नवीन समाचार, हरिद्वार, 12 जनवरी 2026 (Blue Drums as Desi Geysers)। देश में पिछले वर्ष इंटरनेट मीडिया (Internet Media) पर ‘नीला ड्रम’ शब्द अलग संदर्भों में चर्चित रहे नीले ड्रम (Blue Drum) उत्तराखंड में अलग कारणों व समस्या के कारण चर्चा में हैं। राज्य के हरिद्वार जनपद अंतर्गत रुड़की (Roorkee) विद्युत मंडल में बिजली चोरी (Electricity theft) का एक नया तरीका सामने आने के बाद ऊर्जा निगम (Energy Corporation) की चिंता बढ़ गई है। दिसंबर और जनवरी माह के दौरान की गई छापेमारी में 412 बिजली चोरी के मामले पकड़े गये हैं, जिनमें 148 प्रकरण ऐसे हैं, जहां नीले ड्रम (Blue Drum) को ‘देशी गीजर’ (Desi Geysers) की तरह इस्तेमाल कर पानी गर्म करने के लिए बिजली की चोरी की जा रही थी। देखें पहाड़ों की ओर आ रहे नीले ड्रमों से संबंधित एक रोचक वीडिओ :
बताया गया कि ड्रम में दो रॉड लगाकर करंट (Electric Current) के माध्यम से पानी खौलाया जा रहा है और कई मामलों में यह व्यवस्था रात-दिन चालू रखी जा रही थी। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल राजस्व हानि (Revenue Loss) से जुड़ा है, बल्कि असुरक्षित तरीके के कारण जनहानि और दुर्घटना की आशंका भी बढ़ाता है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और ऊर्जा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है।
ऊर्जा निगम की छापेमारी, 50 से 500 लीटर तक के नीले ड्रम मिले
ऊर्जा निगम की कार्रवाई में 50 लीटर से लेकर 200 और 500 लीटर क्षमता वाले नीले ड्रम बरामद होने की बात सामने आई है। इन ड्रमों में रॉड डालकर पानी गर्म किया जा रहा था। विभाग के अनुसार कई स्थानों पर करंट लगातार चालू रखा जाता था, जिससे पानी लगातार गर्म या खौलता रहता था। इस तरीके में मीटर से बचकर अवैध रूप से बिजली का उपयोग होने की आशंका जताई गई है। देखें हल्द्वानी का नीले ड्रमों से संबंधित एक अन्य वीडिओ :
यह तरीका पहली बार बड़े पैमाने पर सामने आने की चर्चा है। ऊर्जा निगम के लिए यह इसलिए भी चुनौती है क्योंकि एक तरफ बिजली चोरी से व्यवस्था पर भार बढ़ता है और दूसरी तरफ ऐसे असुरक्षित प्रयोग स्थानीय बस्तियों में दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
इंटरनेट मीडिया पर पहले से चर्चित ‘नीला ड्रम’, अब ऊर्जा विभाग में बना विषय
देश में पिछले वर्ष इंटरनेट मीडिया (Internet Media) पर ‘नीला ड्रम’ शब्द अलग संदर्भों में चर्चित रहा था, और इस पर अनेक रील (Reel) तथा चर्चाएं भी देखने को मिली थीं। अब रुड़की क्षेत्र में ‘नीला ड्रम’ इस वजह से चर्चा में है कि इसे बिजली चोरी के उपकरण की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इस बदलाव ने लोगों का ध्यान खींचा है और विभागीय स्तर पर भी इसे एक नया ‘चलन’ (Trend) बताया जा रहा है।
अधिशासी अभियंता का बयान, यह तरीका खतरनाक और असुरक्षित
ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) शहरी क्षेत्र अनिल कुमार मिश्रा (Anil Kumar Mishra) के अनुसार लोग नीले ड्रम को देशी गीजर की तरह तैयार कर रहे हैं। ड्रम में दो रॉड लगाकर पानी गर्म किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक की कार्रवाई में बड़ी संख्या में ऐसे ड्रम मिले हैं, जिनमें करंट लगातार चालू रखा गया था। अधिकारी के अनुसार यह तरीका खतरनाक है, क्योंकि असुरक्षित (Unsafe) होने के कारण किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है।
उन्होंने आमजन को सलाह दी कि इस प्रकार से ड्रम का प्रयोग न करें और केवल आईएसआई मार्का (ISI Marked) गीजर (Geyser) ही लगवाएं। यह सलाह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिना मानक उपकरणों के घरों में बिजली से जुड़े प्रयोग अक्सर आग, करंट लगने और जनहानि जैसी घटनाओं का कारण बनते रहे हैं।
ओवरहेड जल टैंकों में भी रॉड डालकर पानी गर्म करने के मामले
रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में कुछ प्रकरण ऐसे भी सामने आए हैं, जहां ओवरहेड जल टैंक (Overhead Water Tank) में रॉड डालकर पानी गर्म किया जा रहा था। विभाग के अनुसार यदि टैंक में करंट फैलने जैसी स्थिति बनती है, तो पानी के साथ बिजली का प्रवाह फैलने का जोखिम बढ़ जाता है। खासकर देहात क्षेत्र में इस बार ऐसे कई मामले पकड़े जाने की बात कही गई है।
यह स्थिति इसलिए भी चिंता बढ़ाती है क्योंकि जल टैंक घरों और सार्वजनिक स्थलों में उपयोग होते हैं। यदि बिजली का रिसाव हो जाए तो केवल उपयोगकर्ता ही नहीं, आसपास के लोग भी प्रभावित हो सकते हैं।
पृष्ठभूमि, बिजली चोरी से बढ़ता दबाव और नीति का सवाल
बिजली चोरी का असर केवल विभाग की आय पर नहीं, बल्कि पूरे तंत्र पर पड़ता है। अवैध खपत से ट्रांसफार्मर (Transformer) पर लोड बढ़ता है, आपूर्ति बाधित होती है और ईमानदार उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष बोझ भी बढ़ता है। साथ ही इस तरह के असुरक्षित तरीके सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़े हैं।
यह घटना नीति और कानून के स्तर पर भी संकेत देती है कि बिजली चोरी रोकने के लिए केवल छापेमारी नहीं, बल्कि जागरूकता, कड़ी निगरानी, तकनीकी उपाय और समयबद्ध दंडात्मक कार्रवाई भी जरूरी है। क्या ऐसे मामलों में सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाने चाहिए। क्या गांवों में सुरक्षित जल-तापन (Water Heating) के लिए सस्ती वैकल्पिक योजनाएं लाई जानी चाहिए। ऐसे प्रश्न अब स्वाभाविक रूप से उठ रहे हैं।
आगे क्या, जांच और कार्रवाई का दायरा बढ़ने की संभावना
ऊर्जा निगम की कार्रवाई जारी रहने की बात कही जा रही है। जिन स्थानों पर बिजली चोरी पकड़ी गई, वहां विधिक प्रक्रिया (Legal Process) के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभागीय स्तर पर यह भी संकेत है कि यह ‘ट्रेंड’ तेजी से फैल सकता है, इसलिए लोगों को लगातार चेतावनी दी जा रही है।
साथ ही प्रशासन और ऊर्जा विभाग के सामने यह चुनौती भी है कि इस तरह के अवैध और खतरनाक प्रयोगों को रोकने के लिए सतत निगरानी के साथ-साथ लोगों को सुरक्षित विकल्पों की जानकारी भी दी जाए।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।














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