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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जनवरी 2026 (UK High Court 2 Major Orders)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद अंतर्गत नैनीताल से शिक्षा और रोजगार से जुड़े दो अहम मामलों में उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) के आदेश सामने आए हैं। एक ओर पत्राचार (Correspondence) के माध्यम से बेसिक शिक्षक प्रमाणपत्र (Basic Teacher Certificate – BTC) प्राप्त अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने शिक्षा विभाग को उनके प्रत्यावेदनों पर 3 महीने में कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

दूसरी ओर राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत 400 से अधिक प्रवक्ताओं (Lecturers) के चयन वेतनमान के पुनर्निर्धारण संबंधी वित्त सचिव के आदेश पर न्यायालय ने अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है और राज्य सरकार से 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। इन दोनों आदेशों को सरकारी शिक्षा व्यवस्था, सरकारी नियुक्तियों (Government Recruitment) और वेतन नीति (Salary Policy) पर असर डालने वाला माना जा रहा है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय में शिक्षा से जुड़े दो मामलों पर सुनवाई और आदेश

पत्राचार बीटीसी अभ्यर्थियों की याचिकाएं, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को प्रत्यावेदन देने के निर्देश

(UK High Court 2 Major Orders) (In Banbhulpura Riot Case-High Court on Bail) (High Court Postpones Silver Jubilee Celebrations,पत्राचार के माध्यम से बीटीसी (BTC) प्राप्त अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी (Justice Manoj Kumar Tiwari) की एकलपीठ (Single Bench) में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता प्रतीक सकलानी (Prateek Saklani) सहित अन्य अभ्यर्थियों ने न्यायालय में कहा कि उन्होंने पत्राचार से बीटीसी किया है, लेकिन उनकी अंकतालिका (Marksheet) में यह शर्त अंकित है कि यह प्रमाणपत्र राज्य के अधीन नियुक्ति के लिए मान्य नहीं होगा।

अभ्यर्थियों का तर्क था कि इसी माध्यम से योग्यता प्राप्त करने वाले कुछ अन्य उम्मीदवारों को सरकारी प्राथमिक विद्यालयों (Government Primary Schools) में सहायक अध्यापक (Assistant Teacher) के रूप में नियुक्तियां मिली हैं, इसलिए उन्हें सार्वजनिक रोजगार (Public Employment) के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता।

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का दावा सही नहीं है कि समान स्थिति वालों को नियमित नियुक्ति (Regular Appointment) दी गई है। सरकार के अनुसार कुछ उम्मीदवारों को केवल एक शैक्षणिक सत्र (Academic Session) के लिए समेकित मानदेय (Consolidated Honorarium) पर संविदात्मक नियुक्ति (Contractual Appointment) दी गई थी, नियमित नियुक्ति नहीं। सरकार ने 27 नवंबर 2006 के शासनादेश (Government Order) का हवाला देते हुए उसकी वैधता का भी उल्लेख किया, जिसे पूर्व में न्यायालय की खंडपीठ (Division Bench) बरकरार रख चुकी है।

सुनवाई के बाद न्यायालय ने याचिकाएं एक साथ निस्तारित (Disposed) करते हुए निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) के साथ अपना प्रत्यावेदन (Representation) निदेशक प्रारंभिक शिक्षा (Director Elementary Education) के समक्ष प्रस्तुत करें। निदेशक को निर्देश दिया गया कि वे प्रत्यावेदन पर कानून के अनुसार 3 महीने यानी 90 दिन के भीतर उचित निर्णय लें। यह आदेश उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो शिक्षक भर्ती में समान अवसर की अपेक्षा कर रहे हैं और जिनकी योग्यता की मान्यता पर विवाद बना हुआ है।

प्रवक्ताओं को बड़ी राहत, वेतन पुनर्निर्धारण आदेश पर रोक और सरकार से जवाब

शिक्षा विभाग से जुड़ा दूसरा मामला राजकीय इंटर कॉलेज (Government Inter College) में कार्यरत 400 से अधिक प्रवक्ताओं के चयन वेतनमान (Selection Pay Scale) से संबंधित है। यह मामला न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी (Justice Ravindra Maithani) और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा (Justice Alok Mehra) की खंडपीठ (Division Bench) के समक्ष आया। प्रवक्ताओं ने वित्त सचिव (Finance Secretary) के आदेश दिनांक 18 दिसंबर 2025 को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी, जिसमें चयन वेतनमान के पुनर्निर्धारण (Re-fixation) का निर्देश दिया गया था।

याचिका में कहा गया कि सरकारी सेवक वेतन नियमावली (Government Servants Pay Rules) प्रथम संशोधन 2025 (First Amendment 2025) के तहत चयन और प्रोन्नत वेतनमान (Promoted Pay Scale) के समय देय एक अतिरिक्त वेतनवृद्धि (One Increment) समाप्त कर दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह संशोधन भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective Effect) से 1 जनवरी 2016 से लागू किया गया है, जिससे लंबे समय से मिल रहा वेतन लाभ समाप्त हो जाएगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह संशोधन केवल शैक्षणिक संवर्ग (Academic Cadre) के कर्मचारियों पर लागू किया गया है, जो समानता (Equality) के संवैधानिक सिद्धांत के विपरीत है।

प्रवक्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (Article 14 and 16) के उल्लंघन का दावा करते हुए कहा कि राज्य सरकार पूर्व प्रभाव से दी गई वेतनवृद्धि को इस तरह समाप्त नहीं कर सकती। सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने वित्त सचिव के 18 दिसंबर 2025 के आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी। साथ ही राज्य सरकार को 4 सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए और अगली सुनवाई के लिए अप्रैल माह की तिथि नियत की है। इससे प्रभावित शिक्षकों और प्रवक्ताओं के बीच यह संदेश गया है कि वेतन निर्धारण के मामलों में न्यायालय संवैधानिक कसौटी पर सरकार के निर्णयों की समीक्षा कर रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये आदेश, शिक्षा, भर्ती और वेतन नीति पर असर

इन दोनों प्रकरणों से एक व्यापक संदेश निकलता है कि शिक्षा नीति, शिक्षक-भर्ती और वेतन संरचना जैसे विषय केवल विभागीय निर्णय नहीं रह गए हैं, बल्कि वे विधिक प्रक्रिया (Legal Process), समान अवसर (Equal Opportunity) और संवैधानिक अधिकारों से सीधे जुड़ते हैं। पत्राचार बीटीसी अभ्यर्थियों का मामला बताता है कि योग्यता की मान्यता (Validity of Qualification) स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि रोजगार में भ्रम और विवाद कम हों। वहीं प्रवक्ताओं के वेतन का मामला यह संकेत देता है कि सरकार द्वारा नियमों में संशोधन करते समय समानता और न्यायसंगतता का ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि इसका असर हजारों कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की योजनाओं पर पड़ता है।

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अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बीटीसी अभ्यर्थियों के प्रत्यावेदन पर क्या निर्णय लेते हैं और राज्य सरकार वेतन पुनर्निर्धारण संबंधी आदेश पर न्यायालय में क्या जवाब प्रस्तुत करती है। क्या इन आदेशों के बाद शिक्षा विभाग की नीतियों में बदलाव की दिशा बनेगी। क्या इससे शिक्षक भर्ती प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होगी। ये प्रश्न आने वाले हफ्तों में और प्रासंगिक होंगे।

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By डॉ.नवीन जोशी

डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, 'कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन 'नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड' के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।

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