1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे नए आयकर नियम, वेतनभोगियों और कंपनियों के लिए बदलेगा कर गणना का तरीका

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 17 मार्च 2026 (New Income Tax Tules From April 2026)। देशभर के करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक और नीतिगत परिवर्तन से जुड़ा समाचार सामने आया है। 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 (Income Tax Act 2025) और उससे संबंधित नियम लागू होने जा रहे हैं, जो वर्तमान आयकर अधिनियम 1961 (Income Tax Act 1961) की जगह लेंगे। इन बदलावों का सीधा असर वेतनभोगी कर्मचारियों, मध्यम वर्ग, कंपनियों और निवेशकों पर पड़ेगा, क्योंकि इसमें वेतन, सुविधाओं (Perquisites) और निवेश से जुड़ी कर गणना को अधिक स्पष्ट और संरचित किया गया है।

कर प्रणाली को सरल बनाने पर सरकार का जोर

(New Income Tax Tules From April 2026) Income Tax Rule: 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया Income कानून, नियमों में  होंगे बड़े बदलावकेंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026-27) में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने प्रत्यक्ष कर सुधारों (Direct Tax Reforms) के माध्यम से कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने पर बल दिया है। सरकार के अनुसार नए नियमों को लागू करने से कर अनुपालन (Tax Compliance) बेहतर होगा और करदाताओं के लिए प्रक्रिया अधिक सहज बनेगी।

नए आयकर नियमों को सार्वजनिक समीक्षा के लिए जारी किया गया था और अब इन्हें वित्त वर्ष 2026-27 (Financial Year 2026-27) से लागू किया जाएगा, जिसका प्रभाव आकलन वर्ष 2027-28 (Assessment Year 2027-28) से दिखाई देगा।

टीसीएस और शेयर बायबैक से जुड़े महत्वपूर्ण बदलाव

नए प्रावधानों के अनुसार स्क्रैप और खनिजों (Scrap And Minerals) पर कर संग्रह स्रोत (Tax Collected At Source-TCS) की दर को तर्कसंगत बनाकर 2 प्रतिशत किया गया है। वहीं उदारीकृत प्रेषण योजना (Liberalised Remittance Scheme-LRS) के तहत शिक्षा और चिकित्सा उपचार के लिए विदेश भेजी जाने वाली धनराशि पर टीसीएस दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है।

इसके अतिरिक्त अब सभी प्रकार के शेयरधारकों के लिए शेयर बायबैक (Share Buyback) पर पूंजीगत लाभ कर (Capital Gain Tax) लगाया जाएगा। प्रवर्तकों के लिए प्रभावी कर दर लगभग 22 प्रतिशत तथा गैर-कॉरपोरेट प्रवर्तकों के लिए लगभग 30 प्रतिशत तक हो सकती है।

प्रतिभूति लेनदेन कर और एमएटी में भी संशोधन

वायदा शेयरों (Futures) पर प्रतिभूति लेनदेन कर (Securities Transaction Tax-STT) को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। वहीं विकल्प (Options) प्रीमियम और प्रयोग पर एसटीटी को भी बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत तक किया जाएगा।

न्यूनतम वैकल्पिक कर (Minimum Alternate Tax-MAT) को भी अंतिम कर (Final Tax) बनाने का प्रस्ताव है, जिसकी दर 15 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत की जाएगी। 31 मार्च 2026 तक संचित एमएटी क्रेडिट को सीमित रूप में नई व्यवस्था में समायोजित करने की अनुमति होगी।

वेतनभोगियों के लिए पर्क और सुविधाओं पर स्पष्ट नियम

नए नियमों के अनुसार यदि किसी कर्मचारी के भविष्य निधि (Provident Fund-PF), राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (National Pension System-NPS) और सुपरएनुएशन फंड (Superannuation Fund) में कंपनी का कुल योगदान एक वर्ष में 7.5 लाख रुपये से अधिक होता है, तो अतिरिक्त राशि करयोग्य मानी जाएगी। इसके साथ उस राशि पर मिलने वाली आय भी कर के दायरे में आएगी।

कंपनी आवास (Company Accommodation) के लिए कर योग्य मूल्य अब शहर की जनसंख्या के आधार पर तय होगा—

  • 40 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में वेतन का 10 प्रतिशत

  • 15 से 40 लाख आबादी वाले शहरों में 7.5 प्रतिशत

  • छोटे शहरों में 5 प्रतिशत

यदि कर्मचारी कंपनी को किराया देता है, तो यह राशि कर योग्य मूल्य से घटाई जाएगी।

कंपनी कार, उपहार और भोजन पर भी स्पष्ट प्रावधान

यदि कर्मचारी कंपनी की कार का उपयोग आधिकारिक और निजी दोनों कार्यों में करता है, तो 1.6 लीटर तक इंजन वाली कार के लिए 5,000 रुपये प्रति माह और उससे अधिक इंजन वाली कार के लिए 7,000 रुपये प्रति माह कर योग्य माना जाएगा। यदि चालक (Driver) भी उपलब्ध कराया जाता है तो अतिरिक्त 3,000 रुपये जोड़े जाएंगे।

कंपनी द्वारा दिए गए उपहार या वाउचर (Gift Or Voucher) 15,000 रुपये तक कर मुक्त रहेंगे, लेकिन इससे अधिक राशि पूरी तरह करयोग्य होगी। कार्यालय में प्रदान किया जाने वाला भोजन या पेय पदार्थ 200 रुपये प्रति भोजन तक कर मुक्त रहेगा।

ब्याज रहित ऋण और अन्य सुविधाओं पर भी नियम

यदि कंपनी कर्मचारी को कम ब्याज या ब्याज रहित ऋण देती है, तो उस पर भी कर लगाया जा सकता है। हालांकि 2 लाख रुपये तक के ऋण तथा कुछ विशेष चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए दिए गए ऋण को छूट प्रदान की जाएगी।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये बदलाव

कर विशेषज्ञों के अनुसार इन नए नियमों से वेतन संरचना (Salary Structure), कर योजना (Tax Planning) और निवेश निर्णयों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। अब कर्मचारियों को अपने वेतन पैकेज और सुविधाओं को समझकर पहले से योजना बनानी होगी, क्योंकि इनका प्रभाव सीधे वेतन पर्ची (Salary Slip) और प्रपत्र-16 (Form-16) में दिखाई देगा।

यह सुधार सरकार की उस नीति से भी जुड़ा है जिसमें पारदर्शिता, सरलता और बेहतर अनुपालन को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या ये नए नियम करदाताओं के लिए प्रक्रिया को वास्तव में सरल बना पाएंगे या प्रारंभिक चरण में नई जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं। यहाँ क्लिक करके पढ़ें क्या होने जा रहे हैं पूरे बदलाव। 

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