Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!

डीएम की पत्नी आम नागरिक की तरह गईं जिला अस्पताल तो अपने कक्ष से नदारद चिकित्सक ने कहा, अंदर क्यों आईं…

यहाँ से दोस्तों को भी शेयर करके पढ़ाइये

-आम नागरिक की तरह बिना पहचान बताए अपने बच्चे को दिखाने अस्पताल गई थीं डीएम की पत्नी, बच्चे को गोद में लेकर करीब पौने घंटे अस्पताल में यहां से वहां भटकती रहीं

जिला अस्पताल में पर्ची लेने के लिए लाइन में बच्चे को गोद में लेकर खड़ी डीएम की पत्नी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जुलाई 2019। नैनीताल जनपद के डीएम सविन बंसल की पत्नी सुरभि बंसल शुक्रवार को आम नागरिक की तरह बिना अपनी पहचान बताये अपने 8-10 माह के बच्चे को दिखाने जिला मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला पुरुष चिकित्सालय पहुंचीं तो वहां की अव्यवस्थाएं तार-तार हो बेपर्दा हो गयीं, कि यहां चिकित्सक किस तरह अपने कक्ष से नदारद रहते हैं और दुःख-तकलीफ की स्थितियों में पहुंचे आम नागरिकों से किस तरह का व्यवहार करते हैं। यहां तक कि अपने कक्ष से गायब चिकित्सक ने तो डीएम की पत्नी को डपट ही दिया कि जब कक्ष में चिकित्सक नहीं थे, तो वे कक्ष में भीतर कैसे आ गयीं। इस दौरान बच्चे को दिखाने के लिए उसे गोद में लेकर वह करीब पौने घंटे अस्पताल में यहां से वहां, कभी नीचे तो कभी ऊपर और कभी नये तो कभी पुराने खंड में चिकित्सकों की तलाश में बिना किसी सहायता के भटकती रहीं। यह स्थिति तब है, जबकि डीएम सविन बंसल ने केवल पांच दिन पूर्व ही चिकित्सालय का निरीक्षण किया था और व्यवस्थाओं में बेहतरी के लिए कई सुझाव दिये थे।
हुआ यह कि डीएम सविन बंसल के पुत्र सनव को बाल रोग को दिखाने के लिए बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचीं। इस दौरान उनके साथ केवल एक सुरक्षा कर्मी, बिना वर्दी के था, साथ ही डीएम के भी अभी जनपद में नये आये होने की वजह से भी उन्हें चिकित्सालय में कोई नहीं जानता था। इस दौरान उन्होंने आम नागरिकों की तरह जिला पुरुष चिकित्सालय के पंजीकरण काउंटर में लाइन में खड़े होकर बच्चे के नाम की पर्ची ली। यहां से उन्हें बताया गया कि बच्चे को दिखाने के लिए नीचे, गेट के पास के ब्लड बैंक वाले खंड के निचले तल में बाल रोग को दिखाएं। सुरभि वहां पहुंचीं तो बाल रोग विशेषज्ञ अपने कक्ष में नहीं थे। वहां से पूछे जाने पर बताया गया कि ऊपर मुख्य भवन में पर्ची काउंटर के सामने ही बाल रोग विशेषज्ञ डा. एमएस रावत देखेंगे। यानी पर्ची काउंटर से सही जानकारी नहीं मिली। यहां डा. रावत को दिखाने के बाद उन्हें बच्चे को एलर्जी की शिकायत चर्म रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी गयी। पर्ची काउंटर के बगल के कक्ष के बाहर चर्म रोग विशेषज्ञ का बोर्ड लगा था किंतु वहां चिकित्सक नहीं थे। पूछने पर बताया गया कि चर्म रोग विशेषज्ञ डा. अजय नैथानी नये वाले खंड में बैठते हैं। बच्चे को गोद में लेकर वे वहां गईं तो वहां भी चिकित्सक अपने कक्ष में नहीं थे। तब तक बाल रोग विशेषज्ञ को अंदाजा हो गया था कि वे कोई ‘वीआईपी’ हैं। पता चलने पर वे खुद डा. नैथानी को कहीं से ढूंढ-बुला कर अपनी सीट पर ले कर आये, लेकिन डा. नैथानी ने सुरभि को यह कहते हुए डपट दिया कि जब चिकित्सक कक्ष में नहीं थे तो वे भीतर कैसे चली आईं।
इस पर पूछे जाने पर डीएम सविन बंसल ने कहा कि जिला चिकित्सालय का इसी तरह औचक निरीक्षण करवाएंगे। इससे पता चलता है कि चिकित्सालय की व्यवस्थाएं व चिकित्सकों का आम मरीजों के प्रति कैसा व्यवहार है। पुनरावृत्ति पाये जाने पर चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

यह भी पढ़ें : काश सभी जगह डीएम के ऐसे ही दौरे हों….

-डीएम के दौरे के बाद बहुरेंगे जिला अस्पताल के दिन, लगेंगे एसी, इलेक्ट्रिक कैटल, कुर्सियां, नयी ऑपरेशन थियेटर यूनिट, और भी बहुत कुछ

-चिकित्सालय के आम रोगियों को असुविधा से बचाने के लिए वीआईपी रोगियों के लिए अगले से यूनिट स्थापित करने को भी डीएम ने सीएमओ से प्रस्ताव बनाने को कहा

बृहस्पतिवार को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में निरीक्षण के दौरान जानकारियां लेते डीएम सविन बंसल।

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जुलाई 2019। अधिकारियों के दौरों-निरीक्षणों से जनता को कितना लाभ मिल सकता है, नैनीताल के डीएम सविन बंसल का बृहस्पतिवार को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय का निरीक्षण इसका प्रतिमान एवं दूसरे अधिकारियों के लिए मिसाल हो सकता है। डीएम ने स्वयं पहल करते हुए जिला बीडी पांडे जिला चिकित्सालय को वहां के चिकित्सकों-रोगियांे-तीमारदारों के मांगे बिना ही, उनकी जरूरतों को समझते हुए कई तोहफे देने के ऐलान किये। इस कड़ी में अस्पताल में सर्जिकल व मेडिकल वार्डों में दो-दो सर्वाधिक क्षमता के स्पिलिट एसी एवं गर्म पानी व स्वयं चाय बनाने के लिए दो-दो इलेक्ट्रिक कैटल, स्टाफ के चाय बनाने के लिए भी ऐसी ही इलेक्ट्रिक कैटल, तीमारदारों के बैठने के लिए बाहर 10-15 अच्छी क्रोम प्लेटेड कुर्सियां, शेड, शौचालय के बाहर भी बारिश से बचने के लिए शेड, अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों को प्रदर्शित करने के लिए बाहर 55 इंच की बड़ी स्क्रीन का डिस्प्ले, मरीजों के लिए उपलब्ध रैक आदि पर प्लास्टिक कोटेड पेंट कराने, ऑपरेशन थियेटर में पुराने उपकरणों की जगह नये उपकरण एवं एक अतिरिक्त ऑपरेशन थियेटर की यूनिट स्थापित करने, सुरक्षा व्यवस्था के लिए उपनल के माध्यम से पर्याप्त कर्मियों की तैनाती एवं चिकित्सालय में कार्मिकों की कमी दूर करने के निर्देश दिये। साथ ही खास बात, मुख्यालय में वीआईपी रोगियों की देखरेख के लिए एक अलग से यूनिट स्थापित करने की बात भी डीएम ने कही, ताकि चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्सकों के वीआईपी की खिदमत में जाने के कारण आम रोगियों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इस हेतु सीएमओ से प्रस्ताव बनाने को कहा। वहंीं चिकित्सालय की पीएमएस डा. तारा आर्या द्वारा ईएमओ यानी आपातकालीन रोगियों को देखने वाले चिकित्सकों की कमी की समस्या बताने पर उन्होंने कहा, सप्ताह-सप्ताह भर के लिए दूसरे चिकित्सालयों से चिकित्सकों की ड्यूटी लगाएं। सीएमओ डा. भारती राणा द्वारा ऐसा करने पर चिकित्सकों को टीए देने में समस्या आने के प्रश्न पर डीएम ने कहा कि वे अपने ‘अनटाइड फंड’ से चिकित्सकों को टीए दिलाएंगे।
वहीं पैथोलोजी में 2 बजे के बाद भी जांच कार्य सम्पादित हो इसके लिए डीएम ने 2 अतिरिक्त पैथोलोजिस्ट व अन्य कर्मी बढ़ाने के लिए उपनल के माध्यम से 6 कार्मिकों का प्रस्ताव बनाकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सालय में रोगियों को अनावश्यक बाहर न रेफर किये जाने तथा आवारा कुत्तों के काटे जाने वाले मरीजों को एआरवी यानी एंटी रैबीज वैक्सीन लगना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। वहीं महिला चिकित्सालय के निरीक्षण के दौरान जच्चा-बच्चा वार्ड में सिजेरियन डिलीवरी तथा नोर्मल डिलीवरी वाली जच्चा-बच्चा की स्थिति को देखते हुए अलग-अलग चेम्बर बनाने, जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की संवेदनशीलता को देखते हुए वार्ड में उच्च क्षमता 5 एसी भी स्थापित करने, बेबी कॉर्नर को रेनोवेट करने तथा लेबर रूम में टाईल्स लगाने, की एसी लगाने, कम्बलों, चादरों पर कवर लगाने, पेयजल हेतु स्टील सिंक लगाने, इंजेक्शन कक्ष में डस्टबिन बदलने, फर्श पर टाईल्स लगाने, महिला चिकित्सालय की वायरिंग बदलने, स्टॉक में उपलब्ध अतिरिक्त दवाओं को अन्य महिला चिकित्सालयों, सुशीला तिवारी चिकित्सालय में मांग के अनुसार उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये। निरीक्षण के दौरान निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डा. मीना पुनेरा, डा. वीके पुनेरा, डा.रश्मि पंत, डा. बलवीर सिंह, डा. एमएस दुग्ताल, डा. एचएस धामी, डा. द्रौपदी गर्ब्यालय, डा.मंजू रावत, डा. संजीव खर्कवाल व अन्य चिकित्सा कर्मी मौजूद रहे।

शीघ्र शुरू होगा नैनीताल जनपद का अपना ‘संतुष्टि’ मोबाइल ऐप, ‘सेव नैनी लेक’ ग्रुप बना

नैनीताल। नैनीताल जनपदवासियों के लिए शीघ्र अपनी हर तरह की समस्याओं के समाधान के लिए ‘संतुष्टि’ नाम का ऐप शुरू होने जा रहा है। डीएम सविन बंसल ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बात करते हुए इसके निर्देश दिये। बताया कि इस पर शिकायत करने के दो दिन के भीतर समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा पर्यटन नगरी की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाली नैनी झील में बरसात के दिनों में किसी भी प्रकार की गन्दगी न रहे तथा नालों में पानी के साथ बहकर झील में आने वाली गंदगी को प्रतिदिन साफ करने तथा झील के जल स्तर पर नियमित नजर रखने के लिए शीघ्र ही नैना देवी मंदिर नाले, ठंडी सड़क व तल्लीताल गॉधी चौक के पास वाईफाई एनेबल्ड ऑल वेदर हाई रिजुलेशन कैमरे स्थापित किए जाने की भी उन्होंने जानकारी दी। बताया कि कैमरे स्थापित करने के लिए टेंडर भी हो चुका है। उन्होंने इस हेतु ‘सेव नैनी लेक’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने की भी जानकारी दी। जिसमें नगर पालिका के अधिकारी झील, नालों तथा शहर की प्रतिदिन सफाई करते हुए फोटो डालेंगे। बताया कि ग्रुप में सिंचाई, जल संस्थान व प्रशासनिक अधिकारी भी प्रतिदिन झील, नालों की सफाई व जल स्तर की मोनीटरिंग करेंगे।
जिलाधिकारी श्री बंसल ने कहा कि नैनी झील, नालों की सफाई, जल स्तर पर लेक कन्ट्रोल रूम पर प्रतिदिन पैनी नजर रखने व मोनीटरिंग के लिए वाईफाई एनेबल्ड ऑल वेदर हाई रिजुलेशन कैमरे लगाए जायेंगे। आम लोग भी कूड़ा डालने वालों के फोटो प्रशासनिक अधिकारियों को भेज सकते हैं।

यह भी पढ़ें : बड़ा चिंताजनक समाचार: स्वास्थ्य व आपूर्ति विभागों की इस लापरवाही से राज्य में लाखों लोग आयुष्मान योजना से छूटे..

-2015-16 के बाद राशन कार्डों को ऑनलाइन कराने वाले लाखों परिवारों के नहीं बन पा रहे हैं आयुष्मान कार्ड
-स्वास्थ्य महानिदेशालय के स्तर से आपूर्ति विभाग के मुख्यालय से पोर्टल में एक्सेस की अनुमति मांगे जाने से होगा समस्या का समाधान
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 जुलाई 2019। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में हर व्यक्ति को अटल आयुष्मान योजना का लाभ देने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, किंतु यह योजना स्वास्थ्य विभागों की लापरवाही व आपस में सामंजस्य न होने के कारण सरकार की किरकिरी कराने की ओर आगे बढ़ रही है। योजना के तहत जरूरतमंदों को अपेक्षित लाभ न मिलने की चर्चाएं तो आम हैं ही, वहीं ध्यान न दी जा रही परेशानी यह है कि हजारों परिवारों के लाखों लोग योजना के तहत आयुष्मान कार्ड ही नहीं बना पा रहे हैं।
यह वे लोग हैं जो किसी कारण पहले अपने राशन कार्डों को ऑनलाइन नहीं करा पाये। क्योंकि तब राशन कार्डों को ऑनलाइन करने का कमोबेश मतलब सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से राशन प्राप्त करना था। जो लोग राशन नहीं चाहते थे, उन्होंने राशन कार्डों को तब ऑनलाइन नहीं कराया। बाद में आयुष्मान योजना के तहत ऑनलाइन राशन कार्डों की अनिवार्यता हुई तो लोगों ने अपने राशन कार्डों को ऑनलाइन भी कराया। किंतु बताया गया है कि वर्ष 2016 के बाद यानी पिछले तीन वर्षों में अपने राशन कार्डों को ऑनलाइन कराने वाले लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। बताया गया है कि इसका कारण आपूर्ति विभाग के पोर्टल में स्वास्थ्य विभाग की आयुष्मान योजना के तहत ‘एक्सेस’ न हो पाना है। पूर्व में आपूर्ति विभाग ने जिन राशन कार्डों के 10 नंबर के ऑनलाइन पंजीकरण नंबर पेन ड्राइव के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराये थे, केवल उनके ही आयुष्मान कार्ड बन पा रहे हैं। इसके बाद के 12 नंबर के ऑनलाइन पंजीकरण नंबर वाले राशन कार्ड धारकों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहे है। इस बारे में आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय के स्तर से आपूर्ति विभाग के उच्चाधिकारियों से डाटा एक्सेस करने की अनुमति मांगी ही नहीं गयी है, सो आपूर्ति विभाग की ओर से अनुमति नहीं दी गयी है।
उल्लखनीय है कि 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की जनसंख्या एक करोड़ 86 हजार 292 है। इसके बाद की बढ़ी जनसंख्या के करीब 27 लाख परिवारों के भी आयुष्मान कार्ड बनने हैं, और उन्हें 1350 तरह की बीमारियों से पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य कवच उपलब्ध कराया जाना है। किंतु लाखों परिवार अभी योजना से छूटे हुए हैं।

यह भी पढ़ें : आयुष्मान योजना के फर्जी मैसेज से सावधान ! दर्ज हो सकता है केस

नवीन समाचार, नैनीताल 8 जनवरी 2019। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में आवेदन की अंतिम तिथि 15 जनवरी 2019 का फर्जी मैसेज सोशल साइट्स पर वायरल हो गया है। डीएम, एसएसपी और सीएमओ की ओर से लोगों को इस मैसेज को दरकिनार करने की अपील जारी की है। वहीं, इस मैसेज को वायरल करने वालों की शिकायत पुलिस से करने को कहा गया है। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी। फेसबुक, व्हाट्सअप और अन्य सोशल साइट्स पर वायरल मैसेज में बताया जा रहा है कि योजना में आवेदन की तिथि 15 जनवरी है। आवेदन करने को एक लिंक भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का भी कहना है कि कोई भी व्यक्ति इस मैसेज का संज्ञान न लें। सभी पात्र लोगों के आवेदन और गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया चलती रहेगी।

नैनीताल मैं ऐसे बना सकते हैं आयुष्मान योजना के हेल्थ कार्ड

आयुष्मान योजना में हेल्थ कार्ड बनाने के लिए पहले अपने राशन कार्ड को D S O ऑफिस जा के आधार कार्ड से जुडवा लें। इसके लिए DSO ऑफिस में राशनकार्ड, सभी का आधार कार्ड व जिसके नाम पर कार्ड है उसकी बैंक पासबुक ले जानी है। उसके बाद राशन कार्ड व आधार कार्ड लेकर हिमालय होटल के पास फ्यूचर कंप्यूटर सेंटर (ममता कुमइयां जी का) जाकर कार्ड बनवा लें। इस कार्ड से प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 5.00 लाख तक का इलाज का खर्च सरकार देगी। कार्ड आजकल बन रहे हैं।

अटल आयुष्मान स्वास्थ्य योजना से सबको नगदी रहित इलाज की सुविधा देने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तराखंड, ऐसे करें आवेदन

नवीन समाचार, देहरादून, 25 दिसंबर 2018। उत्तराखंड सरकार की ओर से सभी राज्यवासियों के लिए केंद्र सरकार की ओर से लागू आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर अटल आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना मंगलवार को शुरू हो गई है। इस प्रकार उत्तराखंड अपने सभी परिवारों को यह सुविधा देने वाला देश का पहला राज्य भी बन गया है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी परिवारों को पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो सकेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस योजना को लांच करने के साथ ही इसके लिए मोबाइल एप और वेबसाइट भी लांच किया।

देहरादून के रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल विहारी बाजपेयी के जन्मदिन पर अटल आयुष्मान योजना का शुभारंभ किया। बताया गया कि योजना के लिए लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड दिया जाएगा। इस गोल्डन कार्ड को अस्पताल में दिखाने पर उन्हें कैशलैस इलाज की सुविधा मिल सकेगी। अपरिहार्य स्थिति में कार्डधारक सीधे निजी अस्पतालों में इलाज करा सकते हैं।

गोल्डन कार्ड लेने के लिए यह है अर्हता
गोल्डन कार्ड के लिए आवेदन वही कर सकते हैं, जिनका नाम 2012 की मतदाता सूची या 2012 के परिवार रजिस्टर में होगा, अथवा उनके पास 2012 से ही उत्तराखंड में निवास करने के साक्ष्य स्वरूप राशन कार्ड या मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड अथवा 2011 के सामाजिक आर्थिक और जातीय जनगणना में नाम होना चाहिए। जिनका नाम मतदाता सूची अथवा परिवार रजिस्टर में नहीं होगा, उनके लिए जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन करने की बाध्यता रखी गयी है। वहीं प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योजना 26 जनवरी 2019 से लागू होगी। राज्य कर्मचारियों को इसका लाभ लेने के लिए एक निश्चित धनराशि देनी होगी। जबकि सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों व कर्मियों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। सरकार निजी चिकित्सालयों के समान ही सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज का पैसा देगी। इनमें से एक निश्चित प्रतिशत चिकित्सकों व स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को भी दिया जाएगा।

ऐसे करें आवेदन
‘अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना’ एप के माध्यम से योजना के लाभार्थी  अपना और परिवार का विवरण देख सकेंगे। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकेगा। एप में वोटर आईडी नंबर और नाम डालकर पता लगा सकेंगे कि आपका नाम है या नहीं। नाम न होने पर अपना या परिवार के सदस्यों का नाम जोड़ सकते हैं। साथ ही http://ayushmanbharat.co.in/ की साइट पर जाकर अस्पतालों की सूची भी देख सकेंगे।

पात्र परिवारों की संख्या
जिले          परिवारों की संख्या
1. अल्मोड़ा 1,44,709
2. बागेश्वर 66,683
3. चंपावत 57,698
4. नैनीताल 2,14,400
5. पिथौरागढ़ 1,25,952
6. ऊधमसिंह नगर 3,91,267

ये अस्पताल हैं शामिल
नैनीताल: बांबे हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, उषा बहुगुणा अल्फा हेल्थ इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड मल्टीस्पेशलिटी सर्विसेज, आई क्यू विजन प्राइवेट लिमिटेड, विवेकानंद हास्पिटल, दृष्टि सेंटर फॉर एडवासं आई केयर।
ऊधमसिंह नगर: चामुंडा अस्पताल एवं लेप्रोस्कोपिक सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, एमपी मेमोरियल अस्पताल, अग्रवाल आर्थो केयर एंड ट्रामा सेंटर, अमृत अस्पताल, राम आई केयर और नर्सिंग होम, एंबर अस्पताल प्राइवेट लिमिटेड, उजाला हेल्थकेयर सर्विसेज लिमिटेड, आनंद अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, तपन अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर, श्री कृष्ण अस्पताल, आई साईट सुपर स्पेशलिटी आई केयर सेंटर, द मेडिसिटी रुद्रपुर, अली नर्सिंग होम, महालक्ष्मी आई अस्पताल, महाराजा अग्रसेन चेरिटेबिल अस्पताल, सेवा पॉली क्लीनिक और आस्था हास्पिटल।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में पिछले दो वर्षों में चिंताजनक तरीके से बढ़ी इस जानलेवा रोग के रोगियों की संख्या

-पहली बार 2017 में एक एवं 2018 में 5 हेपेटाइटिस रोगियों की मृत्यु हुई
नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जुलाई 2019। सूचना के अधिकार के तहत स्वास्थ्य सेवा निदेशालय से प्राप्त सूचना के अनुसार प्रदेश में पिछले दो वर्षों में हेपेटाइटिस रोगियों की संख्या में चिंताजनक स्तर की बढ़ोत्तरी देखी गयी है। हल्द्वानी के सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को दी गयी सूचना के अनुसार वर्ष 2007 के बाद से प्राप्त सूचना के अनुसार 2007 से 2010 के चार वर्षों में पूरे प्रदेश में हेपेटाइटिस का एक भी मामला नहीं आया। 2011 में दो पुरुष व तीन महिला सहित कुल 5, 2012 में 17 पुरुष व 7 महिला सहित कुल 24 व 2013 में 10 पुरुष व 5 महिलाओं सहित कुल 15 लोगों में हेपेटाइटिस सी रोग रिकॉर्ड किया गया। वहीं इसके बाद के तीन वर्षों यानी 2014, 2015 व 2016 में पुनः पूरे राज्य में हेपेटाइटिस सी का एक भी मामला प्रकाश में नहीं आने का दावा किया गया है। जबकि इसके बाद अचानक 32 पुरुष व 28 महिलाओं सहित 60 लोगों को यह रोग होने एवं इनमें से एक पुरुष रोगी की मौत होने तथा 2018 में अब तक के रिकार्ड व चिंताजनक आंकड़े प्रदर्शित किये गये हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2018 में 68 पुरुष एवं 30 महिलाओं सहित 98 लोगों को हेपेटाइटिस सी रोग रिकॉर्ड हुआ तथा इनमें से 4 पुरुषों एवं 1 महिला सहित कुल 5 रोगियों की मृत्यु भी इस रोग के कारण हो गयी। वहीं 2019 में अप्रैल माह तक हेपेटाइटिस का एक भी रोगी प्रकाश में न आने की जानकारी दी गयी है।

सूचना अविश्वसनीय सी

नैनीताल। स्वास्थ्य महानिदेशालय के अंतर्गत दी गयी सूचना अविश्वसनीय सी प्रतीत होती है। इसमें जहां 2001 से 2006 तक की सूचना उपलब्ध ही नहीं होने की बात कही गयी है, वहीं 2007 से 2010 के बीच के चार एवं 2014 से 2016 के बीच के तीन वर्षों में हेपेटाइटिस का एक भी रोगी नहीं बताया गया है। इससे सूचना की सत्यता पर शंका होती है। हेपेटाइटिस सी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गयी कार्यवाही एवं रोकथाम के लिए प्राप्त बजट एवं रोगियों को मुआवजा देने की भी जानकारी उपलब्ध न होने की बात कहते हुए जानकारी नहीं दी गयी है।

यह भी पढ़ें  : उत्तराखंड में हेपेटाइटिस सी के मामले बी की तुलना में दस गुना अधिक

सामान्यतया चिंता हेपेटाइटिस-बी की की जाती है, किन्तु हेपेटाइटिस सी की बीमारी इससे कहीं अधिक खतरनाक है। इस बीमारी को दुनिया की 8वीं सबसे जानलेवा बीमारी माना गया है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट खून के कारण होने वाले संक्रमण से तेजी से बढ़ रही इस बिमारी के कारण भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में आपाधापी सी मची हुई है। हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख से अधिक लोगों की जान जाने के कारण भारत में हेपेटाइटिस सी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बोझ माना जा रहा है।

उत्तराखंड के रुद्रपुर में इस बिमारी के विशेषज्ञ डॉ. राहुल किशोर कहते हैं, अपनी प्रैक्टिस में मैंने हेपेटाइटिस बी की तुलना में हेपेटाइटिस सी के अधिक मामले देखे हैं। खासकर उत्तराखंड में हेपेटाइटिस सी के मामले हेपेटाइटिस बी की तुलना में दस गुना अधिक हैं। मैं इसके 70-80 मामले रोज देखता हूं, जिनमें स्त्री और पुरुष दोनों ही शामिल हैं। यह स्थिति मेडिकल जगत के लिए बेहद चिंताजनक है। हेपेटाइटिस सी खून से होने व फैलने वाला संक्रमण है। देश के ज्यादातर संक्रमित इलाकों में इसकी वजह खून के लेन-देन के समय बरती गई असावधानी, प्रयोग की जा चुकी सुइयों को दोबारा इस्तेमाल, सर्जिकल प्रक्रियाओं में असावधानी, उपकरणों का साफ न किया जाना, टूथ ब्रश व रेजर जैसे निजी संसाधनों का एक-दूसरे में बांटा जाना व असुरक्षित सेक्स संबंध है। सबसे बड़ी मुसीबत है कि अभी तक हेपेटाइटिस बी की तरह हेपेटाइटिस सी के लिए कोई वैक्सीन ईजाद नहीं की जा सकी है, जिसकी वजह से पीड़ित व्यक्ति को क्रोनिक लीवर रोग के अलावा लीवर कैंसर तक हो सकता है।

डॉ. किशोर का कहना है किं, हेपेटाइटिस सी को साइलेंट किलर माना जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बिलकुल भी स्पष्ट नहीं होते हैं। इसकी वजह से जल्दी समझ नहीं आता कि कोई इससे संक्रमित है। काफी समय तक इसकी जांच न हो पाने के कारण यह धीरे-धीरे क्रोनिक एचसीवी संक्रमण के तौर पर विकसित होता जाता है।

यह भी जानें :

यकृतशोथ ग (हेपेटाइटिस सी) एक संक्रामक रोग है जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी (HCV) की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है. इसका संक्रमण अक्सर स्पर्शोन्मुख होता है लेकिन एक बार होने पर दीर्घकालिक संक्रमण तेजी से यकृत (फाइब्रोसिस) के नुकसान और अधिक क्षतिग्रस्तता (सिरोसिस) की ओर बढ़ सकता है जो आमतौर पर कई वर्षों के बाद प्रकट होता है. कुछ मामलों में सिरोसिस से पीड़ित रोगियों में से कुछ को यकृत कैंसर हो सकता है या सिरोसिस की अन्य जटिलताएं जैसे कि यकृत कैंसर और जान को जोखिम में डालने वाली एसोफेजेल वराइसेस तथा गैस्ट्रिक वराइसेस विकसित हो सकती हैं.

हेपेटाइटिस सी वायरस रक्त से रक्त के संपर्क द्वारा फैलता है. शुरुआती संक्रमण के बाद अधिकांश लोगों में, यदि कोई हों, तो बहुत कम लक्षण होते हैं, हालांकि पीड़ितों में से 85% के यकृत में वायरस रह जाता है. इलाज के मानक देखभाल जैसे कि दवाइयों, पेजिन्टरफेरॉन और रिबावायरिन से स्थायी संक्रमण ठीक हो सकता है. इकावन प्रतिशत से ज्यादा पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं. जिन्हें सिरोसिस या यकृत कैंसर हो जाता है, उन्हें यकृत के प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है तथा प्रत्यारोपण के बाद ही वायरस पूरी तरह से जाता है.

एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में 270-300 मिलियन लोग हेपेटाइटिस सी से संक्रमित हैं. हेपेटाइटिस सी पूरी तरह से मानव रोग है. इसे किसी अन्य जानवर से प्राप्त नहीं किया जा सकता है न ही उन्हें दिया जा सकता है. चिम्पांजियों को प्रयोगशाला में इस वायरस से संक्रमित किया जा सकता है लेकिन उनमें यह बीमारी नहीं पनपती है, जिसने प्रयोग को और मुश्किल बना दिया है. हेपेटाइटिस सी के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है. हेपेटाइटिस सी की मौजूदगी (मूलतः “नॉन-ए (Non-A) नॉन-बी (Non-B) हेपेटाइटिस”) 1970 के दशक में मान ली गयी थी और 1989 में आखिरकार सिद्ध कर दी गयी. यह हेपेटाइटिस के पांच वायरसों: ए (A), बी (B), सी (C), डी (D), ई (E) में से एक है.

यह भी पढ़ें : यह खाने-पीने से बुढ़ापे तक बनी रहेगी सकारात्मक सोच और बेहतर याददाश्त

आज की व्‍यस्‍त लाइफस्‍टाइल में घंटों- घंटों बैठना आम बात है. दिन में नौ-नौ घंटे ऑफिस में लोग एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं लेकिन क्‍या आप जानते हैं? लोगों के बैठने की ये आदत उन्‍हें बीमार कर रही हैं. उन्‍हें तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आइए जानते हैं कौन-कौन सी हो रही हैं दिक्‍कतें ?

दरअसल एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठने से पीठ की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर भारी दबाव पड़ सकता है.

इसके अलावा, टेढ़े होकर बैठने से रीढ़ की हड्डी के जोड़ खराब हो सकते हैं और रीढ़ की हड्डी की डिस्क पीठ और गर्दन में दर्द का कारण बन सकती है.

लंबे समय तक खड़े रहने से भी स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है.

दरअसल शरीर को सीधा रखने के लिए बहुत सारी मांसपेशियों की ताकत की आवश्यकता होती है. लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है।

यह भी पढ़ें : हर राज खोलती आपकी आंखों में छिपी है आपकी सेहत से जुड़ी हर बात, अपनी आंखें देख कर जानें कहीं आप तो नहीं हो रहे इन बीमारियों के शिकार

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 जनवरी 2019। कहते हैं कि आंखे हमारे दिल का आईना होती है। हम अपने चेहरे के हाव-भाव से तो हर बात को छिपा सकते हैं, लेकिन हमारी आंखें हमेशा सच बोलती हैं। चाहें हम दुखी हो या खुश हमारी आंखें उसे बयां कर ही देती है। इसके अलावा अगर हमारी सेहत ठीक नहीं है तो भी इसका असर आंखों पर दिखाई दे जाता है। अक्सर बीमार होने पर लोगों की आंखों का रंग बदलने लगता है। हालांकि यह पता लगाना मुश्किल होता है कि किसी गंभीर बीमारी के संकेत तो नहीं है। आज हम आपको आंखों से जुड़ी कुछ ऐसी ही दिलचस्प चीजें बताने ज रहे हैं जिन पर गौर कर आप पता कर सकते हैं कि यह किस बीमारी की ओर ईशारा हो सकता है।

ब्रेन ट्यूमर:- इस घातक बीमारी में थकान, सिरदर्द और आलस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा आंखों का रंग बदल जाना और धुंधला दिखना भी ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हैं।

लकवा:- वैसे तो हर बीमारी घातक ही होती है। लेकिन कुछ चीजों पर ध्यान देकर लकवा से बचा जा सकता है। कोई भी बीमारी से पहले उसके लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। अगर महसूस करते हैं कि किसी की पलकें अचानक से लटकी हुई लगने लगी हैं और साथ ही आवाज में भी बहुत लड़खड़ाहट हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे, यह लकवा की ओर संकेत हो सकते हैं। ऐसे में अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना शुरु करें।

थायराइड:- हर दिन बढ़ते कॉम्पिटिशियन के कारण लोग खुद पर ध्यान देना भूल ही गए हैं। ऐसे में थाइराइड भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। इस दौरान अचानक वजन बढ़ने या घटने लगता है, इसके अलावा बार-बार भूख लगना और थकान जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं। साथ ही आंखें भी उभरी हुई लगने लगती हैं।

हाई ब्लड प्रेशर:- उच्च रक्तचाप के कारण भी आपको आंखों में फर्क नजर आने लगता है। अगर किसी को हाई ब्लड प्रेशर की परेशानी रहती है तो उनकी आंखों का रंग अक्सर लाल रहता है। इसके अलावा ब्लड वेसेल्स फैसने की वजह से आंखों में सूजन भी दिखाई देने लगती है।

डायबिटीज:- पिछले कुछ समय में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस कारण आपकी आंखों का रंग भी बदलने लगता है और ब्लड वेसेल्स भी प्रभावित होने लगते हैं।

यह भी पढ़ें : जानें बेहतर स्वास्थ्य के लिए कैसा पानी पिए और कब कब और कितना…Image of story

नवीन समाचार, नैनीताल 19 जनवरी 2019। जल ही जीवन है यह वाक्य तो आपने कई बार सुना होगा। किताबों और दीवारो पर लिखा हुआ देखा होगा। पानी के बिना इस धरती पर जीना बहुत मुश्किल होता है। सभी जानते हैं पानी पीना हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है। आज हम आपको बताएंगे कि कैसा समय पानी पीने के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है।

जब आप सुबह उठते है तो उस समय आपको हल्का गुनगुना पानी घूँट घूँट करके पीना बहुत जरूरी है। इससे आपके मुंह में बनी रात भर की लार आपके अंदर चली जाती है और पाचन सही होता है साथ में शौच भी बेहतर होती है।

दोपहर के खाने से आधे घंटे पहले जितना मन हो उतना पानी पीना बहुत आवश्यक है लेकिन पियें जरूर। इससे आपके पेट में भूख बढ़ती है। खाना खाने के एक घंटे बाद आप पानी पियें और जितना पी सकते है उतना पियें लेकिन एक घंटे बाद ही। इस समय पानी पीना बहुत आवश्यक है।रात को सोने से आधे घंटे पहले आपको पानी पीना बहुत आवश्यक है। इससे आपके शरीर को भोजन पाचन की इक्श्मता मिलती है। यह बहुत जरूरी है।

यह भी पढ़ें : इस गणतंत्र दिवस स्वास्थ्य सुविधाओं में भी ‘उड़ान’ भरेगा उत्तराखंड, ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य होगा

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जनवरी 2019। उत्तराखंड में इसी माह से हेली एंबुलेंस सेवा शुरू हो सकती है। सरकार सिविल एविएशन कंपनी को कार्य आवंटित कर 26 जनवरी से इस सेवा का शुभारंभ करने की तैयारी में है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश को हेली एंबुलेंस सेवा के लिए पांच करोड़ का बजट स्वीकृत है। उधर, स्थायी रूप से सेवा शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हेली एंबुलेंस सेवा का ट्रायल करने के बाद सरकार शीघ्र ही इस सेवा को शुरू करने जा रही है। हेली एंबुलेंस सेवा शुरू करने में उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा। इस सेवा के शुरू होने से प्राकृतिक आपदा व अन्य दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। एक या दो स्ट्रेचर की क्षमता वाले एयर एंबुलेंस से इस सेवा को प्रदेश में शुरू किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बजट उपलब्ध होने से सरकार का प्रयास है कि इसी माह से प्रदेश में हेली एंबुलेंस को शुरू किया जाए। आगामी वित्तीय वर्ष में एंबुलेंस सेवा का विस्तार किया जाएगा और चारधाम यात्रा के दौरान भी एंबुुलेंस की सेवा उपलब्ध होगी। उधर, सचिव स्वास्थ्य नितेश कुमार झा का कहना है कि हेली एंबुलेंस सेवा के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। 26 जनवरी से प्रदेश में इस सेवा को शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बजट स्वीकृत है। एक बार प्रदेश में यह सेवा शुरू हो जाती है तो आगामी वित्तीय वर्ष से इसमें और सुधार किया जाएगा। प्रदेश में कहीं भी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना होने से हेली एंबुलेंस सेवा का इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे कम समय में घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

Loading...

3 thoughts on “डीएम की पत्नी आम नागरिक की तरह गईं जिला अस्पताल तो अपने कक्ष से नदारद चिकित्सक ने कहा, अंदर क्यों आईं…

Leave a Reply