किसान सुखवंत सिंह प्रकरण में उधम सिंह नगर पुलिस पर बड़ी कार्रवाई, आईटीआई कोतवाली प्रभारी सहित 2 उप निरीक्षक निलंबित और 10 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर

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नवीन समाचार, रुद्रपुर, 12 जनवरी 2026 (Action on Sukhwant Singh Case)। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जनपद अंतर्गत रुद्रपुर से सुखवंत सिंह प्रकरण में पुलिस-प्रशासन स्तर पर बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। काशीपुर (Kashipur) निवासी किसान सुखवंत सिंह (Sukhwant Singh) के हल्द्वानी (Haldwani) में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिलने के मामले में “लापरवाही और उदासीनता” के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उधम सिंह नगर (Senior Superintendent of Police – SSP Udham Singh Nagar) ने आईटीआई कोतवाली (ITI Police Station) के थाना प्रभारी सहित दो उप निरीक्षकों को निलंबित कर दिया है और चौकी पैगा (Paiga Outpost) पर तैनात 10 पुलिस कर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया है।

Khabar Uttarakhand - Latest Uttarakhand News In Hindi, उत्तराखंड समाचारयह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मामला केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि जमीन फर्जीवाड़ा, कथित उत्पीड़न, पुलिस कार्यप्रणाली की जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की सार्वजनिक मांग से जुड़ता जा रहा है।

निलंबन की कार्रवाई, थाना प्रभारी सहित दो उप निरीक्षक हटाए गये

(Action on Sukhwant Singh Case)वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उधम सिंह नगर ने आदेश जारी करते हुए उप निरीक्षक नागरिक पुलिस कुन्दन सिंह रौतेला (Sub Inspector Civil Police – Kundan Singh Rautela), थाना प्रभारी कोतवाली आईटीआई (Station In-charge ITI Kotwali) तथा उप निरीक्षक नागरिक पुलिस प्रकाश बिष्ट (Sub Inspector Civil Police – Prakash Bisht), कोतवाली आईटीआई को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। आदेश के अनुसार दोनों अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई (Disciplinary Action) प्रस्तावित या प्रचलित है।

निलंबन अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों को मूल नियम 53 (Fundamental Rule – FR 53) के अंतर्गत अर्द्ध औसत वेतन के बराबर जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) देय होगा और उन्हें नियमानुसार पुलिस लाइन्स (Police Lines) में रहना अनिवार्य किया गया है। जीवन निर्वाह भत्ता इसी शर्त पर दिया जाएगा कि संबंधित अधिकारी यह प्रमाणित करेंगे कि वे किसी भी प्रकार के सेवायोजन, व्यापार या व्यवसाय में संलग्न नहीं हैं।

क्यों मायने रखती है यह कार्रवाई

यह कार्रवाई संकेत देती है कि विभाग ने प्रकरण में प्रारंभिक स्तर पर “कार्यवाही में कमी” की संभावना मानी है। ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका पर प्रश्न उठने पर त्वरित विभागीय कार्रवाई लोगों के भरोसे के लिए अहम बन जाती है। अब बड़ा प्रश्न यह है कि जांच में वास्तविक लापरवाही क्या थी, और किन स्तरों पर जवाबदेही तय होगी।

एसपी क्राइम को प्रारंभिक जांच, समयसीमा में देनी होगी रिपोर्ट

इस पूरे मामले की गहन और विस्तृत प्रारंभिक जांच के लिए पुलिस अधीक्षक अपराध एवं टीआरजी (Superintendent of Police Crime and TRG – SP Crime & TRG) उधम सिंह नगर को निर्देशित किया गया है। उन्हें निर्धारित समयसीमा में तथ्यात्मक और स्पष्ट जांच आख्या (Inquiry Report) प्रस्तुत करनी होगी। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मामले से जुड़े कई आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं और अब जांच की निष्पक्षता को लेकर अपेक्षा बढ़ गई है।

चौकी पैगा के 10 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, रुद्रपुर पुलिस लाइन्स में आमद के निर्देश

एसएसपी ने चौकी पैगा, कोतवाली आईटीआई में तैनात कुल 10 अधिकारी और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर (Line Hazir) कर दिया है। सभी को पुलिस लाइन्स, रुद्रपुर (Police Lines Rudrapur) में तत्काल आमद करने के निर्देश दिए गये हैं।

लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं—
उप निरीक्षक/चौकी प्रभारी जितेंद्र कुमार (Sub Inspector/Outpost In-charge – Jitendra Kumar), अपर उप निरीक्षक सोमवीर सिंह (Assistant Sub Inspector – Somveer Singh), मुख्य आरक्षी शेखर बनकोटी (Head Constable – Shekhar Bankoti), आरक्षी भूपेंद्र सिंह (Constable – Bhupendra Singh), आरक्षी दिनेश तिवारी (Constable – Dinesh Tiwari), आरक्षी सुरेश चन्द्र (Constable – Suresh Chandra), आरक्षी योगेश चौधरी (Constable – Yogesh Chaudhary), आरक्षी राजेंद्र गिरी (Constable – Rajendra Giri), आरक्षी दीपक प्रसाद (Constable – Deepak Prasad), आरक्षी संजय कुमार (Constable – Sanjay Kumar)।

एसएसपी का संदेश, लापरवाही किसी स्तर पर स्वीकार नहीं

एसएसपी उधम सिंह नगर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस बयान का सीधा संदेश यह है कि विभाग अब प्रकरण को संस्थागत अनुशासन और जवाबदेही के पैमाने पर देख रहा है।

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मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश

 

इस प्रकरण को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने भी गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने मजिस्ट्रेट जांच (Magisterial Inquiry) के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कुमाऊं आयुक्त (Kumaon Commissioner) दीपक रावत (Deepak Rawat) की ओर से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाएगी, ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्य और परिस्थितियां स्पष्ट रूप से सामने आ सकें।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि यह घटना अत्यंत दुखद और गंभीर है और इसे हल्के में नहीं लिया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन (Chief Secretary – Anand Bardhan) और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ (Director General of Police – Deepam Seth) से भी विस्तार से जानकारी ली और जांच में किसी प्रकार की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए।

प्रकरण की पृष्ठभूमि, होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले थे किसान

प्राप्त विवरण के अनुसार 10 और 11 जनवरी 2026 की रात को काशीपुर क्षेत्र के पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह हल्द्वानी के काठगोदाम (Kathgodam) अंतर्गत गौलापार (Gaulapar) क्षेत्र के खेडा (Kheda) स्थित देवभूमि होटल (Devbhumi Hotel) में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले थे। घटना के समय होटल में उनकी पत्नी और बेटा भी मौजूद थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो और एक सुसाइड नोट (Suicide Note) सामने आने की चर्चा हुई, जिसमें कथित तौर पर प्रॉपर्टी डीलर (Property Dealer) तथा कुछ पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। परिजनों की ओर से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी सामने आई है।

आगे क्या, जांच का दायरा और जनता के लिए संदेश

इस घटनाक्रम के बाद जांच का दायरा अब तीन स्तरों पर जाता दिख रहा है—
पहला, घटना से जुड़ी परिस्थितियों और कथित साक्ष्यों की जांच।
दूसरा, जमीन फर्जीवाड़े और कथित उत्पीड़न के आरोपों की तथ्यपरक समीक्षा।
तीसरा, पुलिस-प्रशासन की भूमिका, समय पर की गई या न की गई कार्रवाई और लापरवाही की जवाबदेही।

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उत्तराखंड जैसे राज्य में जहां भूमि विवाद और संपत्ति से जुड़े मामले बढ़ रहे हैं, वहां यह प्रकरण न्याय, पुलिस सुधार, नागरिक अधिकार और प्रशासनिक पारदर्शिता से भी जुड़ता है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच कितनी तेज, निष्पक्ष और ठोस निष्कर्ष तक पहुंचती है। 

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