नवीन समाचार, देहरादून, 20 जनवरी 2026 (Notice to SSP-Sukhwant Case)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जुड़े राज्य स्तरीय इस महत्वपूर्ण प्रकरण में काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मृत्यु के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने बड़ा कदम उठाया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और मृतक के परिजनों के बयानों के आधार पर एसआईटी ने एसएसपी उधमसिंहनगर, 03 उप निरीक्षक और 01 अपर उप निरीक्षक को पूछताछ एवं बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किए हैं। साथ ही भूमि धोखाधड़ी के आरोपों की जांच के लिए रजिस्ट्रार और तहसील कार्यालय के अभिलेख तथा बैंकिंग लेन-देन रिकॉर्ड हासिल करने हेतु विभिन्न बैंकों को भी नोटिस भेजे गये हैं।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें किसान की मृत्यु, भूमि लेन-देन, पुलिस कार्यवाही पर उठे प्रश्न, प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया—सब एक साथ जुड़े हैं।
सुखवंत सिंह प्रकरण: एसआईटी नोटिस, दस्तावेजी जांच और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण
सोशल मीडिया वीडियो और परिजनों के बयान बने नोटिस का आधार
एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो तथा मृतक के परिजनों द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (Senior Superintendent of Police—SSP) उधमसिंहनगर सहित कुल 5 पुलिस अधिकारियों को पूछताछ और बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किए गये हैं। इनमें एसएसपी के साथ 03 उप निरीक्षक (Sub Inspector) और 01 अपर उप निरीक्षक (Additional Sub Inspector) शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि जांच में प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तथ्य-संग्रह और जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
भूमि धोखाधड़ी के आरोपों पर रजिस्ट्रार, तहसील और बैंकों को नोटिस
एसआईटी ने मृतक के साथ भूमि धोखाधड़ी के आरोपों के संबंध में रजिस्ट्रार कार्यालय (Registrar Office) और तहसील कार्यालय (Tehsil Office) से अभिलेख प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। साथ ही संबंधित बैंकिंग लेन-देन रिकॉर्ड (Banking Transaction Records) प्राप्त करने हेतु विभिन्न बैंकों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन संस्थानों से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर लेन-देन की सत्यता और कागजातों की प्रामाणिकता की जांच की जाएगी।
यह जांच इसलिए भी अहम है क्योंकि भूमि से जुड़े विवादों में दस्तावेज, ऋण, भुगतान और रजिस्ट्री जैसे अभिलेख ही सत्य तक पहुंचने का मुख्य आधार होते हैं।
एसआईटी सदस्य अजय गणपति का बयान: अभिलेख कब्जे में लेकर सूक्ष्म परीक्षण
एसआईटी के सदस्य एवं पुलिस अधीक्षक, चंपावत अजय गणपति (Ajay Ganpati) ने बताया कि घटनाक्रम से संबंधित अभिलेख कब्जे में लेकर उनका सूक्ष्म परीक्षण किया जा रहा है। यह भी कहा गया कि एसआईटी की विशेषज्ञ टीम तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) के माध्यम से लगातार विश्लेषण कर रही है।
कॉल विवरण, सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों पर तकनीकी जांच जारी
एसआईटी की विशेष टीम द्वारा कॉल विवरण रिकॉर्ड (Call Detail Records—CDR), सीसीटीवी (CCTV), डिजिटल साक्ष्य (Digital Evidence) तथा अन्य तकनीकी इनपुट्स का विश्लेषण निरंतर जारी बताया गया है। जांच का उद्देश्य यह है कि घटनाक्रम की प्रत्येक कड़ी स्पष्ट हो और यह स्थापित हो सके कि किस स्तर पर क्या हुआ। क्या तकनीकी साक्ष्य उस कथन की पुष्टि करेंगे, जो वीडियो और परिजनों के बयानों में सामने आया है? जांच की दिशा इसी ओर बढ़ती दिख रही है।
घटना का संक्षिप्त तथ्य: 10 जनवरी 2026 की रात होटल में गोली लगने से मृत्यु
जानकारी के अनुसार, उधमसिंहनगर जनपद के काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह 10 जनवरी 2026 की रात काठगोदाम थाना क्षेत्र के गौलापार स्थित एक होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मृत मिले। वह अपनी पत्नी और 12 वर्षीय बालक के साथ घूमने आए थे।
फेसबुक लाइव के आरोप: कथित चार करोड़ रुपये का भूमि धोखाधड़ी मामला और पुलिस पर गंभीर आरोप
घटना से पहले सुखवंत सिंह ने फेसबुक लाइव (Facebook Live) वीडियो बनाकर भूमि से जुड़े कथित चार करोड़ रुपये के धोखाधड़ी प्रकरण का उल्लेख किया था। वीडियो में उत्तराखंड पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गये और यह कहा गया कि कई महीनों तक शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इस वीडियो के बाद प्रकरण राज्यव्यापी चर्चा में आ गया और प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठने लगे।
राज्य सरकार की कार्रवाई: मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, कुमाऊं आयुक्त को जिम्मेदारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल मजिस्ट्रियल जांच (Magisterial Inquiry) के आदेश दिए। जांच की जिम्मेदारी कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत (Deepak Rawat, Kumaon Commissioner) को सौंपी गई, जिन्होंने औपचारिक जांच शुरू कर दी है। इससे पहले प्रकरण से जुड़े पुलिसकर्मियों का निलंबन (जिसका निलंबन किया गया है) और जिले से बाहर स्थानांतरण भी किया जा चुका है।
एसआईटी गठन: आईजी एसटीएफ को कमान, घटनास्थल का निरीक्षण
सच सामने लाने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष एसआईटी (Special Investigation Team—SIT) का गठन किया गया। इसकी कमान आईजी एसटीएफ (IG STF) को सौंपी गई है। हाल ही में आईजी एसटीएफ नीलश आनंद भरणे (Neelesh Anand Bharne) ने काठगोदाम थाना क्षेत्र में घटनास्थल का निरीक्षण किया और एसआईटी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही प्रकरण की प्राथमिकी को थाना काठगोदाम स्थानांतरित किए जाने की प्रक्रिया भी बतायी गई है।
निष्पक्ष जांच पर निगाहें, आगे क्या हो सकता है
यह प्रकरण एक किसान की दुखद मृत्यु और भूमि धोखाधड़ी के कथित आरोपों से जुड़ा है। ऐसे मामलों में दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य ही निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अब निगाहें एसआईटी की निष्पक्ष जांच और निष्कर्ष पर टिकी हैं—क्या दोषियों की पहचान होगी, किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी और क्या भविष्य में भूमि धोखाधड़ी व शिकायत निस्तारण व्यवस्था में कोई नीतिगत बदलाव होगा?
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