डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 फरवरी 2026 (High Court on Consensual Relationship)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जनपद के बेरीनाग (Berinag) क्षेत्र से जुड़े एक प्रकरण में उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court of Uttarakhand) ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए भारतीय सेना में कार्यरत एक जवान के विरुद्ध दर्ज दुष्कर्म और अपहरण का अभियोग निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि दो वयस्कों के बीच संबंध आपसी सहमति से बने हों तो बाद में विवाह से इनकार मात्र से वह स्वतः दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता। यह निर्णय आपराधिक कानून के दुरुपयोग पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
क्या था पूरा मामला
प्रकरण वर्ष 2022 का है, जब एक युवती ने गुरपाल सिंह (Gurpal Singh) नाम के युवक के विरुद्ध बेरीनाग थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि युवक ने विवाह का आश्वासन देकर उसे घर से बाहर बुलाया और एक होटल में शारीरिक संबंध बनाए। बाद में विवाह से इनकार करने पर युवती ने भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code-IPC) की धारा 366 (अपहरण) और 376 (दुष्कर्म) के अंतर्गत अभियोग दर्ज कराया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभिलेखों, कथनों और पूरक चिकित्सीय प्रतिवेदन का परीक्षण किया। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य आया कि दोनों वर्ष 2019 से एक-दूसरे को जानते थे और सामाजिक माध्यम (Social Media) के जरिए संपर्क में थे। साथ ही युवती वयस्क थी और वह अपनी इच्छा से युवक के साथ गई थी।
न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां
न्यायमूर्ति आशीष नैथानी (Justice Ashish Naithani) की एकलपीठ ने कहा—
सहमति से बने संबंध को केवल विवाह से इनकार के आधार पर दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।
अपहरण (धारा 366) का तत्व तब बनता है जब व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध ले जाया जाए, जो इस मामले में सिद्ध नहीं हुआ।
विवाह के वादे पर बने संबंध तभी दुष्कर्म होंगे जब शुरू से धोखा देने की मंशा सिद्ध हो।
असफल संबंध और आपराधिक धोखाधड़ी में स्पष्ट अंतर है।
23 फरवरी 2022 के पूरक चिकित्सीय प्रतिवेदन में भी बल प्रयोग या जबरन यौन शोषण की पुष्टि नहीं हुई।
क्यों महत्वपूर्ण है फैसला
न्यायालय ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC Section 482) की धारा 482 के अंतर्गत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए कहा कि निराधार आरोपों में किसी व्यक्ति को लंबी आपराधिक प्रक्रिया से गुजरने के लिए बाध्य करना न्याय के विपरीत है।
यह निर्णय भविष्य के ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों और न्यायालयों के लिए मार्गदर्शक माना जा रहा है, विशेषकर उन प्रकरणों में जहां सहमति और धोखे के बीच अंतर महत्वपूर्ण होता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला सहमति आधारित संबंधों, आपराधिक न्याय प्रक्रिया और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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