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दो लाख राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग पर बड़ा समाचार, शासनादेश जारी

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नवीन समाचार, देहरादून, 21 जनवरी 2019। उत्तराखंड सरकार ने बजट सत्र से पहले कर्मचारियों को बहुत बड़ी सौगात दी है। त्रिवेंद्र सरकार ने दो लाख कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत लागू सातवें वेतनमान का एरियर भुगतान करने का आदेश जारी कर दिया है। प्रदेश में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2016 से लागू हुईं हैं। कार्मिकों को नए वेतनमान का लाभ एक जनवरी 2017 से दिया गया।

सोमवार को अपर सचिव (वित्त) अरुणेंद्र सिंह चौहान ने इसका शासनादेश जारी कर दिया। बकाया एरियर का भुगतान आयकर की कटौती के साथ एक फरवरी से कर्मचारियों के भविष्य निर्वाह निधि (जीपीएफ) में जमा किया जाएगा। शासनादेश के मुताबिक जमा राशि सामान्य स्थितियों में एक वर्ष से पूर्व नहीं निकाली जाएगी। जिन कार्मिकों का जीपीएफ खाता नहीं होगा, उन्हें आयकर कटौती करके नकद भुगतान किया जाएगा। एक जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक के अवशेष वेतन को दो किस्तों में दिया जाएगा। एरियर की पहली किस्त वर्ष 2017-18 के दौरान जारी की गई। एक जुलाई 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक की अवधि के अवशेष एरियर का भुगतान एक फरवरी 2019 से देने का निर्णय लिया गया है।

यह भी पढ़ें : नियमित कर्मचारियों के पदों को व्यक्त मान कर उन पर सीधी भर्ती से भरे जाने के आदेश पर रोक

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जनवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 2016 की विनियमितीकरण नियमावली निरस्त होने के बाद राज्य मंत्रिमंडल के इस नियमावली के तहत नियमित कर्मचारियों के पदों को रिक्त मानकर उन पर सीधी भर्ती से भरे जाने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। राज्य मंत्रिमंडल के इस फैसले से राज्य के करीब 1200 कर्मियों पर नौकरी गंवाने की तलवार लटक गयी थी, जबकि अब न्यायालय के इस आदेश से उन पर लटकी तलवार फिलहाल हट गई है। न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद इन पदों को विज्ञापित करने के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि सुशीला तिवारी अस्पताल की ममता डंगवाल सहित 27 अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि उच्च न्यायालय ने नियमावली को रद्द कर दिया था। इसके बाद 7 जनवरी को राज्य मंत्रिमंडल ने इस नियमावली के तहत भर्ती नियमित कर्मचारियों के पदों को रिक्त मानते हुए उन्हें सीधी भर्ती से भरने एवं इस हेतु विज्ञापन जारी करने का निर्णय लिया है।

यह भी पढ़ें : नए साल पर 2 लाख से ज्यादा राज्य कर्मियों को 667 करोड़ की बड़ी सौगात देगी सरकार !

नवीन समाचार, देहरादून, 6 जनवरी 2019 । प्रदेश के दो लाख से ज्यादा कार्मिकों के लिए नया वर्ष नई सौगात लेकर आया है। आखिरकार सरकार उनकी मुराद पूरी करने जा रही है। उन्हें सातवें वेतनमान के बकाया एरियर के साथ ही भत्तों का तोहफा भी मिलेगा। सातवें वेतनमान के भत्तों के निर्धारण को लेकर वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट सब कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। यह रिपोर्ट अगली कैबिनेट में रखी जाएगी।  सूत्रों की मानें तो उत्तरप्रदेश ने नए वेतन में मकान किराया भत्ते को मूल वेतन का 20 फीसद और हिमाचल प्रदेश ने 10 फीसद तक रखा है। उत्तराखंड यदि भत्ते को 20 फीसद तक रखता है तो उसे 55 करोड़ और 30 फीसद की स्थिति में 83 करोड़ का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। वहीं नए वेतनमान के सभी भत्तों को मिलाया जाए तो कुल सालाना आर्थिक बोझ 367 करोड़ तक पड़ेगा। यानी उक्त दोनों तोहफे कर्मचारियों को देने की स्थिति में राज्य सरकार को 667 करोड़ का अतिरिक्त खर्च उठाना होगा। सातवें वेतनमान का बकाया एरियर और भत्तों की मांग को लेकर राज्य के कर्मचारी लंबे समय से आंदोलनरत सरकारी, सार्वजनिक निगमों-उपक्रमों के साथ ही विभिन्न अ‌र्द्धसरकारी संस्थानों के कर्मचारियों के तमाम संगठनों के संयुक्त मोर्चा की मांगों पर झुकते हुए राज्य सरकार ने लोकसभा चुनाव की दहलीज पर दस्तक देने से ऐन पहले सरकारी कार्मिकों के असंतोष को दूर करने की ठान ली है। कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ एक जनवरी 2016 से लागू किया गया है। एक जनवरी 2017 से सातवें वेतन का बकाया एरियर का भुगतान कर्मचारियों को किया जा चुका है। अब एक जनवरी 2016 से लेकर 31 दिसंबर, 2016 तक एरियर का भुगतान होना बाकी है। यह रकम छोटी-मोटी नहीं, बल्कि 300 करोड़ के करीब है। इसके लिए सरकार ने जरूरी बंदोबस्त कर लिए हैं। इस संबंध में जल्द आदेश जारी किए जाएंगे। वहीं, सातवें वेतनमान के भत्तों को देने की हिम्मत भी सरकार जुटा रही है। वित्त मंत्री की अध्यक्षता में सब कमेटी की रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है। इस रिपोर्ट को अगली कैबिनेट बैठक में रखा जाना तकरीबन तय है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक सब कमेटी ने पड़ोसी सातवें वेतनमान के भत्तों (मकान किराया भत्ता, महंगाई भत्ता व यात्रा भत्ता) को लेकर पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तरप्रदेश के फार्मूले का भी अध्ययन किया। इसमें सबसे अहम मकान किराया भत्ते का पेच है। राज्य कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की भांति भत्ते नहीं दिया जाना तकरीबन तय माना जा रहा है। संपर्क करने पर वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि उक्त दोनों मामलों को अगली कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। (रविंद्र बड़थ्वाल )

यह भी पढ़ें : आम चुनाव पर प्रदेश के अधिकारियों-कर्मचारियों की आम हड़ताल की योजना

-उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच का 2 से आंदोलन का ऐलान
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 दिसंबर 2018। प्रदेश के सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान आम हड़ताल करने की तैयारी है। या कहें कि चुनाव से पहले अपनी मांगों पर सरकार पर दबाव बनाने की योजना है। इसी कड़ी में उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच ने आगामी 2 जनवरी से अपनी सात सूत्रीय मांगों पर आंदोलन का ऐलान कर दिया है। उनकी मांगों में प्रदेश के कार्मिकों को केंद्र के समान समस्त भत्ते तत्काल अनुमन्य किये जाने, यू-हेल्थ कार्ड की सुविधा देने व देश-प्रदेश के उच्च स्तरीय सुविधा सम्पन्न चिकित्सालयों को इसमें शामिल करने, प्रदेश के समस्त कार्मिकों को पूरे सेवाकाल में न्यूनतम तीन पदोन्नति अनिवार्य करने, अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण की पूर्ववर्ती व्यवस्था को यथावत लागू रखने, 1 अक्तूबर 2005 के बाद नियुक्त कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था शीघ्र बहाल करने तथा स्थानांतरण अधिनियम में राज्य के कार्मिकों के सेवानिवृत्ति के अंतिम वर्ष में उसके ऐच्छिक स्थान पर अनिवार्य रूप से स्थानांतरण, पद स्थापना का प्राविधान करने एवं पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा शासन को प्रस्तुत की गयी रिपोर्ट को कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसे संज्ञान में न लेने की मांगें शामिल की गयी हैं।
आंदोलन के तहत दो जनवरी 2019 को समस्त कार्मिकों से एक दिन का व्यक्तिगत अवकाश लेकर सभी जिलों में धरना तथा डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने, 15 से 31 जनवरी तक पूरे प्रदेश में जनजागरण अभियान चलाने एवं जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भेजने एवं चार मई को सभी जिलों के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा राजधानी देहरादून जाकर विशाल महारैली के माध्यम से सचिवालय का घेराव व मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर उसी दिन आम हड़ताल की घोषण करने का कार्यक्रम तय किया गया है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा लोक सभा का कार्यकाल 25 मई 2019 को समाप्त हो रहा है, और इससे पूर्व मई माह में ही चुनाव होने की संभावना है। मालूम हो कि 16वीं लोकसभा के लिए चुनाव 7 अप्रैल से 12 मई 2014 के बीच हुए थे और 16 मई को चुनाव परिणाम आये थे तथा 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मौजूदा सरकार गठित हुई थी। इसी कड़ी में आगामी 2 जनवरी को मुख्यालय में डीएस कार्यालय के सम्मुख सामूहिक धरना कार्यक्रम में भाग लेने को कहा गया है।

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