नैनीताल के डीएम के खिलाफ देहरादून में लामबंदी…

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नवीन समाचार, देहरादून, 6 जनवरी 2020। नैनीताल जनपद के जिला अधिकारी की सख्त कार्यशैली शायद कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रही है। शायद इसी कारण उनके खिलाफ देहरादून में लामबंदी हो रही है। यहां उत्तराखंड इंजीनियर फेडरेशन ने नैनीताल के डीएम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है। फेडरेशन की रविवार को आईएसबीटी के समीप इंजीनियर्स भवन में फेडरेशन के अध्यक्ष इंजीनियर सुभाष चंद्र पांडे की अध्यक्षता में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि नैनीताल के डीएम अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हुए चुनाव आयोग की ओर से निर्गत आदेशों का भी पालन नहीं कर रहे हैं। कुछ समय पहले पंचायत चुनाव में डीएम ने मुख्य अभियंता की ड्यूटी लगा दी थी, वहीं अधीक्षण अभियंता व अधिशासी अभियंता का वेतन रोक दिया था। नैनीताल के डीएम व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अभियंताओं के विरोध में कार्य किए जा रहे हैं, जिससे कई विभागों के अभियंता या तो मुख्यालय शिफ्ट हो रहे हैं या फिर क्षेत्रीय कार्यालय में संबद्ध होने को विवश हो रहे हैं। बैठक में उत्तराखंड इंजीनियर्स फेडरेशन के महासचिव जितेंद्र सिंह देव, सुरेश तोमर, पंकज बर्त्वाल, कुमारी वंदिता, सुनील कुमार व आरके गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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कहा, जब राष्ट्रपति, सांसद, विधायक, राज्यपाल को मिलने वाले वेतन को आयकर के दायरे से बाहर रखा गया है तो कर्मकारियो की मिलने वाले वेतन को भी आयकर के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 दिसंबर 2019। उत्तराखण्ड हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति सुुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सरकारी व गैर सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन को आयकर के दायरे में लाने के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई दो जनवरी की तिथि नियत की है।
मामले के अनुसार देहरादून के 87 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मी ओपी खंडूरी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा सरकारी व गैर सरकारी विभागों में कार्यरत या सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन से प्राप्त आय पर आयकर विभाग आयकर वसूलता है। यह सविधान के विरुद्ध है। याची का कहना है कि कर्मचारियों को जो वेतन दिया जाता है वह उसके पारिश्रमिक का तोहफा है उस पर आयकर लगाना गलत है। याची का यह भी कहना है कि जब राष्ट्रपति, सांसद, विधायक, राज्यपाल को मिलने वाले वेतन को आयकर के दायरे से बाहर रखा गया है ठीक उसी प्रकार कर्मकारियो की मिलने वाले वेतन को भी आयकर के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।

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-ऊधमसिंह नगर के एडीएम-नजूल जगदीश कांडपाल की ईमानदारी से त्रस्त जिला कलक्ट्रेट के कर्मचारियों ने मुख्य सचिव को भेजे सामूहिक त्यागपत्र

नवीन समाचार, रुद्रपुर, 13 दिसंबर 2019। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जनपद के अपर जिलाधिकारी-नजूल जगदीश कांडपाल को उनकी ईमानदारी का ऐसा पुरस्कार मिला है कि देश-प्रदेश के कोई भी ईमानदार अधिकारी ईमानदारी से तौबा कर लें। जी हां, जिला कलक्ट्रेट के कर्मचारियों ने कांडपाल को हटाने की मांग पर सामूहिक त्यागपत्र मुख्य सचिव को भेज दिये हैं। कांडपाल की छवि शुरू से ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की रही है। अल्मोड़ा स्थित पटवारी प्रशिक्षण संस्थान से लेकर कुमाऊं मंडल के अपर मंडलायुक्त रहते भी अपनी ईमानदारी से बेइमानों की नाक में दम कर चुके कांडपाल को इसी कारण कई बार उनकी वरिष्ठता से बड़ी जिम्मेदारियां मिली हैं। अब उन पर इसी तरह का आरोप भी है कि वे कनिष्ठ ईमानदार कर्मचारियों से वरिष्ठों का काम ले रहे हैं, जबकि कई वरिष्ठों को कनिष्ठों के काम पर लगा दिया है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि कर्मचारियों के आंदोलन के पीछे कुछ ऐसे बाहरी लोग भी हैं जो डीएम एवं एडीएम की ईमानदारी से त्रस्त हैं।
बताया जा रहा है कि एडीएम कांडपाल से कर्मचारियों को यह परेशानी भी है कि उन्होंने कलक्ट्रेट में सभी कर्मचारियों के लिए समय से दफ्तर पहुंचने और अनुशासन में रहने पर सख्ती बरती है। वे विभिन्न सरकारी अभिलेखों का रखरखाव उचित तरीके से रखने पर भी जोर देते हैं। अनुशासनप्रियता के कारण वह सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटते। एडीएम की ऐसी सख्ती के कारण कर्मचारियों की मनमानी पर अंकुश लगा है। इसलिए उनका सख्त रवैया कर्मचारियों को नहीं भा रहा है। इसलिए उनके खिलाफ कलक्ट्रेट के कर्मचारियों ने लामबंद होकर अपने सामूहिक इस्तीफे मुख्य सचिव को भेज दिए हैं, और हड़ताल पर चले गए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि कुछ राजनीतिक लोग डीएम से अपनी नाराजगी को लेकर कर्मचारियों के आंदोलन को हवा दे रहे हैं, और परदे के पीछे रह कर खेल खेल रहे हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 29 नवंबर 2019। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण को लेकर एससी-एसटी फेडरेशन समेत अन्य की याचिकाओं को निस्तारित कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड में सितंबर माह से पदोन्नति पर लगी रोक हट गई है। इधर, आदेश होते ही कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

दरअसल, पदोन्नति में आरक्षण का मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद उत्तराखंड में तमाम सरकारी महकमों ने पहली अप्रैल 2019 से ही पदोन्नति पर रोक लगा दी। सरकार ने भी 11 सितंबर को एक आदेश जारी कर पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी। पदोन्नति में रोक की वजह से विभिन्न विभागों के कर्मचारी संगठन सरकार पर हमलावर हैं। पिछले दिनों हाई कोर्ट ने एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए चार माह के भीतर आरक्षित वर्ग के कार्मिकों के डेटा तैयार करने के निर्देश दिए थे। नवंबर 2012 में राज्य सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण खत्म कर दिया था। यह मामला फिर सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले में दस दिसंबर की तिथि नियत है। इधर एसएसी-एसटी इम्पलाइज यूनियन, चंद्रप्रकाश, नंदकिशोर समेत अन्य ने याचिका दायर कर आरक्षित वर्ग के कार्मिकों की अलग-अलग सूची तैयार करने व पहले आरक्षित वर्ग के कार्मिकों को पदोन्नति में आरक्षण देने की मांग की। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। सरकार की ओर से सीएससी ने कहा कि 2012 के शासनादेश के निरस्त होने के आधार पर पुराने आदेश स्वत: रिवाइज नहीं होंगे। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन, न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने एससी-एसटी फेडरेशन समेत अन्य की याचिकाएं निस्तारित करते हुए पदोन्नति पर लगी रोक हटा दी। इधर अदालत के फैसले के बाद उत्तराखंड जनरल-ओबीसी इम्पलाइज यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि सरकार को यह समझाना होगा कि तमाम कर्मचारी राज्य की सेवा के बाद बिना पदोन्नति के रिटायर हो रहे हैं। सरकार को सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले के अधीन कर पदोन्नति शुरू करनी चाहिए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य में 30 अगस्त व 31 अगस्त 2001 का रोस्टर लागू किया गया था। यह रोस्टर करीब सौ बिंदुओं का है। राज्य में करीब ढाई लाख सरकारी कार्मिक हैं। इसमें से करीब 35 हजार एससी-एसटी कर्मचारी हैं।

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-सरकार को दिये विभागों में कार्यरत एससी-एसटी कार्मिकों के आंकड़े एकत्रित करने के आदेश
-पदोन्नति में आरक्षण देना अथवा न देना सरकार के ऊपर करेगा अब निर्भर, कोर्ट के आदेश के बाद पदोन्नति की राह खुली
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 नवंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पदोन्नति में आरक्षण को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका को निस्तारित कर दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को चार माह के भीतर सरकारी विभागों में कार्यरत अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के कर्मचारियों का डाटा एकत्र करने और उसके बाद पदोन्नति में आरक्षण पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार विनोद प्रकाश नौटियाल ने हाईकोर्ट द्वारा 1 अप्रैल 2019 को ज्ञान चंद बनाम उत्तराखंड सरकार में पारित आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एम नागराज व उसके बाद जनरैल सिंह व अन्य मामलों में दिए गए निर्णयों के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने के निर्देश देते हुए इसके खिलाफ राज्य सरकार द्वारा जारी नियमावली निरस्त कर दी थी। इस पर विनोद प्रकाश नौटियाल ने पुनर्विचार याचिका दायर कर विभिन्न तर्कों के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण को निरस्त करने की अपील की थी। इस मामले में मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने आठ नवम्बर को सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था। जिस पर आज फैसला सुनाया गया।
विदित हो कि हाईकोर्ट ने अपने 1 अप्रैल 2019 के आदेश में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर किसी भी तरह के डाटा को जरूरी नहीं बताया था। जिसके विरुद्ध उत्तराखंड के सामान्य एवं ओबीसी वर्ग के प्रभावित कार्मिकों की ओर से पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी। एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बीपी नौटियाल हाईकोर्ट में कर्मचारियों के पक्ष में दलील दे रहे थे। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए अपने पूर्व के आदेश में संशोधन कर यह आदेश पारित किए। जिसमें सरकार को चार माह के भीतर कार्यरत एससी-एसटी कर्मचारियों के आंकड़े एकत्रित करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही पदोन्नति में आरक्षण देना अथवा न देना सरकार के ऊपर छोड़ दिया है। इस आदेश में साफ किया गया है कि पदोन्नति में आरक्षण देने या न देने का निर्णय सरकार पर निर्भर करता है।

कोर्ट के आदेश से सामान्य व ओबीसी वर्ग के कार्मिक गदगद, कहा-हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार की ओर से पदोन्नति पर लगाई रोक तत्काल हटाने की कार्रवाई को कार्मिक विभाग पर बनाएंगे दवाब, नवम्बर और दिसंबर माह में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से पहले सभी को पदोन्नति का लाभ दिलाने का होगा प्रयास

देहरादून। हाईकोर्ट में सामान्य एवं ओबीसी संवर्ग एसोसिएशन के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता बीपी नौटियाल ने पत्रकारों को हाईकोर्ट के संशोधित आदेश के बाबत विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय का यह बड़ा फैसला है। कोर्ट के आदेश के बाद पदोन्नति पर लगी रोक हटेगी। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने आदेश दिये हैं कि सरकारी विभागों में एससी-एसटी के कार्यरत कार्मिकों के आंकड़े जुटाने के बाद सरकार चाहे तो पदोन्नति में आरक्षण लागू कर सकती है, लेकिन इसके लिए सरकार के पास पर्याप्त आधार होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आरक्षण में पदोन्नति की कोई व्यवस्था नहीं है। यह व्यवस्था राज्य सरकार का निर्णय है। यूपी में 2011 में इस व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खत्म कर दिया गया है। उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्पलाइज एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी ने हाईकोर्ट के आदेश को कर्मचारियों की बड़ी जीत बताया है। उच्च न्यायालय ने अपने एक अप्रैल के आदेश पर विचार कर कर्मचारियों की पीड़ा को समझा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद 11 सितंबर 2019 को राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में पदोन्नति पर लगाई रोक हटने से पदोन्नति की राह खुल जाएगी। इससे कई ऐसे कार्मिकों को भी फायदा होगा, जिनकी सेवानिवृत्ति 30 नवम्बर और दिसंबर माह में होनी है। अब एसोसिएशन सरकार की ओर से पदोन्नति पर लगाई गई रोक को हटाने के लिए सरकार के 11 सितंबर को पारित आदेश को निरस्त करवाने के लिए दवाब बनाएगी। ताकि पूर्व की भांति बिना आरक्षण दिए तत्काल पदोन्नतियां कराई जा सके। पत्रकार वार्ता में संगठन के महासचिव वीरेन्द्र गुसांई, संगठन मंत्री हीरा सिंह बसेड़ा, कोषाध्यक्ष सीएल असवाल, डीएस सरियाल, बीपी नौटियाल, आशू सेमवाल, विष्णुदत्त बेंजवाल, मुकेश बहुगुणा, प्रवीन सक्सेना, शिवराज सिंह, शांतनु शर्मा आदि मौजूद रहे। उधर आरक्षित वर्ग में इस आदेश के बाद निराशा देखी जा रही है।

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-उत्तराखंड राजकीय पेंशनर संघ के वार्षिक अधिवेशन में हुआ 80 वर्ष से अधिक उम्र के पेंशनरों का परंपरागत सम्मान, विधायकों की तर्ज पर मांगी 65 की उम्र में अतिरिक्त पेंशन वृद्धि
नवीन समाचार, नैनीताल, 14 नवंबर 2019।
उत्तराखंड राजकीय पेंशनर संघ ने पंजाब एवं हरियाणा के पेंशनरों तथा उत्तराखंड के विधायकों की तर्ज पर उन्हें भी 65 वर्ष की उम्र पूरी करने पर अतिरिक्त पेंशन वृद्धि देने की मांग की है। साथ ही एक जनवरी 2016 से पूर्व के पेंशनरों को संशोधित पेंशन देने तथा एक जनवरी 2006 से 31 दिसंबर 2015 के बीच के सभी शासनादेशों को एक जनवरी 2006 से लागू करते हुए एक जनवरी 2006 से छठे वेतन आयोग का लाभ देने की मांग की है। इसके अलावा जल निगम एवं जल संस्थान के कर्मियों को भी सातवें वेतन आयोग का लाभ तत्काल देने एवं अटल आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना को सही व भ्रष्टाचार मुक्त तरीके से लागू करने की मांग की है।
बृहस्पतिवार को मुख्यालय में आयोजित पेंशनरों के वार्षिक अधिवेशन में यह मांगें उठाई गईं। इस मौके पर 80 वर्ष की आयु पूरी करने वाले कुंदन बिष्ट, डा. बीसीएल साह, नवीन लाल साह, सुधा टंडन एवं केपी काला का माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर परंपरागत सम्मान किया गया। संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष पान सिंह रौतेला ने किया। अधिवेशन में जनपद की मुख्य कोषाधिकारी अनीता आर्य के साथ संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जेएस जैन, प्रदेश महामंत्री बची सिंह रावत, संगठन मंत्री सीपी घिल्डियाल, बीडी पलड़िया, पीसी कांडपाल, गौरा देवी देव, डा. मधु नयाल, चंद्रकला खोलिया, नवीन चंद्र पंत, आनंद राम आर्या, डीडी जोशी, मुन्नी थापा व नवीन चंद्र साह सहित संगठन के अनेक सदस्य मौजूद रहेे।

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मोदी सरकार ने बनाया ड्राफ्ट, ड्राफ्ट में ज्यादातर पुराने सुझाव, मेहनताना तय करने को देश तीन जियोग्राफिकल वर्गों में बांटा, अभी आठ घंटे के नियम के तहत 26 दिन काम के बाद तय होता है कर्मचारियों का वेतन
Big news for government employees, now may have to work 9 hours instead of 8नवीन समाचार, नई दिल्ली, 10 नवंबर 2019। मोदी सरकार सेवानिवृत्ति के लिए 33 वर्ष की सेवा या 60 वर्ष की उम्र पूरी करने के साथ ‘वेज कोड रूल्स’ में बदलाव कर सकती है। नये ‘वेज कोड रूल्स’ के ड्राफ्ट में दिन में आठ की जगह नौ घंटे काम करने की सिफारिश की गई है। ड्राफ्ट में कर्मचारियों का वेतन तय करने के लिए पूरे देश को तीन जियोग्राफिकल वर्गों में बांटा गया है।
इस बाबत श्रम मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों से एक महीने में सुझाव मांगे हैं। केंद्र सरकार की ओर से जारी ड्राफ्ट में कहा है कि भविष्य में विशेषज्ञों की एक कमेटी न्यूनतम मजदूरी तय करने के मसले पर सरकार से सिफारिश करेगी। गौरतलब है कि श्रम मंत्रालय ने जनवरी में 375 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से न्यूनतम वेतन की सिफारिश की थी। पैनल ने इसे जुलाई 2018 से लागू करने को कहा था। न्यूनतम मासिक वेतन 9,750 रुपये रखने की सिफारिश की थी। ड्राफ्ट में कहा गया है कि जब न्यूयतम वेतन पर कोई फैसला लिया जाएगा, तब देश को तीन भौगोलिक कैटेगिरी मे बांटा जाएगा। जिनमें मेट्रोपॉलिटिन एरिया, जिसकी जनसंख्या 40 लाख से ज्यादा है। नॉन मेट्रोपॉलिटिन एरिया, जिसकी जनसंख्या 40 लाख से ज्यादा है। नॉन मेट्रोपॉलिटिन एरिया  जिसकी जनसंख्या 10 लाख से 40 लाख और ग्रामीण इलाके शामिल होंगे। साथ ही घर का किराया न्यूनतम वेतन के 10 % के बराबर तय होगा। हालांकि अभी तकयह स्पष्ट नहीं है कि कैटेगिरी के हिसाब से इनमें कोई बदलाव होगा या नहीं।  

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-एक अप्रैल 2020 यानी करीब 11 माह बाद आईआईटी रुड़की में ही लौटना था प्रो. नौड़ियाल को, राज्यपाल के पत्र के बावजूद आईआईटी रुड़की आवास खाली करवाने को है अडिग
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 मई 2019। 16वें दीक्षांत समारोह के आयोजन में देश के राष्ट्रपति एवं तिब्बती आध्यात्मिक धर्मगुरु दलाई लामा के आगमनएवं आगे यूजीसी के नैक के मूल्यांकन की तैयारियों में जुटे कुमाऊं विश्वविद्यालय को आईआईटी रुड़की की अमानवीयता व हठधर्मिता का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। आईआईटी रुड़की द्वारा आवास खाली करने की चेतावनी के बाद परेशान होकर कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने अपने पद से इस्तीफा देने का पत्र प्रदेश की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को भेज दिया है। इसके बाद विवि के भविष्य पर प्रश्न खड़े हो गये हैं। क्योंकि प्रो. नौड़ियाल का करीब 11 माह का कार्यकाल शेष है। ऐसे में उनकी जगह नये कुलपति के चयन एवं नियुक्ति की प्रक्रिया में लगने वाले समय अंतराल तक विवि को कामचलाऊ व्यवस्था में रहना और इस दौरान ही अक्टूबर माह में दीक्षांत समारोह तथा नैक का मूल्यांकन भी झेलना पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि प्रो. नौड़ियाल मूलतः आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर हैं। 1 अप्रैल 2017 को वे तीन वर्ष के लिए कुमाऊं विवि के कुलपति नियुक्त हुए थे, एवं 31 मार्च 2020 को यहां का सेवाकाल समाप्त कर उन्हें आईआईटी रुड़की में ही लौटना है। इस बीच उनका सामान आईआईटी रुड़की के आवास में है। इधर आईआईटी रुड़की द्वारा उनसे आवास खाली कराने की कवायद की जा रही है, और उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य द्वारा नौड़ियाल को आवंटित आवास को एक वर्ष का विस्तार देने के पत्र को भी आईआईटी रुड़की प्रशासन ने नजरअंदाज कर दिया है। इस पर प्रो. नौड़ियाल ने कहा कि उनके पास अपना आवास बनाये रखने के लिए कुमाऊं विवि से इस्तीफा देकर रुड़की लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि अभी कमरा बाहर लेने के बाद 11 माह बाद उन्हें फिर से अपना सामान आईआईटी द्वारा आवंटित आवास में शिफ्ट करना पड़ेगा। आगे उनके एवं कुमाऊं विवि का भाग्य कुलाधिपति राज्यपाल के अगले कदम पर निर्भर करेगा।

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चुनाव के बाद शपथ ग्रहण करते डीएसबी परिसर कर्मचारी संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 मई 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ की नई कार्यकारिणी का गठन हो गया है। राम सिंह गोसाई नये अध्यक्ष एवं गणेश बिष्ट सचिव निर्वाचित हुए हैं। वहीं उपाध्यक्ष पद पर जगदीश चंद्र सती, महिला उपाध्यक्ष पद पर रीता लोहनी, उप सचिव पद पर लक्ष्मण सिंह बिष्ट व कोषाध्यक्ष पद पर आनंद सिंह मैठानी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। सभी पदाधिकारियों को मुख्य चुनाव अधिकारी केसी चतुर्वेदी ने परिसर निदेशक प्रो. एलएम जोशी सहित अन्य की उपस्थिति में शपथ ग्रहण करा दी है।
इससे पूर्व मंगलवार को हुई मतदान की प्रक्रिया में 137 कर्मचारियों में से 123 यानी 92.48 फीसद ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अध्यक्ष पद पर राम सिंह गुंसाई को 80 व दिनेश चंद्र आर्य को 42 तथा सचिव पद के लिए गणेश सिंह बिष्ट को 78 व चंद्र बल्लभ जोशी को 42 मत मिले। चुनाव को शांतिपूर्ण तरीक से संपादित कराने में अधिष्ठाता छात्र कल्याण दफ्तर से हरीश चंद्र जोशी व राजेंद्र सिंह ढैला, लेखानुभाग से प्रकाश चंद्र पाठक, नंदा बल्लभ पालीवाल व नवीन प्रसाद जबकि क्रीड़ा अनुभाग से लाल सिंह बिष्ट ने सहयोग दिया।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के नगर निकायों, सहायतित स्कूलों, सरकारी विश्वविद्यालय कर्मियों, पेंशनरों के लिए बड़ी खुशखबरी

नवीन समाचार, देहरादून, 7 मार्च 2019। उत्तराखंड के उन सभी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है, जिन्हें पिछले दिनों सातवां वेतनमान अनुमन्य हुआ है, अब उन्हें 9 फीसद की जगह 12 फीसद महंगाई भत्ता दिये जाने की प्रदेश के राज्यपाल ने भी बृहस्पतिवार को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस संबंध में बृहस्पतिवार को प्रदेश के सचिव अमित नेगी की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार राज्य सरकार के कार्मिकों, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, राजकीय विश्वविद्यालयों तथा प्राविधिक शिक्षण संस्थानों के ऐसे सभी कार्मिकों को जिन्हें सातवां पुनरीक्षण वेतनमान अनुमन्य किया गया है, उन्हें अनुमन्य महंगाई भत्ते की दरों में 1 जनवरी 2019 से अनुमन्य मूल वेतन के 9 फीसद की मौजूदा दर को बढ़ाकर 12 फीसद कर दिया गया है। इसका लाल सेवानिवृत्त एवं 6 माह के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को भी मिलेगा। उनकी बढ़ी हुई धनराशि उनके भविष्य निधि खाते में जमा की जाएगी, तथा मई माह में देय अप्रैल माह के वेतन के साथ नगद प्राप्त होगी।

यह भी पढ़ें : लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार का कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, बढ़ा महंगाई भत्ता, और भी बहुत कुछ..

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 19 फरवरी 2019। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्माचारियों को बड़ा तोहफा दिया है. केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारियों और पेंशनधारकों को मिलने वाला महंगाई भत्ता 12 फीसदी कर दिया है. यह फैसला 1 जनवरी, 2019 से लागू होगा जिसका लाभ 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के मिलेगा. इसके अलावा कैबिनेट रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को मंजूरी दी है जो दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ को जोड़ेगा.

कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों को मिलने वाले महंगाई भत्ते में 3 फीसदी का इजाफा किया गया है. इस लिहाज से पहले मिलने वाला 9 फीसदी महंगाई भत्ता 1 जनवरी, 2019 से 12 फीसदी हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश के खजाने पर 9168.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा. सरकार के इस फैसले का लाभ 48.41 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 62.03 लाख पेंशनधारकों को मिलेगा. इसके अलावा कैबिनेट ने दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ के बीच रिजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को मंजूरी दी है. जो दिल्ली-एनसीआर के शहरों को रैपिड कनेक्टिविटी देगा. अरुण जेटली ने बताया कि इस परियोजना पर 30374 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसे पूरा करने में 6 साल लगेंगे.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि संसद का सत्र खत्म हो जाने के चलते कुछ अहम विधेयक लंबित रह गए थे, जिनमें से कुछ विधेयकों पर विपक्ष का भी समर्थन था. इनमें से तीन अध्यादेश के माध्यम से और एक बिल के माध्यम से संसद में पेश किए गए थे. जिसमें से सभी कानून लोकसभा के पारित हो गए थे. लेकिन राज्यसभा में हंगामें के चलते यह कानून लंबित रह गए. इसलिए इन चारों बिल के संबंध में कैबिनेट ने अध्यादेश जारी करते हुए राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेज दिया है. इसमें तीन तलाक बिल, मेडिकल काउंसिल बिल, कंपनी लॉ संशोधन विधेयक और अनरेगुलेटेड डिपॉजिट बिल शामिल हैं.

इसके साथ ही कैबिनेट ने गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के कल्याण और विकास कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए एक बोर्ड के गठन को भी मंजूरी दी है. मोदी सरकार द्वारा पेश अंतरिम बजट में इसका ऐलान किया गया था जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दी है. इसके अलावा कैबिनेट ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी है.

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-एलटी शिक्षक प्रोन्नति पर आपत्तियां दूर, शासन को भेजी पत्रावली
-लोक सेवा आयोग ने पत्रावली पर लगायी थी आपत्तियां
-विभाग ने आयोग का जवाब बनाकर शासन को भेजा

नवीन समाचार, देहरादून, 18 फरवरी 2019। एलटी शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए शिक्षा विभाग ने फिर से पत्रावली शासन को सरका दी है। प्रोन्नति की इस सूची में 1949 शिक्षकों की प्रोन्नति का प्रस्ताव है। लोक सेवा आयोग को इस संबंध में पहले ही पत्रावली चली गयी थी। आयोग ने इसमें कुछ आपत्तियां लगाकर विभाग को वापस भेज दी थी। शिक्षा विभाग के स्तर से इस संबंध में काफी पहले ही फाइल लोक सेवा आयोग को भेज दी गयी थी। इस पत्रावली में पूर्व में तदर्थ रूप से प्रोन्नत शिक्षणों के प्रकरण तो थे ही जिन चार विषयों के अभी तक प्रोन्नति नहीं हो पाये, उनके प्रकरण भी हैं। आयोग ने इस पर आपत्ति लगाकर वापस भेज दिया था। अब शिक्षा विभाग की ओर से आयोग की सभी आपत्तियों पर जवाब दे दिया गया है। विभाग की ओर से फाइल शासन को भेज दी गई है। विभाग ने पिछले वर्ष कई विषयों की प्रोन्नति के आदेश जारी कर दिये थे, लेकिन गणित, भूगोल व विज्ञान से संबंधित भौतिकी, रसायन व जीवविज्ञान विषयों के लिए प्रोन्नति नहीं हो पायी थी। पूर्व में की गयी सभी प्रोन्नतियां तदर्थ रूप में की गयी थी, जबकि शिक्षक संघ ने स्थायी पदोन्नति के लिए दबाव बनाया था। इसी कड़ी में शिक्षा विभाग ने सभी प्रोन्नत शिक्षकों के साथ ही जिन विषयों की प्रोन्नति नहीं हो पायी, उनमें स्थायी प्रोन्नति का प्रस्ताव भेजा था। राशिसं के प्रांतीय महामंत्री डा. सोहन सिंह माजिला ने बताया कि सोमवार को सचिव शिक्षा से मुलाकात करने का कार्यक्रम है। उन्होंने उम्मीद की है कि लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले ही प्रोन्नति की मांग पूरी हो जाएगी।

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नवीन समाचार, देहरादून, 15 फरवरी 2019। उत्तराखंड शासन ने प्रदेश के सभी शिक्षकों-कर्मचारियों व अधिकारियों के मकान किराया भत्तों की पुनरीक्षित दरें जारी कर दी हैं। नयी दरें जनवरी 2019 से लागू होगी। मकान किराये भत्ते की दरें 12, 10, 8 प्रतिशत की जगह वेतन लेवल के हिसाब से तय की गई हैंं। सरकार रानीखेत कैंट एरिया को भी ‘बी’ प्लस श्रेणी में ले आयी हैं। सबसे ज्यादा फायदा देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, मंसूरी, व रानीखेत केन्ट में कार्य करने वाले अधिकारियों व शिक्षक कर्मचारियों को होगा। साथ ही सभी शिक्षक कर्मचारियों को स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ता, वर्तमान में जिनको मिलता हैं उसमें भी बढो़त्तरी की गई हैं। वहीं आगे से स्वैच्छिक कल्याण भत्ता खत्म कर दिया हैं।

बड़ा सुखद समाचार : सरकार का कर्मचारियों की इन मांगों पर नरम रुख, चार फरवरी को प्रस्तावित महारैली स्थगितनवीन समाचार, नैनीताल, 3 फरवरी 2019। सरकार के सकारात्मक रुख के बाद कर्मचारियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। कर्मचारी समन्वय समिति के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को प्रदेश में महारैली का आयोजन होना था। इसे स्थगित कर दिया गया है। इस बाबत शनिवार को उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति की बैठक कचहरी स्थित लोक निर्माण विभाग के डिप्लोमा इंजीनियर संघ भवन में बैठक हुई। समन्वय समिति के प्रवक्ता अरुण पांडे ने कहा कि मकान किराया भत्ते में वृद्धि तथा अन्य कल्याणकारी योजनाएं घोषित किए जाने से सरकार के रुख में नरमी का संकेत मिला है। सरकार तथा प्रबंधन को मांगें पूरी करने के लिए अवसर प्रदान करना चाहिए। इसके बाद कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया। पूर्व में तय कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को पूरे प्रदेश में महारैली आयोजित की जानी थी। संगठन के नेताओं ने कहा कि परिवार कल्याण योजना भत्ता, अपराध अनुसंधान, अभिसूचना विभाग, स्पेशल टास्क फोर्स तथा सतर्कता विभाग के कर्मियों के विशेष प्रोत्साहन भत्ते के संबंध में सरकार के फैसले का समिति स्वागत करती है। इस दौरान संयोजक मंडल सदस्य दीपक जोशी, राकेश जोशी, नवीन कांडपाल, संतोष रावत, सुनील दत्त कोठारी व ठाकुर प्रह्लाद सिंह, हरीश नौटियाल, सुभाष लाल, बनवारी सिंह रावत, सूर्य प्रकाश राणाकोटी, देव रावत, रमेश नेगी, अनंत राम शर्मा, शूरवीर सिंह रावत, नंद किशोर त्रिपाठी, यशवंत सिंह रावत, संदीप शर्मा, राजेश प्रसाद मौर्य, उपेंद्र त्रिपाठी, शक्ति प्रसाद भट्ट, वीरेंद्र सिंह, जमुना प्रसाद भट्ट, सूरत सिंह, जीएन कोठियाल, राजेंद्र सैनी, एसएन रतूड़ी, मुकेश रतूड़ी, राजीव चौहान व सुरेंद्र प्रसाद बड़ोती आदि मौजूद रहे।

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 फरवरी 2019। सरकार के सकारात्मक रुख के बाद कर्मचारियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। कर्मचारी समन्वय समिति के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को प्रदेश में महारैली का आयोजन होना था। इसे स्थगित कर दिया गया है। इस बाबत शनिवार को उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति की बैठक कचहरी स्थित लोक निर्माण विभाग के डिप्लोमा इंजीनियर संघ भवन में बैठक हुई। समन्वय समिति के प्रवक्ता अरुण पांडे ने कहा कि मकान किराया भत्ते में वृद्धि तथा अन्य कल्याणकारी योजनाएं घोषित किए जाने से सरकार के रुख में नरमी का संकेत मिला है। सरकार तथा प्रबंधन को मांगें पूरी करने के लिए अवसर प्रदान करना चाहिए। इसके बाद कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया। पूर्व में तय कार्यक्रम के तहत चार फरवरी को पूरे प्रदेश में महारैली आयोजित की जानी थी। संगठन के नेताओं ने कहा कि परिवार कल्याण योजना भत्ता, अपराध अनुसंधान, अभिसूचना विभाग, स्पेशल टास्क फोर्स तथा सतर्कता विभाग के कर्मियों के विशेष प्रोत्साहन भत्ते के संबंध में सरकार के फैसले का समिति स्वागत करती है। इस दौरान संयोजक मंडल सदस्य दीपक जोशी, राकेश जोशी, नवीन कांडपाल, संतोष रावत, सुनील दत्त कोठारी व ठाकुर प्रह्लाद सिंह, हरीश नौटियाल, सुभाष लाल, बनवारी सिंह रावत, सूर्य प्रकाश राणाकोटी, देव रावत, रमेश नेगी, अनंत राम शर्मा, शूरवीर सिंह रावत, नंद किशोर त्रिपाठी, यशवंत सिंह रावत, संदीप शर्मा, राजेश प्रसाद मौर्य, उपेंद्र त्रिपाठी, शक्ति प्रसाद भट्ट, वीरेंद्र सिंह, जमुना प्रसाद भट्ट, सूरत सिंह, जीएन कोठियाल, राजेंद्र सैनी, एसएन रतूड़ी, मुकेश रतूड़ी, राजीव चौहान व सुरेंद्र प्रसाद बड़ोती आदि मौजूद रहे।

पूर्व समाचार : कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, आवास भत्ते में संशोधन पर मुहर; जानिए कितना बढ़ा

नवीन समाचार, देहरादून, 1 फरवरी 2019। कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों के आवास भत्ते में संशोधन पर मुहर लग गई है। जिसके बाद अब आवास भत्ता सातवें वेतनमान में न्यूनतम वेतनमान का आठ, दस और 12 फीसद होगा। आपको बता दें कि पहले ये भत्ता पांच, सात और नौ फीसद था।  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में कर्मचारियों की भत्तों के आवास भत्तों में मुहर लगने के साथ ही बंद किए गए पांच भत्ते परिवार नियोजन, पुलिस से जुड़े तीन भत्ते, सचिवालय भत्ते को बहाल किया गया। साथ ही सवर्ण गरीबों को दस फीसद आरक्षण के लिए अध्यादेश लाने,
दिव्यांगों को राहत देते हुए लोक सेवा आयोग के पदों के आवेदन के लिए शुल्क एससी-एसटी के बराबर करने, पूर्व मुख्यमंत्रियों का आवास किराया किया माफ करने एवं सरकारी आवासों के किराए में चार गुना वृद्धि घटा कर दोगुना करने के निर्णय लिए गए हैं। कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों की बाकी मांगों के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में रिव्यू कमेटी बनाई गई । वहीं, बैठक में ये भी फैसला लिया गया कि किसानों को एक लाख तक बगैर ब्याज के ऋण और महिलाओं को पांच लाख तक ब्याजमुक्त ऋण दिया जाएगा।

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कुमाऊँ कमिश्नरी में बेअसर, कलक्ट्रेट, विवि में ताले, कोषागार कर्मी भी रहे कार्य से विरत
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 जनवरी 2019।
वेतन भत्तों में कटौती सहित 10 सूत्रीय मांगों पर उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी शिक्षक संयुक्त समन्वय समिति के आह्वान पर बृहस्पतिवार को पूरे प्रदेश सहित जिला व मंडल मुख्यालय में कर्मचारियों की बहुचर्चित सामूहिक अवकाश आंदोलन का मिला-जुला असर देखने को मिला। वहीं आंदोलनरत कर्मचारियों के प्रांतीय नेतृत्व एवं सरकार के बीच वार्ता के प्रयास भी निरंतर किये जाते रहे। इसके बाद प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत की ओर से कहा गया है कि सरकार आंदोलनरत कर्मचारियों की मांगों को शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में रख सकती है। इस पर आंदोलन की अगुवाई कर रही समिति के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी ने भी सकारात्मक रुख दिखाया है। इससे पूर्व भी आंदोलन के दिन सरकार व कर्मचारी दोनों पक्षों की ओर से वार्ता शुरू करने के प्रति ‘पहले आप-पहले आप’ जैसी स्थिति भी नजर आती रही। जिलों में भी आंदोलनरत कर्मचारी प्रांतीय नेतृत्व व सरकार के बीच शाम को प्रस्तावित बैठक पर टकटकी लगाये रहे।
इधर कुमाऊं कमिश्नरी कार्यालय में हड़ताल पूरी तरह से विफल रही, जबकि बताया गया कि जिला कलेक्ट्रेट, शिक्षा, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, पशुपालन व कृषि आदि विभागों के साथ ही कुमाऊं विवि व इसके सर्वप्रमुख डीएसबी परिसर सहित 56 कार्यालयों में सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल पर रहे। जिला कलेक्ट्रेट में कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के आह्वान पर कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहे, जिस कारण कलेक्ट्रेट में ताले लटके रहे। वहीं कुछ विभागों में कर्मचारियों ने उपस्थिति पंजिका में दस्तखत किए पर काम नहीं किया। जबकि कमिश्नरी में रोज की तरह कामकाज चला। हड़ताल में प्रमुख रूप से समन्वय समिति के अध्यक्ष बहादुर बिष्ट, जगमोहन रौतेला, भगोत सिंह जंतवाल, नवीन कांडपाल, ललित मोहन पांडे, मनोज साह, अजय बिष्ट, भुवन बिष्ट, राजेंद्र बिष्ट,, उमेश सनवाल व असलम अली आदि कर्मचारी नेताओं की भूमिका रही। उधर पूरे प्रदेश में इसी तरह हड़ताल का मिला-जुला असर देखने को मिला है।
वहीं समन्वय समिति से इतर ग्रेड पे, आईपीएओ भत्ते, पदोन्नति, काम के बदले अतिरिक्त वेतन सहित नौ सूत्रीय मांगों पर बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय स्थित कोषागार के कर्मी प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर कार्य पर आये किंतु कार्य से विरत रहे। इसके साथ ही जिले की उपकोषागारों में भी कामकाज नहीं हुआ। आंदोलित कर्मचारियों का कहना था कि उनके 4600 व 4800 ग्रेड पे के बारे में सरकार की ओर से कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है। साथ ही विभिन्न अवकाशों पर किये जाने वाले अतिरिक्त कार्य के बदले वर्ष में 15 दिन का अतिरिक्त वेतन दिये जाने व पदोन्नति में 80/20 का अनुपात लागू करने की मांगें कर रहे हैं।

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नवीन समाचार, देहरादून, 31 जनवरी 2019। आसन्न लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में 10 सूत्री मांगों को लेकर प्रदेश के तीन लाख सरकारी कर्मचारी बृहस्पतिवार को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक मंडल ने यह दावा किया है। बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी से समिति संयोजक मंडल की वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।

समन्वय समिति की मांगों पर सरकार और कर्मचारियों के बीच गतिरोध बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री प्रकाश पंत की आंदोलनकारी नेताओं से वार्ता के बाद टूटने के आसार जताए जा रहे हैं। वहीं, सरकार की ओर से फिर वार्ता की पहल को देखते हुए समन्वय समिति ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाएं, एंबुलेंस, रोडवेज बसों के संचालन, विद्युत उत्पादन एवं वितरण से सीधे जुड़े कर्मचारियों को सामूहिक अवकाश से छूट दे दी है। बाकी प्रदेशभर के सभी कर्मचारियों से आह्वान किया गया है कि वे सामूहिक अवकाश पर रहें।  सरकार ने भी इस मामले में कमर कस ली है। दफ्तर आने वाले कर्मचारियों को सरकार की ओर से पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

कोषागारों को वेतन काटने के निर्देश
कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश पर जाने के एलान के बाद प्रदेश सरकार का कड़ा रुख बना हुआ है। बुधवार को वित्त विभाग ने निदेशक कोषागार को निर्देश दिए हैं कि जो कर्मचारी बिना अनुमति अवकाश पर रहेगा, ‘कार्य नहीं तो वेतन नहीं’ के सिद्धांत के आधार पर उसका एक दिन का वेतन जारी न किया जाए। ये आदेश उपनल, पीआरडी, विभागीय संविदा पर भी समान रूप से लागू होगा।

सचिवालय कर्मियों की छुट्टी पर रोक
सचिवालय प्रशासन सचिवालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टी पर रोक लगा दी है। प्रभारी सचिव सचिवालय प्रशासन इंदुधर बौड़ाई ने इस संबंध में सभी संयुक्त सचिवों, उप सचिवों, अनुसचिवों और अनुभाग अधिकारियों को आदेश जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि समन्वय समिति के 31 जनवरी और चार फरवरी को घोषित आंदोलन के तहत किसी भी प्रकार का अवकाश न दिया जाए। अपरिहार्य स्थिति में ही अवकाश स्वीकृत हो। कहा गया है कि अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, प्रभारी सचिव की संस्तुति के बगैर अवकाश न दिया जाए।वित्त मंत्री से वार्ता आज
सातवें वेतनमान के भत्तों समेत 10 सूत्रीय मांग पत्र पर वित्त मंत्री प्रकाश पंत से उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति की बैठक राज्य सचिवालय में बृहस्पतिवार को होगी। अपर सचिव कार्मिक एसएस वल्दिया ने समन्वय समिति को वार्ता का न्योता भेज दिया है। समिति ने वार्ता में भाग लेने का फैसला किया है।

संवाद से ही निकलेगा हल
समस्याओं के समाधान संवाद से ही निकाले जा सकते हैं। कर्मचारी हमारे अपने हैं और राज्य के संसाधन भी अपने हैं। मैं पूरी तरह से आशान्वित हूं कि वार्ता में समाधान निकाल लिया जाएगा।
– प्रकाश पंत, वित्त मंत्री

सरकार के संवाद की पहल का हम स्वागत करते हैं। लेकिन साथ ही ये आशा भी करते हैं कि जिन मांगों पर सहमति बनेगी, सरकार उन पर अक्षरश: अनुपालन करेगी। आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर बाकी तीन लाख कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।
– दीपक जोशी, संयोजक, उत्तराखंड अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक समन्वय समिति (इनपुट अमर उजाला)

यह भी पढ़ें : सांसद अनिल बलूनी ने फिर जीत लिया दिल, दिलाई 4000 कर्मियों के लिए राहत की खबर

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 28 जनवरी 2019। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने उत्तराखंड के 4,000 से ज्यादा शिक्षा मित्रों की समस्या का समाधान जल्द करने का भरोसा दिया है। उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी से सोमवार को मुलाकात के दौरान जावडेकर ने शिक्षा मित्रों के मुद्दे के साथ गढ़वाल विश्वविद्यालाय संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार के मुद्दों को भी जल्द हल करने का आश्वासन दिया है।

सांसद अनिल बलूनी ने जावडेकर से मुलाकात कर शिक्षा मित्रों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के चार हजार से अधिक शिक्षा मित्रों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के कारण सेवा समाप्ति का संकट हैं। जावडेकर ने इस विषय पर त्रिपुरा, असम के शिक्षा मित्रों को दी गई राहत के आलोक में परीक्षण कराने का आश्वासन दिया है। बलूनी ने गढ़वाल विश्वविद्यालय में लंबे समय से स्थायी कुलपति न होने से अनेक प्रोन्नतियां, शिक्षण व अध्यापन से जुड़े विषयों पर निर्णय अटके होने का मामला भी उठाया है। जावडेकर ने विश्वविद्यालय में जल्द ही कुलपति की नियुक्ति का आश्वासन दिया है। साथ ही विश्वविद्यालय में विजिटर नॉमिनी की नियुक्ति भी शीघ्र कर दी जाएगी। बलूनी ने जावडेकर के सामने संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार में छात्रावास बनाने का मामला भी उठाया। जावडेकर ने इस पर भी अपनी सहमित जताई है। बाद में बलूनी ने तीनों विषयों पर तत्काल कार्रवाई के आश्वासन के लिए केंद्रीय मंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उपरोक्त तीनों महत्वपूर्ण कार्यो पर मंत्री की स्वीकृति मोदी सरकार की त्वरित और जनोन्मुखी सरकार का प्रतिबिम्ब है।

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  • कार्मिकों के 15 भत्ते खत्म,कैबिनेट के निर्णय के अनुरूप शासनादेश हुआ जारी
  • जोखिम भत्ता अधिकतम 12500 रुपये निर्धारित, पुलिसकर्मियों के भत्ते यथावत रखे गये

नवीन समाचार, देहरादून, 23 जनवरी 2019। मंत्रिमंडल द्वारा पिछले दिनों लिये गये निर्णय के अनुसार कार्मिकों के यात्रा व मकान किराया भत्ते सहित अन्य भत्तों का स्वीकृति दे दी गयी है। इसके साथ ही 15 भत्तों को समाप्त कर दिया गया है। आतंकवाद निरोधक भत्ते, वीआईपी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों व आपदा प्रबंधन में लगे कार्मिकों को भी अधिकतम 12500 रुपये जोखिम भत्ता मिलेगा। सचिव वित्त अमित नेगी ने इस संबंध में बुधवार को आदेश जारी कर दिये हैं। कार्मिकों के यात्रा भत्ते को लेकर विस्तृत आदेश जारी कर दिया गया है। इसके तहत वेतन स्तर 16 और उसके ऊपर के अधिकारियों को वायुयान में विजनेस क्लास का टिकट और शताब्दी एक्सप्रेस में एक्जीक्यूटिव क्लास का टिकट अनुमन्य होगा। इस श्रेणी में अवस्थापना के लिए 2000 व दैनिक भत्ता 700 Rs प्रतिदिन दिया जाएगा। यह भत्ता प्रदेश से बाहर के लिए क्रमश: 6000 व 800 होगा। इसी तरह वेतन स्तर 13 ए से 15 तक विमान में इकोनामी क्लास व अवस्थापना के लिए प्रदेश में 1500 व बाहर 4500 दिया जाएगा। वेतन स्तर 10 से 13 तक रेलवे का एसी टू टियर व एसी बस अवस्थापना भत्ता प्रदेश में 1000 व बाहर के लिए 2250 दिया जाएगा। वेतन स्तर 6 से 9 तक एसी री टियर व एसी बस के साथ ही अवस्थापना भत्ता प्रदेश में 400 व बाहर के लिए 750 मिलेगा। वेतन स्तर 1 से 5 तक स्लीपर क्लास का टिकट व साधारण बस की सुविधा के साथ प्रदेश में 250 व प्रदेश से बाहर 450 अवस्थापना भत्ता मिलेगा। शासकीय गेस्ट हाउस/ विश्राम गृहों व होटल में रहने पर दैनिक भत्ते के अतिरिक्त भी देय होगा, लेकिन इसके लिए बिल प्रस्तुत करने होंगे। नि:शुल्क आवास उपलब्ध होने पर व्यय की प्रतिपूर्ति नहीं की जाएगी। वहीं शासन ने कार्मिकों को मिलने वाले 12 भत्ते बरकरार भी रखे हैं।

यह भी पढ़ें : दो लाख राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का एरियर भुगतान करने का शासनादेश जारी

नवीन समाचार, देहरादून, 21 जनवरी 2019। उत्तराखंड सरकार ने बजट सत्र से पहले कर्मचारियों को बहुत बड़ी सौगात दी है। त्रिवेंद्र सरकार ने दो लाख कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत लागू सातवें वेतनमान का एरियर भुगतान करने का आदेश जारी कर दिया है। प्रदेश में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2016 से लागू हुईं हैं। कार्मिकों को नए वेतनमान का लाभ एक जनवरी 2017 से दिया गया।

सोमवार को अपर सचिव (वित्त) अरुणेंद्र सिंह चौहान ने इसका शासनादेश जारी कर दिया। बकाया एरियर का भुगतान आयकर की कटौती के साथ एक फरवरी से कर्मचारियों के भविष्य निर्वाह निधि (जीपीएफ) में जमा किया जाएगा। शासनादेश के मुताबिक जमा राशि सामान्य स्थितियों में एक वर्ष से पूर्व नहीं निकाली जाएगी। जिन कार्मिकों का जीपीएफ खाता नहीं होगा, उन्हें आयकर कटौती करके नकद भुगतान किया जाएगा। एक जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक के अवशेष वेतन को दो किस्तों में दिया जाएगा। एरियर की पहली किस्त वर्ष 2017-18 के दौरान जारी की गई। एक जुलाई 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक की अवधि के अवशेष एरियर का भुगतान एक फरवरी 2019 से देने का निर्णय लिया गया है।

यह भी पढ़ें : नियमित कर्मचारियों के पदों को व्यक्त मान कर उन पर सीधी भर्ती से भरे जाने के आदेश पर रोक

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जनवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 2016 की विनियमितीकरण नियमावली निरस्त होने के बाद राज्य मंत्रिमंडल के इस नियमावली के तहत नियमित कर्मचारियों के पदों को रिक्त मानकर उन पर सीधी भर्ती से भरे जाने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। राज्य मंत्रिमंडल के इस फैसले से राज्य के करीब 1200 कर्मियों पर नौकरी गंवाने की तलवार लटक गयी थी, जबकि अब न्यायालय के इस आदेश से उन पर लटकी तलवार फिलहाल हट गई है। न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद इन पदों को विज्ञापित करने के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि सुशीला तिवारी अस्पताल की ममता डंगवाल सहित 27 अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि उच्च न्यायालय ने नियमावली को रद्द कर दिया था। इसके बाद 7 जनवरी को राज्य मंत्रिमंडल ने इस नियमावली के तहत भर्ती नियमित कर्मचारियों के पदों को रिक्त मानते हुए उन्हें सीधी भर्ती से भरने एवं इस हेतु विज्ञापन जारी करने का निर्णय लिया है।

यह भी पढ़ें : नए साल पर 2 लाख से ज्यादा राज्य कर्मियों को 667 करोड़ की बड़ी सौगात देगी सरकार !

नवीन समाचार, देहरादून, 6 जनवरी 2019 । प्रदेश के दो लाख से ज्यादा कार्मिकों के लिए नया वर्ष नई सौगात लेकर आया है। आखिरकार सरकार उनकी मुराद पूरी करने जा रही है। उन्हें सातवें वेतनमान के बकाया एरियर के साथ ही भत्तों का तोहफा भी मिलेगा। सातवें वेतनमान के भत्तों के निर्धारण को लेकर वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट सब कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। यह रिपोर्ट अगली कैबिनेट में रखी जाएगी।  सूत्रों की मानें तो उत्तरप्रदेश ने नए वेतन में मकान किराया भत्ते को मूल वेतन का 20 फीसद और हिमाचल प्रदेश ने 10 फीसद तक रखा है। उत्तराखंड यदि भत्ते को 20 फीसद तक रखता है तो उसे 55 करोड़ और 30 फीसद की स्थिति में 83 करोड़ का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। वहीं नए वेतनमान के सभी भत्तों को मिलाया जाए तो कुल सालाना आर्थिक बोझ 367 करोड़ तक पड़ेगा। यानी उक्त दोनों तोहफे कर्मचारियों को देने की स्थिति में राज्य सरकार को 667 करोड़ का अतिरिक्त खर्च उठाना होगा। सातवें वेतनमान का बकाया एरियर और भत्तों की मांग को लेकर राज्य के कर्मचारी लंबे समय से आंदोलनरत सरकारी, सार्वजनिक निगमों-उपक्रमों के साथ ही विभिन्न अ‌र्द्धसरकारी संस्थानों के कर्मचारियों के तमाम संगठनों के संयुक्त मोर्चा की मांगों पर झुकते हुए राज्य सरकार ने लोकसभा चुनाव की दहलीज पर दस्तक देने से ऐन पहले सरकारी कार्मिकों के असंतोष को दूर करने की ठान ली है। कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ एक जनवरी 2016 से लागू किया गया है। एक जनवरी 2017 से सातवें वेतन का बकाया एरियर का भुगतान कर्मचारियों को किया जा चुका है। अब एक जनवरी 2016 से लेकर 31 दिसंबर, 2016 तक एरियर का भुगतान होना बाकी है। यह रकम छोटी-मोटी नहीं, बल्कि 300 करोड़ के करीब है। इसके लिए सरकार ने जरूरी बंदोबस्त कर लिए हैं। इस संबंध में जल्द आदेश जारी किए जाएंगे। वहीं, सातवें वेतनमान के भत्तों को देने की हिम्मत भी सरकार जुटा रही है। वित्त मंत्री की अध्यक्षता में सब कमेटी की रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है। इस रिपोर्ट को अगली कैबिनेट बैठक में रखा जाना तकरीबन तय है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक सब कमेटी ने पड़ोसी सातवें वेतनमान के भत्तों (मकान किराया भत्ता, महंगाई भत्ता व यात्रा भत्ता) को लेकर पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तरप्रदेश के फार्मूले का भी अध्ययन किया। इसमें सबसे अहम मकान किराया भत्ते का पेच है। राज्य कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की भांति भत्ते नहीं दिया जाना तकरीबन तय माना जा रहा है। संपर्क करने पर वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि उक्त दोनों मामलों को अगली कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। (रविंद्र बड़थ्वाल )

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-उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच का 2 से आंदोलन का ऐलान
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 दिसंबर 2018। प्रदेश के सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान आम हड़ताल करने की तैयारी है। या कहें कि चुनाव से पहले अपनी मांगों पर सरकार पर दबाव बनाने की योजना है। इसी कड़ी में उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच ने आगामी 2 जनवरी से अपनी सात सूत्रीय मांगों पर आंदोलन का ऐलान कर दिया है। उनकी मांगों में प्रदेश के कार्मिकों को केंद्र के समान समस्त भत्ते तत्काल अनुमन्य किये जाने, यू-हेल्थ कार्ड की सुविधा देने व देश-प्रदेश के उच्च स्तरीय सुविधा सम्पन्न चिकित्सालयों को इसमें शामिल करने, प्रदेश के समस्त कार्मिकों को पूरे सेवाकाल में न्यूनतम तीन पदोन्नति अनिवार्य करने, अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण की पूर्ववर्ती व्यवस्था को यथावत लागू रखने, 1 अक्तूबर 2005 के बाद नियुक्त कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था शीघ्र बहाल करने तथा स्थानांतरण अधिनियम में राज्य के कार्मिकों के सेवानिवृत्ति के अंतिम वर्ष में उसके ऐच्छिक स्थान पर अनिवार्य रूप से स्थानांतरण, पद स्थापना का प्राविधान करने एवं पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा शासन को प्रस्तुत की गयी रिपोर्ट को कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसे संज्ञान में न लेने की मांगें शामिल की गयी हैं।
आंदोलन के तहत दो जनवरी 2019 को समस्त कार्मिकों से एक दिन का व्यक्तिगत अवकाश लेकर सभी जिलों में धरना तथा डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने, 15 से 31 जनवरी तक पूरे प्रदेश में जनजागरण अभियान चलाने एवं जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भेजने एवं चार मई को सभी जिलों के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा राजधानी देहरादून जाकर विशाल महारैली के माध्यम से सचिवालय का घेराव व मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर उसी दिन आम हड़ताल की घोषण करने का कार्यक्रम तय किया गया है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा लोक सभा का कार्यकाल 25 मई 2019 को समाप्त हो रहा है, और इससे पूर्व मई माह में ही चुनाव होने की संभावना है। मालूम हो कि 16वीं लोकसभा के लिए चुनाव 7 अप्रैल से 12 मई 2014 के बीच हुए थे और 16 मई को चुनाव परिणाम आये थे तथा 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मौजूदा सरकार गठित हुई थी। इसी कड़ी में आगामी 2 जनवरी को मुख्यालय में डीएस कार्यालय के सम्मुख सामूहिक धरना कार्यक्रम में भाग लेने को कहा गया है।

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