नवीन समाचार, ऊधम सिंह नगर, 16 जनवरी 2026 (Allegations on Gadarpur MLA)। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जनपद के गदरपुर-बाजपुर क्षेत्र में भूमि विवाद (Land Dispute) को लेकर एक बुजुर्ग किसान महिला और उनके बेटे का धरना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक कृषि भूमि को “लीज” के नाम पर कागजी प्रक्रिया में गुमराह कर दूसरे पक्ष के नाम दर्ज करा दिया गया। न्याय न मिलने का दावा करते हुए मां-बेटे ने सर्द मौसम में एसडीएम न्यायालय के बाहर धरना दिया और सोशल मीडिया (Social Media) पर वीडियो जारी कर विधायक आवास के सामने सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी दी, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल तेज हो गई। प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संयुक्त जांच टीम गठित कर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
गदरपुर-बाजपुर भूमि विवाद: मां-बेटे के आरोप, विधायक की सफाई और प्रशासन की जांच
जानकारी के अनुसार, बिचपुरी-केलाखेड़ा (Bichpuri Kelakheda) निवासी 65 वर्षीय परमजीत कौर और उनके पुत्र अवतार सिंह लंबे समय से अपनी कृषि भूमि से जुड़े विवाद को लेकर न्याय की मांग कर रहे हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि वर्ष 2019 में गदरपुर से भाजपा विधायक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे (Allegations on BLP MLA and Former Education Minister Arvind Pandey) और उनके भाई अमर पांडे द्वारा उनकी लगभग एक हेक्टेयर कृषि भूमि को 30 वर्ष की लीज के नाम पर अपने पक्ष में दर्ज कराने की कोशिश की गई। परिवार का कहना है कि शुरुआत में केवल एक एकड़ भूमि की लीज की बात कही गई थी, लेकिन कथित रूप से कागजों में उन्हें भ्रमित कर पूरी भूमि अपने नाम दर्ज करा ली गई।
विवाद को लेकर परिवार ने एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया, जिसमें कहा गया कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे विधायक आवास के सामने सामूहिक आत्मदाह करेंगे। यह वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। हालांकि कुछ समाचार माध्यमों ने यह भी स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं की गई है।
एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना, प्रशासन का आश्वासन
गुरुवार को मां-बेटे कार्रवाई की मांग को लेकर एसडीएम (उपजिलाधिकारी) कार्यालय/न्यायालय परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए बाजपुर की एसडीएम डॉ. अमृता शर्मा ने पीड़ित परिवार से बातचीत की और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। इसके बाद तहसीलदार, सहायक चकबंदी अधिकारी और पुलिस की संयुक्त टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए गए।
परिवार ने बताया कि वे कई वर्षों से अलग-अलग स्तर पर न्याय की मांग कर रहे हैं, पहले भी एसडीएम न्यायालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना दे चुके हैं। चर्चा यह भी है कि फरवरी 2021 में उन्होंने अत्यंत निराशाजनक स्थिति में आत्मदाह का प्रयास किया था, जिसे प्रशासन के आश्वासन के बाद रोका गया। इस बार भी ठंड के मौसम में धरना और कड़ी चेतावनी ने प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनशीलता और समयबद्ध कार्यवाही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
चार घंटे बाद धरना समाप्त, पर विवाद बना गंभीर
बताया गया कि बुधवार दोपहर से शुरू हुआ धरना एसडीएम के आश्वासन के बाद लगभग चार घंटे में समाप्त किया गया। परिजनों का कहना है कि जब तक भूमि अभिलेखों की जांच और दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
सिविल न्यायालय में विचाराधीन बताया गया मामला
दूसरी ओर, विद्या ज्योति एजुकेशन सोसायटी (Vidya Jyoti Education Society) के अधिवक्ता राजेश पांडे ने कहा है कि भूमि से संबंधित यह प्रकरण सिविल न्यायालय (Civil Court) बाजपुर में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश के बाद ही होगा। यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रशासनिक जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया—दोनों अलग-अलग स्तर पर चलती हैं, और ऐसे मामलों में आम तौर पर समय लग सकता है।
विधायक अरविंद पांडे का जवाब: आरोप निराधार, “सीबीआई जांच करा लो”
गदरपुर विधायक अरविंद पांडे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया। उन्होंने चीनी मिल अतिथि गृह (Sugar Mill Guest House) में पत्रकार वार्ता कर कहा कि वे स्वयं अपने विरुद्ध सीबीआई (CBI) जांच की सिफारिश करते हैं। विधायक ने यह भी कहा कि यदि वे या उनका परिवार दोषी पाया जाता है तो उन्हें जो भी सजा मिलेगी, स्वीकार होगी। उन्होंने बुजुर्ग महिला को “मां समान” बताते हुए कहा कि उनके संस्कार किसी के साथ छल या अन्याय की अनुमति नहीं देते।
क्यों यह प्रकरण महत्वपूर्ण है?
यह मामला केवल दो पक्षों के बीच भूमि विवाद भर नहीं रह गया है। इसके साथ कई बड़े सवाल जुड़े हैं—
क्या भूमि लीज (Lease) की प्रक्रिया में पारदर्शिता रही?
क्या अभिलेखों में बदलाव के दौरान किसान को पर्याप्त जानकारी व कानूनी सहायता मिली?
और यदि किसी पक्ष को न्यायालयीन प्रक्रिया लंबी लगती है, तो ऐसी स्थिति में प्रशासन की त्वरित सहायता व्यवस्था कितनी कारगर है?
भूमि विवादों का सीधा संबंध ग्रामीण आजीविका, कृषि आधारित रोजगार, राजस्व प्रशासन, और न्याय तक पहुंच से है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में समयबद्ध, निष्पक्ष और दस्तावेज-आधारित जांच न केवल पीड़ित परिवार बल्कि सामाजिक शांति के लिए भी जरूरी मानी जाती है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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