News

एक्सक्लूसिव राहत का समाचार: कोविद-19 समर्पित अस्पताल में भर्ती सूरत से आये जनपद के युवक में कोरोना नहीं

यहाँ से दोस्तों को भी शेयर करके पढ़ाइये
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 मई 2020। 11 मई की रात्रि विशेष श्रमिक रेलगाड़ी से सूरत से आए बारह सौ लोगों में से जनपद के बेतालघाट विकास खंड निवासी एक 28 साल के युवक को बुखार की शिकायत पर कोरोना विशेषज्ञ अस्पताल-सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया था, और उसका कोरोना जांच हेतु नमूना भी लिया गया था। उसके संपर्क में आये करीब छह दर्जन लोगों की भी पहचान की गई थी, और जिला प्रशासन उनके बारे में भी चिंतित हो गया था। किंतु इस युवक में कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है। जनपद की अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रश्मि पंत ने पूछे जाने पर यह जानकारी दी। इसके बाद प्रशासन को बड़ी राहत मिलना तय है।
उल्लेखनीय है कि इस युवक ने बुखार की शिकायत बताई थी, जिसके बाद प्रशासन ने एहतियात के लिए उसे कोविद-19 समर्पित अस्पताल सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में भर्ती कर लिया था और उसका कोरोना नमूना भी ले लिया था। साथ ही उसकी संपर्क में आये जनपद के 71 से अधिक लोगों को चिन्हित किया गया था। सीएमओ डा. भारती राणा ने बताया कि आगे भी संबंधित युवक एवं उसके संपर्क में आये अन्य लोगों को सतर्कता के तौर पर 14 दिन के लिए ‘गृह एकांतवास’ में रखा जाएगा।

यह भी पढ़ें : सूरत से आए 1200 लोगों में से एक युवक कोरोना अस्पताल में भर्ती

-जांच में बुखार आने पर उठाया कदम, कोरोना का नमूना लिया, आज आएगी रिपोर्ट
नवीन समाचार, हल्द्वानी, 12 मई 2020। (एसएनबी)। सूरत से आए बारह सौ लोगों में से एक अट्ठाइस साल के युवक को कोरोना विशेषज्ञ अस्पताल-सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर दिया गया है। यह युवक बेतालघाट विकास खंड का रहने वाला बताया जा रहा है। इसको बुखार की शिकायत थीं। इसकी पुष्टि सीएमओ भारती राणा ने की है। सीएमओ का कहना है कि सतर्कता के आधार पर युवक को भर्ती किया गया है। इसका कोरोना नमूना ले लिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद युवक के कोरोना होने या न होने की जानकारी मिल पाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार नैनीताल जिले के सूरत से आए नैनीताल जिले के 510 यात्रियों को तीन पानी के एक बैंकट हाल में ठहराया गया था। बताया जा रहा है कि डाक्टरों के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान इस युवक में बुखार के लक्षण मिले। युवक ने भी बुखार की जानकारी पहले दे दी थी। सूत्रों के अनुसार मंगलवार सुबह इस युवक को कोरोना विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कर दिया गया है। अभी जांच रिपोर्ट आने तक इसमें कोरोना के लक्षण होने या न होने की जानकारी संदिग्ध बनी हुई है।

यह भी पढ़ें : राहत : आज रिकॉर्ड 408 कोरोना संक्रमितों की रिपोर्ट आई नकारात्मक, आज हुई एक मौत कोरोना से नहीं

नवीन समाचार, देहरादून, 1 मई 2020। उत्तराखंड में शुक्रवार को पहली बार रिकॉर्ड 408 नमूनों की जांच रिपोर्ट आईं, और बड़ी बात की सभी नकारात्मक आईं। हां, आज जरूर एक कोरोना संक्रमित की मृत्यु हुई। किंतु इसे पूरी तरह से कोरोना की वजह से मृत्यु नहीं माना जा रहा है। इसे ब्रेन स्ट्रोक के कारण आंतरिक रक्तस्राव की वजह से माना जा रहा है। अलबत्ता, राज्य सरकार ने इसे स्टार का चिन्ह लगाकर मृत्यु में शामिल किया है। स्टार को नीचे विस्तार से समझाते हुए लिखा गया है कि यह मौत कोरोना से नहीं बल्कि दूसरे कारणों से हुई है। अपर सचिव युगल किशोर ने बताया कि एक कोरोना पॉजिटिव की मौत तो रिपोर्ट हुई है, लेकिन उसकी मौत का कारण कोरोना नहीं है।
इधर शुक्रवार को 226 नये सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। अपर सचिव युगल किशोर पंत ने बताया कि एक मरीज को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज भी कर दिया गया है। इस तरह राज्य में कुल 57 मरीजों में से 37 मरीज ठीक भी हो गए हैं। अभी 19 कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज चल रहा है। राज्य में 6533 मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। 192 सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार है। 15483 मरीज होम क्वारंटाइन हैं। नये सैंपलों में 65 देहरादून, 52 हरिद्वार, 26 नैनीताल, 31 यूएसनगर, सात उत्तरकाशी व चार चंपावत के हैं। 185 सैंपल सरकारी लैब और 41 सैंपल प्राइवेट लैब में भेजे गए हैं। 260 सैंपल पुराने रिपीट भी किए गए हैं।

यह भी पढ़ें : एम्स ऋषिकेष बना कोरोना का हॉट स्पॉट, आज ही आये तीन नये मामले, एम्स में 50 लोग क्वारन्टाइन, जगह कम पड़ी

नवीन समाचार, ऋषिकेष, 28 अप्रैल 2020। जी हां, एम्स ऋषिकेष मंगलवार को प्रदेश में कोरोना का नया हॉट स्पॉट बनकर उभरा है। सुबह लालकुआं-नैनीताल निवासी एक 56 वर्षीय ब्रेन स्ट्रोक की बीमार महिला में कोरोना की पुष्टि हुई, वहीं देर शाम यहां दो अन्य नमूनों में कोरोना की पुष्टि होने से यहीं नहीं राज्य में हड़कंप मच गया है, और तीन मई को लॉक डाउन हटने की संभावनाओं पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आज एम्स ऋषिकेष के दो कर्मियों में कोरोना की पुष्टि हुई है। इनमें एक 26 वर्षीय जनरल सर्जरी वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स और दूसरा 56 वर्षीय महिला मरीज का तीमारदार है। इस नये खुलासे के बाद एम्स प्रशासन ने अलर्ट जारी कर  70 से 80 लोगों को क्वारन्टाइन करा दिया है। जानकारी के अनुसार हालत यहां तक हो गई है कि इन लोगों को क्वारन्टाइन कराने के लिए जगह कम हो गई है, इसलिये जिला प्रशासन से स्थान की मांग की गई है।

यह भी पढ़ें : दून मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती नैनीताल के युवक व पिथौरागढ़ के बुजुर्ग की मौत, कोरोना जांच के लिए भेजे नमूने

नवीन समाचार, देहरादून, 22 मार्च 2020। राजधानी के दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय के आईसीयू में भर्ती एक 23 वर्षीय युवक और एक 75 वर्षीय बुजुर्ग की उपचार के दौरान मंगलवार देर रात्रि मौत हो गई। कोरोना की आशंका के चलते दोनों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। लैब से जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इनके शव परिजनों को सुपुर्द किए जाएंगे। बताया जा रहा है कि युवक मूल रूप से नैनीताल जनपद का रहने वाला था और दून में एक प्राइवेट स्कूल में खाना बनाने का काम करता था। वहीं बुजुर्ग को भी सोमवार को दून अस्पताल में भर्ती किया गया था। मूल रूप से वह पिथौरागढ़ के रहने वाले थे और वर्तमान में पंडितवाड़ी में रह रहे थे।
जानकारी के अनुसार मृतक युवक को मंगलवार दोपहर को राजकीय कोरोनेशन अस्पताल अस्पताल से दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय के लिए रेफर किया गया था। युवक को बदन दर्द और बार-बार चक्कर आने की शिकायत थी। दून अस्पताल में उसे आईसीयू में रखा गया था। वहीं बुजुर्ग को सांस लेने में दिक्कत थी। वह बीती 21 मार्च को दुबई अपने बेटे के पास से वापस लौटे थे। इसके बाद दिल्ली में जांच रिपोर्ट दो बार निगेटिव आई थी। बताया जा रहा है कि सात अप्रैल को वह दून पहुंचे और उसके बाद घर पर आइसोलेशन में थे। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें अस्थमा के अलावा निमोनिया की दिक्कत थी। मंगलवार देर रात दोनों की आईसीयू में मौत हो गई। अस्पताल के डिप्टी चिकित्सा अधीक्षक डा. एनएस खत्री के अनुसार जिलाधिकारी के निर्देश पर इन दोनों का सैंपल कोरोना जांच के लिए लैब भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही शव परिजनों के सुपुर्द किए जाएंगे। इस बारे में स्वास्थ्य महानिदेशक डा. अमिता उप्रेती ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। संभवतः दोनों के सैंपल कोरोना जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उचित कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में एक जमाती की मौत से हड़कंप..

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 21 अप्रैल 2020। हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में एक जमाती की मंगलवार को उपचार के दौरान मौत हो गयी है। जमाती की मौत से हड़कंप मच गया है। अलबत्ता अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि उसे कोरोना होने की पुष्टि नहीं हुई थी, बल्कि उसे 17 अप्रैल को स्वास्थ्य खराब होने पर यहां उपचार के लिए लाया गया था। उसकी मौत का कारण ब्रेन स्ट्रोक बताया जा रहा है।
बताया गया है कि दिल्ली के तुगलकाबाद निवासी 60 वर्षीय शदीक अहमद जमात के साथ बीती 27 फरवरी को रामनगर आया था। इधर 17 अप्रैल को स्वास्थ्य खराब होने पर उसे सुशीला तिवारी लाया गया था।
मेडिकल कॉलेज के कोरोना समन्वयक रोहित मीणा ने बताया कि मृतक के साथ 17 लोगों के कोरोना के नमूने लिये गये थे, लेकिन किसी भी नमूने में कोरोना की पुष्टि नहीं हुई थी। वह पहले से ही बीमार था। बीमार होने पर ही उसे एसटीएच लाया गया था। यहां बीती रात्रि उसका स्वास्थ्य अधिक खराब हुआ, जिसके बाद मंगलवार सुबह तड़के उसने दम तोड़ दिया। उसके परिजनों को सूचना देकर उनकी सहमति पर रामनगर निवासी व्यक्ति को उसके शव को सोंप दिया गया है। उल्लेखनीय है कि मेडिकल कॉलेज में कुल 13 कोरोना पॉजीटिव रोगी भर्ती किए गए हैं। इनमें अधिकांश जमाती व उनके संपर्क में आये लोग हैं।

यह भी पढ़ें : महंगे निजी अस्पतालों में होगा आम लोगा का सरकारी व्यवस्था के तहत इलाज

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अप्रैल 2020। कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने हल्द्वानी के छह निजी अस्पतालों-बृजलाल अस्पताल, केएचआरसी, नीलकंठ अस्पताल, विवेकानंद अस्पताल, साई अस्पताल, सेंटल अस्पताल को अधिग्रहीत किया है। इन अस्पतालों में आम लोगों का उपचार हो सकेगा। ऐसा इसलिए कि सरकार ने हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज को कोरोना विशेषज्ञ चिकित्सालय के रूप में काम लिया जा रहा है। ऐसे में अन्य रोगों के रोगियों का उपचार शहर के इन छह निजी चिकित्सालयों में किया जा सकेगा। शनिवार से निजी अस्पतालों को संचालित कर दिया गया। डीएम सविन बंसल ने सभी अस्पतालों को नियमित खोलने और राजकीय चिकित्सालय से रेफर होने वाले मरीजों को प्राथमिकता से देखने के निर्देश दिए हैं। स्टाफ से लेकर अन्य व्यवस्थाएं में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने को कहा है।
डीएम बंसल ने शनिवार को कहा कि बीमार लोगों के उपचार में अगर किसी तरह की लापरवाही होती है तो आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक से अस्पतालों में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। औषधि निरीक्षक को निर्देषित किया है कि निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों की जांच कर जरूरी दवाइयां की उपलब्धता का पता किया जाए। सरकारी अस्पताल से उन मरीजों को ही भेजा जाएगा, जो बीपीएल व आयुष्मान कार्डधारक होंगे। इसके बाद संबंधित अस्पताल इन बिलों को सीएमओ कार्यालय में जमा कर भुगतान लेंगे।

यह भी पढ़ें : नैनीताल : 10 लोगों के नमूने कोरोना जांच के लिए भेजे

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 अप्रैल 2020। बीडी पांडे जिला चिकित्सालय नैनीताल के चिकित्सकों ने सोमवार को पर्यटक आवास गृह सूखाताल में संस्थागत एकांतवास में रखे गए 10 लोगों के कोरोना विषाणु के संक्रमण की जांच के लिए नमूने लिये गए। जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी ने बताया कि पूर्व में जांच के लिए भेजे गए तीन नमूनों की रिपोर्ट नकारात्मक आ गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि आज 10 नमूने लेने के साथ संस्थागत एकांतवास में रखे गए कुल 50 लोगों में से सभी बड़ों के नमूने ले लिये गए हैं, और अब तक मुख्यालय से भेजे गए सभी नमूनों की रिपोर्ट नकारात्मक ही आई है। अब केवल कुछ 4 से 6 माह के बच्चों के नमूने ही नहीं लिये गए हैं। जरूरत पड़ने पर उनके नमूने भी लिये जाएंगे। उन्होंने बताया कि मंगलवार को एक व्यक्ति को 14 दिन का एकांतवास पूरा करने पर घर भेजा जा सकता है।

चिकित्सक फोन पर देंगे निःशुल्क परामर्श
नैनीताल। ‘मिशन मेरा पहाड़’ से जुड़े नगर के चिकित्सक लॉक डाउन की अवधि में बुजुर्गो एवं जरूरतमंदों को फोन पर निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श देंगे। इस हेतु डा. एमएस दुग्ताल से फोन नंबर 9412364484, डा. सुशील भट्ट से 9411167619 एवं डा. तनूजा पाल से 9997812727 पर हर रोज दोपहर एक से रात्रि नौ बजे तक संपर्क किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें : प्रदेश के एक दर्जन से अधिक अस्पताल कोविड अस्पताल के रूप में अधिसूचित

नवीन समाचार, देहरादून, 2 अप्रैल 2020। प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत कोरोना विषाणु के संदिग्ध मरीजों के इलाज के लिए प्रदेश के एक दर्जन से ज्यादा अस्पतालों को कोविड अस्पतालों के रूप में अधिसूचित कर दिया है। स्वास्थ्य सचिव नितेश झा द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार कोविड अस्पतालों के तौर पर काम करने वाले अस्पतालों में बागेश्वर, चंपावत, चमोली, पिथौरागढ, रूद्रप्रयाग, ऊधमसिंह नगर, टिहरी, उत्तरकाशी के जिला अस्पताल, अल्मोडा बेस अस्पताल, दून मेडिकल कालेज, हरिद्वार का मेला अस्पताल, हल्द्वानी का सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज, नैनीताल का बीडी पांडे जिला चिकित्सालय, कोटद्वार स्थित बेस अस्पताल और श्रीनगर मेडिकल कालेज शामिल हैं।

यह भी पढ़ें : नैनीताल की जामा मस्जिद आई थी निजामुद्दीन दिल्ली से 11 सदस्यीय जमात, 44 को भेजा गया एकांतवास में

जमात में शामिल लोगों को जांच के लिए अस्पताल ले जाती पुलिस।

 

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अप्रैल 2020। दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज की घटना के बाद उत्तराखंड सरकार के बाद नैनीताल पुलिस-प्रशासन हरकत में है। उत्तराखंड सरकार द्वारा मंगलवार को दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में एक से 15 मार्च के बीच एक धार्मिक आयोजन में उत्तराखंड के भी कुछ लोगों के हिस्सा लेने की खबरों का संज्ञान लेते हुए सभी जिलों के जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को ऐसे लोगों की पहचान करने के आदेश दिये गए हैं। वहीं अभिसूचना मुख्यालय उत्तराखंड देहरादून द्वारा 31 मार्च को प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों व पुलिस अधीक्षकों को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार नगर की मल्लीताल स्थित जामा मस्जिद में मरकज निजामुद्दीन दिल्ली से 13 से 20 मार्च तक 11 सदस्यीय जमात आई थी। इस जमात में नई दिल्ली के तीमारपुर, मदनपुर, इंद्रप्रस्थ कॉलोनी, पुरानी ईदगाह, मीर विहार, सहारनपुर यूपी आदि के 11 जमाती आए थे। नैनीताल में 12 लोग-मल्लीताल निवासी मो. वसीम व हामिद अली, हिना टूर एजेंसी मल्लीताल के मो. जुहैब, राशिद, काशिफ व दिलशाद, नईम मैकेनिक निवासी बसेरा होटल के पीछे मल्लीताल, तल्लीताल बूचड़खाना निवासी मो. बसी, सानिब और महबूब तथा हरिनगर निवासी शहनवाज इन जमातियों के संपर्क में आए हैं। इनके साथ ही पुलिस इनके संपर्क में आये लोगों की भी पड़ताल कर रही है। बुधवार को अब तक 46 लोगों को मल्लीताल कोतवाली पुलिस और 6 परिवार के 21 लोगों को तल्लीताल पुलिस यानी कुल 67 लोगों जांच के लिए बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचा चुकी है। मल्लीताल कोतवाल अशोक कुमार सिंह ने बताया कि अभी भी ऐसे लोगों की तलाश की जा रही है। साथ ही यह अपील भी की जा रही है कि वह स्वयं भी अस्पताल जाकर अपनी जांच करवाएं। इधर जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी ने बताया कि मरकज से संबंधित 44 लोगों को जिला चिकित्सालय के सूखाताल स्थित संस्थागत क्वारन्टाइन सेंटर में लाया गया है। इनमें से किसी में भी कोरोना के लक्षण नहीं मिले हैं। फिर भी इन्हें 14 दिन पूरे होने की अवधि के शेष बचे दिनों के लिए एकांतवास में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां पहले रखे गए पांच में से तीन लोगों को घर भेज दिया गया है। इस प्रकार दो पुराने एवं 44 नये मिलाकर कुल 46 लोगों को एकांतवास में रखा गया है।

 
सम्बंधित क्षेत्रों को किया विसंक्रमित 
उधर नगर स्वास्थ्य निरीक्षक कुलदीप कुमार ने बताया कि सूखाताल, चीना बाबा, आवागढ़, हरिनगर आदि वार्डों में निजामुद्दीन मरकज से संबंधित सक्रियता के बाद बुधवार को दवा का छिड़काव कर सेनिटाइजेशन करवा दिया गया है। आगे मेट्रोपोल-रॉयल होटल क्षेत्र की बस्ती भी सेनिटाइजेशन कार्य कराया जाएगा।

यह भी पढ़ें : नैनीताल : दिल्ली से आए चार में से दो युवकों को क्वारंटीन सेंटर भेजा

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मार्च 2020। बीडी पांडे जिला चिकित्सालय से मंगलवार को दो लोगों को को सूखाताल स्थित केएमवीएन के पर्यटक आवास गृह में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर में भेजा गया है। जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी ने बताया कि आज ही चार लोग दिल्ली से आकर चिकित्सालय आए थे। हालांकि उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे, लेकिन दिल्ली में गत दिवस आनंद विहार में उमड़ी भीड़ को देखते हुए उनमें से दो को चिकित्सकीय देखरेख में रखने के लिए क्वारंटीन संेटर में भेजा गया है।

यह भी पढ़ें : बगड़ में मिले विदेशी नागरिकों में नहीं मिले कोरोना के लक्षण, फिर भी एकांतवास में रहने की दी नसीहत

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 मार्च 2020। सोमवार को जनपद में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों के लिए चिंता का कारण रही। मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर बगड़ के पास एक रिजॉर्ट में एक दर्जन विदेशी सैलानियों के काफी दिनों से ठहरे होने की सूचना से जिला चिकित्सालय में पहले हड़कंप मच गया था। इस पर चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी स्वयं चिकित्सालय में कोरोना को प्रमुख रूप से देख रहे डा. अनिरुद्ध गंगोला व डा. प्रियांशु श्रीवास्तव के साथ ही डा. आरके वर्मा को साथ लेकर बगड़ के लिए रवाना हुए। वहां से लौटकर डा. धामी ने बताया कि गत छह मार्च से बगड़ मेहरोड़ा में बने खास तरह के मिट्टी से बने ‘मड हाउस’ प्रशिक्षण केंद में 8 विदेशी एवं 10 देशी सैलानी तथा 5 कर्मचारी एवं 6 बाहरी कर्मचारी मिले। यहां लोग खास तकनीक से भूकंपरोधी मिट्टी के घर बनाना सीखते हैं। सभी स्वास्थ्य जांच करने में स्वस्थ पाए गए। फिर भी उन्हें देश-दुनिया में फैले कोरोना विषाणु के प्रभाव के कारण वहीं ‘होम क्वारनटाइन’ यानी घर पर ही एकांतवास में रहने की सलाह देते हुए उनकी काउंसिलिंग की गई।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले जिला चिकित्सालय से दिन में करीब एक बजे गत 20 मार्च से एकांतवास में रखे गए 36 वर्षीय इजरायली युवक एवं 22 वर्षीय बेल्जियम की युवती के गायब हो गए थे। इन दोनों को कल शाम पांच बजे से ही मोतीनगर में कोरोना संक्रमित रोगियों के लिए खास तौर पर बनाए गए क्वारंटाइन वार्ड भेजने की तैयारी की जा रही थी, तभी वाहन आने में हुए करीब 14 घंटे के विलंब के बीच दोनों मौका देखकर लोगों की नजर बचाकर भाग गए। गनीमत रही कि चिकित्साकर्मियों पुलिस व एसडीआरएफ कर्मियों ने उन्हें चिकित्सालय से काफी दुर अंडा मार्केट के पास से वापस पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें समझा-बुझा कर मोतीनगर हल्द्वानी भेज दिया गया। उल्लेखनीय है कि इन विदेशी सैलानियों में कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी उन्हें 14 दिन के एकांतवास में रखा जा रहा है।

यह भी पढ़ें : बिना जांच पूरा देश घूम आए दो विदेशी, होटल नहीं मिलने पर अस्पताल पहुंचे, एकांतवास में भेजे गए

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 मार्च 2020। शुक्रवार को दो विदेशी सैलानी-एक 36 वर्षीय इजरायली युवक एवं 22 वर्षीय बेल्जियम की युवती बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचे। जिला चिकित्सालय में तीन चिकित्सकों के द्वारा उनकी स्वास्थ्य जांच की गई। जांच में उन्हें कोरोना संक्रमण के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं मिले हैं, किंतु जो कहानी उन्होंने बताई, उसके बाद उन्हें अस्पताल के ही क्वारन्टाइन यानी एकांतवास वार्ड में रखा जा रहा है।
दोनों ने बताया कि वे आज दिल्ली से नैनीताल पहुंचे। यहां किसी ने उन्हें होटल में नहीं रखा। इसलिए परेशान होकर अस्पताल आ गए। यह भी खुलासा किया कि इजराइली लड़का इस वर्ष 10 जनवरी को और लड़की 19 नवंबर 2019 को भारत आए थे। तब से उनकी भारत में कोरोना संक्रमण के इतने हो-हल्ले व सक्रियता के दावों के बावजूद कहीं स्वास्थ्य जांच नहीं की गई। जिला चिकित्सालय में वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल, डा. अनिरुद्ध गंगोला व डा. प्रियांशु श्रीवास्तव ने उनकी जांच की और कहा कि हालांकि उन्होंने देश में कोरोना संक्रमण के 14 दिन से अधिक दिन सुरक्षित बिता लिये हैं, किंतु संभव है कि वह पिछले कुछ दिनों में ही देश में अन्य किन्हीं संक्रमित विदेशियों के संपर्क में आए हों। उनके पास रुकने की भी कोई जगह नहीं है, इसलिए चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी ने आपसी परामर्श के बाद उन्हें अस्पताल के एकांतवास वार्ड में भर्ती करने का निर्णय लिया। साथ ही उन्हें अन्यत्र एकांतवास में ठहराने के लिए जिला प्रशासन से भी संपर्क किया है। डा. धामी ने बताया कि वह जिला चिकित्सालय में सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस कर्मियों की मांग भी कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में दो और लोगों में कोरोना की पुष्टि, संख्या तीन हुई..

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 मार्च 2020। बृहस्पतिवार कोर उत्तराखंड में कोरोना के दो नए मरीजों में कोरोना के संक्रमण की पुष्टि हो गई है। इसके साथ राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या तीन हो गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी की प्रयोगशाला में देहरादून के दो मरीजों में कोरोना विषाणु के संक्रमण की पुष्टि हो गई है। ये दोनों नए मरीज भी ट्रेनी आईएफएस अफसर है, जो स्पेन स्टडी टूर से लौटे हैं। मेडिकल कालेज हल्द्वानी की लैब की जांच रिपोर्ट में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के इन दोनों ट्रेनी आईएफएस अफसरों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। आगे के उपचार के लिए इन्हें ऋषिकेश स्थित एम्स में भेजा जा रहा है। इस तरह राज्य में अब तक जो तीन लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है, ये तीनों ही ट्रेनी अफसर उस दल का हिस्सा थे, जो 28 फरवरी को ट्रेनिंग टूर पर स्पेन गया था और हाल ही में स्पेन से देहरादून लौटा था। तीनों ट्रेनी आईएफएस इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी से प्रशिक्षण ले रहे हैं।

हल्द्वानी राजकीय मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को कोरोना के 39 संदिग्ध नमूनों की जांच हुई। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ सीपी भैसोडा ने बताया कि कि इनमें से 37 नमूनों की रिपोर्ट नेगेटिव आई जबकि देहरादून से आए दो नमूनों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। उन्होंने बताया की नमूनों की रिपोर्ट की पुष्टि हल्द्वानी की वायरोलॉजी लैब के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर आईसीएमआर से भी कराई जाती है। इसके बाद ही अंतिम रिपोर्ट जारी की जा रही है। उधर, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ अमिता उप्रेती के अनुसार राज्य में विदेश से भ्रमण कर कुल 722 लोग आए हैं। इसमें से 381 लोगों ने 28 दिन का समय पूरा कर लिया है। इनमें अब संक्रमण का कोई खतरा नहीं है। जबकि 307 लोगों की निगरानी चल रही है। उन्होंने बताया कि इन लोगों के लिए भी अगले दस से 12 दिन अहम हैं। राज्य में अभी तक 50 से अधिक मरीजों की जांच कराई जा चुकी है। उधर, उत्तराखंड स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय के आज शाम जारी कोविड 19 सम्बन्धी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार आज कुल 19 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। राज्य के विभिन्न जिलों से अब तक कुल 114 संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इनमें से तीन सैंपल की जांच रिपोर्ट पाजिटिव आई है, जबकि 82 सैंपल की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। 29 सैंपल की जांच रिपोर्ट अभी प्रतीक्षित है। राज्य के हवाई अड्डों पर अब तक कुल 45 हजार 352 यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई है। राज्य सरकार द्वारा स्थापित हेल्प लाइन पर अब तक मदद के लिए कुल 856 लोगों ने सम्पर्क किया है। 

यह भी पढ़ें : नैनीताल कोरोना : दुबई से आए बुजुर्ग दंपत्ति स्वास्थ्य जांच को पहुंचे जिला अस्पताल

 
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 मार्च 2020। एक दिन पहले ही दुबई में अपने बेटे के पास से लौटे बुजुर्ग दंपत्ति बृहस्पतिवार को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचे। यहां उनकी स्वास्थ्य जांच की गई। जांच में दोनों स्वस्थ्य मिले हैं। बावजूद उन्हें स्वास्थ्य विभाग ने अपनी निगरानी में लेकर उन्हें उनके घर पर ही ‘एकांतवास’ में रहने का प्रबंध करवा दिया है, तथा उनके बारे में रिपोर्ट आगे विभाग में भेज दी है। 
बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल ने बताया कि करीब 68 व 60 वर्षीय बुजुर्ग दंपत्ति बुधवार को दुबई में रहने वाले अपने बेटे के घर से खुर्पाताल स्थित अपने घर लौटे थे। कल शाम ही यह जानकारी लगने पर उन्हें संदेश भेजकर जांच के लिए जिला चिकित्सालय बुलाया गया था। इस पर आज से जिला चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने बताया कि दुबई में वे जहां रहते हैं, वहां कोरोना का संक्रमण नहीं था। एयरपोर्ट पर भी उनकी जांच हुई है। उनमें कोरोना के संक्रमण के बुखार, जुकाम, खांसी आदि के किसी तरह के लक्षण नहीं दिखे। फिर भी उनके बारे में पूरी जानकारी लेकर उन्हें ऐहतियातनउनके घर पर ही अगले 14 दिन के लिए ‘एकांतवास’ में रहने और इस दौरान किसी भी तरह की समस्या होने पर सूचित करने की हिदायत देकर घर भेज दिया गया। 

यह भी पढ़ें : अमेरिकी हिप्पी खुद पहुंचा अस्पताल, बोला मुझे कोरोना तो नहीं….

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 मार्च 2020। मंगलवार को एक अमेरिकी व्यक्ति स्वयं बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचा। सिर में जटाओं वाला करीब 35 वर्षीय हिप्पी-बाबा सा लगने वाला व्यक्ति मास्क लगाए हुए था। जब लोगों ने उसकी ओर गौर किया तो उसे कोरोना संक्रमित समझकर लोग सहम गए। वह सीधा अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। बोला, कहीं उसे कोरोना तो नहीं है। उसकी जांच की जाए। ईएमओ डा. मिश्रा ने उसकी जांच की। विशेषज्ञ के तौर पर डा. एमएस दुग्ताल को भी बुलाया गया। दोनों ने उसकी स्वास्थ्य जांच करने के साथ ही उससे पूछताछ की। पूछताछ में उसने अपना पासपोर्ट दिखाया, जिसमें उसका नाम कोडी शेफर्ड निवासी सैन फ्रांसिस्को अमेरिका दर्ज था। वह गत 28 फरवरी को भारत आया था, यानी उसने भारत आने के बाद 17 दिन से अधिक व्यतीत कर लिये गए थे। उसमें कोरोना के किसी तरह के प्रारंभिक लक्षण भी नहीं थे। फिर भी चिकित्सकों ने उसका यहां स्थानीय पता व अन्य जानकारियां हासिल कीं और उसे ऐहतियात के तौर पर हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज जाने की सलाह दी। उसने किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने की बात से भी इंकार किया और यहां कैंची धाम के पास रहने की जानकारी दी। इन जानकारियों के बाद सभी ने राहत की सांस ली।

यह भी पढ़ें : नैनीताल जनपद में एक भी संक्रमित मरीज नहीं पर 38 संक्रमण संभावित व्यक्ति प्रशासन की नजर से बाहर..

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 मार्च 2020। नैनीताल जनपद में 38 कोरोना संक्रमण के संभावित लोग प्रशासन की नजर से बाहर हैं। यह खुलासा स्वयं जनपद की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. भारती राणा ने किया है। अलबत्ता उन्होंने बताया कि नैनीताल जनपद में एक भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य मुख्यालय से जनपद में 134 कोरोना संक्रमण के संभावित लोगों की सूची मिली थी, इनमें से 45 व्यक्तियों ने 28 दिन का समय बिना किसी बीमारी के लक्षण के पूरा कर लिया है, लिहाजा उनमें कोरोना की कोई संभावना नहीं है। इनके अलावा 25 लोग जनपद से बाहर चले गए हैं, जबकि 26 लोग स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में हैं। स्वास्थ्य कर्मी रोजाना इनके घर पर जाकर इनके स्वास्थ्य पर नजर रख रहे हैं, जबकि इन 134 व्यक्तियों में से 38 व्यक्ति स्वास्थ्य विभाग को मिले नहीं हैं। इन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा खोजा जा रहा है। इन लोगों से अपील भी की जा रही है कि वे प्रशासन से संपर्क करें। साथ ही उन्होंने बताया कि जनपद के प्रसिद्ध हैड़ाखान धाम में 61 विदेशी नागरिक रह रहे हैं। इनकी नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। इनमें से किसी में भी कोरोना के कोई लक्षण नहीं मिले हैं।

यह भी पढ़ें : रविवार को एम्स में महिला चिकित्सक व इटली की महिला सहित तीन मरीज आए…

नवीन समाचार, ऋषिकेष, 15 मार्च 2020। रविवार को प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी को कोरोना संक्रमण पाजिटिव होने के बाद एम्स ऋषिकेष में भर्ती कराया गया है। उनके अलावा भी यहां यहीं की एक महिला चिकित्सक तथा एक अन्य इटली की महिला व एक युवक को भी भर्ती कराया गया है। इटली की महिला जिस रिजॉर्ट में ठहरी थी उसे भी ऐहतियात के तौर पर 14 दिन के लिए बंद कर दिया है। बताया गया है कि अभी तक उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना वायरस के 25 और एम्स की ओर से 17 सैंपल भेजे गए थे, जिनमें से 1 की रिपोर्ट ही पॉजिटिव आई है।
रविवार की देर शाम एम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. हरीश थपलियाल ने पत्रकारों को बताया कि इटली से जनपद पौड़ी गढ़वाल के थाना लक्ष्मण़ झूला थाना क्षेत्र के एक रिसोर्ट में 28 फरवरी से आकर रह रही एक 34 वर्षीया महिला को रविवार सुबह यहां एम्स में संदिग्ध अवस्था में यहां लाया गया। वह तीन-चार दिन से कोरोना वायरस से संबंधित लक्षणों-खांसी, जुकाम और बुखार होने पर कोरोना वायरस का संदेह होने पर रविवार की सुबह एम्स के आइसोलेशन में भर्ती कराया गया है। से पीड़ित थी। इसके अलावा हरिद्वार से 21 वर्षीय एक युवक को भर्ती किया गया जो कि 9 फरवरी को दिल्ली गया था और वहां भीड़-भाड़ वाले इलाके में घूम कर लौटा था। जब वह वापस आया तो, उसमे कोरोना संबंधी लक्षण पाये गये थे, जिसके बाद उसे भी यहां लाया गया है। इसके अलावा एम्स में ही सीनियर रेजिडेंट के पद पर कार्यरत एक महिला चिकित्सक को भी यहां भर्ती कराया गया है। यह महिला चिकित्सक 1 मार्च को गुवाहाटी गई थीं और वह वहां होटल रेडिसन ब्लू में 3 दिन ठहरी थीं। वहां घूमने-फिरने के बाद वह ऋषिकेश वापस आ गईं। बताया जाता है कि जिस होटल में वह ठहरी थीं, वहां पहले से ही कोरोना वायरस के 2 पॉजिटिव मरीज भी ठहरे थे। उसके बाद डॉक्टर को भी एम्स के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर लिया गया। उनके सैंपल लेकर परीक्षण के लिए पुणे स्थित इंडियन वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट भेजे जा रहे हैं। सैंपल की रिपोर्ट आने तक उन्हें चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा।
 

यह भी पढ़ें : कोरोना वायरस पर एडवाइजरी जारी: चिकित्सकों-चिकित्सा कर्मियों की छुट्टियों पर लगी रोक

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 मार्च 2020। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जिला मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय एडवाइजरी जारी कर दी गयी है। शुक्रवार को जिला चिकित्सालय में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक केएस धामी की अध्यक्षता में आयोजित हुई चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की बैठक में कोरोना वायरस को रोकने और इसके बचाव के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी गई। सभी को मास्क का प्रयोग करने की हिदायत दी गयी। साथ ही सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों के लिए आपात स्थितियों को छोड़कर लंबी छुट्टियों को रद्द कर दिया गया तथा अगले आदेशों तक के लिए रोक भी लगा दी गई। इसके अलावा जिला चिकित्सालय मंे उपस्थिति लगाने की बायोमैट्रिक व्यवस्था को भी स्थगित कर दिया गया है।
इसके अलावा बैठक से पर्यटन नगरी के सभी होटल एवं पर्यटन व्यवसायियों से अपील की गई कि वे बाहर से आने वाले सैलानियों के प्रति सतर्कता बरतें तथा खासकर विदेशी एवं सर्दी-जुकाम जैसे कोरोना के लक्षणों वाले सैलानियों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि उनके स्वास्थ्य की जांच की जा सके। उल्लेखनीय है कि पूर्व में जिला चिकित्सालय में कोरोना वायरस को लेकर एक मॉक ड्रिल भी की गई थी, तथा चिकित्सालय में कोरोना वायरस के मरीजो के लिए विशेष आइसोलेशन वार्ड में बनाया गया है।

यह भी पढ़ें : कोरोना के प्रभाव: सभी स्कूलो को बंद कर सकती है सरकार, बायोमैट्रिक हाजिरी से 3 दिन बाद ही मिली छूट

नवीन समाचार, देहरादून, 8 मार्च 2020। देश भर में कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए उत्तराखंड सरकार सभी स्कूलों को कुछ समय के लिए बंद कर सकती है। होली के बाद स्कूलों को बंद करने के विधिवत आदेश हो सकते हैं। ऐसा देश के कई शहरों में कोरोना के 34 से अधिम मामले सामने आने को देखते हुए राज्य में विशेष सतर्कता बरतने के उद्देश्य से किया जा सकता है।
शासन के सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूलों को बंद करने की सलाह दी गई है। विभाग का तर्क है कि स्कूलों को बंद करने से बड़ी संख्या में बच्चों में वायरस के संक्रमण को फैसने से बचाया जा सकता है। दिल्ली में कुछ मामले सामने आने के बाद प्राथमिक विद्यालय पहले ही बंद किए जा चुके हैं। इसके बाद अब राज्य में स्कूलों को बंद करने की तैयारी है। शासन के सूत्रों ने बताया कि कोरोना की बढ़ती दहशत को देखते हुए होली के बाद स्कूलों को बंद किया जा सकता है।
कोरोना संक्रमण के कारण बायोमैट्रिक से छूट
नैनीताल। उच्च शिक्षा निदेशालय ने गत चार मार्च को प्रदेश के सभी राजकीय स्नातक व स्नातकोत्तर डिग्री कॉलेजों एवं अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में प्राध्यापकों व शिक्षणेत्तकर कर्मचारियों के साथ ही छात्र-छात्राओं की बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के आदेश दिये थे। अब उच्च शिक्षा निदेशालय ने शनिवार सात मार्च को आदेश जारी कर कोरोना के संक्रमण को देखते हुए इस आदेश में अगले आदेशों तक छूट देते हुए पूर्व की भांति उपस्थिति दर्ज कराने के आदेश दिये हैं।

यह भी पढ़ें : अपडेट : नैनीताल पहुंचे इटली के दोनों नागरिक स्वस्थ…

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 मार्च 2020। शहर में इटली के दो सैलानियों के पहुंचने से प्रशासन हरकत में आ गया है। बताया गया है कि बृहस्पतिवार को उनके शहर में पहुंचने और मल्लीताल कोतवाली पुलिस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हाईकोर्ट के निचले गेट के पास के एक होटल में ठहरने की सूचना अभिसूचना इकाइयों को लगी। इस पर पुलिस को भी सूचना मिली और प्रशासन हरकत में आया। मल्लीताल कोतवाली पुलिस ने यह जानकारी लगने पर स्वास्थ्य विभाग को पत्र के जरिये इसकी सूचना दी। इस पर जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल व डा. अभिनव गंगोला के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम होटल में ही उनकी जांच के लिए गई और उनकी जांच की।
डा. दुग्ताल ने इटली के नागरिकों का प्रारंभिक परीक्षण करने एवं बातचीत के बाद बताया कि करीब 50 से 60 की उम्र के महिला पुरुष इटली के नागरिक गत 13 फरवरी को इटली से मुंबई एयरपोर्ट आए, जहां उनकी कोरोना को लेकर जांच हुई थी। होटल में दोनों स्वस्थ एवं बिना किसी समस्या के आपस मंे बातें करते व चाय पीते मिले, और उनमें किसी तरह का संक्रमण नहीं दिखा। लिहाजा कोई डर न फैले, इसलिए उनके किसी तरह के नमूने भी नहीं लिये गए। अलबत्ता, उन पर आगे भी नजर रखी जाएगी।
जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी ने कहा कि पुलिस की सूचना पर उनकी सामान्य जांचें की जा रही हैं। अभी दोनों में कोरोना के प्रारंभिक लक्षण पाये जाने की कोई सूचना नहीं है। मल्लीताल कोतवाल अशोक कुमार सिंह ने कहा कि वे हवाई जहाज से गत दिनों भारत आए हैं। जहां निश्चित ही उनकी स्वास्थ्य जांच की गई होगी। फिर भी ऐहतियात के तौर पर उनके बारे में स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दी गई।
गौरतलब है कि वर्तमान में चीन के बाद इटली में कोरोना के सर्वाधिक संक्रमण की खबरें हैं और भारत में भी इटली के 15 नागरिकों के कोरोना संक्रमित नागरिकों का उपचार चल रहा है। इस आधार पर पुलिस प्रशासन इस मामले में अधिक सतर्कता बरत रहा है।

जिला चिकित्सालय में की गई कोरोना को लेकर मॉक ड्रिल

नैनीताल। बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में शुक्रवार को कोरोना वायरस के संक्रमण के दृष्टिगत किसी कोरोना प्रभावित मरीज के प्रकाश में आने की स्थिति में की जाने वाली कार्रवाइयों, स्वास्थ्य जांच आदि के लिए मॉक ड्रिल की। मॉक ड्रिल में डा. एमएस दुग्ताल, डा. अभिनव गंगोला, शशि पांडे, कैलाश कोरंगा व हेमा सहित कई स्वास्थ्य कर्मी शामिल हुए।

यह भी पढ़ें : कोरोना: अफवाहों पर ध्यान न दें, हम देंगे सिर्फ पुष्ट खबरें

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 मार्च 2020। कोरोना वायरस को लेकर जनपद एवं प्रदेश में अफवाहों का बाजार गर्म है। अफवाहें फैलाने में निचले स्तर के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी पीछे नहीं। ऐसी अफवाहों से लोग घबराए हुए हैं। स्कूलों से मास्क और सेनेटाइजर मंगाए जा रहे हैं। लोग सेनेटाइजर लेने भाग रहे हैं, परंतु मांग ऐसी है कि मास्क व सेनेटाइजर बाजार से गायब हो गए हैं। हल्द्वानी से लेकर देहरादून में कभी एक तो कभी तीन लोगों को कोरोना का संक्रमण होने की अफवाहें फैली हैं। देहरादून में तो दून मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष पर ऐसी ही अफवाह फैलाने का आरोप लगा है। उन्हें इस मामले में लिखित मांफी भी मांगनी पड़ी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग को इस बारे में स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है।
हमारी कोशिश होगी कि हम इस तथा सभी मामलों में सिर्फ पुष्ट खबरें ही देंगे। यहां हम स्पष्ट कर दें कि अभी तक प्रदेश में किसी भी व्यक्ति को कोरोना संक्रमण होने की पुष्टि नहीं हुई है। हल्द्वानी में जापान से आए युवक के हल्की खांसी होने पर नमूने जरूर लिए गए हैं, परंतु उसे कोरोना संक्रमण होने की जांच मंे पुष्टि नहीं हुई है, और वह किसी अस्पताल में भर्ती नहीं है, बल्कि अपने घर पर ही ऐहतियात बरतकर अलग रह रहा है। शासन, प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग खासकर विदेशों से आए लोगों पर नजर रखे हुए हैं। उन्हें 28 दिन के लिए अलगाव में रखा जा रहा है और पूरी हिदायत बरती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग कह रहा है हर सर्दी, जुकाम, बुखार कोरोना संक्रमण नहीं है। घबराएं नहीं, लेकिन ऐहतियात बरतें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने, किसी से भी हाथ मिलाने से बचें। बेहतर है कि भारतीय संस्कृति के अनुसार हाथ जोड़कर अभिवादन करें। बिना हाथ धोए आंख, नाक, मुंह, कान आदि में हाथ न डालें। गर्म पानी से गरारा करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल जनपद में प्रकाश में आए सभी 26 कोरोना संभावित लोग सुरक्षित..

-जनपद में कोरोना के संक्रमण के खिलाफ चलेगा जागरूकता अभियान

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए आयोजित स्वास्थ्य विभाग की बैठक में मौजूद अधिकारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 मार्च 2020। जनपद में वैश्विक चिंता के कारण बने कोरोना के संक्रमण के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर जागरूकता अभियान चलाये जाएंगे। बृहस्पतिवार को इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की जनपद स्तरीय बैठक में इस पर गहनता से चर्चा हुई। बैठक के बाद जिले की सीएमओ डा. भारती राणा ने बताया कि राज्य स्तर से जनपद में 26 लोगों के जापान, आस्ट्रेलिया आदि देशों से आने की सूचना मिली थी। इनमें से केवल एक को हल्की खांसी को छोड़कर अन्य 25 में कोरोना के संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए थे। फिर भी इन सभी को गहन जांच में रखा गया। इनमें से 18 को अब आये हुए 28 दिन से अधिक का समय हो गया है, और ये अब भी पूरी तरह से स्वस्थ हैं, इसलिए इन्हें कोरोना संक्रमण का कोई खतरा नहीं है। अन्य को भी 20 से अधिक दिन हो गए हैं। केवल खांसी वाले जापान से आए एक मरीज को 18 दिन हुए हैं। वह मंगल व बुधवार को सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए आया था। उसकी जांचें की गईं। उसे भी कोरोना के संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। वर्तमान में सुशीला तिवारी अथवा जनपद के किसी भी अस्पताल में एक भी कोरोना प्रभावित मरीज भर्ती नहीं है। इसलिए डरने की जरूरत नहीं है।

सिर्फ इतना करें और कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित होवें

सीएमओ डा. भारती राणा ने बताया कि कोरोना संक्रमण से घबराने के बजाय बचने के लिए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने पर नाक पर सामान्य मास्क पहनने, लोगों से हाथ न मिलाने व खासकर हाथों को बिना धोए अपने मुंह, नाक, कान, आंख व गुप्तांगों जैसे भीतर को खुले अंगों छूने-रगड़ने से बचना चाहिए। बताया कि जनपद में सभी बड़े अस्पतालों में कोरोना के संभावित मरीजों के लिए आइसोलेसन यानी अलगाव वार्ड बनाए गए हैं। साथ ही मोटाहल्दू के पांडे नवाड़ स्थित प्रयोग में नहीं आ रहे एएनएम प्रशिक्षण केंद्र को अलगाव केंद्र के रूप में विकसित करने की कार्रवाई भी प्रारंभ की जा रही है। वहीं बैठक में उन्होंने विभाग की पूर्व से चल रही गतिविधियों, विभिन्न योजनाओं व बैठकों के दौरान कोरोना की जागरूकता फैलाने के निर्देश दिये गए। बैठक में एसीएमओ डा. रश्मि पंत, डा. एमएस दुग्ताल, जिला कार्यक्रम अधिकारी मदन मेहरा सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : दो गांवों में फैला डायरिया, 83 लोग आए चपेट में, हड़कंप…

नवीन समाचार, रानीखेत, 28 फरवरी 2020। अल्मोड़ा जनपद के ताड़ीखेत ब्लाक के दो गांवों-कनार व बजोल में 83 लोगों के डायरिया की चपेट में आने की चिंताजनक खबर है। स्वास्थ्य विभाग को जानकारी मिली कि पीड़ितों को जी मिचलाने की साथ ही उल्टी और पेचिश हो रही है। इससे विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में ताड़ीखेत स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सकों की टीम को प्रभावित गांवों में भेजा गया। चिकित्सकों ने गांवों में पहुंचकर पीड़ितों को आवश्यकीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की। चिकित्सकों ने दावा किया है कि पीड़ितों की स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है और स्थिति नियंत्रण में आ गई है। दो गांवों में डायरिया के संक्रमण के कारणों की भी पड़ताल की जा रही है, और अन्य लोगों को भी डायरिया का संक्रमण न फैले इस हेतु दोनों एवं आसपास के गांवों के पानी की जांच की जा रही है। बताया गया है कि कनार में 39 व बजोल में 44 लोग डायरिया से पीड़ित हुए है। बताया गया है कि दोनों गांवों के लोग एक ही स्थानीय स्रोत का पानी पीने के लिए प्रयोग करते हैं। इस स्रोत के पानी के नमूने लेने के साथ ही स्रोत के आसपास साफ सफाई कर दी गई है तथा स्रोत के पानी की टंकी में ब्लीचिग पावडर डालने के साथ ही ग्रामीणों को घर-घर जाकर क्लोरीन की गोलियां वितरित कर दी गई हैं।

यह भी पढ़ें : कहीं आप भी तो ढाबों-रेस्टोरेंटों में ऐसे जहरीले उत्पाद नहीं खा रहे, जनपद में शुरू हुआ इसके खिलाफ अभियान

-ढाबे-रेस्टोरेंट में बार-बार प्रयोग से जहरीले हो रहे तेल में तले जा रहे पकौड़े, समोसे आदि

होटलों में प्रयोग से जहरीले हो रहे तेल की जांच करते खाद्य सुरक्षा अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह।

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 फरवरी 2020। होटलों-ढाबों में अक्सर पूरे दिन एक ही खाद्य तेल से पकौड़े, समोसे, जलेबी आदि तले जाते हैं। तेल जलकर कम हो जाने पर उसी में नया तेल भर दिया जाता है। जनपद के खाद्य सुरक्षा अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह का कहना है कि तीन बार से अधिक तलने अथवा तीन-चार घंटे तक प्रयोग किये जाने पर खाने का तेल जहरीला हो जाता है। इससे मानव शरीर में लीवर सहित शरीर के कई अंगों में समस्याएं आ सकती है। ढाबे-रेस्टोरेंट वालों को चाहिए कि वे तेल के काले पड़ते ही उसे हटा देना चाहिए। भारत सरकार ने दूषित तेल का उपयोग रोकने के लिए ‘रूका’ यानी भोजन पकाने के तेल के उपयोग के लिए योजना शुरू की है, जिसके तहत तय एजेंसी ऐसा दूषित तेल जैव ईधन बनाने के लिए खरीद लेती हैं।
श्री सिंह ने बताया कि सामान्य तेल का टीपीसी मापन 10 फीसद से कम होता है और जलने पर बढ़ता जाता है। 25 फीसद से अधिक टीपीसी होने पर जले तेल का प्रयोग मानव जीवन के लिए खतरनाक है। टीपीसी मापने के लिए पहली बार राज्य सरकार द्वारा 40 हजार मूल्य का उपकरण उपलब्ध कराया गया है। इस उपकरण से जनपद के ज्योलीकोट, दोगांव, भुजियाघाट आदि स्थानों के ढाबों व रेस्टोरेंटों में प्रयोग किये जा रहे तेल की जांच की गई। जांच में अधिकांश जगह दूषित तेल प्रयोग किया जाता पकड़ा गया। पहली बार जागरूकता के दृष्टिकोण से होटल-ढाबे वालों को संबंधित जानकारियंा देकर जागरूक किया गया। आगे से कार्रवाई की जाएगी। शीघ्र नैनीताल मुख्यालय एवं अन्य स्थानों पर भी ऐसे ही अभियान चलाए जाएंगे।

यह भी पढ़ें : जिला चिकित्सालय में प्रसव के बाद महिला की मौत, दो माह में चौथा मामला, आक्रोश

नवीन समाचार, पिथौरागढ, 15 फरवरी 2020। पिथौरागढ जिला महिला चिकित्सालय में शनिवार को संस्थागत प्रसव के बाद एक महिला की मौत हो गई। इससे परिजन स्वाभाविक तौर पर खासे आक्रोशित हो गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी उनका साथ देते हुए अस्पताल परिसर में जोरदार नारेबाजी की और एसडीएम और सीएमएस का घेराव कर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। बताया गया है कि जिला चिकित्सालय में यह पिछले दो महीनों के भीतर प्रसव के बाद महिला की मौत का चौथा मामला है।
बताया गया है कि जनपद के सीमांत धारचूला के गोठी गाँव की मूल निवासी व यहां बिण में रहने वाली गर्भवती महिला रिदिमा गर्ब्याल को प्रसव पीड़ा होने पर शुक्रवार को जिला महिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया था जहां उसने सामान्य प्रसव यानी बिना ऑपरेशन के एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया मगर शनिवार सुबह उसे सांस लेने में दिक्कत हुई जिसके कुछ देर बार उसने दम तोड़ दिया। महिला की मौत से उसके परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। उधर चिकित्सालय की प्रभारी सीएमएस भागीरथी गर्ब्याल का कहना है कि महिला को खून की कमी थी और उसका हीमोग्लोबिन 5 ग्राम था। सामान्य प्रसव के बाद वह ठीक थी, लेकिन सुबह अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर उसे बचाने के पूरे प्रयास किये गए लेकिन उसे बचाया नही जा सका।

यह भी पढ़ें : ब्रेकिंग : उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल का हुआ गठन, स्वास्थ्य व्यवस्था पर यह पड़ेगा प्रभावित…

नवीन समाचार, देहरादून, 30 जनवरी 2020। उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल (उत्तराखंड आयुर्विज्ञान परिषद) का गठन कर दिया है। परिषद के लिए 11 चिकित्सकों को नामित किया गया है। इसमें दो चिकित्सक प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ से, चार आईएमए से जबकि पांच मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर हैं। इनमें डॉ.केसी पंत, डॉ.योगेंद्र सिंह, डॉ.आरएन सिंह, डॉ.गीता खन्ना, डॉ.अमित कंसल, डॉ.एनएस बिष्ट डॉ.रंजीत सिंह रैना, डॉ.मिर्जा आतिफ बेग, डॉ.संदर लाल जेठानी, डॉ.कमल सिंह बुटोला और डॉ.राम गोपाल नौटियाल के नाम शामिल हैं। इसके अलावा डॉ.नरेश नपल्च्याल, डॉ.अजय खन्ना और डॉ.अरविंद सिंह को चुनाव के जरिए काउंसिल के लिए चुना गया है।
गठित की गई उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल राज्य में प्रैक्टिस करने वाले सरकारी व प्राइवेट डॉक्टरों का पंजीकरण करने के साथ ही अस्पतालों में इलाज के दौरान गड़बड़ी की शिकायतों की जांच करेगी। उल्लेखनीय है कि राज्य में बीते एक साल से मेडिकल काउंसिल का गठन नहीं हो पा रहा था जिस वजह से अस्पतालों की जांच भी नहीं हो पा रही थी। हालांकि चिकित्सकों के पंजीकरण एवं रिन्यूअल के काम रजिस्ट्रार की ओर से किए जा रहे थे। सरकार ने मेडिकल काउंसिल के गठन के लिए कुछ समय पहले स्वास्थ्य महानिदेशालय से डॉक्टरों के नाम मांगे थे। डॉक्टरों के नाम मिलने के बाद अब काउंसिल के लिए उन्हें नामित कर दिया गया है। काउंसिल के लिए डॉक्टरों के नामित होने के बाद अब परिषद के अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा। इसके बाद परिषद विधिवत रूप से अपना काम शुरू कर देगी।

यह भी पढ़ें : अपने यहां भी ‘गब्बर’ वाला अस्पताल ! मुर्दे को 2 दिन तक जिंदा बताकर लूटा, महिला के शरीर में ही छोड़ दिए कांच

सरकारी अस्पताल में हुई सामान्य प्रसव में बताया बच्चे को उल्टा
नवीन समाचार, रुद्रपुर, 25 जनवरी 2020। अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म ‘गब्बर इज बैक’ में एक ऐसा अस्पताल दिखाया गया है जो मृत व्यक्ति का उपचार करके भी रुपए ऐंठने की कोशिश करता है। धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों के पेशे को ऐसी ही शर्मसार करने वाली हरकत शहर के नामी सबसे बड़े व सबसे महंगे-मेडीसिटी अस्पताल में सामने आई है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार अस्पताल ने एक युवक की मृत्यु के दो दिन बाद तक उसके उपचार के ऐवज में रुपए मांगता रहा। वहीं एक ब्यूटीशियन महिला अंजली रस्तोगी का चेहरा अस्पताल के अयोग्य चिकित्सक की वजह से कुरूप हो गया और उसका पूरा कॅरियर चौपट हो गया। यही नहीं अस्पताल ने उसके हाथ ही त्वचा के भीतर मौजूद दस कांच के टुकड़े निकाले बिना ही हाथ सिल दिया। इससे उसका हाथ काटने की नौबत ही आ गई। वहीं एक अन्य मामले में इसी अस्पताल ने एक महिला के प्रसव को कठिन बताया जबकि बाद में महिला को एक सरकारी अस्पताल में सामान्य प्रसव हुआ। ऐसी और भी कई अस्पताल की मानवता को शर्मसार करने वाली हरकतों का पीड़ित ‘ऑन स्क्रीन’ खुलकर बयान कर रहे हैं। ब्यूटीशियन महिला मंजुली रस्तोगी के मामले की शिकायत तो जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री के पोर्टल एवं प्रधानमंत्री तक की जा चुकी है, लेकिन पीड़ित को न्याय नहीं मिल पा रहा है, न ही ‘गब्बर अस्पताल’ द्वारा आगे भी जारी ऐसी ही गतिविधियों पर ही रोक लगी है।
रुद्रपुर निवासी बैंक कर्मी अजय रस्तोगी का कहना है कि उनकी पत्नी अंजली रस्तोगी 17 नवंबर 2019 को घर मंे ही मामूली तौर पर गिरकर घायल हो गई थी। इस घटना में अंजली रस्तोगी का सिर फटा था तथा हाथ और चेहरे में कांच के टुकड़े गढ़ गए थे। अजय अपनी पत्नी को लेकर रुद्रपुर के सबसे बड़े माने जाने वाले मेडी सिटी अस्पताल लेकर गए। उनका कहना है कि यहां उपचार के दौरान अंजली रस्तोगी के चेहरे पर आवश्यकता से कहीं अधिक 70 से 80 टांके लगा दिए गए और हाथ को भी सिल दिया गया। उसे दो दिन तक आईसीयू में भी रखा। इस दौरान चिकित्सालय में प्रॉपर स्टाफ नहीं था। पहले डा. रिजवान ने अंजली का उपचार किया जो एमबीबीएस नहीं बल्कि बीएचएमएस डॉक्टर बताए गए हैं। बाद में भी, यहां तक 9 दिन के बाद भी चिकित्सालय में कर्मी नहीं थे, उनकी पत्नी के पूरे टांके तक नहीं काटे जा सके। इस पर वे अपनी पत्नी को आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर गए। वहां एक्सरे में पता चला कि मंजुली के हाथों में चिकित्सकों की लापरवाही के कारण 10 कांच के टुकड़े अंदर थे और हाथ काटने तक की नौबत आ गई थी। जबकि मेडीसिटी में उनके हाथ का एक्सरे भी नहीं कराया गया था, और यहां तक कह दिया गया था कि हाथ में अंदर कांच रहने से कोई नुकसान नहीं होता। कांच के टुकड़े अपने आप बाहर आ जाएगा। अजय इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक कर चुके हैं, बावजूद घटना के करीब तीन माह गुजरने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सीएम पोर्टल में शिकायत पर बमुश्किल एल-3 स्तर पर जाने के बाद सीएमओ के स्तर से जांच कमेटी गठित की, जिस पर उन्होंने अविश्वास जताया है। उनका
वहीं इसी अस्पताल के एक अन्य पीड़ित सुनील गैरोला का कहना है कि उनके बच्चे को रिपोर्ट में भी बच्चा उल्टा दिखाया गया, जबकि बच्चा सरकारी अस्पताल में सामान्य प्रसव हुआ। एक अन्य पीड़ित नाजिम अंसारी ने बताया कि पांच फरवरी 2019 को उनके बड़े भाई मुन्ना के साथ किच्छा में दुर्घटना हुई। 4-5 दिन में सवा लाख की दवाइयों का बिल आया। 5 फरवरी से ही उसे वंेटीलेटर पर रखा गया था। 12 फरवरी को 1.71 लाख रुपए देने पर बॉडी देने की बात कही। पोस्टमार्टम में 36 घंटे पहले मृत्यु होने की बात प्रकाश में आई, जबकि चिकित्सकों ने 11 फरवरी की रात्रि 12 बजे यानी 8 घंटे पहले मृत्यु होने की बात कही। यानी दो दिन से मृत व्यक्ति का अस्पताल में उपचार किया जा रहा था। इस मामले में संबंधित अस्पताल का पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया। यदि उनका कोई पक्ष आएगा तो उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में सात घंटों के भीतर दो लोगों की डेंगू से मौत, संख्या पहुंची 20

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 18 अक्तूबर 2019। कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में डेंगू मौसम में ठंड आने के बावजूद खतरनाक स्तर पर जानलेवा बना हुआ है। यहां सात घंटे के भीतर दो लोगों की डेंगू के कारण मौत हो गई है। बावजूद शासन-प्रशासन इस मामले में अपेक्षित संवेदनशील नजर नहीं आ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार रात्रि करीब नौ बजे हल्द्वानी के एफ-15 जज फार्म निवासी 72 वर्षीय चंद्र सिंह मेहरा पुत्र स्वर्गीय मोहन सिंह की 24 हजार तक प्लेटलेट्स गिरने के बाद मृत्यु हो गई। स्वर्गीय मेहरा को पांच दिन पूर्व बुखार आने पर सेंट्रल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां उन्हें डेंगू होने की पुष्टि हुई थी। स्वास्थ्य में कुछ सुधार होने पर उन्हें घर भेज दिया था, लेकिन बृहस्पतिवार शाम उन्हें अचानक खून की उल्टियां होने लगीं। इस पर उन्हें नीलकंठ अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां भी उन्हें खून की उल्टियां हुईं और आखिर उन्होंने प्लेटलेट्स 24 हजार तक गिरने के बाद दम तोड़ दिया। वहीं शुक्रवार सुबह चार बजे शहर के राजपुरा निवासी एवं जगदंबा नगर स्थित सुबह अस्पताल के मेडिकल स्टोर में कार्यरत मात्र 24 वर्षीय युवक सौरभ कुमार सिंह ने प्लेटलेट्स 10 हजार तक गिरने के बाद अस्पताल में ही दम तोड़ दिया। इससे पहले मकसूद नाम के व्यक्ति की डेंगू से मृत्यु की खबर आई थी और शहर में पिछले कुछ दिनों में डेंगू से मरने वालों की संख्या 20 तक पहुंचनी बताई गई है। इस बारे में जिले की सीएमओ से बात करने का प्रयास किया गया, किंतु उनका मोबाइल नंबर स्विच ऑफ मिला।

यह भी पढ़ें : जानलेवा डेंगू पर हाईकोर्ट हुआ सख्त, सरकार व निगम प्रशासन के साथ याचिकाकर्ता से भी किया जवाब तलब, एक मंडल स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी को भी हुआ डेंगू !

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 सितंबर 2019। उत्तराखंड हाई कोर्ट की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ ने राज्य सरकार व नगर निगम से डेंगू के प्रभाव को रोकने व पीडितो के लिए किये गये उपायों पर सोमवार तक जवाब तलब किया है। साथ ही याची से भी पूछा है कि अभी तक कितने मरीजों की डेंगू से मौत हो चुकी है और कितने मरीजो को अस्पताल प्रशाशन ने भर्ती करने से मना किया है। इधर कुमाऊं रेंज के डीआईजी जगत राम जोशी को भी डेंगू की शिकायत हो गयी है। बताया गया है कि उनकी प्लेटलेट्स डेढ़ लाख के स्तर से नीचे आ गई थी, जिसके बाद उन्हें हल्द्वानी के सेंट्रल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनके स्वास्थ्य में सुधार बताया गया है।

नोट: पंचायत चुनाव में ‘सबसे सस्ते’ विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें हमारे मोबाइल-व्हाट्सएप नंबर 8077566792 अथवा 9412037779 पर

मामले के अनुसार यूथ बार एसोसिएशन आफ इंडिया ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि हल्द्वानी शहर में भारी संख्या में लोग डेंगू से पीड़ित हैं अतः उनके इलाज के लिए तुरंत एक मेडिकल एक्सपर्ट की टीम गठित की जाए। ब्लड बैंक की व्यव्स्था की जाय। याचिकाकर्ता की ओर से डेंगू पीड़ितों को सभी तरह की चिकित्सा व स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से इस समस्या से निजात दिलाने के लिए हरसंभव उपचार तथा व्यवस्था किये जाने की मांग की गई । याचिकाकर्ता की ओर से अखबारों में छपे समाचार प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि यहां पर डाक्टरों और मेडिकल सुविधाओं की भारी कमी है। जिससे मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है अस्पताल मरीजो को भर्ती भी कर रहे है। याचिकर्ता ने डेंगू से मरने वाले परिजनों को लाख रूपये का मुआवजा दिए जाने की भी प्रार्थना की है।

यह भी पढ़ें : पहली बार पहाड़ चढ़ आया जानलेवा डेंगू, नैनीताल में एक को पुष्टि, पांच अन्य भी संदिग्ध

नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अगस्त 2019। पर्वतीय पर्यटन नगरी नैनीताल में एक मरीज को डेंगू की पुष्टि होने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। नगर में डेंगू की पुष्टि का यह अपनी तरह का अब तक का पहला मामला बताया जा रहा है। वहीं पांच अन्य मरीजों में भी डेंगू जैसे ही लक्षण देखे गये हैं, इन्हें डेंगू होने की पुष्टि करवाई जा रही है। अलबत्ता, जिस मरीज को डेंगू की पुष्टि हुई है, वह गत दिनों दिल्ली गया हुआ था, लिहाजा माना जा रहा है कि उसे वहीं से डेंगू के मच्छरों के द्वारा काटे जाने से यह संक्रमण हुआ हो। वहीं अन्य संदिग्धों के भी हाल में हल्द्वानी-रुद्रपुर आदि गये होने की बात कही जा रही है। साथ ही पहाड़ तक चढ़ आये मच्छरों में भी डेंगू वाले मच्छर होने की भी आशंका व्यक्त की जा रही है। बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में डा. एमएस दुग्ताल डेंगू के संदिग्ध रोगियों को देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस एक मरीज में डेंगू की पुष्टि हुई है, वह प्राइवेट वार्ड में रखा गया है। वैसे चिकित्सालय में डेंगू के रोगियों के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था है। पुष्टि होने पर उन्हें डेंगू वार्ड में रखवाया जाएगा।
बीडी पांडे जिला चिकित्सालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार तीन दिन पूर्व यानी 27 अगस्त को जिला चिकित्सालय में नगर के रॉयल कंपाउंड निवासी एक 32 वर्षीय मरीज बुखार से पीड़ित होकर पहुंचा। अस्पताल में कराये गये टेस्ट में उसे डेंगू की पुष्टि हुई। पुर्नपुष्टि के लिए उसका हल्द्वानी में पुनः टेस्ट कराया गया, जहां उसे डेंगू होने की पुष्टि हुई। वहीं इधर आज शुक्रवार को चिकित्सालय में 5 रोगी, घोड़ाखाल व खुर्पाताल निवासी दो 14-14 वर्ष की उम्र की किशोरियां, रॉयल होटल कंपाउंड निवासी एक 21 वर्षीया युवती, गरमपानी खैरना निवासी एक 60 वर्षीय बुजुर्ग तथा डीएसबी परिसर के पास रहने वाले एक 46 वर्षीय व्यक्ति में भी डेंगू जैसे लक्षण पाये गये हैं। डा. दुग्ताल ने बताया कि इनके नमूनों को जांच के लिए हल्द्वानी भेजा गया है। यह भी सच्चाई है कि भले नैनीताल एक सर्द नगर है, लेकिन अब यहां भी मच्छर दिखने लगे हैं। वहीं गरमपानी जैसी घाटियों वाले स्थानों पर तो आमतौर पर भी मच्छर होते ही हैं।

इस वर्ष डेंगू का कहीं रिकॉर्ड न बन जाए

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष नैनीताल जनपद में अभी तक डेंगू के 178 मामले सामने आ चुके हैं। जबकि पिछले साल 2018 के पूरे साल में डेंगू के 174 मामले ही आये थे। वहीं अभी तक डेंगू के सबसे ज्यादा साल 2017 में 297 मरीज आये थे। इसके अलावा 2013 में इस बीमारी के 25, 2014 में 17, 2015 में 36 और 2016 में 112 मरीज आये थे।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में बढ़ा डेंगू का डंक ! एसटीएच के दो रोगियों की मौत !! पुलिस के दो सब इंस्पैक्टरों को भी हुआ डेंगू !!!

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 27 अगस्त 2019। मंगलवार को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज करा रहे दो डेंगू के रोगियों की मौत होने की बुरी व चिंताजनक खबर आई है। पहला मामला शहर के काबुल का बगीचा निवासी शमीम सिद्दीकी की 37 वर्षीया पत्नी आशिया सिद्दीकी की मौत का है। महिला के पति का आरोप है कि अस्पताल के चिकित्सकों ने उसकी सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती पत्नी का उपचार करने के बजाय उसे बाहर रेफर करवा दिया। वह उसे राममूर्ति अस्पताल लेकर जा रहे थे कि रास्ते में ही आशिया ने दम तोड़ दिया। इसके अलावा इन्द्रानगर निवासी 10 वर्षीय बालक शहजान की भी मौत हो गयी है। बताया गया है कि उसका उपचार भी सुशीला तिवारी अस्पताल में चल रहा था। परिजनों का दावा है कि शहजान को भी डेंगू था। इन दो मौतों के साथ सुशीला तिवारी अस्पताल प्रशासन तथा जिला प्रशासन के उन दावों की कलई खुल गयी है, जिसमें डेंगू मरीजों के लिए पूरे इंतजाम होने की बात कही जा रही है। अलबत्ता, सुशीला तिवारी अस्पताल के चिकित्सकों ने पिछले 24 घंटे में किसी मरीज की डेंगू से मौत होने से इंकार किया है।
इधर पुलिस के दो सब इंस्पेक्टरों को भी डेंगू होने की खबर है। बताया गया है कि इनमें से एक बनभूलपुरा तो दूसरे मुखानी थाने मेें तैनात हैं। दोनों का उपचार निजी अस्पताल में चल रहा है।

यह भी पढ़ें : ‘स्तन कैंसर’ के प्रति जागरूकता के लिए गुलाबी रंग में रंगा नैनीताल…

-देश में हर 4 मिनट में एक महिला को स्तन कैंसर होने और हर 13 मिनट में एक महिला की मौत होने के भयावह आंकड़ों से लोगों को कराएंगे जागरूक
-2.65 लाख महिलाओं के साथ ही 20,200 पुरुषों को भी स्तन कैंसर, अधिक उम्र में शादी व बच्चों को दूध न पिलाना प्रमुख कारण
नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अक्टूबर 2019। रविवार को सरोवर नगरी नैनीताल का एक बड़ा वर्ग महिलाओं के साथ ही पुरुषों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे ‘स्तन कैंसर’ के प्रति आम जन को जागरूक करने के उद्देश्य से गुलाबी रंग में रंगा नजर आया। इस दौरान लायंस क्लब-गोल्ड नैनीताल के तत्वावधान में ‘रन फॉर कॉज’ का आयोजन किया गया। स्तन कैंसर के प्रति उपस्थित लोगों को जागरूक किया गया। आयोजन में शामिल हुए बच्चों में से विपुल साह, अश्वनी जायसवाल, आयुषी जोशी, अलीना, कविता टम्टा, दिव्यांशु तिवारी, कमल खम्पा, तनूजा साह, भावना बिष्ट, राहुल पाठक, मनीष कुमार व करुण्या वर्मा आदि 20 बच्चों को लकी ड्रॉ के माध्यम से तथा उत्कृष्ट बैनर बनाने के लिए खुशी वर्मा को पुरस्कृत किया गया, तथा विशिष्टजनों को नई पहल करते हुए प्रतीक चिन्ह के रूप मंे अंगवस्त्र के साथ तुलसी के पौधे भेंट किये गये।
‘रन फॉर कॉज’ में नगर एवं आसपास के करीब 21 स्कूलों के बच्चे एवं अन्य लोग मल्लीताल पंत पार्क से पैदल एवं साइकिलों पर माल रोड होते हुए डीएसए मैदान तक रैली के रूप में पहुंचे। डीएसए मैदान में आयोजन के प्रणेता लखनऊ के डा. आनंद मिश्रा, लायंस क्लब के गवर्नर डा. मनोज रुहेला व सीएमओ डा. भारती राणा आदि ने अपने संबोधनों में बताया कि बताया कि देश में हर 4 मिनट में एक महिला को स्तन कैंसर हो रहा है और हर 13 मिनट में एक महिला की स्तन कैंसर के कारण मौत हो रही है। यहीं नहीं देश में अधिकांशतया 30 से 50 की उम्र की 2.65 लाख महिलाओं के साथ ही 20,200 पुरुषों को भी स्तन कैंसर है।हर माह एक बार अपने स्तनों की स्वयं जांच करके महिलाएं समय से स्तन कैंसर की जल्दी पहचान कर सकती हैं, जिसके बाद इसका उपचार संभव है। डीएम सविन बंसल ने कहा कि स्तन कैंसर के साथ ही स्वस्थता एवं नशे के प्रति जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इस आयोजन में सभी स्कूलों को आवश्यक रूप से प्रतिभाग करने के आदेश जारी किये गये थे। उन्होंने अन्य स्वयं सेवी संस्थाओं से भी ऐसे ही उद्देश्यों के लिए आगे बढ़कर कार्य करने का आह्वान किया। डा. अजय रावत ने इस आयोजन की सर्वप्रमुख भूमिका निभाने वाली लायंस क्लब की अध्यक्ष आशा शर्मा को ‘लेडी ऑफ पिंक माउंटेन’ की संज्ञा दी। सुनीता बुटोला ने नैनीताल में ‘पैलिएटिव केयर’ की यूनिट खोलने एवं कैंसर के लिए दर्दरोधी ‘मॉर्फीन’ दवा उपलब्ध कराने की घोषणा की। कार्यक्रम में अम्तुल्स पब्लिक स्कूल के मुकेश कुमार द्वारा तैयार ‘थीम सांग’ को काफी सराहना मिली। आयोजन में नीलू एल्हेंस, गीता साह सहित क्लब की वर्षांजलि श्रीवास्तव, मोनिका साह, राखी साह, ईशा साह, संध्या डालाकोटी, बिड़ला विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य अनिल शर्मा, एलपीएस के प्रधानाचार्य भुवन त्रिपाठी, राम लाल एंड ब्रदर्श के पुनीत टंडन, डा. मनोज बिष्ट, लीला बिष्ट, मुन्नी तिवारी व रेखा त्रिवेदी आदि की भी उल्लेखनीय भूमिका रही। संचालन मीनाक्षी कीर्ति व दीपक कुमार ‘भोलू’ ने किया।

आम जन की भागेदारी शून्य

नैनीताल। किसी भी अन्य कार्यक्रम की तरह आज के कार्यक्रम में आम जन की भागेदारी शून्य रही। यदि कार्यक्रम में डीएम के ‘आवश्यक रूप से सभी स्कूलों को भागीदारी सुनिश्चित करने के’ आदेश न होते तो कार्यक्रम में आम लोग ढूंढने को भी नहीं मिलती। कार्यक्रम में काफी उपस्थिति रही, लेकिन वह स्कूली बच्चों एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा कुछ सामाजिक संगठनों से जुड़ी महिलाओं की रही। आयोजक क्लब की सदस्य भी पूरी संख्या में नहीं दिखीं।

यह भी पढ़ें : 13 को गुलाबी रंग में रंगकर इस बड़े ‘कॉज के लिए वॉक’ करेगा नैनीताल, भयावह है कारण…

-देश में हर 4 मिनट में एक महिला को स्तन कैंसर होने और हर 13 मिनट में एक महिला की मौत होने के भयावह आंकड़ों से लोगों को कराएंगे जागरूक
-2.65 लाख महिलाओं के साथ ही 20,200 पुरुषों को भी स्तन कैंसर, अधिक उम्र में शादी व बच्चों को दूध न पिलाना प्रमुख कारण

स्तन कैंसर पर जागरूकता कार्यक्र्रम की जर्सी को जारी करते लायंस क्लब के सदस्य।

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अक्तूबर 2019। सरोवर नगरी में आगामी 13 अक्टूबर को ‘स्तन कैंसर’ के प्रति आम जन को जागरूक करने के उद्देश्य से लायंस क्लब नैनीताल के तत्वावधान में ‘रन फॉर कॉज’ का आयोजन होने जा रहा है। इस मौके पर नगर की माल रोड व डीएसए मैदान सहित अन्य प्रमुख स्थानों को महिलाओं के प्रतीक माने जाने वाले ‘गुलाबी रंग’ से रंगा जाएगा, तथा सुबहह सात बजे से नगर एवं आसपास के करीब 21 स्कूलों के बच्चे एवं अन्य लोग मल्लीताल पंत पार्क से पैदल एवं साइकिलों पर माल रोड होते हुए डीएसए मैदान तक रैली के रूप में आएंगे और डीएसए मैदान में स्तन कैंसर के प्रति उपस्थित लोगों को जानकारी दी जाएगी।
बुधवार को नगर के मल्लीताल स्थित न्यू क्लब में लायंस क्लब के सदस्यों ने इस आयोजन की जानकारी दी। क्लब की अध्यक्ष आशा शर्मा ने बताया कि देश में हर 4 मिनट में एक महिला को स्तन कैंसर हो रहा है और हर 13 मिनट में एक महिला की स्तन कैंसर के कारण मौत हो रही है। यहीं नहीं देश में अधिकांशतया 30 से 50 की उम्र की 2.65 लाख महिलाओं के साथ ही 20,200 पुरुषों को भी स्तन कैंसर है। ऐसे भयावह आंकड़ों से इस दौरान नगर वासियों को जागरूक किया जाएगा। बताया कि अधिक उम्र में शादी करना एवं बच्चों को दूध न पिलाना स्तन कैंसर होने के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी बीमारी को जाहिर नहीं करती हैं, ऐसे में पुरुष भी इस बारे में जागरूक होकर घर की महिलाओं को इस जानलेवा बीमारी से बचा सकते हैं। बताया कि उत्तराखंड में महिलाओं में स्तन कैंसर के साथ सर्वाइकल यानी गर्भाशय का कैंसर सर्वाधिक हो रहा हैं इस मौके पर क्लब की नीलू एल्हेंस, गीता साह, डा. अजय रावत, डा. मनोज बिष्ट, काया आहूजा, सुनीता वर्मा व ज्योति खन्ना आदि सदस्य भी मौजूद रहे।

 

यह भी पढ़ें : सरकारी अस्पतालों को अब नियमों की अनदेखी पड़ेगी महंगी, डीएम ने बनायी लगाम लगाने को नई व्यवस्था..

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अगस्त 2019। बेहतर जनस्वास्थ्य एवं लोगों को सरकारी अस्पतालों मे हो रही दिक्कतों के समाधान के लिए डीएम सविन बंसल ने जिलास्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने की नई पहल कर दी है। श्री बसंल ने बताया कि कोई भी मरीज या तीमारदार अस्पताल की सेवाओं, डाक्टरों एवं कर्मचारियों के व्यवहार, सफाई व्यवस्था, बाहर से दवा लिखने, सुविधा शुक्ल मांगने, सही तरह से इलाज न करने, अनावश्यक परेशान करने, आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी सुविधा न देने, खराब गुणवत्ता का भोजन आपूर्ति करने, जेनेरिक दवाइयां न देने के अलावा अस्पताल की अन्य अव्यवस्थाओं से असंतुष्ट है तो वह कंट्रोल रूम के नंबर 05942-231178 या 237779 अथवा 1077 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यहां आने वाली शिकायतों पर दोषियों के विरुद्ध यथासमय उपयुक्त कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने हल्द्वानी के बेस चिकित्सालय व महिला चिकित्सालय, रामनगर के रामदत्त जोशी चिकित्सालय एवं मुख्यालय के रैमजे चिकित्सालय सहित जिले के अन्य सभी सरकारी अस्पतालों मे कंट्रोल रूम के नम्बर चस्पा करने के आदेश भी जारी किए है। यह व्यवस्था तीन दिन के भीतर प्रभावी कर दी जाएगी।

यह भी पढ़ें : कर्नाटक के झोलाछापों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर नैनीताल की जनता से लाखों की ठगी…

-एसडीएम के संज्ञान में मामला आने से रोका गया स्वास्थ्य परीक्षण, नहीं दिखा पाये इजाजत के कागजात, एसडीएम ने दिए जांच के आदेश

धारी बाजार में स्वास्थ्य परीक्षण करते झोलाछाप डॉक्टर।

दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली (नैनीताल) 17 अगस्त 2019। तहसील मुख्यालय के पास धारी बाजार में बिना अनुमति के स्वास्थ्य परीक्षण कर जनता को लाखों रुपए की ठगी करने का मामला प्रकाश में आया है। एसडीएम ने मामला संज्ञान में आने के बाद स्वास्थ्य शिविर को रुकवा दिया, और भीमताल के थाना प्रभारी को जाँच के आदेश दे दिए है। स्वास्थ्य परीक्षणकर्ता मूल रूप से कर्नाटक राज्य के बताये गये हैं। वे एक ही मशीन से ट्यूमर, पथरी, थाइराइड, शरीर के दर्द, लिकोरिया सहित तमाम रोगों की जांच कर उन्हें ठीक करने का दावा कर रहे थे। उनके साथ एक स्थानीय आशा कार्यकत्री की संलिप्तता भी नजर आ रही है, जो काफी समय से उनके साथ रहकर उन्हें स्थानीय स्तर पर सहयोग कर रही थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार को जनपद के तहसील धारी के बाजार में बाहरी व्यक्तियों द्वारा बिना किसी की अनुमति के स्वास्थ्य की विभिन्न जांच किये जाने का मामला प्रकाश में आया। एसडीएम विजयनाथ शुक्ला ने मामला संज्ञान में आने पर राजस्व उपनिरीक्षक को मौके पर भेज कर जानकारी मांगी। लेकिन संबंधित व्यक्ति कोई अनुमति पत्र व डॉक्टरों की डिग्री नही दिखा पाए। इस पर उन्हें पूछताछ के लिए तहसील मुख्यालय लाया गया। एसडीएम शुक्ला ने बताया स्वास्थ्य परीक्षण करने वाले लोग मूल निवासी से कर्नाटक के है पर अब आंध्र प्रदेश में रहते है। आजकल ये लोग भीमताल के तल्लीताल डांठ के पास हरीश पांडे नाम के व्यक्ति के मकान में किराए में रहते है। उनके पास सीएमओ नैनीताल का कोई अनुमति पत्र नही था, साथ ही वे मशीन के जाँच व उसके परिणामों की सत्यता की पुष्टि नहीं कर पाये। बताया गया है कि अभी तक वे क्षेत्र के परबडा, पोखराड, गजार, कसियालेख व मझेड़ा आदि गांवों में कैम्प लगाकर लोगों को लाखों रुपए का चूना लगा चुके हैं। एसडीएम ने कहा कि किसी को भी बिना अनुमति स्वास्थ्य जांच कराने नहीं दिया जाएगा।

बिना अनुमति के कोई भी ऐसे कैम्प लगाकर ना तो दवा बेच सकता है ना ही स्वास्थ्य परीक्षण कर सकता है। यह गैरकानूनी है। अभी मुझे इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं है। उपजिलाधिकारी के माध्यम से मामले की जानकारी मिली है। जैसे ही रिपोर्ट मिलती है, आगे की कार्यवाही की जाएगी।
भारती राणा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नैनीताल।

यह भी पढ़ें : यहां आये तो नहीं होगा हृदय रोग का खतरा, कई का तो हृदयाघात के बाद भी हुआ मुफ्त उपचार…

-वृहद हृदय चिकित्सा जांच शिविर में उमड़े 200 से अधिक हृदय रोगी
-जिला चिकित्सालय में आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकृत सुबह अस्पताल ने किया आयोजन

जिला चिकित्सालय में वृहद हृदय चिकित्सा जांच शिविर का शुभारंभ करते मुख्य अतिथि।

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जुलाई 2019। ‘विश्व हेपेटाइटिस दिवस’ के अवसर पर रविवार को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत हल्द्वानी के जगदंबा नगर स्थित ‘सुबह अस्पताल’ के तत्वावधान में ‘वृहद हृदय चिकित्सा जांच शिविर’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चिकित्सालय के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. यतींद्र बहुगुणा के नेतृत्व में सर्जन डा. राहुल गंगवार व जनरल फिजीशियन डा. बृजेश बिष्ट के द्वारा शिविर में पंजीकृत 200 से अधिक हृदय रोगियों की निःशुल्क शुगर यानी मधुमेह व यूरिक एसिड की जांच, चिकित्सकीय परीक्षण एवं निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। बताया गया कि समय-समय पर ऐसी जांचें कराने पर हृदयाघात का खतरा काफी कम हो जाता है।
इससे पूर्व कुमाऊं मंडल की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशक डा. आरती ढोंढियाल, पत्रकार नवीन जोशी ने बतौर मुख्य अतिथि जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल के साथ शिविर का फीता काटकर औपचारिक शुभारंभ किया। बताया गया कि सुबह अस्पताल में मात्र 4500 रुपए में हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श, इको कार्डियोग्राफी, ईसीजी, टीएमटी, लिपिड प्रोफाइल-कोलेस्ट्रोल, ट्राइग्लिसराइड्स, लीवर टेस्ट, रक्त में औसत शुगर, यूरिक एसिड, हीमोग्लोबिन तथा टीएसएच आदि जांचें कराई जाती हैं। आयोजन में जिला चिकित्सालय की सिस्टर शशिकला पांडे, यूनुस, प्रतिभा, उर्मिला व स्नेहा तथा सुबह अस्पताल के शंकर धपोला, ईशा ममगाई, सरिता गोस्वामी, भानु व कुसुम आदि ने सहयोग किया।

आयुष्मान कार्ड से कई हृदयाधात के रोगियो का बिना खर्च दी नई जिंदगी

नैनीताल। जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल ने बताया कि जिला चिकित्सालय में आये आधा दर्जन से अधिक हृदयाघात के रोगियों को पांच-छह दिन तक यहीं प्राथमिक उपचार देने के बाद आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकृत सुबह अस्पताल में एंजीयोग्राफी व अन्य चिकित्सा सुविधाएं बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराई गयीं। अब ये सभी हृदय रोगी पूरी तरह रोग मुक्त जीवन बिता रहे हैं। शिविर के दौरान भी ऐसे दो लोग मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि उनका पूरी तरह निःशुल्क उपचार हुआ, और अब वे हृदयाघात के बावजूद पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी: 24 घंटे काम करेगी नैनीताल जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब, पहली बार पहाड़ के अस्पताल में एसी, बॉयलर, एलईडी टीवी व बहुत कुछ

-महिला चिकित्सालय हेतु 13.09 लाख व पुरुष चिकित्सालय के लिए 55 लाख रुपए के व्यय को भी मिली स्वीकृति

जिला चिकित्सालय प्रबंधन समिति की बैठक लेते डीएम सविन बंसल।

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 जुलाई 2019। मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला पुरूष व महिला चिकित्सालय की पैथोलॉजी लैब दिन के पूरे 24 घंटे चला करेगी। इस हेतु डीएम सविन बंसल ने बुधवार को दोनों चिकित्सालयों की प्रबंधन समिति की बैठक लेते हुए यह तय किया तथा इस हेतु दो लैब तकनीशियनों की नियुक्ति को मंजूरी दी। साथ ही आगामी एक अगस्त से अस्पताल में तीन पर्ची सिस्टम लागू करने तथा चिकित्सकों से जेनेरिक दवाइयां ही लिखने के निर्देश दिये। इसके साथ ही उन्होंने गत दिनों अपने चिकित्सालय के दौरान प्रकाश में आई समस्याओं के समाधान की दिशा में जिला महिला चिकित्सालय के जच्चा-बच्चा वार्ड में एसी लगाने के साथ ही प्रसव कक्ष के शौचालय व बेबी रूम की मरम्मत करने, पार्टेशन एलईडी लाइट एवं उच्च क्षमता का एसी लगाने के निर्देश भी दिये। इसके अलावा उन्होंने चिकित्सालय में एक बॉयलर तथा आटोक्लेव व बॉयलट्राली खरीदने की स्वीकृति के साथ ही पुरूष चिकित्सालय के ऑपरेशन थियेटर से गुजर रही सीवर लाईन को बाहर कराने के लिए जिला योजना से धनराशि देने की बात भी कही है। उन्होंने चिकित्सालय को एक और एम्बुलेन्स देने की बात भी कही।

B.D.Pandey District Hospital Nainital

साथ ही दोनों चिकित्सालयों में आकस्मिक कक्ष के बाहर स्टैंड लगाकर शिकायत पंजिका तुरंत रखने तथा जनता को उपलब्ध दवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने हेतु 55 इंच का एलईडी डिस्पले स्क्रीन लगाने, पुरूष चिकित्सालय के आपातकालीन कक्ष के बाहर शेड व 15 क्रोम प्लेटेड कुर्सियां लगाने तथा दोनों चिकित्सालयों के शौचालय, पतनालों की मरम्मत, नई अल्ट्रा साउंड व एक्सरे मशीन खरीदने का प्रस्ताव शासन को भेजने, चिकित्सालय में एक एक्सरे तकनीशियन, 2 लैब तकनीशियन, 1 वाहन चालक, कनिष्ठ लिपिक, सुरक्षा कर्मी, आउटसोर्स करने, सभी वार्डों में गरम पानी हेतु बिजली से चलने वाली केेतली तथा अधिक क्षमता के एसी लगाने को भी स्वीकृति दी गई, साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी मुख्य कोषाधिकारी व ई- डिस्ट्रिक मैनेजर की क्रय समिति भी गठित कर दी। साथ ही डीएम ने लोनिवि के अधिशासी अभियंता को महिला चिकित्सालय के वर्षों से लंबित पड़े निर्माणाधीन प्राईवेट वार्ड के कमरों का निर्माण तुरंत प्रारम्भ करने व खासकर इसमें ऑपरेशन थियेयर व प्राईवेट वार्ड के कमरों को भूकम्परोधी बनाने को भी की। कहा कि इस हेतु धनराशि जिला योजना से उपलब्ध कराई जायेगी। इस दौरान प्रबंध समिति द्वारा बीडी पांडे महिला चिकित्सालय हेतु 13 लाख 9 हजार तथा पुरुष चिकित्सालय में विभिन्न सामग्री क्रय करने हेतु 55 लाख व्यय स्वीकृति दी गई। यह भी तय हुआ कि पुरुष चिकित्सालय के लघुु निर्माण व मरम्मत कार्य ग्रामीण अभियंत्रण सेवा तथा महिला चिकित्सालय के लघु निर्माण व मरम्मत कार्य लोनिवि द्वारा किये जायंगे। डीएम ने सदस्यों की जनऔषधि केंद्र में जरूरत की दवाऐं उपलब्ध न होने की शिकायत पर उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा. रश्मि पंत व ड्रग निरीक्षक मीनाक्षी को जांच कर रिर्पोट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। उन्होंने चिकित्सालयों में उपलब्ध धनराशि व्यय लेखा सही न होने पर चार्टड एकाउंटेंट बदलने के निर्देश दिये तथा चिकित्सालयों में उपलब्ध दवाओं की अद्यतन सूची तलब की और वीआईपी चिकित्सा सेल हेतु अलग से चिकित्सकों की तैनाती हेतु प्रस्ताव बनाकर शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश सीएमओ को दिये ताकि शासन से वीआईपी सेल हेतु अलग से चिकित्सकों की मांग की जा सके। बैठक में सीएमओ डा. भारती राणा, पीएमएस पुरुष डा. तारा आर्या, महिला डा. वीके पुनेरा, एसीएमओ डा. टीके टम्टा, मुख्य कोषाधिकारी अनीता आर्या, डा. द्रोपदी गर्ब्याल सहित मो. उस्मान, बीएस बसनाल, सदस्य अरविंद पडियार, मनोज जोशी व कंचन भंडारी आदि लोग मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : डीएम की पत्नी आम नागरिक की तरह गईं जिला अस्पताल तो अपने कक्ष से नदारद चिकित्सक ने कहा, अंदर क्यों आईं…

-आम नागरिक की तरह बिना पहचान बताए अपने बच्चे को दिखाने अस्पताल गई थीं डीएम की पत्नी, बच्चे को गोद में लेकर करीब पौने घंटे अस्पताल में यहां से वहां भटकती रहीं

जिला अस्पताल में पर्ची लेने के लिए लाइन में बच्चे को गोद में लेकर खड़ी डीएम की पत्नी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जुलाई 2019। नैनीताल जनपद के डीएम सविन बंसल की पत्नी सुरभि बंसल शुक्रवार को आम नागरिक की तरह बिना अपनी पहचान बताये अपने 8-10 माह के बच्चे को दिखाने जिला मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला पुरुष चिकित्सालय पहुंचीं तो वहां की अव्यवस्थाएं तार-तार हो बेपर्दा हो गयीं, कि यहां चिकित्सक किस तरह अपने कक्ष से नदारद रहते हैं और दुःख-तकलीफ की स्थितियों में पहुंचे आम नागरिकों से किस तरह का व्यवहार करते हैं। यहां तक कि अपने कक्ष से गायब चिकित्सक ने तो डीएम की पत्नी को डपट ही दिया कि जब कक्ष में चिकित्सक नहीं थे, तो वे कक्ष में भीतर कैसे आ गयीं। इस दौरान बच्चे को दिखाने के लिए उसे गोद में लेकर वह करीब पौने घंटे अस्पताल में यहां से वहां, कभी नीचे तो कभी ऊपर और कभी नये तो कभी पुराने खंड में चिकित्सकों की तलाश में बिना किसी सहायता के भटकती रहीं। यह स्थिति तब है, जबकि डीएम सविन बंसल ने केवल पांच दिन पूर्व ही चिकित्सालय का निरीक्षण किया था और व्यवस्थाओं में बेहतरी के लिए कई सुझाव दिये थे।
हुआ यह कि डीएम सविन बंसल के पुत्र सनव को बाल रोग को दिखाने के लिए बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचीं। इस दौरान उनके साथ केवल एक सुरक्षा कर्मी, बिना वर्दी के था, साथ ही डीएम के भी अभी जनपद में नये आये होने की वजह से भी उन्हें चिकित्सालय में कोई नहीं जानता था। इस दौरान उन्होंने आम नागरिकों की तरह जिला पुरुष चिकित्सालय के पंजीकरण काउंटर में लाइन में खड़े होकर बच्चे के नाम की पर्ची ली। यहां से उन्हें बताया गया कि बच्चे को दिखाने के लिए नीचे, गेट के पास के ब्लड बैंक वाले खंड के निचले तल में बाल रोग को दिखाएं। सुरभि वहां पहुंचीं तो बाल रोग विशेषज्ञ अपने कक्ष में नहीं थे। वहां से पूछे जाने पर बताया गया कि ऊपर मुख्य भवन में पर्ची काउंटर के सामने ही बाल रोग विशेषज्ञ डा. एमएस रावत देखेंगे। यानी पर्ची काउंटर से सही जानकारी नहीं मिली। यहां डा. रावत को दिखाने के बाद उन्हें बच्चे को एलर्जी की शिकायत चर्म रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी गयी। पर्ची काउंटर के बगल के कक्ष के बाहर चर्म रोग विशेषज्ञ का बोर्ड लगा था किंतु वहां चिकित्सक नहीं थे। पूछने पर बताया गया कि चर्म रोग विशेषज्ञ डा. अजय नैथानी नये वाले खंड में बैठते हैं। बच्चे को गोद में लेकर वे वहां गईं तो वहां भी चिकित्सक अपने कक्ष में नहीं थे। तब तक बाल रोग विशेषज्ञ को अंदाजा हो गया था कि वे कोई ‘वीआईपी’ हैं। पता चलने पर वे खुद डा. नैथानी को कहीं से ढूंढ-बुला कर अपनी सीट पर ले कर आये, लेकिन डा. नैथानी ने सुरभि को यह कहते हुए डपट दिया कि जब चिकित्सक कक्ष में नहीं थे तो वे भीतर कैसे चली आईं।
इस पर पूछे जाने पर डीएम सविन बंसल ने कहा कि जिला चिकित्सालय का इसी तरह औचक निरीक्षण करवाएंगे। इससे पता चलता है कि चिकित्सालय की व्यवस्थाएं व चिकित्सकों का आम मरीजों के प्रति कैसा व्यवहार है। पुनरावृत्ति पाये जाने पर चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

यह भी पढ़ें : काश सभी जगह डीएम के ऐसे ही दौरे हों….

-डीएम के दौरे के बाद बहुरेंगे जिला अस्पताल के दिन, लगेंगे एसी, इलेक्ट्रिक कैटल, कुर्सियां, नयी ऑपरेशन थियेटर यूनिट, और भी बहुत कुछ

-चिकित्सालय के आम रोगियों को असुविधा से बचाने के लिए वीआईपी रोगियों के लिए अगले से यूनिट स्थापित करने को भी डीएम ने सीएमओ से प्रस्ताव बनाने को कहा

बृहस्पतिवार को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में निरीक्षण के दौरान जानकारियां लेते डीएम सविन बंसल।

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जुलाई 2019। अधिकारियों के दौरों-निरीक्षणों से जनता को कितना लाभ मिल सकता है, नैनीताल के डीएम सविन बंसल का बृहस्पतिवार को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय का निरीक्षण इसका प्रतिमान एवं दूसरे अधिकारियों के लिए मिसाल हो सकता है। डीएम ने स्वयं पहल करते हुए जिला बीडी पांडे जिला चिकित्सालय को वहां के चिकित्सकों-रोगियांे-तीमारदारों के मांगे बिना ही, उनकी जरूरतों को समझते हुए कई तोहफे देने के ऐलान किये। इस कड़ी में अस्पताल में सर्जिकल व मेडिकल वार्डों में दो-दो सर्वाधिक क्षमता के स्पिलिट एसी एवं गर्म पानी व स्वयं चाय बनाने के लिए दो-दो इलेक्ट्रिक कैटल, स्टाफ के चाय बनाने के लिए भी ऐसी ही इलेक्ट्रिक कैटल, तीमारदारों के बैठने के लिए बाहर 10-15 अच्छी क्रोम प्लेटेड कुर्सियां, शेड, शौचालय के बाहर भी बारिश से बचने के लिए शेड, अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों को प्रदर्शित करने के लिए बाहर 55 इंच की बड़ी स्क्रीन का डिस्प्ले, मरीजों के लिए उपलब्ध रैक आदि पर प्लास्टिक कोटेड पेंट कराने, ऑपरेशन थियेटर में पुराने उपकरणों की जगह नये उपकरण एवं एक अतिरिक्त ऑपरेशन थियेटर की यूनिट स्थापित करने, सुरक्षा व्यवस्था के लिए उपनल के माध्यम से पर्याप्त कर्मियों की तैनाती एवं चिकित्सालय में कार्मिकों की कमी दूर करने के निर्देश दिये। साथ ही खास बात, मुख्यालय में वीआईपी रोगियों की देखरेख के लिए एक अलग से यूनिट स्थापित करने की बात भी डीएम ने कही, ताकि चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्सकों के वीआईपी की खिदमत में जाने के कारण आम रोगियों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इस हेतु सीएमओ से प्रस्ताव बनाने को कहा। वहंीं चिकित्सालय की पीएमएस डा. तारा आर्या द्वारा ईएमओ यानी आपातकालीन रोगियों को देखने वाले चिकित्सकों की कमी की समस्या बताने पर उन्होंने कहा, सप्ताह-सप्ताह भर के लिए दूसरे चिकित्सालयों से चिकित्सकों की ड्यूटी लगाएं। सीएमओ डा. भारती राणा द्वारा ऐसा करने पर चिकित्सकों को टीए देने में समस्या आने के प्रश्न पर डीएम ने कहा कि वे अपने ‘अनटाइड फंड’ से चिकित्सकों को टीए दिलाएंगे।
वहीं पैथोलोजी में 2 बजे के बाद भी जांच कार्य सम्पादित हो इसके लिए डीएम ने 2 अतिरिक्त पैथोलोजिस्ट व अन्य कर्मी बढ़ाने के लिए उपनल के माध्यम से 6 कार्मिकों का प्रस्ताव बनाकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सालय में रोगियों को अनावश्यक बाहर न रेफर किये जाने तथा आवारा कुत्तों के काटे जाने वाले मरीजों को एआरवी यानी एंटी रैबीज वैक्सीन लगना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। वहीं महिला चिकित्सालय के निरीक्षण के दौरान जच्चा-बच्चा वार्ड में सिजेरियन डिलीवरी तथा नोर्मल डिलीवरी वाली जच्चा-बच्चा की स्थिति को देखते हुए अलग-अलग चेम्बर बनाने, जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की संवेदनशीलता को देखते हुए वार्ड में उच्च क्षमता 5 एसी भी स्थापित करने, बेबी कॉर्नर को रेनोवेट करने तथा लेबर रूम में टाईल्स लगाने, की एसी लगाने, कम्बलों, चादरों पर कवर लगाने, पेयजल हेतु स्टील सिंक लगाने, इंजेक्शन कक्ष में डस्टबिन बदलने, फर्श पर टाईल्स लगाने, महिला चिकित्सालय की वायरिंग बदलने, स्टॉक में उपलब्ध अतिरिक्त दवाओं को अन्य महिला चिकित्सालयों, सुशीला तिवारी चिकित्सालय में मांग के अनुसार उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये। निरीक्षण के दौरान निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डा. मीना पुनेरा, डा. वीके पुनेरा, डा.रश्मि पंत, डा. बलवीर सिंह, डा. एमएस दुग्ताल, डा. एचएस धामी, डा. द्रौपदी गर्ब्यालय, डा.मंजू रावत, डा. संजीव खर्कवाल व अन्य चिकित्सा कर्मी मौजूद रहे।

शीघ्र शुरू होगा नैनीताल जनपद का अपना ‘संतुष्टि’ मोबाइल ऐप, ‘सेव नैनी लेक’ ग्रुप बना

नैनीताल। नैनीताल जनपदवासियों के लिए शीघ्र अपनी हर तरह की समस्याओं के समाधान के लिए ‘संतुष्टि’ नाम का ऐप शुरू होने जा रहा है। डीएम सविन बंसल ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बात करते हुए इसके निर्देश दिये। बताया कि इस पर शिकायत करने के दो दिन के भीतर समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा पर्यटन नगरी की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाली नैनी झील में बरसात के दिनों में किसी भी प्रकार की गन्दगी न रहे तथा नालों में पानी के साथ बहकर झील में आने वाली गंदगी को प्रतिदिन साफ करने तथा झील के जल स्तर पर नियमित नजर रखने के लिए शीघ्र ही नैना देवी मंदिर नाले, ठंडी सड़क व तल्लीताल गॉधी चौक के पास वाईफाई एनेबल्ड ऑल वेदर हाई रिजुलेशन कैमरे स्थापित किए जाने की भी उन्होंने जानकारी दी। बताया कि कैमरे स्थापित करने के लिए टेंडर भी हो चुका है। उन्होंने इस हेतु ‘सेव नैनी लेक’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने की भी जानकारी दी। जिसमें नगर पालिका के अधिकारी झील, नालों तथा शहर की प्रतिदिन सफाई करते हुए फोटो डालेंगे। बताया कि ग्रुप में सिंचाई, जल संस्थान व प्रशासनिक अधिकारी भी प्रतिदिन झील, नालों की सफाई व जल स्तर की मोनीटरिंग करेंगे।
जिलाधिकारी श्री बंसल ने कहा कि नैनी झील, नालों की सफाई, जल स्तर पर लेक कन्ट्रोल रूम पर प्रतिदिन पैनी नजर रखने व मोनीटरिंग के लिए वाईफाई एनेबल्ड ऑल वेदर हाई रिजुलेशन कैमरे लगाए जायेंगे। आम लोग भी कूड़ा डालने वालों के फोटो प्रशासनिक अधिकारियों को भेज सकते हैं।

यह भी पढ़ें : बड़ा चिंताजनक समाचार: स्वास्थ्य व आपूर्ति विभागों की इस लापरवाही से राज्य में लाखों लोग आयुष्मान योजना से छूटे..

-2015-16 के बाद राशन कार्डों को ऑनलाइन कराने वाले लाखों परिवारों के नहीं बन पा रहे हैं आयुष्मान कार्ड
-स्वास्थ्य महानिदेशालय के स्तर से आपूर्ति विभाग के मुख्यालय से पोर्टल में एक्सेस की अनुमति मांगे जाने से होगा समस्या का समाधान
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 जुलाई 2019। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में हर व्यक्ति को अटल आयुष्मान योजना का लाभ देने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, किंतु यह योजना स्वास्थ्य विभागों की लापरवाही व आपस में सामंजस्य न होने के कारण सरकार की किरकिरी कराने की ओर आगे बढ़ रही है। योजना के तहत जरूरतमंदों को अपेक्षित लाभ न मिलने की चर्चाएं तो आम हैं ही, वहीं ध्यान न दी जा रही परेशानी यह है कि हजारों परिवारों के लाखों लोग योजना के तहत आयुष्मान कार्ड ही नहीं बना पा रहे हैं।
यह वे लोग हैं जो किसी कारण पहले अपने राशन कार्डों को ऑनलाइन नहीं करा पाये। क्योंकि तब राशन कार्डों को ऑनलाइन करने का कमोबेश मतलब सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से राशन प्राप्त करना था। जो लोग राशन नहीं चाहते थे, उन्होंने राशन कार्डों को तब ऑनलाइन नहीं कराया। बाद में आयुष्मान योजना के तहत ऑनलाइन राशन कार्डों की अनिवार्यता हुई तो लोगों ने अपने राशन कार्डों को ऑनलाइन भी कराया। किंतु बताया गया है कि वर्ष 2016 के बाद यानी पिछले तीन वर्षों में अपने राशन कार्डों को ऑनलाइन कराने वाले लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। बताया गया है कि इसका कारण आपूर्ति विभाग के पोर्टल में स्वास्थ्य विभाग की आयुष्मान योजना के तहत ‘एक्सेस’ न हो पाना है। पूर्व में आपूर्ति विभाग ने जिन राशन कार्डों के 10 नंबर के ऑनलाइन पंजीकरण नंबर पेन ड्राइव के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराये थे, केवल उनके ही आयुष्मान कार्ड बन पा रहे हैं। इसके बाद के 12 नंबर के ऑनलाइन पंजीकरण नंबर वाले राशन कार्ड धारकों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहे है। इस बारे में आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय के स्तर से आपूर्ति विभाग के उच्चाधिकारियों से डाटा एक्सेस करने की अनुमति मांगी ही नहीं गयी है, सो आपूर्ति विभाग की ओर से अनुमति नहीं दी गयी है।
उल्लखनीय है कि 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की जनसंख्या एक करोड़ 86 हजार 292 है। इसके बाद की बढ़ी जनसंख्या के करीब 27 लाख परिवारों के भी आयुष्मान कार्ड बनने हैं, और उन्हें 1350 तरह की बीमारियों से पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य कवच उपलब्ध कराया जाना है। किंतु लाखों परिवार अभी योजना से छूटे हुए हैं।

यह भी पढ़ें : आयुष्मान योजना के फर्जी मैसेज से सावधान ! दर्ज हो सकता है केस

नवीन समाचार, नैनीताल 8 जनवरी 2019। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में आवेदन की अंतिम तिथि 15 जनवरी 2019 का फर्जी मैसेज सोशल साइट्स पर वायरल हो गया है। डीएम, एसएसपी और सीएमओ की ओर से लोगों को इस मैसेज को दरकिनार करने की अपील जारी की है। वहीं, इस मैसेज को वायरल करने वालों की शिकायत पुलिस से करने को कहा गया है। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी। फेसबुक, व्हाट्सअप और अन्य सोशल साइट्स पर वायरल मैसेज में बताया जा रहा है कि योजना में आवेदन की तिथि 15 जनवरी है। आवेदन करने को एक लिंक भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का भी कहना है कि कोई भी व्यक्ति इस मैसेज का संज्ञान न लें। सभी पात्र लोगों के आवेदन और गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया चलती रहेगी।

नैनीताल मैं ऐसे बना सकते हैं आयुष्मान योजना के हेल्थ कार्ड

आयुष्मान योजना में हेल्थ कार्ड बनाने के लिए पहले अपने राशन कार्ड को D S O ऑफिस जा के आधार कार्ड से जुडवा लें। इसके लिए DSO ऑफिस में राशनकार्ड, सभी का आधार कार्ड व जिसके नाम पर कार्ड है उसकी बैंक पासबुक ले जानी है। उसके बाद राशन कार्ड व आधार कार्ड लेकर हिमालय होटल के पास फ्यूचर कंप्यूटर सेंटर (ममता कुमइयां जी का) जाकर कार्ड बनवा लें। इस कार्ड से प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 5.00 लाख तक का इलाज का खर्च सरकार देगी। कार्ड आजकल बन रहे हैं।

अटल आयुष्मान स्वास्थ्य योजना से सबको नगदी रहित इलाज की सुविधा देने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तराखंड, ऐसे करें आवेदन

नवीन समाचार, देहरादून, 25 दिसंबर 2018। उत्तराखंड सरकार की ओर से सभी राज्यवासियों के लिए केंद्र सरकार की ओर से लागू आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर अटल आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना मंगलवार को शुरू हो गई है। इस प्रकार उत्तराखंड अपने सभी परिवारों को यह सुविधा देने वाला देश का पहला राज्य भी बन गया है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी परिवारों को पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो सकेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस योजना को लांच करने के साथ ही इसके लिए मोबाइल एप और वेबसाइट भी लांच किया।

देहरादून के रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल विहारी बाजपेयी के जन्मदिन पर अटल आयुष्मान योजना का शुभारंभ किया। बताया गया कि योजना के लिए लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड दिया जाएगा। इस गोल्डन कार्ड को अस्पताल में दिखाने पर उन्हें कैशलैस इलाज की सुविधा मिल सकेगी। अपरिहार्य स्थिति में कार्डधारक सीधे निजी अस्पतालों में इलाज करा सकते हैं।

गोल्डन कार्ड लेने के लिए यह है अर्हता
गोल्डन कार्ड के लिए आवेदन वही कर सकते हैं, जिनका नाम 2012 की मतदाता सूची या 2012 के परिवार रजिस्टर में होगा, अथवा उनके पास 2012 से ही उत्तराखंड में निवास करने के साक्ष्य स्वरूप राशन कार्ड या मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड अथवा 2011 के सामाजिक आर्थिक और जातीय जनगणना में नाम होना चाहिए। जिनका नाम मतदाता सूची अथवा परिवार रजिस्टर में नहीं होगा, उनके लिए जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन करने की बाध्यता रखी गयी है। वहीं प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योजना 26 जनवरी 2019 से लागू होगी। राज्य कर्मचारियों को इसका लाभ लेने के लिए एक निश्चित धनराशि देनी होगी। जबकि सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों व कर्मियों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। सरकार निजी चिकित्सालयों के समान ही सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज का पैसा देगी। इनमें से एक निश्चित प्रतिशत चिकित्सकों व स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को भी दिया जाएगा।

ऐसे करें आवेदन
‘अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना’ एप के माध्यम से योजना के लाभार्थी  अपना और परिवार का विवरण देख सकेंगे। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकेगा। एप में वोटर आईडी नंबर और नाम डालकर पता लगा सकेंगे कि आपका नाम है या नहीं। नाम न होने पर अपना या परिवार के सदस्यों का नाम जोड़ सकते हैं। साथ ही http://ayushmanbharat.co.in/ की साइट पर जाकर अस्पतालों की सूची भी देख सकेंगे।

पात्र परिवारों की संख्या
जिले          परिवारों की संख्या
1. अल्मोड़ा 1,44,709
2. बागेश्वर 66,683
3. चंपावत 57,698
4. नैनीताल 2,14,400
5. पिथौरागढ़ 1,25,952
6. ऊधमसिंह नगर 3,91,267

ये अस्पताल हैं शामिल
नैनीताल: बांबे हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, उषा बहुगुणा अल्फा हेल्थ इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड मल्टीस्पेशलिटी सर्विसेज, आई क्यू विजन प्राइवेट लिमिटेड, विवेकानंद हास्पिटल, दृष्टि सेंटर फॉर एडवासं आई केयर।
ऊधमसिंह नगर: चामुंडा अस्पताल एवं लेप्रोस्कोपिक सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, एमपी मेमोरियल अस्पताल, अग्रवाल आर्थो केयर एंड ट्रामा सेंटर, अमृत अस्पताल, राम आई केयर और नर्सिंग होम, एंबर अस्पताल प्राइवेट लिमिटेड, उजाला हेल्थकेयर सर्विसेज लिमिटेड, आनंद अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, तपन अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर, श्री कृष्ण अस्पताल, आई साईट सुपर स्पेशलिटी आई केयर सेंटर, द मेडिसिटी रुद्रपुर, अली नर्सिंग होम, महालक्ष्मी आई अस्पताल, महाराजा अग्रसेन चेरिटेबिल अस्पताल, सेवा पॉली क्लीनिक और आस्था हास्पिटल।

 

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में पिछले दो वर्षों में चिंताजनक तरीके से बढ़ी इस जानलेवा रोग के रोगियों की संख्या

-पहली बार 2017 में एक एवं 2018 में 5 हेपेटाइटिस रोगियों की मृत्यु हुई
नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जुलाई 2019। सूचना के अधिकार के तहत स्वास्थ्य सेवा निदेशालय से प्राप्त सूचना के अनुसार प्रदेश में पिछले दो वर्षों में हेपेटाइटिस रोगियों की संख्या में चिंताजनक स्तर की बढ़ोत्तरी देखी गयी है। हल्द्वानी के सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को दी गयी सूचना के अनुसार वर्ष 2007 के बाद से प्राप्त सूचना के अनुसार 2007 से 2010 के चार वर्षों में पूरे प्रदेश में हेपेटाइटिस का एक भी मामला नहीं आया। 2011 में दो पुरुष व तीन महिला सहित कुल 5, 2012 में 17 पुरुष व 7 महिला सहित कुल 24 व 2013 में 10 पुरुष व 5 महिलाओं सहित कुल 15 लोगों में हेपेटाइटिस सी रोग रिकॉर्ड किया गया। वहीं इसके बाद के तीन वर्षों यानी 2014, 2015 व 2016 में पुनः पूरे राज्य में हेपेटाइटिस सी का एक भी मामला प्रकाश में नहीं आने का दावा किया गया है। जबकि इसके बाद अचानक 32 पुरुष व 28 महिलाओं सहित 60 लोगों को यह रोग होने एवं इनमें से एक पुरुष रोगी की मौत होने तथा 2018 में अब तक के रिकार्ड व चिंताजनक आंकड़े प्रदर्शित किये गये हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2018 में 68 पुरुष एवं 30 महिलाओं सहित 98 लोगों को हेपेटाइटिस सी रोग रिकॉर्ड हुआ तथा इनमें से 4 पुरुषों एवं 1 महिला सहित कुल 5 रोगियों की मृत्यु भी इस रोग के कारण हो गयी। वहीं 2019 में अप्रैल माह तक हेपेटाइटिस का एक भी रोगी प्रकाश में न आने की जानकारी दी गयी है।

सूचना अविश्वसनीय सी

नैनीताल। स्वास्थ्य महानिदेशालय के अंतर्गत दी गयी सूचना अविश्वसनीय सी प्रतीत होती है। इसमें जहां 2001 से 2006 तक की सूचना उपलब्ध ही नहीं होने की बात कही गयी है, वहीं 2007 से 2010 के बीच के चार एवं 2014 से 2016 के बीच के तीन वर्षों में हेपेटाइटिस का एक भी रोगी नहीं बताया गया है। इससे सूचना की सत्यता पर शंका होती है। हेपेटाइटिस सी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गयी कार्यवाही एवं रोकथाम के लिए प्राप्त बजट एवं रोगियों को मुआवजा देने की भी जानकारी उपलब्ध न होने की बात कहते हुए जानकारी नहीं दी गयी है।

यह भी पढ़ें  : उत्तराखंड में हेपेटाइटिस सी के मामले बी की तुलना में दस गुना अधिक

सामान्यतया चिंता हेपेटाइटिस-बी की की जाती है, किन्तु हेपेटाइटिस सी की बीमारी इससे कहीं अधिक खतरनाक है। इस बीमारी को दुनिया की 8वीं सबसे जानलेवा बीमारी माना गया है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट खून के कारण होने वाले संक्रमण से तेजी से बढ़ रही इस बिमारी के कारण भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में आपाधापी सी मची हुई है। हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख से अधिक लोगों की जान जाने के कारण भारत में हेपेटाइटिस सी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बोझ माना जा रहा है।

उत्तराखंड के रुद्रपुर में इस बिमारी के विशेषज्ञ डॉ. राहुल किशोर कहते हैं, अपनी प्रैक्टिस में मैंने हेपेटाइटिस बी की तुलना में हेपेटाइटिस सी के अधिक मामले देखे हैं। खासकर उत्तराखंड में हेपेटाइटिस सी के मामले हेपेटाइटिस बी की तुलना में दस गुना अधिक हैं। मैं इसके 70-80 मामले रोज देखता हूं, जिनमें स्त्री और पुरुष दोनों ही शामिल हैं। यह स्थिति मेडिकल जगत के लिए बेहद चिंताजनक है। हेपेटाइटिस सी खून से होने व फैलने वाला संक्रमण है। देश के ज्यादातर संक्रमित इलाकों में इसकी वजह खून के लेन-देन के समय बरती गई असावधानी, प्रयोग की जा चुकी सुइयों को दोबारा इस्तेमाल, सर्जिकल प्रक्रियाओं में असावधानी, उपकरणों का साफ न किया जाना, टूथ ब्रश व रेजर जैसे निजी संसाधनों का एक-दूसरे में बांटा जाना व असुरक्षित सेक्स संबंध है। सबसे बड़ी मुसीबत है कि अभी तक हेपेटाइटिस बी की तरह हेपेटाइटिस सी के लिए कोई वैक्सीन ईजाद नहीं की जा सकी है, जिसकी वजह से पीड़ित व्यक्ति को क्रोनिक लीवर रोग के अलावा लीवर कैंसर तक हो सकता है।

डॉ. किशोर का कहना है किं, हेपेटाइटिस सी को साइलेंट किलर माना जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बिलकुल भी स्पष्ट नहीं होते हैं। इसकी वजह से जल्दी समझ नहीं आता कि कोई इससे संक्रमित है। काफी समय तक इसकी जांच न हो पाने के कारण यह धीरे-धीरे क्रोनिक एचसीवी संक्रमण के तौर पर विकसित होता जाता है।

यह भी जानें :

यकृतशोथ ग (हेपेटाइटिस सी) एक संक्रामक रोग है जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी (HCV) की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है. इसका संक्रमण अक्सर स्पर्शोन्मुख होता है लेकिन एक बार होने पर दीर्घकालिक संक्रमण तेजी से यकृत (फाइब्रोसिस) के नुकसान और अधिक क्षतिग्रस्तता (सिरोसिस) की ओर बढ़ सकता है जो आमतौर पर कई वर्षों के बाद प्रकट होता है. कुछ मामलों में सिरोसिस से पीड़ित रोगियों में से कुछ को यकृत कैंसर हो सकता है या सिरोसिस की अन्य जटिलताएं जैसे कि यकृत कैंसर और जान को जोखिम में डालने वाली एसोफेजेल वराइसेस तथा गैस्ट्रिक वराइसेस विकसित हो सकती हैं.

हेपेटाइटिस सी वायरस रक्त से रक्त के संपर्क द्वारा फैलता है. शुरुआती संक्रमण के बाद अधिकांश लोगों में, यदि कोई हों, तो बहुत कम लक्षण होते हैं, हालांकि पीड़ितों में से 85% के यकृत में वायरस रह जाता है. इलाज के मानक देखभाल जैसे कि दवाइयों, पेजिन्टरफेरॉन और रिबावायरिन से स्थायी संक्रमण ठीक हो सकता है. इकावन प्रतिशत से ज्यादा पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं. जिन्हें सिरोसिस या यकृत कैंसर हो जाता है, उन्हें यकृत के प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है तथा प्रत्यारोपण के बाद ही वायरस पूरी तरह से जाता है.

एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में 270-300 मिलियन लोग हेपेटाइटिस सी से संक्रमित हैं. हेपेटाइटिस सी पूरी तरह से मानव रोग है. इसे किसी अन्य जानवर से प्राप्त नहीं किया जा सकता है न ही उन्हें दिया जा सकता है. चिम्पांजियों को प्रयोगशाला में इस वायरस से संक्रमित किया जा सकता है लेकिन उनमें यह बीमारी नहीं पनपती है, जिसने प्रयोग को और मुश्किल बना दिया है. हेपेटाइटिस सी के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है. हेपेटाइटिस सी की मौजूदगी (मूलतः “नॉन-ए (Non-A) नॉन-बी (Non-B) हेपेटाइटिस”) 1970 के दशक में मान ली गयी थी और 1989 में आखिरकार सिद्ध कर दी गयी. यह हेपेटाइटिस के पांच वायरसों: ए (A), बी (B), सी (C), डी (D), ई (E) में से एक है.

यह भी पढ़ें : यह खाने-पीने से बुढ़ापे तक बनी रहेगी सकारात्मक सोच और बेहतर याददाश्त

 

आज की व्‍यस्‍त लाइफस्‍टाइल में घंटों- घंटों बैठना आम बात है. दिन में नौ-नौ घंटे ऑफिस में लोग एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं लेकिन क्‍या आप जानते हैं? लोगों के बैठने की ये आदत उन्‍हें बीमार कर रही हैं. उन्‍हें तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आइए जानते हैं कौन-कौन सी हो रही हैं दिक्‍कतें ?

दरअसल एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठने से पीठ की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर भारी दबाव पड़ सकता है.

इसके अलावा, टेढ़े होकर बैठने से रीढ़ की हड्डी के जोड़ खराब हो सकते हैं और रीढ़ की हड्डी की डिस्क पीठ और गर्दन में दर्द का कारण बन सकती है.

लंबे समय तक खड़े रहने से भी स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है.

दरअसल शरीर को सीधा रखने के लिए बहुत सारी मांसपेशियों की ताकत की आवश्यकता होती है. लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है।

यह भी पढ़ें : हर राज खोलती आपकी आंखों में छिपी है आपकी सेहत से जुड़ी हर बात, अपनी आंखें देख कर जानें कहीं आप तो नहीं हो रहे इन बीमारियों के शिकार

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 जनवरी 2019। कहते हैं कि आंखे हमारे दिल का आईना होती है। हम अपने चेहरे के हाव-भाव से तो हर बात को छिपा सकते हैं, लेकिन हमारी आंखें हमेशा सच बोलती हैं। चाहें हम दुखी हो या खुश हमारी आंखें उसे बयां कर ही देती है। इसके अलावा अगर हमारी सेहत ठीक नहीं है तो भी इसका असर आंखों पर दिखाई दे जाता है। अक्सर बीमार होने पर लोगों की आंखों का रंग बदलने लगता है। हालांकि यह पता लगाना मुश्किल होता है कि किसी गंभीर बीमारी के संकेत तो नहीं है। आज हम आपको आंखों से जुड़ी कुछ ऐसी ही दिलचस्प चीजें बताने ज रहे हैं जिन पर गौर कर आप पता कर सकते हैं कि यह किस बीमारी की ओर ईशारा हो सकता है।

 

ब्रेन ट्यूमर:- इस घातक बीमारी में थकान, सिरदर्द और आलस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा आंखों का रंग बदल जाना और धुंधला दिखना भी ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हैं।

 

लकवा:- वैसे तो हर बीमारी घातक ही होती है। लेकिन कुछ चीजों पर ध्यान देकर लकवा से बचा जा सकता है। कोई भी बीमारी से पहले उसके लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। अगर महसूस करते हैं कि किसी की पलकें अचानक से लटकी हुई लगने लगी हैं और साथ ही आवाज में भी बहुत लड़खड़ाहट हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे, यह लकवा की ओर संकेत हो सकते हैं। ऐसे में अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना शुरु करें।

 

थायराइड:- हर दिन बढ़ते कॉम्पिटिशियन के कारण लोग खुद पर ध्यान देना भूल ही गए हैं। ऐसे में थाइराइड भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। इस दौरान अचानक वजन बढ़ने या घटने लगता है, इसके अलावा बार-बार भूख लगना और थकान जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं। साथ ही आंखें भी उभरी हुई लगने लगती हैं।

 

हाई ब्लड प्रेशर:- उच्च रक्तचाप के कारण भी आपको आंखों में फर्क नजर आने लगता है। अगर किसी को हाई ब्लड प्रेशर की परेशानी रहती है तो उनकी आंखों का रंग अक्सर लाल रहता है। इसके अलावा ब्लड वेसेल्स फैसने की वजह से आंखों में सूजन भी दिखाई देने लगती है।

 

डायबिटीज:- पिछले कुछ समय में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस कारण आपकी आंखों का रंग भी बदलने लगता है और ब्लड वेसेल्स भी प्रभावित होने लगते हैं।

यह भी पढ़ें : जानें बेहतर स्वास्थ्य के लिए कैसा पानी पिए और कब कब और कितना…Image of story

नवीन समाचार, नैनीताल 19 जनवरी 2019। जल ही जीवन है यह वाक्य तो आपने कई बार सुना होगा। किताबों और दीवारो पर लिखा हुआ देखा होगा। पानी के बिना इस धरती पर जीना बहुत मुश्किल होता है। सभी जानते हैं पानी पीना हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है। आज हम आपको बताएंगे कि कैसा समय पानी पीने के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है।

जब आप सुबह उठते है तो उस समय आपको हल्का गुनगुना पानी घूँट घूँट करके पीना बहुत जरूरी है। इससे आपके मुंह में बनी रात भर की लार आपके अंदर चली जाती है और पाचन सही होता है साथ में शौच भी बेहतर होती है।

दोपहर के खाने से आधे घंटे पहले जितना मन हो उतना पानी पीना बहुत आवश्यक है लेकिन पियें जरूर। इससे आपके पेट में भूख बढ़ती है। खाना खाने के एक घंटे बाद आप पानी पियें और जितना पी सकते है उतना पियें लेकिन एक घंटे बाद ही। इस समय पानी पीना बहुत आवश्यक है।रात को सोने से आधे घंटे पहले आपको पानी पीना बहुत आवश्यक है। इससे आपके शरीर को भोजन पाचन की इक्श्मता मिलती है। यह बहुत जरूरी है।

यह भी पढ़ें : इस गणतंत्र दिवस स्वास्थ्य सुविधाओं में भी ‘उड़ान’ भरेगा उत्तराखंड, ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य होगा

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जनवरी 2019। उत्तराखंड में इसी माह से हेली एंबुलेंस सेवा शुरू हो सकती है। सरकार सिविल एविएशन कंपनी को कार्य आवंटित कर 26 जनवरी से इस सेवा का शुभारंभ करने की तैयारी में है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश को हेली एंबुलेंस सेवा के लिए पांच करोड़ का बजट स्वीकृत है। उधर, स्थायी रूप से सेवा शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हेली एंबुलेंस सेवा का ट्रायल करने के बाद सरकार शीघ्र ही इस सेवा को शुरू करने जा रही है। हेली एंबुलेंस सेवा शुरू करने में उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा। इस सेवा के शुरू होने से प्राकृतिक आपदा व अन्य दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। एक या दो स्ट्रेचर की क्षमता वाले एयर एंबुलेंस से इस सेवा को प्रदेश में शुरू किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बजट उपलब्ध होने से सरकार का प्रयास है कि इसी माह से प्रदेश में हेली एंबुलेंस को शुरू किया जाए। आगामी वित्तीय वर्ष में एंबुलेंस सेवा का विस्तार किया जाएगा और चारधाम यात्रा के दौरान भी एंबुुलेंस की सेवा उपलब्ध होगी। उधर, सचिव स्वास्थ्य नितेश कुमार झा का कहना है कि हेली एंबुलेंस सेवा के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। 26 जनवरी से प्रदेश में इस सेवा को शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बजट स्वीकृत है। एक बार प्रदेश में यह सेवा शुरू हो जाती है तो आगामी वित्तीय वर्ष से इसमें और सुधार किया जाएगा। प्रदेश में कहीं भी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना होने से हेली एंबुलेंस सेवा का इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे कम समय में घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

 

Leave a Reply

loading...