नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 2 जनवरी 2026 (Girdhari Lal Sahu on Girls)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद से जुड़ी सियासत में उस समय हलचल तेज हो गई, जब महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू का एक बयान सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हुआ। विपक्ष ने इसे महिलाओं की गरिमा से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है, जबकि साहू ने आरोपों को भ्रामक बताते हुए सफाई दी है, और माफी भी मांगी है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे महिला सशक्तिकरण मंत्री से जुड़ा है और सामाजिक मूल्यों और राजनीतिक जवाबदेही से भी जुड़ता है। देखें संबंधित वीडिओ :
कथित वीडियो और बयान को लेकर उठा विवाद
सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित वीडियो की पृष्ठभूमि
प्राप्त जानकारी के अनुसार 23 दिसंबर 2025 को अल्मोड़ा जनपद के सोमेश्वर क्षेत्र अंतर्गत एक मंडल की बैठक का वीडियो अब सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हो रहा है। वीडियो में गिरधारी लाल साहू सोमेश्वर के कुँवाली गाँव में पार्टी के एक कार्यक्रम में कुछ युवाओं से संवाद करते दिखाई दे रहे हैं। इसी संवाद के दौरान उनके द्वारा विवाह और युवतियों को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन श्री साहू ने इस पर माफी मांगकर एक तरह से इसकी सत्यता स्वीकार कर ली है, और इसके प्रसार के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया।
“उसे बिहार लाओ, 10 लाख इनाम दूंगा” बयान से सियासी तूफान, मंत्री पति साहू पर विधायक गुप्ता का तीखा हमला
पटना। उत्तराखंड सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के एक विवादित बयान ने बिहार की राजनीति में तीखा उबाल ला दिया है। अल्मोड़ा में दिए गए बयान में साहू ने कहा था कि यदि शादी नहीं हो पा रही है तो बिहार से लड़की ले आयेंगे, वहां 20–25 हजार रुपये में मिल जाएगी। इस टिप्पणी को बिहार की महिलाओं और राज्य की गरिमा पर हमला बताते हुए सहरसा से विधायक और इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी के प्रमुख इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
विधायक गुप्ता ने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर बयान जारी कर कहा कि बिहार की माताओं-बहनों पर अमर्यादित टिप्पणी करने वाले व्यक्ति को पकड़कर बिहार लाने वाले को 10 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। उन्होंने लिखा कि ऐसे लोगों को सार्वजनिक रूप से जवाब दिया जाना चाहिए, ताकि महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों को सबक मिले। इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है। उधर, बिहार राज्य महिला आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे महिलाओं के स्वाभिमान पर सीधा आघात बताया है और उत्तराखंड सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग का कहना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों को महिलाओं के प्रति मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए।
विपक्ष ने बताया महिलाओं की गरिमा पर हमला
कांग्रेस ने इस कथित बयान को महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध बताया है। उत्तराखंड कांग्रेस महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि यह बयान घोर निंदनीय और शर्मनाक है। उनका कहना है कि महिलाओं को इस तरह प्रस्तुत करना सामाजिक मूल्यों के विरुद्ध है और इससे महिला शोषण, बाल विवाह और मानव तस्करी जैसी समस्याओं को बढ़ावा देने वाली मानसिकता झलकती है। कांग्रेस ने मंत्री और उनके पति से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है।
भाजपा और साहू की सफाई
बयान को बताया तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया
गिरधारी लाल साहू ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी युवती के मूल्य की बात नहीं की। उनके अनुसार उन्होंने केवल विवाह समारोह के खर्च का संदर्भ दिया था, जिसे विरोधियों ने गलत अर्थों में प्रस्तुत किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके किसी कथन से किसी को ठेस पहुंची हो तो वह इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं।
पूर्व के विवाद भी आए चर्चा में
इस प्रकरण के बाद साहू से जुड़े पुराने विवादों का भी उल्लेख राजनीतिक बहस में किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में जुड़े व्यक्तियों से अधिक संयम और उत्तरदायित्व की अपेक्षा होती है। वहीं भाजपा समर्थकों का तर्क है कि बिना पुष्टि के प्रसारित वीडियो के आधार पर किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
राजनीति और सामाजिक विमर्श पर प्रभाव
महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में सवाल
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब सरकार महिला सशक्तिकरण और बाल संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कर रही है। ऐसे में मंत्री के परिवार से जुड़े कथित बयान ने सरकार की नीतियों और व्यवहार के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा या इससे सामाजिक विमर्श भी आगे बढ़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
आगे क्या हो सकता है
फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है। किसी भी आधिकारिक जांच या कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है। हालांकि विपक्ष का दबाव बढ़ने के कारण सरकार की ओर से स्पष्टीकरण या कदम उठाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
