EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) के आदेश सामने आए हैं। एक ओर पत्राचार (Correspondence) के माध्यम से बेसिक शिक्षक प्रमाणपत्र (Basic Teacher Certificate – BTC) प्राप्त अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने शिक्षा विभाग को उनके प्रत्यावेदनों पर 3 महीने में कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत 400 से अधिक प्रवक्ताओं (Lecturers) के चयन वेतनमान के पुनर्निर्धारण संबंधी वित्त सचिव के आदेश पर न्यायालय ने अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है और राज्य सरकार से 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। इन दोनों आदेशों को सरकारी शिक्षा व्यवस्था, सरकारी नियुक्तियों (Government Recruitment) और वेतन नीति (Salary Policy) पर असर डालने वाला माना जा रहा है।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleउत्तराखंड उच्च न्यायालय में शिक्षा से जुड़े दो मामलों पर सुनवाई और आदेशपत्राचार बीटीसी अभ्यर्थियों की याचिकाएं, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को प्रत्यावेदन देने के निर्देशप्रवक्ताओं को बड़ी राहत, वेतन पुनर्निर्धारण आदेश पर रोक और सरकार से जवाबक्यों महत्वपूर्ण हैं ये आदेश, शिक्षा, भर्ती और वेतन नीति पर असरTags (UK High Court 2 Major Orders) :Like this:Relatedउत्तराखंड उच्च न्यायालय में शिक्षा से जुड़े दो मामलों पर सुनवाई और आदेशपत्राचार बीटीसी अभ्यर्थियों की याचिकाएं, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को प्रत्यावेदन देने के निर्देशपत्राचार के माध्यम से बीटीसी (BTC) प्राप्त अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी (Justice Manoj Kumar Tiwari) की एकलपीठ (Single Bench) में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता प्रतीक सकलानी (Prateek Saklani) सहित अन्य अभ्यर्थियों ने न्यायालय में कहा कि उन्होंने पत्राचार से बीटीसी किया है, लेकिन उनकी अंकतालिका (Marksheet) में यह शर्त अंकित है कि यह प्रमाणपत्र राज्य के अधीन नियुक्ति के लिए मान्य नहीं होगा।यह भी पढ़ें : पति प्रताड़ित करता था तो कैसे साथ गुजार दिए 11 साल ? न्यायालय ने आरोपित फौजी पति को किया दहेज उत्पीड़न के आरोपों से दोषमुक्त....अभ्यर्थियों का तर्क था कि इसी माध्यम से योग्यता प्राप्त करने वाले कुछ अन्य उम्मीदवारों को सरकारी प्राथमिक विद्यालयों (Government Primary Schools) में सहायक अध्यापक (Assistant Teacher) के रूप में नियुक्तियां मिली हैं, इसलिए उन्हें सार्वजनिक रोजगार (Public Employment) के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का दावा सही नहीं है कि समान स्थिति वालों को नियमित नियुक्ति (Regular Appointment) दी गई है। सरकार के अनुसार कुछ उम्मीदवारों को केवल एक शैक्षणिक सत्र (Academic Session) के लिए समेकित मानदेय (Consolidated Honorarium) पर संविदात्मक नियुक्ति (Contractual Appointment) दी गई थी, नियमित नियुक्ति नहीं। सरकार ने 27 नवंबर 2006 के शासनादेश (Government Order) का हवाला देते हुए उसकी वैधता का भी उल्लेख किया, जिसे पूर्व में न्यायालय की खंडपीठ (Division Bench) बरकरार रख चुकी है।सुनवाई के बाद न्यायालय ने याचिकाएं एक साथ निस्तारित (Disposed) करते हुए निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) के साथ अपना प्रत्यावेदन (Representation) निदेशक प्रारंभिक शिक्षा (Director Elementary Education) के समक्ष प्रस्तुत करें। निदेशक को निर्देश दिया गया कि वे प्रत्यावेदन पर कानून के अनुसार 3 महीने यानी 90 दिन के भीतर उचित निर्णय लें। यह आदेश उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो शिक्षक भर्ती में समान अवसर की अपेक्षा कर रहे हैं और जिनकी योग्यता की मान्यता पर विवाद बना हुआ है।प्रवक्ताओं को बड़ी राहत, वेतन पुनर्निर्धारण आदेश पर रोक और सरकार से जवाबशिक्षा विभाग से जुड़ा दूसरा मामला राजकीय इंटर कॉलेज (Government Inter College) में कार्यरत 400 से अधिक प्रवक्ताओं के चयन वेतनमान (Selection Pay Scale) से संबंधित है। यह मामला न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी (Justice Ravindra Maithani) और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा (Justice Alok Mehra) की खंडपीठ (Division Bench) के समक्ष आया। प्रवक्ताओं ने वित्त सचिव (Finance Secretary) के आदेश दिनांक 18 दिसंबर 2025 को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी, जिसमें चयन वेतनमान के पुनर्निर्धारण (Re-fixation) का निर्देश दिया गया था।यह भी पढ़ें : 25 वर्षीय आईएएस अंशुल भट्ट ने ग्राहक बनकर पकड़ा बिना पंजीकरण के चल रहा होटल और किया सील, प्रश्न-जनपद मुख्यालय में प्रशासन ऐसी ही स्थितियों में मौन क्यों...?‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। याचिका में कहा गया कि सरकारी सेवक वेतन नियमावली (Government Servants Pay Rules) प्रथम संशोधन 2025 (First Amendment 2025) के तहत चयन और प्रोन्नत वेतनमान (Promoted Pay Scale) के समय देय एक अतिरिक्त वेतनवृद्धि (One Increment) समाप्त कर दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह संशोधन भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective Effect) से 1 जनवरी 2016 से लागू किया गया है, जिससे लंबे समय से मिल रहा वेतन लाभ समाप्त हो जाएगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह संशोधन केवल शैक्षणिक संवर्ग (Academic Cadre) के कर्मचारियों पर लागू किया गया है, जो समानता (Equality) के संवैधानिक सिद्धांत के विपरीत है।प्रवक्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (Article 14 and 16) के उल्लंघन का दावा करते हुए कहा कि राज्य सरकार पूर्व प्रभाव से दी गई वेतनवृद्धि को इस तरह समाप्त नहीं कर सकती। सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने वित्त सचिव के 18 दिसंबर 2025 के आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी। साथ ही राज्य सरकार को 4 सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए और अगली सुनवाई के लिए अप्रैल माह की तिथि नियत की है। इससे प्रभावित शिक्षकों और प्रवक्ताओं के बीच यह संदेश गया है कि वेतन निर्धारण के मामलों में न्यायालय संवैधानिक कसौटी पर सरकार के निर्णयों की समीक्षा कर रहा है।क्यों महत्वपूर्ण हैं ये आदेश, शिक्षा, भर्ती और वेतन नीति पर असरइन दोनों प्रकरणों से एक व्यापक संदेश निकलता है कि शिक्षा नीति, शिक्षक-भर्ती और वेतन संरचना जैसे विषय केवल विभागीय निर्णय नहीं रह गए हैं, बल्कि वे विधिक प्रक्रिया (Legal Process), समान अवसर (Equal Opportunity) और संवैधानिक अधिकारों से सीधे जुड़ते हैं। पत्राचार बीटीसी अभ्यर्थियों का मामला बताता है कि योग्यता की मान्यता (Validity of Qualification) स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि रोजगार में भ्रम और विवाद कम हों। वहीं प्रवक्ताओं के वेतन का मामला यह संकेत देता है कि सरकार द्वारा नियमों में संशोधन करते समय समानता और न्यायसंगतता का ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि इसका असर हजारों कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की योजनाओं पर पड़ता है।यह भी पढ़ें : लक्सर नगर पालिका ने आरटीआई के जवाब में विकास कार्यों की जगह गोलगप्पों की रेट लिस्ट भेजी, सोशल मीडिया पर हुई वायरलअब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बीटीसी अभ्यर्थियों के प्रत्यावेदन पर क्या निर्णय लेते हैं और राज्य सरकार वेतन पुनर्निर्धारण संबंधी आदेश पर न्यायालय में क्या जवाब प्रस्तुत करती है। क्या इन आदेशों के बाद शिक्षा विभाग की नीतियों में बदलाव की दिशा बनेगी। क्या इससे शिक्षक भर्ती प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होगी। ये प्रश्न आने वाले हफ्तों में और प्रासंगिक होंगे।पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ👉, अल्मोड़ा के समाचारों के लिए यहाँ👉, बागेश्वर के समाचारों के लिए यहाँ👉, चंपावत के समाचारों के लिए यहाँ👉, ऊधमसिंह नगर के समाचारों के लिए यहाँ👉, देहरादून के समाचारों के लिए यहाँ👉, उत्तरकाशी के समाचारों के लिए यहाँ👉, पौड़ी के समाचारों के लिए यहाँ👉, टिहरी जनपद के समाचारों 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Secretary Pay Refixation Order Stayed 18 December 2025, Government Servants Pay Rules First Amendment 2025 Education Cadre, Selection Pay Scale One Increment Issue Uttarakhand, Division Bench Order On Lecturer Salary Refixation, Uttarakhand Education Department Latest High Court News, #UttarakhandNews #NainitalNews #HighCourtUpdate #EducationNews #BTCNews #TeacherRecruitment #GovernmentJobs #PayScaleIssue #LecturerNews #HindiNewsShare this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationअंकिता भंडारी प्रकरण में पीएम-सीएम के डीपफेक वीडियो और अश्लील सामग्री बनाने पर ‘ग्रोक एआई’ सहित 2 के विरुद्ध शिकायत पत्नी से विवाद के बाद दिल्ली गए हल्द्वानी के 2 दोस्तों-रवि गुप्ता और गोलू शर्मा के शव रेलवे ट्रेक पर मिले…
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