-देहरादून में राज्य कर विभाग की कार्रवाई, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट घपले का घोटाला उजागर (15-20 tonnes goods supplied through e-rickshaws)
नवीन समाचार, देहरादून, 9 जुलाई 2025। उत्तराखंड के राज्य कर विभाग की विशेष जांच शाखा (एसआईबी) ने राजधानी देहरादून में लोहे व इस्पात के कारोबार से जुड़ी एक फर्म पर छापेमारी कर करोड़ों रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घपले का पर्दाफाश किया है। यह घपला कई वर्षों से संचालित हो रहा था और जांच में सामने आया है कि फर्म ने करीब पांच करोड़ रुपये के फर्जी आईटीसी का लाभ उठाया है।
ई-वे बिल में निकले ई-रिक्शा व कारों के नंबर, टोल से नहीं गुजरे वाहन
पुलिस व संबंधितों से प्राप्त जानकारी के अनुसार छापेमारी के दौरान विभागीय अधिकारियों को ऐसे ई-वे बिल मिले जिनमें भारी वाहनों की जगह ई-रिक्शा, कार व तिपहिया वाहनों के पंजीकरण संख्या दर्शाई गई थी। इन वाहनों से 15 से 20 टन माल की आपूर्ति दर्शाई गई थी, जबकि जांच में पाया गया कि यह वाहन इन तिथियों में टोल प्लाजा से गुजरे ही नहीं थे। जिन तिथियों पर ई-वे बिल बनाए गए थे, उन पर न तो इन वाहनों की लोकेशन मालवाहक मार्गों पर थी, न ही देहरादून में।
बिना आपूर्ति लिए लिया गया इनपुट टैक्स क्रेडिट, 1.35 करोड़ की वसूली
राज्य कर विभाग के अनुसार, फर्म ने वास्तविक माल आपूर्ति के बिना केवल फर्जी बिलों के आधार पर आईटीसी का लाभ लिया। छापेमारी के दौरान फर्म के संचालक ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और मौके पर ही 1.35 करोड़ रुपये की राशि जमा करवा दी। शेष राशि की वसूली के लिए वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
आयुक्त के निर्देश पर की गई कार्रवाई, वर्षों से जारी था फर्जीवाड़ा (15-20 tonnes goods supplied through e-rickshaws)
राज्य कर आयुक्त सोनिका के कर चोरी रोकने व राजस्व वृद्धि के निर्देशों पर यह कार्रवाई राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त (गढ़वाल) पीएस डुंगरियाल व संयुक्त आयुक्त अजय कुमार के निर्देशन में की गई। टीम में उप आयुक्त अजय बिरथरे, डीआर चौहान, योगेश मिश्रा, सुरेश कुमार, सहायक आयुक्त टीका राम चन्याल, पूनम राजपूत, अमित कुमार, कर अधिकारी असद अहमद, कंचन थापा व भूपेन्द्र सिंह जंगपांगी सहित अन्य अधिकारी सम्मिलित रहे।
यह घपला राज्य कर विभाग की सतर्कता व तकनीकी विश्लेषण से सामने आया है, जो इस बात का प्रमाण है कि अब फर्जी बिलिंग व कर अपवंचन पर कठोर निगरानी रखी जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार ऐसे मामलों में जल्द ही अन्य फर्मों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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