EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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दंपति ने अपने नौ दिन के नवजात (New Born Baby) के निधन के बाद ऐसा निर्णय लिया, जिसे लोग वर्षों तक याद रखेंगे। जन्मजात बीमारी से पीड़ित नवजात का उपचार एम्स ऋषिकेश में चल रहा था, जहां शल्य क्रिया (Operation) के बाद नवजात की तबीयत बिगड़ गई और अंततः रविवार को उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। गहरे शोक में डूबे माता-पिता ने अंतिम संस्कार के बजाय चिकित्सकीय शोध (Medical Research) के लिए नवजात की देह का देहदान (Body Donation) कर मानवता की मिसाल पेश की। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चिकित्सा शिक्षा और शोध के साथ-साथ समाज में अंगदान-देहदान जागरूकता को नई दिशा देती है।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleनवजात की बीमारी और उपचार की पूरी पृष्ठभूमिअंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान सामने आया देहदान का विकल्पदेहदान का निर्णय, दुख के बीच मानवता की ऊंचाईएम्स में प्रक्रिया पूरी, एनाटॉमी विभाग को सौंपी गई देहक्यों महत्वपूर्ण है यह घटना, समाज और चिकित्सा दोनों के लिएTags (Body Donation of 9-day-Old) :Like this:Relatedनवजात की बीमारी और उपचार की पूरी पृष्ठभूमिप्राप्त जानकारी के अनुसार चमोली निवासी संदीप राम (Sandeep Ram) की पत्नी हंसी (Hansi) ने गत 2 जनवरी को श्रीनगर (Srinagar) में नवजात शिशु को जन्म दिया था। जन्म के बाद नवजात में जन्मजात महावृहदान्त्र (हिर्शस्प्रुंग रोग—Hirschsprung Disease) की पुष्टि हुई। इस रोग में आंतों में तंत्रिका गुच्छों (गैंग्लिया—Ganglia) का अभाव पाया जाता है, जिससे मल त्याग में गंभीर समस्या और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।यह भी पढ़ें : नैनी झील में नौकायन के दौरान महिला ने झील में छलांग लगाई, नाव चालकों की सतर्कता से बची जानरोग की जटिलता को देखते हुए नवजात को श्रीनगर से एम्स ऋषिकेश संदर्भित (Referred) किया गया। एम्स में नवजात की शल्य क्रिया कर उपचार किया गया, किंतु शल्य क्रिया के तीन दिन बाद नवजात की स्थिति बिगड़ती चली गई और रविवार को रिफ्रैक्टरी सेप्टिक शॉक (Refractory Septic Shock) के कारण मृत्यु हो गई।अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान सामने आया देहदान का विकल्प नवजात की मृत्यु के बाद परिजन अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर जानकारी ले रहे थे। एम्स के वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी (Senior Nursing Officer) मोहित (Mohit) और महिपाल (Mahipal) से चर्चा के दौरान देहदान के विषय पर बात आगे बढ़ी। इसके बाद पीड़ित दंपति की सहायता के लिए मोहन फाउंडेशन (Mohan Foundation) उत्तराखंड के परियोजना प्रमुख (Project Leader) संचित अरोड़ा (Sanchit Arora) को सूचना दी गई।देहदान का निर्णय, दुख के बीच मानवता की ऊंचाईनेत्रदान कार्यकर्ता (Eye Donation Worker) और लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि (Lions Club Rishikesh Devbhoomi) के चार्टर अध्यक्ष (Charter President) गोपाल नारंग (Gopal Narang) के अनुसार संचित अरोड़ा ने दंपति को देहदान का महत्व समझाया। उन्हें बताया गया कि यदि नवजात की देह चिकित्सा शोध के लिए समर्पित की जाती है तो इससे भविष्य में कई विद्यार्थियों, चिकित्सकों और अनुसंधान कार्यों को लाभ मिल सकता है।इसके बाद दंपति ने सहमति (Consent) दी और नवजात की देह चिकित्सा विज्ञान के हित में देहदान करने का निर्णय लिया। क्या कोई माता-पिता अपने सबसे बड़े दुख के क्षण में भी समाज के लिए इतना बड़ा निर्णय ले सकता है। इस घटना ने यही साबित किया कि संवेदना और मानव कल्याण साथ चल सकते हैं।यह भी पढ़ें : 'टीम इंडिया' में उत्तराखंड मूल के एक और युवा खिलाड़ी ‘बेबी एबी’-आयुष बड़ोनी की एंट्री, मौका मिलने-खेलने और गंभीर के पूर्व बयान पर चर्चा तेज‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, 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अनुपम योगदान बताया।क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना, समाज और चिकित्सा दोनों के लिएयह मामला केवल एक परिवार की कथा नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा (Medical Education), स्वास्थ्य नीति (Health Policy) और जन-जागरूकता (Public Awareness) से जुड़ा विषय है। भारत में देहदान के प्रति जागरूकता अभी भी सीमित है, जबकि चिकित्सा महाविद्यालयों (Medical Colleges) में शोध, प्रशिक्षण और शरीर रचना अध्ययन के लिए देहदान अत्यंत उपयोगी माना जाता है।यह भी पढ़ें : नैनीताल : धारी ब्लॉक के खटियाखाल में गुलदार के हमले से महिला की मृत्यु, 15 दिनों में तीसरी घटना से ग्रामीणों में रोषइस निर्णय से यह संदेश भी जाता है कि दुख की घड़ी में भी कोई परिवार समाज के भविष्य के लिए प्रकाश बन सकता है। क्या हमारे समाज में देहदान को उतनी ही स्वीकृति मिल पाएगी जितनी अंगदान (Organ Donation) को मिलने लगी है। यह प्रश्न अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ👉, अल्मोड़ा के समाचारों के लिए यहाँ👉, बागेश्वर के समाचारों के लिए यहाँ👉, चंपावत के समाचारों के लिए यहाँ👉, ऊधमसिंह नगर के समाचारों के लिए यहाँ👉, देहरादून के समाचारों के लिए यहाँ👉, उत्तरकाशी के समाचारों के लिए यहाँ👉, पौड़ी के समाचारों के लिए यहाँ👉, टिहरी जनपद के समाचारों के लिए यहाँ👉, चमोली के समाचारों के लिए यहाँ👉, रुद्रप्रयाग के समाचारों के लिए यहाँ👉, हरिद्वार के समाचारों के लिए यहाँ👉और उत्तराखंडसे संबंधित अन्य समाचार पढ़ने के लिये यहां👉 क्लिक करें।आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से यहाँ, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से, टेलीग्राम से, कुटुंब एप से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..। Tags (Body Donation of 9-day-Old) :Body Donation of 9-day-Old, AIIMS Rishikesh Newborn Body Donation By Chamoli Parents January 2026, Rishikesh Medical Research Support Through Neonatal Body Donation Case, Chamoli Couple Donates 9 Day Old Newborn Body For Anatomy Study, Hirschsprung Disease Newborn Treatment AIIMS Rishikesh Septic Shock Death, Mohan Foundation Uttarakhand Helped In Body Donation AIIMS Case, Department Of Anatomy AIIMS Rishikesh Received Donated Newborn Body, Uttarakhand Humanitarian Story Parents Donate Newborn For Medical Science,Neonatal Surgery Aftercare Septic Shock Case AIIMS Rishikesh Update, Lions Club Rishikesh Devbhoomi Support Body Donation Awareness, Medical Education Benefit From Body Donation India Public Awareness, Rishikesh Health News Newborn Death After Operation AIIMS, Uttarakhand Latest Good News Parents Noble Decision In Grief, #UttarakhandNews #RishikeshNews #ChamoliNews #AIIMSRishikesh #BodyDonation #MedicalResearch #HirschsprungDisease #NeonatalCare #HealthNews #HindiNewsShare this: Click to share on 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