चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से आरंभ, एक ही दिन अष्टमी-नवमी, जानें मुहूर्त, पूजा विधि और विशेष संयोग

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नवीन समाचार, नैनीताल, 18 मार्च 2026 (Chaitra Navratri 2026-Timings-Rituals)। उत्तराखंड सहित पूरे देश में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026, गुरुवार से शुरू हो रही है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष का भी शुभारंभ माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस वर्ष तिथियों के विशेष संयोग के कारण अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ रही हैं, जिससे यह नवरात्रि और अधिक खास मानी जा रही है।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को स्वयं सिद्ध मुहूर्त के नाम से भी जाना जाता है। ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी और इसी दिन से सतयुग का प्रारंभ भी माना जाता है। इसलिए इसे युगादि तिथि भी कहा गया।

नवरात्रि कब से कब तक और तिथि का महत्व

Chaitra Navratri 2026-Timings-Rituals Chaitra Navratri 2026 Start Date: 19 या 20 मार्च कब से शुरू हो रहे हैं चैत्र  नवरात्रि, जानें तिथि और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और महत्व: Chaitra  Navratri Ghat Sthapana Shubhहिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च सुबह 6:52 बजे से शुरू होकर 20 मार्च सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी कारण 19 मार्च से नवरात्रि का आरंभ होगा। यह अवधि साधना, व्रत और देवी आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इन दिनों की गई पूजा से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

30 वर्ष के बाद दुर्लभ चतुर्ग्रही योग में प्रारंभ हो रहे हैं चैत्र नवरात्र

ज्योतिशाचार्यों के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्र बहुत ही दुर्लभ संयोग में चतुर्ग्रही योग में प्रारंभ हो रहे हैं। इस तरह की स्थिति 30 वर्ष के बाद बन रही है। इससे पहले इस प्रकार का अद्भुत संयोग 20 मार्च 1996 की चैत्र नवरात्र पर बना था। उस समय भी मीन राशि में शनि के साथ अन्य चार ग्रह चंद्रमा, मंगल, केतु तथा सूर्य संचार कर रहे थे। ठीक उसी तरह की स्थिति इस बार भी बन रही है। मीन लग्न में ही शनि के साथ सूर्य, चंद्रमा तथा शुक्र संचार कर रहे हैं।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) का विशेष महत्व होता है।

  • पहला शुभ मुहूर्त: सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक

  • दूसरा (अभिजीत) मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक

इसी समय में विधिपूर्वक कलश स्थापना करना शुभ माना जाता है।

माता का आगमन और विदाई का संकेत

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार नवरात्र जिस वार से शुरू होते हैं, उसी आधार पर माता का वाहन निर्धारित होता है।

  • इस वर्ष गुरुवार से शुरुआत होने के कारण माता दुर्गा का आगमन डोली (पालकी) पर माना जा रहा है

  • डोली पर आगमन को सामाजिक स्तर पर कुछ उतार-चढ़ाव का संकेत माना जाता है

  • माता की विदाई हाथी पर मानी जा रही है, जो समृद्धि और शुभता का संकेत है

इस बार अष्टमी-नवमी एक ही दिन

इस वर्ष 26 मार्च को अष्टमी और नवमी का संयोग बन रहा है। इसी दिन—

  • कन्या पूजन

  • हवन

  • महानवमी पूजन
    किया जाएगा।

इसी दिन भगवान राम के जन्मोत्सव का पर्व राम नवमी भी मनाया जाएगा।

नौ दिनों का पूजा क्रम और देवी स्वरूप

  • 19 मार्च – मां शैलपुत्री

  • 20 मार्च – मां ब्रह्मचारिणी

  • 21 मार्च – मां चंद्रघंटा

  • 22 मार्च – मां कूष्मांडा

  • 23 मार्च – मां स्कंदमाता

  • 24 मार्च – मां कात्यायनी

  • 25 मार्च – मां कालरात्रि

  • 26 मार्च – मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री (अष्टमी-नवमी)

घटस्थापना और पूजा विधि

नवरात्रि के पहले दिन घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई के बाद विधिपूर्वक कलश स्थापना की जाती है।

  • मिट्टी के पात्र में जौ बोएं

  • कलश में जल, सुपारी और सिक्का रखें

  • आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें

  • दीप जलाकर मां दुर्गा का ध्यान करें

  • दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करें

व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करें

नवरात्रि में सात्विक जीवनशैली अपनाना जरूरी माना गया है।

करें:

  • प्रतिदिन पूजा और आरती

  • व्रत और संयम

  • दान-पुण्य और कन्या पूजन

न करें:

  • मांस और मदिरा का सेवन

  • क्रोध और असत्य व्यवहार

  • घर में अस्वच्छता

विशेष धार्मिक उपाय और मान्यताएं

  • मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाना शुभ माना जाता है

  • प्रतिदिन शाम को लौंग के तेल का दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है

  • स्वास्तिक चिन्ह बनाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है

  • माता को सोलह श्रृंगार और पीले फल अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है

कन्या पूजन का महत्व- नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन किया जाता है। मान्यता है कि छोटी कन्याओं में मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। इस दिन कन्याओं को भोजन कराया जाता है, उन्हें उपहार और दक्षिणा दी जाती है और हवन भी किया जाता है।

सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व

चैत्र नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, नववर्ष और सकारात्मक ऊर्जा के स्वागत का पर्व भी है। यह आत्मशुद्धि, अनुशासन और भक्ति के माध्यम से जीवन में संतुलन लाने का अवसर देता है।

इस नवरात्रि आप किस प्रकार पूजा या व्रत रखेंगे? पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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