नवीन समाचार, नई दिल्ली, 21 मार्च 2026 (Gold-Silver Prices Historic Up-Down)। देशभर में निवेशकों के बीच सोने और चांदी के दामों को लेकर चिंता का माहौल है, क्योंकि वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक स्तर तक बढ़ने के बाद इस सप्ताह 42 वर्ष बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इजरायल (Israel) और ईरान (Iran) के बीच जारी युद्ध के 22वें दिन के बीच पारंपरिक सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने-चांदी में गिरावट ने निवेशकों की रणनीति पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
42 वर्ष बाद सबसे बड़ी गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना इस सप्ताह गिरकर 4500 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया है, जिसे वर्ष 1983 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट माना जा रहा है। इस सप्ताह सोना करीब 11 प्रतिशत टूटा है, जबकि पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल व ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद कुल मिलाकर इसमें 14 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
चांदी भी इस दबाव से नहीं बच पाई और एक दिन में लगभग 5 प्रतिशत गिरकर 70 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई। जनवरी में यही चांदी 119 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर थी।
रिकॉर्ड तेजी के बाद गिरावट
वर्ष 2025 में सोने ने लगभग 64 से 80 प्रतिशत और चांदी ने करीब 160 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया था। जनवरी 2026 में सोना पहली बार 5000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था। तेजी के इस लंबे दौर के बाद अब बड़े स्तर पर प्रॉफिट बुकिंग भी गिरावट का महत्वपूर्ण कारण बनी है।
भारतीय बाजार में भी तेज गिरावट
भारतीय बाजार में भी इस गिरावट का सीधा प्रभाव देखने को मिला है।
29 जनवरी 2026 को सोना लगभग 1.92 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर पर था
अब यह गिरकर करीब 1.44 लाख से 1.47 लाख रुपये के स्तर पर आ गया है
27 फरवरी को 1,62,104 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा सोना 21 दिनों में लगभग 11 प्रतिशत गिरकर 1.47 लाख पर आ गया है
चांदी में और भी अधिक गिरावट दर्ज की गई—
27 फरवरी को 2,82,644 रुपये प्रति किलोग्राम
अब घटकर लगभग 2,27,470 रुपये प्रति किलोग्राम
करीब 20 प्रतिशत की गिरावट
गिरावट के प्रमुख कारण
ऊर्जा बाजार की ओर निवेशकों का रुख
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है और कई समय 119 डॉलर तक पहुंच गया। इससे निवेशकों का ध्यान सोने से हटकर ऊर्जा क्षेत्र की ओर गया।
ब्याज दर और महंगाई
महंगाई बढ़ने के कारण केंद्रीय बैंक, विशेषकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve), ब्याज दरों में कटौती के बजाय उन्हें ऊंचा बनाए रखे हुए हैं।
ऊंची ब्याज दरों पर बॉन्ड जैसे साधन अधिक आकर्षक हो जाते हैं
सोना कोई नियमित आय नहीं देता, इसलिए निवेशक उससे दूरी बना लेते हैं
डॉलर की मजबूती
डॉलर इंडेक्स में लगभग 2 प्रतिशत की मजबूती आई है।
डॉलर मजबूत होने पर सोना अन्य देशों के निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है
मांग घटती है और कीमतों पर दबाव आता है
भू-राजनीतिक समीकरण का बदलना
सामान्यतः युद्ध की स्थिति में सोना बढ़ता है, लेकिन इस बार तेल और ब्याज दरों के कारण यह समीकरण उलट गया है।
निवेशकों पर असर
पिछले कुछ महीनों में ऊंचे दाम पर सोना-चांदी खरीदने वाले निवेशक सबसे अधिक प्रभावित हैं।
अल्पकालिक निवेश करने वाले नुकसान से चिंतित हैं
कम दाम पर खरीदने वाले निवेशक भी अब वृद्धि का इंतजार कर रहे हैं
विशेषज्ञों की राय
पृथ्वी फिनमार्ट के मनोज कुमार जैन के अनुसार—
वर्तमान गिरावट अस्थायी हो सकती है
एसआईपी के माध्यम से निवेश जारी रखना बेहतर
एकमुश्त निवेश से फिलहाल बचना चाहिए
यदि कम कीमत पर खरीदा है तो लाभ अर्जित किया जा सकता है
दीर्घकालिक निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विश्लेषक मानव मोदी के अनुसार—
निवेश में संतुलन आवश्यक
पोर्टफोलियो में 70-75 प्रतिशत सोना और 25-30 प्रतिशत चांदी रखना उचित
आगे क्या रहेगा रुख
विशेषज्ञों के अनुसार सोने-चांदी का भविष्य कई कारकों पर निर्भर करेगा—
यदि युद्ध लंबा चला तो सोना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और 200 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकता है
यदि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती का संकेत देता है तो तेजी संभव
डॉलर कमजोर होने पर भी कीमतों में सुधार आ सकता है
कुछ अनुमानों के अनुसार भारत में—
2027 तक सोना 90,000 से 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है
2026 के अंत तक 3500 डॉलर प्रति औंस तक गिरावट संभव
क्या करें निवेशक
अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से बचें
बाजार में स्थिरता आने का इंतजार करें
चरणबद्ध निवेश रणनीति अपनाएं
दीर्घकालिक दृष्टिकोण बनाए रखें
सोना-चांदी में आई यह गिरावट केवल बाजार की सामान्य हलचल नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों का परिणाम है। युद्ध, तेल कीमत, ब्याज दर और मुद्रा बाजार—इन सभी के संयुक्त प्रभाव ने निवेशकों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले समय में बाजार किस दिशा में जाएगा, यह वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल सतर्कता ही सबसे बड़ी रणनीति मानी जा रही है।
(अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के लिए है। निवेश से पहले विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक है।)
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
