उत्तराखंड में पिछले 15 वर्षों में 34 प्रतिशत बढ़ गये गुलदार, इसलिये हो रहे हमले, क्या है समाधान ?

(Nainital-Leopard Killed Women Update on 22 Year old girl Missing from house

Leoperd increased by 34 percent in last 15 years

(Wild Life) घोड़ाखाल के बाद अब भीमताल में मंदिर के बाहर से गुजरते दिखे दो गुलदार…

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(Nagar Nikay)1 निवर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष पर वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी भूमि पर होटल बनाने के आरोप…

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वन्य प्राणी सप्ताह-Zoo: 250 बच्चों ने भरे अपनी कल्पनाओं में रंग…

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ऑनलाइन चित्रकला प्रतियोगिता में नैनीताल, हल्द्वानी, काठगोदाम, झारखंड व उड़ीसा के बच्चे छाये…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जून 2021। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्राणी उद्यान नैनीताल द्वारा आयोजित कराई गई ऑनलाइन चित्रकला प्रतियोगिता के परिणाम शनिवार को घोषित कर दिए गए हैं। घोषित किए गए परिणामों के अनुसार प्रतियोगिता में शामिल हुए करीब 250 प्रतिभागियों में से कक्षा दो से पांच से ग्रुप 1 में आर्यमान बिड़ला हल्द्वानी के प्रबल रौतेला को प्रथम, सिंथिया स्कूल हल्द्वानी के पंकज सिंह को द्वितीय, संजना सोरागी को तृतीय व बीएसएसवी मल्लीताल के हर्षित अधिकारी को सांत्वना, कक्षा 6 से 8 से ग्रुप 2 में निर्मला कॉन्वेंट काठगोदाम की रिद्धि जोशी को प्रथम, सेंट मेरी नैनीताल की संस्कृति पांडे को द्वितीय, यूनिवर्सल स्कूल हल्द्वानी की सिमरन को तृतीय व डीएवी पब्लिक स्कूल भुवनेश्वर उड़ीसा को संात्वना तथा कक्षा 9 से 12 के ग्रुप 3 के लिए डीएवी पब्लिक स्कूल जमशेदपुर झारखंड के आयुष कुमार झा को प्रथम, बुवी जगबंधु स्कूल भुवनेश्वर उड़ीसा की आइशा पांडा को द्वितीय, सिंथिया पब्लिक स्कूल हल्द्वानी की अंजली ढैला को तृतीय व सेंट मेरी नैनीताल की पावनी शर्मा को सांत्वना पुरस्कार दिया गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

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Nainital Zooनवीन समाचार, नैनीताल, 9 अगस्त 2019। नैनीताल प्राणी उद्यान में रहने वाले पशु-पक्षिओं को अब उनके नियत अंगीकरण शुल्क की आधा धनराशि जमा करके आधा भी अंगीकृत किया जा सकेगा। शुक्रवार को चिड़ियाघर प्रबंधन सोसाइटी की आईएएस अधिकारी आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक में वन्य जन्तु अंगीकरण योजना में परिवर्तन कर अब यह प्रावधान किया गया। बताया गया है कि अंगीकरण शुल्क अधिक होने के कारण कई लोग चाहकर भी पशु-पक्षियों को अंगीकृत नहीं कर पाते थे, इसलिए प्राविधान में परिवर्तन किया गया है। उम्मीद की जा रही है कि इसके बाद अधिक लोग पशु-पक्षिओं को अंगीकृत करने क अलए आगे आएंगे और नैनीताल प्राणि उद्यान की आय में वृद्धि होगी व पशु-पक्षियों की बेहतर देखभाल हो सकेगी।
इसके अतिरिक्त बैठक मे ‘जू सोसाइटी’ में प्राप्त आय व व्यय में सामंजस्य रखने को कहा गया। नैनीताल जू में निर्माणाधीन इण्टरप्रिटेशन का कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये गये। महत्वपूर्ण वन्य जीव जैसे रेड पाण्डा के अर्न्तराष्ट्रीय विनिमय विधिवत अनुमति प्राप्त करने के पश्चात् किया जा सकता है। बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों द्वारा लिये गये निर्णयों पर सहमति दी गयी। अंत में अध्यक्ष ने प्राणी उद्यान का भ्रमण किया, तथा प्राणी उद्यान में वन्य प्राणियों के रखरखाव एवं सफाई व्यवस्था, जू कर्मचारियों के कठिन परिश्रम की प्रशंसा की। इसके साथ ही हल्द्वानी स्थित अंतर्राष्ट्रीय जू की शासकीय निकाय की वार्षिक बैठक का भी आयोजन किया गया। बैठकों में डा. विवेक पांडे, डा. तेजस्विनी अरविंद पाटिल, डा. पराग मधुकर धकाते, नितीश मणि त्रिपाठी, बीजू लाल टीआर, सुनील कुमार मीणा, एसएस जंगपांगी, दिनेश चंद्र साह, पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी व ममता चंद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

रेड पांडा के दूसरे रक्त संबंध में प्रजनन हेतु अंतर्राष्ट्रीय विनिमय पर भी हुई चर्चा

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बड़े हो गए हें रेड पांडा के बच्चे (04.10.2015)

नैनीताल। बैठक में बताया गया है कि नैनीताल जू में रेड पांडा के जोड़े दो-तीन बार प्रजनन कर चुके हैं, तथा उनकी पर्याप्त संख्या हो गयी है। आगे इनके दूसरे रक्त संबंध में प्रजनन के लिए इन्हें बाहरी साथी उपलब्ध कराने जरूरी हैं, क्योंकि भारत में नैनीताल के अलावा दार्जिलिंग के चिड़ियाघर में ही दार्जिलिंग में ही रेड पांडा हैं एवं यहां दार्जिलिंग से ही इन्हें लाया गया है, इस प्रकार दोनों जगह मौजूद रेड पांडा एक ही रक्त संबंध के हैं। लिहाजा कहा गया कि विधिवत अनुमति प्राप्त करके ही इनका अंतर्राष्ट्रीय विनिमय किया जा सकता है।

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तत्कालीन वन वर्धनिक उत्तराखंड मनोज चंद्रन ने 350 हेक्टेयर क्षेत्रफल को केवल 90.5 लाख रुपए से किया सबसे बड़े जीवंत जैव संग्रहालय के रूप में
नवीन जोशी, नैनीताल। पर्यटन नगरी नैनीताल में बीते एक दशक में एक ऐसा नया पर्यटन स्थल विकसित हो गया है, जो कभी पथरीला पहाड़ हुआ करता है, और यहां के मजबूत पत्थरों से नगर में अंग्रेजी दौर में घरों-बंगलों का निर्माण किया जाता था। इस पथरीले पहाड़ पर वन विभाग ने बीते करीब 12-13 वर्षों में प्रदेश का अपनी तरह का इकलौता व अनूठा जीवंत जैव विविधता से समृद्ध संग्रहालय-हरबेरियम ‘उगा’ दिया है, जिसमें इतनी अधिक खाशियतें हैं कि नगर के दूर होने के बावजूद इन्हें देखने के लिए हर वर्ष लाखों सैलानी भी यहां आ रहे हैं।

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