अग्निवीरों के लिए सेना का स्पष्ट संदेश, स्थायी सैनिक बनना है तो चयन प्रक्रिया तक विवाह पर रहेगा प्रतिबंध

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 5 जनवरी 2026 (Ban on Marriage For Agniveers)। भारतीय सेना की अग्निवीर योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट निर्णय सामने आया है। वर्ष 2022 में प्रारंभ हुई अग्निवीर योजना का पहला बैच अब अपने चार वर्ष के कार्यकाल के अंतिम चरण में है। ऐसे में हजारों अग्निवीरों के भविष्य को लेकर बनी असमंजस की स्थिति पर सेना ने नियमों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर दी है।
सेना ने साफ कहा है कि जो अग्निवीर स्थायी सैनिक बनने की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें चयन प्रक्रिया पूरी होने तक अविवाहित रहना अनिवार्य होगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में उम्मीदवार को स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया से बाहर कर दिया जायेगा।
अग्निवीर योजना और वर्तमान स्थिति-जून-जुलाई में होंगे हजारों अग्निवीर सेवा मुक्त
भारतीय सेना से प्राप्त जानकारी के अनुसार जून और जुलाई 2026 में 20 हजार से अधिक अग्निवीर अपनी चार वर्ष की सेवा पूरी कर सेवा मुक्त किये जायेंगे। इन अग्निवीरों में से लगभग 25 प्रतिशत को उनके समग्र प्रदर्शन के आधार पर स्थायी सैनिक के रूप में दोबारा सेना में शामिल होने का अवसर मिलेगा। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, शारीरिक क्षमता, अनुशासन और सेवा रिकॉर्ड को प्रमुख आधार बनाया जायेगा। क्या हर अग्निवीर इस मानक पर खरा उतर पायेगा। यही आने वाले महीनों में तय होगा।
विवाह को लेकर सख्त नियम-चयन प्रक्रिया पूरी होने तक अविवाहित रहना अनिवार्य
सेना ने स्थायी सैनिक बनने की प्रक्रिया में विवाह को लेकर नियमों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। नियमों के अनुसार अग्निवीर अपने चार वर्ष के कार्यकाल के दौरान विवाह नहीं कर सकते। इसके साथ ही सेवा मुक्त होने के तुरंत बाद भी विवाह की अनुमति नहीं होगी। जब तक स्थायी सैनिक बनने की पूरी चयन प्रक्रिया समाप्त नहीं हो जाती और अंतिम परिणाम घोषित नहीं हो जाता, तब तक अग्निवीरों को अविवाहित रहना अनिवार्य होगा। सेना का मानना है कि इस अवधि में पूर्ण अनुशासन और ध्यान प्रशिक्षण व चयन प्रक्रिया पर केंद्रित रहना चाहिए।
नियम तोड़ने पर स्थायी नियुक्ति से बाहर
सेना ने यह भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई अग्निवीर इस निर्धारित अवधि के दौरान विवाह करता पाया गया, तो उसे स्थायी सैनिक बनने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जायेगा। ऐसे उम्मीदवार को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया जायेगा, चाहे उसका सेवा रिकॉर्ड और प्रदर्शन कितना ही उत्कृष्ट क्यों न हो। इस सख्ती का उद्देश्य चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और अनुशासन को बनाए रखना बताया गया है।
आयु सीमा और चयन प्रक्रिया का गणित-21 से 25 वर्ष की आयु में अग्निवीरों की यात्रा
अग्निवीरों की भर्ती सामान्यतः 21 वर्ष की आयु तक की जाती है और चार वर्ष की सेवा के बाद उन्हें लगभग 25 वर्ष की आयु में सेवा मुक्त किया जाता है। इसके बाद स्थायी सैनिक बनने की चयन प्रक्रिया में लगभग 4 से 6 माह का समय लग सकता है। इस दौरान सेना की अपेक्षा है कि अग्निवीर सभी नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करें और अनुशासनहीनता से बचें।
अनुशासन ही बनेगा चयन की कुंजी-केवल योग्य और अनुशासित अग्निवीरों को अवसर
भारतीय सेना ने दो टूक शब्दों में कहा है कि स्थायी सैनिक बनने का अवसर केवल उन्हीं अग्निवीरों को मिलेगा जिन्होंने चार वर्ष का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया हो, जिनका सेवा रिकॉर्ड संतोषजनक हो और जिन्होंने पूरी अवधि में नियमों का पालन किया हो। सेना का यह रुख इस बात को रेखांकित करता है कि भविष्य की सैन्य शक्ति केवल शारीरिक क्षमता से नहीं, बल्कि अनुशासन और प्रतिबद्धता से तय होगी।
यह निर्णय हजारों युवाओं के जीवन से जुड़ा है और अग्निवीर योजना की दिशा और दशा को स्पष्ट करता है। आने वाले समय में यह देखा जायेगा कि कितने अग्निवीर इन मानकों पर खरे उतरते हैं और स्थायी सैनिक बनने का सपना पूरा कर पाते हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।











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