नवीन समाचार, नैनीताल, 25 फरवरी 2026 (Almora Magnesite gets Relief)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के बागेश्वर (Bageshwar) जनपद के कांडा (Kanda) क्षेत्र से जुड़े खनन विवाद में उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court of Uttarakhand) ने अल्मोड़ा मैग्नेसाइट लिमिटेड (Almora Magnesite Limited) को सीमित शर्तों के साथ संचालन की अनुमति दी है, जबकि बागेश्वर के कांडा क्षेत्र की खड़िया खनन इकाइयों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। इस निर्णय से जहां उद्योग से जुड़े पक्षों को आंशिक राहत मिली है, वहीं पर्यावरण और ग्रामीण सुरक्षा के प्रश्न अभी भी केंद्र में बने हुए हैं।
क्या कहा न्यायालय ने
उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Justice Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान जनहित याचिका तथा 165 खनन इकाइयों से संबंधित याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई की। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि—
अल्मोड़ा मैग्नेसाइट कंपनी को संचालन की अनुमति होगी।
कंपनी को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (State Pollution Control Board-PCB) के सभी मानक चार माह के भीतर पूर्ण करने होंगे।
निर्धारित अवधि में पीसीबी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
मानकों का पालन न होने पर पूर्व प्रतिबंध प्रभावी रहेगा।
अन्य खनन इकाइयों को क्यों नहीं मिली राहत
न्यायालय ने क्षेत्र की अन्य 165 खड़िया खनन इकाइयों को कोई अंतरिम राहत नहीं दी। इसका अर्थ है कि खड़िया खनन पर लगी रोक फिलहाल जारी रहेगी। अदालत ने संकेत दिया कि पर्यावरणीय अनुपालन और तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होने तक व्यापक छूट संभव नहीं है।
राज्य सरकार और कंपनी का पक्ष
राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया कि कंपनी के बंद रहने से सरकारी राजस्व प्रभावित हुआ है और कंपनी भूगर्भीय सर्वेक्षण जैसे कार्य भी करती है। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया कि उसने बिना अनुमति अवैध खनन नहीं किया और वह पीसीबी मानकों का पालन करने को तैयार है। इन तर्कों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने सशर्त अनुमति दी।
याचिका की पृष्ठभूमि और ग्रामीणों की चिंता
मामले की शुरुआत कांडा क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा भेजे गए पत्र से हुई, जिसे न्यायालय ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि अवैध खड़िया खनन के कारण—
खेतों को नुकसान पहुंचा,
पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हुईं,
मकानों में दरारें पड़ीं,
कमजोर आर्थिक वर्ग के लोग जोखिम में रह रहे हैं।
इन्हीं चिंताओं के चलते पूर्व में व्यापक रोक लगाई गई थी।
आगे क्या होगा
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अल्मोड़ा मैग्नेसाइट कंपनी निर्धारित चार माह में पर्यावरणीय मानक पूरे कर पाती है या नहीं। साथ ही शेष खनन इकाइयों पर अंतिम निर्णय भविष्य की सुनवाई और अनुपालन रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। क्या यह फैसला क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक गतिविधि के बीच संतुलन बना पाएगा—यह आने वाला समय बताएगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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