डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 24 फरवरी 2026 (High Court on Illegal Construction)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) से जुड़े एक महत्वपूर्ण न्यायिक प्रकरण में उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court of Uttarakhand) ने बिना अनुमति के किए गये मस्जिद के निर्माण के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए मस्जिद सील करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। साथ ही एक अलग जनहित याचिका में नैनीताल (Nainital) जिले की सड़कों की सुरक्षा और कचरा प्रबंधन पर भी प्रशासन को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इन आदेशों का प्रभाव शहरी नियोजन, सड़क सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।
अवैध निर्माण पर न्यायालय का स्पष्ट संदेश
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित (Justice Pankaj Purohit) की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता जामा मस्जिद सोसायटी थानो (Jama Masjid Society Thano) ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (Mussoorie Dehradun Development Authority-MDDA) द्वारा 13 फरवरी 2026 को जारी नोटिस को निरस्त करने की मांग की थी।
याचिका में कहा गया था कि सोसायटी को कंपाउंडिंग मानचित्र प्रस्तुत करने का अवसर दिए बिना दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। सुनवाई के दौरान यह तथ्य स्वीकार किया गया कि संबंधित निर्माण के लिए प्राधिकरण से कोई अनुमति नहीं ली गई थी और न ही कंपाउंडिंग के लिए आवेदन किया गया था।
न्यायालय ने कहा कि जो पक्ष स्वयं कानून का उल्लंघन करता है, वह अनुच्छेद 226 (Article 226) के तहत राहत का दावा नहीं कर सकता। अवैध निर्माण कर बाद में संरक्षण मांगना विधि सिद्धांतों के विपरीत है। इसी आधार पर याचिका प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दी गई।
हालांकि न्यायालय ने चार सप्ताह के भीतर वैधानिक प्रावधानों के अनुसार कंपाउंडिंग आवेदन देने की छूट दी है। प्राधिकरण को भी निर्देश दिया गया कि ऐसा आवेदन मिलने पर चार सप्ताह में उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 (Uttar Pradesh Urban Planning and Development Act, 1973) के तहत निर्णय लिया जाए।
सड़क सुरक्षा और कचरा प्रबंधन पर न्यायालय सख्त
इसी दिन मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Chief Justice Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) की खंडपीठ ने नैनीताल जिले की सड़कों की बदहाली और पर्यावरणीय जोखिम से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई की।
याचिकाकर्ता अनिल यादव (Anil Yadav) की ओर से अधिवक्ता डीसीएस रावत (DCS Rawat) और जय कृष्ण पांडे (Jai Krishna Pandey) ने न्यायालय को बताया कि—
हल्द्वानी–नैनीताल (Haldwani–Nainital) मार्ग
कालाढूंगी (Kaladhungi) मार्ग
भवाली–कैंची धाम (Bhawali–Kainchi Dham) मार्ग
पर निर्माण मलबा तीखे मोड़ों और ब्लाइंड टर्न्स (Blind Turns) पर डाला जा रहा है। इससे विशेषकर वर्षा ऋतु में दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है।
खंडपीठ ने नगर पालिका (Municipality) और जिला प्रशासन (District Administration) को संयुक्त बैठक कर सड़क सुरक्षा (Road Safety) और कूड़ा निस्तारण पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रगति रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने को भी कहा गया है।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये आदेश
विशेषज्ञ मानते हैं कि ये दोनों आदेश प्रशासनिक जवाबदेही, शहरी नियमन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं। क्या अब अवैध निर्माण पर निगरानी और सख्त होगी। क्या पर्वतीय सड़कों पर सुरक्षा मानकों में सुधार दिखेगा। आने वाले महीनों में इन सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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