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-उत्तराखंड में विकास योजनाओं के लिए जमीन खरीदना आसान बनाने को सरकार लाएगी नई लैंड परचेज पॉलिसी, 4 गुना तक मिलेगा मुआवजा
नवीन समाचार, देहरादून, 16 जनवरी 2026 (New Land Purchase Policy-UK)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से राज्य सरकार की एक ऐसी पहल सामने आई है, जिसका असर आने वाले समय में सड़क, पुल, अस्पताल, विद्यालय, सिंचाई, पेयजल और अन्य विकास योजनाओं पर सीधे दिख सकता है। सरकारी योजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध न होने और भू-अधिग्रहण की लंबी प्रक्रिया के कारण कई परियोजनाएं वर्षों तक लटक जाती हैं, कुछ मामलों में योजनाओं को बीच में ही रोकना पड़ता है।
अब इसी समस्या से निपटने के लिए राजस्व विभाग नई “लैंड परचेज पॉलिसी (Land Purchase Policy)” तैयार कर रहा है, जिसे जल्द कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा। सरकार का कहना है कि इस नीति में आम लोगों को उनकी जमीन का सही और अधिक मूल्य देकर सहमति आधारित खरीद को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे विकास परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकेंगी।
यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें
Toggleविकास परियोजनाओं की सबसे बड़ी बाधा: जमीन की कमी और लंबी भू-अधिग्रहण प्रक्रिया
उत्तराखंड में नई सड़कों, बाईपास, फ्लाईओवर, चिकित्सालय, विद्यालय, पेयजल योजनाओं, बिजली परियोजनाओं और सरकारी भवनों के लिए अक्सर जमीन की जरूरत पड़ती है। लेकिन जमीन अधिग्रहण की मौजूदा प्रक्रिया लंबी, जटिल और कई चरणों वाली होती है। इसमें समय अधिक लगता है, जिससे—
योजनाएं महीनों से वर्षों तक अटक जाती हैं।
परियोजनाओं की लागत बढ़ जाती है।
विकास कार्यों में देरी से जनता को समय पर लाभ नहीं मिल पाता।
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कुछ योजनाएं अंतिम चरण में भी “ड्राप (Drop)” करनी पड़ सकती हैं।
इसी कारण सरकार अब जमीन जुटाने के लिए भू-अधिग्रहण का एक वैकल्पिक तरीका तैयार करने पर फोकस कर रही है।
क्या है नई लैंड परचेज पॉलिसी, और इसमें क्या बदलेगा?
नई नीति का उद्देश्य यह है कि सरकारी योजनाओं के लिए जमीन जुटाने में आम लोगों से सीधे संवाद और सहमति आधारित खरीद की व्यवस्था बने। यानी सरकार जमीन मालिकों के साथ मोलभाव कर उन्हें “सही और अधिक भाव” देकर भूमि खरीदेगी, ताकि विवाद कम हों और काम तेज हो।
राजस्व विभाग का प्रयास है कि इस नीति में ऐसे मजबूत प्रावधान हों, जिससे यह नीति जमीन मालिकों के लिए आकर्षक बने और वे स्वेच्छा से अपनी जमीनें विकास योजनाओं के लिए देने को तैयार हों। इससे आम लोगों में यह धारणा भी बन सकती है कि सरकारी योजनाओं के लिए जमीन देना नुकसान का सौदा नहीं, बल्कि उचित लाभ का अवसर है।
4 गुना मुआवजा: अभी क्या नियम है?
सरकारी अधिग्रहण व्यवस्था में अभी जमीन का मुआवजा “सर्किल रेट (Circle Rate)” के आधार पर तय किया जाता है। जानकारी के अनुसार वर्तमान प्रावधानों में कई मामलों में सर्किल रेट का चार गुना तक मुआवजा देने का प्रविधान है।
नई लैंड परचेज पॉलिसी में सरकार यही कोशिश करेगी कि लोगों को उनकी जमीन का और बेहतर मूल्य दिया जाए, ताकि सहमति से भूमि क्रय संभव हो और कानूनी प्रक्रिया के लंबे चरणों से बचा जा सके।
“अधिक मुआवजा” क्यों जरूरी बन गया है?
यह सवाल स्वाभाविक है कि सरकार को अधिक मुआवजा क्यों देना पड़ रहा है। कारण साफ हैं—
बाजार मूल्य और सर्किल रेट में कई जगह अंतर होता है।
विकास योजनाओं में जमीन देने वाले परिवारों को भविष्य की सुरक्षा चाहिए।
विवाद की स्थिति में परियोजनाएं वर्षों तक लटक जाती हैं।
इसीलिए सरकार नीति को “न्यायोचित और व्यवहारिक” बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
राजस्व सचिव का बयान: समय और लागत दोनों बचेंगे
राजस्व सचिव एसएन पांडेय के अनुसार भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है। इसी वजह से योजनाओं में देरी होती है और लागत बढ़ जाती है। इसलिए दूसरे विकल्प के तौर पर लैंड परचेज पॉलिसी पर काम किया जा रहा है।
यह बयान संकेत देता है कि सरकार अब परियोजनाओं के क्रियान्वयन को तेज करना चाहती है, ताकि योजनाएं समय पर पूरी हों और सरकारी धन की बचत भी हो।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
इस नीति के लागू होने पर विकास की दिशा में दो स्तर पर असर दिख सकता है—
पहला, परियोजनाएं तेज गति से आगे बढ़ेंगी, जिससे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा।
दूसरा, जिन लोगों की जमीनें सरकार खरीदेगी, उन्हें बेहतर मुआवजा मिलने की संभावना बढ़ेगी, जिससे वे अपने परिवार की आजीविका और भविष्य की योजनाएं बेहतर तरीके से बना सकेंगे।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह नीति जमीन मालिकों के लिए भरोसेमंद और पारदर्शी साबित होगी? और क्या जमीन खरीद की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार या पक्षपात की गुंजाइश रोकी जा सकेगी? सरकार के लिए असली परीक्षा यहीं होगी।
आगे क्या होगा?
राजस्व विभाग की तैयारी है कि अगली कैबिनेट बैठक में नई लैंड परचेज पॉलिसी को मंजूरी के लिए रखा जाए। मंजूरी के बाद इसके नियम, दरें, प्रक्रिया और विभागीय जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी। इसके बाद ही यह तय होगा कि जमीन खरीद की यह नई नीति राज्य के विकास को कितनी गति दे पाएगी।
पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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