते हैं कि हाथी भोजन की उपलब्धता होने पर एक स्थान से दूसरे स्थान को जाते रहते हैं, लेकिन इनके आने-जाने में एक खाशियत यह भी होती है कि यह पूर्व में प्रयोग किए गए मार्ग पर ही चलते हैं। लिहाजा यह संभव है कि बसगांव में दिखे झुंड का कोई हाथी संभवतया कभी पूर्व में अपने बाल्यकाल में इसी रास्ते से नैनीताल आया होगा। डा. धकाते ने स्वयं भी शीघ्र इसकी पुष्टि के लिए क्षेत्र का दौरा किये जाने की बात कही।रॉयल बंगाल टाइगर भी देखे जा चुके हैं नैनीताल में नैनीताल। उल्लेखनीय है कि 10-11 फरवरी 2014 की रात्रि बाघों के राजा रॉयल बंगाल टाइगर को 2591 मीटर ऊंची कैमल्स बैक चोटी पर वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरे में रिकार्ड किया गया था। इन वन्य जीवों की नैनीताल में उपस्थिति को इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता व मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का परिचायक माना जा सकता है।यह भी पढ़ें :जिम कार्बेट के घर नैनीताल में फिर दिखाई दिया ‘रॉयल बंगाल टाइगर’नैनीताल में किंग कोबरा के बाद दिखी सतरंगी इंडियन पिट्टा Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationदो ताजा ओपिनियन पोल में जानें उत्तराखंड में किसकी बन सकती है सरकार…? जंतवाल ने की जोशी को भीमताल से जिताने की अपील