EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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सत्यापित खतौनी सहित भूमि से जुड़ी कई सेवाएं मिल सकेंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजस्व परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राजस्व विभाग से जुड़े छह वेब पोर्टल ई भूलेख के अद्यतन संस्करण, भू नक्शा, भूलेख अंश, भू अनुमति, एग्री लोन और ई वसूली पोर्टल का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया के तहत राजस्व सेवाओं का ऑनलाइन होना आमजन की सुविधा के साथ ही प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम है। अब खतौनी की सत्यापित प्रति ऑनलाइन भुगतान कर घर बैठे प्राप्त की जा सकेगी। उद्योग और कृषि प्रयोजनों के लिए भूमि उपयोग और भूमि क्रय की अनुमति की प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है, जबकि भूमि मानचित्र सार्वजनिक डोमेन में निःशुल्क उपलब्ध होंगे। एग्री लोन पोर्टल के जरिए किसान भूमि के सापेक्ष ऋण के लिए आवेदन कर सकेंगे और ऋण चुकाने पर स्वतः चार्ज हट जाएगा। ई वसूली पोर्टल से राजस्व वसूली के मामलों को ऑनलाइन जिला प्रशासन को भेजकर पूरी प्रक्रिया की निगरानी संभव होगी।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : उत्तराखंड में अब घर बैठे दर्ज होंगी जमीन संबंधी शिकायतें, आरसीएमएस पोर्टल से घर बैठे दर्ज होंगी राजस्व न्यायालयों की जमीन संबंधी शिकायतेंराजस्व न्यायालयों में डिजिटल व्यवस्था का विस्तार, एनआईसी सहयोग से अंतिम चरण में पोर्टलक्यों जरूरी था यह बदलाव, जमीन के विवाद और न्याय की सुलभताआरसीएमएस पोर्टल पर कैसे दर्ज होगी शिकायत, क्या होगा पूरा तरीकापोर्टल से क्या होंगे फायदे, राजस्व न्यायालयों में पेपरलेस कामकाज की दिशा50 हजार से अधिक वाद लंबित, ऑनलाइन प्रक्रिया से बढ़ेगी निस्तारण की गतिलोगों के लिए सबसे बड़ा लाभ, न्यायालयों के चक्कर काटने से मिलेगी निजातTags (RCMS Portal for Land Problems) :Like this:Relatedयह भी पढ़ें : उत्तराखंड में अब घर बैठे दर्ज होंगी जमीन संबंधी शिकायतें, आरसीएमएस पोर्टल से घर बैठे दर्ज होंगी राजस्व न्यायालयों की जमीन संबंधी शिकायतेंदेहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक ऐसी पहल सामने आई है, जो जमीन संबंधी विवादों में वर्षों से उलझे आम नागरिकों के लिए राहत लेकर आ सकती है। राज्य सरकार अब राजस्व न्यायालयों (Revenue Courts) की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने जा रही है, जिसके तहत लोग खारिज-दाखिल, सीमांकन सहित अन्य राजस्व विवादों में घर बैठे ही वाद दर्ज कर सकेंगे।यह भी पढ़ें : छुट्टी नहीं मिली तो कर्मचारियों ने यमकेश्वर के माला गांव में एआई से दिखा दिया बब्बर शेर, वन विभाग की जांच में खुली पोल....इसके लिए राजस्व विभाग आरसीएमएस पोर्टल (Revenue Court Case Management System – RCMS Portal) तैयार करा रहा है, जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) शीघ्र लांच करेंगे। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे 50 हजार से अधिक लंबित राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी आने, पारदर्शिता बढ़ने और आमजन के समय व धन की बचत होने की उम्मीद है।राजस्व न्यायालयों में डिजिटल व्यवस्था का विस्तार, एनआईसी सहयोग से अंतिम चरण में पोर्टल डिजिटल क्रांति (Digital Revolution) के इस दौर में राज्य सरकार आम नागरिकों से जुड़ी सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (Online Platform) पर ला रही है। राजस्व विभाग और उत्तराखंड राजस्व परिषद (Uttarakhand Revenue Council) पहले ही कई सेवाओं को इंटरनेट आधारित व्यवस्था से जोड़ चुके हैं। हाल ही में राजस्व संबंधी छह सेवाओं के छह वेब पोर्टल (Web Portal) लांच किए गए थे। इसके अलावा अपणि सरकार (Apuni Sarkar) मंच के माध्यम से जाति, आय, मूल निवास, अधिवास, हैसियत प्रमाणपत्र सहित आठ सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।अब इसी क्रम में राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाने के लिए आरसीएमएस पोर्टल पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (National Informatics Centre – NIC) के सहयोग से यह पोर्टल विकसित किया जा रहा है और यह निर्माण कार्य अंतिम चरण में बताया जा रहा है।क्यों जरूरी था यह बदलाव, जमीन के विवाद और न्याय की सुलभताउत्तराखंड में जमीन से जुड़े मामलों में समय पर सुनवाई और निष्पक्ष निस्तारण आम जन के लिए बड़ी चुनौती रहा है। सीमांकन, खतौनी, खारिज-दाखिल, कब्जे व अन्य राजस्व विवादों में लोगों को तहसील, उप जिलाधिकारी कार्यालय, जिलाधिकारी कार्यालय और राजस्व परिषद तक कई बार जाना पड़ता है। बार-बार तारीखें, दस्तावेजों की छाया प्रति, शुल्क जमा करने की प्रक्रिया और लंबी प्रतीक्षा—ये सब आम नागरिक का समय, धन और धैर्य तीनों खर्च कर देते हैं। ऐसे में राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया ऑनलाइन होना केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि “सस्ता, सुलभ और सरल न्याय” की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।यह भी पढ़ें : लक्सर नगर पालिका ने आरटीआई के जवाब में विकास कार्यों की जगह गोलगप्पों की रेट लिस्ट भेजी, सोशल मीडिया पर हुई वायरल‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। आरसीएमएस पोर्टल पर कैसे दर्ज होगी शिकायत, क्या होगा पूरा तरीकाराजस्व विभाग की योजना के अनुसार आरसीएमएस पोर्टल पर जाकर वादी (Plaintiff) को अपनी शिकायत दर्ज करनी होगी। इसके साथ खतौनी (Land Record), पहचान पत्र (Identity Proof) तथा विवाद से जुड़े आवश्यक दस्तावेज अपलोड (Upload Documents) करने होंगे। आवेदन के दौरान संबंधित न्यायालय का चयन भी किया जाएगा।इसके बाद जिस न्यायालय से वाद संबंधित होगा, वहां से वाद के स्वीकार होने से लेकर सुनवाई की तिथि तक की जानकारी मोबाइल फोन पर एसएमएस (SMS) अथवा ई-मेल (E-mail) के माध्यम से प्राप्त होगी। निर्णय आने पर आदेश की प्रति भी ऑनलाइन डाउनलोड (Download Order Copy) की जा सकेगी।यह व्यवस्था आमजन के लिए इसलिए भी उपयोगी मानी जा रही है क्योंकि इससे “किस तारीख को क्या स्थिति है” यह जानकारी स्पष्ट और समय पर मिलेगी। क्या किसी वाद की स्थिति जानने के लिए बार-बार कार्यालय जाना जरूरी रह जाएगा—यह बड़ा प्रश्न अब बदल सकता है।पोर्टल से क्या होंगे फायदे, राजस्व न्यायालयों में पेपरलेस कामकाज की दिशाआरसीएमएस पोर्टल से सरकार ने कई लाभ गिनाए हैं, जिनमें प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही प्रमुख हैं। इसके माध्यम से—सभी राजस्व न्यायालयों में कामकाज कागजरहित (Paperless System) हो सकेगा।भूमि संबंधी वाद इस पोर्टल के जरिये सीधे दाखिल किए जा सकेंगे।न्यायालय शुल्क भुगतान द्वार (Payment Gateway) से जमा किया जा सकेगा।किसी भी वाद की अद्यतन स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकेगी।वादकारियों का समय और धन बचेगा।राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी आने की संभावना होगी।यह पहल विशेष रूप से उन लोगों के लिए राहतकारी हो सकती है, जो दूरस्थ पर्वतीय गांवों से आते हैं और बार-बार मुख्यालय तक आने-जाने में आर्थिक व शारीरिक कठिनाई झेलते हैं।50 हजार से अधिक वाद लंबित, ऑनलाइन प्रक्रिया से बढ़ेगी निस्तारण की गतिराज्य में तहसीलदार (Tehsildar), उप जिलाधिकारी (Sub Divisional Magistrate – SDM), जिलाधिकारी (District Magistrate – DM), आयुक्त (Commissioner) और राजस्व परिषद न्यायालयों में राजस्व संबंधी 50 हजार से अधिक वाद लंबित बताए गए हैं। राजस्व सचिव डॉ. एसएन पांडेय (Dr SN Pandey) के अनुसार ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने से न्यायालयों पर दबाव रहेगा, कामकाज में पारदर्शिता आएगी और जवाबदेही बढ़ेगी।यह भी पढ़ें : नैनी झील में नौकायन के दौरान महिला ने झील में छलांग लगाई, नाव चालकों की सतर्कता से बची जानउन्होंने यह भी बताया कि आरंभिक दौर में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों व्यवस्थाएं साथ चलेंगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी जाएगी। यह तरीका इसलिए भी जरूरी है ताकि जिन लोगों के पास तकनीकी सुविधा नहीं है, वे भी न्याय प्रक्रिया से बाहर न रहें।लोगों के लिए सबसे बड़ा लाभ, न्यायालयों के चक्कर काटने से मिलेगी निजातइस योजना का सबसे मानवीय पक्ष यह है कि जमीन से जुड़े मामलों में आम व्यक्ति अक्सर वर्षों तक उलझा रहता है। यदि पोर्टल सही ढंग से लागू होता है तो बुजुर्ग, महिलाएं, दूरदराज के ग्रामीण और छोटे किसान—सभी को न्यायालयों के चक्कर काटने से राहत मिल सकती है। साथ ही दस्तावेजी धोखाधड़ी, बिचौलियों की भूमिका और अनावश्यक देरी जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लग सकता है।अब देखना यह है कि आरसीएमएस पोर्टल के लांच होने के बाद तकनीकी सहायता, जनजागरूकता, प्रशिक्षण और शिकायत निवारण की व्यवस्था कितनी मजबूत बनती है। यदि सरकार इस पहल को जमीन पर प्रभावी ढंग से उतार पाती है तो यह उत्तराखंड में राजस्व न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ा परिवर्तन सिद्ध हो सकता है।पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ👉, अल्मोड़ा के समाचारों के लिए यहाँ👉, बागेश्वर के समाचारों के लिए यहाँ👉, चंपावत के समाचारों के लिए यहाँ👉, ऊधमसिंह नगर के समाचारों के लिए यहाँ👉, देहरादून के समाचारों के लिए यहाँ👉, उत्तरकाशी के समाचारों के लिए यहाँ👉, पौड़ी के समाचारों के लिए यहाँ👉, टिहरी जनपद के समाचारों के लिए यहाँ👉, चमोली के समाचारों के लिए यहाँ👉, रुद्रप्रयाग के समाचारों के लिए यहाँ👉, हरिद्वार के 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