नवीन समाचार, नैनीताल, 15 अक्टूबर 2026 (Foreign Languages in Govt Schools)। एक दौर में अपनी परंपराओं-संस्कृत भाषा की ओर बढ़ते उत्तराखंड (Uttarakhand) में अब विद्यार्थियों और युवाओं को वैश्विक रोजगार (Global Employment) के अवसरों से जोड़ने के लिए विदेशी भाषा प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। राज्य के अटल उत्कृष्ट विद्यालयों और राजीव नवोदय विद्यालयों में अंग्रेजी के अतिरिक्त अन्य विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश के प्रत्येक जनपद में विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने और वर्तमान में देहरादून, अल्मोड़ा तथा बागेश्वर में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार पूरे राज्य में करने के निर्देश दिये गये हैं।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिये

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन (Anand Bardhan) ने 14 अक्टूबर को सचिवालय में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर विदेशी भाषा प्रशिक्षण और युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर विकसित करने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विदेशी भाषा प्रशिक्षण को केवल भाषा सीखने तक सीमित न रखकर व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम (Skill Development Programme) के रूप में विकसित किया जाए, जिससे स्कूली विद्यार्थियों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के विद्यार्थियों, चिकित्सा एवं नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े युवाओं तथा अन्य इच्छुक व्यक्तियों को लाभ मिल सके।
मुख्य सचिव ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को गुणवत्तापूर्ण बनाने के साथ उन्हें प्रत्यक्ष कक्षाओं और ऑनलाइन माध्यम, दोनों से संचालित करने की कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया। इसका उद्देश्य राज्य के युवाओं को रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप भाषा कौशल उपलब्ध कराना है।
हर जिले में प्रशिक्षण केंद्र, उत्कृष्टता केंद्रों को भी जोड़ा जाएगा
मुख्य सचिव ने कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग को वर्तमान में संचालित विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार पूरे प्रदेश में करने को कहा। प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के साथ ही कौशल विकास विभाग के उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence) को भी इस पहल से जोड़ने की योजना है। कार्मिक एवं वित्त विभाग को संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर समग्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं।
प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में जर्मन और जापानी भाषाओं के प्रशिक्षण के लिए कुल 158 केंद्र संचालित होने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में उत्तरकाशी और टिहरी में अतिरिक्त केंद्र खोलने की योजना का भी उल्लेख है। हालांकि, सभी जिलों में प्रस्तावित केंद्रों की निश्चित संख्या, स्थान और संचालन की समय-सारिणी अभी स्पष्ट नहीं की गई है।
नर्सिंग के लगभग 600 विद्यार्थियों को भी मिलेगा लाभ
इस पहल में चिकित्सा और नर्सिंग क्षेत्र को भी विशेष रूप से शामिल करने की तैयारी है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य सचिव ने सरकारी नर्सिंग महाविद्यालयों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे लगभग 600 विद्यार्थियों को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर दिया। नर्सिंग पाठ्यक्रम में विदेशी भाषाओं को शामिल करने के निर्देश भी दिये गये हैं।
विदेशी भाषा का ज्ञान स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े युवाओं के लिए दूसरे देशों में रोजगार के अवसर तलाशने में सहायक हो सकता है। हालांकि, वास्तविक अवसर संबंधित देश की भाषा संबंधी आवश्यकताओं, शैक्षणिक योग्यता, व्यावसायिक पंजीकरण और अन्य निर्धारित शर्तों पर निर्भर करेंगे।
दून विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की ली जाएंगी सेवाएं
मुख्य सचिव ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में दून विश्वविद्यालय (Doon University) में विदेशी भाषाओं का अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों की सेवाएं लेने का सुझाव दिया है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में योगदान देने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए शैक्षणिक क्रेडिट (Academic Credits) अथवा अन्य प्रोत्साहन देने की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और युवाओं को मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने के निर्देश दिये गये हैं।
युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसरों की उम्मीद
विदेशी भाषा प्रशिक्षण का विस्तार होने पर विद्यार्थियों, तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं, नर्सिंग विद्यार्थियों और अन्य इच्छुक लोगों को नया कौशल सीखने का अवसर मिल सकता है। इससे पर्यटन, आतिथ्य सेवा, स्वास्थ्य सेवा और अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में रोजगार तलाशने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, ये संभावित अवसर हैं; प्रशिक्षण प्राप्त करने मात्र से विदेश में नौकरी मिलना सुनिश्चित नहीं होगा।
अभी किन बातों का इंतजार रहेगा?
वर्तमान जानकारी के अनुसार, सरकार ने संबंधित विभागों को व्यापक कार्ययोजना और प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिये हैं। विदेशी भाषाओं की अंतिम सूची, प्रवेश की पात्रता, प्रशिक्षण शुल्क, पाठ्यक्रम की अवधि, आवेदन प्रक्रिया और केंद्रों के आरंभ होने की निश्चित तिथि से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थियों को आधिकारिक घोषणा और संबंधित विभागों की सूचना पर ध्यान देना चाहिए।
निष्कर्ष: उत्तराखंड में विदेशी भाषा प्रशिक्षण को विद्यालयी शिक्षा से लेकर कौशल विकास और नर्सिंग तक विस्तारित करने की तैयारी युवाओं के लिए उपयोगी पहल बन सकती है। इसका वास्तविक लाभ प्रशिक्षण की गुणवत्ता, स्थानीय स्तर पर केंद्रों की उपलब्धता और रोजगार से उनके जुड़ाव पर निर्भर करेगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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