नवीन समाचार, देहरादून, 23 जनवरी 2026 (UK Congress 2027 Formula)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जुड़ी कांग्रेस की चुनावी तैयारियों में एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव सामने आया है। कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव (Legislative Assembly Election) के लिए प्रत्याशी चयन प्रक्रिया में जिलाध्यक्षों को निर्णायक भूमिका देने की रणनीति बनाई है। अब किसी भी विधानसभा सीट पर प्रत्याशी को अंतिम रूप देने से टिकट देने से पहले संबंधित संगठनात्मक जिले के जिलाध्यक्ष की सहमति अनिवार्य होगी। इस बदलाव का सीधा उद्देश्य स्थानीय संगठन को मजबूत करना, बाहरी दबाव से टिकट वितरण रोकना और बूथ स्तर तक कैडर (Cadre) आधारित राजनीति को प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।
कुरुक्षेत्र के प्रशिक्षण शिविर से निकला “जिलाध्यक्ष वीटो” का फैसला
27 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों को ‘वीटो पावर’, टिकट प्रक्रिया में नया नियम
कांग्रेस ने उत्तराखंड के सभी 27 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों को टिकट वितरण में ‘वीटो पावर’ (Veto Power—आपत्ति होने पर निर्णय रोकने का अधिकार) देने का निर्णय लिया है। इसका अर्थ है कि अब किसी भी विधानसभा सीट के लिए प्रत्याशी को टिकट देने से पहले स्थानीय जिलाध्यक्ष की सहमति जरूरी होगी। यदि जिलाध्यक्ष सहमत नहीं होंगे तो टिकट वितरण पर पुनर्विचार किया जाएगा।
यह फैसला हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित “संगठन सृजन प्रशिक्षण शिविर” (Organization Building Training Camp) में लिया गया। इस शिविर में उत्तराखंड और हरियाणा के जिलाध्यक्षों को संगठन निर्माण, बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति का प्रशिक्षण दिया गया।
कांग्रेस के अनुसार, टिकट वितरण के लिए अब एक संयुक्त सहमति प्रणाली लागू होगी, जिसमें—
नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition),
प्रदेश अध्यक्ष (State President),
प्रदेश प्रभारी (State In-charge)
और संबंधित जिलाध्यक्ष
इन सभी की सहमति आवश्यक होगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि केंद्रीय नेतृत्व (High Command) अब अपने स्तर से अकेले टिकट अंतिम नहीं करेगा।
राहुल गांधी का संदेश: संगठन सर्वोपरि, व्यक्ति नहीं
शिविर के दौरान 20 जनवरी को पहुंचे कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तराखंड के 26 जिलाध्यक्षों से संवाद किया। प्रशिक्षण में जो संदेश सामने आया, उसमें प्रमुख बातों पर जोर दिया गया—
संगठन सर्वोपरि, व्यक्ति नहीं।
जमीन पर काम करने वालों को अवसर।
निष्क्रिय जिलाध्यक्ष हटेंगे।
प्रदर्शन के आधार पर पदोन्नति (Promotion) होगी।
यह संदेश केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि कांग्रेस अब “व्यक्ति केंद्रित राजनीति” (Person-centered politics) की जगह “संगठन केंद्रित चुनाव प्रबंधन” उत्तराखंड कांग्रेस का 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए नया रोडमैप, अब टिकट पर जिलाध्यक्षों को मिलेगा निर्णायक अधिकार (Organization-centered election management) की ओर बढ़ रही है। क्या यह बदलाव टिकट के विवादों को कम करेगा या नए आंतरिक समीकरण बनेंगे—यह बड़ा प्रश्न है।
जिलाध्यक्षों में से ही भविष्य का प्रदेश अध्यक्ष?
शिविर में यह भी चर्चा सामने आई कि उत्तराखंड में आगे चलकर प्रदेश अध्यक्ष इन्हीं जिलाध्यक्षों में से सक्रिय व प्रभावी प्रदर्शन के आधार पर चुना जा सकता है। इससे जिलाध्यक्षों की भूमिका केवल प्रशासनिक संगठन संचालन तक सीमित न रहकर सत्ता की रणनीति का सीधा केंद्र बन जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय: टिकट विवाद, पैराशूट उम्मीदवार और स्थानीय असंतोष
उत्तराखंड की राजनीति में चुनावों के समय टिकट वितरण अक्सर विवाद का कारण बनता है। ऐसे में जिलाध्यक्षों की सहमति को अनिवार्य बनाकर कांग्रेस—
“पैराशूट उम्मीदवारों” (Parachute Candidates—अचानक बाहर से उतारे गये प्रत्याशी) पर रोक लगाना चाहती है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतना चाहती है।
बूथ स्तर तक संगठन को चुनाव की धुरी बनाना चाहती है।
यह बदलाव विज्ञापन एवं जनहित की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, न्याय व जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे विषयों पर जमीनी प्रतिनिधियों की भूमिका टिकट प्रक्रिया में बढ़ेगी।
जल्द बनेगी प्रदेश कार्यकारिणी, 50 वरिष्ठ नेताओं के नाम भेजे गये
संगठनात्मक बदलाव के साथ-साथ उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी (State Executive Committee) का खाका भी तैयार हो चुका है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने उपाध्यक्ष, महामंत्री सहित विभिन्न पदों के लिए करीब 50 वरिष्ठ नेताओं के नामों की संस्तुति कर सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी है।
सूत्रों के अनुसार, नवंबर में गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के साथ उन्हें टीम का आकार छोटा रखने के निर्देश भी दिए गये थे। गोदियाल ने पहले 30 दिन में टीम घोषित करने की बात कही थी, लेकिन यूकेएसएसएससी (UKSSSC—उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) पेपर लीक और अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े आंदोलनों के कारण अंतिम रूप तय नहीं हो पाया। हाल में शीर्ष नेताओं से विचार-विमर्श के बाद सूची भेजी गई है।
प्रशासनिक-संगठनात्मक असर: क्या बदलेगा चुनावी समीकरण?
अब देखना यह होगा कि जिलाध्यक्षों को वीटो अधिकार देने से—
क्या टिकट विवाद कम होंगे?
क्या स्थानीय गुटबाजी बढ़ेगी?
क्या कार्यकर्ताओं का मनोबल और बूथ सक्रियता वास्तव में मजबूत होगी?
कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा दांव है। यदि यह मॉडल सफल रहा तो 2027 में उम्मीदवार चयन के साथ-साथ संगठन के प्रदर्शन में भी बड़ा फर्क दिख सकता है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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