नवीन समाचार, पौड़ी गढ़वाल, 20 मार्च 2026 (Unique Devotion For Dhari Devi by Baba)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के पौड़ी गढ़वाल जनपद स्थित श्रीनगर (Srinagar Garhwal) के समीप अलकनंदा तट पर विराजमान प्रसिद्ध धारी देवी मंदिर में चैत्र नवरात्र के दौरान एक अनूठी भक्ति देखने को मिल रही है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर निवासी बाबा नारायण गिरी ने अपने सिर पर जौ की हरियाली उगाकर मां धारी देवी को समर्पित की है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर्षित हो रहे हैं।
सिर पर हरियाली उगाकर समर्पित की भक्ति
धारी देवी मंदिर में प्रवास कर रहे बाबा नारायण गिरी, जो जूना अखाड़ा से जुड़े हैं, ने अपने सिर पर कपड़ा बांधकर उसमें मिट्टी भरकर जौ के बीज बोए। तीन दिनों में ये बीज हरियाली के रूप में उग आए, जिसे उन्होंने मां को अर्पित किया।
बाबा के अनुसार वह हर वर्ष चैत्र नवरात्र के अवसर पर इस प्रकार की साधना करते हैं। उन्होंने बताया कि जीवन में हुई त्रुटियों के प्रायश्चित और देवी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए वह यह अनूठा तरीका अपनाते हैं।
एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद उनकी आस्था और साधना ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया है।
नवरात्र में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर से लगभग 14 किलोमीटर दूरी पर स्थित धारी देवी मंदिर में चैत्र नवरात्र के दौरान प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
बाबा नारायण गिरी की अनूठी साधना इन दिनों मंदिर में श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
धारी देवी का धार्मिक महत्व
धारी देवी को गढ़वाल क्षेत्र की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जब तक देवी अपने स्थान पर विराजमान रहती हैं, तब तक क्षेत्र में बड़े संकट नहीं आते।
मंदिर से जुड़ी एक विशेष मान्यता यह भी है कि—
सुबह देवी कन्या रूप में
दोपहर में युवा रूप में
शाम को वृद्धा रूप में
दर्शन देती हैं, जो जीवन के तीन चरणों का प्रतीक माना जाता है।
पौराणिक और ऐतिहासिक संदर्भ
धारी देवी को शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है और इन्हें चार धामों की संरक्षिका भी माना जाता है।
मान्यता है कि देवी की मूर्ति का ऊपरी भाग धारी गांव में और निचला भाग कालीमठ (रुद्रप्रयाग) में स्थित है। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा को भी कई लोग मंदिर से मूर्ति स्थानांतरण से जोड़कर देखते हैं, हालांकि यह आस्था का विषय है।
आस्था और संदेश
बाबा नारायण गिरी की यह साधना केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और प्रायश्चित का संदेश भी देती है।
चैत्र नवरात्र के इस अवसर पर धारी देवी मंदिर एक बार फिर आस्था, परंपरा और श्रद्धा का केंद्र बन गया है, जहां भक्त अपनी मनोकामनाओं के साथ पहुंच रहे हैं। इस अनूठी भक्ति पर आपके क्या विचार हैं ? पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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