EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / کٲشُرКыргызKurdîKʋsaalLëblaŋoлаккулезгиLugandaLingálaລາວلۊری شومالیlüüdidxʷləšucidmadhurâमैथिलीŊmampulliMalagasyKajin M̧ajeļമലയാളംМонголᠮᠠᠨᠵᡠManipuriма̄ньсиဘာသာမန်mooreमराठीမြန်မာ閩南語 / Bân-lâm-gú閩南語(漢字)閩南語(傳統漢字)Bân-lâm-gú (Pe̍h-ōe-jī)Bân-lâm-gú (Tâi-lô)KhoekhoegowabNorsk (bokmål)नेपालीनेपाल भाषाli nihanawdmNorsk (nynorsk)ngiembɔɔnߒߞߏSesotho sa LeboaThok NaathChichewaNzemaଓଡ଼ିଆਪੰਜਾਬੀPiemontèisΠοντιακάⵜⴰⵔⵉⴼⵉⵜTarandineрусскийसंस्कृतсаха тылаᱥᱟᱱᱛᱟᱞᱤ (संताली)सिंधीکوردی خوارگDavvisámegiellaKoyraboro SenniSängöⵜⴰⵛⵍⵃⵉⵜတႆးසිංහලᠰᡞᠪᡝSlovenčinaСрпски / srpskiSesothoSENĆOŦENSundaSvenskaŚlůnskiதமிழ்ತುಳುతెలుగుไทยትግርኛትግሬцӀаӀхна мизSetswanaChiTumbukaTwiⵜⴰⵎⴰⵣⵉⵖⵜудмуртУкраїнськаاردوOʻzbekchaꕙꔤTshiVenḓaVènetoWaaleWolofLikpakpaanlYorùbá中文中文(中国大陆)中文(简体)中文(繁體)中文(香港)中文(澳門)中文(马来西亚)中文(新加坡)中文(臺灣)Help इस समाचार को सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 2 अक्तूबर 2022। उत्तराखंड की सभी लोकभाषाओं को एकमंच पर लाने के लिए प्रयासरत राज्य की एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ के तत्वावधान में रविवार को उत्तराखंडी भाषाओं की अखिलभारतीय ऑनलाइन काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। इस मौके पर उत्तराखंड भाषा संस्थान के सम्मान से पुरस्कृत गढ़वाली साहित्यकार बीना बेंजवाल व कुमगढ़ पत्रिका के संपादक व संस्थान के पीताम्बर दत्त बडथ्वाल सम्मान से सम्मानित दामोदर जोशी ‘देवांशु’-हल्द्वानी, उत्तराखंड भाषा संस्थान के मनोनीत सदस्य जौनसारी कवि उत्तरकाशी से महावीर रवांल्टा, अल्मोड़ा से श्याम सिंह कुटौला, पौड़ी से शंभू प्रसाद भट्ट ‘स्नेहिल’, नई दिल्ली से पूरन चंद्र कांडपाल, लखनऊ से गिरीश बहुगुणा, गुरुग्राम से ज्योर्तिमई पंत, देहरादून से बीना बेंजवाल, डॉ. नीता कुकरेती, डॉ. सत्यानंद बड़ौनी व गोपाल बिष्ट, हल्द्वानी से मंजू पांडे ‘उदिता’, देवकी नंदन भट्ट ‘गरुड़’ व कैलाश पांडे, गरुड़ से मोहन जोशी-गरुड़, अल्मोड़ा से श्याम सिंह कुटौला, विपिन जोशी ‘कोमल’, चंपावत से दीपा पांडे, पिथौरागढ़ से दिनेश भट्ट तथा नैनीताल से डॉ. नवीन जोशी ‘नवेंदु’ ने अपनी प्रतिनिधि रचनाएं सुनाईं। देखें विडियो : काव्य गोष्ठी में देहरादून से डॉ. उमेश चमोला व डॉ. नंद किशोर हटवाल, नई दिल्ली से रमेश हितैषी व जगमोहन ज्याड़ा ‘जिज्ञासु’, बागेश्वर से केशवानंद जोशी, हरिद्वार से विनोद पंत व रामनगर से सुंदर लाल मदन व चंपावत से बहादुर बिष्ट सहित अनेक अन्य कवि जुटे एवं राज्य की लोकभाषाओं की प्रतिनिधि काव्य रचनाओं का आनंद लिया। संचालन डॉ. नवीन जोशी ‘नवेंदु’ ने किया। अन्य ताज़ा नवीन समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : मुख्यमंत्री ने किया प्रदेश की लोकभाषाओं की एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ का विमोचनयह भी पढ़ें : एगो उत्तराखंडी लोकभाषाओंकि एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’क नई अंक, यां ‘नवीन समाचार’ बटी ऑनलाइन पढ़ोयह भी पढ़ें : उत्तराखंडी लोक भाषाओं की एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ के तत्वावधान में आयोजित हुई काव्य गोष्ठीयह भी पढ़ें : एगो उत्तराखंडी लोकभाषाओंकि एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’क नई श्रद्धांजलि विशेषांक, यां ‘नवीन समाचार’ बटी ऑनलाइन पढ़ोयो लै पढ़ो : संपादकीय : उत्तराखंडी भाषाओंक मानकीकरण करणैकि जरवतयह भी पढ़ें : उत्तराखंड की कुमाउनी, गढ़वाली, जौनसारी, रवांल्टी आदि सभी लोकभाषाओं की एकमात्र मासिक पत्रिका ‘कुमगढ़’ के 7वें जनमबार अंक का हुआ विमोचनLike this:Relatedयह भी पढ़ें : मुख्यमंत्री ने किया प्रदेश की लोकभाषाओं की एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ का विमोचनडॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अक्टूबर 2021। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में प्रदेश की गढ़वाली-कुमाउनी आदि लोक भाषाओं की एकमात्र मासिक पत्रिका कुमगढ़ के ताजा अक्टूबर अंक का विमोचन किया।कुमगढ़ पत्रिका का विमोचन करते प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।इस दौरान मुख्यमंत्री ने कुमगढ़ पत्रिका के प्रदेश की लोकभाषाओं को एकमंच पर लाने के प्रयास की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और कुमगढ़ परिवार को अपनी शुभकामनायें दी। पत्रिका के संपादक दामोदर जोशी ‘देवांशु’ ने बताया कि कुमगढ़ पत्रिका विगत साढ़े सात वर्षों से सतत् रूप से हल्द्वानी से प्रकाशित हो रही है। यह प्रदेश की गढ़वाली-कुमाउनी सहित सभी उत्तराखंडी भाषाओं व बोलियो के सम्यक विकास, संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित उत्तराखंड की एकमात्र पत्रिका है। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रकाश गरजौला, डॉ. जगदीश चंद्र पंत, नितीश जोशी, समाजसेवी हरीश मनराल, भावना जोशी, कैलाश पांडेय आदि लोग उपस्तिथ रहे।यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में नई समस्या बने नीले ड्रम, ‘देशी गीजर’ बनाकर हो रही बिजली चोरी, रुड़की ऊर्जा निगम की कार्रवाई में 148 नीले ड्रम बरामद...यह भी पढ़ें : एगो उत्तराखंडी लोकभाषाओंकि एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’क नई अंक, यां ‘नवीन समाचार’ बटी ऑनलाइन पढ़ोकुमगढ़क जुलाई-अगस्त अंक पढ़णाक लिजी यां क्लिक करो : Kumgarh-July-August-final-2021यह भी पढ़ें : उत्तराखंडी लोक भाषाओं की एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ के तत्वावधान में आयोजित हुई काव्य गोष्ठीडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जुलाई 2021। उत्तराखंड की कुमाउनी, गढ़वाली व रवांल्टी आदि लोकभाषाओं की एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ के तत्वावधान में अपनी स्थापना के आठवें वर्ष में प्रवेश के मौके पर शुक्रवार शाम एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में नई दिल्ली से पूरन चंद्र कांडपाल व रमेश हितैषी, हल्द्वानी से कुमगढ़ के संपादक दामोदर जोशी ‘देवांशु’, पुष्पलता जोशी व भावना जोशी, अल्मोड़ा से नवीन बिष्ट व गोविंद बल्लभ बहुगुणा, रानीखेत से कृपाल सिंह शीला, बागेश्वर से विनोद पंत, नैनीताल से डॉ. नवीन जोशी ‘नवेंदु’ सहित गढ़वाल मंडल के देहरादून से सत्यानंद बड़ौनी व बीना बैंजवाल, पुरौला उत्तरकाशी से महावीर र्वांल्टा, पौड़ी से शम्भू प्रसाद भट्ट ‘स्नेहिल’ व हरिद्वार से दिनेश रावत आदि ने कुमाउनी, गढ़वाली व रवांल्टी लोक भाषाओं में गीत, न्यौली तथा तुकांत व अतुकांत तथा जापानी विधा हाइकू में कविताओं के विविध रंग भरे।‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट 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अंक पढ़णाक लिजी यां क्लिक करो : Kumgarh-March-April-2021जनवरी-फरवरी 2021 अंक पढ़नाक लिजी यो लिंक कें क्लिक करो- Kumgarh-January-february-2021 kumgarh-cover-january-feb-2021(1)पुराण अंक पढ़नाक लिजी यो लिंक कें क्लिक करो- Kumgarh-7-8-december-2020-cover(1) Kumgarh-Nov-Dec-2020(1)कुमगढ़ के पिछले अंक को यहां क्लिक करके भी पीडीएफ स्वरूप में पूरा पढ़ सकते हैं:KUMGARH-JULY-AUGUST-2020Kumgarsh-May-June-2020संपादकीय -डॉ. नवीन जोशी ‘नवेंदु’बदलाव प्रकृतिक नियम छू। हर बखत बदलाव होते रूं। क्वे बखत यस न हुन जब बदलाव न हुन। हर रोज एक टैम पारि लै सब तिर एक जस नि रून। दिनैकि तारीक बदलि जानी, और दगड़ै मौसम, दिन-म्हैंण जांणि कि-कि बदलि जां। पैली अत्ती बदलावाक लिजी कई जांछी कि अमुख चीज ‘दिन दुणि-रात चौगुणि’ बढ़णै-बदलणै। पत्त नैं तब वास्तव में क्वे चीज यैसि गतिल बदलछी ऽ कि नैं, परयो बात आज इकाईसूं सदी में इंटरनेटाक दगाड़ सच्चि होते देखींणै। मिनटों-सेकेंडों, सेकेंडोंक हिस्स में लै संदेश कांक-कां पुजि जांणईं। आज वीडियो कॉल में सात-समंुदर पार गई मैंस थैं आंमणि-सांमणि बैठी जास उकैं मोबाइल में देखते रओ और बात करते रओ। मोबाइल में देश-दुणियाक समाचारों दगै पुरि दुंणियाक साहित्य कैं आपणि भाषा में अनुवाद करि बेर पढ़ि लिओ। हाव, पांणि और सांसोंक अलावा पुरि दुनी मोबाइल में अटांण हुं उरी रै।यास बदलावाक बखत में लेखी-छपी हुई साहित्य, पत्र-पत्रिकाओं, यां तक कि काफि प्रसिद्ध समाचार पत्रों पारि अस्तित्वक संकट ऐ गो। एक तरफ इंटरनेट सुप्रसिद्ध संचार विश्लेषक मार्शल मैक्लुहानैकि 1967 में आई किताब ‘मीडियम इज द मैसेज’ में संचार माध्यमोंक बारि में करी गेई टिप्पणी कैं सई साबित करते हुए ‘ग्लोबलाइजेशन’ यानी भूमंडलीकरण और ‘ग्लोबल विलेज’ यानी भारतीय ‘वसुधैव कुंटुंबकम’ या ‘विश्व ग्राम’ कि कल्पना कें साकार करते हुए पुरि दुंणी कें एक मंच पारि लै गो। वैं दुसरि तरफ अमेरिकी मीडिया अकादमिक प्रो. फिलिप मेयर जा्स मीडिया क्षेत्राक विद्वान अमेरिका में अप्रैल 2043 में आखिरी समाचार पत्रैकि प्रति छापणैकि भविष्यवाणी करि चुकि गेईं। अमेरिका बटी शुरू हई यो चिंता भारत तक लै पुजि गे। इथां कोरोना काल में उरातार बढ़ते जांणी भारतीय समाचार पत्रोंक यो विश्वास टुटण देख्यौ कि भारतीय लोग चीजों कैं ठौक लगै बेर रिश्त बणूंनी और उनर अखबारों दगाड़ रिश्त अटूट छू। यो दौरान लोगोंल यस चिता जांणि अखबारों में चिपकि बेर कोरोना ऊंणौ। उनूंल अखबार ल्हिंण बंद करि देईं। यास में कई अखबार बंद है ग्येईं, और अखबारों में काम करणीं हजारों लोग बेरोजगार है ग्येईं। यास में पैलियै बटी कमजोर आर्थिक स्थिति में चलणीं पत्र-पत्रिकाओं और खासकर भाषाई पत्र-पत्रिकाओंकि स्थितियों कें लै आसानील समझी जै सकूं।एक पक्ष यो लै छू कि इंटरनेटैल अखबारों, पत्र-पत्रिकाओंकि आपण पाठकों तक पहुंच आसान करि हाली। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओंक जोर लै छपंण है ज्यादे इंटरनेट पारि देखींण में बांकि देखीणौ। ‘कुमगढ़’ लै यो परेशानील परेशान छी कि कई बारि डाक विभाग बटी प्रति भेजणाक बावजूद पत्रिका हमार पाठकों तक न पुजि सकणैछी। यैक समाधान इंटरनेटैलै सुझा। ‘कुमगढ़’ लै आ्ब पीडीएफ माध्यम पर हमार ह्वाट्सएप व फेसबुक पेज और ‘नवीन समाचार’ वेबसाइट (https://deepskyblue-swallow-958027.hostingersite.com/kumgarh-online/) पारि उपलब्ध कराई जांणै। जां बटी हमार पाठक ‘कुमगढ़’ कैं आपंण मोबाइल पारि पत्रिकाक स्वरूप में प्राप्त करि सकनीं। वैं हमूकैं यो विश्वास लै छू कि छपी हुई पत्र-पत्रिकाओंक भविष्य आजि लै बेहतर बड़ी हुई छू, और हमेशा रौल। यो वास्ते ‘कुमगढ़’ अघिल लै आपंण पाठकों व साहित्यकारोंक सहयोगैल उरातार छपते रौलि, और यो विश्वास आपूं सबंूक भरौसैल बड़ी रौल। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी : गौलापार के होटल में काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले, फेसबुक लाइव वीडियो में 4 करोड़ रुपये के भूमि विवाद और उत्पीड़न के आरोपयो लै पढ़ो : संपादकीय : उत्तराखंडी भाषाओंक मानकीकरण करणैकि जरवतउत्तराखंडैकि चंद भाषाओंकि राजभाषा रई कुमाउनी और पवार राजाओंकि राजभाषा रई गढ़वालि कें हालांकि संविधानैकि अठूं अनुसूचि में शामिल करणैकि मांग संसद में करि हाली गे। यो द्वियै हिंदीकि सहोदरी भै-बैंणी जा कुमाउनी-गढ़वाली हिंदीक अस्तित्व में ऊंण है पैली बै न केवल प्रचलित बल्कि राजभाषा तक रई छन। भाषाविद् डा. तारा चंद्र त्रिपाठी ज्यू और इतिहासकार मदन चंद्र भट्ट ज्यूकि पुस्तक ‘कुमाऊं की जागर कथायें’ क अनुसार कुमाउनीक शाके 911 यानी सन् 989 और गढवालीक शाके 1377 यानी सन् 1455 तकाक दान पत्र मिलनी। अघिल कै 12वीं-13वीं शताब्दी बटी 18वीं शताब्दी तक चंद राजवंश और उनार पछिलैकि नानि-नानि ठकुराइयोंक दानपत्र व ताम्रपत्र कुमाउनी भाषा में‘ई लेखी मिलनीं। वांई प्रो. शेर सिंह बिष्ट ज्यूकि पुस्तक ‘कुमाउनी भाषा का उद्भव और विकास’ में डा. महेश्वर प्रसाद जोशीक हवालैल बताई जैरौ कि सन् 1728 में रामभद्र त्रिपाठी ज्यूल संस्कृत में लेखी ‘चाणक्य नीति’ क कुमाउनी भाषा में गद्यानुवाद करौ, यानी तब बटी कुमाउनी में साहित्य लेखणैकि शुरुआत है गेछी। दगड़ै यो लै बताई जैरौ कि चंद राजोंल कुमाउनी कें राजभाषाक रूप में अपणाई गो।यैक अलावा 13वीं शताब्दी में सहारनपुर बटी हिमांचल तक फैली गढ़वाल राज्यक राजकाज गढ़वाली भाषा में ही हुंछी। देवप्रयाग मंदिर में मिली महाराजा जगतपालाक सन तेर सौ पैंतीसक दानपात्र पारि लेखी, देवलगढ़ में अजयपालाक 15वीं शताब्दीक लेख व बदरीनाथ एवं मालद्यूल आदि अनेक स्थानों में मिली ताम्रपत्रों पर उत्कीर्ण लेखोंक अनुसार गढ़वाली भाषाक देशैकि प्राचीनतम भाषाओं में बटी एक हुंणाक प्रमाण लै मिलनीं। वाईं डा. हरिदत्त भट्ट ‘शैलेश’ ज्यूक अनुसार तो गढ़वाली भाषा में 10वीं शताब्दीक साहित्य लै मिलूं।पर यो दुर्भाग्य छू कि आज लै यो भाषा, भाषा नैं बोलि‘ई कई जानीं। और कई लै किलै नि जाओ, यो भाषाओंक बुलांणी तो छोड़ो, इनार रचनाकार, स्वनामधन्य झंडाबरदार लै आजि यों भाषाओं में नैं, बल्कि इनैरि उपभाषाओं में ई ‘अल्झी’ रईं। उं आपंण इलाकैकि स्थानीय उप भाषाओंक मोह न छोड़ि सकनाय। सांचि बात यो लै छू कि आज जब कुमाउनी-गढ़वाली में भरपूर लेखी जांणौ, गीत गाई जांणई, वीडियो-फिल्म बणंणई। आधुनिक दौर में यो भाषाओंक दर्जनों फेसबुक-ह्वाट्सएप ग्रुप, यूट्यूब चैनल लै चलणईं, और इन भाषाओं में यूट्यूब चैनल चलूणियोंक लाखों सबस्क्राइबर लै है ग्येईं। यानी यो भाषाओं में भौत काम हूंणौ, लोग यों भाषाओंक बल पारि कमाइ लै करंण फै ग्येईं, पर सबूं है ठुल जो काम करणैकि जरूरत छू, उ नि हुणंय। उ काम छू, यो भाषाओंक मानकीकरण करणंक। किलैकि जब यो भाषाओंक मानकीकरण ह्वल, तबै यो भाषाओंक स्तर मिलि सकौल। तबै इनूंकैं संविधानैकि अठूं अनुसूचि में शामिल करणक बाट लै खुलल।याद धरंण पड़ल कि हिंदी लै तबै भाषाक रूप में स्थापित है सकी, जब वीक साहित्यकारोंल वीक खड़ी बोली, अवधी, ब्रज, देसी, अपभ्रंश, प्राकृत और हिंदुस्तानी हिंदी जास अनेकानेक रूपों कें छोड़ि बेर एक मानक रूप कें स्वीकार करौ। यसै एकजुट प्रयास कुमाउनी और गढ़वाली भाषाओं में लै करी जांणैकि जरवत छू।यह भी पढ़ें : 'टीम इंडिया' में उत्तराखंड मूल के एक और युवा खिलाड़ी ‘बेबी एबी’-आयुष बड़ोनी की एंट्री, मौका मिलने-खेलने और गंभीर के पूर्व बयान पर चर्चा तेजयह भी पढ़ें : उत्तराखंड की कुमाउनी, गढ़वाली, जौनसारी, रवांल्टी आदि सभी लोकभाषाओं की एकमात्र मासिक पत्रिका ‘कुमगढ़’ के 7वें जनमबार अंक का हुआ विमोचनकुमगढ़ पत्रिका के सातवें जनमबार अंक का विमोचन करते पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक, संपादक एवं पूर्व भाषा शिक्षा अधिकारी।नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जुलाई 2020। उत्तराखंडी भाषाओं की एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ के छह वर्ष पूरे होने पर सातवें जनमवार अंक का विमोचन पूर्व राज्य के पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. डॉ पीसी बाराकोटी के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर ‘कुमगढ़’ पत्रिका के संपादक दामोदर जाशी देवांशु, पूर्व भाषा शिक्षा अधिकारी डॉ. जेसी पंत आदि उपस्थित रहे। इस मौके पर डॉ.बाराकोटी ने कुमगढ़ के पाठकों, भाषा प्रेमियों व कुमगढ़ परिवार को बधाई दी। ज्ञातव्य है कि नैनीताल जनपद के पश्चिमी खेड़ा गौलापार से प्रकाशित ‘कुमगढ़’ उत्तराखंड की कुमाउनी, गढ़वाली, जौनसारी, रवांल्टी आदि सभी लोकभाषाओं के विकास एवं संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध एकमात्र लोकभाषओं की मासिक पत्रिका है और विगत 6 वर्षों से अनवरत रूप से प्रकाशित हो रही है। इसमें सभी लोकभाषाओं को सम्मान तो मिल ही रहा है, साथ ही विभिन्न भाषाओं का सम्यक आदान-प्रदान भी हो रहा है।कुमाउनी भाषा का इतिहासतारा चंद्र त्रिपाठी की पुस्तक ‘मध्य पहाड़ी भाषाओं का ऐतिहासिक स्वरूप’ पुस्तक में इतिहासकार मदन चंद्र भट्ट की पुस्तक ‘कुमाऊं की जागर कथायें’ के आधार पर कुमाउनी के शाके 911 यानी यान 989 और गढवाली के शाके 1377 यानी सन् 1455 तक के दान पत्र मिलने की बात कही गई है। सन् 989 के राजा थोरहत अभयचन्द के लोहाघाट दानपत्र का अंश इस प्रकार है- ‘श्री महाराजा अभयचन्द वीजयराज्ये अभै भाक/स्वस्ति श्री शाके 911 मासे ज्येष्ठवदी 30 सोमे श्री महाराजा/थोरहत अभयचन्द ले गडसारीया ज्यु 1 संकल्पष्ठ/..मि दत्त करी दीनी सैच भाट गडसरा ले पाई चुलौदा मथा/बसनाती माजा गलसम मै भूमी पाई गडिलि मेटीली ना/ठ नठाली सर्ग को ढीडो पताल की नीधी सर्वकर अकरी/सर्वदोष निर्दोष…’डा. योगेश चतुर्वेदी की पत्रिका ‘गुमानी ज्योति’ में भी इसका जिक्र किया गया है। पुस्तक के अनुसार लोहाघाट के एक व्यापारी के पास से चंपावत के चंद राजा थोर अभय चंद का 989 ईसवी का कुमाउनी भाषा में लिखित ताम्र पत्र मिला है। जिससे स्पष्ट होता है कुमाउनी दसवीं सदी में भी प्रतिष्ठित थी।प्रो. शेर सिंह बिष्ट की पुस्तक ‘कुमाउनी भाषा का उद्भव और विकास’ में डा. महेश्वर प्रसाद जोशी के हवाले से सन् 1105 के ताम्रपत्र का कुमाउनी के पहले नमूने-अभिलेख के रूप में बताया गया है। पुस्तक में सन् 1728 में रामभद्र त्रिपाठी द्वारा संस्कृत में लिखित ‘चाणक्य नीति’ का कुमाउनी भाषा में गद्यानुवाद किये जाने तथा चंद शासकों द्वारा कुमाउनी को राजभाषा के रूप में अपनाने और चंद शासनकालीन प्रारंभिक अभिलेखों में संस्कृत मिश्रित कुमाउनी के होने का भी जिक्र है।भाषा विद्वान डा. केशव दत्त रुवाली के अनुसार कुमाउनी के प्राचीनतम नमूने शक संवत् 1266 अर्थात 14वीं शताब्दी के पूर्वाध से मिलते है। पहले उपलब्ध नमूने में लिखा गया हैं, ‘श्री शाके 1266 मास भाद्रपद राजा त्रिलोकचन्द रामचन्द्र चंपाराज चिरजयतु पछमुल बलदेव चडमुह को मठराज दीनी’।यह भी पढ़ें : उत्तराखंडी भाषाओं की मासिक पत्रिका ‘कुमगढ़’ का नया अंक आया, इन रचनाकारों की रचनाएं हैं शामिलहल्द्वानी। वर्तमान में उत्तराखंड राज्य की सभी लोक भाषाओं की एकमात्र प्रतिनिधि पत्रिका ‘कुमगढ़’ के नये अंक का शनिवार को जनपद के पश्चिमी खेड़ा में विमोचन किया गया। इस मौके पर पत्रिका के संपादक व साहित्यकार दामोदर जोशी ‘देवांशु’ ने बताया कि कुमगढ़ पत्रिका पिछले छह वर्षों से बिना किसी सरकारी सहायता के उत्तराखंड के लोक साहित्य के उन्नयन के लिए कार्य कर रही है। पत्रिका की कोशिश उत्तराखंड की लोक भाषाओं को एक रूप में लाना व उनका स्वाभाविक तौर पर मानकीकरण करना है। साथ ही इस तरह का माहौल बनाने का प्रयास भी है, जिससे कि लोकभाषाएं भावी पीढ़ी को लाभप्रद लगें और वे अपनी लोकभाषाओं की ओर लौटें। नये अंक में डा. गुंजन जोशी, सुधा जोशी, जगदीश जोशी, तोता राम ढोंढियाल, मनोरमा बर्त्वाल, त्रिभुवन गिरि, भवानी दत्त पंत, हेमंत बिष्ट, डा. नंद किशोर हटवाल, आनंद बल्लभ पपनै, दीपक भाकुनी, देवकी नंदन भट्ट ‘मयंक’, डा. मनोज उप्रेती, डा. भवानी दत्त कांडपाल, प्रेम बल्लभ पुरोहित ‘राही’, तारा चंद्र त्रिपाठी, देवकी महरा, शेर सिंह बिष्ट ‘अनपढ़’, अंबा भट्ट, मथुरा दत्त मठपाल, तारा पाठक, मोहन राम टम्टा ‘कुमाउनी’, डा. देवी दत्त दानी, बंशीधर पाठक ‘जिज्ञासु’, विपिन जोशी ‘कोमल’, जीसी जोशी, कंचन कुमार तिवारी, डा. जगदीश पंत, जगमोहन सिंह जयाड़ा ‘जिज्ञासु’, पवनेश ठकुराठी, रमेश हितैषी, छम्भू दत्त छिम्वाल, गोविंद बल्लभ बहुगुणा, डा. प्रदीप उपाध्याय, खुशाल खनी, अश्विनी गौड़, जुगल किशोर पेटशाली, भुवन बिष्ट, अंबा भट्ट, हरीश जुयाल ‘कुटज’ आदि की रचनाएं शामिल हैं। कुमगढ़ पत्रिका मंगाने के लिए संपादक दामोदर जोशी ‘देवांशु’ के मोबाइल नंबर 9719247882 पर संपर्क कर सकते हैं।Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationबोट हाउस क्लब नैनीताल : ‘छोटी बिलायत’ में आज भी है कुछ ऐसा, जो है दुनियां में सिर्फ ‘बिलायत’ में पिता को हजारों में महंगा पड़ा नाबालिग बेटे को स्कूटी चलाने देना
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