उत्तराखंड में संविदा व आउटसोर्स भर्ती पर धामी सरकार का सख्त फैसला, नियमित पदों पर अधिकतम छह माह तक ही होगी अस्थायी तैनाती

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नवीन समाचार, देहरादून, 1 जनवरी 2026 (Govt Order on Outsourcing)। उत्तराखंड के देहरादून जनपद से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय सामने आया है, जिसका सीधा असर प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स और संविदा कर्मियों पर पड़ेगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब नियमित पदों के सापेक्ष आउटसोर्स अथवा संविदा कर्मियों की तैनाती केवल अस्थायी व्यवस्था के रूप में ही की जा सकेगी और यह अवधि अधिकतम छह माह या नियमित चयन प्रक्रिया पूर्ण होने तक, जो भी पहले हो, सीमित रहेगी। यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे वर्षों से लंबित नियमित भर्तियों, रोजगार नीति और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े प्रश्नों पर असर पड़ेगा। पढ़ें पूर्व संबंधित समाचार :  

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शासन ने क्यों लिया यह निर्णय

(Govt Order on Outsourcing) Uttarakhand में सरकारी भर्तियों को लेकर नया आदेश जारी, अब यहां से होंगी  आउटसोर्स पदों पर भर्तियां - New order issued regarding government  recruitment in Uttarakhand now recruitment on ...प्रदेश के विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में स्वीकृत नियमित पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इन पदों पर नियुक्ति न होने के कारण विभागीय कार्य प्रभावित हो रहा है। कार्यों को सुचारू रखने के लिए विभागों को आउटसोर्स या संविदा कर्मियों की तैनाती की अनुमति दी गई थी, लेकिन शासन के अनुसार कई विभाग इस अस्थायी व्यवस्था को स्थायी समाधान की तरह अपनाने लगे थे। नियमित चयन प्रक्रिया शुरू किए बिना ही आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती और उनके कार्यकाल के विस्तार के प्रस्ताव लगातार शासन को भेजे जा रहे थे, जिसे नियमों का उल्लंघन माना गया है।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार छह माह से अधिक नहीं चलेगी अस्थायी व्यवस्था

शासन ने निर्देश दिए हैं कि यदि किसी विभाग में नियमित पद रिक्त हैं और वहां आउटसोर्स अथवा संविदा कर्मी रखने की आवश्यकता पड़ती है, तो यह तभी संभव होगा जब उन पदों को भरने के लिए नियमित चयन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई हो। ऐसी स्थिति में भी आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती अधिकतम छह माह के लिए ही की जा सकेगी या तब तक, जब तक नियमित चयन पूरा नहीं हो जाता। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्थायी व्यवस्था नियमित नियुक्तियों का विकल्प न बन जाए।

केवल चयन प्रक्रिया शुरू होने पर ही विचार

शासन के अनुसार यदि किसी विभाग को विशेष परिस्थितियों में नियमित पदों पर आउटसोर्स कर्मी रखने की आवश्यकता होती है, तो ऐसे मामलों में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ही निर्णय लेगी। अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि समिति केवल उन्हीं प्रस्तावों पर विचार करेगी, जिनमें संबंधित पदों को भरने के लिए सीधी भर्ती का अधियाचन पहले ही संबंधित आयोग या चयन संस्था को भेजा जा चुका हो। प्रत्येक प्रस्ताव में इसका स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य किया गया है।

कर्मचारियों और विभागों पर क्या असर पड़ेगा

इस निर्णय से एक ओर जहां नियमित भर्तियों की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है, वहीं लंबे समय से आउटसोर्स या संविदा के आधार पर कार्य कर रहे कर्मचारियों में भविष्य को लेकर असमंजस भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विभागों पर समयबद्ध ढंग से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का दबाव बढ़ेगा और रोजगार व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता आएगी। साथ ही यह कदम सरकारी खर्च, कार्य गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है।

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आगे क्या हो सकता है

शासन के इस फैसले के बाद यह अपेक्षा की जा रही है कि विभाग नियमित पदों को भरने के लिए आयोगों और चयन संस्थाओं को समय पर अधियाचन भेजेंगे। इससे युवाओं के लिए नियमित सरकारी रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और आउटसोर्स व्यवस्था पर निर्भरता कम होगी। आने वाले महीनों में यह निर्णय किस हद तक प्रभावी होता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

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