धर्म बदलकर शादी-फिर जन्मदिन की पार्टी के धोखे से हत्या, बहुचर्चित दीक्षा हत्याकांड में आरोपित ऋषभ उर्फ इमरान को आजीवन कारावास

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 फरवरी 2026 (Diksha Murder-Rishabh Tiwari-Imran)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) में वर्ष 2021 के बहुचर्चित दीक्षा मिश्रा (Diksha Mishra) हत्या प्रकरण में न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी (Prashant Joshi) की अदालत ने आरोपित ऋषभ तिवारी उर्फ इमरान (Rishabh Tiwari alias Imran) को भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा दी है। इस निर्णय को महिला सुरक्षा और पहचान छिपाकर किए गये अपराधों पर कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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अभियोजन के अनुसार 15 अगस्त 2021 को स्वतंत्रता दिवस के दिन मल्लीताल (Mallital) पुलिस कोतवाली के समीप होटल गैलेक्सी (Hotel Galaxy) में यह घटना हुई थी। आरोपित ऋषभ तिवारी उर्फ इमरान, पुत्र इत्वेजामू अद्दीन, निवासी मकान संख्या 220 पटेल नगर (Patel Nagar) गाजियाबाद (Ghaziabad) ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर स्वयं को हिंदू ब्राह्मण बताकर मृतका से परिचय बढ़ाया था और विवाह और निकाह करने का दावा भी किया था, हालांकि अभियोजन के अनुसार ऐसे दावे झूठे पाए गये । आप यह संबंधित वीडिओ भी देखना चाहेंगे : 

बताया गया कि 14 अगस्त 2021 की शाम होटल में दो कमरे लिये गये थे। एक कमरे में रिपोर्टकर्ता श्वेता शर्मा (Shweta Sharma) अपनी मित्र अलमास (Almas) के साथ रुकी थीं, जबकि दूसरे कमरे में दीक्षा और आरोपित ठहरे थे। 16 अगस्त को दोनों का फोन रिसीव नहीं होने पर श्वेता और अलमास कमरे तक पहुँचीं, जहां दीक्षा बिस्तर पर अचेत अवस्था में मिली और आरोपित फरार था।

पोस्टमार्टम और साक्ष्यों से हुई पुष्टि

(Diksha Murder-Rishabh Tiwari-Imran
मृतका दीक्षा शर्मा

सूचना पर पुलिस ने अभियोग पंजीकृत किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण गला दबाकर दम घुटना पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद आरोपित गाजियाबाद चला गया और मृतका की 15 वर्षीय बेटी से धोखे से पासवर्ड व दस्तावेज ले गया।

मामले की सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा (Sushil Kumar Sharma) ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। अभियोजन ने 17 गवाह प्रस्तुत किये। केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (Central Forensic Science Laboratory) चंडीगढ़ (Chandigarh) के विशेषज्ञों ने घटनास्थल से जब्त डीवीआर संबंधी साक्ष्यों की पुष्टि की।

सभी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपित को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास के साथ एक लाख रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता योजना-2013 (Uttarakhand Victim Compensation Scheme 2013) के तहत मृतका की माता को आर्थिक सहायता देने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (District Legal Services Authority) नैनीताल को निर्देश दिए गये।

समाज और कानून व्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण

यह निर्णय पहचान छिपाकर संबंध बनाने और गंभीर अपराध करने के मामलों में न्यायिक कठोरता का उदाहरण माना जा रहा है। क्या ऐसे मामलों में जागरूकता और सत्यापन की संस्कृति मजबूत होगी? विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल साक्ष्यों और वैज्ञानिक जांच की बढ़ती भूमिका भविष्य में अभियोजन को और सशक्त करेगी।

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