नवीन समाचार, देहरादून, 17 जून 2025 (Harish Rawat Told Mistakes-Contesting Election)। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में आगामी विधानसभा चुनाव-2027 में चुनाव न लड़ने की घोषणा दोहराई है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ना उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी भूल रही। साथ ही उन्होंने कहा कि इस बार वह अपनी पिछली गलती दोहराना नहीं चाहते।
पूर्व मुख्यमंत्री इन दिनों कुमाऊँ अंचल में लगातार सक्रिय हैं। लगभग हर जनपद में भ्रमण कर रहे हैं और मंदिरों में जाकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। रावत का कहना है कि कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए वह पार्टी के भीतर संवाद और जनता की नब्ज टटोलने का कार्य कर रहे हैं।
हरक सिंह रावत के आरोपों पर प्रतिक्रिया
हरक सिंह रावत द्वारा उन पर 2022 की पराजय का दोषारोपण किए जाने पर उन्होंने कहा कि “यह सच है कि यदि मैं चुनाव न लड़ता तो कांग्रेस को लाभ होता।”
रावत ने स्पष्ट रूप से कहा कि “बहुत चुनाव लड़ चुका हूँ। अब पार्टी को प्रचारकों की ज़रूरत है, न कि प्रत्याशियों की। 2022 में यदि मैं चुनाव न लड़ता तो कांग्रेस की सरकार बन सकती थी। अब 2027 में वैसी चूक नहीं दोहराऊँगा।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस में नेतृत्व का संकट नहीं है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ प्रीतम सिंह, गणेश गोदियाल, भुवन कापड़ी, प्रकाश जोशी, सुमित हृदयेश, अनुपमा रावत सहित कई नेताओं के नाम गिनाते हुए उन्हें पार्टी की मजबूत ‘दूसरी पंक्ति’ बताया।
राजनीतिक भूलें और अनुभव
रावत ने उत्तराखण्ड राज्य निर्माण से पूर्व की राजनीति का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार नारायण दत्त तिवारी के विरोध के कारण उत्तराखण्ड को केंद्रशासित राज्य बनाने का प्रस्ताव विफल हो गया था। उन्होंने इसे अपने जीवन की एक और राजनीतिक भूल बताते हुए कहा कि यदि कुछ नेताओं को उस बैठक में आमंत्रित न किया गया होता, तो संभवतः राज्य गठन की प्रक्रिया उसी समय आरंभ हो जाती।
डेमोग्राफी और सरकार पर आरोप
प्रदेश में डेमोग्राफी परिवर्तन के विषय पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए रावत ने दावा किया कि “जो भी जनसंख्या में परिवर्तन हुआ है, उसके लिए केवल भाजपा दोषी है। 2014 से 2017 के बीच सबसे कम बाहरी लोगों ने उत्तराखण्ड में प्रवेश किया, जबकि 2017 के बाद केवल हल्द्वानी में ही पाँच हजार से अधिक बाहरी लोग बस गए।” उन्होंने भाजपा को “झूठ, लूट और फूट” की राजनीति करने वाली पार्टी बताया और कहा कि यही उसका विनाशकारी आधार बनेगा।
कांग्रेस की आगामी रणनीति
हरीश रावत ने बताया कि वह वर्तमान में जनसंपर्क के माध्यम से “जननब्ज परीक्षण” कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को आक्रामक रणनीति अपनानी होगी। केवल 50 प्रखर वक्ता चाहिए जो झूठ, लूट और फूट के नैरेटिव को उजागर करें। मैंने यह आधार तैयार कर दिया है।”
पुराने फैसलों का स्मरण
अपने मुख्यमंत्री काल के एक महत्वपूर्ण निर्णय को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 2013 की आपदा के बाद उन्होंने स्थानीय जनों को नुकसान का आकलन स्वयं करने की छूट दी थी, जिसे उन्होंने ऐतिहासिक कदम बताया।
मुस्लिम विश्वविद्यालय विवाद पर (Harish Rawat Told Mistakes-Contesting Election)
मुस्लिम विश्वविद्यालय के मुद्दे पर रावत ने पुनः स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई वादा नहीं किया था। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई इस बात का प्रमाण दे दे, तो वह अपनी सम्पत्ति तक देने को तैयार हैं। उन्होंने इसे भाजपा द्वारा झूठ फैलाने का षड्यंत्र बताया और कहा कि न्याय के लिए वह देवस्थलों की शरण में जा रहे हैं। (Harish Rawat Told Mistakes-Contesting Election)
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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