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यह खाने-पीने से बुढ़ापे तक बनी रहेगी सकारात्मक सोच और बेहतर याददाश्त

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आज की व्‍यस्‍त लाइफस्‍टाइल में घंटों- घंटों बैठना आम बात है. दिन में नौ-नौ घंटे ऑफिस में लोग एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं लेकिन क्‍या आप जानते हैं? लोगों के बैठने की ये आदत उन्‍हें बीमार कर रही हैं. उन्‍हें तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आइए जानते हैं कौन-कौन सी हो रही हैं दिक्‍कतें?

दरअसल एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठने से पीठ की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर भारी दबाव पड़ सकता है.

इसके अलावा, टेढ़े होकर बैठने से रीढ़ की हड्डी के जोड़ खराब हो सकते हैं और रीढ़ की हड्डी की डिस्क पीठ और गर्दन में दर्द का कारण बन सकती है.

लंबे समय तक खड़े रहने से भी स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है.

दरअसल शरीर को सीधा रखने के लिए बहुत सारी मांसपेशियों की ताकत की आवश्यकता होती है. लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 20 जनवरी 2019। कहते हैं कि आंखे हमारे दिल का आईना होती है। हम अपने चेहरे के हाव-भाव से तो हर बात को छिपा सकते हैं, लेकिन हमारी आंखें हमेशा सच बोलती हैं। चाहें हम दुखी हो या खुश हमारी आंखें उसे बयां कर ही देती है। इसके अलावा अगर हमारी सेहत ठीक नहीं है तो भी इसका असर आंखों पर दिखाई दे जाता है। अक्सर बीमार होने पर लोगों की आंखों का रंग बदलने लगता है। हालांकि यह पता लगाना मुश्किल होता है कि किसी गंभीर बीमारी के संकेत तो नहीं है। आज हम आपको आंखों से जुड़ी कुछ ऐसी ही दिलचस्प चीजें बताने ज रहे हैं जिन पर गौर कर आप पता कर सकते हैं कि यह किस बीमारी की ओर ईशारा हो सकता है।

ब्रेन ट्यूमर:- इस घातक बीमारी में थकान, सिरदर्द और आलस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा आंखों का रंग बदल जाना और धुंधला दिखना भी ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हैं।

लकवा:- वैसे तो हर बीमारी घातक ही होती है। लेकिन कुछ चीजों पर ध्यान देकर लकवा से बचा जा सकता है। कोई भी बीमारी से पहले उसके लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। अगर महसूस करते हैं कि किसी की पलकें अचानक से लटकी हुई लगने लगी हैं और साथ ही आवाज में भी बहुत लड़खड़ाहट हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे, यह लकवा की ओर संकेत हो सकते हैं। ऐसे में अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना शुरु करें।

थायराइड:- हर दिन बढ़ते कॉम्पिटिशियन के कारण लोग खुद पर ध्यान देना भूल ही गए हैं। ऐसे में थाइराइड भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। इस दौरान अचानक वजन बढ़ने या घटने लगता है, इसके अलावा बार-बार भूख लगना और थकान जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं। साथ ही आंखें भी उभरी हुई लगने लगती हैं।

हाई ब्लड प्रेशर:- उच्च रक्तचाप के कारण भी आपको आंखों में फर्क नजर आने लगता है। अगर किसी को हाई ब्लड प्रेशर की परेशानी रहती है तो उनकी आंखों का रंग अक्सर लाल रहता है। इसके अलावा ब्लड वेसेल्स फैसने की वजह से आंखों में सूजन भी दिखाई देने लगती है।

डायबिटीज:- पिछले कुछ समय में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस कारण आपकी आंखों का रंग भी बदलने लगता है और ब्लड वेसेल्स भी प्रभावित होने लगते हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल 19 जनवरी 2019। जल ही जीवन है यह वाक्य तो आपने कई बार सुना होगा। किताबों और दीवारो पर लिखा हुआ देखा होगा। पानी के बिना इस धरती पर जीना बहुत मुश्किल होता है। सभी जानते हैं पानी पीना हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है। आज हम आपको बताएंगे कि कैसा समय पानी पीने के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है।

जब आप सुबह उठते है तो उस समय आपको हल्का गुनगुना पानी घूँट घूँट करके पीना बहुत जरूरी है। इससे आपके मुंह में बनी रात भर की लार आपके अंदर चली जाती है और पाचन सही होता है साथ में शौच भी बेहतर होती है।

दोपहर के खाने से आधे घंटे पहले जितना मन हो उतना पानी पीना बहुत आवश्यक है लेकिन पियें जरूर। इससे आपके पेट में भूख बढ़ती है। खाना खाने के एक घंटे बाद आप पानी पियें और जितना पी सकते है उतना पियें लेकिन एक घंटे बाद ही। इस समय पानी पीना बहुत आवश्यक है।रात को सोने से आधे घंटे पहले आपको पानी पीना बहुत आवश्यक है। इससे आपके शरीर को भोजन पाचन की इक्श्मता मिलती है। यह बहुत जरूरी है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जनवरी 2019। उत्तराखंड में इसी माह से हेली एंबुलेंस सेवा शुरू हो सकती है। सरकार सिविल एविएशन कंपनी को कार्य आवंटित कर 26 जनवरी से इस सेवा का शुभारंभ करने की तैयारी में है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश को हेली एंबुलेंस सेवा के लिए पांच करोड़ का बजट स्वीकृत है। उधर, स्थायी रूप से सेवा शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हेली एंबुलेंस सेवा का ट्रायल करने के बाद सरकार शीघ्र ही इस सेवा को शुरू करने जा रही है। हेली एंबुलेंस सेवा शुरू करने में उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा। इस सेवा के शुरू होने से प्राकृतिक आपदा व अन्य दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। एक या दो स्ट्रेचर की क्षमता वाले एयर एंबुलेंस से इस सेवा को प्रदेश में शुरू किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बजट उपलब्ध होने से सरकार का प्रयास है कि इसी माह से प्रदेश में हेली एंबुलेंस को शुरू किया जाए। आगामी वित्तीय वर्ष में एंबुलेंस सेवा का विस्तार किया जाएगा और चारधाम यात्रा के दौरान भी एंबुुलेंस की सेवा उपलब्ध होगी। उधर, सचिव स्वास्थ्य नितेश कुमार झा का कहना है कि हेली एंबुलेंस सेवा के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। 26 जनवरी से प्रदेश में इस सेवा को शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बजट स्वीकृत है। एक बार प्रदेश में यह सेवा शुरू हो जाती है तो आगामी वित्तीय वर्ष से इसमें और सुधार किया जाएगा। प्रदेश में कहीं भी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना होने से हेली एंबुलेंस सेवा का इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे कम समय में घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

यह भी पढ़ें : आयुष्मान योजना के फर्जी मैसेज से सावधान ! दर्ज हो सकता है केस

नवीन समाचार, नैनीताल 8 जनवरी 2019। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में आवेदन की अंतिम तिथि 15 जनवरी 2019 का फर्जी मैसेज सोशल साइट्स पर वायरल हो गया है। डीएम, एसएसपी और सीएमओ की ओर से लोगों को इस मैसेज को दरकिनार करने की अपील जारी की है। वहीं, इस मैसेज को वायरल करने वालों की शिकायत पुलिस से करने को कहा गया है। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी। फेसबुक, व्हाट्सअप और अन्य सोशल साइट्स पर वायरल मैसेज में बताया जा रहा है कि योजना में आवेदन की तिथि 15 जनवरी है। आवेदन करने को एक लिंक भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का भी कहना है कि कोई भी व्यक्ति इस मैसेज का संज्ञान न लें। सभी पात्र लोगों के आवेदन और गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया चलती रहेगी।

नैनीताल मैं ऐसे बना सकते हैं आयुष्मान योजना के हेल्थ कार्ड

आयुष्मान योजना में हेल्थ कार्ड बनाने के लिए पहले अपने राशन कार्ड को D S O ऑफिस जा के आधार कार्ड से जुडवा लें। इसके लिए DSO ऑफिस में राशनकार्ड, सभी का आधार कार्ड व जिसके नाम पर कार्ड है उसकी बैंक पासबुक ले जानी है। उसके बाद राशन कार्ड व आधार कार्ड लेकर हिमालय होटल के पास फ्यूचर कंप्यूटर सेंटर (ममता कुमइयां जी का) जाकर कार्ड बनवा लें। इस कार्ड से प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 5.00 लाख तक का इलाज का खर्च सरकार देगी। कार्ड आजकल बन रहे हैं।

अटल आयुष्मान स्वास्थ्य योजना से सबको नगदी रहित इलाज की सुविधा देने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तराखंड, ऐसे करें आवेदन

नवीन समाचार, देहरादून, 25 दिसंबर 2018। उत्तराखंड सरकार की ओर से सभी राज्यवासियों के लिए केंद्र सरकार की ओर से लागू आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर अटल आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना मंगलवार को शुरू हो गई है। इस प्रकार उत्तराखंड अपने सभी परिवारों को यह सुविधा देने वाला देश का पहला राज्य भी बन गया है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी परिवारों को पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो सकेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस योजना को लांच करने के साथ ही इसके लिए मोबाइल एप और वेबसाइट भी लांच किया।

देहरादून के रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल विहारी बाजपेयी के जन्मदिन पर अटल आयुष्मान योजना का शुभारंभ किया। बताया गया कि योजना के लिए लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड दिया जाएगा। इस गोल्डन कार्ड को अस्पताल में दिखाने पर उन्हें कैशलैस इलाज की सुविधा मिल सकेगी। अपरिहार्य स्थिति में कार्डधारक सीधे निजी अस्पतालों में इलाज करा सकते हैं।

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p style=”text-align: justify;”>गोल्डन कार्ड लेने के लिए यह है अर्हता
गोल्डन कार्ड के लिए आवेदन वही कर सकते हैं, जिनका नाम 2012 की मतदाता सूची या 2012 के परिवार रजिस्टर में होगा, अथवा उनके पास 2012 से ही उत्तराखंड में निवास करने के साक्ष्य स्वरूप राशन कार्ड या मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड अथवा 2011 के सामाजिक आर्थिक और जातीय जनगणना में नाम होना चाहिए। जिनका नाम मतदाता सूची अथवा परिवार रजिस्टर में नहीं होगा, उनके लिए जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन करने की बाध्यता रखी गयी है। वहीं प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योजना 26 जनवरी 2019 से लागू होगी। राज्य कर्मचारियों को इसका लाभ लेने के लिए एक निश्चित धनराशि देनी होगी। जबकि सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों व कर्मियों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। सरकार निजी चिकित्सालयों के समान ही सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज का पैसा देगी। इनमें से एक निश्चित प्रतिशत चिकित्सकों व स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को भी दिया जाएगा।

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p style=”text-align: justify;”>ऐसे करें आवेदन
‘अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना’ एप के माध्यम से योजना के लाभाथी्र अपना और परिवार का विवरण देख सकेंगे। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकेगा। एप में वोटर आईडी नंबर और नाम डालकर पता लगा सकेंगे कि आपका नाम है या नहीं। नाम न होने पर अपना या परिवार के सदस्यों का नाम जोड़ सकते हैं। साथ ही http://ayushmanbharat.co.in/ की साइट पर जाकर अस्पतालों की सूची भी देख सकेंगे।

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p style=”text-align: justify;”>पात्र परिवारों की संख्या
जिले          परिवारों की संख्या
1. अल्मोड़ा 1,44,709
2. बागेश्वर 66,683
3. चंपावत 57,698
4. नैनीताल 2,14,400
5. पिथौरागढ़ 1,25,952
6. ऊधमसिंह नगर 3,91,267

ये अस्पताल हैं शामिल
नैनीताल: बांबे हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, उषा बहुगुणा अल्फा हेल्थ इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड मल्टीस्पेशलिटी सर्विसेज, आई क्यू विजन प्राइवेट लिमिटेड, विवेकानंद हास्पिटल, दृष्टि सेंटर फॉर एडवासं आई केयर।
ऊधमसिंह नगर: चामुंडा अस्पताल एवं लेप्रोस्कोपिक सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, एमपी मेमोरियल अस्पताल, अग्रवाल आर्थो केयर एंड ट्रामा सेंटर, अमृत अस्पताल, राम आई केयर और नर्सिंग होम, एंबर अस्पताल प्राइवेट लिमिटेड, उजाला हेल्थकेयर सर्विसेज लिमिटेड, आनंद अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, तपन अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर, श्री कृष्ण अस्पताल, आई साईट सुपर स्पेशलिटी आई केयर सेंटर, द मेडिसिटी रुद्रपुर, अली नर्सिंग होम, महालक्ष्मी आई अस्पताल, महाराजा अग्रसेन चेरिटेबिल अस्पताल, सेवा पॉली क्लीनिक और आस्था हास्पिटल।

यह भी पढ़ें  : उत्तराखंड में हेपेटाइटिस सी के मामले बी की तुलना में दस गुना अधिक

सामान्यतया चिंता हेपेटाइटिस-बी की की जाती है, किन्तु हेपेटाइटिस सी की बीमारी इससे कहीं अधिक खतरनाक है। इस बीमारी को दुनिया की 8वीं सबसे जानलेवा बीमारी माना गया है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट खून के कारण होने वाले संक्रमण से तेजी से बढ़ रही इस बिमारी के कारण भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में आपाधापी सी मची हुई है। हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख से अधिक लोगों की जान जाने के कारण भारत में हेपेटाइटिस सी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बोझ माना जा रहा है।

उत्तराखंड के रुद्रपुर में इस बिमारी के विशेषज्ञ डॉ. राहुल किशोर कहते हैं, अपनी प्रैक्टिस में मैंने हेपेटाइटिस बी की तुलना में हेपेटाइटिस सी के अधिक मामले देखे हैं। खासकर उत्तराखंड में हेपेटाइटिस सी के मामले हेपेटाइटिस बी की तुलना में दस गुना अधिक हैं। मैं इसके 70-80 मामले रोज देखता हूं, जिनमें स्त्री और पुरुष दोनों ही शामिल हैं। यह स्थिति मेडिकल जगत के लिए बेहद चिंताजनक है। हेपेटाइटिस सी खून से होने व फैलने वाला संक्रमण है। देश के ज्यादातर संक्रमित इलाकों में इसकी वजह खून के लेन-देन के समय बरती गई असावधानी, प्रयोग की जा चुकी सुइयों को दोबारा इस्तेमाल, सर्जिकल प्रक्रियाओं में असावधानी, उपकरणों का साफ न किया जाना, टूथ ब्रश व रेजर जैसे निजी संसाधनों का एक-दूसरे में बांटा जाना व असुरक्षित सेक्स संबंध है। सबसे बड़ी मुसीबत है कि अभी तक हेपेटाइटिस बी की तरह हेपेटाइटिस सी के लिए कोई वैक्सीन ईजाद नहीं की जा सकी है, जिसकी वजह से पीड़ित व्यक्ति को क्रोनिक लीवर रोग के अलावा लीवर कैंसर तक हो सकता है।

डॉ. किशोर का कहना है किं, हेपेटाइटिस सी को साइलेंट किलर माना जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बिलकुल भी स्पष्ट नहीं होते हैं। इसकी वजह से जल्दी समझ नहीं आता कि कोई इससे संक्रमित है। काफी समय तक इसकी जांच न हो पाने के कारण यह धीरे-धीरे क्रोनिक एचसीवी संक्रमण के तौर पर विकसित होता जाता है।

यह भी जानें :

यकृतशोथ ग (हेपेटाइटिस सी) एक संक्रामक रोग है जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी (HCV) की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है. इसका संक्रमण अक्सर स्पर्शोन्मुख होता है लेकिन एक बार होने पर दीर्घकालिक संक्रमण तेजी से यकृत (फाइब्रोसिस) के नुकसान और अधिक क्षतिग्रस्तता (सिरोसिस) की ओर बढ़ सकता है जो आमतौर पर कई वर्षों के बाद प्रकट होता है. कुछ मामलों में सिरोसिस से पीड़ित रोगियों में से कुछ को यकृत कैंसर हो सकता है या सिरोसिस की अन्य जटिलताएं जैसे कि यकृत कैंसर और जान को जोखिम में डालने वाली एसोफेजेल वराइसेस तथा गैस्ट्रिक वराइसेस विकसित हो सकती हैं.

हेपेटाइटिस सी वायरस रक्त से रक्त के संपर्क द्वारा फैलता है. शुरुआती संक्रमण के बाद अधिकांश लोगों में, यदि कोई हों, तो बहुत कम लक्षण होते हैं, हालांकि पीड़ितों में से 85% के यकृत में वायरस रह जाता है. इलाज के मानक देखभाल जैसे कि दवाइयों, पेजिन्टरफेरॉन और रिबावायरिन से स्थायी संक्रमण ठीक हो सकता है. इकावन प्रतिशत से ज्यादा पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं. जिन्हें सिरोसिस या यकृत कैंसर हो जाता है, उन्हें यकृत के प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है तथा प्रत्यारोपण के बाद ही वायरस पूरी तरह से जाता है.

एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में 270-300 मिलियन लोग हेपेटाइटिस सी से संक्रमित हैं. हेपेटाइटिस सी पूरी तरह से मानव रोग है. इसे किसी अन्य जानवर से प्राप्त नहीं किया जा सकता है न ही उन्हें दिया जा सकता है. चिम्पांजियों को प्रयोगशाला में इस वायरस से संक्रमित किया जा सकता है लेकिन उनमें यह बीमारी नहीं पनपती है, जिसने प्रयोग को और मुश्किल बना दिया है. हेपेटाइटिस सी के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है. हेपेटाइटिस सी की मौजूदगी (मूलतः “नॉन-ए (Non-A) नॉन-बी (Non-B) हेपेटाइटिस”) 1970 के दशक में मान ली गयी थी और 1989 में आखिरकार सिद्ध कर दी गयी. यह हेपेटाइटिस के पांच वायरसों: ए (A), बी (B), सी (C), डी (D), ई (E) में से एक है.

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