नवीन समाचार, नैनीताल, 24 फरवरी 2026 (Supreme Court Order on Haldwani)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जनपद स्थित हल्द्वानी (Haldwani) में रेलवे (Railways) परियोजना के लिए भूमि खाली कराने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बसे लोग उसी स्थान पर बने रहने की मांग नहीं कर सकते और उन्हें पुनर्वास नीति के अंतर्गत उपलब्ध कराए जाने वाले स्थान पर जाना होगा। साथ ही प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana) के तहत आवेदन करने का अवसर दिया जाएगा। यह आदेश हजारों परिवारों के भविष्य और शहर के विकास दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।
पुनर्वास और विकास के बीच संतुलन पर न्यायालय का जोर

सर्वोच्च न्यायालय ने हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर अवैध कब्जों के मामले में कहा कि सरकार की जमीन है, इस पर से कब्जा हटना चाहिए। वहीं, मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार व रेलवे को अवैध कब्जेदारों को पीएम आवास योजना जैसी योजनाओं के तहत योग्य पात्रों की पहचान कर राहत देने के आदेश दिए ।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Surya Kant) और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची (Joymalya Bagchi) की पीठ ने कहा कि पुनर्वास प्रक्रिया मानवीय और विधिसम्मत ढंग से पूरी की जाए। न्यायालय के निर्देशानुसार रमजान समाप्त होने के बाद 19 मार्च से प्रभावित क्षेत्र में आवेदन शिविर लगाए जाएंगे, जहां पात्र परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए दोनों तरफ खाली जगह की जरूरत होती है। वहां रहने वाले लोग यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे को लाइन वगैरह कहां बिछानी चाहिए। न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची ने कहा कि, इसमें कोई शक नहीं है कि यह राज्य की ज़मीन है और जमीन का इस्तेमाल कैसे करना है, यह तय करना राज्य का अधिकार है।
जिला अधिकारी नैनीताल (District Magistrate Nainital) को यह तय करने की जिम्मेदारी दी गई है कि कौन-कौन परिवार योजना के तहत आवास के पात्र हैं। इससे प्रक्रिया को प्रशासनिक पारदर्शिता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
परियोजना क्यों अटकी थी
रेलवे लगभग 30 हेक्टेयर क्षेत्र में अपनी सुविधाओं का विस्तार करना चाहता है। योजना में रेलवे स्टेशन का विस्तार, अतिरिक्त विकास कार्य और नदी कटाव से ट्रैक को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करना शामिल है। रेलवे का तर्क है कि हल्द्वानी राज्य का प्रवेश द्वार है और यहां अधोसंरचना (Infrastructure) मजबूत करना आवश्यक है।
हालांकि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही थी। राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया कि अधिकांश लोग अवैध रूप से बसे हैं, जबकि जिनके पास वैध पट्टा है, उनकी भूमि का मुआवजा देकर अधिग्रहण किया जाएगा।
कितने लोग होंगे प्रभावित
सरकारी आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में 5,000 से अधिक परिवार और लगभग 27,000 लोग निवास करते हैं। वहीं याचिकाकर्ताओं का दावा है कि प्रभावित आबादी करीब 50,000 तक हो सकती है। ऐसे में पुनर्वास प्रक्रिया का सामाजिक प्रभाव व्यापक रहने वाला है।
पृष्ठभूमि और आगे क्या
ध्यान रहे कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) पहले रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने का आदेश दे चुका था, जिस पर 5 जनवरी 2023 को सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाते हुए कहा था कि हजारों लोगों को अल्प समय में हटाना उचित नहीं होगा और पुनर्वास पर विचार आवश्यक है।
अब नवीन निर्देशों के बाद प्रशासन, रेलवे और प्रभावित परिवारों के बीच समन्वित कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हुई है। अगली सुनवाई अप्रैल में प्रस्तावित है, जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हैं। हम इस समाचार पर अपडेट करने के लिये बने हुए हैं। इस संबंध में कोई भी अपडेट इसी लिंक पर दी जाएगी। इसलिये अपडेटेड समाचार देखने के लिये इस समाचार के लिंक को रिफ्रेश करते रहें। धन्यवाद।
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