नयी श्रम संहिता के नियम जारी, वेतन संरचना से लेकर ग्रेच्युटी तक गणना का पूरा खाका स्पष्टनयी श्रम संहिता

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 5 जनवरी 2026 (New Labour Code in India)। देश की राजधानी दिल्ली से देशभर के कामकाजी लोगों के लिए वेतन, भत्ते, भविष्य निधि और ग्रेच्युटी से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आयी है। केंद्र सरकार के नए लेबर कोड्स यानी नयी श्रम संहिता के तहत श्रम मंत्रालय ने ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर दिया है।
इन नियमों और साथ में जारी प्रश्नोत्तर के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि नई व्यवस्था में वेतन की परिभाषा क्या होगी, 50 प्रतिशत का नियम कैसे लागू होगा और ग्रेच्युटी की गणना किस आधार पर की जायेगी। इसका सीधा असर देश के करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों, संविदा और नियत वहाँ पर कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ कंपनियों की लागत संरचना पर भी पड़ेगा।
नयी श्रम संहिता का संदर्भ और उद्देश्य
चार कोड्स में समेटे गये पुराने कानून
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समेकित कर चार नए लेबर कोड्स नयी श्रम संहिता बनाई हैं, जिनमें वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना, परिभाषाओं में एकरूपता लाना और कर्मचारियों को अधिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। अब तक अलग-अलग कानूनों में वेतन की अलग परिभाषाएं होने से भ्रम की स्थिति बनी रहती थी, जिसे दूर करने का प्रयास इन कोड्स के माध्यम से किया गया है।
ड्राफ्ट नियम सार्वजनिक क्यों किये गये
Ministry of Labour and Employment ने ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है। वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नियमों पर 45 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गयी हैं, जबकि औद्योगिक संबंधों से जुड़े नियमों के लिए 30 दिन का समय तय किया गया है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक नए नियम औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं हो जाते, तब तक पुराने नियम लागू रहेंगे, बशर्ते वे नए कोड्स के विरुद्ध न हों।
वेतन की नई परिभाषा और 50 प्रतिशत नियम
वेतन में क्या शामिल और क्या बाहर
ड्राफ्ट के अनुसार वेतन में मूल वेतन, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग भत्ता शामिल होंगे। इसके साथ ही 50 प्रतिशत का नियम लागू किया गया है, जिसके अनुसार किसी कर्मचारी की कुल पारिश्रमिक राशि में वेतन का हिस्सा कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिए। यदि भत्तों का हिस्सा इससे अधिक है, तो अतिरिक्त राशि को वेतन में जोड़ दिया जायेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां बहुत कम मूल वेतन दिखाकर भविष्य निधि और ग्रेच्युटी जैसी वैधानिक देनदारियों से बच न सकें।
ड्राफ्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन, ईएसओपी, वैरिएबल पे, रीइंबर्समेंट और अवकाश नकदीकरण को वेतन का हिस्सा नहीं माना जायेगा।
ग्रेच्युटी और ओवरटाइम से जुड़े अहम बदलाव
ग्रेच्युटी की गणना और लागू तिथि
नई व्यवस्था में ग्रेच्युटी अंतिम आहरित वेतन के आधार पर दी जायेगी, न कि केवल मूल वेतन पर। चूंकि वेतन की परिभाषा में 50 प्रतिशत नियम लागू होगा, इसलिए कई कर्मचारियों की ग्रेच्युटी राशि बढ़ सकती है। ड्राफ्ट के अनुसार यह प्रावधान 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माना जायेगा। जो कर्मचारी इस तिथि के बाद सेवा समाप्त करेंगे, उन्हें ग्रेच्युटी नई व्यवस्था के तहत मिलेगी।
वहीं फिक्स्ड टर्म पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब इन्हें एक वर्ष की सेवा के बाद ही ग्रेच्युटी का अधिकार मिलेगा। इस संबंध में जारी स्पष्टीकरण में Institute of Chartered Accountants of India ने भी कंपनियों को लेखांकन के स्तर पर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
ओवरटाइम और कार्य परिस्थितियां
ड्राफ्ट नियमों में यह प्रावधान किया गया है कि सप्ताह में 48 घंटे से अधिक कार्य कराने पर दोगुनी मजदूरी देनी होगी। लगातार 10 दिनों से अधिक कार्य नहीं कराया जा सकेगा और इसके बदले विश्राम दिवस देना अनिवार्य होगा। कुछ क्षेत्रों में 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण, क्रेच सुविधा न होने पर बच्चों के लिए निर्धारित धनराशि और अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों के लिए यात्रा मद जैसे प्रावधान भी जोड़े गये हैं।
कुल मिलाकर नए लेबर कोड्स का उद्देश्य वेतन संरचना को अधिक पारदर्शी बनाना और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि प्रारंभिक चरण में कर्मचारियों की हाथ में आने वाली धनराशि में बड़ा अंतर न दिखे, लेकिन दीर्घकाल में भविष्य निधि और ग्रेच्युटी जैसे लाभ अधिक सुदृढ़ होंगे।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।











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