January 7, 2026

परिवार रजिस्टर में अनियमितताओं पर सरकार का सख़्त रुख, वर्ष 2003 से अब तक की सभी संदिग्ध प्रविष्टियों की प्रदेशव्यापी जांच के निर्देश

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नवीन समाचार, देहरादून, 3 जनवरी 2026 (Family Registers Investigation)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सामने आई जानकारी के अनुसार प्रदेश में परिवार रजिस्टर में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने सख़्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि परिवार रजिस्टर जैसे संवेदनशील शासकीय अभिलेखों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार्य नहीं होगी। इस निर्णय का सीधा सामाजिक और प्रशासनिक असर यह होगा कि अब नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और फर्जी प्रविष्टियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

परिवार रजिस्टर की भूमिका और जांच का उद्देश्य

(Family Registers Investigation) उत्तराखंड परिवार रजिस्टर में बड़ी अनियमितता...See Moreबैठक में यह सामने आया कि परिवार अथवा कुटुंब रजिस्टर ग्रामीण क्षेत्रों में निवास, पहचान और सरकारी योजनाओं के लाभ से सीधे जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसी कारण सरकार ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारी के पास सुरक्षित रखी जाएं, ताकि अभिलेखों में किसी भी प्रकार की अनधिकृत फेरबदल की संभावना समाप्त हो सके। जांच का उद्देश्य केवल दोष तलाशना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को भरोसेमंद बनाना भी बताया गया।

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2003 से अब तक की प्रविष्टियों की होगी समीक्षा

सरकार ने जांच का दायरा वर्ष 2003 से अब तक निर्धारित किया है। इसका अर्थ यह है कि बीते दो दशकों में हुई प्रत्येक संदिग्ध प्रविष्टि की समीक्षा की जाएगी। बैठक में यह भी तय हुआ कि जांच की जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारी अथवा अपर जिलाधिकारी स्तर के अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिससे जांच निष्पक्ष और प्रशासनिक रूप से मजबूत हो। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नियमावली और अधिकारों की स्पष्टता

मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि परिवार रजिस्टर का पंजीकरण और प्रतिलिपि सेवाएं पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के अंतर्गत संचालित होती हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी पंचायत को प्राप्त है, जबकि अपील का अधिकार उप जिलाधिकारी के पास निहित है। वर्तमान में यह सेवाएं अपणी सरकार पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध हैं, जिन्हें और अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी है।

आंकड़ों ने बढ़ाई सरकार की चिंता

पंचायती राज विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए। 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए 2 लाख 66 हजार 294 आवेदन आए, जिनमें से 2 लाख 60 हजार 337 स्वीकृत किए गए, जबकि 5 हजार 429 आवेदन नियमों के उल्लंघन और अपूर्ण दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए। विशेषज्ञों के अनुसार निरस्त आवेदनों की संख्या यह संकेत देती है कि फर्जी प्रविष्टियों की कोशिशें भी हुई हैं।

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सीमावर्ती जिलों पर विशेष नजर

बैठक में यह भी उल्लेख हुआ कि राज्य की सीमा से लगे कुछ मैदानी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने नियमावली में आवश्यक संशोधन की आवश्यकता जताई है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।

प्रशासन को स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकारी अभिलेखों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी जिलों में समान रूप से जांच सुनिश्चित करने और भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को स्पष्ट नीति के अंतर्गत नियंत्रित कर कैबिनेट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, पुलिस महानिदेशक इंटेलिजेंस अभिनव कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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