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अवकाश के दिन भी जारी रहा जल संस्थान कर्मियों का आंदोलन, उक्रांद ने दिया समर्थन

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 15 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड जल संस्थान संविदा श्रमिक संघ द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के तहत गुरुवार को नैनीताल जल संस्थान शाखा में संविदा कर्मचारी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर बैठ गए हैं। शुक्रवार विजयदशमी को अवकाश होने के बावजूद भी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर धरने पर बैठे रहे।

इस मौके पर उनके धरना-प्रदर्शन को समर्थन देते हुवे उक्रांद के पूर्व विधायक डॉ नारायण सिंह जंतवाल ने कहा उत्तराखंड जल संस्थान में विगत 20-25 वर्षो से कार्यरत संविदा कर्मियों की जायज माँगों को सरकार अतिशीघ्र पूरा करे। समान कार्य समान वेतन मिले तथा ठेकेदारी प्रथा से मुक्त कर विभागीय नियमित पदों में नियुक्ति प्रदान की जाय।

वहीं शाखा अध्यक्ष अमर सिंह ने कहा कि विभाग में एक ही कार्य करने वाले नियमित कार्मिक को 35 हजार रुपए प्रतिमाह मिलता है जबकि आउटसोर्स कर्मियों को वही कार्य करने के लिए 7 हजार से 8 हजार रुपए तक दिया जाता है। इसलिए समान काम लागू किया जाना चाहिए। वही आउट सोर्स कर्मचारियों को साप्ताहिक व राजकीय अवकाश अवकाश दिया जाना चाहिए। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उत्तराखंड जल संस्थान के आउट सोर्स के माध्यम से कार्यरत कर्मियों को कम से कम 25 हजार प्रति माह वेतन दिया जाना चाहिए।

इस दौरान सीतम वाल्मीकि, शाखा अध्यक्ष अमर सिंह, दयाल कांडपाल, शंकर लाल, नरेश कुमार, अर्जुन कुमार, कमल सिंह बिष्ट, राजेंद्र बिष्ट, प्रदीप बिष्ट, संदीप कुमार, दीवान सिंह राणा, दयाल सिंह, सुदेश कुमार, चरणजीत बिष्ट व संदीप कुमार आदि कर्मचारी मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : गोल्डन कार्ड की विसंगतियों सहित अन्य मांगों पर 9वें दिन भी जारी रहा आंदोलन

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी संघ समन्वय समिति के आह्वान पर कर्मचारियों का गोल्डन कार्ड की विसंगतियों सहित 18 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन बृहस्पतिवार को नौवें दिन भी लगातार विकास भवन भीमताल में जारी रहा। इस दौरान कर्मचारियों ने कार्यबहिस्कार एवं गेट मीटिंग की। इस दौरान संयोजक मंडल के जगदीश बिष्ट तथा प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरजेश कांडपाल ने पूरे प्रांत में चल रहे आंदोलन की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि संगठित होकर ही अपनी न्यायोचित मांगों को मनवाने के लिए सरकार को मजबूर किया जाएगा।

बताया कि आगे 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। गेट मीटिंग में संयोजक विजय तिवारी, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिसद के जिला अध्यक्ष असलम अली, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रमेश कनवाल, हरेंद्र नेगी, केएस सामंत, केपी मेहता, कृष्ण कुमार, हिमांशु मठपाल, अशोक जोशी, लक्ष्मण अधिकारी, हिमांशु मठपाल, महिपाल सिंह, दिनेश लाल, केसी आर्य, वीरेंद्र नेगी, मनोज रावत, विदूषी तिवारी, महेश पांडे, कैलाश सिंह, धन राम आर्य, प्रेम प्रकाश चौधरी, कुंदन लाल, महेश पांडे, कमल जोशी तथा उमेश तिवारी सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे।

जल संस्थान के संविदा श्रमिकों ने किया आज से बेमियादी कार्य बहिष्कार का ऐलान

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 12 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड जल संस्थान संविदा श्रमिक संघ की शाखा नैनीताल के पदाधिकारी व सदस्य गत 20 सितंबर से अपनी पांच सूत्रीय मांगों पर महाप्रबंधक कार्यालय के प्रांगण में आंदोलन, धरना-प्रदर्शन पर बैठे हैं। अब उन्होंने महाप्रबंधक पर आंदोलन को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए आगामी 13 अक्टूबर यानी बुधवार से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर जाने का ऐलान कर दिया है।

शाखा अध्यक्ष अमर सिंह व सचिव दयाल कांडपाल ने कहा है कि इस दौरान दशहरा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पर जलापूर्ति प्रभावित होने पर विभाग स्वयं जिम्मेदार होगा। प्रदर्शन में संगठन के विपिन चंद्र, कमलेश साह, शंकर लाल, किशोर सिंह, नरेश कुमार व अर्जुन कुमार सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

कर्मचारियों ने 18 सूत्रीय मांगों पर शुरू की गेट मीटिंग
नैनीताल। उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी संघ समन्वय समिति के आवाहन पर विकास भवन भीमताल में कर्मचारियों ने 18 सूत्री मांगों को लेकर सरकार की कर्मचारी नीतियों खिलाफ नारेबाजी करते हुए आक्रोश व्यक्त किया। कर्मचारियों ने इस दौरान गोल्डन कार्ड की विसंगतियों सहित अन्य मांगों का तत्काल निराकरण किए जाने की मांग की। समिति के संयोजक विजय कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कर्मचारियों ने कहा कि कर्मचारियों की मांग पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

बताया गया कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 25 अक्टूबर तक गेट मीटिंग के माध्यम से सरकार को चेताने का कार्य करेंगे। इसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। बैठक का संचालन वरिष्ठ कर्मचारी नेता हरेन्द्र सिह नेगी ने किया। गेट मीटिंग में परिषद के अध्यक्ष असलम अली, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रमेश कनवाल, आनंद नेगी, नरेंद्र सिंह, नवीन पांडे, राहुल भट्ट, जनार्दन चौधरी, केपी मेहता प्रमोद जोशी अक्षय, महेंद्र बिष्ट, अर्जुन सिंह, सीसी पंतोला, तारा सिंह महरा, मनोज कुमार, कैलाश सिंह, प्रेम आर्य, विदूषी तिवारी, महेश पांडे, राधा रौतेला व संजय देव सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : दो अधिकारी-कर्मचारी संगठनों ने दी आंदोलन की धमकी

उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी संघ समन्वय समिति ने दी 18 मांगों पर 25 से आंदोलन की धमकी

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 8 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी संघ समन्वय समिति के आह्वान पर नैनीताल में कर्मचारियों ने 18 सूत्री मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी का प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने शुक्रवार को गोल्डन कार्ड की विसंगतियों सहित अन्य मांगों का तत्काल निराकरण किए जाने की मांग की।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष असलम अली की अध्यक्षता एवं जगमोहन रौतेला के संचालन में अपर शिक्षा निदेशक कार्यालय आयोजित बैठक में कहा गया कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 25 अक्टूबर तक सभी सरकारी कार्यालयों में गेट मीटिंग के माध्यम से सरकार को चेताएंगे। इसके बाद भी यदि उनकी मांगों पर कोई अमल नहीं किया गया तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। इस हेतु संयोजक मंडल का गठन भी किया गया। जिलाध्यक्ष अली ने कहा की सरकार कर्मचारियों की मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है। इस मौके पर इसरार, रणजीत सिंह, अनूप शाह, ललित उपाध्याय, संजय रौतेला, दिनेश शाह, मनोज कुमार, ललित सती, संजय कनवाल, हेमंत चंदोला, राजेंद्र सिंह, हरीश बिष्ट, मनोज चौधरी तथा भावना सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे।

11 से क्रमिक अनशन व 14 से बेमियादी कार्य बहिष्कार करेंगे जल संस्थान कर्मी
नैनीताल। उत्तराखंड जल संस्थान में गत 20 सितंबर से चले आ रहे धरना-प्रदर्शन के तहत आगे 11 से 13 अक्टूबर तक क्रमिक अनशन और उसके बाद 14 अक्टूबर की मध्य रात्रि से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार किया जाएगा। संगठन के अध्यक्ष हेमराज सिंह व मंत्री गणेश नाथ गोस्वामी ने कहा कि महाप्रबंधक की ओर से आंदोलन को असफल करने की बार-बार कोशिश की जा रही है, लेकिन संगठन मांगें माने जाने तक आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार बदलेगी गोल्डन कार्ड पर अपना फैसला…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 6 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड सरकार आखिर गोल्डन कार्ड के लिए पेंशन से अनिवार्य कटौती के अपने फैसले को पलटने जा रही है। राज्य सरकार की ओर से बुधवार को उच्च न्यायालय में यह जानकारी देते हुए बताया कि बताया गया नवंबर के दूसरे सप्ताह तक कटौती बंद कर दी जाएगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। बुधवार को वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तिथि नवंबर के दूसरे सप्ताह के लिए निर्धारित कर सरकार से अनिवार्य कटौती बंद करने के लिए कहा।

इस मामले में सरकार की ओर से कहा गया कि गोल्डन कार्ड के लिए अनिवार्य कटौती में कई विभागों की भूमिका है। इसलिए अनिवार्य कटौती तत्काल बंद नहीं की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि देहरादून निवासी गणपत सिंह बिष्ट ने इस मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि उत्तराखंड के सभी पेंशनरों से गोल्डन कार्ड के लिए अनिवार्य कटौती की जा रही है, जो कि संविधान के अनुछेद-300 के विरुद्ध होने के कारण गैरकानूनी है। पेंशनरों को यह विकल्प मिलना चाहिए कि उन्हें गोल्डन कार्ड का लाभ लेना है या नहीं। यह भी कहा कि गोल्डन कार्ड की सेवाएं बहुत ही लचर हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त अभियंता को 26 वर्ष पूर्व से पदोन्नति के लाभ देने के आदेश

याची अभियंता बलवीर सिंह।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने एक सेवानिवृत्त अभियंता याची को 18 जनवरी 1995 यानी करीब 26 वर्ष पूर्व से काल्पनिक पदोन्नति के लाभ देने के आदेश दिए हैं। पीठ ने आदेश में कहा है, चूंकि याची से कनिष्ठ कार्मिक सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नत हो चुके हैं, और याची सेवानिवृत्त हो चुका है, इसलिए वह संबंधित आर्थिक लाभ प्राप्त करने का भी पात्र है। पीठ ने इस संबंध में पूर्व के आदेश को भी निरस्त कर दिया है।

मामले के अनुसार झील विकास प्राधिकरण से गत 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हुए अवर अभियंता बलवीर सिंह ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि वह 18 दिसंबर 1981 को अवर अभियंता के रूप में नियुक्त हुए थे। 18 जनवरी 1995 को उनसे कनिष्ठ 9 और और 29 सितंबर 1995 को और चार अवर अभियंता पदोन्नत किए गए। इस पर उन्होंने 1995 में पब्लिक सर्विस ट्रिब्यूनल लखनऊ, यूपी के समक्ष वाद दायर किया। इस पर ट्रिब्यूनल ने 15 नवंबर 2002 को आदेश पारित किया कि याची 18 जनवरी 1995 से पदोन्नति लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र है। किंतु इसके बाद भी याची को पदोन्नत नहीं किया गया।

इस पर याची ने पुनः राज्य सरकार के खिलाफ 2017 में अवमानना का वाद दायर किया। इस पर उत्तराखंड सरकार का कहना था कि पूर्व आदेश यूपी सरकार के लिए था। इसमें उत्तराखंड सरकार पक्षकार नहीं है। यह भी कहा गया कि वर्ष 2002-03 में याची एक मामले में निलंबित हो चुका था, इसलिए वह पदोन्नति के लिए पात्र नहीं था। उसके खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित था। जबकि याची ने कहा कि उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई थी। इस पर उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने याची के पक्ष में फैसला सुनाया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ का हुआ गठन, कर्मचारी नेताओं को मिली जिम्मेदारी..

नवीन समाचार, देहरादून, 5 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ का उत्तराखंड राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन 2021 दून विश्वविद्यालय देहरादून में आयोजित हुआ। सम्मेलन का मुख्य अतिथि दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल एवं विशिष्ट अतिथि रूसा सलाहकार प्रोफेसर एमएसएम रावत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया।

इस मौके पर महासंघ की द्विवार्षिक कार्यकारिणी के चुनाव भी आयोजित हुए, जिसमें कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलदीप सिंह को अध्यक्ष, तकनीकी विश्वविद्यालय के दीपक कुमार सुंदरियाल को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के भारत नैनवाल व गढ़वाल विश्वविद्यालय के राकेश कोठारी को उपाध्यक्ष तथा कुमाऊं विश्वविद्यालय के डॉ. लक्ष्मण सिंह रौतेला को महामंत्री चुना गया। इसके अलावा दून विश्वविद्यालय के प्रशांत मेहता व संस्कृत विश्वविद्यालय के सुभाष पोखरियाल को संयुक्त मंत्री, आर्युवेद विश्वविद्यालय के राहुल तिवारी व वानिकी विश्वविद्यालय के धन सिंह नेगी को संगठन मंत्री, अल्मोड़ा विश्वविद्यालय के देवेंद्र सिंह पोखरिया को कोषाध्यक्ष एवं गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के प्रकाश चंद्र तिवारी को संप्रेक्षक नियुक्त किया गया।

मुख्य चुनाव अधिकारी कुंवर सिंह जलाल ने बताया कि इसके अलावा भूपाल सिंह कराययत व राजेंद्र सिंह भंडारी को मुख्य संरक्षक, राजेंद्र राणा व सुरेंद्र सिंह को कनिष्ठ उपाध्यक्ष, चंदर सिंह बगियाल व नवल किशोर बिनवाल को प्रवक्ता, विमल चौहान व अनिल बेलवाल को सहकोषाध्यक्ष तथा नरेश खंडूड़ी को तकनीकी सलाहकार नियुक्त किया गया है। इस दौरान प्रतिनिधि सभा में संगठन के सविधान का अनुमोदन किया गया एवं इसक साथ ही ग्यारह सूत्रीय मांगपत्र पर भी सहमति दी गई।

सम्मेलन में तकनीकी विश्वविद्यालय, देहरादून से दीपक सुन्दरीयाल, चन्द्रर सिंह, मुकेश पाण्डे, देवेन्द्र बिष्ट, रघुनाथ सिंह नेगी, दून विश्वविद्यालय से प्रशान्त मेहता, आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून से चन्द्रमोहन पैन्यूली, राहुल तिवारी, विवेक जोशी, हरीश चन्द्र गुप्ता, अनूप डिमरी, अनिल बेलवाल, शैलेश सेमवाल, संस्कृत विश्वविद्यालय से घीरज ठाकुर, राजेन्द्र सिंह, सुभाष पोखरियाल, कुमाऊॅ विश्वविद्यालय, नैनीताल से भूपाल सिंह करायत, दीपक बिष्ट, कुलपदीप सिंह, नन्दा बल्लभ पालीवाल, वीर चन्द्र सिंह गढवाली विश्वविद्यालय, भरसार से धन सिंह नेगी, सुरेन्द्र सिंह, रजनी रावत, विक्रम रावत, हेमवती नन्दन बहुगणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर से राजेन्द्र सिंह भण्डारी, राकेश कोठारी, अरविन्द रावत, अनिल डिमरी, मुक्त विश्वविद्यालय, से भरत नैनवाल, मुकेश चौहान, अनिल आर्या, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा से देवेन्द्र घामी, राजेन्द्र राणा, देवेन्द्र पोखरिया, कुलदीप उपाध्याय गुरूकुल विश्वविद्यालय, से प्रकाश तिवारी, विजेन्द्र सिंह, दीपक वर्मा सहित राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय अधिवेशन में नई कार्यकारिणी का गठन..

नवीन समाचार, देहरादून, 4 अक्टूबर 2021। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का सोमवार केा राजधानी देहरादून में प्रांतीय अधिवेशन आयोजित हुआ। इस दौरान कर्मचारियों ने शासन पर कर्मचारी विरोधी नीतियां लागू करने का आरोप लगाते हुए इसका पुरजोर विरोध करने की बात कही।

अधिवेशन में परिषद की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। कार्यकारिणी में अरुण पांडे को अध्यक्ष, शक्ति प्रसाद भट्ट को महामंत्री, गिरजेश कांडपाल को वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा रमेश सिंह को संपेक्षक पद पर निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। अधिवेशन में प्रदेश के सभी जिला शाखाओं से चुने हुए प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : विकास ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष व किरमोलिया महामंत्री निर्वाचित

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 3 अक्टूबर 2021। विकास दुम्का राज्य के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एसोसिएशन की प्रांतीय कार्यकारिणी के निर्विरोध अध्यक्ष एवं नारायण किरमोलिया महामंत्री चुने गए।

ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एसोसिएशन की प्रांतीय कार्यकारिणी के नवनिर्वाचित पदाधिकारी।

रविवार को एसोसिएशन की हल्द्वानी में आयोजित हुई बैठक में इसके अतिरिक्त प्रांतीय कार्यकारिणी का विस्तार भी किया गया और पिथौरागढ़ के दीपक कुमार को संरक्षक, सुबोध कांडपाल को कुमाऊं मंडल का अध्यक्ष, प्रदीप सुंदरियाल को गढ़वाल मंडल का अध्यक्ष, प्रदीप गुसांई व विजय टम्टा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, शार्दूल तड़ागी को कोषाध्यक्ष, अनूप सिंह रावत, इंद्र मोहन राणा, राजवीर बिष्ट, बसंत बल्लभ पंत, देवेंद्र रावत, विनोद गोस्वामी, गीतांजलि पडियार को उपाध्यक्ष एवं धर्मराज जोशी, धर्मवीर बिष्ट को संगठन मंत्री मनोनीत किया गया। चुनाव में विनोद कुमार भट्ट, गोपाल राम वर्मा व घनश्याम जोशी ने निर्वाचन अधिकारी की भूमिका निभाई।

इस मौके पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष असलम खान, उपाध्यक्ष पीके शर्मा व इसरार बेग आदि भी मौजूद रहे। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : शिक्षक संगठन में लेटरवार, लाखों की घपलेबाजी व गबन के इशारे

नवीन समाचार, देहरादून, 1 अक्टूबर 2021। राजकीय शिक्षक संघ में लाखों की घपलेबाजी की आशंका सामने आ रही है। इसे लेकर संगठन के अध्यक्ष व महामंत्री आमने-सामने आ गए हैं। दोनों के बीच लेटरवार लगातार तेज होता जा रहा है। संघ के अध्यक्ष ने महामंत्री को २०२१ का आडिट कराने के निर्देश दिये हैं तो महामंत्री ने 2018-19 व 2019-20 के शुल्क का आडिट न कराये जाने पर सवाल खड़े किये हैं। संघ नेताओं के खुलकर सामने आ गये झगड़ों से शिक्षा विभाग के अधिकारी भी पशोपेश में बताये जा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार राजकीय शिक्षक संघ महामंत्री डा. सोहन सिंह माजिला ने संघ के अध्यक्ष केके डिमरी को एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा है कि सोशल मीडिया से प्राप्त अपने पत्र २४ सितम्बर का संदर्भ लें। इस पत्र में वर्ष २०२१ की प्रांत स्तर की आडिट रिपोर्ट एक अक्टूबर तक निदेशक माध्यमिक शिक्षा को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गए हैं। इस पर कहा गया है कि सिर्फ २०२०-२१ की ही आडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराने का औचित्य स्पष्ट नहीं हो रहा है। महामंत्री ने सवाल उठाये हैं कि वर्ष २०१८-१९ व २०१९-२० के प्रान्त स्तर का आडिट क्यों नहीं कराया गया। इस पर मार्गदर्शन देने की बात पत्र में कही गयी है।

पत्र में यह भी लिखा है कि वर्ष २०१८ से २०२० तक लगभग २.२० लाख की धनराशि प्रान्तीय संयुक्त खाते से अग्रिम जारी की गई है, जिसका समायोजन आज तक नहीं हुआ है। ऐसे में सिर्फ २०२०-२१ के आडिट कराने की स्थिति में उक्त वर्षों का आडिट न किये जाने का कारण समझ से परे है। इस पत्र में यह भी कहा गया है कि निवर्तमान मंडलीय कार्यकारिणी कुमांऊ मंडल द्वारा राजकीय शिक्षक संघ के सदस्यों का शुल्क व्यक्तिगत खाते में जमा कर लगभग ३.४८ लाख रुपये का गबन किया है। कई बार प्रांतीय बैठकों में इस मुद्दे को रखा गया, किंतु प्रांतीय कार्यकारणी के पदाधिकारी इसका संज्ञान नहीं ले रहे हैं, क्या यह संगठन हित में है। पत्र में कहा गयां है कि इस संबंध में अग्रिम मार्गदर्शन करें। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कर्मचारियों के तीन समाचार: 11 फीसद महंगाई भत्ते पर आभार, नया 18 सूत्री मांग पत्र तैयार, राज्य स्तरीय सम्मेलन व पुरस्कार हेतु आवेदन आमंत्रित

-उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के तत्वाधान में कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन कर सीएम को भेजा ज्ञापन

दर्शन घर पार्क में प्रदर्शन करते उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के पदाधिकारी।

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 27 सितंबर 2021। उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के तत्वाधान में सोमवार को प्रांतीय नेतृत्व के निर्देशों पर मुख्यालय में रैली का आयोजन किया गया और एडीएम के माध्यम से 18 सूत्री मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री को भिजवाया गया। इस दौरान कर्मचारियों ने तल्लीताल दर्शन घर पार्क में जोरदार नारेबाजी भी की। ज्ञापन में मुख्यमंत्री का राज्य के कार्मिकों को 11 फीसद महंगाई भत्ता देने हेतु आभार भी जताया गया है।

इसके अलावा ज्ञापन में निगमों व निकायों के कर्मचारियों को भी महंगाई भत्ता देने की मांग करते हुए गत 23 अगस्त के मांग पत्र को संशोधित करते हुए नया मांग पत्र दिया गया। नए 18 सूत्री मांग पत्र में सभी राज्य कार्मिकों को पूर्व की भांति 10, 16 व 26 वर्ष सेवा पर पदोन्नति वेतनमान अनुमन्य करने, गोल्डन कार्ड की विसंगतियों को दूर करने, पदोन्नति की पात्रता में शिथिलीकरण करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, कनिष्ठ सहायक के पद की शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट के स्थान पर स्नातक करने व एक वर्षीय कम्प्यूटर का ज्ञान अनिवार्य करने सहित अन्य मांगें शामिल की गई हैं। प्रदर्शन में भगौत सिंह जंतवाल संयोजक, बहादुर सिंह बिष्ट, असलम अली अध्यक्ष राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उमेश सनवाल जिला महामंत्री, रणजीत सिंह थापा, रमेश कुमार, जगमोहन रौतेला, कुंवर सिंह बगड़वाल सहित कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारी नेता शामिल रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

उत्तराखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ का राज्य स्तरीय सम्मेलन व चुनाव 4 को दून विवि में

नैनीताल। उत्तराखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ का राज्य स्तरीय सम्मेलन आगामी 4 अक्टूबर 2021 को दून विश्वविद्यालय देहरादून में आयोजित किया जाएगा सम्मेलन में संगठन की नई कार्यकारिणी का निर्वाचन भी किया जाएगा। संगठन के मुख्य संयोजक, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत एवं गढ़वाल विश्वविद्यालय के कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2011 में गठित उत्तराखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ अखिल भारतीय विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के अधीन सम्बद्ध होकर संचालित किया जा रहा है।

संगठन के संयोजक सचिव कुमाऊं विश्वविद्यालय के डा. लक्ष्मण सिंह रौतेला एवं तकनीकी विश्वविद्यालय के दीपक सुंदरियाल ने बताया कि संगठन द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में राज्य में स्थित कुल 11 विश्वविद्यालयों के कर्मचारी प्रतिनिधि भाग लेंगे। सम्मेलन का आयोजन दो सत्रों में आयोजित किया जाएगा। इसके प्रथम सत्र में ‘उच्च शिक्षा में विश्वविद्यालय कार्मिक की उत्तरोत्तर भूमिका‘ विषय पर मुख्य अथिति दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुरेखा डंगवाल एवं अति विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड सरकार के ‘राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा योजना-रूसा’ के सलाहकार प्रोफेसर एमएसएम रावत के सानिध्य में बौद्धिक चर्चा एवं उच्च शिक्षा के उत्थान एवं विकास में विश्वविद्यालय कार्मिकों की भूमिका बढ़ाए जाने एवं कार्य क्षेत्र में बेहतर परिस्थितियों एवं प्रशिक्षण को विकसित करने हेतु सम्यक चर्चा की जाएगी। जबकि द्वितीय सत्र में संगठन की विश्वविद्यालय के कार्मिकों की विभिन्न समस्याओं एवं भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा कर निर्णय लिए जाएंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

पुरस्कार हेतु 10 अक्टूबर तक दें दक्ष दिव्यांग कर्मचारियों के आवेदन

नैनीताल। जनपद में गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी आगामी 3 दिसम्बर 2021 को विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर दक्ष दिव्यांग कर्मचारियों एवं उनके सेवायोजकों तथा प्लेसमेंट अधिकारियों के चयनित कर राज्य स्तरीय पुरस्कार दिया जाएगा। जनपद के समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने जानकारी देते हुए इस हेतु सभी विभागों-कार्यालयों के प्रभारियों से अपने कार्यालय के दक्ष दिव्यांग कर्मचारियों के आवेदन पूर्व विवरण सहित आगामी 10 अक्टूबर से पूर्व समाज कल्याण कार्यालय भीमताल में उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि आवेदन पत्र का जनपद स्तरीय समिति द्वारा परीक्षण कर संस्तुति करते हुये पात्र लाभार्थियों के आवेदन समाज कल्याण निदेशालय को भेजे जाएंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ ने वेतन विसंगतियों पर समिति के सामने रखा अपना पक्ष

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर 2021। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य वेतन विसंगति समिति के समक्ष विश्वविद्यालय में व्याप्त वेतन विसंगति के प्रकरणों के संबंध में तथ्यपरक एवं साक्ष्यों पर आधारित विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया, और वेतन विसंगति के निस्तारण का अनुरोध किया। महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत एवं महामंत्री लक्ष्मण सिंह रौतेला ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित वेतन विसंगति समिति को विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न वेतन विसंगतियों के प्रस्तावों को प्रेषित किया गया था।

समिति द्वारा देहरादून में की गई सुनवाई में विश्वविद्यालय के 6 पदों पर साक्ष्य एवम् तथ्यों पर आधारित प्रस्तुति देकर वेतन विषयों के निराकरण का अनुरोध किया गया। उन्होंने बताया कि इस दौरान विश्वविद्यालय के डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रयोगशाला सहायक, काउंटर सहायक, इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिक, सहायक कुलसचिव, सांख्यिकी सहायक के पदों पर विश्वविद्यालय में व्याप्त वेतन विसंगति के प्रकरणों पर पक्ष रखा गया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत एवं उच्च शिक्षा सचिव दीपेंद्र चौधरी से भी मुलाकात की, और विश्वविद्यालय के भीमताल स्थित परिसर को पूर्णकालिक परिसर बनाए जाने की माग सहित अपनी समस्याओं के निराकरण का अनुरोध किया।

उत्तराखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ की ओर से भी उच्च शिक्षा मंत्री एवं उच्च शिक्षा सचिव को 11 सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत किया। प्रतिनिधिमंडल में कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत, महामंत्री डॉ. लक्ष्मण सिंह रौतेला, कार्यकारिणी सदस्य कुलदीप सिंह, उप सचिव मनोज कुमार रौतेला सहित दून विश्वविद्यालय के प्रशांत मेहता, तकनीकी विश्वविद्यालय के दीपक सुंदरियाल, चंदर सिंह बगियाल व गोविंद बिष्ट आदि शामिल रहे।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के चुनाव व अधिवेशन रविवार को
नैनीताल। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की नैनीातल जनपद शाखा का पांचवा द्विवार्षिक अधिनियम एवं चुनाव रविवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज भवन में आयोजित होगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : 162 कार्मिकों को मिली पदोन्नति के साथ मनमानी तैनाती

Rules Violation In Promotions Of Head Masters And Middle Head Masters In  Haryana Schools - हरियाणा में हेडमास्टर और मिडिल हेडमास्टर की पदोन्नति में  अनियमितताएं, कोटा पूरा फिर भी ...डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 6 सितंबर 2021। माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत कुमाऊं मंडल के 162 कनिष्ठ सहायक सोमवार को वरिष्ठ सहायक पद पर पदोन्नत हो गए। अपर निदेशक-माध्यमिक शिक्षा कुमाऊं लीलाधर व्यास की देखरेख में सोमवार को अटल आदर्श राजकीय बालिका इंटर कॉलेज नैनीताल में आयोजित हुई काउंसिलिंग में पदोन्नत वरिष्ठ सहायकों को उनकी इच्छानुसार विद्यालय व कार्यालय आवंटित किए गए। काउंसिलिंग में गंभीर रूप से बीमार, दिव्यांग, दुर्गम में 10 वर्ष से अधिक की सेवा पूरी कर चुके कर्मी, वरिष्ठ कार्मिक, मान्यता प्राप्त संघ के पदाधिकारी और सुगम से दुर्गम के अंतर्गत श्रेणिया विभाजित की गईं।

पदोन्नति समिति में उप शिक्षा अधिकारी रामगढ़ अश्विनी रावत, प्रधानाचार्य सावित्री दुग्ताल, राजेंद्र सिंह अधिकारी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राकेश मोहन पाठक, लक्ष्मण सिंह बिष्ट तथा काउंसिलिंग की प्रक्रिया में प्रशासनिक अधिकारी सुभाष जोशी, कविता पांडे, कमल फुलारा, जगमोहन रौतेला, मोहन फर्त्याल, प्रमोद कुमार, ध्यान सिंह आदि ने योगदान दिया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : बड़ी खुशखबरी: राज्य सरकार के तीन लाख से अधिक कर्मचारी, पेंशनभोगी व पारिवारिक पेंशनरों को डेढ़ वर्ष से रुका बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता मिलेगा

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अगस्त 2021। उत्तराखंड राज्य सरकार के तीन लाख से अधिक कर्मचारी, पेंशनभोगी व पारिवारिक पेंशनरों को एक जुलाई 2021 से 28 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा। उत्तराखंड विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को विधानसभा सत्र के दौरान सदन में कोविड के कारण रोके गए महंगाई भत्ते को बहाल करते हुए 11 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा की। इस घोषणा के बाद राज्य कर्मचारियों व पेंशनरों को 17 प्रतिशत के स्थान पर 28 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा।

प्रदेश सरकार के इस निर्णय से राज्य के करीब 1.6 लाख से अधिक कर्मचारियों और 1.5 लाख पेंशनभोगियों व पारिवारिक पेंशनरों को लाभ मिलेगा। इनके अलावा निगम और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के करीब 40 हजार कर्मचारियों को भी शामिल कर लें तो यह संख्या साढ़े तीन लाख हो जाएगी। राजकीय कर्मचारियों व पेंशनरों को महंगाई भत्ते का भुगतान करने पर राज्य सरकार के खजाने पर हर महीने करीब 152 करोड़ रुपए का खर्च बढ़ने का अनुमान है।

उल्लेखनीय है कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश और हिमांचल सहित कई भाजपा शासित राज्यों ने अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ता देने का पहले ही निर्णय ले लिया था। ऐसे में राज्य कर्मचारी संगठन भी प्रदेश सरकार से महंगाई भत्ता बढ़ाए जाने की उम्मीद कर रहा था। गौरतलब है कि कोविड-19 की महामारी से प्रभावित आर्थिक स्थितियों के चलते राज्य सरकार ने प्रदेश के कर्मचारी-पेंशनरों का महंगाई भत्ता फ्रीज कर दिया था। इस कारण कर्मचारियों को एक जनवरी 2020, एक जुलाई 2020 और जनवरी 2021 में दिए जाने वाले महंगाई भत्ते का लाभ नहीं मिल सका था।

उपनल कर्मचारियों को सरकार जल्द देने जा रही है राहत
लंबे समय से विनियमितिकरण और समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे प्रदेश के करीब 22 हजार उपनलकर्मियों को सरकार जल्द ही बड़ी राहत देने जा रही है। बुधवार को सदन में उठे मुद्दे पर जवाब देते हुए विभागीय मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि मंत्रिमंडलीय समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को दे दी है। हम इस पर विधिक राय और वित्त विभाग की राय ले रहे हैं। इसके बाद जल्द ही उनके हक में बड़ा फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि किसी भी उपनल कर्मचारी को हटाया नहीं जाएगा। जो हटाए गए थे, उन्हें अन्यत्र समायोजित किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : 21 से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे पेयजल निगम कर्मी, वजह बड़ी…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अगस्त 2021। उत्तराखण्ड पेयजल निगम के राजकीयकरण की एक सूत्रीय मांग को लेकर 21 अगस्त, 2021 निगम के अधिकारी व कर्मचारी गेट मीटिंग से चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत करेंगे। इसकी जानकारी देते हुए निगम की अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के कुमाऊं सह संयोजक शीतल साह ने बताया कि समिति के प्रांतीय अध्यक्ष जितेंद्र देव सिंह एवं महामंत्री विजय प्रसाद खाली ने निगम के राजकीयकरण की एक सूत्रीय मांग को लेकर समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नियमित फील्ड कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।

उन्होंने बताया कि गढ़वाल और कुमाऊं में आंदोलन को सफल बनाने के लिए जनपद एवं नगर स्तर पर संयोजक बनाये गये है। गेट मीटिंग में निगम के डिप्लोमा इंजीनियर संगठन, उत्तराखंड पेयजल निगम कर्मचारी महासंघ, फील्ड कर्मचारी संगठन, जल निगम-जल संस्थान मजदूर यूनियन, पेंशनर्स एशोसिएशन, अधिशासी अभियंता एशोसिएशन सहित कई अन्य संगठन समन्वय समिति के बैनर तले एक मंच पर होंगे। आगे इसी मांग पर आगमी 18 सितंबर, को गढ़वाल मंडल के सदस्यों द्वारा प्रधान कार्यालय देहरादून में व 20 सितम्बर को कुमाऊं मंडल के सदस्यों द्वारा मुख्य अभियंता कार्यालय हल्द्वानी में तथा इसके बाद 25 से 27 अक्टूबर तक जनपद और नगर इकाइयों द्वारा धरना दिया जायेगा। इसके बाद भी अगर राजकीयकरण की एक सूत्रीय मांग पूर्ण नहीं होती है तो 28 अक्टूबर, 2021 से अनिश्चित कालीन हड़ताल की जाएगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : मांगों पर सहमति के बाद कुमाऊं विवि शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ ने आंदोलन पर लिया निर्णय..

-आंदोलन किया स्थगित, शीघ्र होंगी नियुक्तियां और पदोन्नतियां, अन्य मांगों पर हुई सहमति
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 अगस्त 2021। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ के 11 सूत्रीय मांग पत्र के निस्तारण हेतु बुधवार को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में सभी मांगों के निराकरण हेतु प्रशासन द्वारा सहमति जताई गई। इस पर महासंघ ने अपने पूर्व घोषित आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा कर दी है।

बैठक की जानकारी देते हुए महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत एवं महामंत्री डा लक्ष्मण रौतेला ने बताया कि कुछ दिवस पूर्व महासंघ ने उनकी लंबित मांगों के निस्तारण हेतु विश्वविद्यालय प्रशासन को 1 सप्ताह का समय देते हुए 21 अगस्त से आंदोलन किए जाने का सूचना दी गई थी। इस क्रम में आज कुलसचिव की अध्यक्षता में वित्त अधिकारी, उपकुलसचिव, सहायक अभियंता की उपस्थिति में महासंघ के पदाधिकारियों के साथ मांग पत्र के निस्तारण हेतु विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में नियुक्ति प्रक्रिया को शीघ्र प्रारंभ करने के साथ ही पदोन्नति प्रक्रिया को 30 अगस्त के उपरांत प्रारंभ किए जाने, कर्मचारियों का अनुभागवार ढांचा बनाए जाने हेतु महासंघ के प्रतिनिधि को भी शामिल करते हुए एक समिति का गठन करने, विश्वविद्यालय की स्थानांतरण नियमावली का भी निर्धारण करना तय हुआ। साथ ही विश्वविद्यालय में कार्यरत संविदा, दैनिक कर्मचारियों के संबंध में भी चर्चा की गई। बैठक में कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के अलावा कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार, प्रशासनिक भवन शाखा अध्यक्ष दीपक बिष्ट, सचिव नवल किशोर बिनवाल, उपाध्यक्ष जीवन रावत, कोषाध्यक्ष संजीत राम, डीएसबी परिसर के अध्यक्ष एनबी पालीवाल, उपाध्यक्ष मोहन बिष्ट व सचिव कुंवर बिष्ट सहित कार्यकारिणी सदस्य दिनेश चंद्र, प्रकाश पाठक आदि शामिल हुए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : 21 से आंदोलन शुरू करेंगे कुमाऊं विवि कर्मी

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अगस्त 2021। कुमाऊं विवि शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ की ओर से शुक्रवार को विवि मुख्यालय में बैठक आयोजित की गई। इस दौरान कर्मचारियों ने लंबित 11 सूत्रीय मांगों का निस्तारण नहीं किए जाने पर रोष व्यक्त किया। बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की गई। निर्णय लिया गया कि 21 अगस्त से आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। जबकि एक सितंबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार पर रहेंगे।

बैठक में महासंघ के अध्यक्ष भूपाल करायत और महामंत्री डॉ. लक्ष्मण रौतेला ने कहा कि कार्मिक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। विवि की ओर से सामूहिक तौर पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों का कर्मचारी बहिष्कार करेंगे। विवि प्रशासन को मांगों के निस्तारण के लिए एक सप्ताह का समय देते हुए 20 अगस्त तक का इंतजार किया जा रहा है। यदि संज्ञान नहीं लिया गया तो इसके बाद आंदोलन किया जाएगा।

बैठक में महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत, महामंत्री डॉ. लक्ष्मण सिंह रौतेला, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार, डीएसबी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष एनबी पालीवाल, सचिव कुंवर सिंह, उपाध्यक्ष मोहन बिष्ट, उप सचिव गोपाल कपिल, प्रशासनिक भवन शाखा के उपाध्यक्ष जीवन सिंह रावत, सचिव नवल किशोर बिनवाल, उप सचिव रंजीत कीर्ति, कोषाध्यक्ष संजीत कुमार, भीमताल परिसर संघ के सचिव मनोज कुमार रौतेला, उप सचिव दिलीप नेगी, प्रकाश पाठक आदि शामिल रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : बड़ा आदेश: पेंशन से अनिवार्य कटौती पर उच्च न्यायालय ने सरकार से पुर्नविचार करने को कहा

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अगस्त 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने राज्य के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से की जा रही अनिवार्य कटौती को गलत करार देते हुए इसे संविधान की धारा 300 के तहत उल्लंघन बताया है। इस धारा के तहत पेंशन को हर कार्मिक की संपत्ति माना गया है। इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद पीठ ने राज्य सरकार को 18 अगस्त तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं और सरकार से अपने इस निर्णय पर पुर्नविचार करने के लिए भी कहा है।

उल्लेखनीय है कि देहरादून निवासी गणपत सिंह बिष्ट और अन्य ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने 21 दिसंबर 2020 को एक शासनादेश जारी कर उनकी अनुमति के बिना स्वास्थ्य बीमा के नाम पर पेंशन से 1 जनवरी 2021 से अनिवार्य कटौती शुरू कर दी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पेंशन उनकी व्यक्तिगत संपत्ति है। सरकार उनकी पेंशन से कटौती नहीं कर सकती है। यह असंवैधानिक है। पूर्व में कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा का खर्च सरकार वहन करती थी, लेकिन अब स्वास्थ्य बीमा के नाम पर उनकी पेंशन से हर माह कटौती की जा रही है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : विकास खंड अधिकारियों के संगठन का पुर्नगठन, समस्याओं पर भी चर्चा

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 8 अगस्त 2021। जनपद के विकास खंड अधिकारियों के संगठन के रविवार को हुए अधिवेशन में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। नई कार्यकारिणी में सर्वसम्मति से आनंद सिंह जलाल को अध्यक्ष, विवेक बिष्ट को महामंत्री, सत्य प्रकाश द्विवेदी को कोषाध्यक्ष, शाहनवाज आलम को उपाध्यक्ष, पीतांबर आर्य को संगठन मंत्री, गीतांजलि पडियार व दीपक बर्गली को प्रांतीय प्रतिनिधि तथा बीना बेलवाल को महिला उपाध्यक्ष चुना गया।

इस दौरान पंचायती राज विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों की अन्य विभागों में अनावश्यक कार्य थोपने, ग्राम पंचायतों के कर्मचारियों के सापेक्ष समान वितरण, ग्रेड पे का उच्चीकरण व एसीपी लागू किए जाने की मांगें भी उठीं। कार्यक्रम में निवर्तमान अध्यक्ष विनोद भट्ट, सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी असलम अली, प्रांतीय महामंत्री ललित ग्वाल, दिनेश जोशी, पीके शर्मा, दिनेश तिवारी, प्रकाश कांडपाल, गोपाल राम वर्मा, राजेंद्र प्रसाद टम्टा, हरीश लाल, कैलाश गोस्वामी, राकेश प्रसाद सहित अन्य अनेक कर्मचारी मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : विश्वविद्यालयों में गैर शैक्षिक पदों पर सीधी भर्ती पर जताई आपत्ति

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 4 अगस्त 2021। उत्तराखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ ने राज्य के विश्वविद्यालयों में पूर्व से उपनल आदि से संविदा पर कार्य कर रहे गैर शैक्षिक पदों को समायोजित करने एवं उन्हें समायोजित किए बिना इन 65 पदों पर नई भर्ती न करने की मांग की है। महासंघ के मुख्य संयोजक भूपाल सिंह करायत, राजेंद्र भंडारी, संयोजक डॉ. एलएस रौतेला व दीपक सुंदरियाल आदि ने दून विश्वविद्यालय के कुलपति को इस संबंध में पत्र लिखा है।

इसके अलावा नवसृजित सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के संविदा व दैनिक वेतन कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र लिखकर समूह ग के पदों पर हो रही सीधी भर्ती पर आपत्ति जताई है, और उन्हें समायोजित करने की मांग की है। ऐसा न करने पर आंदोलन की राह पकड़ने व आत्मदाह करने को भी बाध्य होने की चेतावनी दी है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के पुर्नगठन की कवायद शुरू, करायत व भंडारी को जिम्मेदारी

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जुलाई 2021। राज्य के समस्त विश्वविद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं के मिलकर समाधान निकालने के लिए शुक्रवार को ऑनलाइन बैठक कर राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ का पुर्नगठन किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से संगठन के गठन हेतु कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत को मुख्य संयोजक, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी को गढ़वाल मंडल का मुख्य संयोजक, कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ के महामंत्री डॉ. लक्ष्मण सिंह रौतेला को कुमाऊं मंडल का संयोजेक सचिव और तकनीकी विश्वविद्यालय देहरादून के कर्मचारी नेता दीपक सुंदरियाल केा गढ़वाल मंडल के संयोजक सचिव हेतु नामित किया गया।

साथ ही तकनीकी विवि के चंदर सिंह बगियाल, गुरुकुल विवि के प्रकाश तिवाड़ी, संस्कृत विवि के त्रिलोकी शंकर मिश्रा, दून विवि के राजेंद्र सिंह व धीरज ठाकुर, पंतनगर विवि के के त्रिलोकी शंकर मिश्रा, दून विवि के प्रशांत मेहता, कुमाऊं विवि के कुलदीप सिंह, उत्तराखंड मुक्त विवि के भरत नैनवाल व अल्मोड़ा विवि के देवेंद्र पोखरिया को संयोजक मंडल में नामित किया गया।

बैठक में कहा गया कि राज्य के अधिकांश विश्वविद्यालयों में 150 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। इनमें दून विश्वविद्यालय में स्वीकृत 65 में से सिर्फ 1, तकनीकी विश्वविद्यालय में 57 पदों में मात्र 8 पद रिक्त हैं। वहीं मुक्त विवि में मात्र 20, संस्कृत विवि में 17 व कुमाऊं विवि में 30 से अधिक पद रिक्त हैं, जबकि अल्मोड़ा विवि में पृथक से कोई भी पद सृजित ही नहीं किए गए हैं। बैठक में संयोजक मंडल से शीघ्र ही मजबूत संगठन को शीघ्रता से गठन करने का संकल्प भी जताया गया। बैठक में फुरकान अली, चंद्रप्रकाश, राजेंद्र सिंह, राकेश भट्ट, दीपक बिष्ट, नंदाबल्लभ पालीवाल, भरत नैनवाल, लाव्यांश नेगी व विमल राज चौहान आदि शामिल हुए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : शासन के आदेश ताक पर, दो अधिकारियों सहित चार लोग छापेमारी में कार्यालयों से मिले अनुपस्थित

नवीन समाचार, भीमताल, 29 जुलाई 2021। शासन से जारी शासकीय कार्मिको की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के आदेश के तहत जनपद के मुख्य विकास अधिकारी डॉ. संदीप तिवारी ने बृहस्पतिवार को विकास भवन परिसर स्थित ग्राम विकास, पशुपालन, सहकारिता, बचत, पंचायतीराज, उद्यान, अर्थ संख्या, महिला एंव बाल विकास, लघु सिंचाई, कृषि एंव ग्रामीण निर्माण विभाग कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया।

इस दौरान पंचायत राज अधिकारी अपने कार्यालय में उपस्थिति नही पाये गये। साथ ही कार्यालय में कनिष्ठ सहायक सत्येंद्र सिंह रावत के विगत दो-तीन माह से व कनिष्ठ सहायक रश्मि बाला के विगत चार-पांच दिन से उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर नही पाये गये। इसे गम्भीरता से लेते हुए श्री तिवारी ने उन्हें अनुपस्थित मानते हुए उन दोनों का वेतन उनके पूर्व अनुमति के बिना आहारित न करने के निर्देश दिये। इसके अलावा उद्यान कार्यालय के निरीक्षण दौरान मुख्य उद्यान अधिकारी कार्यालय में उपस्थित नही मिले न ही उनके कार्यालय में अनुपस्थित होने की स्पष्ट जानकारी मिली। मुख्य विकास अधिकारी ने मुख्य उद्यान अधिकारी को कार्यालय में उपस्थित नही होने की वस्तुस्थिति स्पष्ट लिखित रूप में प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आए बड़े दिशा-निर्देश, कल से बदल जाएगी दिनचर्या

-कार्यालयों में देनी होगी शत-प्रतिशत उपस्थित
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जुलाई 2021। कोरोना विषाणु के संक्रमण मे कमी को देखते हुये अब प्रदेश के साथ ही जनपद के सरकारी कार्यालयों में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उपस्थित रहना होगा। शासन के निर्देशों पर जिलाधिकारी धीराज सिह गर्ब्याल ने जनपद में समस्त शासकीय कार्यालयों के सभी समूहों के अधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति शत-प्रतिशत सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये हैं। साथ ही कोविड-19 महामारी के बचाव हेतु सभी कार्यालयों में सावधानी बरते जाने हेतु कार्यालयाध्यक्षों एवं विभागाध्यक्षों से समुचित कार्यवाही एवं व्यवस्थायें करने को भी कहा है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन से कटौती पर अगली सुनवाई 20 को

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जुलाई 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने राज्य के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से सरकार द्वारा स्वास्थ्य बीमा के नाम पर जबरन हर माह पैसा वसूलने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई 20 जुलाई की तिथि नियत कर दी है।

मामले के अनुसार देहरादून निवासी गणपत सिंह बिष्ट व अन्य ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि राज्य सरकार ने स्वाथ्य बीमा के नाम पर उनकी अनुमति के बिना 21 दिसम्बर 2020 को एक शासनादेश जारी कर उनकी पेंशन से अनिवार्य कटौती 1 जनवरी 2021 से शुरू कर दी है। याचिकर्ताओ का कहना है कि यह उनकी व्यक्तिगत सम्पत्ति है। सरकार इस पर इस तरह की कटौती नही कर सकती। यह असंवैधानिक है। पूर्व में यह व्यवस्था थी कि कर्मचारियों का स्वाथ्य बीमा सरकार खुद वहन करती थी परंतु अब सरकार उनकी पेंशन से स्वाथ्य बीमा के नाम पर हर महीने पैंसा काट रही है। लिहाजा इस संबंध में जारी पूर्व व्यवस्था को लागू किया जाये। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कार्यालय से गायब रहने वाले कर्मियों पर सीडीओ ने दिखाई सख्ती…

कहा-निर्धारित समय पर कार्यालय में उपस्थित हों व निर्धारित समय पर ही अथवा अनुमति लेकर या भ्रमण पंजिका में भ्रमण अंकित करके ही कार्यालय छोड़ें
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जुलाई 2021। जनपद के मुख्य विकास अधिकारी डॉ. संदीप तिवारी ने बृहस्पतिवार को विकास खंड भीमताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान श्री वितारी ने कार्यालय की उपस्थिति पंजिका, भ्रमण पंजिका, अवकाश पंजिका तथा अन्य अभिलेखों का अवलोकन किया, जो अदयावधि पूर्ण पाई गई, किंतु पूर्व सूचना दिए जाने के उपरांत भी विकासखंड में लघु सिंचाई विभाग एवं ग्रामीण निर्माण विभाग के अवर अभियंता मुख्यालय से बाहर पाये गये।

इस पर डॉ. तिवारी ने खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिये गये कि वे संबंधित अवर अभियंताओं से बृहस्पतिवार को उनके द्वारा निष्पादित किये गये कार्यों का विवरण प्राप्त कर अपनी आख्या सहित प्रस्तुत करें। उन्होनेे सभी कार्मिकों को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में निर्धारित समय पर कार्यालय में उपस्थित होवे एवं निर्धारित समय पर ही तथा जरूरत पड़ने पर अनुमति लेकर ही अथवा भ्रमण पंजिका में भ्रमण अंकित करने के उपरांत ही कार्यालय को छोड़ें.।

निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने विकासखंड से संचालित विभिन्न योजनाओं यथा मनरेगा, एनआरएलएम, बायोगैस, राज्य वित्त, 15 वित्त, एससीएसपी, सांसद निधि, विधायक निधि, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अतिरिक्त समाज कल्याण विभाग से संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं एवं पंचायती राज विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान जिला विकास अधिकारी रमा गोस्वामी, एपीडी संगीता आर्य, प्रभारी खंड विकास अधिकारी रमेश भट्ट सहित अन्य कार्मिक उपस्थित रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : मांगों पर कुलसचिव से की चर्चा, प्रतिनियुक्ति पर खुशी जताई, सेवानिवृत्ति पर दी विदाई…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जून 2021। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत एवं महामंत्री लक्ष्मण सिंह रौतेला ने बुधवारको कुलसचिव दिनेश चंद्रा से मुलाकात कर कर्मचारियों की लंबित समस्याओं के निराकरण हेतु वार्ता की। वार्ता में संगठन द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की पदोन्नति, रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ करने सहित अन्य मांगों के निराकरण हेतु समीक्षा बैठक के आयोजन का अनुरोध किया। इस हेतु कुलसचिव ने एक सप्ताह के भीतर समीक्षा बैठक का आयोजन करने का निर्देश अधिकारियों को दिया, एवं अल्मोड़ा विश्वविद्यालय से कार्मिकों के बंटवारे पर शासकीय अनुमति के तुरंत बाद पदोन्नति एवम् नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ करने का विश्वास दिलाया।

इधर कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ द्वारा विश्वविद्यालय के दो कर्मचारियों- विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन में कार्यरत सांख्यिकी सहायक जगमोहन मेहरा एवं वरिष्ठ सहायक पूनम आर्या का उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव पद पर प्रतिनियुक्ति होने पर हर्ष व्यक्त किया है। साथ ही बुधवार को विश्वविद्यालय में कार्यरत वरिष्ठ सहायक किशन सिंह रौतेला की सेवानिवृत होने पर कर्मचारियों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। इस अवसर पर महासंघ के कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार, कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन शाखा के अध्यक्ष दीपक बिष्ट सचिव नवल बिनवाल, डीएसबी परिसर शाखा अध्यक्ष एनबी पालीवाल सचिव कुंवर सिंह बिष्ट, भीमताल शाखा के सचिव मनोज रौतेला आदि मौजूद रहे। उधर वाणिज्य विभाग में पूर्व परिसर निदेशक प्रो. एनएस बिष्ट एवं प्रो. एलएस बिष्ट को भी सेवानिवृत्ति पर विदाई दी गई। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कोविद संक्रमण को देखते हुए कर्मियों का बढ़ाया कार्यकाल….

नवीन समाचार, देहरादून, अप्रैल 2021। कोविड संक्रमण में कर्मियों की आवश्यक्ता को देखते हुए चिकित्सा स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में आउटसोर्सिंग से रखे गए कार्मिकों की तैनाती अवधि में विस्तार किया गया है।
सचिव पंकज कुमार पाण्डेय की ओर जारी आदेश में कहा गया है कि 31 मई तक आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखे गए कार्मिकों की अविध को विस्तार किया जाता है। वर्तमान में कोविड के प्रसार को देखते हुए और वित्त विभाग से प्राप्त सहमति के बाद यह आदेश जारी किए गए हैं। साथ ही यह कहा गया है कि दिनांक 2 मार्च 2021 के संगत शासनादेश की शेष शर्ते यथावत रहेंगी। 

यह भी पढ़ें : कोरोना की जानलेवा लहर के बावजूद उत्तराखंड सरकार ने छठे दिन ही फिर बदला समस्त सरकारी खोलने व कर्मचारियों के कार्यालय आने पर निर्णय….

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 अप्रैल 2021। सचिव उत्तराखंड सरकार डॉक्टर पंकज कुमार पांडेय के निर्देशानुसार शासकीय कार्यालयों में कार्यरत समूह क, ख, ग, व घ के कर्मचारियों हेतु 29 अप्रैल 2021 से सरकारी कार्यालय में उपस्थिति पर केवल 4 दिन के बाद भी सरकार के दिशा-निर्देश बदल दिए हैं। आज 28 अप्रैल को जारी नए निर्देशानुसार 29 अप्रैल 2021 से समस्त शासकीय कार्यालय खुले रहेंगे जिनमें क,  ख व वर्ग के कार्मिकों की उपस्थिति 100% रहेगी। जबकि समूह ग एवं घ के कार्मिकों तथा महिला व गर्भवती कर्मचारियों, दिव्यांगों को रोटेशन व जरूरत के आधार और अन्य परिस्थितियों के आधार पर कार्यालय में उपस्थिति से छूट व घर से कार्य करने की इज़ाज़त दी जाएगी।

यह भी पढ़ें : तीन दिन बंद रहेंगे उत्तराखंड के सरकारी कार्यालय

नवीन समाचार, देहरादून, 23 अप्रैल 2021। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण रोकथाम के लिए आगामी तीन दिनों तक आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी शासकीय कार्यालय बंद रहेंगे। सचिव डॉ. पंकज पाण्डेय की ओर से इस संबंध में जारी शासनादेश में कहा गया है कि 23 से 25 अप्रैल तक राज्य के सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। इन तीन दिनों में कार्यालय और आसपास के क्षेत्रों में सेनिटाइजेशन किया जाएगा। अलबत्ता, इस दौरान आवश्यक सेवाओं से संबंधित कार्यालय खुले रहेंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य के मुख्य सचिव सहित कई अधिकारी कोरोना संक्रमित हुए हैं। इसलिए राज्य के सरकारी कार्यालय में कोरोना की रोकथाम के लिए कार्यालयों को बंद रखने का निर्णय शासन की ओर से लिया गया है।

यह भी पढ़ें : उक्रांद की अगुवाई में छंटनीशुदा होटल कर्मियों ने कलक्ट्रेट में दिया धरना

नवीन समाचार, नैनीताल, 07 अप्रैल 2021। नगर के मनु महारानी होटल के छंटनीशुदा आंदोलित कर्मियों ने बुधवार को उत्तराखंड क्रांति दल की अगुवाई में जिला कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन किया और डीएम को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में कर्मचारियों की आगामी 14 अप्रैल तक पूर्व पदों पर बहाली की मांग की गई। साथ ही कहा गया कि ऐसा न होने पर 15 अप्रैल को पुनः जिला कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। बताया गया कि पिछले 20-30 वर्षों से होटल में कार्यरत कर्मी बेरोजगार हो गए हैं, और पिछले 37 दिनों से आंदोलित हैं। प्रदर्शन में उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल, विधानसभा प्रभारी केएल आर्य, भारतीय मजदूर संघ के वीरेंद्र खंकरिया, कर्मचारी नेता नरेंद्र पपोला, हरीश सिंह, खीमराज बिष्ट, महेंद्र पाल, खुशाल सिंह, रामलाल, कन्हैया, भुवन राम, खजान भट्ट, गोपाल राम आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : छटनीशुदा होटल कर्मियों की हुई दो त्रिपक्षीय वार्ताएं, दोनों त्रिपक्षीय वार्ताएं रहीं बेनतीजा

नवीन समाचार, नैनीताल, 06 अप्रैल 2021। नगर के मनु महारानी होटल के छटनीशुदा कर्मचारियों के क्रमिक अनशन को मंगलवार को 27 दिन बीत गए। इस बीच मंगलवार को कर्मचारियों व होटल प्रबंधन की श्रम विभाग के साथ एवं इससे पूर्व सोमवार को एसडीएम प्रतीक जैन की मध्यस्थता में त्रिपक्षीय बातचीत हुई, किंतु दोनों बातचीत बेनतीजा रहीं। बताया गया कि वार्ताओं में होटल कर्मचारी की ओर से नरेंद्र पपोला, महिपाल सिंह और भारतीय मजदूर संघ के संरक्षक रमेश जोशी और होटल प्रबंधन के ओर से महाप्रबंधक नरेश गुप्ता, प्रमोद बिष्ट और विशाल सक्सेना शामिल हुए। कर्मचारियों ने कम वेतन पर भी कार्य करने की पेशकश की।
आगे तय हुआ कि बुधवार 7 अप्रैल 2021 को उक्रांद के विधानसभा प्रभारी केएल आर्य के नेतृत्व में डीएम कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय सांकेतिक धरना कर डीएम को पुनः ज्ञापन दिया जाएगा। इस दौरान सैनिक स्कूल नैनीताल के प्रधानाचार्य बिशन सिंह, भाजपा महिला मोर्चा कीमंडल अध्यक्ष दीपिका बिनवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधा खोलिया, मंडल मंत्री आरती बिष्ट, मंडल अध्यक्ष आनंद बिष्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष भूपाल बिष्ट, युवा मोर्चा नगर मंत्री सुरेश बिष्ट, अरुण कुमार, आयुष भंडारी, जनहित संस्था के महासचिव अशोक साह, अनुसूचित मोर्चा, आदि आंदोलित कर्मियों को समर्थन देने पहुंचे।

यह भी पढ़ें : 25 दिन से अनशन पर बैठे होटल कर्मचारियों के लिए आज व कल के दिन अहम

-मिल रहा अनेक संगठनों का समर्थन
नवीन समाचार, नैनीताल, 05 अप्रैल 2021। नगर के मनु महारानी होटल के निष्कासित कर्मचारियों के क्रमिक अनशन को 25 दिन हो गए हैं। 25वें दिन डिकर सिंह और कालीचरण क्रमिक अनशन पर बैठे। इस दौरान रोज की तरह आयोजित सभा का संचालन करते हुए उत्तराखंड होटल कर्मचारी संघ के महामंत्री नरेंद्र पपोला ने किया। सभा को संबोधित करते हुए भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री वीरेंद्र खंकरियाल ने कहा कि क्रमिक अनशन को 25 व आंदोलन को 35 दिन बीत जाने के बाद भी शासन, प्रशासन और होटल प्रबंधन ने उनकी सुध नही ली है। आगे अगर एक-दो दिन में आंदोलन का कोई संज्ञान नही लेता है, या 5 अप्रैल को एसडीएम से और 6 अप्रैल को श्रम कार्यालय में होने वाली वार्ता विफल होती है तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।
इस दौरान तल्लीताल व्यापार मंडल के अध्यक्ष मारुति नंदन साह, नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी, भाजपा के नगर अध्यक्ष आनंद बिष्ट, आम आदमी पार्टी के नगर अध्यक्ष शाकिर अली, जनहित संस्था के महासचिव अशोक साह, पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल, भारतीय मजदूर संघ के संगठन मंत्री मदन सिंह गैड़ा के साथ ही आम आदमी पार्टी के महेश आर्या, सभासद भगवत रावत, गजाला कमाल, भाजपा नगर उपाध्यक्ष भूपेंद्र बिष्ट, भाजपा विधायक प्रतिनिधि अरविंद पडियार, भाजपा विश्वकेतु वैद्य, सुरेश चंद्र, तल्लीताल व्यापार मंडल के महामंत्री अमनदीप सिंह, कोषाध्यक्ष हरीश लाल, उक्रांद के विधान सभा अध्यक्ष केएल आर्या, समाज सेवी नजर अली, आशा कार्यकर्ता विद्या देवी, मंजू साह, माया नेगी, कोषाध्यक्ष पुष्पा रावत, आशा जाटव, ममता भट्ट, विद्यालय संगठन के गोपाल दत्त सनवाल, गोविंद प्रसाद, विकास जोशी, जगदीश प्रकाश, समीर कुमार, सुनील कुमार, हरीश विश्वकर्मा संगठन मंत्री, विजय साह व चंद्र शेखर पांडे भी कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे।

यह भी पढ़ें : तकनीकी पदों के मृत संवर्ग घोषित होने पर शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ में आक्रोश…

नवीन समाचार, नैनीताल, 04 अप्रैल 2021। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ ने विश्वविद्यालय में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ न करने के कारण सात तकनीकी पदों को मृत संवर्ग घोषित करने व पदों की कटौती होने पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। इस हेतु महासंघ की ओर से अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत व महामंत्री लक्ष्मण सिंह रौतेला ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में तकनीकी संवर्ग के 35 से अधिक पद पिछले लगभग पांच वर्षों से रिक्त चल रहे थे। इन पर कई बार विज्ञापन जारी किया गया, परंतु नियुक्ति नहीं की गई। वहीं इन पदों का भार अन्य कार्यरत कर्मचारियों पर पड़ता रहा। उन्हांेने आगे विश्वविद्यालय में मांग पत्र पर सहमति के बावजूद चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी में पदोन्नति की प्रक्रिया भी लंबे समय से बाधित चलने और संविदा व दैनिक कर्मियों को पिछले एक वर्ष से भी अधिक लंबे समय से सेवा विस्तार नहीं देने तथा कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण के लिए होने वाली त्रैमासिक बैठक के छह माह पूर्ण होने के बाद भी आयोजित नहीं किये जाने पर भी ध्यान आकृष्ट किया है। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि इन प्रमुख समस्याओं पर संगठन की रणनीति तय करने के लिए आगामी सप्ताह में संगठन की कार्यकारिणी एवं विश्वविद्यालय के समस्त घटक संघों की बैठक आयोजित की गई है, जिसमें प्रशासनिक हीलाहवाली के बीच कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण हेतु संगठन की रणनीति तय की जाएगी।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में सभी सरकारी कर्मियों पर ‘काम नहीं-तो वेतन नहीं’ लागू, दूसरी ओर हड़ताल जारी…

नवीन समाचार, देहरादून, 31 मार्च 2021। उत्तराखंड में कर्मचारी संगठनों की हड़ताल और कार्यबहिष्कार की चेतावनियों पर प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख दिखाते हुए विभागों, निगमों व सार्वजनिक उपक्रमों में तैनात अधिकारियों, कर्मचारियों व शिक्षकों पर ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का आदेश लागू कर दिया है। हड़ताल व कार्यबहिष्कार के लिए जो कर्मचारी अवकाश लेगा और अनिश्चितकालीन हड़ताल व आंदोलन कार्यक्रम में भाग लेगा, उसको स्वत: अनुपस्थित माना जाएगा, और उसे इस अवधि का वेतन जारी नहीं होगा। यह भी कहा गया है कि अगले आदेश तक हड़ताली कर्मचारियों का मार्च महीने का वेतन भी रोका जाएगा। मुख्य सचिव ओम प्रकाश के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव कार्मिक एवं सतर्कता राधा रतूड़ी ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, प्रभारी सचिवों, विभागाध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, निगमों व संस्थानों के प्रबंध निदेशकों व वरिष्ठ कोषाधिकारियों व कोषाधिकारियों को जारी आदेशों पर कड़ाई से अमल करने को कहा गया है।
आदेश में कहा गया है कि विभिन्न कर्मचारी संगठन अपनी मांगों के संबंध में प्राय: हड़ताल व कार्यबहिष्कार करते हैं। इससे जनसामान्य को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। राज्य की संचालित जनहित की योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती है। कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली हड़ताल राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत प्रतिबंधित है।
वहीं, दूसरी ओर मिनिस्टीरियल कर्मचारियों के संगठन उत्तराखंड फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन का पहला चरण बुधवार को पूरा हो गया। एसोसिएशन के प्रांतीय मीडिया प्रवक्ता और देहरादून के अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट ने बताया कि अब पांच से आठ अप्रैल तक कार्य बहिष्कार किया जाएगा। बताया कि सरकार की ओर से मिनिस्टीरियल कर्मियों से 10, 16, 26 वर्ष पर दिए गए एसीपी और एमएसीपी के लाभ की वसूली का आदेश जब तक वापस नहीं लिया जाता तब तक पूरे प्रदेश में करीब 35,000 कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन चलाएंगे। आंदोलन के दूसरे चरण में प्रदेशभर के मिनिस्टरियल कर्मचारी पांच से आठ अप्रैल तक हस्ताक्षर पंजिका में हस्ताक्षर करने के पश्चात पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार करेंगे और कार्य बहिष्कार के दौरान गेट मीटिंग एवं जन जागरण अभियान चलाएंगे। आगे 12 अप्रैल को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन कर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। 13 अप्रैल को प्रांतीय बैठक में अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया जाएगा।उन्होंने यह भी कहा कि शासन से स्पष्ट निर्णय न होने के कारण प्रदेश में 500 से अधिक कर्मचारियों के पेंशन के प्रकरण लटक गए हैं। उन्हें दो-तीन माह से पेंशन नहीं मिल पा रही है। यदि सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो 13 अप्रैल की होने वाली बैठक में पेंशनरों को भी आंदोलन में शामिल करने का निर्णय लिया जा सकता है।

यह भी पढ़ें : मनु महारानी होटल प्रबंधन व आंदोलित कर्मचारियों के बीच श्रम विभाग की मध्यस्थता में हुई बैठक बेनतीजा

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 मार्च 2021। मनु महारानी होटल से हटाए गए आंदोलित कर्मचारियों का आंदोलन जारी है। बुधवार को इस मुद्दे मनु महारानी होटल में श्रम विभाग की पहल पर दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास करते हुए बैठक आयोजित हुई, अलबत्ता बैठक बेनतीजा रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार श्रम प्रवर्तन अधिकारी मीनाक्षी कांडपाल की अगुवाई में हुई इस बैठक में हटाए गए कर्मचारियों के संगठन होटल कर्मचारी संघ के महामंत्री नरेंद्र पपोला तथा मनु महारानी की ओर से एचआर प्रबंधक विशाल सक्सेना आदि शामिल हुए। बैठक में दोनों पक्ष अपने पूर्व के वक्तव्यों पर ही अड़े रहे। होटल कर्मचारी संघ की ओर से कहा गया कि सभी लोगों को वापस रखने तक वह आंदोलन से नहीं हटेंगे। वहीं होटल प्रबंधन की ओर से कहा गया कि भविष्य में पूरे कमरे खुलने व हटाए गए कर्मियों के योग्य पद होने पर उन्हें नौकरी पर रखने में वरीयता दी जाएगी।

यह भी पढ़ें : केएमवीएन संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने नौ सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू किया कार्य बहिष्कार

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 मार्च 2021। कुमाऊं मंडल विकास निगम संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से निगम मुख्यालय में कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। इस दौरान कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो आंदोलन को जारी रखा जा सकता है। इसके बाद कर्मचारी महासंघ ने निगम के प्रबंध निदेशक को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से महासंघ अध्यक्ष दिनेश गुरुरानी ने निगम की वरीयता सूची तुरंत जारी करने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को शासनादेश के तहत बीस लाख की ग्रेच्युटी व अन्य देयकों का भुगतान, 27 फरवरी को निकाली गई निविदा को अविलंब निरस्त करने, 2001 से 2008 तक के संविदा कर्मचारियों को शीघ्र नियमित करने, संविदा कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची बनाकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने, तृतीय श्रेणी कर्मचारियों का वेतन 14 हजार रुपये प्रतिमाह करने, संविदा कर्मचारियों का बीमा करने के साथ संविदा कर्मचारियों के मृतक आश्रितों को नियुक्ति देने की मांग की। उन्होंने कहा कि निगम अपने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। अब तक नियमित हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदनाम नहीं दिया गया है। महासंघ के महामंत्री गुमान सिंह कुमटिया के नेतृत्व में कर्मचारियों ने एमडी को ज्ञापन भी दिया। धरना-प्रदर्शन करने वालों में संयोजक दिनेश सांगुड़ी, रमेश टम्टा, महेश कांडपाल, कंचन चंदोला, हिम्मत बिष्ट, सूरज बिष्ट, रमेश कपकोटी, संजय कुमार, आनंद सिंह, नवीन भंडारी, विनोद तिवारी, हरीश पुनेठा, विक्रम साह, मंजुल सनवाल व भगवती लोहनी आदि कर्मचारी शामिल रहे।

यह भी पढ़ें : इधर होटल कर्मियों के आन्दोलन पर सात दिन, उधर होटल गाइड फर्जियों से आशंकित…

नवीन समाचार, नैनीताल, 07 मार्च 2021। मनुमहारानी होटल में फिर से रखे जाने की मांग पर आंदोलन पर बैठे कर्मचारियों के आंदोलन को रविवार को सात दिन पूरे हो गए। इस दौरान उत्तराखंड क्रांति दल, वाल्मीकि समाज, भारतीय मजदूर संघ व विद्यालय कर्मचारी संघ के डा. नारायण सिंह जंतवाल, राहुल, मदन सिंह गैड़ा के साथ बहुजन समाज पार्टी आदि भी उनके आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे। डॉ. जंतवाल ने इस बारे में उच्चाधिकारियों से बात करने व गैड़ा ने आंदोलन के अगले चरण में रैली व क्रमिक अनशन करने की बात कही। होटल कर्मचारी संघ के महामंत्री नरेंद्र पपोला ने कहा कि नौकरी पर वापस रखे जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। भारतीय शहीद सैनिक स्कूल के प्रधानाचार्य ने कर्मचारियों के बच्चों की फीस व यूनिफार्म आदि में कटौती करने की बात कही।
इस मौके पर हरीश बोरा, किशन सिंह, महिंदर पाल, विमला फर्त्याल, महिपाल सिंह, खीम सिंह, धीरज कुमार, दलीप चंद्रा, सुशील अधिकारी, अजय बिष्ट, विरेंद्र कुमार, काली चरण, देव रतन, दयाल चंद्र, गोपाल राम, कमल सिंह, डिकर सिंह, गोविंद चंद, गिरीश आदि कर्मचारी मौजूद रहे। उधर मनुमहारानी होटल के प्रबंधक नरेश गुप्ता ने दोहराया कि कर्मचारियों को कोरोना काल में होटल बंद होने पर श्रम कानूनों के तहत पूरा भुगतान करके नौकरी से निकाला गया है। अभी होटल केवल एक तिहाई क्षमता में खुला है। पूरी क्षमता में खुलने पर निकाले गए कर्मियों को नौकरी में रखने में प्राथमिकता दी जाएगी।

बाहरी-फर्जी गाइडों के खिलाफ एकजुट हुए पुराने पंजीकृत गाइड
नैनीताल। नैनीताल होटल गाइड कर्मचारी संघ की रविवार को नैना देवी मंदिर स्थित धर्मशाला हुई बैठक में शहर में फर्जी व बाहरी गाइडों की बढ़ती संख्या और दखल पर चिंता जताते हुए उन्हें बाहर करने का संकल्प जताया गया। कहा कि गैरपंजीकृत गाइडों की वजह से पंजीकृत गाइडों को काम नहीं मिल पा रहा है, इस कारण उनका जीवन निर्वाह मुश्किल हो गया है। वहीं लोग पर्यटकों को पैकेज के नाम पर गुमराह कर रहे है। जिससे शहर की छवि भी खराब हो रही है। इस दौरान सर्वसम्मति से आनंद बिष्ट को संगठन का अध्यक्ष चुना गया। बिष्ट ने कहा कि जल्द ही नगर कार्यकारिणी का गठन भी किया जाएगा। तय किया गया कि जल्द संगठन के माध्यम से पुलिस और पालिका से शिकायत कर समस्या को दूर करने की मांग की जाएगी।
उन्होंने होटल स्वामियों से अनुरोध किया है कि वे केवल पंजीकृत गाइडों के माध्यम से ही कमरे दें। साथ ही नगर पालिका से पुराने गाइडों का पंजीकरण कराने की मांग भी उठाई। बैठक में नवीन चंद्र, प्रकाश आर्य, अशोक कुमार, सुरेश बिष्ट, सुरेश जोशी, चंदन बिष्ट, लीलाधर, गोविंद टम्टा, मनोज रावत, गोपाल राम, सुरेश गौड़, किशन सिंह, जीवन राम, बसंत राज, किशन सिंह बिष्ट, विक्रम प्रसाद, प्रकाश राम, भगवान सिंह, महेंद्र जोशी, ज्ञान प्रकाश, ललित कुमार व हरीश बिष्ट आदि पंजीकृत गाइड मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : श्रम कोड पर किया प्रदर्शन, और बात की कृषि कानूनों की….

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 फरवरी 2021। ऐक्टू के राष्ट्रीय आह्वान पर ‘श्रम कोड रद्द करने’ की मांग पर एक्टू के आह्वान पर 1 फरवरी से 15 फरवरी तक देशव्यापी अभियान अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत सोमवार को आहूत देशव्यापी संयुक्त प्रदर्शन के तहत आशा कार्यकत्रियों ने नगर के तल्लीताल डांठ पर गांधी मूर्ति के सम्मुख धरना दिया। इस अवसर पर ऐक्टू से जुड़ी यूनियनों के श्रमिकों को संबोधित करते हुए ऐक्टू के राष्ट्रीय पार्षद डॉ. कैलाश पांडेय ने श्रमिकों के बजाया कृषि कानून से बात शुरू करते हुए कहा कि ये विनाशकारी कृषि कानून न केवल किसानों व किसानी को तबाह कर देंगे, बल्कि आम जनता व खासकर असंगठित मजदूरों, मजदूरों की आगामी पीढ़ियों और गरीब अवाम को दाने-दाने का मोहताज बना देंगे।

वहीं ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि पहले से बंधुवा मजदूर की तरह काम कर रहीं आशा कार्यकत्रियां श्रम कानून खत्म करने के बाद मोदी सरकार के चार श्रम कोड लागू होने के बाद और भी बुरी स्थिति में धकेल दी जाएंगी। इसलिए श्रम कोडों के विरोध का मसला केवल फैक्ट्री मजदूरों तक ही सीमित नहीं है इसके सभी कामगारों पर दूरगामी बुरे प्रभाव पड़ेंगे। हाईकोर्ट नैनीताल के अधिवक्ता दुर्गा सिंह मेहता ने भी विचार रखे। इस मौके पर आशा यूनियन की जिला महामंत्री दुर्गा टम्टा, सुमन बिष्ट, कमला डालाकोटी, हेमा बिष्ट, कुसुमलता सनवाल, पंकज रानी, पुष्पा मेहरा,गंगा देवी, इंद्रा आर्या लोषज्ञानी, गीता नैनवाल, भगवती शर्मा, चन्द्रा सती, नीरू पुजारी, हंसा खड़ायत, तुलसी बिष्ट आदि शामिल रहे। बीमा कर्मचारी संघ ने भी कार्यक्रम को समर्थन दिया।
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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 07 फरवरी 2021। प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, उत्तराखंड की नैनीताल यूनियन ने रविवार को भोजनमाताओं को स्थाई करने, न्यूनतम वेतन लागू करने एवं नौकरी से निकाले जाने से संबंधित शासनादेश को रद्द करने की अपनी 3 सूत्रीय मांगों को लेकर बुद्ध पार्क हल्द्वानी में सभा की। साथ ही शहर में जुलूस भी निकाला। आंदोलन में कई सामाजिक संगठन व ट्रेड यूनियन के कार्यकत्रियां भी शामिल हुईं।
सभा का संचालन करते हुए यूनियन की महामंत्री रजनी ने कहा कि भोजनमाताएं पिछले 17-18 वर्षों से स्कूलों में खाना बनाने का कार्य कर रही है। इसके साथ वे स्कूलों की साफ-सफाई, झाड़ी काटना, किचन गार्डन बनाना, जन्म दिवस व अध्यापकों की विदाई पार्टी में पकवान बनाना, समय-समय पर अध्यापकों को चाय बनाकर देने का कार्य भी करती हैं। अध्यक्ष हंसी ने कहा कि सरकार भोजनमाताओं को निकालने के नए-नए शासनादेश पारित कर रही है। इससे वे हमेशा नौकरी से निकाले जाने के भय के कारण मानसिक तनाव में जीने को मजबूर हैं। उन्हें मात्र 2000 रुपये में अपने परिवार का गुजर बसर करना पड़ता है। इसके बावजूद यदि उन्हें निकाल दिया गया तो वह कहां जाएंगीं। कार्यक्रम में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र से बिंदु गुप्ता, पुष्पा, तुलसी, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन से टीआर पांडे, पीपी आर्या, रियासत परिवर्तनकामी छात्र संगठन से उमेश, रूपाली, नीलम, इंकलाबी मजदूर केंद्र से खिमानंद, दिनेश, इंटरार्क मजदूर संगठन से दलजीत ऑटोलाइन इंप्लाइज यूनियन से विपिन चंद्र, हंसी देवी, तुलसी देवी, प्रेमा देवी, कमला, चंपा, मुन्नी, दीपा, शीला शर्मा, सुमन, शबनम व गीता सहित बड़ी संख्या में भोजनमाताऐं शामिल रहीं।

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नवीन समाचार, देहरादून, 06 फरवरी 2021। कोरोना काल में संक्रमण की डर से राज्य के सरकारी कार्यालयों में तैनात महिला कर्मियों को गर्भावस्था में होने और 10 वर्ष से छोटे बच्चे होने पर कार्यालय आने से छूट मिली हुई थी। इसे अब समाप्त कर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संदर्भ में आदेश किए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि अब तक कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार ने इन दोनों श्रेणियों की महिला कर्मियों को यह छूट देते हुए अपरिहार्य स्थिति में ही ऑफिस आने की व्यवस्था की थी। इस तरह ऐसी महिला कर्मियों को एक तरह से ऑफिस न आने की छूट दी गई थी। लेकिन कोरोना संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में आने के बाद अब सरकार ने इस व्यवस्था को खत्म कर दिया है। अब महिला कर्मचारियों को भी करीब सात महीने बाद सोमवार 8 फरवरी से सामान्य दिनों की भांति नियमित रूप से कार्यालय आना अनिवार्य होगा।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ चुनाव: दीपक अध्यक्ष, जीवन उपाध्यक्ष व नवल सचिव निर्वाचित

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 जनवरी 2021। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के शुक्रवार को हुए चुनाव में अध्यक्ष पद पर दीपक रावत, उपाध्यक्ष पद पर जीवन सिंह रावत व सचिव पद पर नवल किशोर ने जीत दर्ज की। उल्लेखनीय है कि महिला उपाध्यक्ष पद पर आशा आर्य, उपसचिव पद पर रंजीत कीर्ति व कोषाध्यक्ष पद पर संजीत राम का निर्विरोध निर्वाचन पहले ही तय हो गया था। सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को चुनाव अधिकारी बहादुर बिष्ट ने पद की शपथ दिलाई।

शुक्रवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन स्थित संघ भवन में आयोजित हुई चुनाव प्रक्रिया में अध्यक्ष पद पर दीपक बिष्ट को 70 व कुलदीप सिंह को 52, उपाध्यक्ष पद पर जीवन रावत को 75 व चंद्रशेखर पंत को 45 तथा सचिव पद पर नवल किशोर बिनवाल को 75 व जगमोहन मेहरा को 47 मत मिले। चुनाव की प्रक्रिया में चुनाव संचालन समिति के सदस्य डा. लक्ष्मण सिंह रौतेला व लीलाधर उपाध्याय ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

यह भी पढ़ें : आशा, रंजीत व संजीत का निर्विरोध निर्वाचन तय..

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी 2021। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के आगामी 22 जनवरी को प्रस्तावित चुनाव के लिए मंगलवार को नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। इस हेतु विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में मुख्य चुनाव अधिकारी बहादुर बिष्ट, सहायक चुनाव अधिकारी लीलाधर उपाध्याय व लक्ष्मण सिंह रौतेला की देखरेख में हुई नामांकन की प्रक्रिया के तहत अध्यक्ष पद हेतु दीपक बिष्ट व कुलदीप सिंह, उपाध्यक्ष पद हेतु जीवन रावत, राजेंद्र बोरा व चंद्रशेखर पंत, के प्राप्त हुए। महिला उपाध्यक्ष पद पर आशा आर्या, सचिव पद हेतु नवल किशोर बिनवाल व जगमोहन मेहरा, तथा उपसचिव पद हेतु रंजीत कीर्ति व कोषाध्यक्ष पद हेतु संजीत राम ने नामांकन किए। नामांकन के पश्चात चुनाव समिति द्वारा नामांकन पत्रों की जांच की गई एवं सभी के नामांकन सही पाए गए। निर्वाचन प्रक्रिया के अगले चरण में दिनांक 21 जनवरी को नाम वापसी एवं 22 जनवरी को प्रशासनिक भवन में 11 बजे से मतदान तथा मतदान के तुरंत बाद मतगणना एवं चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण किया जाएगा। गौरतलब है कि एक-एक ही नामांकन होने के कारण महिला उपाध्यक्ष पद पर आशा आर्या, उपसचिव पद हेतु रंजीत कीर्ति व कोषाध्यक्ष पद हेतु संजीत राम का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है।

यह भी पढ़ें : मिनिस्ट्रियल अधिकारियों ने पदोन्नतियों के लिए प्रदेश के शिक्षा निदेशक को सोंपा ज्ञापन

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जनवरी 2021। एजूकेशन मिनिस्ट्रियल आफीसर्स एसोसियेशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को अपनी विभिन्न मांगो को लेकर प्रदेश के प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक आरके कुंवर को उनके नैनीताल आगमन पर एक ज्ञापन सौपा। ज्ञापन में मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों की लंबित मांगों का निराकरण करते हुये मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं प्रधान सहायक की पदोन्नति हेतु तत्काल कार्यवाई करते हुए पदोन्नति सूची जारी किये जाने की मांग की गई।
एसोसियेशन के प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि छः माह बीत जाने के उपरांत भी निदेशालय स्तर से इस संबंध में कोई कार्रवाई नही हो पायी है। पूर्व में निदेशालय स्तर से जिन कार्मिकों की पदोन्नति सूची जारी हुयी थी उनमें कई कार्मिकों को सही स्थान नही मिल पाने के कारण वह कार्यभार ग्रहण नही कर पाये हैं। ऐसे कार्मिकों द्वारा निदेशालय से पदोन्नति संशोधन किये जाने हेतु अनुरोध किया गया है लेकिन अभी तक उनकी संशोधित सूची भी जारी नही हो पायी है। एसोसियेशन ने पदोन्नति मंे काउंसलिंग की व्यवस्था अनिवार्य रूप से किये जाने का अनुरोध भी किया। शिक्षा निदेशक ने कार्मिकों की मांगों पर यथाशीघ्र आवश्यक कार्यवाही किये जाने का आश्वासन दिया। ज्ञापन देने वालो में जगमोहन रौतेला, दिनेश साह, नितिन कांडपाल, गोपाल बिष्ट, ललित सती, ललित उपाध्याय, संजय रौतेला, हेमंत चंदोला, बहादुर सिंह नयाल, अनूप साह, दुर्गा सिंह बिष्ट, मनोज कुमार व मनोज तिवारी आदि कर्मचारी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : नैनीताल पहुंचे रिबेल ने पुरानी पेंशन पर काबीना मंत्री को घेरा

नवीन समाचार, नैनीताल, 09 जनवरी 2021। देश भर के कर्मचारियों में पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर चल रही मांग को सोशल मीडिया पर मुखर-चर्चित रिबेल श्रद्धानंद पति शनिवार को नैनीताल पहुंचे। इस दौरान मुख्यालय में एक कार्यक्रम में मौजूद काबीना मंत्री यशपाल आर्य से उन्होंने पेंशन को लेकर अपना लंबा-चौड़ा वक्तव्य देते हुए सवाल किये। रिबेल का कहना था कि जब सांसदों को पेंशन मिल सकती है तो देश के सैनिकों, अर्ध सैनिक बलों व पुलिस कर्मियों को क्यों पुरानी पेंशन नहीं दी जा सकती है। इस पर आर्य ने सकारात्मक जवाब दिया। बाद में उन्होंने आर्य से मुलाकात का वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाला है। इसे काफी पसंद किया जा रहा है। खुद को रिबेल और ‘बागी इंडियन’ कहने वाले श्रद्धा नंद का कहना है कि वह रविवार को बाजपुर में दिल्ली रवाना हो रहे किसानों के बीच होंगे।
देखें रिबेल का वीडियो : 

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विश्वविद्यालय के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने दी आंदोलन की धमकी

नवीन समाचार, नैनीताल, 06 जनवरी 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ ने आगामी 11 जनवरी ने फिर आंदोलन की राह पर जाने का ऐलान कर दिया है। संघ के अध्यक्ष नंदाबल्लभ पालीवाल व महासचिव कुंवर सिंह बिष्ट द्वारा विश्वविद्यालय के कुलसचिव को भेजे पत्र में अपने 6 सूत्रीय मांग पत्र पर सकारात्मक कार्रवाई न होने पर 11 जनवरी को एक दिन का कार्य बहिष्कार करने और इसके बाद आगे के लिए निर्णय लेने की बात कही है। मांग पत्र में प्रयोगात्मक परीक्षाओं में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान शिक्षकों की तरह परिसर स्तर पर ही करने, स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत कर्मचारियों को भी मानदेय का लाभ देने, तकनीकी कर्मचारियों के लिए भी स्टाफिंग पैटर्न की व्यवस्था लागू करने, विश्वविद्यालय में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों पर यथाशीघ्र नियुक्ति करने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के जीपीएफ का भुगतान सेवानिवृत्ति के समय करने और विश्वविद्यालय द्वारा आवंटित आवासों के मानक किराये में एकरूपता लाने की मांग की गई है।

यह भी पढ़ें : सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दी गई विदाई…

नवीन समाचार, नैनीताल, 01 जनवरी 2020। जनपद के पुलिस अधीक्षक अमित श्रीवास्तव की अगुवाई में शुक्रवार को दिसम्बर 2020 में सेवानिवृत्त हुए उप निरीक्षक विशेष श्रेणी धन सिंह एवं
भोला दत्त पाण्डे को भावभीनी विदाई दी गई। श्री श्रीवास्तव ने दोनों कर्मचारियों को उपहार देकर कार्य मुक्त किया। साथ ही उनके कार्यकाल की प्रशंसा की। उन्हें सम्मानपूर्वक सरकारी वाहन से घर तक भिजवाया गया। इस मौके पर सीओ विजय थापा, प्रतिसार निरीक्षक महेश चंद्र कांडपाल, निरीक्षक अभिसूचना इकाई नैनीताल दीप भट्ट, एसएसपी के वाचक योगेश चंद्र उपाध्याय, मल्लीताल कोतवाली प्रभारी अशोक कुमार, चंद्रशेखर भट्ट, थानाध्यक्ष तल्लीताल विजय मेहता, जहीर अहमद, भूपेंद्र सिंह पटवाल सीजन ड्यूटी में लगे पुलिस कर्मी व रिजर्व पुलिस लाइन नैनीताल के अनेक अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

जिला चिकित्सालय में वरिष्ठ सर्जन डा. कुंवर को दी गई विदाई
नैनीताल। बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में पिछले करीब 6 वर्षों से लगातार एवं इससे पूर्व भी दो वर्ष कार्यरत रहे वरिष्ठ सर्जन डा. आरएस कुंवर 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर चिकित्सालय के पीएमएस डा. केएस धामी की अगुवाई में चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों ने उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी। बताया गया कि जिला चिकित्सालय में करीब एक माह पूर्व ही दूसरे वरिष्ठ फिजीशियन नियुक्ति पर आ चुके हैं।

यह भी पढ़ें : केएमवीएन कर्मचारी महासंघ का वार्षिक अधिवेशन 14 को मुख्यालय में

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 दिसंबर 2020। कुमाऊं मंडल विकास निगम के संयुक्त कर्मचारी महासंघ का आगामी 14 दिसंबर को जिला मुख्यालय स्थित सूखाताल पर्यटक आवास गृह के सभागार में वार्षिक अधिवेशन आयोजित होगा। महासंघ के अध्यक्ष दिनेश गुरूरानी ने बताया कि अधिवेशन के पहले सत्र में निगम व कर्मचारी हित की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी, और दूसरे सत्र में महासंघ की कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा, और अग्रिम रणनीति तय की जाएगी। कार्यक्रम का उद्घाटन नैनीताल क्षेत्र के विधायक संजीव आर्य द्वारा ‘एक पौधा धरती मां के नाम’ के तहत पौधा लगाकर किया जाएगा। अधिवेशन में कोविड-19 के तहत दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करते हुए जनपदों से सीमित कर्मचारियों को बुलाया गया है। कार्यक्रम में वर्ष 2001 से 2008 तक के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, संविदा कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी, चतुर्थ से तृतीय श्रेणी में विभागीय पदोन्नतियों सहित कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं के लिए मांग पत्र भी बनाया जाएगा। साथ ही कार्यक्रम में निगम कर्मचारी महासंघ के सेवानिवृत्त हुए कर्मचारी नेताओं को भी सम्मानित किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विश्वविद्यालय की दो पहलों पर महासंघ ने जताया आभार

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 नवम्बर 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ एवं इसके सभी घटक संघों के पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को राज्य कर्मचारियांे की भांति राज्य स्वास्थ्य योजना का लाभ दिये जाने हेतु विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा किये गए अनुमोदन का स्वागत तथा विश्वविद्यालय के प्रयोगशाला तकनीकी कर्मियों की पदोन्नति की संभावनाओं के दृष्टिगत संगठन की मांग के अनुसार विश्वविद्यालय में केंद्रीय उपकरण प्रयोगशाला स्थापित करने की शोध सलाहकार समिति की संस्तुति एवं अनुमोदन पर हर्ष व्यक्त किया है।
महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत व महामंत्री लक्ष्मण रौतेला ने संयुक्त बयान में उम्मीद जताई कि इसके बाद विश्वविद्यालय कर्मियों के भी राज्य कर्मियों की तरह गोल्डन कार्ड बन सकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि शोध सलाहकार समिति की संस्तुति के बाद विश्वविद्यालय के प्रयोगशाला तकनीकी कार्मियों को लाभ मिलेगा। इस हेतु उन्होंने कुलपति प्रो. एनके जोशी, कुलसचिव खेमराज भट्ट, वित्त अधिकारी एलआर आर्या, कुलसचिव दुर्गेश डिमरी व शोध निदेशक प्रो. ललित तिवारी सहित विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।

यह भी पढ़ें : राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल हुए कर्मचारी, आशाओं ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

नवीन समाचार, नैनीताल, 26 नवम्बर 2020। कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में मुख्यालय में डाक, बीमा, रेलवे, बैंक एवं अन्य केंद्रीय व राज्य सरकार के कर्मचारी संगठनों ने शामिल होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन मंे शामिल हुए बीमा क्षेत्र की सरकारी संस्था भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारियांे ने अखिल भारतीय संगठन-राआईआईईए के आह्वान पर प्रतिभाग करते हुए भागेदारी की। इस दौरान बीमा कर्मचारी संघ हल्द्वानी की नैनीताल शाखा ने अपनी शाखा में विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की। प्रदर्शन में शाखा के हरीश नयाल, विनय त्रिपाठी, हेम कांडपाल, हरीश तिवारी, विनोद पंत, मीना आर्या व सतीष चंद्रा आदि कर्मचारी शांमिल हुए।

आशाओं ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
नैनीताल। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और फेडरेशनों के संयुक्त आह्वान पर आहूत अखिल भारतीय हड़ताल में एक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन भी शामिल हुई। इस दौरान आशाओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर उन्हें सरकारी सेवक का दर्जा और न्यूनतम 21 हजार वेतन लागू करने, मासिक वेतन और कर्मचारी का दर्जा मिलने तक अलग-अलग कामों के लिए छुटपुट पैसों के बजाय मासिक नियत वेतन देने, सेवानिवृत्त होने पर पेंशन का प्रावधान करने, देय मासिक राशि और सभी मदों के बकाया कासमय से भुगतान करने, भुगतानों में निचले स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी पर लगाम लगाने, कोविड-19 के कार्य में लगी आशाओं को 10 हजार रुपए कोरोना-लॉकडाउन भत्ता, 50 लाख का जीवन बीमा और 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा तथा मृत आशाओं के आश्रितों को 50 लाख का बीमा और 4 लाख का अनुग्रह अनुदान देने, सेवा के दौरान दुर्घटना या हृदयाघात व अन्य या बीमारी होने की स्थिति में आशाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए नियम बनाने व न्यूनतम दस लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान करने, हड़ताल के समय का मानदेय काटने का निर्णय वापस लेने व हड़ताली आशाओं को तत्काल उनके देय का भुगतान करने आदि की मांग की गई।

यह भी पढ़ें : कोरोना इफेक्ट-बुरी आर्थिक हालत: दीपावली पर भी वेतन न मिलने से गुस्साए शिक्षक और नगर पालिका कर्मचारी

-दी धरने व कार्य बहिष्कार की धमकी
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 नवम्बर 2020। उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ की नैनीताल शाखा की मंगलवार को वर्चुअल तरीके से जिलाध्यक्ष पीसी जोशी व जिला मंत्री शैलेंद्र चौधरी के नेतृत्व में आयोजित हुई बैठक में बीते तीन माह से और इधर दीपावली पर भी वेतन न मिलने पर चर्चा की गई, और चिंता जताई गई। इस मौके पर कहा गया कि दीपावली के त्योहार पर भी वेतन का भुगतान न होने के कारण वे वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। यदि शीघ्र ही सरकार ने वेतन संबंधी प्रकरण का निस्तारण नहीं किया तो मुख्य शिक्षा अधिकारी नैनीताल के कार्यालय में शिक्षकों के द्वारा धरना दिया जाएगा। साथ ही सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी को एक ज्ञापन भेजा जाएगा। बैठक में संगठन की कोषाध्यक्ष हरजीत कौर, मनीष साह व गौरव भाकुनी आदि उपस्थित रहे।
इधर, अक्टूबर माह का वेतन न मिलने और दीपावली नजदीक होने के बावजूद बोनस जारी नहीं होने पर नगर पालिका नैनीताल के कर्मचारी भी मुखर हो गए है। कर्मचारियों ने मंगलवार को नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अशोक कुमार वर्मा का घेराव कर वेतन और बोनस भुगतान की मांग की। साथ ही ऐलान किया कि यदि जल्दी वेतन जारी नहीं किया गया तो कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे।
मंगलवार को निकाय कर्मचारी महासंघ और देव भूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के पदाधिकारी व अन्य कर्मचारी अशोक वर्मा से वार्ता करने पहुंचे। जहां ईओ ने वेतन के लिए बजट ना होने की बात कही तो कर्मचारी आक्रोशित हो गए। इस बीच कर्मचारियों और ईओ के बीच काफी तनातनी भी हो गयी। ईओ ने कहा कि बजट नहीं होने के कारण फिलहाल पालिका वेतन देने में असमर्थ है, लेकिन कर्मचारियों को दीपावली का बोनस दिया जाएगा जिसके बावजूद कर्मचारी नहीं माने। उन्होंने दो टूक कहा, वेतन न मिला तो कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ खुश, जताया कुलपति का आभार, जानें क्यों ?

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 नवंबर 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ ने अपने 11 सूत्रीय मांग पत्र पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की गई सकारात्मक कार्रवाई पर आभार व्यक्त किया है। महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत एवं महामंत्री लक्ष्मण सिंह रौतेला ने बताया कि महासंघ की मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संविदा, दैनिक व नियत वेतन कर्मियों के मानदेय में दस प्रतिशत वृद्धि करने व विश्वविद्यालय कार्मिकों की एसीपी का निर्धारण करने के आदेश जारी कर दिये हैं। साथ ही पदोन्नति हेतु डीपीसी की बैठक शीघ्र आयोजित होनी तय हो गई है। इसके अलावा महासंघ की मांग पर विगत अवकाश दिवसों में कार्यालय खोलने के सापेक्ष आगामी 13 नवंबर को अवकाश घोषित किया गया है।
उन्होंने बताया कि महांसघ द्वारा विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की समस्याओं के निदान हेतु विश्वविद्यालय प्रशासन को अगस्त माह में 11 सूत्रीय मांग पत्र दिया था। इस पर कुलपति प्रो. एनके जोशी ने प्रो. पीसी कविदयाल के साथ ही कुलसचिव, वित्त अधिकारी, उपकुलसचिव, निदेशक विकास एवं नियोजन एवं सहायक अभियंता की सदस्यता में एक समिति का गठन किया था। इस समिति ने विगत 30 सितम्बर को महासंघ एवं घटक संघों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर समस्त मांगों के निस्तारण हेतु सकारात्मक पहल की। उन्होंने बताया कि सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के गठन के साथ राज्य सरकार द्वारा कार्मिकों का बंटवारा न होने से कुमाऊं विश्वविद्यालय में कार्मिकों की पदोन्नति एवं नई नियुक्तियों के निस्तारण में समस्या आ रही थी। इस हेतु महासंघ के प्रतिनिधि कुछ दिन पूर्व अल्मोड़ा भी गये। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार के स्तर से शीघ्र ही इसका निस्तारण कर लिया जायेगा। उन्हांेने कार्य सम्पादन में महासंघ के कोषाध्यक्ष राजेंद्र आर्या सहित महासंघ व घटक संघों के समस्त पदाधिकरियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों का भी आभार व्यक्त किया।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों की वेतन कटौती पर राज्य कैबिनेट ने लिया बड़ा फैसला..

नवीन समाचार, देहरादून, 14 अक्टूबर 2020। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बुधवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों के एक दिन की वेतन कटौती वापस लेने का फैसला ले लिया गया है। अब कोरोना कोष के लिए कर्मचारियों के वेतन से एक दिन के वेतन कटौती नहीं होगी।
बुधवार को सीएम त्रिवेंद्र रावत की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय फैसला लिया गया है कि त्योहारों को देखते हुए कर्मचारियों के वेतन से एक दिन की कटौती नहीं की जाएगी। अलबत्ता, कैबिनेट ने फैसला लिया है कि कोरोना कोष के लिए अब मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, आईएएस, आईपीएस, व आईएफएस अफसरों के वेतन से एक दिन की वेतन कटौती जारी रहेगी। गौरतलब है कि इससे पहले सरकार की ओर से कर्मचारियों का एक दिन का वेतन कोरोना कोष के लिए काटा जा रहा था। प्रदेश में राज्य कर्मचारी लंबे समय से कोरोना कोष के लिए एक दिन की तनख्वाह ना काटे जाने की मांग कर रहे थे। आक्रोशित कर्मचारियों की ओर से वेतन कटौती के खिलाफ कई बार नाराजगी भी दर्ज कराई गई थी।

यह भी पढ़ें : एलआईयू के दरोगाओं की आज हुई पदोन्नतियों का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

-याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी पदोन्नतियां
नवीन समाचार, नैनीताल, 29 सितंबर 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने एलआईयू में उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत 32 लोगो का नियम विरुद्ध तरीके से निरीक्षक के पद पर पदोन्नति देने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से दो सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। साथ ही यह भी साफ किया है कि यह पदोन्नतियां याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
मामले के अनुसार एलआईयू में कार्यरत राज जुयाल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि पुलिस महानिदेशक द्वारा 2017 से 2020 के बीच सीधी भर्ती से आये उप निरीक्षकों की पदोन्नतियां करने के सम्बंध में आज 29 सितंबर को डीपीसी बैठाकर आज ही 32 उप निरीक्षकों की निरीक्षक के पद पर पदोन्नति कर दी है, जो विभागीय पदोन्नति नियमावली 2003 व 2018 के विरुद्ध है। यह पदोन्नतियां 50 फीसद सीधी भर्ती से और 50 फीसद पदोन्नति के आधार पर होनी चाहिए थी। इस प्रकार यह पदोन्नतियां विभाग ने नियमों को ताक में रखकर सीधी भर्ती से आये 32 लोगों को एक ही दिन में डीपीसी बैठाकर अंतिम निर्णय ले लिया है। लिहाजा इस पर रोक लगाई जाये।

यह भी पढ़ें : अनसूचित जाति आयोग पहुंचा अम्तुल्स स्कूल द्वारा 35 कर्मचारियों को निकालने का मामला

-शिल्पकार सभा की शिकायत पर आयोग ने जनपद के मुख्य शिक्षा अधिकारी को तीन सितंबर को किया तलब
नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अगस्त 2020। शिल्पकार सभा नैनीताल की शिकायत पर नगर के अम्तुल्स पब्लिक स्कूल द्वारा पिछले दिनों 35 कर्मचारियों को निकाले जाने का मामला राज्य के अनुसूचित जाति आयोग पहुंच गया है। आयोग ने इस मामले में अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम 2003 की धारा 11 के तहत जांच एवं अन्वेषण करने का निर्णय लेने के साथ ही नैनीताल जनपद के मुख्य शिक्षा अधिकारी को आगामी तीन सितंबर को विस्तृत आख्या के साथ तलब कर लिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि वे नियत तिथि तक अपनी आख्या प्रस्तुत नहीं करते हैं तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष तलब किया जा सकता है। इस पर शिल्पकार सभा के अध्यक्ष संजय कुमार ‘संजू’ व महासचिव रमेश चंद्रा ने उम्मीद जताई है कि इसके बाद निकाले गए कर्मचारियों को न्याय मिलेगा और स्कूलों के प्रबंधकों द्वारा की जा रही मनमानी पर रोक लगेगी।

यह भी पढ़ें : कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष ने ‘आहत’ होकर दिया इस्तीफा..

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 अगस्त 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेतर कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष गणेश बिष्ट ने पद से इस्तीफा दे दिया है। त्यागपत्र देते हुए उन्होंने महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत को पत्र भेजकर महासंघ पर कर्मचारियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए आहत होने के कारण इस्तीफा देने की बात कही है। हालांकि वह डीएसबी परिसर कर्मचारी संघ में बतौर पदाधिकारी बने रहेंगे। उनका कहना है कि महासंघ के द्वारा गठन के बाद से ही कर्मचारियों की भावनाओं के खिलाफ कार्य किए जा रहे हैं। महासंघ के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कार्मिकों की बात नहीं सुनी जा रही है। इससे इससे कर्मचारियों की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है और महासंघ के अस्तित्व को भी खतरा बन गया हैं।

यह भी पढ़ें : नेता प्रतिपक्ष तक पहुंचा अम्तुल्स द्वारा 35 कर्मचारियों को निकालने का मामला

-कांग्रेस नेता हेम आर्य के नेतृत्व में मिले निकाले गये कर्मचारी
नवीन समाचार, नैनीताल, 06 अगस्त 2020। नगर के अम्तुल्स पब्लिक स्मूल के निकाले गए कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता हेम आर्या के नेतृत्व में हल्द्वानी में नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश से मुलाकात की। उन्होंने पिछले चार माह से वेतन नहीं मिलने और बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें नौकरी से हटाने की नेता प्रतिपक्ष को जानकारी दी। इस मामले में डा. हृदयेश ने तुरंत जिलाधिकारी को फोन कर ठोस कार्रवाई करने को कहा। इस मौके पर हेम आर्य ने कहा कि जिन लोगो ने 35 साल तक अपनी सेवा दी हैं उनको सेवा से एकाएक निकालना विद्यालय प्रबंधन का एक अमानवीय फैसला है, और मानव उत्पीड़न है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन द्वारा मामला नहीं सुलझाया तो इस मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जायेगी।

यह भी पढ़ें : 35 कर्मचारियों को निकालने के बाद स्कूल प्रबंधन की ओर से ‘बीच का रास्ता निकालने’ के संकेत…

-स्कूल प्रबंधन द्वारा छात्रावास को बंद करने के साथ 35 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बाद संयुक्त मोर्चा जुटा
नवीन समाचार, नैनीताल, 05 अगस्त 2020। बीती 13 जुलाई को अपने छात्रावास को बंद करने के साथ अपने 35 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने वाले नगर के प्रतिष्ठित अम्तुल्स पब्लिक स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नगर के सभी राजनीतिक दलों एवं कर्मचारी संयुक्त मोर्चा एकजुट हुए हैं। इसके फलस्वरूप विद्यालय का प्रबंधन भी कुछ झुकता नजर आया है और उनकी ओर से ‘बीच का रास्ता’ निकालने के संकेत दिखे हैं। इधर विद्यालय के निकाले गए कर्मचारियों की ओर से अब प्रशासन के समक्ष गुहार लगाने पर विचार चल रहा है।
उल्लेखनीय है कि गत दिवस नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी ने विद्यालय की निदेशक सुबूही राशिद से निकाले गए कर्मचारियों के मुद्दे पर वार्ता की थी। तब सुश्री राशिद ने आज बुधवार पांच अगस्त को वार्ता करने की बात कही थी। बुधवार को श्री नेगी के साथ ही सयंुक्त मोर्चा में शामिल पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल व सरिता आर्य, भाजपा के नगर अध्यक्ष आनंद बिष्ट व वरिष्ठ नेता अरविंद पडियार, सभासद कैलाश रौतेला, पुष्कर बोरा के साथ ही संयुक्त मोर्चा के संयोजक बहादुर बिष्ट तथा भूपाल सिंह करायत, प्रवीण शर्मा सहित अनेक लोग अम्तुल्स स्कूल पहुंचे और वहां निकाले गए कर्मचारियों को समर्थन व्यक्त किया। इस दौरान पालिकाध्यक्ष नेगी ने सुश्री राशिद से दूरभाष पर वार्ता की। बताया गया है कि वार्ता में सुश्री राशिद की ओर से बीच का रास्ता निकालने की बात कही गई। इधर संयुक्त मोर्चा ने अब तक प्रशासन द्वारा उनके मुद्दे का संज्ञान न लेने पर भी नाराजगी जताई और उनसे शीघ्र वार्ता करने का इरादा जताया।

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-35 कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने का मामला
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जुलाई 2020। नगर के अम्तुल्स पब्लिक स्कूल प्रबंधन गत 18 जुनाई को अपने छात्रावास को बंद करने के साथ ही 35 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बाद 12 दिन बाद पहली बार वार्ता के लिए सामने आया है। ऐसा तब हुआ, जब बृहस्पतिवार को नैनीताल नगर पालिका के अध्यक्ष सचिन नेगी एक दिन पहले तीन दिन के भीतर कर्मचारियों की बहाली न होने पर विद्यालय परिसर में धरना देने की अपनी धमकी के बाद विद्यालय पहुंचे। बताया गया कि यहां उन्होंने प्रधानाचार्या अनीता खान से वार्ता की। प्रधानाचार्या ने उनकी विद्यालय की निदेशक सुबूही राशिद से वार्ता कराई। बताया गया है कि सुश्री राशिद ने ईद के बाद आगामी बुधवार यानी चार अगस्त को इस मामले में वार्ता करने का आश्वासन दिया है। इस दौरान पालिकाध्यक्ष नेगी के साथ क्षेत्रीय सभासद निर्मला चंद्रा तथा सभासद पुष्कर बोरा, भगवत रावत व रेखा आर्य भी साथ मौजूद रहे। इससे पूर्व पूर्व विधायक सरिता आर्य ने विद्यालय में पहुंचकर विद्यालय के 40 परिवारों को राशन भेंट किया।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जुलाई 2020। नगर के अम्तुल्स पब्लिक स्कूल प्रबंधन ने गत 18 जुलाई को अपने छात्रावास की बंदी की घोषणा के साथ 35 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। तभी से उन्हें विभिन्न वर्गों व पार्टियों से समर्थन मिल रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को इस मामले में नैनीताल नगर पालिका के अध्यक्ष सचिन नेगी ने विद्यालय प्रबंधन को कर्मचारियों की बहाली के लिए तीन दिन का समय देते हुए अन्यथा की स्थिति में विद्यालय कर्मचारी संघ के साथ विद्यालय परिसर में धरना देने की घोषणा कर दी है। पालिकाध्यक्ष नेगी ने पत्र की प्रतियां प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव शिक्षा, कुमाऊं मंडलायुक्त एवं नैनीताल के डीएम को भी भेजी है।

आज आदमी पार्टी भी पहुंची समर्थन देने
नैनीताल। कांग्रेस व भाजपा के बाद आम आदमी पार्टी की नैनीताल नगर इकाई ने बुधवार को नगर के अम्तुल्स पब्लिक स्कूल कर्मचारी यूनियन द्वारा चलाए जा रहे धरना प्रदर्शन स्थल में जाकर अपना पूर्ण समर्थन एवं सहयोग व्यक्त किया। इस दौरान नैनीताल विधानसभा प्रभारी प्रदीप कुमार दुम्का व नगर अध्यक्ष शाकिर अली के नेतृत्व में गए पार्टी के शिष्टमंडल ने कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों से वार्ता की तथा कहा कि जबसे नैनीताल नगर के पब्लिक स्कूलों एवं बड़े होटलों द्वारा वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों का कोरोना विषाणु के काल में उत्पीड़न किया जा रहा है, तभी से आम आदमी पार्टी इस अन्यायपूर्ण कार्यवाही का पुरजोर विरोध कर रही है। उन्होंने प्रधानाचार्या से मुलाकात कर कहा कि यदि कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद नहीं किया तो आम आदमी पार्टी इसके विरोध में आंदोलन को बाध्य होगी। शिष्टमंडल में महेश आर्य, आरसी पंत, नईम अहमद निम्मो, नवीन उप्रेती व राजकुमार आदि कार्यकर्ता भी शामिल रहे।

इनके अलावा कांग्रेस पार्टी की पूर्व विधायक एवं महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सरिता आर्य, कृष्ण पांडे, महेश शर्मा व राजभवन वार्ड की सभासद निर्मला चंद्रा ने भी कर्मचारियों के बीच उपस्थित होने के साथ ही प्रधानाचार्या को भी उनके मुद्दे पर ज्ञापन दिया।

यह भी पढ़ें : अम्तुल्स के निकाले गये 35 कर्मियों को मिला सत्तारूढ़ भाजपा का समर्थन

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जुलाई 2020। बीती 18 जुलाई को नगर के अम्तुल्स पब्लिक स्कूल द्वारा अपने छात्रावास की बंदी के साथ 35 कर्मचारियों को निकालने की घोषणा की थी। तभी से निकाले गए कर्मचारी पूरे देयों की मांग करते हुए हर रोज सुबह विद्यालय के गेट पर एकत्र हो रहे हैं और उन्हें विभिन्न वर्गों का समर्थन भी मिल रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को उन्हें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला। भाजपा के नैनीताल मंडल के अध्यक्ष आनंद बिष्ट के नेतृत्व में आज पार्टी कार्यकर्ता निकाले गये 35 कर्मचारियों की दुबारा बहाली की मांग को लेकर विद्यालय की प्रधानाचार्या से मिले। उन्होंने कर्मचारियों को विगत 3-4 माह से नहीं दिये गये वेतन का भी जल्द से जल्द भुगतान करने के लिए वार्ता की। साथ ही उन्होंने कर्मचारियों को आश्वाशन दिया कि सक्षम अधिकारियों व सरकार से वार्ता कर के उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा। उनकी रोजी रोटी को छीनने नहीं दिया जाएगा। इस संकट में समस्त भाजपा परिवार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ देगी। समर्थन देने वालो में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कार्यकारिणी सदस्य अरविंद पडियार, मंडल वरिष्ठ उपाध्यक्ष भूपेंद्र बिष्ट, भाजयुमो महामंत्री मोहित लाल साह, अयारपाटा बूथ अध्यक्ष विकास जोशी आदि शामिल रहे।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ ने दी कल से पूर्ण कार्य बहिस्कार की धमकी

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जुलाई 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी महासंघ ने सोमवार को कुलपति को एक ज्ञापन सोंपा। अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत व महामंत्री लक्ष्मण सिंह रौतेला ज्ञापन में कहा गया कि विश्वविद्यालय के 16वें दीक्षांत समारोह के भुगतान बिलों में व्याप्त अनियमितताओं एवं इसके भुगतान हेतु छात्र नेताओं के द्वारा कर्मचारी को विश्वविद्यालय परिसर में धमकी दी गई व अनर्गल आरोप लगाये गये। लिहाजा महासंघ ने इस मामले में छात्र नेताओं के खिलाफ विश्वविद्यालय की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराकर इसकी प्रति उपलब्ध कराने, दीक्षांत समारोह के बिलों व व्ययों की वित्त सचिव के माध्यम से स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषी पाये जाने वाले अधिकारियों व बिलों के अग्रसारण अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा विश्वविद्यालय द्वारा गठित अनुशासन समिति द्वारा इस घटना पर कोई कार्रवाई न करने के कारण समिति को भंग करने की मांग की गई। साथ ही मंगलवार 14 जुलाई से पूर्ण कार्य बहिस्कार करने की चेतावनी भी दी है।

यह भी पढ़ें : कर्मचारियों के उत्पीड़न के खिलाफ नैनीताल में बना एक और मोर्चा, 25 संगठन साथ आए

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जुलाई 2020। जिला-मंडल मुख्यालय में कर्मचारियों के खिलाफ हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ 25 कर्मचारी संगठन एक साथ आ गए हैं। इसके साथ ही कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के नाम से एक नया संगठन अस्तित्व मंे आ गया है। सेवानिवृत्त कर्मचारी नेगा बहादुर बिष्ट को मोर्चे का मुख्य संयोजक बनाया गया है। संयुक्त मोर्चा ने कुमाऊं विश्व विद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के साथ गत दिवस छात्र-नेताओं द्वारा की गई अभद्रता की निंदा करते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है तथा कुलपति से वार्ता करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा नगर के अम्तुल्स पब्लिक स्कूल के कर्मचारियों को अप्रैल माह से वेतन नहीं देने पर रोष व्यक्त करते हुए विद्यालय प्रबंधन से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को समय से न्यूनतम वेतन देने को कहा गया। साथ ही आगे मोर्चे का शीघ्र विस्तार करने की बात कही गयी।
नगर के संघ भवन में नये मोर्चे के गठन के मौके पर मिनिस्टीरियल फेडरेशन, वन विभाग, शिक्षा विभाग, कोषागार, सिचाई, लोनिवि, कुमाऊं विश्व विद्यालय, ग्राम पंचायत, अमीन संघ सहित कई संगठनों के जगमोहन रौतेला, भगवत जंतवाल, त्रिलोक मेहरा, कुंवर जलाल, पूरन बिष्ट, गौरव पांडे, गिरीश जोशी, उमेश सनवाल, असलम अली, ललित मोहन पांडे, संजय कुमार, लाल सिंह नेगी, राजेंद्र बिष्ट, राजेंद्र कुमार, जीवन सिंह रावत, जगदीश कांडपाल, सुरेश पांडे, मोहन पंत, दीपक बिष्ट, इंद्र सिंह रावत, नीरज साह, पूरन रावत, रमेश लाल, मदन गैड़ा व नंदा बल्लभ पालीवाल आदि कर्मचारी नेता मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : कर्मचारियों को रास नहीं आ रही सख्ती, लिखा पत्र…

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जुलाई 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को सख्ती रास नहीं आ रही है। विश्वविद्यालय शिक्षणेतर कर्मचारी महासंघ ने विश्वविद्यालय मुख्यालय के एक अधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण मांगने पर इस अधिकारी पर कार्मिकों का उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। साथ ही प्रशासनिक भवन में कार्मिकों की उपस्थिति के लिए ‘फेस डिटेक्शन मशीन’ लगाने पर भी कार्मिकों को आपत्ति है। उन्होंने इस बाबत जारी कार्यालयी आदेश को निरस्त करने तथा कार्यालय समय साढ़े नौ से साढ़े पांच बजे तक करने के आदेश पर भी आपत्ति जताते हुए इसे संशोधित कर 10 से 5 बजे तक करने की मांग की है। महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत और महामंत्री लक्ष्मण रौतेला ने इस बारे में कुलसचिव केआर भट्ट को पत्र लिखकर 15 दिन के भीतर इन समस्याओं का समाधान नहीं करने पर आंदोलन पर जाने की चेतावनी दी है। कुलसचिव केआर भट्ट ने कहा कि कुलपति के समक्ष कर्मचारियों के प्रत्यावेदन को रखा जाएगा।

यह भी पढ़ें : सरकार के राज्य में रोजगार दिलाने के फरमान के बीच राज्य में कार्यरत 195 कर्मियों को बेरोजगार करने की तैयारी

नवीन समाचार, पंतनगर, 2 जुलाई 2020। प्रदेश सरकार के लोगों को राज्य में रोजगार देने के दावों के बीच राज्य की एक फैक्टरी ने श्रम न्यायालय के आदेशों को दरकिनार करते हुएराज्य के 195 रोजगारशुदा लोगों को बेरोजगार करने की तैयारी कर ली है। इन लोगों को 10 दिन के भीतर देश में कोरोना के सर्वाधिक मामलों की दृष्टि से महाराष्ट्र के बाद दूसरे स्थान पर चल रहे तमिलनाडु राज्य की अपनी चेन्नई यूनिट में जाने का फरमान थमाते हुए अप्रत्यक्ष तौर पर ऐसा न करने पर नौकरी से बाहर करने की चेतावनी दे दी गई है।
मामला पंतनगर सिडकुल के सेक्टर दो प्लॉट-14 स्थित इंटरआर्क बिल्डिंग प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का है। कंपनी द्वारा अपने नोटिस बोर्ड पर चस्पा किये गये आदेश में कहा है कि उन्हें 27 जून को कंपनी की दूसरी यूनिट में जाने के लिए नाम मांगे थे, किंतु किसी भी कर्मचारी ने इस हेतु अपना नाम नहीं दिया। इसके बावजूद कंपनी ने 195 कर्मचारियों को ‘एक से 10 जुलाई के बीच’ चेन्नई यूनिट में ड्यूटी ज्वॉइन करना ‘आवश्यक’ बताने का आदेश जारी कर दिया हैं। कर्मचारी अनिच्छा के कारण इन नोटिस को स्वीकार नहीं कर रहे, कुछ ने तो आदेश पत्र लेते हुए पत्र में अपनी अनिच्छा भी साफ जाहिर कर दी है। ऐसे में उनके स्थायी पतों पर भी यह पत्र भेजे गए हैं। इस पर कंपनी की पंजीकृत यूनियन के अध्यक्ष दलजीत सिंह का कहना है कि कंपनी का यह कदम पंजीकृत यूनियन के खिलाफ है। पहले भी यूनियन के महामंत्री व कार्यकारिणी सदस्यों को हटाया जा चुका है। अब भी यूनियन से जुड़े पदाधिकारियों को भी चेन्नई भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों के अनुसार बिना कर्मचारियों की स्वीकृति के ऐसा कदम नहीं उठाया जा सकता है। इस बारे में श्रम न्यायालय काशीपुर में वाद भी लंबित हैं। इस बारे में कंपनी का पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया।

यह भी पढ़ें : कोरोना में सहयोग कर रहे कर्मचारी संगठनों ने दी अन्न-जल त्यागने व पेड़ लगाकर विरोध करने की धमकी

-लैब तकनीशियनों ने शुरू किया विरोध प्रदर्शन, दी अन्न-जल त्यागने की धमकी
नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जुलाई 2020। बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में लैब तकनीशियनांे ने प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर आज से 5 जुलाई तक अपनी मांगों को लेकर हाथों पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। जिला सचिव प्रदीप राणा के अनुसार अभी तक उनका कैडर पुर्नगठन व सेवा नियमावली ना बनने के कारण उन्हें जोखिम भत्ता तथा 10 वर्ष की सेवा पूरी होने पर भी एमएसीपी का लाभ नहीं दिया जा रहा है। जबकि केंद्र सरकार द्वारा पूर्व से ही लैब तकनीशियन को जोखिम भत्ता दिया जा रहा है। इसके अलावा वे एमएससीपी लागू ना होने से भी आक्रोशित हैं। आगे उन्होंने मांगें पूर्ण होने पर पूरे प्रदेश के लैब तकनीशियनों के अन्न व जल का त्याग कर सामूहिक रूप के उपवास पर जाने की चेतावनी दी है। उन्होंने याद दिलाया कि वे कोरोना महामारी के वर्तमान दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर, इतनी गर्मी में घंटों पीपीई किट पहनकर और अपना घर छोड़कर आवश्यक सेवाओं में कार्य कर रहे हैं। इस दौरान जिला चिकित्सालय में रजनीश मिश्र, गुंजन पंत, दलवीर राणा, मनोज पाल आदि विरोध-प्रदर्शन में शामिल रहे।

केएमवीएन कर्मचारी महासंघ ने दी 6 सूत्रीय मांग पत्र पर 7 से आंदोलन की चेतावनी

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जुलाई 2020। कुमाऊं मंडल विकास निगम कर्मचारी महासंघ ने निगम प्रशासन को 1 सप्ताह का नोटिस देकर संविदा कर्मचारियों की वरीयता सूची बनाने, वेतन बढ़ोत्तरी व नियमितीकरण सहित निगम में चतुर्थ से तृतीय श्रेणी में विभागीय पदोन्नतियां करने, कर्मचारियों को पदनाम देने सहित 6 सूत्री मांगपत्र दिया है। महासंघ के अध्यक्ष दिनेश गुरूरानी ने कहा कि सरकार से मांग की गई है कि निगम में स्थित क्वारंटाइन केयर सेंटरों को हटाया जाए। साथ ही कहा कि यदि निगम प्रशासन 6 जुलाई तक मांगों का वार्ता के माध्यम से समाधान नही निकालता है तो 7 जुलाई से निगम के समस्त कर्मचारी अपने कार्यालय में काला फीता बांधकर विरोध दर्ज करेंगे। साथ ही समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए 3 जुलाई को समस्त निगम कर्मचारी पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘एक पौधा धरती मां के नाम’ के तहत पौधारोपण के साथ-साथ वृहद स्तर पर सफाई अभियान चलाएंगे। इससे पूर्व भी महासंघ द्वारा इस प्रकार का कार्यक्रम चलाया गया है।
उन्होंने कहा कि शासनादेश के तहत सभी विभागों में पदोन्नतियां की जा रही हैं, लेकिन निगम प्रशासन द्वारा शासनादेश को भी दरकिनार किया जा रहा है। महासंघ के संयोजक प्रकाश चंदोला ने कहा कि निगम प्रशासन कर्मचारियों की धैर्य की परीक्षा ले रहा है। कर्मचारी नेता मंजुल सनवाल ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करें अन्यथा आंदोलन को तेज किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट ने पूछा-किस आधार पर कर्मचारियों के एक दिन के वेतन की कटौती करना चाहती है सरकार

नवीन समाचार, देहरादून, 25 जून 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कोरोना संकट के बीच कर्मचारियों के वेतन में हर माह एक दिन की कटौती पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने कि दीपक बेनीवाल और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से दो दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश देते हुए पूछा है कि उसने किस अधिकार के तहत यह आदेश पारित किया है। मामले में अगली सुनवाई 26 जून यानी शुक्रवार को होगी।
उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने 29 मई को एक आदेश जारी कर मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत तक राज्य सरकार के सभी विभागों, सरकारी, शासकीय सहायक प्राप्त शिक्षण, प्राविधिक शिक्षण संस्थान, निगम, निकायों, सार्वजनिक उपक्रम और स्वायत्तशासी संस्थाओं, प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों के एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करने की बात कही थी।

यह भी पढ़ें : 50 की उम्र में सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति ! गाइडलाइन हो रही तय..

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 जून 2020। राज्य सरकार की सेवाओं में कार्यरत 50 वर्ष की आयु प्राप्त सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए गाइडलाइन तय कर दी गई है। 15 जनवरी तक नियुक्ति अधिकारी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश जारी कर देगा। नवंबर तक स्क्रीनिंग कमेटियों की बैठक और अन्य प्रक्रिया पूरी होगी। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कार्मिक विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिए हैं।

  1. सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों प्रभारी सचिवों, विभागाध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों को जारी आदेश के मुताबिक, सरकार ने सरकारी सेवकों के स्तर के हिसाब से स्क्रीनिंग कमेटियों का गठन किया है। आदेश के मुताबिक वित्तीय हस्तपुस्तिका में नियुक्ति अधिकारी 50 वर्ष व इससे अधिक की आयु वाले सरकारी सेवक को बिना कोई कारण बताए तीन महीने के नोटिस अथवा तीन महीने का वेतन देकर जनहित में अनिवार्य सेवानिवृत्त करने की व्यवस्था है। स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश पर नियुक्ति प्राधिकारी विभागीय मंत्री/मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ही आदेश जारी करेगा। सरकारी सेवक के सेवाकाल के सभी सेवा दस्तावेजों को देखा जाएगा। विशेषरूप से अंतिम 10 वर्ष के अभिलेखों पर ध्यान दिया जाएगा। कार्मिक की समीक्षा कार्यदक्षता और सत्यनिष्ठा के आधार पर की जाएगी।
    स्क्रीनिंग कमेटी का कोई विधिक स्टेटस नहीं होगा। 31 मार्च तक सभी प्रशासनिक विभाग के सचिवों के माध्यम से अनिवार्य सेवानिवृत्ति के प्रस्ताव कार्मिक विभाग को उपलब्ध कराए जाएंगे। इस मामले में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जाएगी। ‍

यह भी पढ़ें : भारतीय मजदूर संघ ने पीएम-सीएम को भेजा ज्ञापन, होटल-स्कूलों पर लगाया वेतन न देने का आरोप

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 मई 2020। भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय आह्वान पर बृहस्पतिवार को नैनीताल के पदाधिकारियों ने एसडीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को ‘मजदूर-श्रमिक विरोधी दिवस मनाये जाने के संदर्भ में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व करोना महामारी से जूझ रहा है जिससे सभी राष्ट्रों के उद्योग, व्यापार अर्थव्यवस्था, यातायात, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, होटल, रिक्शा, रेहड़ी आदि प्रभावित हुए हैं। इन सभी व्यवसायों से भारत वर्ष का जमीनी स्तर पर जुडा हुआ मजदूर अधिक प्रभावित हुआ है। वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय मजदूर संघ मजदूरों के हितों में निम्न बिंदुओ की ओर ध्यान आकर्षित करता है। प्रवासी मजदूर जो अपने मूल गांव या राज्यों में वापस हुए हैं उन्हें स्थानीय स्तर के रोजगार खोलकर रोजगार दिया जाय।
साथ ही सभी विभागों-निगमों व उद्योगोें आदि के नियमित व संविदा सहित सभी तरह के कर्मियों को मार्च व अप्रैल माह का पूर्ण वेतन देने, श्रम कानूनों मे कार्य की अवधि 8 घंटे के स्थान पर 12 घंटे किये जाने, गुजरात, उतर प्रदेश, मध्य प्रदेश में श्रमिकों के श्रम कानूनो को तीन साल के लिए प्रतिबन्धित किये जाने का भी संगठन ने घोर विरोध जाहिर किया।

होटलों-स्कूलों पर कर्मचारियों को वेतन न देने का आरोप
नैनीताल। भारतीय मजदूर संघ ने नगर के होटलों व विद्यालयों के बाबत समस्याओं का ज्ञापन भी एसडीएम को सौंपा। ज्ञापन में नगर के होटल वैलवेडियर खुर्पाताल के होटल डाइनेस्टी व सैंट जेवियर स्कूल आदि के प्रवधंको द्वारा अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं देने की शिकायत भी की गई है। ज्ञापन सोंपने वालों में संघ के जिला मंत्री विरेन्द्र खंकरियाल, जिला संगठन मंत्री मदन सिंह गैडा, होटल कर्मचारी संघ के महामंत्री नरेंद्र पपोला, नासिर खान, विकास जोशी, प्रेम मोहन राणा, जगदीश प्रकाश, सुरेश चन्द्र, पुष्पा रावत, गीता भट्ट व हररश विश्वकर्मा आदि शामिल रहे।
उधन होटलों एवं विद्यालयों के संचालकों का कहना है कि उन पर कोरोना व लॉक डाउन की विषम परिस्थितियों में वेतन, बिजली-पानी के बिल सहित कई तरह के नियत खचों का बोझ है, वहीं विद्यालयों पर फीस न लेने का दबाव भी है। ऐसे में वे कैसे सब कुछ संयत रख सकते हैं, यह बड़ा यक्ष प्रश्न है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के होटल कर्मचारियों के वेतन में कथित कटौती बाद अब रामनगर के 51 रिजॉर्ट कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार

नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अप्रैल 2020। देश में कोरोना की महामारी व लॉक डाउन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और श्रम मंत्रालय के दिशा निर्देशों को ताक पर रखते हुए रामनगर के एक रिजॉर्ट समूह द्वारा बिना नोटिस दिए अपने 51 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकालने का पत्र जारी कर दिया है। कंपनी की ओर से जारी बर्खास्तगी के लिखित आदेश कर्मचारियों ने लेने से इनकार कर दिये तो इन्हें स्पीड पोस्ट से भेजने की बात सामने आई है। निकाले जा रहे कर्मचारियों में 21 स्थायी और 27 कैजुअल व तीन कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी हैं। उन्होंने जिला प्रशासन व राज्य सरकार से हस्तक्षेप करके रोजगार बहाल करने की मांग की है।
इस मामले में भाजपा नेता गणेश रावत ने कहा कि इस मामले को स्थानीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट, उपश्रमायुक्त कुमाऊं, मुख्यमंत्री कार्यालय के अलावा श्रम मंत्री हरक सिंह रावत व कुमाऊं कमिश्नर को भी अवगत कराया जा रहा है। उल्लेखनीय गत दिवस नगर के एक होटल समूह के दो होटलों के कर्मचारियों ने प्रबंधन पर मार्च माह का 10 दिन का वेतन काटने का आरोप लगाया था।

यह भी पढ़ें : होटल कर्मियों का 10 दिन का वेतन काटने का आरोप, प्रबंधन बोला-भलाई के बदले मिली बुराई

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अप्रैल 2020। एक माह से अधिक लंबे हो चुके लॉक डाउन के दौरान कहीं लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है, तो कहीं व्यवहारिक दिक्कतें भी बढ़ने लगी हैं। नगर के एक ही समूह के दो होटलों के करीब ढाई दर्जन होटल कर्मियों ने मल्लीताल कोतवाली पुलिस में होटल प्रबंधन के खिलाफ मार्च माह का 10 दिन का वेतन काटकर देने की शिकायत दर्ज कराई है। वहीं होटल प्रबंधन का भी अपना तर्क है। उनका कहना है भलाई के बदले बुराई मिल रही है। होटल का उच्च प्रबंधन मुख्यालय में बैठता है। लॉक डाउन की वजह से होटल का लेखा तथा अन्य विभाग की कार्य नहीं कर पा रहे हैं। मार्च माह में लॉक डाउन-जनता कर्फ्यू लागू होने तक के वेतन की मुख्यालय से अनुमति ले ली गई थी। आगे उच्च प्रबंधन को देखना है। जब सरकार अपने कर्मचारियों के भत्तों में कटौती करने को मजबूर हो चुकी है तो निजी संस्थानों की क्या बिसात है।
इधर नगर कोतवाल अशोक कुमार सिंह का कहना है कि दो होटलों के करीब 30 कर्मियों ने मार्च माह का 20 दिन का वेतन ही देने का आरोप लगाया है। होटल प्रबंधन से वार्ता की जा रही है।
इधर नगर में एक-दो स्कूलों के द्वारा अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए एसएमएस भेजे जाने की भी सूचना है। अभिभावक इसकी शिकायत प्रेस एवं प्रशासन में कर रहे हैं। समस्या यह भी है कि स्कूल हों चाहे होटल, उनके सामने कर्मचारियों को न निकालने एवं उन्हें समय पर वेतन देने की चुनौती भी है, जबकि वे फीस लेकर आय अर्जन नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में सभी से धैर्य बनाये रखने की अपील की जा रही है।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड सरकार ने कर्मचारियों व पेंशन भोगियों के लिए स्थगित किया महंगाई भत्ता

नवीन समाचार, देहरादून, 24 अप्रैल 2020। केंद्र सरकार के बाद अब उत्तराखंड सरकार ने भी अपने राज्य कर्मचारियों व पेंशन भोगियों के लिए डीए यानी महंगाई भत्ता 2021 तक स्थगित कर दिया है। वित्त सचिव अमित नेगी द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि कोरोना विषाणु के संकट के दृष्टिगत 1 जनवरी 2020 और 1 जनवरी 2021 से देय महंगाई भत्ते व महंगाई राहत की अतिरिक्त किस्त का भुगतान नहीं किया जाएगा। तथापि मौजूदा 17 फीसद की दरों पर महंगाई भत्ते व महंगाई राहत का भुगतान अग्रिम आदेशों तक किया जाता रहेगा।
यह भी साफ किया गया है कि यदि एक जुलाई 2021 से देय महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की भावी किस्तों को जारी करने का निर्णय लिया जाता है तो 1 जनवरी 2020 और 1 जनवरी 2021 से प्रभावी देय महंगाई भत्ते व महंगाई राहत की दरों को भावी प्रभाव से लागू कर दिया जाएगा और उन्हें एक जुलाई 2021 से प्रभावी संचयी संशोधित दर में सम्मिलित कर लिया जाएगा। लेकिन एक जनवरी 2020 से 20 जून 2021 तक की अवधि का कोई बकाया भुगतान नहीं किया जाएगा।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अप्रैल 2020। जनपद के मनरेगा कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कहा है कि उन्हें वित्तीय वर्ष 2018-19 के पांच माह एवं वर्ष मौजूदा वित्तीय वर्ष के 8 माह यानी कुल 12-13 माह का मानदेय नहीं मिला है। इससे उनके परिवारों की स्थिति दयनीय है। यदि सरकार उन्हें यह धनराशि देती है तो वे एक माह का मानदेय प्रधानमंत्री राहत कोष में दान करेंगे। बताया कि उनका मानदेय बढ़ाकर भी मात्र एक हजार रुपए प्रतिमाह किया गया है। कहा कि सरकार यदि इतना मानदेय भी नहीं सकती तो उनके बच्चों को ही मार दिया जाए ताकि वे भूखे-प्यासे न मरें। ज्ञापन भेजने वालों में अध्यक्ष जितेंद्र खोलिया, गिरीश जोशी, नीरज जलाल, नवीन चंद्र, राम सिंह आदि शामिल हैं।

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-मीडिया कर्मियों के लिए भी अलग से होगी व्यवस्था
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 मार्च 2020। कोरोना विषाणु के संक्रमण से बचाव कार्यों में फ्रंटलाईन में कार्यरत 68457 कार्मिकों को 4-4 लाख का बीमा लाभ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसकी स्वीकृति दी है। 1 वर्ष की अवधि के लिए इस पर 17.02 करोङ रूपए का व्यय आएगा। इसका वहन मुख्यमंत्री राहत कोष से किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों का बीमा केन्द्र सरकार के स्तर से किया जा चुका है। राज्य सरकार के स्तर पर बीमा लाभान्वितों में 22523 पुलिस कार्मिक, 7988 ’सफाईकर्मी’ 14595 आंगनबाङी कार्यकत्रियां, 14376 आंगनबाड़ी सहायिका, 4924 मिनी आंगनबाड़ी सहायिका, 464 सुपरवाईजर, 78 सीडीपीओ, 9 डीपीओ, जीएमवीएन व केएमवीएन के 3000 कार्मिक, एसईओसी-डीईओसी के 500 कार्मिक शामिल हैं। मीडिया कर्मियों के लिए अलग से व्यवस्था की जा रही है।
इसके अलावा एक अन्य निर्णय के अनुसार कोरोना से बचाव के दृष्टिगत निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में ओपीडी खुली रहेंगी। ताकि आमजन अन्य बिमारियों की दशा में अपना इलाज सुगमता से करा सकंे। सरकार निजी चिकित्सा संस्थानो को हर प्रकार की सहायता देगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को निर्देशित किया कि निजी अस्पतालों में ओपीडी की व्यवस्था सही रखने में सहयोग करें। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि कोरोना से लड़ाई में सरकार का पूरा सहयोग किया जाएगा। यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं पूरे देश और समाज की है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 19 मार्च 2020। उत्तराखंड सरकार ने सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त करने के साथ ही अनुसूचित वर्ग के असंतोष पर भी मरहम लगाने वाला एक फैसला किया है। सरकार ने सीधी भर्ती के लिए आरक्षण के पुराने रोस्टर को बहाल कर दिया है। यानी सितंबर 2019 के रोस्टर को बदलते हुए पुराने रोस्टर की व्यवस्था बहाल की गई है। इसमें अनुसूचित जाति को पहले क्रमांक में रखा गया है। इसके साथ ही सरकार ने आरक्षित वर्ग के बैकलॉग पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं। हालांकि, सरकार को पुराने रोस्टर का भी नए सिरे से निर्धारण करना होगा क्योंकि अब इसमें आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के आरक्षण की भी व्यवस्था की गई है। शासन द्वारा ताजा जारी किए आदेश में कहा है कि अब पुरानी व्यवस्था के अनुसार सीधी भर्ती का रोस्टर तैयार किया जाएगा। जल्द दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने वर्ष 2019 में पुरानी रोस्टर प्रक्रिया में बदलाव किया था। इस रोस्टर में सामान्य वर्ग को पहले क्रम पर रखते हुए आरक्षण प्रतिशत के हिसाब से क्रमवार रोस्टर चार्ट जारी किया गया था। इसमें अनुसूचित जाति को आरक्षण के लिहाज से छठवें, अन्य पिछड़ा वर्ग को आठवें, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 वें और अनुसूचित जनजाति को 25 वें क्रम पर रखा गया था। इसका अनुसूचित जाति-जनजाति के कार्मिक लगातार विरोध कर रहे थे। प्रदेश में सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों के लिए 19 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को 10 प्रतिशत तथा अनुसूचित जनजाति के लिए चार प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान किया गया है। इसके अलावा क्षैतिज आरक्षण की गणना में प्रदेश की महिलाओं को 30 प्रतिशत, भूतपूर्व सैनिकों को 5 प्रतिशत, दिव्यांगों को 4 प्रतिशत और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों को दो प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 18 मार्च 2020। उत्तराखंड में आखिरकार पदोन्नति में आरक्षण को खत्म कर दिया गया है। सरकार ने पदोन्नति पर लगाई गई रोक को हटा दिया है, जिसके बाद अब बिना आरक्षण के पदोन्नति दी जाएगी। वहीं, शासन से मिले इस आदेश के बाद लंबे समय से आंदोलन कर रहे जनरल-ओबीसी कर्मचारियों की हड़ताल भी खत्म हो गई है। 

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में जनरल-ओबीसी इमप्लॉयज एसोसिएशन के कर्मचारी दो मार्च से पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल पर थे। कर्मचारियों की मांग थी कि पदोन्नति में लगी रोक हाटाने, आरक्षण खत्म करने और आरक्षण रोस्टर में की गई नई व्यवस्था को यथावत रखा जाए। उनका आंदोलन लगातार उग्र होता देख राज्य सरकार की ओर से उन्हें हड़ताल से वापस बुलाने की काफी कोशिशें हुई, लेकिन बात नहीं बन पाई। एसोसिएशन लगातार अपनी मांगों पर अड़ा रहा। आखिरकार बुधवार को कर्मचारियों का आंदोलन रंग लाया और पदोन्नति में आरक्षण को खत्म कर दिया गया। साथ ही पदोनत्ति पर लगी रोक को भी हटा दिया गया है, जिसके बाद से ही कर्मचारियों का आंदोलन समाप्त जनरल ओबीसी एम्प्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक जोशी ने हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की है। गुरुवार से सभी कार्मिक अपने-अपने कार्यालयों में जाएंगे। इसके साथ ही आम जनता को परेशानियों से निजात मिल गई है।

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-सिनेमा हॉल, मल्टी प्लेक्स, मॉल, क्लब, डिस्को, तरणताल (स्विमिंग पूल), व्यायामशाला (जिम), कॉचिंग संस्थान, नर्सिंग संस्थान, समस्त शैक्षिक तथा तकनीकी संस्थान, हाट बाजार सहित बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने की संभावना वाले समस्त स्थानों को 31 मार्च तक के लिए बंद करने के आदेश

डीएम सविन बंसल

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 मार्च 2020। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते नैनीताल के डीएम सविन बंसल ने स्वास्थ्य महकमे के साथ ही जनपद के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अवकाश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत के स्तर से जारी आदेश के अनुसार उत्तराखंड राज्य के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के समस्त चिकित्सकों एवं कार्मिकों की समस्त सेवाओं को आवश्यक सेवाऐं घोषित करते हुए उनकी हड़ताल पर भी पाबन्दी लगा दी है। डीएम ने अपर सचिव के आदेश का संज्ञान लेते हुए जनपद की मुख्य चिकित्साधिकारी तथा चिकित्सा शिक्षा से संबंधित सभी अधिकारियों को संबंधित आदेश की जानकारी उपलब्ध करा ने कहा है।
इसके साथ ही डीएम बंसल ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उत्तराखण्ड शासन की अधिसूचना के क्रम में प्राप्त एडवाइजरी को जनपद में तत्काल प्रभाव से प्रभावी कर दिया है। डीएम ने जनपद के समस्त सिनेमा हॉल, मल्टी प्लेक्स, मॉल, क्लब, डिस्को, तरणताल (स्विमिंग पूल), व्यायामशाला (जिम), कॉचिंग संस्थान, नर्सिंग संस्थान, समस्त शैक्षिक तथा तकनीकी संस्थान, हाट बाजार सहित बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने की संभावना वाले समस्त स्थानों को 31 मार्च तक के लिए बंद करने के आदेश दिये हैं। इसके साथ ही डीएम ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित के विरूद्ध अधिसूचना के प्राविधानों के तहत कार्यवाही की जायेगी।

कोरोना के दृष्टिगत हड़ताली जनरल-ओबीसी कर्मचारियों ने अपनाया बैठने का नया तरीका

नैनीताल। कोरोना के संक्रमण एवं इसके दृष्टिगत सरकार के 40 से अधिक लोगों के एक स्थान पर एकत्र न होने के आदेशों का तोड़ निकालते हुए हड़ताली जनरल-ओबीसी कर्मचारियों ने हड़ताल के दौरान बैठक का नया तरीका निकाला है। मुख्यालय में मंगलवार को कर्मचारियों की हड़ताल 15वें दिन भी जारी रही। इस दौरान कर्मचारी करीब 40-40 के समूह में अलग-अलग दूर-दूर दरियां बिछाकर बैठे। साथ ही इस दौरान कोरोना कमोबेश सभी वक्ताओं के भाषणों में छाया रहा। वक्ताओं ने कहा कि सरकार कोरोना की आढ़ में उनके आंदोलन को तोड़ना चाहते हैं, किंतु वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं।

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-मुख्यालय में उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्प्लाइज यूनियन ने आवश्यक सेवाएं ठप करने की घोषणा के तहत जिला कोषागार, जिला विकास प्राधिकरण एवं कुमाऊं विवि में कार्य बाधित करने की की कोशिश

बृहस्पतिवार को नयना देवी मंदिर के लिए कूच करते हड़ताली कर्मचारी।

नवीन समाचार, नैनीताल/बागेश्वर, 12 मार्च 2020।पिछले दो मार्च से बेमियादी हड़ताल पर चल रहे उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्प्लाइज यूनियन ने बृहस्पतिवार को आज से आवश्यक सेवाएं बाधित करने की घोषणा पर अमल करने की कोशिश की। उन्होंने जिला कोषागार, जिला विकास प्राधिकरण एवं कुमाऊं विवि में कार्य बाधित करने की कोशिश की, साथ ही धरना स्थल मल्लीताल के पुराने घोड़ा स्टेंड पार्क से नयना देवी मंदिर तक जुलूस निकाल कर वहां राज्य सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए माता से प्रार्थना की।
इस दौरान हुई सभा व जुलूस में संयोजक बहादुर बिष्ट, भूपाल सिंह करायत, जगमोहन रौतेला, असलम अली, भगोत सिंह जंतवाल, नवल बिनवाल, उमेश सनवाल, गणेश बिष्ट, मनोज जोशी, जगदीश पपनै, अनिल जोशी, जयकृष्ण कांडपाल, कुंवर सिंह जलाल, प्रकाश पाठक, नंदा बल्लभ पालीवाल, हिमांशु जोशी, मीनाक्षी डंगवाल, कविता पांडे, रीता लोहनी, पुष्पा बिष्ट, ज्योत्सना पपोला, शकुंतला बिष्ट, सुकीर्ति राठौर, संगीता सती, गोपाल बिष्ट, गौरव पांडे, दीपक बिष्ट, संजय रौतेला, ललित उपाध्याय, पंकज पांडेय, हरीश उप्रेती, गौरा पांडे, आरसी पंत, प्रताप मनराल, मनमोहन असवाल, बीडी बवाड़ी, कमल भाकुनी, पूरन पाठक, हेमंत चंदोला व लोकेश वर्मा आदि कर्मचारी नेताओं ने विचार रखे।
अनुसूचित जाति के कर्मचारी ने जनरल-ओबीसी कर्मियों के आंदोलन का किया समर्थन naintal newsउधर बागेश्वर जनपद के कमेड़ीदेवी इंटर कॉलेज में तैनात माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी विजय कुमार ने गुरुवार को विकास भवन बागेश्वर में जनरल-ओबीसी कर्मचारियों के आंदोलन में पहुंचकर अलग ही पहल की। उन्होंने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण की कोई जरूरत ही नहीं है। अनुसूचित जाति के व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिलने के बाद उसके दस्तावेजों में सामान्य वर्ग दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति शब्द को ही हटा देना चाहिए, यह समाज को बांट रहा है। बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर ने दलित, गरीब, पिछड़े वर्ग के लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संविधान में सिर्फ दस साल के लिए आरक्षण की व्यवक्ता की थी। लेकिन राजनीति के कारण आरक्षण को लगातार आगे बढ़ाया जाता रहा। प्रमोशन में आरक्षण का मतलब ही नहीं होता है। उन्होंने कहा कि आरक्षण आर्थिक आधार पर लागू होना चाहिए। ‘एक राष्ट्र, एक जाति, एक धर्म’ के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए। तभी भविष्य में आने वाली पीढ़ी जातिवाद के बंधन में नहीं बंधेगी। उनके समर्थन आंदोलित एसोशिएशन के रवि जोशी, केसी मिश्रा, अनिल जोशी आदि ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 11 मार्च 2020। हाईकोर्ट ने उत्तराखंड जनरल-ओबीसी एम्प्लॉइज एसोसिएशन की प्रदेश में की जा रही हड़ताल के मामले में दायर जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कहा है कि सरकार हड़ताली कर्मचारियों पर कार्यवाही करने के लिए सक्षम है। कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि हड़ताल खुलवाने के प्रयास किया जा रहा है।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति रवि विजय कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार  देहरादून निवासी ललित कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड जनरल-ओबीसी इम्प्लाइज एसोसिएशन के करीब डेढ़ लाख कर्मचारी पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ दो मार्च से हड़ताल पर हैं। याचिका में कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से सभी राजकीय कार्य बाधित हो रहे हैं। याचिका में कहा कि हड़ताली कर्मचारियों द्वारा हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है । याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि या तो कर्मचारी अपनी हड़ताल वापस लें या हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाए। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्‍तारित कर दिया।

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-उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्प्लाइज यूनियन ने किया है 12 से आवश्यक सेवाएं ठप करने का ऐलान
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 मार्च 2020। उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्प्लाइज यूनियन पिछले दो मार्च से बेमियादी हड़ताल पर हैं। अभी उन्होंने आवश्यक सेवाएं बहाल रखी हैं। लेकिन होली के बाद वे अपनी हड़ताल को एक नए स्तर पर ले जाने जा रहे हैं। 12 मार्च से कर्मचारी आवश्यक सेवाओं को भी ठप करने का ऐलान कर चुके हैं, जिसके लिए कर्मचारी तैयार भी नजर आ रहे हैं।
दरअसल कर्मचारी वर्षों से अपनी तय पदोन्नतियां प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। हाईकोर्ट में विरोधी निर्णय आने और राज्य सरकार के द्वारा इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने के बाद कर्मचारियों को लगा कि सरकार उनके साथ है। सर्वोच्च न्यायालय का आदेश आने के बाद तो कर्मचारियों की उम्मीदें और परवान चढ़ गयीं कि अब तो राज्य सरकार किसी भी समय पदोन्नतियों का ऐलान कर सकती है। लेकिन सरकार ने पदोन्नतियां करने के बजाय गैंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी। इसके बाद कर्मचारियों को सरकार की मंशा में शंका पैदा हुई और समय बीतने के बाद वर्षाें से पदोन्नतियों की बाट जोह रहे कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट गया और वह बीती 2 मार्च से बेमियादी हड़ताल पर चले गए, लेकिन मानवता का परिचय देते हुए बोर्ड परीक्षाएं, कोरोना का प्रकोप व होली के पर्व को देखते हुए उन्होंने आवश्यक सेवाएं बहाल रखी थीं, लेकिन अब उनके सब्र का प्याला छलक सकता है।
दरअसल कर्मचारियों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उत्तराखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद क्यों पदोन्नतियों में आरक्षण की व्यवस्था हटाकर पदोन्नतियां शुरू नहीं कर रही है। क्यों सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपने पक्ष में फैसला आने के बावजूद मामले को केंद्र सरकार को भेजकर लटका दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि वास्तव में सरकार सर्वोच्च न्यायालय से अपने पक्ष में फैसला चाहती ही नहीं थी, बल्कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय से विरोधी फैसला आने के बाद मामले को सर्वोच्च न्यायालय ले जाने के पीछे सरकार की मंशा मामले को लटकाने की थी, और उसे लगता था कि सर्वोच्च न्यायालय में फैसला लंबे समय तक लटका रहेगा। किंतु सर्वोच्च न्यायालय से जिस तरह जल्दी फैसला आया, ऐसे में सरकार पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त कर वर्षों से अटकी पदोन्नतियां बहाल कर सकती थी, किंतु उसने इसे केंद्र के पाले में डालकर फिर लटका दिया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी के हवाले से नैनीताल जिला संयोजक बहादुर बिष्ट व मुख्य प्रवक्ता जगमोहन रौतेला ने बताया कि सरकार के इस मामले में हीलाहवाली से कार्यालयों में कर्मचारी आरक्षण विरोधी व आरक्षण समर्थक के रूप में बंट गए हैं। इससे कार्यालयों में अजीबोगरीब विद्वेष की स्थिति भी उत्पन्न हो गई है। बताया कि मुख्यमंत्री को ज्ञापन सोंपकर 11 से आंदोलन फिर से शुरू करने, 12 से आवश्यक सेवाएं भी ठप कर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने, 15 जुलाई को मशाल जुलूस निकालने एवं 22 मार्च को मुख्यमंत्री आवास कूच करने का ऐलान किया गया है।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड जनरल ओबीसी एम्प्लॉई एसोसिएशन की हड़ताल के खिलाफ दायर हुई जनहित याचिका, इधर बारिश में भी जारी रही हड़ताल

नवीन समाचार, नैनीताल, 06 मार्च 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड जनरल ओबीसी एम्प्लॉई एसोसिएशन की तरफ से प्रदेशभर में की जा रही हड़ताल के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई के लिए अगले सप्ताह की तिथि नियत की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमुर्ति विजय कुमार मलिमथ की खण्डपीठ में हुई। खण्डपीठ ने मामले को सुनने के लिए दूसरी खण्डपीठ में रेफर किया है। 
मामले के अनुसार देहरादून निवासी ललित कुमार ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि प्रदेश के उत्तराखंड जनरल ओबीसी एम्पोलाई एसोसिएशन के करीब डेढ़ लाख कर्मचारी पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ 2 मार्च से हड़ताल पर है । कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से सभी राजकीय कार्य बाधित हो रहे हैं। कर्मचारियों द्वारा हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के बार बार दिए गए आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है । याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि या तो कर्मचारी अपनी बेबुनियादी हड़ताल को वापस लें या इनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाये।
 

भारी बारिश के बावजूद आरक्षण विरोधियों ने निकाली रैली

पुराने घोड़ा स्टेंड पार्क में बारिश के दौरान नारेबाजी करते कर्मचारी।

 

-कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए कार्मिकों को दी छूट
नैनीताल। उत्तराखंड जनरल ओबीसी कर्मचारी संघ के आह्वान पर पदोन्नति में आरक्षण व्यवस्था समाप्त किये जाने की मांग को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को पांचवे दिन भी जारी रही। कर्मचारियों ने भारी बर्षा के बावजूद जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान मल्लीताल स्थित पुराने घोड़ा स्टेंड पार्क में कर्मचारियों ने एक सभा भी की। इस मौके पर मुख्य संयोजक बहादुर सिंह बिष्ट ने शनिवार को कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए कर्मचारियों को छूट देने की बात कही।
संयोजक भूपाल सिंह करायत, मुख्य प्रवक्ता जगमोहन रौतेला, संयोजक सचिव भगोत सिंह जंतवाल आदि ने भी विचार रखे व कर्मचारियों से शनिवार को प्रातः 11 बजे से डीएम कार्यालय में होने वाले प्रदर्शन में उपस्थित रहने की अपील की। प्रदर्शन में असलम अली, गिरीश पांडे, त्रिलोक रौतेला, नवल बिनवाल, गौरव पांडे, अनिल जोशी, उमेश सनवाल, संजय रौतेला, पुष्पा बिष्ट, लता पांडे व मनीषा नयाल सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : बहाल होंगे हटाए गए दिसंबर में कार्यमुक्त किये गए कर्मचारी

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 फरवरी 2020। बीती 27 फरवरी से रामगढ़ विकास खंड मुख्यालय में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन पर जमे मनरेगा यानी महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत ग्राम रोजगार सहायक के पद पर कार्यरत कर्मचारियों को कार्य पर बहाल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उन्हें विगत 8 वर्ष से कार्य करने के बाद 27 दिसंबर 2019 को कार्यमुक्त कर दिया गया था। इस पर वे परिवार सहित धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए थे और भूख हड़ताल जैसे उग्र कदम उठाने की चेतावनी दी थी। इधर शनिवार को भाजपा मंडल अध्यक्ष कुंदन चिलवाल के द्वारा सीडीओ से बात करने सहित अन्य प्रयासों के बाद रामगढ़ के खंड विकास अधिकारी ने धरने में बैठे भुवन चंद्र, महेंद्र कुमार, जितेंद्र खोलिया व मुन्नी बिष्ट आदि को लिखित तौर पर अवगत कराया कि उन्हें पूर्व में मांगे गए स्पष्टीकरण के आधार पर सेवा में बहाल कर लिया जाएगा। इसके बाद आंदोलनरत कर्मियों ने शाम पौने पांच बजे अपना बेमियादी आंदोलन समाप्त कर दिया।

यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार : महिला कर्मियों को दो बच्चों के बाद मातृत्व अवकाश पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ की स्थिति..

नवीन समाचार, देहरादून, 17 फरवरी 2020। प्रदेश सरकार के दो या अधिक बच्चों वाली महिला कर्मियों के मातृत्व अवकाश पर पाबंदी के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग गई है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार के इस फैसले में दखल से इनकार कर दिया है कि दो या अधिक बच्चों वाली महिला कर्मी को मातृत्व अवकाश नहीं दिया जाएगा। अदालत ने इसे प्रदेश सरकार का नीतिगत फैसला मानते हुए दखल से इनकार किया है। न्यायमूर्ति आर भानुमती व एएस बोपन्ना की पीठ ने पिछले साल 17 सितंबर को हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उर्मिला मसीह की याचिका को खारिज कर दिया है। पीठ ने कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई कारण नहीं समझते क्योंकि हाईकोर्ट ने समुचित ढंग से अपने फैसले में कहा है कि यह नियम नीतिगत मामला है। उर्मिला मसीह ने दो या उससे अधिक बच्चे होने पर मातृत्व अवकाश का लाभ न देने की प्रदेश सरकार की घोषणा को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी। उनका कहना था कि यह मातृत्व अवकाश लाभ अधिनियम-1961 और न्यायपूर्ण व मानवीय मातृत्व राहत से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 42 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने यह कहते हुए उन्हें कोई राहत नहीं दी थी। मातृत्व अवकाश लाभ अधिनियम-1961 राज्य सरकार के कार्मिकों पर लागू नहीं होता और क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 42 नीति निर्देशक तत्व में शामिल है, इसलिए उसे अदालत लागू नहीं करा सकती।

यह भी पढ़ें : पदोन्नति में आरक्षण पर उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश पर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला…

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 7 फ़रवरी 2020। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया है जिसमें हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि वह प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए क्वॉन्टिटेटिव डेटा एकत्र करे। डेटा एकत्र कर पता लगाया जाए कि एससी/एसटी कैटिगरी के लोगों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं ताकि प्रमोशन में रिजर्वेशन दिया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को रिजर्वेशन देने के लिए निर्देश जारी नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि राज्य सरकार प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में यह टिप्पणी भी की कि आरक्षण किसी का ‘मूल अधिकार’ नहीं है, बल्कि आरक्षण देना-न देना राज्य के विवेकाधिकार में है। इस फैसले के बाद पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने का उत्तराखंंड सरकार का आदेश फिर प्रभावी होने का रास्ता साफ हो गया है। अब राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश पर पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने के फैसले को सही ठहराने के एवज में मात्रात्मक (क्वांटीफायेबल) डाटा नहीं देना होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश में पदोन्नति पर लगी रोक भी जल्द हट सकती है। 
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एससी/एसटी श्रेणी में प्रमोशन में आरक्षण देने का निर्देश जारी किया था इस फैसले को राज्य सरकार और सामान्य वर्ग के आवेदन ने चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अदालत के सामने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार को हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि वह एससी/एसटी कैटिगरी के लोगों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के बारे में पता लगाने के लिए क्वांटिटेव डेटा एकत्र करे और प्रमोशन में आरक्षण प्रदान करे। इस फैसले को चुनौती दी गई थी। इधर, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। किसी का मौलिक अधिकार नहीं है कि वह प्रमोशन में आरक्षण का दावा करे। कोर्ट इसके लिए निर्देश जारी नहीं कर सकता कि राज्य सरकार आरक्षण दे। सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा स्वाने जजमेंट (मंडल जजमेंट) का हवाला देकर कहा कि अनुच्छेद-16 (4) और अनुच्छेद-16 (4-ए) के तहत प्रावधान है कि राज्य सरकार डेटा एकत्र करेगी और पता लगाएगी कि एससी/एसटी वर्ग के लोगों का प्रयाप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं ताकि प्रमोशन में आरक्षण दिया जा सके। लेकिन ये डेटा राज्य सरकार द्वारा दिए गए रिजर्वेशन को जस्टिफाई करने के लिए होता है कि पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। लेकिन ये तब जरूरी नहीं है जब राज्य सरकार रिजर्वेशन नहीं दे रही है। राज्य सरकार इसके लिए बाध्य नहीं है। और ऐसे में राज्य सरकार इसके लिए बाध्य नहीं है कि वह पता करे कि पर्याप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं। ऐसे में उत्तराखंड हाई कोर्ट का आदेश खारिज किया जाता है और आदेश कानून के खिलाफ है।

प्रमोशन में आरक्षण को लेकर खत्म हुई रार, रोस्टर पर बाकी है तकरार

उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने सीधी भर्ती में रोस्टर के मामले को लेकर आंदोलन जारी रखने का एलान किया है। शनिवार को गांधी रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि रोस्टर में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। सीधी भर्ती में आरक्षण  रोस्टर के तहत पहले नंबर पर सामान्य वर्ग है। इस मामले में सरकार ने शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया हुआ है। उप समिति की बैठक 11 फरवरी को होगी और उप समिति के रुख पर ही निर्भर करेगा कि कर्मचारियों का आंदोलन क्या रूप लेगा। सरकार ने सीधी भर्ती में रोस्टर में पहले नंबर पर अनुसूचित जाति को रखा तो संगठन आंदोलन जारी रखेगा। एसोसिएशन ने पूर्व में ही घोषित किया था कि 17 फरवरी को सभी जिलों में धरना प्रदर्शन किया जाएगा और 20 को देहरादून में महारैली का आयोजन होगा। प्रमोशन में आरक्षण का मसला अब निपट गया है लेकिन रोस्टर के मामले को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। संगठन 2012 की तरह ही बड़ा आंदोलन खड़ा करेगा। 

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक जूनियर इंजिनियर को प्रमोशन देने का दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में हाई कोर्ट को ये नहीं बताया गया कि कमिटी ने क्वॉन्टिटेटिव डेटा एकत्र किया था और राज्य सरकार ने तय किया था कि प्रमोशन में रिजर्वेशन नहीं दिया जाएगा। ऐसे में हाई कोर्ट का आदेश खारिज किया जाता है। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजिनियर से असिस्टेंट इंजिनियर के तौर पर प्रमोशन में रिजर्वेशन देने का 15 जुलाई को आदेश पारित किया था। हाई कोर्ट ने इसके लिए राज्य सरकार से कहा था कि वह पब्लिक सर्विस के लिए एससी/एसटी समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व का पता लगाने के लिए क्वॉन्टिटेटिव डेटा एकत्र करे। सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले को राज्य सरकार ने चुनौती दी थी।

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शनिवार को एसबीआई मुख्य शाखा के बाहर प्रदर्शन करते हड़ताली बैंक कर्मचारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 फरवरी 2020। देश के बैंक कर्मचारियों के नौ संगठनों के संयुक्त फोरम-यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक इम्प्लाइज के आह्वान पर शनिवार को भी बैंक कर्मी हमेशा की तरह अपना वेतन कटवाकर यानी स्वयं ‘नो वर्क-नो पे’ का आदर्श स्थापित करते हुए हड़ताल पर रहे। शनिवार को मुख्यालय में बैंक कर्मचारियों ने भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के समक्ष प्रदर्शन किया और पिछले करीब ढाई वर्ष से लंबित वेतन एवं अपनी व पारिवारिक पेंशन के पुर्ननिर्धारण तथा पुरानी पेंशन को ही लागू रखने एवं कार्य के घंटे नियत रखने सहित अपनी मांगें दोहराईं। प्रदर्शन में उत्तराखंड बैंक इम्प्लाइज यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण साह, पीसी पांडे, शिखर साह, अविनाश कुमार, अपर्णा कीर्ति, पीयूष जोशी, वरुण बडोला, पुष्पा तोमर, किरन बिष्ट, रजत साह, संजय गुप्ता व गोकुल चंद्रा सहित बड़ी संख्या में अन्य बैंक कर्मी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मी हमेशा से ‘नो वर्क-नो पे’ के नियम का पालन करते हुए ही हड़ताल करते हैं, यह हड़ताल करने वाले अन्य कर्मचारियों के लिए भी सबक है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 30 जनवरी 2020। उत्तराखंड में विभिन्न सरकारी विभागों के 398 कार्मिकों को जबरन सेवानिवृत्ति देने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों की स्क्रीनिंग करके जबरन सेवानिवृत्ति के लिए कर्मचारियों की सूचनी तैयार कर ली गई है। इनमें 50 वर्ष से अधिक उम्र के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें कार्य के लिए अनफिट या काम में लापरवाही के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति के दायरे में रखा गया है। इनमें कुमाऊं मंडल में 235 कर्मचारी बताये जा रहे हैं। हालांकि इन पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। जानकारी के अनुसार, नैनीताल जिले से जल निगम के 51, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के 42, ऊर्जा निगम के 18, लोनिवि के 10, सिंचाई विभाग के पांच और उच्च शिक्षा विभाग के दो सहित कुल 128 ऐसे कार्मिकों की सूची तैयार कर ली गई है। वहीं ऊधमसिंहनगर जिले से ऊर्जा निगम के 42, लोनिवि के 13, जिला पंचायत के सात और शिक्षा विभाग के पांच सहित कुल 67 कार्मिकों की सूची शासन को गयी है। पिथौरागढ़ जिले से अभी सिर्फ ऊर्जा निगम के ऐसे 40 कार्मिकों की सूची भेजी गई है, जबकि बागेश्वर जिले से शिक्षा विभाग ने उम्र सीमा में आने वाले सभी कार्मिकों का सर्विस रिकॉर्ड शासन को भेज रखा है जबकि चम्पावत और अल्मोड़ा जिलों में ऐसे कोई मामले अभी सामने नहीं आए हैं।

इसके अलावा सूची में सिर्फ परिवहन निगम में ही ऐसे कर्मियों की संख्या 150 के करीब बताई जा रही है, जबकि ऊर्जा निगम के छह तथा यूपीसीएल के पांच कर्मचारी एवं उच्च शिक्षा के एक असिस्टेंट प्रोफेसर और महिला बाल विकास में एक अफसर इसके दायरे में आए हैं। अलबत्ता राज्य के सबसे बड़े महकमे शिक्षा विभाग में एक भी शिक्षक और कर्मचारी इस दायरे में नहीं आया है। बताया गया है कि अब तक राज्य में विभिन्न सरकारी विभागों को 14 कर्मचारियों को अब तक अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा चुकी है। इनमें टिहरी जिले में सर्वाधिक छह राजस्व विभाग के कर्मी, रुद्रप्रयाग जिले के एक संग्रह अमीन तथा पौड़ी जिले के राजस्व विभाग के तीन कर्मचारी शामिल हैं। वहीं इस बीच गत मंगलवार को एक साथ चार कर्मचारियों को सेवानिवृत्त करने पर मुहर लगाई गई है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 26 जनवरी 2020। मानदेय में बढ़ोतरी सहित अन्य मांगों को लेकर पिछले करीब डेढ़ माह से आंदोलित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के आंदोलन पर शासन ने सख्त रुख अपनाया है। शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन दिन पहले सभी जिलों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के आंदोलन के मद्देनजर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस पर अब जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के नियुक्ति प्राधिकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) के स्तर से डीएम के अनुमोदन पर कारवाई शुरू हो गई है। राज्य के चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पौड़ी समेत अन्य जिलों में करीब 20 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके साथ ही काफी संख्या में आंदोलनरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नोटिस दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के आंदोलन के कारण प्रदेश के विभिन्न जिलों में आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हैं, और फनस्वरूप महिला एवं बाल विकास के मद्देनजर संचालित विभिन्न कार्यक्रम ठप हैं। वहीं बच्चों व धात्री महिलाओं को पुष्टाहार भी नहीं मिल पा रहा है और अन्य योजनाएं भी आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।

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नवीन समाचार, देहरादून, 6 जनवरी 2020। नैनीताल जनपद के जिला अधिकारी की सख्त कार्यशैली शायद कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रही है। शायद इसी कारण उनके खिलाफ देहरादून में लामबंदी हो रही है। यहां उत्तराखंड इंजीनियर फेडरेशन ने नैनीताल के डीएम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है। फेडरेशन की रविवार को आईएसबीटी के समीप इंजीनियर्स भवन में फेडरेशन के अध्यक्ष इंजीनियर सुभाष चंद्र पांडे की अध्यक्षता में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि नैनीताल के डीएम अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हुए चुनाव आयोग की ओर से निर्गत आदेशों का भी पालन नहीं कर रहे हैं। कुछ समय पहले पंचायत चुनाव में डीएम ने मुख्य अभियंता की ड्यूटी लगा दी थी, वहीं अधीक्षण अभियंता व अधिशासी अभियंता का वेतन रोक दिया था। नैनीताल के डीएम व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अभियंताओं के विरोध में कार्य किए जा रहे हैं, जिससे कई विभागों के अभियंता या तो मुख्यालय शिफ्ट हो रहे हैं या फिर क्षेत्रीय कार्यालय में संबद्ध होने को विवश हो रहे हैं। बैठक में उत्तराखंड इंजीनियर्स फेडरेशन के महासचिव जितेंद्र सिंह देव, सुरेश तोमर, पंकज बर्त्वाल, कुमारी वंदिता, सुनील कुमार व आरके गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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कहा, जब राष्ट्रपति, सांसद, विधायक, राज्यपाल को मिलने वाले वेतन को आयकर के दायरे से बाहर रखा गया है तो कर्मकारियो की मिलने वाले वेतन को भी आयकर के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 दिसंबर 2019। उत्तराखण्ड हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति सुुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सरकारी व गैर सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन को आयकर के दायरे में लाने के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई दो जनवरी की तिथि नियत की है।
मामले के अनुसार देहरादून के 87 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मी ओपी खंडूरी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा सरकारी व गैर सरकारी विभागों में कार्यरत या सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन से प्राप्त आय पर आयकर विभाग आयकर वसूलता है। यह सविधान के विरुद्ध है। याची का कहना है कि कर्मचारियों को जो वेतन दिया जाता है वह उसके पारिश्रमिक का तोहफा है उस पर आयकर लगाना गलत है। याची का यह भी कहना है कि जब राष्ट्रपति, सांसद, विधायक, राज्यपाल को मिलने वाले वेतन को आयकर के दायरे से बाहर रखा गया है ठीक उसी प्रकार कर्मकारियो की मिलने वाले वेतन को भी आयकर के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।

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-ऊधमसिंह नगर के एडीएम-नजूल जगदीश कांडपाल की ईमानदारी से त्रस्त जिला कलक्ट्रेट के कर्मचारियों ने मुख्य सचिव को भेजे सामूहिक त्यागपत्र
नवीन समाचार, रुद्रपुर, 13 दिसंबर 2019। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जनपद के अपर जिलाधिकारी-नजूल जगदीश कांडपाल को उनकी ईमानदारी का ऐसा पुरस्कार मिला है कि देश-प्रदेश के कोई भी ईमानदार अधिकारी ईमानदारी से तौबा कर लें। जी हां, जिला कलक्ट्रेट के कर्मचारियों ने कांडपाल को हटाने की मांग पर सामूहिक त्यागपत्र मुख्य सचिव को भेज दिये हैं। कांडपाल की छवि शुरू से ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की रही है। अल्मोड़ा स्थित पटवारी प्रशिक्षण संस्थान से लेकर कुमाऊं मंडल के अपर मंडलायुक्त रहते भी अपनी ईमानदारी से बेइमानों की नाक में दम कर चुके कांडपाल को इसी कारण कई बार उनकी वरिष्ठता से बड़ी जिम्मेदारियां मिली हैं। अब उन पर इसी तरह का आरोप भी है कि वे कनिष्ठ ईमानदार कर्मचारियों से वरिष्ठों का काम ले रहे हैं, जबकि कई वरिष्ठों को कनिष्ठों के काम पर लगा दिया है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि कर्मचारियों के आंदोलन के पीछे कुछ ऐसे बाहरी लोग भी हैं जो डीएम एवं एडीएम की ईमानदारी से त्रस्त हैं।
बताया जा रहा है कि एडीएम कांडपाल से कर्मचारियों को यह परेशानी भी है कि उन्होंने कलक्ट्रेट में सभी कर्मचारियों के लिए समय से दफ्तर पहुंचने और अनुशासन में रहने पर सख्ती बरती है। वे विभिन्न सरकारी अभिलेखों का रखरखाव उचित तरीके से रखने पर भी जोर देते हैं। अनुशासनप्रियता के कारण वह सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटते। एडीएम की ऐसी सख्ती के कारण कर्मचारियों की मनमानी पर अंकुश लगा है। इसलिए उनका सख्त रवैया कर्मचारियों को नहीं भा रहा है। इसलिए उनके खिलाफ कलक्ट्रेट के कर्मचारियों ने लामबंद होकर अपने सामूहिक इस्तीफे मुख्य सचिव को भेज दिए हैं, और हड़ताल पर चले गए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि कुछ राजनीतिक लोग डीएम से अपनी नाराजगी को लेकर कर्मचारियों के आंदोलन को हवा दे रहे हैं, और परदे के पीछे रह कर खेल खेल रहे हैं।

यह भी पढ़ें : पदोन्नति में आरक्षण पर उत्तराखंड HC से बड़ा समाचार : सितंबर माह से पदोन्नति पर लगी रोक हटी…

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 नवंबर 2019। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण को लेकर एससी-एसटी फेडरेशन समेत अन्य की याचिकाओं को निस्तारित कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड में सितंबर माह से पदोन्नति पर लगी रोक हट गई है। इधर, आदेश होते ही कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

दरअसल, पदोन्नति में आरक्षण का मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद उत्तराखंड में तमाम सरकारी महकमों ने पहली अप्रैल 2019 से ही पदोन्नति पर रोक लगा दी। सरकार ने भी 11 सितंबर को एक आदेश जारी कर पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी। पदोन्नति में रोक की वजह से विभिन्न विभागों के कर्मचारी संगठन सरकार पर हमलावर हैं। पिछले दिनों हाई कोर्ट ने एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए चार माह के भीतर आरक्षित वर्ग के कार्मिकों के डेटा तैयार करने के निर्देश दिए थे। नवंबर 2012 में राज्य सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण खत्म कर दिया था। यह मामला फिर सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले में दस दिसंबर की तिथि नियत है। इधर एसएसी-एसटी इम्पलाइज यूनियन, चंद्रप्रकाश, नंदकिशोर समेत अन्य ने याचिका दायर कर आरक्षित वर्ग के कार्मिकों की अलग-अलग सूची तैयार करने व पहले आरक्षित वर्ग के कार्मिकों को पदोन्नति में आरक्षण देने की मांग की। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। सरकार की ओर से सीएससी ने कहा कि 2012 के शासनादेश के निरस्त होने के आधार पर पुराने आदेश स्वत: रिवाइज नहीं होंगे। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन, न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने एससी-एसटी फेडरेशन समेत अन्य की याचिकाएं निस्तारित करते हुए पदोन्नति पर लगी रोक हटा दी। इधर अदालत के फैसले के बाद उत्तराखंड जनरल-ओबीसी इम्पलाइज यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि सरकार को यह समझाना होगा कि तमाम कर्मचारी राज्य की सेवा के बाद बिना पदोन्नति के रिटायर हो रहे हैं। सरकार को सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले के अधीन कर पदोन्नति शुरू करनी चाहिए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य में 30 अगस्त व 31 अगस्त 2001 का रोस्टर लागू किया गया था। यह रोस्टर करीब सौ बिंदुओं का है। राज्य में करीब ढाई लाख सरकारी कार्मिक हैं। इसमें से करीब 35 हजार एससी-एसटी कर्मचारी हैं।

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-सरकार को दिये विभागों में कार्यरत एससी-एसटी कार्मिकों के आंकड़े एकत्रित करने के आदेश
-पदोन्नति में आरक्षण देना अथवा न देना सरकार के ऊपर करेगा अब निर्भर, कोर्ट के आदेश के बाद पदोन्नति की राह खुली
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 नवंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पदोन्नति में आरक्षण को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका को निस्तारित कर दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को चार माह के भीतर सरकारी विभागों में कार्यरत अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के कर्मचारियों का डाटा एकत्र करने और उसके बाद पदोन्नति में आरक्षण पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार विनोद प्रकाश नौटियाल ने हाईकोर्ट द्वारा 1 अप्रैल 2019 को ज्ञान चंद बनाम उत्तराखंड सरकार में पारित आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एम नागराज व उसके बाद जनरैल सिंह व अन्य मामलों में दिए गए निर्णयों के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने के निर्देश देते हुए इसके खिलाफ राज्य सरकार द्वारा जारी नियमावली निरस्त कर दी थी। इस पर विनोद प्रकाश नौटियाल ने पुनर्विचार याचिका दायर कर विभिन्न तर्कों के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण को निरस्त करने की अपील की थी। इस मामले में मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने आठ नवम्बर को सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था। जिस पर आज फैसला सुनाया गया।
विदित हो कि हाईकोर्ट ने अपने 1 अप्रैल 2019 के आदेश में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर किसी भी तरह के डाटा को जरूरी नहीं बताया था। जिसके विरुद्ध उत्तराखंड के सामान्य एवं ओबीसी वर्ग के प्रभावित कार्मिकों की ओर से पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी। एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बीपी नौटियाल हाईकोर्ट में कर्मचारियों के पक्ष में दलील दे रहे थे। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए अपने पूर्व के आदेश में संशोधन कर यह आदेश पारित किए। जिसमें सरकार को चार माह के भीतर कार्यरत एससी-एसटी कर्मचारियों के आंकड़े एकत्रित करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही पदोन्नति में आरक्षण देना अथवा न देना सरकार के ऊपर छोड़ दिया है। इस आदेश में साफ किया गया है कि पदोन्नति में आरक्षण देने या न देने का निर्णय सरकार पर निर्भर करता है।

कोर्ट के आदेश से सामान्य व ओबीसी वर्ग के कार्मिक गदगद, कहा-हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार की ओर से पदोन्नति पर लगाई रोक तत्काल हटाने की कार्रवाई को कार्मिक विभाग पर बनाएंगे दवाब, नवम्बर और दिसंबर माह में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से पहले सभी को पदोन्नति का लाभ दिलाने का होगा प्रयास

देहरादून। हाईकोर्ट में सामान्य एवं ओबीसी संवर्ग एसोसिएशन के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता बीपी नौटियाल ने पत्रकारों को हाईकोर्ट के संशोधित आदेश के बाबत विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय का यह बड़ा फैसला है। कोर्ट के आदेश के बाद पदोन्नति पर लगी रोक हटेगी। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने आदेश दिये हैं कि सरकारी विभागों में एससी-एसटी के कार्यरत कार्मिकों के आंकड़े जुटाने के बाद सरकार चाहे तो पदोन्नति में आरक्षण लागू कर सकती है, लेकिन इसके लिए सरकार के पास पर्याप्त आधार होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आरक्षण में पदोन्नति की कोई व्यवस्था नहीं है। यह व्यवस्था राज्य सरकार का निर्णय है। यूपी में 2011 में इस व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खत्म कर दिया गया है। उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्पलाइज एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी ने हाईकोर्ट के आदेश को कर्मचारियों की बड़ी जीत बताया है। उच्च न्यायालय ने अपने एक अप्रैल के आदेश पर विचार कर कर्मचारियों की पीड़ा को समझा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद 11 सितंबर 2019 को राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में पदोन्नति पर लगाई रोक हटने से पदोन्नति की राह खुल जाएगी। इससे कई ऐसे कार्मिकों को भी फायदा होगा, जिनकी सेवानिवृत्ति 30 नवम्बर और दिसंबर माह में होनी है। अब एसोसिएशन सरकार की ओर से पदोन्नति पर लगाई गई रोक को हटाने के लिए सरकार के 11 सितंबर को पारित आदेश को निरस्त करवाने के लिए दवाब बनाएगी। ताकि पूर्व की भांति बिना आरक्षण दिए तत्काल पदोन्नतियां कराई जा सके। पत्रकार वार्ता में संगठन के महासचिव वीरेन्द्र गुसांई, संगठन मंत्री हीरा सिंह बसेड़ा, कोषाध्यक्ष सीएल असवाल, डीएस सरियाल, बीपी नौटियाल, आशू सेमवाल, विष्णुदत्त बेंजवाल, मुकेश बहुगुणा, प्रवीन सक्सेना, शिवराज सिंह, शांतनु शर्मा आदि मौजूद रहे। उधर आरक्षित वर्ग में इस आदेश के बाद निराशा देखी जा रही है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में पेंशनरों ने मांगी उत्तराखंड के विधायकों जैसी यह सुविधा..

-उत्तराखंड राजकीय पेंशनर संघ के वार्षिक अधिवेशन में हुआ 80 वर्ष से अधिक उम्र के पेंशनरों का परंपरागत सम्मान, विधायकों की तर्ज पर मांगी 65 की उम्र में अतिरिक्त पेंशन वृद्धि
नवीन समाचार, नैनीताल, 14 नवंबर 2019।
उत्तराखंड राजकीय पेंशनर संघ ने पंजाब एवं हरियाणा के पेंशनरों तथा उत्तराखंड के विधायकों की तर्ज पर उन्हें भी 65 वर्ष की उम्र पूरी करने पर अतिरिक्त पेंशन वृद्धि देने की मांग की है। साथ ही एक जनवरी 2016 से पूर्व के पेंशनरों को संशोधित पेंशन देने तथा एक जनवरी 2006 से 31 दिसंबर 2015 के बीच के सभी शासनादेशों को एक जनवरी 2006 से लागू करते हुए एक जनवरी 2006 से छठे वेतन आयोग का लाभ देने की मांग की है। इसके अलावा जल निगम एवं जल संस्थान के कर्मियों को भी सातवें वेतन आयोग का लाभ तत्काल देने एवं अटल आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना को सही व भ्रष्टाचार मुक्त तरीके से लागू करने की मांग की है।
बृहस्पतिवार को मुख्यालय में आयोजित पेंशनरों के वार्षिक अधिवेशन में यह मांगें उठाई गईं। इस मौके पर 80 वर्ष की आयु पूरी करने वाले कुंदन बिष्ट, डा. बीसीएल साह, नवीन लाल साह, सुधा टंडन एवं केपी काला का माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर परंपरागत सम्मान किया गया। संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष पान सिंह रौतेला ने किया। अधिवेशन में जनपद की मुख्य कोषाधिकारी अनीता आर्य के साथ संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जेएस जैन, प्रदेश महामंत्री बची सिंह रावत, संगठन मंत्री सीपी घिल्डियाल, बीडी पलड़िया, पीसी कांडपाल, गौरा देवी देव, डा. मधु नयाल, चंद्रकला खोलिया, नवीन चंद्र पंत, आनंद राम आर्या, डीडी जोशी, मुन्नी थापा व नवीन चंद्र साह सहित संगठन के अनेक सदस्य मौजूद रहेे।

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मोदी सरकार ने बनाया ड्राफ्ट, ड्राफ्ट में ज्यादातर पुराने सुझाव, मेहनताना तय करने को देश तीन जियोग्राफिकल वर्गों में बांटा, अभी आठ घंटे के नियम के तहत 26 दिन काम के बाद तय होता है कर्मचारियों का वेतन
Big news for government employees, now may have to work 9 hours instead of 8नवीन समाचार, नई दिल्ली, 10 नवंबर 2019। मोदी सरकार सेवानिवृत्ति के लिए 33 वर्ष की सेवा या 60 वर्ष की उम्र पूरी करने के साथ ‘वेज कोड रूल्स’ में बदलाव कर सकती है। नये ‘वेज कोड रूल्स’ के ड्राफ्ट में दिन में आठ की जगह नौ घंटे काम करने की सिफारिश की गई है। ड्राफ्ट में कर्मचारियों का वेतन तय करने के लिए पूरे देश को तीन जियोग्राफिकल वर्गों में बांटा गया है।
इस बाबत श्रम मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों से एक महीने में सुझाव मांगे हैं। केंद्र सरकार की ओर से जारी ड्राफ्ट में कहा है कि भविष्य में विशेषज्ञों की एक कमेटी न्यूनतम मजदूरी तय करने के मसले पर सरकार से सिफारिश करेगी। गौरतलब है कि श्रम मंत्रालय ने जनवरी में 375 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से न्यूनतम वेतन की सिफारिश की थी। पैनल ने इसे जुलाई 2018 से लागू करने को कहा था। न्यूनतम मासिक वेतन 9,750 रुपये रखने की सिफारिश की थी। ड्राफ्ट में कहा गया है कि जब न्यूयतम वेतन पर कोई फैसला लिया जाएगा, तब देश को तीन भौगोलिक कैटेगिरी मे बांटा जाएगा। जिनमें मेट्रोपॉलिटिन एरिया, जिसकी जनसंख्या 40 लाख से ज्यादा है। नॉन मेट्रोपॉलिटिन एरिया, जिसकी जनसंख्या 40 लाख से ज्यादा है। नॉन मेट्रोपॉलिटिन एरिया  जिसकी जनसंख्या 10 लाख से 40 लाख और ग्रामीण इलाके शामिल होंगे। साथ ही घर का किराया न्यूनतम वेतन के 10 % के बराबर तय होगा। हालांकि अभी तकयह स्पष्ट नहीं है कि कैटेगिरी के हिसाब से इनमें कोई बदलाव होगा या नहीं।  

यह भी पढ़ें : इस ‘हठधर्मिता’ के कारण 11 माह पहले ही इस्तीफा देने को मजबूर हुए कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. नौड़ियाल

-एक अप्रैल 2020 यानी करीब 11 माह बाद आईआईटी रुड़की में ही लौटना था प्रो. नौड़ियाल को, राज्यपाल के पत्र के बावजूद आईआईटी रुड़की आवास खाली करवाने को है अडिग
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 मई 2019। 16वें दीक्षांत समारोह के आयोजन में देश के राष्ट्रपति एवं तिब्बती आध्यात्मिक धर्मगुरु दलाई लामा के आगमनएवं आगे यूजीसी के नैक के मूल्यांकन की तैयारियों में जुटे कुमाऊं विश्वविद्यालय को आईआईटी रुड़की की अमानवीयता व हठधर्मिता का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। आईआईटी रुड़की द्वारा आवास खाली करने की चेतावनी के बाद परेशान होकर कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने अपने पद से इस्तीफा देने का पत्र प्रदेश की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को भेज दिया है। इसके बाद विवि के भविष्य पर प्रश्न खड़े हो गये हैं। क्योंकि प्रो. नौड़ियाल का करीब 11 माह का कार्यकाल शेष है। ऐसे में उनकी जगह नये कुलपति के चयन एवं नियुक्ति की प्रक्रिया में लगने वाले समय अंतराल तक विवि को कामचलाऊ व्यवस्था में रहना और इस दौरान ही अक्टूबर माह में दीक्षांत समारोह तथा नैक का मूल्यांकन भी झेलना पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि प्रो. नौड़ियाल मूलतः आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर हैं। 1 अप्रैल 2017 को वे तीन वर्ष के लिए कुमाऊं विवि के कुलपति नियुक्त हुए थे, एवं 31 मार्च 2020 को यहां का सेवाकाल समाप्त कर उन्हें आईआईटी रुड़की में ही लौटना है। इस बीच उनका सामान आईआईटी रुड़की के आवास में है। इधर आईआईटी रुड़की द्वारा उनसे आवास खाली कराने की कवायद की जा रही है, और उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य द्वारा नौड़ियाल को आवंटित आवास को एक वर्ष का विस्तार देने के पत्र को भी आईआईटी रुड़की प्रशासन ने नजरअंदाज कर दिया है। इस पर प्रो. नौड़ियाल ने कहा कि उनके पास अपना आवास बनाये रखने के लिए कुमाऊं विवि से इस्तीफा देकर रुड़की लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि अभी कमरा बाहर लेने के बाद 11 माह बाद उन्हें फिर से अपना सामान आईआईटी द्वारा आवंटित आवास में शिफ्ट करना पड़ेगा। आगे उनके एवं कुमाऊं विवि का भाग्य कुलाधिपति राज्यपाल के अगले कदम पर निर्भर करेगा।

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चुनाव के बाद शपथ ग्रहण करते डीएसबी परिसर कर्मचारी संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 मई 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ की नई कार्यकारिणी का गठन हो गया है। राम सिंह गोसाई नये अध्यक्ष एवं गणेश बिष्ट सचिव निर्वाचित हुए हैं। वहीं उपाध्यक्ष पद पर जगदीश चंद्र सती, महिला उपाध्यक्ष पद पर रीता लोहनी, उप सचिव पद पर लक्ष्मण सिंह बिष्ट व कोषाध्यक्ष पद पर आनंद सिंह मैठानी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। सभी पदाधिकारियों को मुख्य चुनाव अधिकारी केसी चतुर्वेदी ने परिसर निदेशक प्रो. एलएम जोशी सहित अन्य की उपस्थिति में शपथ ग्रहण करा दी है।
इससे पूर्व मंगलवार को हुई मतदान की प्रक्रिया में 137 कर्मचारियों में से 123 यानी 92.48 फीसद ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अध्यक्ष पद पर राम सिंह गुंसाई को 80 व दिनेश चंद्र आर्य को 42 तथा सचिव पद के लिए गणेश सिंह बिष्ट को 78 व चंद्र बल्लभ जोशी को 42 मत मिले। चुनाव को शांतिपूर्ण तरीक से संपादित कराने में अधिष्ठाता छात्र कल्याण दफ्तर से हरीश चंद्र जोशी व राजेंद्र सिंह ढैला, लेखानुभाग से प्रकाश चंद्र पाठक, नंदा बल्लभ पालीवाल व नवीन प्रसाद जबकि क्रीड़ा अनुभाग से लाल सिंह बिष्ट ने सहयोग दिया।

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नवीन समाचार, देहरादून, 7 मार्च 2019। उत्तराखंड के उन सभी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है, जिन्हें पिछले दिनों सातवां वेतनमान अनुमन्य हुआ है, अब उन्हें 9 फीसद की जगह 12 फीसद महंगाई भत्ता दिये जाने की प्रदेश के राज्यपाल ने भी बृहस्पतिवार को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस संबंध में बृहस्पतिवार को प्रदेश के सचिव अमित नेगी की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार राज्य सरकार के कार्मिकों, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, राजकीय विश्वविद्यालयों तथा प्राविधिक शिक्षण संस्थानों के ऐसे सभी कार्मिकों को जिन्हें सातवां पुनरीक्षण वेतनमान अनुमन्य किया गया है, उन्हें अनुमन्य महंगाई भत्ते की दरों में 1 जनवरी 2019 से अनुमन्य मूल वेतन के 9 फीसद की मौजूदा दर को बढ़ाकर 12 फीसद कर दिया गया है। इसका लाल सेवानिवृत्त एवं 6 माह के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को भी मिलेगा। उनकी बढ़ी हुई धनराशि उनके भविष्य निधि खाते में जमा की जाएगी, तथा मई माह में देय अप्रैल माह के वेतन के साथ नगद प्राप्त होगी।

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 19 फरवरी 2019। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्माचारियों को बड़ा तोहफा दिया है. केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारियों और पेंशनधारकों को मिलने वाला महंगाई भत्ता 12 फीसदी कर दिया है. यह फैसला 1 जनवरी, 2019 से लागू होगा जिसका लाभ 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के मिलेगा. इसके अलावा कैबिनेट रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को मंजूरी दी है जो दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ को जोड़ेगा.

कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों को मिलने वाले महंगाई भत्ते में 3 फीसदी का इजाफा किया गया है. इस लिहाज से पहले मिलने वाला 9 फीसदी महंगाई भत्ता 1 जनवरी, 2019 से 12 फीसदी हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश के खजाने पर 9168.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा. सरकार के इस फैसले का लाभ 48.41 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 62.03 लाख पेंशनधारकों को मिलेगा. इसके अलावा कैबिनेट ने दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ के बीच रिजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को मंजूरी दी है. जो दिल्ली-एनसीआर के शहरों को रैपिड कनेक्टिविटी देगा. अरुण जेटली ने बताया कि इस परियोजना पर 30374 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसे पूरा करने में 6 साल लगेंगे.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि संसद का सत्र खत्म हो जाने के चलते कुछ अहम विधेयक लंबित रह गए थे, जिनमें से कुछ विधेयकों पर विपक्ष का भी समर्थन था. इनमें से तीन अध्यादेश के माध्यम से और एक बिल के माध्यम से संसद में पेश किए गए थे. जिसमें से सभी कानून लोकसभा के पारित हो गए थे. लेकिन राज्यसभा में हंगामें के चलते यह कानून लंबित रह गए. इसलिए इन चारों बिल के संबंध में कैबिनेट ने अध्यादेश जारी करते हुए राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेज दिया है. इसमें तीन तलाक बिल, मेडिकल काउंसिल बिल, कंपनी लॉ संशोधन विधेयक और अनरेगुलेटेड डिपॉजिट बिल शामिल हैं.

इसके साथ ही कैबिनेट ने गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के कल्याण और विकास कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए एक बोर्ड के गठन को भी मंजूरी दी है. मोदी सरकार द्वारा पेश अंतरिम बजट में इसका ऐलान किया गया था जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दी है. इसके अलावा कैबिनेट ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी है.

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-एलटी शिक्षक प्रोन्नति पर आपत्तियां दूर, शासन को भेजी पत्रावली
-लोक सेवा आयोग ने पत्रावली पर लगायी थी आपत्तियां
-विभाग ने आयोग का जवाब बनाकर शासन को भेजा

नवीन समाचार, देहरादून, 18 फरवरी 2019। एलटी शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए शिक्षा विभाग ने फिर से पत्रावली शासन को सरका दी है। प्रोन्नति की इस सूची में 1949 शिक्षकों की प्रोन्नति का प्रस्ताव है। लोक सेवा आयोग को इस संबंध में पहले ही पत्रावली चली गयी थी। आयोग ने इसमें कुछ आपत्तियां लगाकर विभाग को वापस भेज दी थी। शिक्षा विभाग के स्तर से इस संबंध में काफी पहले ही फाइल लोक सेवा आयोग को भेज दी गयी थी। इस पत्रावली में पूर्व में तदर्थ रूप से प्रोन्नत शिक्षणों के प्रकरण तो थे ही जिन चार विषयों के अभी तक प्रोन्नति नहीं हो पाये, उनके प्रकरण भी हैं। आयोग ने इस पर आपत्ति लगाकर वापस भेज दिया था। अब शिक्षा विभाग की ओर से आयोग की सभी आपत्तियों पर जवाब दे दिया गया है। विभाग की ओर से फाइल शासन को भेज दी गई है। विभाग ने पिछले वर्ष कई विषयों की प्रोन्नति के आदेश जारी कर दिये थे, लेकिन गणित, भूगोल व विज्ञान से संबंधित भौतिकी, रसायन व जीवविज्ञान विषयों के लिए प्रोन्नति नहीं हो पायी थी। पूर्व में की गयी सभी प्रोन्नतियां तदर्थ रूप में की गयी थी, जबकि शिक्षक संघ ने स्थायी पदोन्नति के लिए दबाव बनाया था। इसी कड़ी में शिक्षा विभाग ने सभी प्रोन्नत शिक्षकों के साथ ही जिन विषयों की प्रोन्नति नहीं हो पायी, उनमें स्थायी प्रोन्नति का प्रस्ताव भेजा था। राशिसं के प्रांतीय महामंत्री डा. सोहन सिंह माजिला ने बताया कि सोमवार को सचिव शिक्षा से मुलाकात करने का कार्यक्रम है। उन्होंने उम्मीद की है कि लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले ही प्रोन्नति की मांग पूरी हो जाएगी।

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नवीन समाचार, देहरादून, 15 फरवरी 2019। उत्तराखंड शासन ने प्रदेश के सभी शिक्षकों-कर्मचारियों व अधिकारियों के मकान किराया भत्तों की पुनरीक्षित दरें जारी कर दी हैं। नयी दरें जनवरी 2019 से लागू होगी। मकान किराये भत्ते की दरें 12, 10, 8 प्रतिशत की जगह वेतन लेवल के हिसाब से तय की गई हैंं। सरकार रानीखेत कैंट एरिया को भी ‘बी’ प्लस श्रेणी में ले आयी हैं। सबसे ज्यादा फायदा देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, मंसूरी, व रानीखेत केन्ट में कार्य करने वाले अधिकारियों व शिक्षक कर्मचारियों को होगा। साथ ही सभी शिक्षक कर्मचारियों को स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ता, वर्तमान में जिनको मिलता हैं उसमें भी बढो़त्तरी की गई हैं। वहीं आगे से स्वैच्छिक कल्याण भत्ता खत्म कर दिया हैं।

बड़ा सुखद समाचार : सरकार का कर्मचारियों की इन मांगों पर नरम रुख, चार फरवरी को प्रस्तावित महारैली स्थगितनवीन समाचार, नैनीताल, 3 फरवरी 2019। सरकार के सकारात्मक रुख के बाद कर्मचारियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। कर्मचारी समन्वय समिति के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को प्रदेश में महारैली का आयोजन होना था। इसे स्थगित कर दिया गया है। इस बाबत शनिवार को उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति की बैठक कचहरी स्थित लोक निर्माण विभाग के डिप्लोमा इंजीनियर संघ भवन में बैठक हुई। समन्वय समिति के प्रवक्ता अरुण पांडे ने कहा कि मकान किराया भत्ते में वृद्धि तथा अन्य कल्याणकारी योजनाएं घोषित किए जाने से सरकार के रुख में नरमी का संकेत मिला है। सरकार तथा प्रबंधन को मांगें पूरी करने के लिए अवसर प्रदान करना चाहिए। इसके बाद कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया। पूर्व में तय कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को पूरे प्रदेश में महारैली आयोजित की जानी थी। संगठन के नेताओं ने कहा कि परिवार कल्याण योजना भत्ता, अपराध अनुसंधान, अभिसूचना विभाग, स्पेशल टास्क फोर्स तथा सतर्कता विभाग के कर्मियों के विशेष प्रोत्साहन भत्ते के संबंध में सरकार के फैसले का समिति स्वागत करती है। इस दौरान संयोजक मंडल सदस्य दीपक जोशी, राकेश जोशी, नवीन कांडपाल, संतोष रावत, सुनील दत्त कोठारी व ठाकुर प्रह्लाद सिंह, हरीश नौटियाल, सुभाष लाल, बनवारी सिंह रावत, सूर्य प्रकाश राणाकोटी, देव रावत, रमेश नेगी, अनंत राम शर्मा, शूरवीर सिंह रावत, नंद किशोर त्रिपाठी, यशवंत सिंह रावत, संदीप शर्मा, राजेश प्रसाद मौर्य, उपेंद्र त्रिपाठी, शक्ति प्रसाद भट्ट, वीरेंद्र सिंह, जमुना प्रसाद भट्ट, सूरत सिंह, जीएन कोठियाल, राजेंद्र सैनी, एसएन रतूड़ी, मुकेश रतूड़ी, राजीव चौहान व सुरेंद्र प्रसाद बड़ोती आदि मौजूद रहे।

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 फरवरी 2019। सरकार के सकारात्मक रुख के बाद कर्मचारियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। कर्मचारी समन्वय समिति के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को प्रदेश में महारैली का आयोजन होना था। इसे स्थगित कर दिया गया है। इस बाबत शनिवार को उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति की बैठक कचहरी स्थित लोक निर्माण विभाग के डिप्लोमा इंजीनियर संघ भवन में बैठक हुई। समन्वय समिति के प्रवक्ता अरुण पांडे ने कहा कि मकान किराया भत्ते में वृद्धि तथा अन्य कल्याणकारी योजनाएं घोषित किए जाने से सरकार के रुख में नरमी का संकेत मिला है। सरकार तथा प्रबंधन को मांगें पूरी करने के लिए अवसर प्रदान करना चाहिए। इसके बाद कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया। पूर्व में तय कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को पूरे प्रदेश में महारैली आयोजित की जानी थी। संगठन के नेताओं ने कहा कि परिवार कल्याण योजना भत्ता, अपराध अनुसंधान, अभिसूचना विभाग, स्पेशल टास्क फोर्स तथा सतर्कता विभाग के कर्मियों के विशेष प्रोत्साहन भत्ते के संबंध में सरकार के फैसले का समिति स्वागत करती है। इस दौरान संयोजक मंडल सदस्य दीपक जोशी, राकेश जोशी, नवीन कांडपाल, संतोष रावत, सुनील दत्त कोठारी व ठाकुर प्रह्लाद सिंह, हरीश नौटियाल, सुभाष लाल, बनवारी सिंह रावत, सूर्य प्रकाश राणाकोटी, देव रावत, रमेश नेगी, अनंत राम शर्मा, शूरवीर सिंह रावत, नंद किशोर त्रिपाठी, यशवंत सिंह रावत, संदीप शर्मा, राजेश प्रसाद मौर्य, उपेंद्र त्रिपाठी, शक्ति प्रसाद भट्ट, वीरेंद्र सिंह, जमुना प्रसाद भट्ट, सूरत सिंह, जीएन कोठियाल, राजेंद्र सैनी, एसएन रतूड़ी, मुकेश रतूड़ी, राजीव चौहान व सुरेंद्र प्रसाद बड़ोती आदि मौजूद रहे।

पूर्व समाचार : कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, आवास भत्ते में संशोधन पर मुहर; जानिए कितना बढ़ा

नवीन समाचार, देहरादून, 1 फरवरी 2019। कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों के आवास भत्ते में संशोधन पर मुहर लग गई है। जिसके बाद अब आवास भत्ता सातवें वेतनमान में न्यूनतम वेतनमान का आठ, दस और 12 फीसद होगा। आपको बता दें कि पहले ये भत्ता पांच, सात और नौ फीसद था।  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में कर्मचारियों की भत्तों के आवास भत्तों में मुहर लगने के साथ ही बंद किए गए पांच भत्ते परिवार नियोजन, पुलिस से जुड़े तीन भत्ते, सचिवालय भत्ते को बहाल किया गया। साथ ही सवर्ण गरीबों को दस फीसद आरक्षण के लिए अध्यादेश लाने,
दिव्यांगों को राहत देते हुए लोक सेवा आयोग के पदों के आवेदन के लिए शुल्क एससी-एसटी के बराबर करने, पूर्व मुख्यमंत्रियों का आवास किराया किया माफ करने एवं सरकारी आवासों के किराए में चार गुना वृद्धि घटा कर दोगुना करने के निर्णय लिए गए हैं। कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों की बाकी मांगों के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में रिव्यू कमेटी बनाई गई । वहीं, बैठक में ये भी फैसला लिया गया कि किसानों को एक लाख तक बगैर ब्याज के ऋण और महिलाओं को पांच लाख तक ब्याजमुक्त ऋण दिया जाएगा।

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कुमाऊँ कमिश्नरी में बेअसर, कलक्ट्रेट, विवि में ताले, कोषागार कर्मी भी रहे कार्य से विरत
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 जनवरी 2019।
वेतन भत्तों में कटौती सहित 10 सूत्रीय मांगों पर उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी शिक्षक संयुक्त समन्वय समिति के आह्वान पर बृहस्पतिवार को पूरे प्रदेश सहित जिला व मंडल मुख्यालय में कर्मचारियों की बहुचर्चित सामूहिक अवकाश आंदोलन का मिला-जुला असर देखने को मिला। वहीं आंदोलनरत कर्मचारियों के प्रांतीय नेतृत्व एवं सरकार के बीच वार्ता के प्रयास भी निरंतर किये जाते रहे। इसके बाद प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत की ओर से कहा गया है कि सरकार आंदोलनरत कर्मचारियों की मांगों को शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में रख सकती है। इस पर आंदोलन की अगुवाई कर रही समिति के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी ने भी सकारात्मक रुख दिखाया है। इससे पूर्व भी आंदोलन के दिन सरकार व कर्मचारी दोनों पक्षों की ओर से वार्ता शुरू करने के प्रति ‘पहले आप-पहले आप’ जैसी स्थिति भी नजर आती रही। जिलों में भी आंदोलनरत कर्मचारी प्रांतीय नेतृत्व व सरकार के बीच शाम को प्रस्तावित बैठक पर टकटकी लगाये रहे।
इधर कुमाऊं कमिश्नरी कार्यालय में हड़ताल पूरी तरह से विफल रही, जबकि बताया गया कि जिला कलेक्ट्रेट, शिक्षा, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, पशुपालन व कृषि आदि विभागों के साथ ही कुमाऊं विवि व इसके सर्वप्रमुख डीएसबी परिसर सहित 56 कार्यालयों में सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल पर रहे। जिला कलेक्ट्रेट में कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के आह्वान पर कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहे, जिस कारण कलेक्ट्रेट में ताले लटके रहे। वहीं कुछ विभागों में कर्मचारियों ने उपस्थिति पंजिका में दस्तखत किए पर काम नहीं किया। जबकि कमिश्नरी में रोज की तरह कामकाज चला। हड़ताल में प्रमुख रूप से समन्वय समिति के अध्यक्ष बहादुर बिष्ट, जगमोहन रौतेला, भगोत सिंह जंतवाल, नवीन कांडपाल, ललित मोहन पांडे, मनोज साह, अजय बिष्ट, भुवन बिष्ट, राजेंद्र बिष्ट,, उमेश सनवाल व असलम अली आदि कर्मचारी नेताओं की भूमिका रही। उधर पूरे प्रदेश में इसी तरह हड़ताल का मिला-जुला असर देखने को मिला है।
वहीं समन्वय समिति से इतर ग्रेड पे, आईपीएओ भत्ते, पदोन्नति, काम के बदले अतिरिक्त वेतन सहित नौ सूत्रीय मांगों पर बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय स्थित कोषागार के कर्मी प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर कार्य पर आये किंतु कार्य से विरत रहे। इसके साथ ही जिले की उपकोषागारों में भी कामकाज नहीं हुआ। आंदोलित कर्मचारियों का कहना था कि उनके 4600 व 4800 ग्रेड पे के बारे में सरकार की ओर से कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है। साथ ही विभिन्न अवकाशों पर किये जाने वाले अतिरिक्त कार्य के बदले वर्ष में 15 दिन का अतिरिक्त वेतन दिये जाने व पदोन्नति में 80/20 का अनुपात लागू करने की मांगें कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें : 10 सूत्री मांगों पर उत्तराखंड के तीन लाख कर्मचारी आज रहेंगे हड़ताल पर, दोनों ओर से दबाव

नवीन समाचार, देहरादून, 31 जनवरी 2019। आसन्न लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में 10 सूत्री मांगों को लेकर प्रदेश के तीन लाख सरकारी कर्मचारी बृहस्पतिवार को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक मंडल ने यह दावा किया है। बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी से समिति संयोजक मंडल की वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।

समन्वय समिति की मांगों पर सरकार और कर्मचारियों के बीच गतिरोध बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री प्रकाश पंत की आंदोलनकारी नेताओं से वार्ता के बाद टूटने के आसार जताए जा रहे हैं। वहीं, सरकार की ओर से फिर वार्ता की पहल को देखते हुए समन्वय समिति ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाएं, एंबुलेंस, रोडवेज बसों के संचालन, विद्युत उत्पादन एवं वितरण से सीधे जुड़े कर्मचारियों को सामूहिक अवकाश से छूट दे दी है। बाकी प्रदेशभर के सभी कर्मचारियों से आह्वान किया गया है कि वे सामूहिक अवकाश पर रहें।  सरकार ने भी इस मामले में कमर कस ली है। दफ्तर आने वाले कर्मचारियों को सरकार की ओर से पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

यह भी पढ़ें : सांसद अनिल बलूनी ने फिर जीत लिया दिल, दिलाई 4000 कर्मियों के लिए राहत की खबर

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 28 जनवरी 2019। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने उत्तराखंड के 4,000 से ज्यादा शिक्षा मित्रों की समस्या का समाधान जल्द करने का भरोसा दिया है। उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी से सोमवार को मुलाकात के दौरान जावडेकर ने शिक्षा मित्रों के मुद्दे के साथ गढ़वाल विश्वविद्यालाय संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार के मुद्दों को भी जल्द हल करने का आश्वासन दिया है।

सांसद अनिल बलूनी ने जावडेकर से मुलाकात कर शिक्षा मित्रों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के चार हजार से अधिक शिक्षा मित्रों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के कारण सेवा समाप्ति का संकट हैं। जावडेकर ने इस विषय पर त्रिपुरा, असम के शिक्षा मित्रों को दी गई राहत के आलोक में परीक्षण कराने का आश्वासन दिया है। बलूनी ने गढ़वाल विश्वविद्यालय में लंबे समय से स्थायी कुलपति न होने से अनेक प्रोन्नतियां, शिक्षण व अध्यापन से जुड़े विषयों पर निर्णय अटके होने का मामला भी उठाया है। जावडेकर ने विश्वविद्यालय में जल्द ही कुलपति की नियुक्ति का आश्वासन दिया है। साथ ही विश्वविद्यालय में विजिटर नॉमिनी की नियुक्ति भी शीघ्र कर दी जाएगी। बलूनी ने जावडेकर के सामने संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार में छात्रावास बनाने का मामला भी उठाया। जावडेकर ने इस पर भी अपनी सहमित जताई है। बाद में बलूनी ने तीनों विषयों पर तत्काल कार्रवाई के आश्वासन के लिए केंद्रीय मंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उपरोक्त तीनों महत्वपूर्ण कार्यो पर मंत्री की स्वीकृति मोदी सरकार की त्वरित और जनोन्मुखी सरकार का प्रतिबिम्ब है।

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