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कर्मचारियों के उत्पीड़न के खिलाफ नैनीताल में बना एक और मोर्चा, 25 संगठन साथ आए

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10वीं-12वीं में विदुषी, तनीषा व देव बवाड़ी ने किया टॉप


नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जुलाई 2020। जिला-मंडल मुख्यालय में कर्मचारियों के खिलाफ हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ 25 कर्मचारी संगठन एक साथ आ गए हैं। इसके साथ ही कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के नाम से एक नया संगठन अस्तित्व मंे आ गया है। सेवानिवृत्त कर्मचारी नेगा बहादुर बिष्ट को मोर्चे का मुख्य संयोजक बनाया गया है। संयुक्त मोर्चा ने कुमाऊं विश्व विद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के साथ गत दिवस छात्र-नेताओं द्वारा की गई अभद्रता की निंदा करते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है तथा कुलपति से वार्ता करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा नगर के अम्तुल्स पब्लिक स्कूल के कर्मचारियों को अप्रैल माह से वेतन नहीं देने पर रोष व्यक्त करते हुए विद्यालय प्रबंधन से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को समय से न्यूनतम वेतन देने को कहा गया। साथ ही आगे मोर्चे का शीघ्र विस्तार करने की बात कही गयी।
नगर के संघ भवन में नये मोर्चे के गठन के मौके पर मिनिस्टीरियल फेडरेशन, वन विभाग, शिक्षा विभाग, कोषागार, सिचाई, लोनिवि, कुमाऊं विश्व विद्यालय, ग्राम पंचायत, अमीन संघ सहित कई संगठनों के जगमोहन रौतेला, भगवत जंतवाल, त्रिलोक मेहरा, कुंवर जलाल, पूरन बिष्ट, गौरव पांडे, गिरीश जोशी, उमेश सनवाल, असलम अली, ललित मोहन पांडे, संजय कुमार, लाल सिंह नेगी, राजेंद्र बिष्ट, राजेंद्र कुमार, जीवन सिंह रावत, जगदीश कांडपाल, सुरेश पांडे, मोहन पंत, दीपक बिष्ट, इंद्र सिंह रावत, नीरज साह, पूरन रावत, रमेश लाल, मदन गैड़ा व नंदा बल्लभ पालीवाल आदि कर्मचारी नेता मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : कर्मचारियों को रास नहीं आ रही सख्ती, लिखा पत्र…

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जुलाई 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को सख्ती रास नहीं आ रही है। विश्वविद्यालय शिक्षणेतर कर्मचारी महासंघ ने विश्वविद्यालय मुख्यालय के एक अधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण मांगने पर इस अधिकारी पर कार्मिकों का उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। साथ ही प्रशासनिक भवन में कार्मिकों की उपस्थिति के लिए ‘फेस डिटेक्शन मशीन’ लगाने पर भी कार्मिकों को आपत्ति है। उन्होंने इस बाबत जारी कार्यालयी आदेश को निरस्त करने तथा कार्यालय समय साढ़े नौ से साढ़े पांच बजे तक करने के आदेश पर भी आपत्ति जताते हुए इसे संशोधित कर 10 से 5 बजे तक करने की मांग की है। महासंघ के अध्यक्ष भूपाल सिंह करायत और महामंत्री लक्ष्मण रौतेला ने इस बारे में कुलसचिव केआर भट्ट को पत्र लिखकर 15 दिन के भीतर इन समस्याओं का समाधान नहीं करने पर आंदोलन पर जाने की चेतावनी दी है। कुलसचिव केआर भट्ट ने कहा कि कुलपति के समक्ष कर्मचारियों के प्रत्यावेदन को रखा जाएगा।

यह भी पढ़ें : सरकार के राज्य में रोजगार दिलाने के फरमान के बीच राज्य में कार्यरत 195 कर्मियों को बेरोजगार करने की तैयारी

नवीन समाचार, पंतनगर, 2 जुलाई 2020। प्रदेश सरकार के लोगों को राज्य में रोजगार देने के दावों के बीच राज्य की एक फैक्टरी ने श्रम न्यायालय के आदेशों को दरकिनार करते हुएराज्य के 195 रोजगारशुदा लोगों को बेरोजगार करने की तैयारी कर ली है। इन लोगों को 10 दिन के भीतर देश में कोरोना के सर्वाधिक मामलों की दृष्टि से महाराष्ट्र के बाद दूसरे स्थान पर चल रहे तमिलनाडु राज्य की अपनी चेन्नई यूनिट में जाने का फरमान थमाते हुए अप्रत्यक्ष तौर पर ऐसा न करने पर नौकरी से बाहर करने की चेतावनी दे दी गई है।
मामला पंतनगर सिडकुल के सेक्टर दो प्लॉट-14 स्थित इंटरआर्क बिल्डिंग प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का है। कंपनी द्वारा अपने नोटिस बोर्ड पर चस्पा किये गये आदेश में कहा है कि उन्हें 27 जून को कंपनी की दूसरी यूनिट में जाने के लिए नाम मांगे थे, किंतु किसी भी कर्मचारी ने इस हेतु अपना नाम नहीं दिया। इसके बावजूद कंपनी ने 195 कर्मचारियों को ‘एक से 10 जुलाई के बीच’ चेन्नई यूनिट में ड्यूटी ज्वॉइन करना ‘आवश्यक’ बताने का आदेश जारी कर दिया हैं। कर्मचारी अनिच्छा के कारण इन नोटिस को स्वीकार नहीं कर रहे, कुछ ने तो आदेश पत्र लेते हुए पत्र में अपनी अनिच्छा भी साफ जाहिर कर दी है। ऐसे में उनके स्थायी पतों पर भी यह पत्र भेजे गए हैं। इस पर कंपनी की पंजीकृत यूनियन के अध्यक्ष दलजीत सिंह का कहना है कि कंपनी का यह कदम पंजीकृत यूनियन के खिलाफ है। पहले भी यूनियन के महामंत्री व कार्यकारिणी सदस्यों को हटाया जा चुका है। अब भी यूनियन से जुड़े पदाधिकारियों को भी चेन्नई भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों के अनुसार बिना कर्मचारियों की स्वीकृति के ऐसा कदम नहीं उठाया जा सकता है। इस बारे में श्रम न्यायालय काशीपुर में वाद भी लंबित हैं। इस बारे में कंपनी का पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया।

यह भी पढ़ें : कोरोना में सहयोग कर रहे कर्मचारी संगठनों ने दी अन्न-जल त्यागने व पेड़ लगाकर विरोध करने की धमकी

-लैब तकनीशियनों ने शुरू किया विरोध प्रदर्शन, दी अन्न-जल त्यागने की धमकी
नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जुलाई 2020। बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में लैब तकनीशियनांे ने प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर आज से 5 जुलाई तक अपनी मांगों को लेकर हाथों पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। जिला सचिव प्रदीप राणा के अनुसार अभी तक उनका कैडर पुर्नगठन व सेवा नियमावली ना बनने के कारण उन्हें जोखिम भत्ता तथा 10 वर्ष की सेवा पूरी होने पर भी एमएसीपी का लाभ नहीं दिया जा रहा है। जबकि केंद्र सरकार द्वारा पूर्व से ही लैब तकनीशियन को जोखिम भत्ता दिया जा रहा है। इसके अलावा वे एमएससीपी लागू ना होने से भी आक्रोशित हैं। आगे उन्होंने मांगें पूर्ण होने पर पूरे प्रदेश के लैब तकनीशियनों के अन्न व जल का त्याग कर सामूहिक रूप के उपवास पर जाने की चेतावनी दी है। उन्होंने याद दिलाया कि वे कोरोना महामारी के वर्तमान दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर, इतनी गर्मी में घंटों पीपीई किट पहनकर और अपना घर छोड़कर आवश्यक सेवाओं में कार्य कर रहे हैं। इस दौरान जिला चिकित्सालय में रजनीश मिश्र, गुंजन पंत, दलवीर राणा, मनोज पाल आदि विरोध-प्रदर्शन में शामिल रहे।

केएमवीएन कर्मचारी महासंघ ने दी 6 सूत्रीय मांग पत्र पर 7 से आंदोलन की चेतावनी

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जुलाई 2020। कुमाऊं मंडल विकास निगम कर्मचारी महासंघ ने निगम प्रशासन को 1 सप्ताह का नोटिस देकर संविदा कर्मचारियों की वरीयता सूची बनाने, वेतन बढ़ोत्तरी व नियमितीकरण सहित निगम में चतुर्थ से तृतीय श्रेणी में विभागीय पदोन्नतियां करने, कर्मचारियों को पदनाम देने सहित 6 सूत्री मांगपत्र दिया है। महासंघ के अध्यक्ष दिनेश गुरूरानी ने कहा कि सरकार से मांग की गई है कि निगम में स्थित क्वारंटाइन केयर सेंटरों को हटाया जाए। साथ ही कहा कि यदि निगम प्रशासन 6 जुलाई तक मांगों का वार्ता के माध्यम से समाधान नही निकालता है तो 7 जुलाई से निगम के समस्त कर्मचारी अपने कार्यालय में काला फीता बांधकर विरोध दर्ज करेंगे। साथ ही समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए 3 जुलाई को समस्त निगम कर्मचारी पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘एक पौधा धरती मां के नाम’ के तहत पौधारोपण के साथ-साथ वृहद स्तर पर सफाई अभियान चलाएंगे। इससे पूर्व भी महासंघ द्वारा इस प्रकार का कार्यक्रम चलाया गया है।
उन्होंने कहा कि शासनादेश के तहत सभी विभागों में पदोन्नतियां की जा रही हैं, लेकिन निगम प्रशासन द्वारा शासनादेश को भी दरकिनार किया जा रहा है। महासंघ के संयोजक प्रकाश चंदोला ने कहा कि निगम प्रशासन कर्मचारियों की धैर्य की परीक्षा ले रहा है। कर्मचारी नेता मंजुल सनवाल ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करें अन्यथा आंदोलन को तेज किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट ने पूछा-किस आधार पर कर्मचारियों के एक दिन के वेतन की कटौती करना चाहती है सरकार

नवीन समाचार, देहरादून, 25 जून 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कोरोना संकट के बीच कर्मचारियों के वेतन में हर माह एक दिन की कटौती पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने कि दीपक बेनीवाल और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से दो दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश देते हुए पूछा है कि उसने किस अधिकार के तहत यह आदेश पारित किया है। मामले में अगली सुनवाई 26 जून यानी शुक्रवार को होगी।
उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने 29 मई को एक आदेश जारी कर मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत तक राज्य सरकार के सभी विभागों, सरकारी, शासकीय सहायक प्राप्त शिक्षण, प्राविधिक शिक्षण संस्थान, निगम, निकायों, सार्वजनिक उपक्रम और स्वायत्तशासी संस्थाओं, प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों के एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करने की बात कही थी।

यह भी पढ़ें : 50 की उम्र में सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति ! गाइडलाइन हो रही तय..

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 जून 2020। राज्य सरकार की सेवाओं में कार्यरत 50 वर्ष की आयु प्राप्त सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए गाइडलाइन तय कर दी गई है। 15 जनवरी तक नियुक्ति अधिकारी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश जारी कर देगा। नवंबर तक स्क्रीनिंग कमेटियों की बैठक और अन्य प्रक्रिया पूरी होगी। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कार्मिक विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिए हैं।

सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों प्रभारी सचिवों, विभागाध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों को जारी आदेश के मुताबिक, सरकार ने सरकारी सेवकों के स्तर के हिसाब से स्क्रीनिंग कमेटियों का गठन किया है। आदेश के मुताबिक वित्तीय हस्तपुस्तिका में नियुक्ति अधिकारी 50 वर्ष व इससे अधिक की आयु वाले सरकारी सेवक को बिना कोई कारण बताए तीन महीने के नोटिस अथवा तीन महीने का वेतन देकर जनहित में अनिवार्य सेवानिवृत्त करने की व्यवस्था है।

स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश पर नियुक्ति प्राधिकारी विभागीय मंत्री/मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ही आदेश जारी करेगा। सरकारी सेवक के सेवाकाल के सभी सेवा दस्तावेजों को देखा जाएगा। विशेषरूप से अंतिम 10 वर्ष के अभिलेखों पर ध्यान दिया जाएगा। कार्मिक की समीक्षा कार्यदक्षता और सत्यनिष्ठा के आधार पर की जाएगी।
स्क्रीनिंग कमेटी का कोई विधिक स्टेटस नहीं होगा। 31 मार्च तक सभी प्रशासनिक विभाग के सचिवों के माध्यम से अनिवार्य सेवानिवृत्ति के प्रस्ताव कार्मिक विभाग को उपलब्ध कराए जाएंगे। इस मामले में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जाएगी। ‍

यह भी पढ़ें : भारतीय मजदूर संघ ने पीएम-सीएम को भेजा ज्ञापन, होटल-स्कूलों पर लगाया वेतन न देने का आरोप

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 मई 2020। भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय आह्वान पर बृहस्पतिवार को नैनीताल के पदाधिकारियों ने एसडीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को ‘मजदूर-श्रमिक विरोधी दिवस मनाये जाने के संदर्भ में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व करोना महामारी से जूझ रहा है जिससे सभी राष्ट्रों के उद्योग, व्यापार अर्थव्यवस्था, यातायात, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, होटल, रिक्शा, रेहड़ी आदि प्रभावित हुए हैं। इन सभी व्यवसायों से भारत वर्ष का जमीनी स्तर पर जुडा हुआ मजदूर अधिक प्रभावित हुआ है। वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय मजदूर संघ मजदूरों के हितों में निम्न बिंदुओ की ओर ध्यान आकर्षित करता है। प्रवासी मजदूर जो अपने मूल गांव या राज्यों में वापस हुए हैं उन्हें स्थानीय स्तर के रोजगार खोलकर रोजगार दिया जाय।
साथ ही सभी विभागों-निगमों व उद्योगोें आदि के नियमित व संविदा सहित सभी तरह के कर्मियों को मार्च व अप्रैल माह का पूर्ण वेतन देने, श्रम कानूनों मे कार्य की अवधि 8 घंटे के स्थान पर 12 घंटे किये जाने, गुजरात, उतर प्रदेश, मध्य प्रदेश में श्रमिकों के श्रम कानूनो को तीन साल के लिए प्रतिबन्धित किये जाने का भी संगठन ने घोर विरोध जाहिर किया।

होटलों-स्कूलों पर कर्मचारियों को वेतन न देने का आरोप
नैनीताल। भारतीय मजदूर संघ ने नगर के होटलों व विद्यालयों के बाबत समस्याओं का ज्ञापन भी एसडीएम को सौंपा। ज्ञापन में नगर के होटल वैलवेडियर खुर्पाताल के होटल डाइनेस्टी व सैंट जेवियर स्कूल आदि के प्रवधंको द्वारा अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं देने की शिकायत भी की गई है। ज्ञापन सोंपने वालों में संघ के जिला मंत्री विरेन्द्र खंकरियाल, जिला संगठन मंत्री मदन सिंह गैडा, होटल कर्मचारी संघ के महामंत्री नरेंद्र पपोला, नासिर खान, विकास जोशी, प्रेम मोहन राणा, जगदीश प्रकाश, सुरेश चन्द्र, पुष्पा रावत, गीता भट्ट व हररश विश्वकर्मा आदि शामिल रहे।
उधन होटलों एवं विद्यालयों के संचालकों का कहना है कि उन पर कोरोना व लॉक डाउन की विषम परिस्थितियों में वेतन, बिजली-पानी के बिल सहित कई तरह के नियत खचों का बोझ है, वहीं विद्यालयों पर फीस न लेने का दबाव भी है। ऐसे में वे कैसे सब कुछ संयत रख सकते हैं, यह बड़ा यक्ष प्रश्न है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के होटल कर्मचारियों के वेतन में कथित कटौती बाद अब रामनगर के 51 रिजॉर्ट कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार

नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अप्रैल 2020। देश में कोरोना की महामारी व लॉक डाउन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और श्रम मंत्रालय के दिशा निर्देशों को ताक पर रखते हुए रामनगर के एक रिजॉर्ट समूह द्वारा बिना नोटिस दिए अपने 51 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकालने का पत्र जारी कर दिया है। कंपनी की ओर से जारी बर्खास्तगी के लिखित आदेश कर्मचारियों ने लेने से इनकार कर दिये तो इन्हें स्पीड पोस्ट से भेजने की बात सामने आई है। निकाले जा रहे कर्मचारियों में 21 स्थायी और 27 कैजुअल व तीन कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी हैं। उन्होंने जिला प्रशासन व राज्य सरकार से हस्तक्षेप करके रोजगार बहाल करने की मांग की है।
इस मामले में भाजपा नेता गणेश रावत ने कहा कि इस मामले को स्थानीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट, उपश्रमायुक्त कुमाऊं, मुख्यमंत्री कार्यालय के अलावा श्रम मंत्री हरक सिंह रावत व कुमाऊं कमिश्नर को भी अवगत कराया जा रहा है। उल्लेखनीय गत दिवस नगर के एक होटल समूह के दो होटलों के कर्मचारियों ने प्रबंधन पर मार्च माह का 10 दिन का वेतन काटने का आरोप लगाया था।

यह भी पढ़ें : होटल कर्मियों का 10 दिन का वेतन काटने का आरोप, प्रबंधन बोला-भलाई के बदले मिली बुराई

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अप्रैल 2020। एक माह से अधिक लंबे हो चुके लॉक डाउन के दौरान कहीं लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है, तो कहीं व्यवहारिक दिक्कतें भी बढ़ने लगी हैं। नगर के एक ही समूह के दो होटलों के करीब ढाई दर्जन होटल कर्मियों ने मल्लीताल कोतवाली पुलिस में होटल प्रबंधन के खिलाफ मार्च माह का 10 दिन का वेतन काटकर देने की शिकायत दर्ज कराई है। वहीं होटल प्रबंधन का भी अपना तर्क है। उनका कहना है भलाई के बदले बुराई मिल रही है। होटल का उच्च प्रबंधन मुख्यालय में बैठता है। लॉक डाउन की वजह से होटल का लेखा तथा अन्य विभाग की कार्य नहीं कर पा रहे हैं। मार्च माह में लॉक डाउन-जनता कर्फ्यू लागू होने तक के वेतन की मुख्यालय से अनुमति ले ली गई थी। आगे उच्च प्रबंधन को देखना है। जब सरकार अपने कर्मचारियों के भत्तों में कटौती करने को मजबूर हो चुकी है तो निजी संस्थानों की क्या बिसात है।
इधर नगर कोतवाल अशोक कुमार सिंह का कहना है कि दो होटलों के करीब 30 कर्मियों ने मार्च माह का 20 दिन का वेतन ही देने का आरोप लगाया है। होटल प्रबंधन से वार्ता की जा रही है।
इधर नगर में एक-दो स्कूलों के द्वारा अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए एसएमएस भेजे जाने की भी सूचना है। अभिभावक इसकी शिकायत प्रेस एवं प्रशासन में कर रहे हैं। समस्या यह भी है कि स्कूल हों चाहे होटल, उनके सामने कर्मचारियों को न निकालने एवं उन्हें समय पर वेतन देने की चुनौती भी है, जबकि वे फीस लेकर आय अर्जन नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में सभी से धैर्य बनाये रखने की अपील की जा रही है।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड सरकार ने कर्मचारियों व पेंशन भोगियों के लिए स्थगित किया महंगाई भत्ता

नवीन समाचार, देहरादून, 24 अप्रैल 2020। केंद्र सरकार के बाद अब उत्तराखंड सरकार ने भी अपने राज्य कर्मचारियों व पेंशन भोगियों के लिए डीए यानी महंगाई भत्ता 2021 तक स्थगित कर दिया है। वित्त सचिव अमित नेगी द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि कोरोना विषाणु के संकट के दृष्टिगत 1 जनवरी 2020 और 1 जनवरी 2021 से देय महंगाई भत्ते व महंगाई राहत की अतिरिक्त किस्त का भुगतान नहीं किया जाएगा। तथापि मौजूदा 17 फीसद की दरों पर महंगाई भत्ते व महंगाई राहत का भुगतान अग्रिम आदेशों तक किया जाता रहेगा।
यह भी साफ किया गया है कि यदि एक जुलाई 2021 से देय महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की भावी किस्तों को जारी करने का निर्णय लिया जाता है तो 1 जनवरी 2020 और 1 जनवरी 2021 से प्रभावी देय महंगाई भत्ते व महंगाई राहत की दरों को भावी प्रभाव से लागू कर दिया जाएगा और उन्हें एक जुलाई 2021 से प्रभावी संचयी संशोधित दर में सम्मिलित कर लिया जाएगा। लेकिन एक जनवरी 2020 से 20 जून 2021 तक की अवधि का कोई बकाया भुगतान नहीं किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : मात्र 1000 मानदेय पाने वाले कर्मियों ने कहा, 13 माह का लंबित वेतन दो-एक माह का राहत कोष में देंगे

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अप्रैल 2020। जनपद के मनरेगा कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कहा है कि उन्हें वित्तीय वर्ष 2018-19 के पांच माह एवं वर्ष मौजूदा वित्तीय वर्ष के 8 माह यानी कुल 12-13 माह का मानदेय नहीं मिला है। इससे उनके परिवारों की स्थिति दयनीय है। यदि सरकार उन्हें यह धनराशि देती है तो वे एक माह का मानदेय प्रधानमंत्री राहत कोष में दान करेंगे। बताया कि उनका मानदेय बढ़ाकर भी मात्र एक हजार रुपए प्रतिमाह किया गया है। कहा कि सरकार यदि इतना मानदेय भी नहीं सकती तो उनके बच्चों को ही मार दिया जाए ताकि वे भूखे-प्यासे न मरें। ज्ञापन भेजने वालों में अध्यक्ष जितेंद्र खोलिया, गिरीश जोशी, नीरज जलाल, नवीन चंद्र, राम सिंह आदि शामिल हैं।

यह भी पढ़ें : कोरोना से फ्रंटलाइन में लड़ रहे प्रदेश के 68 हजार से अधिक कर्मचारियों का 4-4 लाख का बीमा कराएगी सरकार

-मीडिया कर्मियों के लिए भी अलग से होगी व्यवस्था
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 मार्च 2020। कोरोना विषाणु के संक्रमण से बचाव कार्यों में फ्रंटलाईन में कार्यरत 68457 कार्मिकों को 4-4 लाख का बीमा लाभ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसकी स्वीकृति दी है। 1 वर्ष की अवधि के लिए इस पर 17.02 करोङ रूपए का व्यय आएगा। इसका वहन मुख्यमंत्री राहत कोष से किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों का बीमा केन्द्र सरकार के स्तर से किया जा चुका है। राज्य सरकार के स्तर पर बीमा लाभान्वितों में 22523 पुलिस कार्मिक, 7988 ’सफाईकर्मी’ 14595 आंगनबाङी कार्यकत्रियां, 14376 आंगनबाड़ी सहायिका, 4924 मिनी आंगनबाड़ी सहायिका, 464 सुपरवाईजर, 78 सीडीपीओ, 9 डीपीओ, जीएमवीएन व केएमवीएन के 3000 कार्मिक, एसईओसी-डीईओसी के 500 कार्मिक शामिल हैं। मीडिया कर्मियों के लिए अलग से व्यवस्था की जा रही है।
इसके अलावा एक अन्य निर्णय के अनुसार कोरोना से बचाव के दृष्टिगत निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में ओपीडी खुली रहेंगी। ताकि आमजन अन्य बिमारियों की दशा में अपना इलाज सुगमता से करा सकंे। सरकार निजी चिकित्सा संस्थानो को हर प्रकार की सहायता देगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को निर्देशित किया कि निजी अस्पतालों में ओपीडी की व्यवस्था सही रखने में सहयोग करें। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि कोरोना से लड़ाई में सरकार का पूरा सहयोग किया जाएगा। यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं पूरे देश और समाज की है।

यह भी पढ़ें : सीधी भर्ती की नई व्यवस्था होगी लागू, सरकार ने अनुसूचित वर्ग को लगाया मरहम

नवीन समाचार, देहरादून, 19 मार्च 2020। उत्तराखंड सरकार ने सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त करने के साथ ही अनुसूचित वर्ग के असंतोष पर भी मरहम लगाने वाला एक फैसला किया है। सरकार ने सीधी भर्ती के लिए आरक्षण के पुराने रोस्टर को बहाल कर दिया है। यानी सितंबर 2019 के रोस्टर को बदलते हुए पुराने रोस्टर की व्यवस्था बहाल की गई है। इसमें अनुसूचित जाति को पहले क्रमांक में रखा गया है। इसके साथ ही सरकार ने आरक्षित वर्ग के बैकलॉग पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं। हालांकि, सरकार को पुराने रोस्टर का भी नए सिरे से निर्धारण करना होगा क्योंकि अब इसमें आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के आरक्षण की भी व्यवस्था की गई है। शासन द्वारा ताजा जारी किए आदेश में कहा है कि अब पुरानी व्यवस्था के अनुसार सीधी भर्ती का रोस्टर तैयार किया जाएगा। जल्द दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने वर्ष 2019 में पुरानी रोस्टर प्रक्रिया में बदलाव किया था। इस रोस्टर में सामान्य वर्ग को पहले क्रम पर रखते हुए आरक्षण प्रतिशत के हिसाब से क्रमवार रोस्टर चार्ट जारी किया गया था। इसमें अनुसूचित जाति को आरक्षण के लिहाज से छठवें, अन्य पिछड़ा वर्ग को आठवें, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 वें और अनुसूचित जनजाति को 25 वें क्रम पर रखा गया था। इसका अनुसूचित जाति-जनजाति के कार्मिक लगातार विरोध कर रहे थे। प्रदेश में सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों के लिए 19 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को 10 प्रतिशत तथा अनुसूचित जनजाति के लिए चार प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान किया गया है। इसके अलावा क्षैतिज आरक्षण की गणना में प्रदेश की महिलाओं को 30 प्रतिशत, भूतपूर्व सैनिकों को 5 प्रतिशत, दिव्यांगों को 4 प्रतिशत और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों को दो प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में आखिरकार पदोन्नति में आरक्षण खत्म, पदोन्नति पर लगी रोक भी हटी….

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 मार्च 2020। उत्तराखंड में आखिरकार पदोन्नति में आरक्षण को खत्म कर दिया गया है। सरकार ने पदोन्नति पर लगाई गई रोक को हटा दिया है, जिसके बाद अब बिना आरक्षण के पदोन्नति दी जाएगी। वहीं, शासन से मिले इस आदेश के बाद लंबे समय से आंदोलन कर रहे जनरल-ओबीसी कर्मचारियों की हड़ताल भी खत्म हो गई है। 

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में जनरल-ओबीसी इमप्लॉयज एसोसिएशन के कर्मचारी दो मार्च से पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल पर थे। कर्मचारियों की मांग थी कि पदोन्नति में लगी रोक हाटाने, आरक्षण खत्म करने और आरक्षण रोस्टर में की गई नई व्यवस्था को यथावत रखा जाए। उनका आंदोलन लगातार उग्र होता देख राज्य सरकार की ओर से उन्हें हड़ताल से वापस बुलाने की काफी कोशिशें हुई, लेकिन बात नहीं बन पाई। एसोसिएशन लगातार अपनी मांगों पर अड़ा रहा। आखिरकार बुधवार को कर्मचारियों का आंदोलन रंग लाया और पदोन्नति में आरक्षण को खत्म कर दिया गया। साथ ही पदोनत्ति पर लगी रोक को भी हटा दिया गया है, जिसके बाद से ही कर्मचारियों का आंदोलन समाप्त जनरल ओबीसी एम्प्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक जोशी ने हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की है। गुरुवार से सभी कार्मिक अपने-अपने कार्यालयों में जाएंगे। इसके साथ ही आम जनता को परेशानियों से निजात मिल गई है।

यह भी पढ़ें : डीएम ने लगाई सभी सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक, हड़ताल पर भी पाबंदी, हड़ताली कर्मचारियों ने यूं निकाला तोड़..

-सिनेमा हॉल, मल्टी प्लेक्स, मॉल, क्लब, डिस्को, तरणताल (स्विमिंग पूल), व्यायामशाला (जिम), कॉचिंग संस्थान, नर्सिंग संस्थान, समस्त शैक्षिक तथा तकनीकी संस्थान, हाट बाजार सहित बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने की संभावना वाले समस्त स्थानों को 31 मार्च तक के लिए बंद करने के आदेश

डीएम सविन बंसल

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 मार्च 2020। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते नैनीताल के डीएम सविन बंसल ने स्वास्थ्य महकमे के साथ ही जनपद के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अवकाश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत के स्तर से जारी आदेश के अनुसार उत्तराखंड राज्य के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के समस्त चिकित्सकों एवं कार्मिकों की समस्त सेवाओं को आवश्यक सेवाऐं घोषित करते हुए उनकी हड़ताल पर भी पाबन्दी लगा दी है। डीएम ने अपर सचिव के आदेश का संज्ञान लेते हुए जनपद की मुख्य चिकित्साधिकारी तथा चिकित्सा शिक्षा से संबंधित सभी अधिकारियों को संबंधित आदेश की जानकारी उपलब्ध करा ने कहा है।
इसके साथ ही डीएम बंसल ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उत्तराखण्ड शासन की अधिसूचना के क्रम में प्राप्त एडवाइजरी को जनपद में तत्काल प्रभाव से प्रभावी कर दिया है। डीएम ने जनपद के समस्त सिनेमा हॉल, मल्टी प्लेक्स, मॉल, क्लब, डिस्को, तरणताल (स्विमिंग पूल), व्यायामशाला (जिम), कॉचिंग संस्थान, नर्सिंग संस्थान, समस्त शैक्षिक तथा तकनीकी संस्थान, हाट बाजार सहित बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने की संभावना वाले समस्त स्थानों को 31 मार्च तक के लिए बंद करने के आदेश दिये हैं। इसके साथ ही डीएम ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित के विरूद्ध अधिसूचना के प्राविधानों के तहत कार्यवाही की जायेगी।

कोरोना के दृष्टिगत हड़ताली जनरल-ओबीसी कर्मचारियों ने अपनाया बैठने का नया तरीका

नैनीताल। कोरोना के संक्रमण एवं इसके दृष्टिगत सरकार के 40 से अधिक लोगों के एक स्थान पर एकत्र न होने के आदेशों का तोड़ निकालते हुए हड़ताली जनरल-ओबीसी कर्मचारियों ने हड़ताल के दौरान बैठक का नया तरीका निकाला है। मुख्यालय में मंगलवार को कर्मचारियों की हड़ताल 15वें दिन भी जारी रही। इस दौरान कर्मचारी करीब 40-40 के समूह में अलग-अलग दूर-दूर दरियां बिछाकर बैठे। साथ ही इस दौरान कोरोना कमोबेश सभी वक्ताओं के भाषणों में छाया रहा। वक्ताओं ने कहा कि सरकार कोरोना की आढ़ में उनके आंदोलन को तोड़ना चाहते हैं, किंतु वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं।

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-मुख्यालय में उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्प्लाइज यूनियन ने आवश्यक सेवाएं ठप करने की घोषणा के तहत जिला कोषागार, जिला विकास प्राधिकरण एवं कुमाऊं विवि में कार्य बाधित करने की की कोशिश

बृहस्पतिवार को नयना देवी मंदिर के लिए कूच करते हड़ताली कर्मचारी।

नवीन समाचार, नैनीताल/बागेश्वर, 12 मार्च 2020। पिछले दो मार्च से बेमियादी हड़ताल पर चल रहे उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्प्लाइज यूनियन ने बृहस्पतिवार को आज से आवश्यक सेवाएं बाधित करने की घोषणा पर अमल करने की कोशिश की। उन्होंने जिला कोषागार, जिला विकास प्राधिकरण एवं कुमाऊं विवि में कार्य बाधित करने की कोशिश की, साथ ही धरना स्थल मल्लीताल के पुराने घोड़ा स्टेंड पार्क से नयना देवी मंदिर तक जुलूस निकाल कर वहां राज्य सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए माता से प्रार्थना की।
इस दौरान हुई सभा व जुलूस में संयोजक बहादुर बिष्ट, भूपाल सिंह करायत, जगमोहन रौतेला, असलम अली, भगोत सिंह जंतवाल, नवल बिनवाल, उमेश सनवाल, गणेश बिष्ट, मनोज जोशी, जगदीश पपनै, अनिल जोशी, जयकृष्ण कांडपाल, कुंवर सिंह जलाल, प्रकाश पाठक, नंदा बल्लभ पालीवाल, हिमांशु जोशी, मीनाक्षी डंगवाल, कविता पांडे, रीता लोहनी, पुष्पा बिष्ट, ज्योत्सना पपोला, शकुंतला बिष्ट, सुकीर्ति राठौर, संगीता सती, गोपाल बिष्ट, गौरव पांडे, दीपक बिष्ट, संजय रौतेला, ललित उपाध्याय, पंकज पांडेय, हरीश उप्रेती, गौरा पांडे, आरसी पंत, प्रताप मनराल, मनमोहन असवाल, बीडी बवाड़ी, कमल भाकुनी, पूरन पाठक, हेमंत चंदोला व लोकेश वर्मा आदि कर्मचारी नेताओं ने विचार रखे।
अनुसूचित जाति के कर्मचारी ने जनरल-ओबीसी कर्मियों के आंदोलन का किया समर्थन naintal newsउधर बागेश्वर जनपद के कमेड़ीदेवी इंटर कॉलेज में तैनात माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी विजय कुमार ने गुरुवार को विकास भवन बागेश्वर में जनरल-ओबीसी कर्मचारियों के आंदोलन में पहुंचकर अलग ही पहल की। उन्होंने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण की कोई जरूरत ही नहीं है। अनुसूचित जाति के व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिलने के बाद उसके दस्तावेजों में सामान्य वर्ग दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति शब्द को ही हटा देना चाहिए, यह समाज को बांट रहा है। बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर ने दलित, गरीब, पिछड़े वर्ग के लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संविधान में सिर्फ दस साल के लिए आरक्षण की व्यवक्ता की थी। लेकिन राजनीति के कारण आरक्षण को लगातार आगे बढ़ाया जाता रहा। प्रमोशन में आरक्षण का मतलब ही नहीं होता है। उन्होंने कहा कि आरक्षण आर्थिक आधार पर लागू होना चाहिए। ‘एक राष्ट्र, एक जाति, एक धर्म’ के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए। तभी भविष्य में आने वाली पीढ़ी जातिवाद के बंधन में नहीं बंधेगी। उनके समर्थन आंदोलित एसोशिएशन के रवि जोशी, केसी मिश्रा, अनिल जोशी आदि ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 11 मार्च 2020। हाईकोर्ट ने उत्तराखंड जनरल-ओबीसी एम्प्लॉइज एसोसिएशन की प्रदेश में की जा रही हड़ताल के मामले में दायर जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कहा है कि सरकार हड़ताली कर्मचारियों पर कार्यवाही करने के लिए सक्षम है। कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि हड़ताल खुलवाने के प्रयास किया जा रहा है।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति रवि विजय कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार  देहरादून निवासी ललित कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड जनरल-ओबीसी इम्प्लाइज एसोसिएशन के करीब डेढ़ लाख कर्मचारी पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ दो मार्च से हड़ताल पर हैं। याचिका में कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से सभी राजकीय कार्य बाधित हो रहे हैं। याचिका में कहा कि हड़ताली कर्मचारियों द्वारा हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है । याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि या तो कर्मचारी अपनी हड़ताल वापस लें या हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाए। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्‍तारित कर दिया।

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-उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्प्लाइज यूनियन ने किया है 12 से आवश्यक सेवाएं ठप करने का ऐलान
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 मार्च 2020। उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्प्लाइज यूनियन पिछले दो मार्च से बेमियादी हड़ताल पर हैं। अभी उन्होंने आवश्यक सेवाएं बहाल रखी हैं। लेकिन होली के बाद वे अपनी हड़ताल को एक नए स्तर पर ले जाने जा रहे हैं। 12 मार्च से कर्मचारी आवश्यक सेवाओं को भी ठप करने का ऐलान कर चुके हैं, जिसके लिए कर्मचारी तैयार भी नजर आ रहे हैं।
दरअसल कर्मचारी वर्षों से अपनी तय पदोन्नतियां प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। हाईकोर्ट में विरोधी निर्णय आने और राज्य सरकार के द्वारा इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने के बाद कर्मचारियों को लगा कि सरकार उनके साथ है। सर्वोच्च न्यायालय का आदेश आने के बाद तो कर्मचारियों की उम्मीदें और परवान चढ़ गयीं कि अब तो राज्य सरकार किसी भी समय पदोन्नतियों का ऐलान कर सकती है। लेकिन सरकार ने पदोन्नतियां करने के बजाय गैंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी। इसके बाद कर्मचारियों को सरकार की मंशा में शंका पैदा हुई और समय बीतने के बाद वर्षाें से पदोन्नतियों की बाट जोह रहे कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट गया और वह बीती 2 मार्च से बेमियादी हड़ताल पर चले गए, लेकिन मानवता का परिचय देते हुए बोर्ड परीक्षाएं, कोरोना का प्रकोप व होली के पर्व को देखते हुए उन्होंने आवश्यक सेवाएं बहाल रखी थीं, लेकिन अब उनके सब्र का प्याला छलक सकता है।
दरअसल कर्मचारियों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उत्तराखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद क्यों पदोन्नतियों में आरक्षण की व्यवस्था हटाकर पदोन्नतियां शुरू नहीं कर रही है। क्यों सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपने पक्ष में फैसला आने के बावजूद मामले को केंद्र सरकार को भेजकर लटका दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि वास्तव में सरकार सर्वोच्च न्यायालय से अपने पक्ष में फैसला चाहती ही नहीं थी, बल्कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय से विरोधी फैसला आने के बाद मामले को सर्वोच्च न्यायालय ले जाने के पीछे सरकार की मंशा मामले को लटकाने की थी, और उसे लगता था कि सर्वोच्च न्यायालय में फैसला लंबे समय तक लटका रहेगा। किंतु सर्वोच्च न्यायालय से जिस तरह जल्दी फैसला आया, ऐसे में सरकार पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त कर वर्षों से अटकी पदोन्नतियां बहाल कर सकती थी, किंतु उसने इसे केंद्र के पाले में डालकर फिर लटका दिया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी के हवाले से नैनीताल जिला संयोजक बहादुर बिष्ट व मुख्य प्रवक्ता जगमोहन रौतेला ने बताया कि सरकार के इस मामले में हीलाहवाली से कार्यालयों में कर्मचारी आरक्षण विरोधी व आरक्षण समर्थक के रूप में बंट गए हैं। इससे कार्यालयों में अजीबोगरीब विद्वेष की स्थिति भी उत्पन्न हो गई है। बताया कि मुख्यमंत्री को ज्ञापन सोंपकर 11 से आंदोलन फिर से शुरू करने, 12 से आवश्यक सेवाएं भी ठप कर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने, 15 जुलाई को मशाल जुलूस निकालने एवं 22 मार्च को मुख्यमंत्री आवास कूच करने का ऐलान किया गया है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 06 मार्च 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड जनरल ओबीसी एम्प्लॉई एसोसिएशन की तरफ से प्रदेशभर में की जा रही हड़ताल के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई के लिए अगले सप्ताह की तिथि नियत की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमुर्ति विजय कुमार मलिमथ की खण्डपीठ में हुई। खण्डपीठ ने मामले को सुनने के लिए दूसरी खण्डपीठ में रेफर किया है। 
मामले के अनुसार देहरादून निवासी ललित कुमार ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि प्रदेश के उत्तराखंड जनरल ओबीसी एम्पोलाई एसोसिएशन के करीब डेढ़ लाख कर्मचारी पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ 2 मार्च से हड़ताल पर है । कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से सभी राजकीय कार्य बाधित हो रहे हैं। कर्मचारियों द्वारा हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के बार बार दिए गए आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है । याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि या तो कर्मचारी अपनी बेबुनियादी हड़ताल को वापस लें या इनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाये।
 

भारी बारिश के बावजूद आरक्षण विरोधियों ने निकाली रैली

पुराने घोड़ा स्टेंड पार्क में बारिश के दौरान नारेबाजी करते कर्मचारी।

 

-कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए कार्मिकों को दी छूट
नैनीताल। उत्तराखंड जनरल ओबीसी कर्मचारी संघ के आह्वान पर पदोन्नति में आरक्षण व्यवस्था समाप्त किये जाने की मांग को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को पांचवे दिन भी जारी रही। कर्मचारियों ने भारी बर्षा के बावजूद जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान मल्लीताल स्थित पुराने घोड़ा स्टेंड पार्क में कर्मचारियों ने एक सभा भी की। इस मौके पर मुख्य संयोजक बहादुर सिंह बिष्ट ने शनिवार को कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए कर्मचारियों को छूट देने की बात कही।
संयोजक भूपाल सिंह करायत, मुख्य प्रवक्ता जगमोहन रौतेला, संयोजक सचिव भगोत सिंह जंतवाल आदि ने भी विचार रखे व कर्मचारियों से शनिवार को प्रातः 11 बजे से डीएम कार्यालय में होने वाले प्रदर्शन में उपस्थित रहने की अपील की। प्रदर्शन में असलम अली, गिरीश पांडे, त्रिलोक रौतेला, नवल बिनवाल, गौरव पांडे, अनिल जोशी, उमेश सनवाल, संजय रौतेला, पुष्पा बिष्ट, लता पांडे व मनीषा नयाल सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 29 फरवरी 2020। बीती 27 फरवरी से रामगढ़ विकास खंड मुख्यालय में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन पर जमे मनरेगा यानी महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत ग्राम रोजगार सहायक के पद पर कार्यरत कर्मचारियों को कार्य पर बहाल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उन्हें विगत 8 वर्ष से कार्य करने के बाद 27 दिसंबर 2019 को कार्यमुक्त कर दिया गया था। इस पर वे परिवार सहित धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए थे और भूख हड़ताल जैसे उग्र कदम उठाने की चेतावनी दी थी। इधर शनिवार को भाजपा मंडल अध्यक्ष कुंदन चिलवाल के द्वारा सीडीओ से बात करने सहित अन्य प्रयासों के बाद रामगढ़ के खंड विकास अधिकारी ने धरने में बैठे भुवन चंद्र, महेंद्र कुमार, जितेंद्र खोलिया व मुन्नी बिष्ट आदि को लिखित तौर पर अवगत कराया कि उन्हें पूर्व में मांगे गए स्पष्टीकरण के आधार पर सेवा में बहाल कर लिया जाएगा। इसके बाद आंदोलनरत कर्मियों ने शाम पौने पांच बजे अपना बेमियादी आंदोलन समाप्त कर दिया।

यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार : महिला कर्मियों को दो बच्चों के बाद मातृत्व अवकाश पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ की स्थिति..

नवीन समाचार, देहरादून, 17 फरवरी 2020। प्रदेश सरकार के दो या अधिक बच्चों वाली महिला कर्मियों के मातृत्व अवकाश पर पाबंदी के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग गई है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार के इस फैसले में दखल से इनकार कर दिया है कि दो या अधिक बच्चों वाली महिला कर्मी को मातृत्व अवकाश नहीं दिया जाएगा। अदालत ने इसे प्रदेश सरकार का नीतिगत फैसला मानते हुए दखल से इनकार किया है। न्यायमूर्ति आर भानुमती व एएस बोपन्ना की पीठ ने पिछले साल 17 सितंबर को हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उर्मिला मसीह की याचिका को खारिज कर दिया है। पीठ ने कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई कारण नहीं समझते क्योंकि हाईकोर्ट ने समुचित ढंग से अपने फैसले में कहा है कि यह नियम नीतिगत मामला है। उर्मिला मसीह ने दो या उससे अधिक बच्चे होने पर मातृत्व अवकाश का लाभ न देने की प्रदेश सरकार की घोषणा को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी। उनका कहना था कि यह मातृत्व अवकाश लाभ अधिनियम-1961 और न्यायपूर्ण व मानवीय मातृत्व राहत से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 42 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने यह कहते हुए उन्हें कोई राहत नहीं दी थी। मातृत्व अवकाश लाभ अधिनियम-1961 राज्य सरकार के कार्मिकों पर लागू नहीं होता और क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 42 नीति निर्देशक तत्व में शामिल है, इसलिए उसे अदालत लागू नहीं करा सकती।

यह भी पढ़ें : पदोन्नति में आरक्षण पर उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश पर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला…

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 7 फ़रवरी 2020। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया है जिसमें हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि वह प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए क्वॉन्टिटेटिव डेटा एकत्र करे। डेटा एकत्र कर पता लगाया जाए कि एससी/एसटी कैटिगरी के लोगों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं ताकि प्रमोशन में रिजर्वेशन दिया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को रिजर्वेशन देने के लिए निर्देश जारी नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि राज्य सरकार प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में यह टिप्पणी भी की कि आरक्षण किसी का ‘मूल अधिकार’ नहीं है, बल्कि आरक्षण देना-न देना राज्य के विवेकाधिकार में है। इस फैसले के बाद पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने का उत्तराखंंड सरकार का आदेश फिर प्रभावी होने का रास्ता साफ हो गया है। अब राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश पर पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने के फैसले को सही ठहराने के एवज में मात्रात्मक (क्वांटीफायेबल) डाटा नहीं देना होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश में पदोन्नति पर लगी रोक भी जल्द हट सकती है। 
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एससी/एसटी श्रेणी में प्रमोशन में आरक्षण देने का निर्देश जारी किया था इस फैसले को राज्य सरकार और सामान्य वर्ग के आवेदन ने चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अदालत के सामने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार को हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि वह एससी/एसटी कैटिगरी के लोगों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के बारे में पता लगाने के लिए क्वांटिटेव डेटा एकत्र करे और प्रमोशन में आरक्षण प्रदान करे। इस फैसले को चुनौती दी गई थी। इधर, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। किसी का मौलिक अधिकार नहीं है कि वह प्रमोशन में आरक्षण का दावा करे। कोर्ट इसके लिए निर्देश जारी नहीं कर सकता कि राज्य सरकार आरक्षण दे। सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा स्वाने जजमेंट (मंडल जजमेंट) का हवाला देकर कहा कि अनुच्छेद-16 (4) और अनुच्छेद-16 (4-ए) के तहत प्रावधान है कि राज्य सरकार डेटा एकत्र करेगी और पता लगाएगी कि एससी/एसटी वर्ग के लोगों का प्रयाप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं ताकि प्रमोशन में आरक्षण दिया जा सके। लेकिन ये डेटा राज्य सरकार द्वारा दिए गए रिजर्वेशन को जस्टिफाई करने के लिए होता है कि पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। लेकिन ये तब जरूरी नहीं है जब राज्य सरकार रिजर्वेशन नहीं दे रही है। राज्य सरकार इसके लिए बाध्य नहीं है। और ऐसे में राज्य सरकार इसके लिए बाध्य नहीं है कि वह पता करे कि पर्याप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं। ऐसे में उत्तराखंड हाई कोर्ट का आदेश खारिज किया जाता है और आदेश कानून के खिलाफ है।

प्रमोशन में आरक्षण को लेकर खत्म हुई रार, रोस्टर पर बाकी है तकरार

उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने सीधी भर्ती में रोस्टर के मामले को लेकर आंदोलन जारी रखने का एलान किया है। शनिवार को गांधी रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि रोस्टर में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। सीधी भर्ती में आरक्षण  रोस्टर के तहत पहले नंबर पर सामान्य वर्ग है। इस मामले में सरकार ने शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया हुआ है। उप समिति की बैठक 11 फरवरी को होगी और उप समिति के रुख पर ही निर्भर करेगा कि कर्मचारियों का आंदोलन क्या रूप लेगा। सरकार ने सीधी भर्ती में रोस्टर में पहले नंबर पर अनुसूचित जाति को रखा तो संगठन आंदोलन जारी रखेगा। एसोसिएशन ने पूर्व में ही घोषित किया था कि 17 फरवरी को सभी जिलों में धरना प्रदर्शन किया जाएगा और 20 को देहरादून में महारैली का आयोजन होगा। प्रमोशन में आरक्षण का मसला अब निपट गया है लेकिन रोस्टर के मामले को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। संगठन 2012 की तरह ही बड़ा आंदोलन खड़ा करेगा। 

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक जूनियर इंजिनियर को प्रमोशन देने का दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में हाई कोर्ट को ये नहीं बताया गया कि कमिटी ने क्वॉन्टिटेटिव डेटा एकत्र किया था और राज्य सरकार ने तय किया था कि प्रमोशन में रिजर्वेशन नहीं दिया जाएगा। ऐसे में हाई कोर्ट का आदेश खारिज किया जाता है। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजिनियर से असिस्टेंट इंजिनियर के तौर पर प्रमोशन में रिजर्वेशन देने का 15 जुलाई को आदेश पारित किया था। हाई कोर्ट ने इसके लिए राज्य सरकार से कहा था कि वह पब्लिक सर्विस के लिए एससी/एसटी समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व का पता लगाने के लिए क्वॉन्टिटेटिव डेटा एकत्र करे। सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले को राज्य सरकार ने चुनौती दी थी।

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शनिवार को एसबीआई मुख्य शाखा के बाहर प्रदर्शन करते हड़ताली बैंक कर्मचारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 फरवरी 2020। देश के बैंक कर्मचारियों के नौ संगठनों के संयुक्त फोरम-यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक इम्प्लाइज के आह्वान पर शनिवार को भी बैंक कर्मी हमेशा की तरह अपना वेतन कटवाकर यानी स्वयं ‘नो वर्क-नो पे’ का आदर्श स्थापित करते हुए हड़ताल पर रहे। शनिवार को मुख्यालय में बैंक कर्मचारियों ने भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के समक्ष प्रदर्शन किया और पिछले करीब ढाई वर्ष से लंबित वेतन एवं अपनी व पारिवारिक पेंशन के पुर्ननिर्धारण तथा पुरानी पेंशन को ही लागू रखने एवं कार्य के घंटे नियत रखने सहित अपनी मांगें दोहराईं। प्रदर्शन में उत्तराखंड बैंक इम्प्लाइज यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण साह, पीसी पांडे, शिखर साह, अविनाश कुमार, अपर्णा कीर्ति, पीयूष जोशी, वरुण बडोला, पुष्पा तोमर, किरन बिष्ट, रजत साह, संजय गुप्ता व गोकुल चंद्रा सहित बड़ी संख्या में अन्य बैंक कर्मी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मी हमेशा से ‘नो वर्क-नो पे’ के नियम का पालन करते हुए ही हड़ताल करते हैं, यह हड़ताल करने वाले अन्य कर्मचारियों के लिए भी सबक है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 30 जनवरी 2020। उत्तराखंड में विभिन्न सरकारी विभागों के 398 कार्मिकों को जबरन सेवानिवृत्ति देने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों की स्क्रीनिंग करके जबरन सेवानिवृत्ति के लिए कर्मचारियों की सूचनी तैयार कर ली गई है। इनमें 50 वर्ष से अधिक उम्र के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें कार्य के लिए अनफिट या काम में लापरवाही के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति के दायरे में रखा गया है। इनमें कुमाऊं मंडल में 235 कर्मचारी बताये जा रहे हैं। हालांकि इन पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। जानकारी के अनुसार, नैनीताल जिले से जल निगम के 51, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के 42, ऊर्जा निगम के 18, लोनिवि के 10, सिंचाई विभाग के पांच और उच्च शिक्षा विभाग के दो सहित कुल 128 ऐसे कार्मिकों की सूची तैयार कर ली गई है। वहीं ऊधमसिंहनगर जिले से ऊर्जा निगम के 42, लोनिवि के 13, जिला पंचायत के सात और शिक्षा विभाग के पांच सहित कुल 67 कार्मिकों की सूची शासन को गयी है। पिथौरागढ़ जिले से अभी सिर्फ ऊर्जा निगम के ऐसे 40 कार्मिकों की सूची भेजी गई है, जबकि बागेश्वर जिले से शिक्षा विभाग ने उम्र सीमा में आने वाले सभी कार्मिकों का सर्विस रिकॉर्ड शासन को भेज रखा है जबकि चम्पावत और अल्मोड़ा जिलों में ऐसे कोई मामले अभी सामने नहीं आए हैं।

इसके अलावा सूची में सिर्फ परिवहन निगम में ही ऐसे कर्मियों की संख्या 150 के करीब बताई जा रही है, जबकि ऊर्जा निगम के छह तथा यूपीसीएल के पांच कर्मचारी एवं उच्च शिक्षा के एक असिस्टेंट प्रोफेसर और महिला बाल विकास में एक अफसर इसके दायरे में आए हैं। अलबत्ता राज्य के सबसे बड़े महकमे शिक्षा विभाग में एक भी शिक्षक और कर्मचारी इस दायरे में नहीं आया है। बताया गया है कि अब तक राज्य में विभिन्न सरकारी विभागों को 14 कर्मचारियों को अब तक अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा चुकी है। इनमें टिहरी जिले में सर्वाधिक छह राजस्व विभाग के कर्मी, रुद्रप्रयाग जिले के एक संग्रह अमीन तथा पौड़ी जिले के राजस्व विभाग के तीन कर्मचारी शामिल हैं। वहीं इस बीच गत मंगलवार को एक साथ चार कर्मचारियों को सेवानिवृत्त करने पर मुहर लगाई गई है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 26 जनवरी 2020। मानदेय में बढ़ोतरी सहित अन्य मांगों को लेकर पिछले करीब डेढ़ माह से आंदोलित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के आंदोलन पर शासन ने सख्त रुख अपनाया है। शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन दिन पहले सभी जिलों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के आंदोलन के मद्देनजर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस पर अब जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के नियुक्ति प्राधिकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) के स्तर से डीएम के अनुमोदन पर कारवाई शुरू हो गई है। राज्य के चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पौड़ी समेत अन्य जिलों में करीब 20 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके साथ ही काफी संख्या में आंदोलनरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नोटिस दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के आंदोलन के कारण प्रदेश के विभिन्न जिलों में आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हैं, और फनस्वरूप महिला एवं बाल विकास के मद्देनजर संचालित विभिन्न कार्यक्रम ठप हैं। वहीं बच्चों व धात्री महिलाओं को पुष्टाहार भी नहीं मिल पा रहा है और अन्य योजनाएं भी आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।

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नवीन समाचार, देहरादून, 6 जनवरी 2020। नैनीताल जनपद के जिला अधिकारी की सख्त कार्यशैली शायद कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रही है। शायद इसी कारण उनके खिलाफ देहरादून में लामबंदी हो रही है। यहां उत्तराखंड इंजीनियर फेडरेशन ने नैनीताल के डीएम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है। फेडरेशन की रविवार को आईएसबीटी के समीप इंजीनियर्स भवन में फेडरेशन के अध्यक्ष इंजीनियर सुभाष चंद्र पांडे की अध्यक्षता में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि नैनीताल के डीएम अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हुए चुनाव आयोग की ओर से निर्गत आदेशों का भी पालन नहीं कर रहे हैं। कुछ समय पहले पंचायत चुनाव में डीएम ने मुख्य अभियंता की ड्यूटी लगा दी थी, वहीं अधीक्षण अभियंता व अधिशासी अभियंता का वेतन रोक दिया था। नैनीताल के डीएम व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अभियंताओं के विरोध में कार्य किए जा रहे हैं, जिससे कई विभागों के अभियंता या तो मुख्यालय शिफ्ट हो रहे हैं या फिर क्षेत्रीय कार्यालय में संबद्ध होने को विवश हो रहे हैं। बैठक में उत्तराखंड इंजीनियर्स फेडरेशन के महासचिव जितेंद्र सिंह देव, सुरेश तोमर, पंकज बर्त्वाल, कुमारी वंदिता, सुनील कुमार व आरके गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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कहा, जब राष्ट्रपति, सांसद, विधायक, राज्यपाल को मिलने वाले वेतन को आयकर के दायरे से बाहर रखा गया है तो कर्मकारियो की मिलने वाले वेतन को भी आयकर के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 दिसंबर 2019। उत्तराखण्ड हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति सुुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सरकारी व गैर सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन को आयकर के दायरे में लाने के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई दो जनवरी की तिथि नियत की है।
मामले के अनुसार देहरादून के 87 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मी ओपी खंडूरी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा सरकारी व गैर सरकारी विभागों में कार्यरत या सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन से प्राप्त आय पर आयकर विभाग आयकर वसूलता है। यह सविधान के विरुद्ध है। याची का कहना है कि कर्मचारियों को जो वेतन दिया जाता है वह उसके पारिश्रमिक का तोहफा है उस पर आयकर लगाना गलत है। याची का यह भी कहना है कि जब राष्ट्रपति, सांसद, विधायक, राज्यपाल को मिलने वाले वेतन को आयकर के दायरे से बाहर रखा गया है ठीक उसी प्रकार कर्मकारियो की मिलने वाले वेतन को भी आयकर के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।

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-ऊधमसिंह नगर के एडीएम-नजूल जगदीश कांडपाल की ईमानदारी से त्रस्त जिला कलक्ट्रेट के कर्मचारियों ने मुख्य सचिव को भेजे सामूहिक त्यागपत्र
नवीन समाचार, रुद्रपुर, 13 दिसंबर 2019। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जनपद के अपर जिलाधिकारी-नजूल जगदीश कांडपाल को उनकी ईमानदारी का ऐसा पुरस्कार मिला है कि देश-प्रदेश के कोई भी ईमानदार अधिकारी ईमानदारी से तौबा कर लें। जी हां, जिला कलक्ट्रेट के कर्मचारियों ने कांडपाल को हटाने की मांग पर सामूहिक त्यागपत्र मुख्य सचिव को भेज दिये हैं। कांडपाल की छवि शुरू से ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की रही है। अल्मोड़ा स्थित पटवारी प्रशिक्षण संस्थान से लेकर कुमाऊं मंडल के अपर मंडलायुक्त रहते भी अपनी ईमानदारी से बेइमानों की नाक में दम कर चुके कांडपाल को इसी कारण कई बार उनकी वरिष्ठता से बड़ी जिम्मेदारियां मिली हैं। अब उन पर इसी तरह का आरोप भी है कि वे कनिष्ठ ईमानदार कर्मचारियों से वरिष्ठों का काम ले रहे हैं, जबकि कई वरिष्ठों को कनिष्ठों के काम पर लगा दिया है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि कर्मचारियों के आंदोलन के पीछे कुछ ऐसे बाहरी लोग भी हैं जो डीएम एवं एडीएम की ईमानदारी से त्रस्त हैं।
बताया जा रहा है कि एडीएम कांडपाल से कर्मचारियों को यह परेशानी भी है कि उन्होंने कलक्ट्रेट में सभी कर्मचारियों के लिए समय से दफ्तर पहुंचने और अनुशासन में रहने पर सख्ती बरती है। वे विभिन्न सरकारी अभिलेखों का रखरखाव उचित तरीके से रखने पर भी जोर देते हैं। अनुशासनप्रियता के कारण वह सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटते। एडीएम की ऐसी सख्ती के कारण कर्मचारियों की मनमानी पर अंकुश लगा है। इसलिए उनका सख्त रवैया कर्मचारियों को नहीं भा रहा है। इसलिए उनके खिलाफ कलक्ट्रेट के कर्मचारियों ने लामबंद होकर अपने सामूहिक इस्तीफे मुख्य सचिव को भेज दिए हैं, और हड़ताल पर चले गए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि कुछ राजनीतिक लोग डीएम से अपनी नाराजगी को लेकर कर्मचारियों के आंदोलन को हवा दे रहे हैं, और परदे के पीछे रह कर खेल खेल रहे हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 29 नवंबर 2019। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण को लेकर एससी-एसटी फेडरेशन समेत अन्य की याचिकाओं को निस्तारित कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड में सितंबर माह से पदोन्नति पर लगी रोक हट गई है। इधर, आदेश होते ही कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

दरअसल, पदोन्नति में आरक्षण का मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद उत्तराखंड में तमाम सरकारी महकमों ने पहली अप्रैल 2019 से ही पदोन्नति पर रोक लगा दी। सरकार ने भी 11 सितंबर को एक आदेश जारी कर पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी। पदोन्नति में रोक की वजह से विभिन्न विभागों के कर्मचारी संगठन सरकार पर हमलावर हैं। पिछले दिनों हाई कोर्ट ने एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए चार माह के भीतर आरक्षित वर्ग के कार्मिकों के डेटा तैयार करने के निर्देश दिए थे। नवंबर 2012 में राज्य सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण खत्म कर दिया था। यह मामला फिर सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले में दस दिसंबर की तिथि नियत है। इधर एसएसी-एसटी इम्पलाइज यूनियन, चंद्रप्रकाश, नंदकिशोर समेत अन्य ने याचिका दायर कर आरक्षित वर्ग के कार्मिकों की अलग-अलग सूची तैयार करने व पहले आरक्षित वर्ग के कार्मिकों को पदोन्नति में आरक्षण देने की मांग की। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। सरकार की ओर से सीएससी ने कहा कि 2012 के शासनादेश के निरस्त होने के आधार पर पुराने आदेश स्वत: रिवाइज नहीं होंगे। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन, न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने एससी-एसटी फेडरेशन समेत अन्य की याचिकाएं निस्तारित करते हुए पदोन्नति पर लगी रोक हटा दी। इधर अदालत के फैसले के बाद उत्तराखंड जनरल-ओबीसी इम्पलाइज यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि सरकार को यह समझाना होगा कि तमाम कर्मचारी राज्य की सेवा के बाद बिना पदोन्नति के रिटायर हो रहे हैं। सरकार को सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले के अधीन कर पदोन्नति शुरू करनी चाहिए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य में 30 अगस्त व 31 अगस्त 2001 का रोस्टर लागू किया गया था। यह रोस्टर करीब सौ बिंदुओं का है। राज्य में करीब ढाई लाख सरकारी कार्मिक हैं। इसमें से करीब 35 हजार एससी-एसटी कर्मचारी हैं।

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-सरकार को दिये विभागों में कार्यरत एससी-एसटी कार्मिकों के आंकड़े एकत्रित करने के आदेश
-पदोन्नति में आरक्षण देना अथवा न देना सरकार के ऊपर करेगा अब निर्भर, कोर्ट के आदेश के बाद पदोन्नति की राह खुली
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 नवंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पदोन्नति में आरक्षण को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका को निस्तारित कर दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को चार माह के भीतर सरकारी विभागों में कार्यरत अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के कर्मचारियों का डाटा एकत्र करने और उसके बाद पदोन्नति में आरक्षण पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार विनोद प्रकाश नौटियाल ने हाईकोर्ट द्वारा 1 अप्रैल 2019 को ज्ञान चंद बनाम उत्तराखंड सरकार में पारित आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एम नागराज व उसके बाद जनरैल सिंह व अन्य मामलों में दिए गए निर्णयों के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने के निर्देश देते हुए इसके खिलाफ राज्य सरकार द्वारा जारी नियमावली निरस्त कर दी थी। इस पर विनोद प्रकाश नौटियाल ने पुनर्विचार याचिका दायर कर विभिन्न तर्कों के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण को निरस्त करने की अपील की थी। इस मामले में मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने आठ नवम्बर को सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था। जिस पर आज फैसला सुनाया गया।
विदित हो कि हाईकोर्ट ने अपने 1 अप्रैल 2019 के आदेश में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर किसी भी तरह के डाटा को जरूरी नहीं बताया था। जिसके विरुद्ध उत्तराखंड के सामान्य एवं ओबीसी वर्ग के प्रभावित कार्मिकों की ओर से पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी। एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बीपी नौटियाल हाईकोर्ट में कर्मचारियों के पक्ष में दलील दे रहे थे। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए अपने पूर्व के आदेश में संशोधन कर यह आदेश पारित किए। जिसमें सरकार को चार माह के भीतर कार्यरत एससी-एसटी कर्मचारियों के आंकड़े एकत्रित करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही पदोन्नति में आरक्षण देना अथवा न देना सरकार के ऊपर छोड़ दिया है। इस आदेश में साफ किया गया है कि पदोन्नति में आरक्षण देने या न देने का निर्णय सरकार पर निर्भर करता है।

कोर्ट के आदेश से सामान्य व ओबीसी वर्ग के कार्मिक गदगद, कहा-हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार की ओर से पदोन्नति पर लगाई रोक तत्काल हटाने की कार्रवाई को कार्मिक विभाग पर बनाएंगे दवाब, नवम्बर और दिसंबर माह में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से पहले सभी को पदोन्नति का लाभ दिलाने का होगा प्रयास

देहरादून। हाईकोर्ट में सामान्य एवं ओबीसी संवर्ग एसोसिएशन के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता बीपी नौटियाल ने पत्रकारों को हाईकोर्ट के संशोधित आदेश के बाबत विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय का यह बड़ा फैसला है। कोर्ट के आदेश के बाद पदोन्नति पर लगी रोक हटेगी। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने आदेश दिये हैं कि सरकारी विभागों में एससी-एसटी के कार्यरत कार्मिकों के आंकड़े जुटाने के बाद सरकार चाहे तो पदोन्नति में आरक्षण लागू कर सकती है, लेकिन इसके लिए सरकार के पास पर्याप्त आधार होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आरक्षण में पदोन्नति की कोई व्यवस्था नहीं है। यह व्यवस्था राज्य सरकार का निर्णय है। यूपी में 2011 में इस व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खत्म कर दिया गया है। उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्पलाइज एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी ने हाईकोर्ट के आदेश को कर्मचारियों की बड़ी जीत बताया है। उच्च न्यायालय ने अपने एक अप्रैल के आदेश पर विचार कर कर्मचारियों की पीड़ा को समझा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद 11 सितंबर 2019 को राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में पदोन्नति पर लगाई रोक हटने से पदोन्नति की राह खुल जाएगी। इससे कई ऐसे कार्मिकों को भी फायदा होगा, जिनकी सेवानिवृत्ति 30 नवम्बर और दिसंबर माह में होनी है। अब एसोसिएशन सरकार की ओर से पदोन्नति पर लगाई गई रोक को हटाने के लिए सरकार के 11 सितंबर को पारित आदेश को निरस्त करवाने के लिए दवाब बनाएगी। ताकि पूर्व की भांति बिना आरक्षण दिए तत्काल पदोन्नतियां कराई जा सके। पत्रकार वार्ता में संगठन के महासचिव वीरेन्द्र गुसांई, संगठन मंत्री हीरा सिंह बसेड़ा, कोषाध्यक्ष सीएल असवाल, डीएस सरियाल, बीपी नौटियाल, आशू सेमवाल, विष्णुदत्त बेंजवाल, मुकेश बहुगुणा, प्रवीन सक्सेना, शिवराज सिंह, शांतनु शर्मा आदि मौजूद रहे। उधर आरक्षित वर्ग में इस आदेश के बाद निराशा देखी जा रही है।

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-उत्तराखंड राजकीय पेंशनर संघ के वार्षिक अधिवेशन में हुआ 80 वर्ष से अधिक उम्र के पेंशनरों का परंपरागत सम्मान, विधायकों की तर्ज पर मांगी 65 की उम्र में अतिरिक्त पेंशन वृद्धि
नवीन समाचार, नैनीताल, 14 नवंबर 2019।
उत्तराखंड राजकीय पेंशनर संघ ने पंजाब एवं हरियाणा के पेंशनरों तथा उत्तराखंड के विधायकों की तर्ज पर उन्हें भी 65 वर्ष की उम्र पूरी करने पर अतिरिक्त पेंशन वृद्धि देने की मांग की है। साथ ही एक जनवरी 2016 से पूर्व के पेंशनरों को संशोधित पेंशन देने तथा एक जनवरी 2006 से 31 दिसंबर 2015 के बीच के सभी शासनादेशों को एक जनवरी 2006 से लागू करते हुए एक जनवरी 2006 से छठे वेतन आयोग का लाभ देने की मांग की है। इसके अलावा जल निगम एवं जल संस्थान के कर्मियों को भी सातवें वेतन आयोग का लाभ तत्काल देने एवं अटल आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना को सही व भ्रष्टाचार मुक्त तरीके से लागू करने की मांग की है।
बृहस्पतिवार को मुख्यालय में आयोजित पेंशनरों के वार्षिक अधिवेशन में यह मांगें उठाई गईं। इस मौके पर 80 वर्ष की आयु पूरी करने वाले कुंदन बिष्ट, डा. बीसीएल साह, नवीन लाल साह, सुधा टंडन एवं केपी काला का माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर परंपरागत सम्मान किया गया। संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष पान सिंह रौतेला ने किया। अधिवेशन में जनपद की मुख्य कोषाधिकारी अनीता आर्य के साथ संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जेएस जैन, प्रदेश महामंत्री बची सिंह रावत, संगठन मंत्री सीपी घिल्डियाल, बीडी पलड़िया, पीसी कांडपाल, गौरा देवी देव, डा. मधु नयाल, चंद्रकला खोलिया, नवीन चंद्र पंत, आनंद राम आर्या, डीडी जोशी, मुन्नी थापा व नवीन चंद्र साह सहित संगठन के अनेक सदस्य मौजूद रहेे।

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मोदी सरकार ने बनाया ड्राफ्ट, ड्राफ्ट में ज्यादातर पुराने सुझाव, मेहनताना तय करने को देश तीन जियोग्राफिकल वर्गों में बांटा, अभी आठ घंटे के नियम के तहत 26 दिन काम के बाद तय होता है कर्मचारियों का वेतन
Big news for government employees, now may have to work 9 hours instead of 8नवीन समाचार, नई दिल्ली, 10 नवंबर 2019। मोदी सरकार सेवानिवृत्ति के लिए 33 वर्ष की सेवा या 60 वर्ष की उम्र पूरी करने के साथ ‘वेज कोड रूल्स’ में बदलाव कर सकती है। नये ‘वेज कोड रूल्स’ के ड्राफ्ट में दिन में आठ की जगह नौ घंटे काम करने की सिफारिश की गई है। ड्राफ्ट में कर्मचारियों का वेतन तय करने के लिए पूरे देश को तीन जियोग्राफिकल वर्गों में बांटा गया है।
इस बाबत श्रम मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों से एक महीने में सुझाव मांगे हैं। केंद्र सरकार की ओर से जारी ड्राफ्ट में कहा है कि भविष्य में विशेषज्ञों की एक कमेटी न्यूनतम मजदूरी तय करने के मसले पर सरकार से सिफारिश करेगी। गौरतलब है कि श्रम मंत्रालय ने जनवरी में 375 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से न्यूनतम वेतन की सिफारिश की थी। पैनल ने इसे जुलाई 2018 से लागू करने को कहा था। न्यूनतम मासिक वेतन 9,750 रुपये रखने की सिफारिश की थी। ड्राफ्ट में कहा गया है कि जब न्यूयतम वेतन पर कोई फैसला लिया जाएगा, तब देश को तीन भौगोलिक कैटेगिरी मे बांटा जाएगा। जिनमें मेट्रोपॉलिटिन एरिया, जिसकी जनसंख्या 40 लाख से ज्यादा है। नॉन मेट्रोपॉलिटिन एरिया, जिसकी जनसंख्या 40 लाख से ज्यादा है। नॉन मेट्रोपॉलिटिन एरिया  जिसकी जनसंख्या 10 लाख से 40 लाख और ग्रामीण इलाके शामिल होंगे। साथ ही घर का किराया न्यूनतम वेतन के 10 % के बराबर तय होगा। हालांकि अभी तकयह स्पष्ट नहीं है कि कैटेगिरी के हिसाब से इनमें कोई बदलाव होगा या नहीं।  

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-एक अप्रैल 2020 यानी करीब 11 माह बाद आईआईटी रुड़की में ही लौटना था प्रो. नौड़ियाल को, राज्यपाल के पत्र के बावजूद आईआईटी रुड़की आवास खाली करवाने को है अडिग
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 मई 2019। 16वें दीक्षांत समारोह के आयोजन में देश के राष्ट्रपति एवं तिब्बती आध्यात्मिक धर्मगुरु दलाई लामा के आगमनएवं आगे यूजीसी के नैक के मूल्यांकन की तैयारियों में जुटे कुमाऊं विश्वविद्यालय को आईआईटी रुड़की की अमानवीयता व हठधर्मिता का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। आईआईटी रुड़की द्वारा आवास खाली करने की चेतावनी के बाद परेशान होकर कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने अपने पद से इस्तीफा देने का पत्र प्रदेश की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को भेज दिया है। इसके बाद विवि के भविष्य पर प्रश्न खड़े हो गये हैं। क्योंकि प्रो. नौड़ियाल का करीब 11 माह का कार्यकाल शेष है। ऐसे में उनकी जगह नये कुलपति के चयन एवं नियुक्ति की प्रक्रिया में लगने वाले समय अंतराल तक विवि को कामचलाऊ व्यवस्था में रहना और इस दौरान ही अक्टूबर माह में दीक्षांत समारोह तथा नैक का मूल्यांकन भी झेलना पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि प्रो. नौड़ियाल मूलतः आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर हैं। 1 अप्रैल 2017 को वे तीन वर्ष के लिए कुमाऊं विवि के कुलपति नियुक्त हुए थे, एवं 31 मार्च 2020 को यहां का सेवाकाल समाप्त कर उन्हें आईआईटी रुड़की में ही लौटना है। इस बीच उनका सामान आईआईटी रुड़की के आवास में है। इधर आईआईटी रुड़की द्वारा उनसे आवास खाली कराने की कवायद की जा रही है, और उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य द्वारा नौड़ियाल को आवंटित आवास को एक वर्ष का विस्तार देने के पत्र को भी आईआईटी रुड़की प्रशासन ने नजरअंदाज कर दिया है। इस पर प्रो. नौड़ियाल ने कहा कि उनके पास अपना आवास बनाये रखने के लिए कुमाऊं विवि से इस्तीफा देकर रुड़की लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि अभी कमरा बाहर लेने के बाद 11 माह बाद उन्हें फिर से अपना सामान आईआईटी द्वारा आवंटित आवास में शिफ्ट करना पड़ेगा। आगे उनके एवं कुमाऊं विवि का भाग्य कुलाधिपति राज्यपाल के अगले कदम पर निर्भर करेगा।

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चुनाव के बाद शपथ ग्रहण करते डीएसबी परिसर कर्मचारी संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 मई 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ की नई कार्यकारिणी का गठन हो गया है। राम सिंह गोसाई नये अध्यक्ष एवं गणेश बिष्ट सचिव निर्वाचित हुए हैं। वहीं उपाध्यक्ष पद पर जगदीश चंद्र सती, महिला उपाध्यक्ष पद पर रीता लोहनी, उप सचिव पद पर लक्ष्मण सिंह बिष्ट व कोषाध्यक्ष पद पर आनंद सिंह मैठानी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। सभी पदाधिकारियों को मुख्य चुनाव अधिकारी केसी चतुर्वेदी ने परिसर निदेशक प्रो. एलएम जोशी सहित अन्य की उपस्थिति में शपथ ग्रहण करा दी है।
इससे पूर्व मंगलवार को हुई मतदान की प्रक्रिया में 137 कर्मचारियों में से 123 यानी 92.48 फीसद ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अध्यक्ष पद पर राम सिंह गुंसाई को 80 व दिनेश चंद्र आर्य को 42 तथा सचिव पद के लिए गणेश सिंह बिष्ट को 78 व चंद्र बल्लभ जोशी को 42 मत मिले। चुनाव को शांतिपूर्ण तरीक से संपादित कराने में अधिष्ठाता छात्र कल्याण दफ्तर से हरीश चंद्र जोशी व राजेंद्र सिंह ढैला, लेखानुभाग से प्रकाश चंद्र पाठक, नंदा बल्लभ पालीवाल व नवीन प्रसाद जबकि क्रीड़ा अनुभाग से लाल सिंह बिष्ट ने सहयोग दिया।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के नगर निकायों, सहायतित स्कूलों, सरकारी विश्वविद्यालय कर्मियों, पेंशनरों के लिए बड़ी खुशखबरी

नवीन समाचार, देहरादून, 7 मार्च 2019। उत्तराखंड के उन सभी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है, जिन्हें पिछले दिनों सातवां वेतनमान अनुमन्य हुआ है, अब उन्हें 9 फीसद की जगह 12 फीसद महंगाई भत्ता दिये जाने की प्रदेश के राज्यपाल ने भी बृहस्पतिवार को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस संबंध में बृहस्पतिवार को प्रदेश के सचिव अमित नेगी की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार राज्य सरकार के कार्मिकों, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, राजकीय विश्वविद्यालयों तथा प्राविधिक शिक्षण संस्थानों के ऐसे सभी कार्मिकों को जिन्हें सातवां पुनरीक्षण वेतनमान अनुमन्य किया गया है, उन्हें अनुमन्य महंगाई भत्ते की दरों में 1 जनवरी 2019 से अनुमन्य मूल वेतन के 9 फीसद की मौजूदा दर को बढ़ाकर 12 फीसद कर दिया गया है। इसका लाल सेवानिवृत्त एवं 6 माह के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को भी मिलेगा। उनकी बढ़ी हुई धनराशि उनके भविष्य निधि खाते में जमा की जाएगी, तथा मई माह में देय अप्रैल माह के वेतन के साथ नगद प्राप्त होगी।

यह भी पढ़ें : लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार का कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, बढ़ा महंगाई भत्ता, और भी बहुत कुछ..

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 19 फरवरी 2019। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्माचारियों को बड़ा तोहफा दिया है. केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारियों और पेंशनधारकों को मिलने वाला महंगाई भत्ता 12 फीसदी कर दिया है. यह फैसला 1 जनवरी, 2019 से लागू होगा जिसका लाभ 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के मिलेगा. इसके अलावा कैबिनेट रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को मंजूरी दी है जो दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ को जोड़ेगा.

कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों को मिलने वाले महंगाई भत्ते में 3 फीसदी का इजाफा किया गया है. इस लिहाज से पहले मिलने वाला 9 फीसदी महंगाई भत्ता 1 जनवरी, 2019 से 12 फीसदी हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश के खजाने पर 9168.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा. सरकार के इस फैसले का लाभ 48.41 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 62.03 लाख पेंशनधारकों को मिलेगा. इसके अलावा कैबिनेट ने दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ के बीच रिजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को मंजूरी दी है. जो दिल्ली-एनसीआर के शहरों को रैपिड कनेक्टिविटी देगा. अरुण जेटली ने बताया कि इस परियोजना पर 30374 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसे पूरा करने में 6 साल लगेंगे.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि संसद का सत्र खत्म हो जाने के चलते कुछ अहम विधेयक लंबित रह गए थे, जिनमें से कुछ विधेयकों पर विपक्ष का भी समर्थन था. इनमें से तीन अध्यादेश के माध्यम से और एक बिल के माध्यम से संसद में पेश किए गए थे. जिसमें से सभी कानून लोकसभा के पारित हो गए थे. लेकिन राज्यसभा में हंगामें के चलते यह कानून लंबित रह गए. इसलिए इन चारों बिल के संबंध में कैबिनेट ने अध्यादेश जारी करते हुए राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेज दिया है. इसमें तीन तलाक बिल, मेडिकल काउंसिल बिल, कंपनी लॉ संशोधन विधेयक और अनरेगुलेटेड डिपॉजिट बिल शामिल हैं.

इसके साथ ही कैबिनेट ने गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के कल्याण और विकास कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए एक बोर्ड के गठन को भी मंजूरी दी है. मोदी सरकार द्वारा पेश अंतरिम बजट में इसका ऐलान किया गया था जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दी है. इसके अलावा कैबिनेट ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी है.

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-एलटी शिक्षक प्रोन्नति पर आपत्तियां दूर, शासन को भेजी पत्रावली
-लोक सेवा आयोग ने पत्रावली पर लगायी थी आपत्तियां
-विभाग ने आयोग का जवाब बनाकर शासन को भेजा

नवीन समाचार, देहरादून, 18 फरवरी 2019। एलटी शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए शिक्षा विभाग ने फिर से पत्रावली शासन को सरका दी है। प्रोन्नति की इस सूची में 1949 शिक्षकों की प्रोन्नति का प्रस्ताव है। लोक सेवा आयोग को इस संबंध में पहले ही पत्रावली चली गयी थी। आयोग ने इसमें कुछ आपत्तियां लगाकर विभाग को वापस भेज दी थी। शिक्षा विभाग के स्तर से इस संबंध में काफी पहले ही फाइल लोक सेवा आयोग को भेज दी गयी थी। इस पत्रावली में पूर्व में तदर्थ रूप से प्रोन्नत शिक्षणों के प्रकरण तो थे ही जिन चार विषयों के अभी तक प्रोन्नति नहीं हो पाये, उनके प्रकरण भी हैं। आयोग ने इस पर आपत्ति लगाकर वापस भेज दिया था। अब शिक्षा विभाग की ओर से आयोग की सभी आपत्तियों पर जवाब दे दिया गया है। विभाग की ओर से फाइल शासन को भेज दी गई है। विभाग ने पिछले वर्ष कई विषयों की प्रोन्नति के आदेश जारी कर दिये थे, लेकिन गणित, भूगोल व विज्ञान से संबंधित भौतिकी, रसायन व जीवविज्ञान विषयों के लिए प्रोन्नति नहीं हो पायी थी। पूर्व में की गयी सभी प्रोन्नतियां तदर्थ रूप में की गयी थी, जबकि शिक्षक संघ ने स्थायी पदोन्नति के लिए दबाव बनाया था। इसी कड़ी में शिक्षा विभाग ने सभी प्रोन्नत शिक्षकों के साथ ही जिन विषयों की प्रोन्नति नहीं हो पायी, उनमें स्थायी प्रोन्नति का प्रस्ताव भेजा था। राशिसं के प्रांतीय महामंत्री डा. सोहन सिंह माजिला ने बताया कि सोमवार को सचिव शिक्षा से मुलाकात करने का कार्यक्रम है। उन्होंने उम्मीद की है कि लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले ही प्रोन्नति की मांग पूरी हो जाएगी।

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नवीन समाचार, देहरादून, 15 फरवरी 2019। उत्तराखंड शासन ने प्रदेश के सभी शिक्षकों-कर्मचारियों व अधिकारियों के मकान किराया भत्तों की पुनरीक्षित दरें जारी कर दी हैं। नयी दरें जनवरी 2019 से लागू होगी। मकान किराये भत्ते की दरें 12, 10, 8 प्रतिशत की जगह वेतन लेवल के हिसाब से तय की गई हैंं। सरकार रानीखेत कैंट एरिया को भी ‘बी’ प्लस श्रेणी में ले आयी हैं। सबसे ज्यादा फायदा देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, मंसूरी, व रानीखेत केन्ट में कार्य करने वाले अधिकारियों व शिक्षक कर्मचारियों को होगा। साथ ही सभी शिक्षक कर्मचारियों को स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ता, वर्तमान में जिनको मिलता हैं उसमें भी बढो़त्तरी की गई हैं। वहीं आगे से स्वैच्छिक कल्याण भत्ता खत्म कर दिया हैं।

बड़ा सुखद समाचार : सरकार का कर्मचारियों की इन मांगों पर नरम रुख, चार फरवरी को प्रस्तावित महारैली स्थगितनवीन समाचार, नैनीताल, 3 फरवरी 2019। सरकार के सकारात्मक रुख के बाद कर्मचारियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। कर्मचारी समन्वय समिति के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को प्रदेश में महारैली का आयोजन होना था। इसे स्थगित कर दिया गया है। इस बाबत शनिवार को उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति की बैठक कचहरी स्थित लोक निर्माण विभाग के डिप्लोमा इंजीनियर संघ भवन में बैठक हुई। समन्वय समिति के प्रवक्ता अरुण पांडे ने कहा कि मकान किराया भत्ते में वृद्धि तथा अन्य कल्याणकारी योजनाएं घोषित किए जाने से सरकार के रुख में नरमी का संकेत मिला है। सरकार तथा प्रबंधन को मांगें पूरी करने के लिए अवसर प्रदान करना चाहिए। इसके बाद कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया। पूर्व में तय कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को पूरे प्रदेश में महारैली आयोजित की जानी थी। संगठन के नेताओं ने कहा कि परिवार कल्याण योजना भत्ता, अपराध अनुसंधान, अभिसूचना विभाग, स्पेशल टास्क फोर्स तथा सतर्कता विभाग के कर्मियों के विशेष प्रोत्साहन भत्ते के संबंध में सरकार के फैसले का समिति स्वागत करती है। इस दौरान संयोजक मंडल सदस्य दीपक जोशी, राकेश जोशी, नवीन कांडपाल, संतोष रावत, सुनील दत्त कोठारी व ठाकुर प्रह्लाद सिंह, हरीश नौटियाल, सुभाष लाल, बनवारी सिंह रावत, सूर्य प्रकाश राणाकोटी, देव रावत, रमेश नेगी, अनंत राम शर्मा, शूरवीर सिंह रावत, नंद किशोर त्रिपाठी, यशवंत सिंह रावत, संदीप शर्मा, राजेश प्रसाद मौर्य, उपेंद्र त्रिपाठी, शक्ति प्रसाद भट्ट, वीरेंद्र सिंह, जमुना प्रसाद भट्ट, सूरत सिंह, जीएन कोठियाल, राजेंद्र सैनी, एसएन रतूड़ी, मुकेश रतूड़ी, राजीव चौहान व सुरेंद्र प्रसाद बड़ोती आदि मौजूद रहे।

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 फरवरी 2019। सरकार के सकारात्मक रुख के बाद कर्मचारियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। कर्मचारी समन्वय समिति के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को प्रदेश में महारैली का आयोजन होना था। इसे स्थगित कर दिया गया है। इस बाबत शनिवार को उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति की बैठक कचहरी स्थित लोक निर्माण विभाग के डिप्लोमा इंजीनियर संघ भवन में बैठक हुई। समन्वय समिति के प्रवक्ता अरुण पांडे ने कहा कि मकान किराया भत्ते में वृद्धि तथा अन्य कल्याणकारी योजनाएं घोषित किए जाने से सरकार के रुख में नरमी का संकेत मिला है। सरकार तथा प्रबंधन को मांगें पूरी करने के लिए अवसर प्रदान करना चाहिए। इसके बाद कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया। पूर्व में तय कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को पूरे प्रदेश में महारैली आयोजित की जानी थी। संगठन के नेताओं ने कहा कि परिवार कल्याण योजना भत्ता, अपराध अनुसंधान, अभिसूचना विभाग, स्पेशल टास्क फोर्स तथा सतर्कता विभाग के कर्मियों के विशेष प्रोत्साहन भत्ते के संबंध में सरकार के फैसले का समिति स्वागत करती है। इस दौरान संयोजक मंडल सदस्य दीपक जोशी, राकेश जोशी, नवीन कांडपाल, संतोष रावत, सुनील दत्त कोठारी व ठाकुर प्रह्लाद सिंह, हरीश नौटियाल, सुभाष लाल, बनवारी सिंह रावत, सूर्य प्रकाश राणाकोटी, देव रावत, रमेश नेगी, अनंत राम शर्मा, शूरवीर सिंह रावत, नंद किशोर त्रिपाठी, यशवंत सिंह रावत, संदीप शर्मा, राजेश प्रसाद मौर्य, उपेंद्र त्रिपाठी, शक्ति प्रसाद भट्ट, वीरेंद्र सिंह, जमुना प्रसाद भट्ट, सूरत सिंह, जीएन कोठियाल, राजेंद्र सैनी, एसएन रतूड़ी, मुकेश रतूड़ी, राजीव चौहान व सुरेंद्र प्रसाद बड़ोती आदि मौजूद रहे।

पूर्व समाचार : कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, आवास भत्ते में संशोधन पर मुहर; जानिए कितना बढ़ा

नवीन समाचार, देहरादून, 1 फरवरी 2019। कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों के आवास भत्ते में संशोधन पर मुहर लग गई है। जिसके बाद अब आवास भत्ता सातवें वेतनमान में न्यूनतम वेतनमान का आठ, दस और 12 फीसद होगा। आपको बता दें कि पहले ये भत्ता पांच, सात और नौ फीसद था।  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में कर्मचारियों की भत्तों के आवास भत्तों में मुहर लगने के साथ ही बंद किए गए पांच भत्ते परिवार नियोजन, पुलिस से जुड़े तीन भत्ते, सचिवालय भत्ते को बहाल किया गया। साथ ही सवर्ण गरीबों को दस फीसद आरक्षण के लिए अध्यादेश लाने,
दिव्यांगों को राहत देते हुए लोक सेवा आयोग के पदों के आवेदन के लिए शुल्क एससी-एसटी के बराबर करने, पूर्व मुख्यमंत्रियों का आवास किराया किया माफ करने एवं सरकारी आवासों के किराए में चार गुना वृद्धि घटा कर दोगुना करने के निर्णय लिए गए हैं। कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों की बाकी मांगों के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में रिव्यू कमेटी बनाई गई । वहीं, बैठक में ये भी फैसला लिया गया कि किसानों को एक लाख तक बगैर ब्याज के ऋण और महिलाओं को पांच लाख तक ब्याजमुक्त ऋण दिया जाएगा।

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कुमाऊँ कमिश्नरी में बेअसर, कलक्ट्रेट, विवि में ताले, कोषागार कर्मी भी रहे कार्य से विरत
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 जनवरी 2019।
वेतन भत्तों में कटौती सहित 10 सूत्रीय मांगों पर उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी शिक्षक संयुक्त समन्वय समिति के आह्वान पर बृहस्पतिवार को पूरे प्रदेश सहित जिला व मंडल मुख्यालय में कर्मचारियों की बहुचर्चित सामूहिक अवकाश आंदोलन का मिला-जुला असर देखने को मिला। वहीं आंदोलनरत कर्मचारियों के प्रांतीय नेतृत्व एवं सरकार के बीच वार्ता के प्रयास भी निरंतर किये जाते रहे। इसके बाद प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत की ओर से कहा गया है कि सरकार आंदोलनरत कर्मचारियों की मांगों को शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में रख सकती है। इस पर आंदोलन की अगुवाई कर रही समिति के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी ने भी सकारात्मक रुख दिखाया है। इससे पूर्व भी आंदोलन के दिन सरकार व कर्मचारी दोनों पक्षों की ओर से वार्ता शुरू करने के प्रति ‘पहले आप-पहले आप’ जैसी स्थिति भी नजर आती रही। जिलों में भी आंदोलनरत कर्मचारी प्रांतीय नेतृत्व व सरकार के बीच शाम को प्रस्तावित बैठक पर टकटकी लगाये रहे।
इधर कुमाऊं कमिश्नरी कार्यालय में हड़ताल पूरी तरह से विफल रही, जबकि बताया गया कि जिला कलेक्ट्रेट, शिक्षा, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, पशुपालन व कृषि आदि विभागों के साथ ही कुमाऊं विवि व इसके सर्वप्रमुख डीएसबी परिसर सहित 56 कार्यालयों में सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल पर रहे। जिला कलेक्ट्रेट में कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के आह्वान पर कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहे, जिस कारण कलेक्ट्रेट में ताले लटके रहे। वहीं कुछ विभागों में कर्मचारियों ने उपस्थिति पंजिका में दस्तखत किए पर काम नहीं किया। जबकि कमिश्नरी में रोज की तरह कामकाज चला। हड़ताल में प्रमुख रूप से समन्वय समिति के अध्यक्ष बहादुर बिष्ट, जगमोहन रौतेला, भगोत सिंह जंतवाल, नवीन कांडपाल, ललित मोहन पांडे, मनोज साह, अजय बिष्ट, भुवन बिष्ट, राजेंद्र बिष्ट,, उमेश सनवाल व असलम अली आदि कर्मचारी नेताओं की भूमिका रही। उधर पूरे प्रदेश में इसी तरह हड़ताल का मिला-जुला असर देखने को मिला है।
वहीं समन्वय समिति से इतर ग्रेड पे, आईपीएओ भत्ते, पदोन्नति, काम के बदले अतिरिक्त वेतन सहित नौ सूत्रीय मांगों पर बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय स्थित कोषागार के कर्मी प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर कार्य पर आये किंतु कार्य से विरत रहे। इसके साथ ही जिले की उपकोषागारों में भी कामकाज नहीं हुआ। आंदोलित कर्मचारियों का कहना था कि उनके 4600 व 4800 ग्रेड पे के बारे में सरकार की ओर से कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है। साथ ही विभिन्न अवकाशों पर किये जाने वाले अतिरिक्त कार्य के बदले वर्ष में 15 दिन का अतिरिक्त वेतन दिये जाने व पदोन्नति में 80/20 का अनुपात लागू करने की मांगें कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें : 10 सूत्री मांगों पर उत्तराखंड के तीन लाख कर्मचारी आज रहेंगे हड़ताल पर, दोनों ओर से दबाव

नवीन समाचार, देहरादून, 31 जनवरी 2019। आसन्न लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में 10 सूत्री मांगों को लेकर प्रदेश के तीन लाख सरकारी कर्मचारी बृहस्पतिवार को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक मंडल ने यह दावा किया है। बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी से समिति संयोजक मंडल की वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।

समन्वय समिति की मांगों पर सरकार और कर्मचारियों के बीच गतिरोध बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री प्रकाश पंत की आंदोलनकारी नेताओं से वार्ता के बाद टूटने के आसार जताए जा रहे हैं। वहीं, सरकार की ओर से फिर वार्ता की पहल को देखते हुए समन्वय समिति ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाएं, एंबुलेंस, रोडवेज बसों के संचालन, विद्युत उत्पादन एवं वितरण से सीधे जुड़े कर्मचारियों को सामूहिक अवकाश से छूट दे दी है। बाकी प्रदेशभर के सभी कर्मचारियों से आह्वान किया गया है कि वे सामूहिक अवकाश पर रहें।  सरकार ने भी इस मामले में कमर कस ली है। दफ्तर आने वाले कर्मचारियों को सरकार की ओर से पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

यह भी पढ़ें : सांसद अनिल बलूनी ने फिर जीत लिया दिल, दिलाई 4000 कर्मियों के लिए राहत की खबर

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 28 जनवरी 2019। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने उत्तराखंड के 4,000 से ज्यादा शिक्षा मित्रों की समस्या का समाधान जल्द करने का भरोसा दिया है। उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी से सोमवार को मुलाकात के दौरान जावडेकर ने शिक्षा मित्रों के मुद्दे के साथ गढ़वाल विश्वविद्यालाय संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार के मुद्दों को भी जल्द हल करने का आश्वासन दिया है।

सांसद अनिल बलूनी ने जावडेकर से मुलाकात कर शिक्षा मित्रों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के चार हजार से अधिक शिक्षा मित्रों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के कारण सेवा समाप्ति का संकट हैं। जावडेकर ने इस विषय पर त्रिपुरा, असम के शिक्षा मित्रों को दी गई राहत के आलोक में परीक्षण कराने का आश्वासन दिया है। बलूनी ने गढ़वाल विश्वविद्यालय में लंबे समय से स्थायी कुलपति न होने से अनेक प्रोन्नतियां, शिक्षण व अध्यापन से जुड़े विषयों पर निर्णय अटके होने का मामला भी उठाया है। जावडेकर ने विश्वविद्यालय में जल्द ही कुलपति की नियुक्ति का आश्वासन दिया है। साथ ही विश्वविद्यालय में विजिटर नॉमिनी की नियुक्ति भी शीघ्र कर दी जाएगी। बलूनी ने जावडेकर के सामने संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार में छात्रावास बनाने का मामला भी उठाया। जावडेकर ने इस पर भी अपनी सहमित जताई है। बाद में बलूनी ने तीनों विषयों पर तत्काल कार्रवाई के आश्वासन के लिए केंद्रीय मंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उपरोक्त तीनों महत्वपूर्ण कार्यो पर मंत्री की स्वीकृति मोदी सरकार की त्वरित और जनोन्मुखी सरकार का प्रतिबिम्ब है।

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  • कार्मिकों के 15 भत्ते खत्म,कैबिनेट के निर्णय के अनुरूप शासनादेश हुआ जारी
  • जोखिम भत्ता अधिकतम 12500 रुपये निर्धारित, पुलिसकर्मियों के भत्ते यथावत रखे गये

नवीन समाचार, देहरादून, 23 जनवरी 2019। मंत्रिमंडल द्वारा पिछले दिनों लिये गये निर्णय के अनुसार कार्मिकों के यात्रा व मकान किराया भत्ते सहित अन्य भत्तों का स्वीकृति दे दी गयी है। इसके साथ ही 15 भत्तों को समाप्त कर दिया गया है। आतंकवाद निरोधक भत्ते, वीआईपी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों व आपदा प्रबंधन में लगे कार्मिकों को भी अधिकतम 12500 रुपये जोखिम भत्ता मिलेगा। सचिव वित्त अमित नेगी ने इस संबंध में बुधवार को आदेश जारी कर दिये हैं। कार्मिकों के यात्रा भत्ते को लेकर विस्तृत आदेश जारी कर दिया गया है। इसके तहत वेतन स्तर 16 और उसके ऊपर के अधिकारियों को वायुयान में विजनेस क्लास का टिकट और शताब्दी एक्सप्रेस में एक्जीक्यूटिव क्लास का टिकट अनुमन्य होगा। इस श्रेणी में अवस्थापना के लिए 2000 व दैनिक भत्ता 700 Rs प्रतिदिन दिया जाएगा। यह भत्ता प्रदेश से बाहर के लिए क्रमश: 6000 व 800 होगा। इसी तरह वेतन स्तर 13 ए से 15 तक विमान में इकोनामी क्लास व अवस्थापना के लिए प्रदेश में 1500 व बाहर 4500 दिया जाएगा। वेतन स्तर 10 से 13 तक रेलवे का एसी टू टियर व एसी बस अवस्थापना भत्ता प्रदेश में 1000 व बाहर के लिए 2250 दिया जाएगा। वेतन स्तर 6 से 9 तक एसी री टियर व एसी बस के साथ ही अवस्थापना भत्ता प्रदेश में 400 व बाहर के लिए 750 मिलेगा। वेतन स्तर 1 से 5 तक स्लीपर क्लास का टिकट व साधारण बस की सुविधा के साथ प्रदेश में 250 व प्रदेश से बाहर 450 अवस्थापना भत्ता मिलेगा। शासकीय गेस्ट हाउस/ विश्राम गृहों व होटल में रहने पर दैनिक भत्ते के अतिरिक्त भी देय होगा, लेकिन इसके लिए बिल प्रस्तुत करने होंगे। नि:शुल्क आवास उपलब्ध होने पर व्यय की प्रतिपूर्ति नहीं की जाएगी। वहीं शासन ने कार्मिकों को मिलने वाले 12 भत्ते बरकरार भी रखे हैं।

यह भी पढ़ें : दो लाख राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का एरियर भुगतान करने का शासनादेश जारी

नवीन समाचार, देहरादून, 21 जनवरी 2019। उत्तराखंड सरकार ने बजट सत्र से पहले कर्मचारियों को बहुत बड़ी सौगात दी है। त्रिवेंद्र सरकार ने दो लाख कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत लागू सातवें वेतनमान का एरियर भुगतान करने का आदेश जारी कर दिया है। प्रदेश में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2016 से लागू हुईं हैं। कार्मिकों को नए वेतनमान का लाभ एक जनवरी 2017 से दिया गया।

सोमवार को अपर सचिव (वित्त) अरुणेंद्र सिंह चौहान ने इसका शासनादेश जारी कर दिया। बकाया एरियर का भुगतान आयकर की कटौती के साथ एक फरवरी से कर्मचारियों के भविष्य निर्वाह निधि (जीपीएफ) में जमा किया जाएगा। शासनादेश के मुताबिक जमा राशि सामान्य स्थितियों में एक वर्ष से पूर्व नहीं निकाली जाएगी। जिन कार्मिकों का जीपीएफ खाता नहीं होगा, उन्हें आयकर कटौती करके नकद भुगतान किया जाएगा। एक जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक के अवशेष वेतन को दो किस्तों में दिया जाएगा। एरियर की पहली किस्त वर्ष 2017-18 के दौरान जारी की गई। एक जुलाई 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक की अवधि के अवशेष एरियर का भुगतान एक फरवरी 2019 से देने का निर्णय लिया गया है।

यह भी पढ़ें : नियमित कर्मचारियों के पदों को व्यक्त मान कर उन पर सीधी भर्ती से भरे जाने के आदेश पर रोक

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जनवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 2016 की विनियमितीकरण नियमावली निरस्त होने के बाद राज्य मंत्रिमंडल के इस नियमावली के तहत नियमित कर्मचारियों के पदों को रिक्त मानकर उन पर सीधी भर्ती से भरे जाने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। राज्य मंत्रिमंडल के इस फैसले से राज्य के करीब 1200 कर्मियों पर नौकरी गंवाने की तलवार लटक गयी थी, जबकि अब न्यायालय के इस आदेश से उन पर लटकी तलवार फिलहाल हट गई है। न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद इन पदों को विज्ञापित करने के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि सुशीला तिवारी अस्पताल की ममता डंगवाल सहित 27 अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि उच्च न्यायालय ने नियमावली को रद्द कर दिया था। इसके बाद 7 जनवरी को राज्य मंत्रिमंडल ने इस नियमावली के तहत भर्ती नियमित कर्मचारियों के पदों को रिक्त मानते हुए उन्हें सीधी भर्ती से भरने एवं इस हेतु विज्ञापन जारी करने का निर्णय लिया है।

यह भी पढ़ें : नए साल पर 2 लाख से ज्यादा राज्य कर्मियों को 667 करोड़ की बड़ी सौगात देगी सरकार !

नवीन समाचार, देहरादून, 6 जनवरी 2019 । प्रदेश के दो लाख से ज्यादा कार्मिकों के लिए नया वर्ष नई सौगात लेकर आया है। आखिरकार सरकार उनकी मुराद पूरी करने जा रही है। उन्हें सातवें वेतनमान के बकाया एरियर के साथ ही भत्तों का तोहफा भी मिलेगा। सातवें वेतनमान के भत्तों के निर्धारण को लेकर वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट सब कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। यह रिपोर्ट अगली कैबिनेट में रखी जाएगी।  सूत्रों की मानें तो उत्तरप्रदेश ने नए वेतन में मकान किराया भत्ते को मूल वेतन का 20 फीसद और हिमाचल प्रदेश ने 10 फीसद तक रखा है। उत्तराखंड यदि भत्ते को 20 फीसद तक रखता है तो उसे 55 करोड़ और 30 फीसद की स्थिति में 83 करोड़ का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। वहीं नए वेतनमान के सभी भत्तों को मिलाया जाए तो कुल सालाना आर्थिक बोझ 367 करोड़ तक पड़ेगा। यानी उक्त दोनों तोहफे कर्मचारियों को देने की स्थिति में राज्य सरकार को 667 करोड़ का अतिरिक्त खर्च उठाना होगा। सातवें वेतनमान का बकाया एरियर और भत्तों की मांग को लेकर राज्य के कर्मचारी लंबे समय से आंदोलनरत सरकारी, सार्वजनिक निगमों-उपक्रमों के साथ ही विभिन्न अ‌र्द्धसरकारी संस्थानों के कर्मचारियों के तमाम संगठनों के संयुक्त मोर्चा की मांगों पर झुकते हुए राज्य सरकार ने लोकसभा चुनाव की दहलीज पर दस्तक देने से ऐन पहले सरकारी कार्मिकों के असंतोष को दूर करने की ठान ली है। कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ एक जनवरी 2016 से लागू किया गया है। एक जनवरी 2017 से सातवें वेतन का बकाया एरियर का भुगतान कर्मचारियों को किया जा चुका है। अब एक जनवरी 2016 से लेकर 31 दिसंबर, 2016 तक एरियर का भुगतान होना बाकी है। यह रकम छोटी-मोटी नहीं, बल्कि 300 करोड़ के करीब है। इसके लिए सरकार ने जरूरी बंदोबस्त कर लिए हैं। इस संबंध में जल्द आदेश जारी किए जाएंगे। वहीं, सातवें वेतनमान के भत्तों को देने की हिम्मत भी सरकार जुटा रही है। वित्त मंत्री की अध्यक्षता में सब कमेटी की रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है। इस रिपोर्ट को अगली कैबिनेट बैठक में रखा जाना तकरीबन तय है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक सब कमेटी ने पड़ोसी सातवें वेतनमान के भत्तों (मकान किराया भत्ता, महंगाई भत्ता व यात्रा भत्ता) को लेकर पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तरप्रदेश के फार्मूले का भी अध्ययन किया। इसमें सबसे अहम मकान किराया भत्ते का पेच है। राज्य कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की भांति भत्ते नहीं दिया जाना तकरीबन तय माना जा रहा है। संपर्क करने पर वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि उक्त दोनों मामलों को अगली कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। (रविंद्र बड़थ्वाल )

यह भी पढ़ें : आम चुनाव पर प्रदेश के अधिकारियों-कर्मचारियों की आम हड़ताल की योजना

-उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच का 2 से आंदोलन का ऐलान
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 दिसंबर 2018। प्रदेश के सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान आम हड़ताल करने की तैयारी है। या कहें कि चुनाव से पहले अपनी मांगों पर सरकार पर दबाव बनाने की योजना है। इसी कड़ी में उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच ने आगामी 2 जनवरी से अपनी सात सूत्रीय मांगों पर आंदोलन का ऐलान कर दिया है। उनकी मांगों में प्रदेश के कार्मिकों को केंद्र के समान समस्त भत्ते तत्काल अनुमन्य किये जाने, यू-हेल्थ कार्ड की सुविधा देने व देश-प्रदेश के उच्च स्तरीय सुविधा सम्पन्न चिकित्सालयों को इसमें शामिल करने, प्रदेश के समस्त कार्मिकों को पूरे सेवाकाल में न्यूनतम तीन पदोन्नति अनिवार्य करने, अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण की पूर्ववर्ती व्यवस्था को यथावत लागू रखने, 1 अक्तूबर 2005 के बाद नियुक्त कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था शीघ्र बहाल करने तथा स्थानांतरण अधिनियम में राज्य के कार्मिकों के सेवानिवृत्ति के अंतिम वर्ष में उसके ऐच्छिक स्थान पर अनिवार्य रूप से स्थानांतरण, पद स्थापना का प्राविधान करने एवं पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा शासन को प्रस्तुत की गयी रिपोर्ट को कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसे संज्ञान में न लेने की मांगें शामिल की गयी हैं।
आंदोलन के तहत दो जनवरी 2019 को समस्त कार्मिकों से एक दिन का व्यक्तिगत अवकाश लेकर सभी जिलों में धरना तथा डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने, 15 से 31 जनवरी तक पूरे प्रदेश में जनजागरण अभियान चलाने एवं जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भेजने एवं चार मई को सभी जिलों के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा राजधानी देहरादून जाकर विशाल महारैली के माध्यम से सचिवालय का घेराव व मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर उसी दिन आम हड़ताल की घोषण करने का कार्यक्रम तय किया गया है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा लोक सभा का कार्यकाल 25 मई 2019 को समाप्त हो रहा है, और इससे पूर्व मई माह में ही चुनाव होने की संभावना है। मालूम हो कि 16वीं लोकसभा के लिए चुनाव 7 अप्रैल से 12 मई 2014 के बीच हुए थे और 16 मई को चुनाव परिणाम आये थे तथा 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मौजूदा सरकार गठित हुई थी। इसी कड़ी में आगामी 2 जनवरी को मुख्यालय में डीएस कार्यालय के सम्मुख सामूहिक धरना कार्यक्रम में भाग लेने को कहा गया है।

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