आवासीय जमीन पर नहीं बन सकेंगे होटल-दुकान-कॉम्प्लेक्स, उत्तराखंड में लैंडयूज के नियम बदले

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नवीन समाचार, देहरादून, 18 सितंबर 2026 (No Commercial Use on Residential Land)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में अब केवल सड़क चौड़ी होने के आधार पर आवासीय जमीन पर होटल, अस्पताल, दुकान या कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स (Commercial Complex) के नक्शे आसानी से पास नहीं होंगे। आवास विभाग ने केंद्र सरकार के निर्देश पर यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन-2025 (Unified Zoning Regulation-2025) की अधिसूचना जारी कर आवासीय और व्यावसायिक निर्माण के लिए लैंडयूज (Land Use) के नियम स्पष्ट कर दिए हैं। अब निर्माण की अनुमति से पहले मास्टर प्लान (Master Plan) और जोनल प्लान (Zonal Plan) में संबंधित जमीन के निर्धारित उपयोग को देखा जाएगा।

40 फीट सड़क का आधार खत्म, लैंडयूज होगा मुख्य आधार

No Commercial Use on Residential Landअब तक कई मामलों में आवासीय लैंडयूज वाली जमीन के सामने 40 फीट या उससे अधिक चौड़ी सड़क होने पर कॉमर्शियल निर्माण का नक्शा पास होने की संभावना रहती थी। नई व्यवस्था में सड़क की चौड़ाई अकेला आधार नहीं होगी।

यदि किसी आवासीय कॉलोनी में प्लॉट के सामने 40 या 50 फीट चौड़ी सड़क है और वहां होटल, अस्पताल या कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाना है, तो केवल सड़क की चौड़ाई के आधार पर इसकी अनुमति नहीं मिलेगी। पहले यह देखा जाएगा कि मास्टर प्लान में संबंधित जमीन का लैंडयूज कॉमर्शियल निर्धारित है या नहीं।

यदि जमीन कॉमर्शियल लैंडयूज में है और निर्माण के अन्य निर्धारित मानक भी पूरे होते हैं, तभी व्यावसायिक निर्माण की अनुमति मिल सकेगी। यानी 40 फीट या उससे अधिक चौड़ी सड़क का मानक अब आवासीय जमीन को स्वतः कॉमर्शियल निर्माण के योग्य नहीं बनाएगा।

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होटल, अस्पताल और कॉम्प्लेक्स के लिए कॉमर्शियल लैंडयूज जरूरी

अधिसूचना के अनुसार होटल (Hotel), अस्पताल (Hospital), कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए संबंधित जमीन का कॉमर्शियल लैंडयूज में होना जरूरी होगा।

इसका प्रभाव उन इलाकों पर विशेष रूप से पड़ सकता है जहां आवासीय कॉलोनियों के बीच मुख्य सड़कों के आसपास व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ी हैं। नई व्यवस्था में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए निर्धारित जोन (Zone) के अनुरूप ही निर्माण की अनुमति देने पर जोर दिया गया है।

152 गतिविधियों की श्रेणी निर्धारित

यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन में मास्टर प्लान के अनुरूप कुल 152 गतिविधियों को अधिसूचित किया गया है। इनके लिए जोन के आधार पर अनुमति और प्रतिबंध की श्रेणियां तय की गई हैं।

इनमें आवासीय योजना, कृषि, पार्क, पशुपालन, आंगनबाड़ी, आश्रम, सभागार, बैंक्वेट हॉल (Banquet Hall), बर्ड सेंचुरी (Bird Sanctuary), बॉटनिकल गार्डन (Botanical Garden), बोर्डिंग हाउस (Boarding House), ईंट भट्ठा, कब्रिस्तान, बस स्टैंड (Bus Stand), कॉलेज (College) सहित विभिन्न प्रकार की गतिविधियां शामिल हैं।

अब किसी जमीन पर निर्माण अथवा अन्य गतिविधि शुरू करने से पहले उसके निर्धारित जोन और लैंडयूज का मिलान करना होगा।

विशेष मंजूरी के लिए शासन की अनुमति जरूरी

नए नियमों में निर्माण संबंधी मंजूरियों की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। जिन मामलों में विशेष मंजूरी की आवश्यकता होगी, उनमें शासन स्तर पर अनुमति लेनी होगी। विकास प्राधिकरण (Development Authority) स्तर पर दी जाने वाली मंजूरियों को सीमित किया गया है।

शासन स्तर पर भी नगर नियोजन (Town Planning) की संस्तुति के बाद निर्णय लिया जाएगा। इससे मास्टर प्लान, जोनल प्लान और लैंडयूज निर्माण की अनुमति में पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो जाएंगे।

अवैध निर्माण रोकना और शहरों को व्यवस्थित करना उद्देश्य

आवास विभाग के अनुसार नए रेगुलेशन का उद्देश्य शहरों में निर्माण को मास्टर प्लान के अनुरूप व्यवस्थित करना और अवैध निर्माण पर रोक लगाना है। इसके तहत आवासीय, व्यावसायिक, कृषि और अन्य गतिविधियों के लिए निर्धारित जोन के अनुरूप ही निर्माण और उपयोग सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी।

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आवास सचिव आर. राजेश कुमार (R. Rajesh Kumar) के अनुसार यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन-2025 के तहत शहरों में निर्माण को व्यवस्थित करने और अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा।

नई व्यवस्था का असर खास तौर पर उन क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है जहां मुख्य सड़कों की चौड़ाई के आधार पर आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां विकसित हुई हैं। अब ‘सड़क चौड़ी है तो कॉमर्शियल नक्शा पास’ वाला आधार अकेले पर्याप्त नहीं होगा और जमीन का निर्धारित लैंडयूज प्रमुख आधार रहेगा।

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