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April 5, 2025

मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के विवादित बयान पर गरमाई उत्तराखंड की राजनीति, नेताओं के बयानों से तेज हुई मंत्रिमंडल से बाहर होने की मांग तेज

Rajnitik Bayan Arop-Pratyarop Controversial Political Statement

नवीन समाचार, देहरादून, 26 फरवरी 2025 (Trivendra Rawat-Pritam Singh Comments on Agarwal) उत्तराखंड के संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के विवादित बयान को लेकर प्रदेश में भारी विरोध शुरू हो गया है। उनके द्वारा उपयोग किए गए शब्दों को लेकर विभिन्न संगठनों, विपक्षी दलों और आम जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की है। इस मामले में प्रदेश के कई वरिष्ठ राजनेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

विरोध के स्वर तेज

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा विधानसभा सत्र के दौरान प्रयोग किए गए कुछ शब्दों को पहाड़ी समाज ने अपनी अस्मिता से जोड़कर देखा, जिससे प्रदेश में विरोध प्रदर्शनों की लहर दौड़ गई। जगह-जगह उनके विरुद्ध नारेबाजी और प्रदर्शन हो रहे हैं।

(Trivendra Rawat-Pritam Singh Comments on Agarwal) कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने पहाड़ियों पर कसा तंज, विधानसभा में बोले  अशोभनीय शब्द -इस पूरे विवाद पर पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत की भी प्रतिक्रिया आई। उन्होंने इस बयान को “घोर आपत्तिजनक” और “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया। उनके अनुसार, “इस प्रकार की भाषा किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति से अपेक्षित नहीं है। जो वीडियो मैंने देखा और सुना, वह पूरी तरह से अनुचित और निंदनीय था। प्रेमचंद अग्रवाल संसदीय कार्य मंत्री हैं, विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं और कई बार विधायक बने हैं। उनसे इस प्रकार की भाषा और आचरण की आशा किसी को नहीं थी।” उन्होंने यह भी कहा कि इस बयान को कोई भी उचित नहीं ठहरा सकता।

माफी की मांग

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रेमचंद अग्रवाल को अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उनके अनुसार, “हम सभी उत्तराखंड के लोग हैं और हमें राज्य का सौहार्द बनाए रखना चाहिए। जो कुछ भी हुआ, वह निंदनीय है और प्रेमचंद अग्रवाल को अपनी गलती स्वीकार कर लेनी चाहिए।”

हालांकि, प्रेमचंद अग्रवाल ने पहले ही अपने बयान पर खेद प्रकट किया और माफी भी मांगी, लेकिन विपक्ष और प्रदर्शनकारियों को यह स्वीकार्य नहीं है।

विपक्ष के तीखे हमले

प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने भी प्रेमचंद अग्रवाल के बयान पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा, “ऐसा संसदीय कार्य मंत्री हमने पहली बार देखा है, जो हमेशा लड़ाई के मूड में रहते हैं। भाजपा को पहले ही यह सोच लेना चाहिए था कि वे किस व्यक्ति को यह महत्वपूर्ण पद सौंप रहे हैं। बंदर के हाथ में उस्तरा देने जैसा यह निर्णय भाजपा के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।” उन्होंने कहा कि इस प्रकार की भाषा अस्वीकार्य है और प्रेमचंद अग्रवाल को नैतिकता के आधार पर स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “भाजपा सरकार लगातार उत्तराखंड की जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है। प्रेमचंद अग्रवाल के बयान से स्पष्ट होता है कि भाजपा नेताओं में अहंकार और असंवेदनशीलता बढ़ गई है। हम उनके इस्तीफे तक यह आंदोलन जारी रखेंगे।”

उत्तराखंड में बढ़ता जनाक्रोश

प्रदेशभर में इस बयान को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विभिन्न संगठनों और स्थानीय जनता ने भी प्रेमचंद अग्रवाल के विरुद्ध प्रदर्शन किए। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, अल्मोड़ा, टिहरी सहित कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं।

उत्तराखंड आंदोलनकारियों के संगठन ने भी इस मामले में अपना बयान जारी किया। उन्होंने कहा, “यह बयान हमारी अस्मिता पर हमला है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि सरकार प्रेमचंद अग्रवाल पर उचित कार्रवाई नहीं करती, तो हम बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे।”

भाजपा नेतृत्व पर दबाव

भाजपा के भीतर भी इस बयान को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस पर नाराजगी जताई है। हालांकि अभी तक भाजपा नेतृत्व ने प्रेमचंद अग्रवाल के खिलाफ कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं की है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित निर्णय ले सकता है।

क्या प्रेमचंद अग्रवाल पर होगी कार्रवाई? (Trivendra Rawat-Pritam Singh Comments on Agarwal)

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रेमचंद अग्रवाल पर बढ़ते दबाव को देखते हुए भाजपा नेतृत्व को जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेना पड़ सकता है। यदि पार्टी इस मामले को गंभीरता से नहीं लेती है, तो आगामी चुनावों में इसका असर भाजपा की छवि पर पड़ सकता है। जहां एक ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर भाजपा को घेर रहा है, वहीं भाजपा के भीतर भी असंतोष उभर रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नेतृत्व इस विवाद को कैसे संभालता है और प्रेमचंद अग्रवाल पर कोई कार्रवाई करता है या नहीं। (Trivendra Rawat-Pritam Singh Comments on Agarwal)

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