अंकिता भंडारी मामला : ब्लॉगर ज्योति अधिकारी जमानत के बावजूद नहीं हो पाई रिहा, नई मुसीबत में फंसी, मामले में उर्मिला सनोवर और सुरेश राठौर पर भी आई नई अपडेट

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जनवरी 2026 (Update on Jyoti-Urmila-Rathor)। अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) से जुड़े कथित वीआईपी नाम के विषय को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बीच उत्तराखंड के देवी-देवताओं और पहाड़ की महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी के आरोपों में गिरफ्तार ब्लॉगर ज्योति अधिकारी (Blogger-Youtuber Jyoti Adhikari) को मुखानी थाने में दर्ज मामलों में मंगलवार को न्यायालय से जमानत मिल गई, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जेल से रिहाई नहीं मिल सकी। देखें संबंधित वीडिओ :

वजह यह रही कि खटीमा (Khatima) में दर्ज एक अन्य प्रकरण में पुलिस ने बी-वारंट दाखिल कर दिया, जिसके चलते ज्योति अधिकारी को जेल में ही रहना पड़ा। अब उन्हें आज बुधवार को दूसरी अदालत में पेश किया जा रहा है। यह मामला सोशल मीडिया पर जिम्मेदार अभिव्यक्ति, धार्मिक-सांस्कृतिक संवेदनशीलता और बहु-जनपदीय अभियोगों की प्रक्रिया—तीनों वजहों से चर्चा में है।

मुखानी प्रकरण में जमानत, पर बी-वारंट से बढ़ी कानूनी उलझन

पुलिस के अनुसार मुखानी थाना (Mukhani Police Station) में ज्योति अधिकारी के विरुद्ध पहला अभियोग दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता कॉंग्रेस नेत्री जूही चुफाल (Juhi Chufal) ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में ज्योति अधिकारी देवी-देवताओं और पहाड़ की महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करती दिखीं। शिकायत में यह भी कहा गया कि वह सार्वजनिक स्थान पर दराती लहराती नजर आईं। इसके आधार पर पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने और शस्त्र अधिनियम (Arms Act) सहित अन्य धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया था। इसके बाद गत 8 जनवरी को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

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(Update on Jyoti-Urmila-Rathor) Uttarakhand: अल्मोड़ा में भी ब्लॉगर ज्योति अधिकारी पर मुकदमा दर्ज, महिलाओं  और देवी-देवताओं के अपमान से लोगों में आक्रोश - Uttarakhand Newsगिरफ्तारी के बाद मुखानी थाने में ही शिकायतकर्ता को धमकाने के आरोप में एक अन्य अभियोग भी दर्ज हुआ। उधर वायरल वीडियो के आधार पर खटीमा (Khatima), रुद्रपुर (Rudrapur) और अल्मोड़ा (Almora) में भी अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आई।

बचाव पक्ष की दलील, “उद्देश्य भावनाएं आहत करना नहीं”, ज्योति अधिकारी वीडियो के माध्यम से क्षमा मांगने को तैयार 

जमानत सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र बिष्ट (Jitendra Bisht) और गौरव कपूर (Gaurav Kapoor) ने तर्क दिया कि वीडियो का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत में वीडियो की तारीख और स्थान स्पष्ट नहीं है। बचाव पक्ष ने दराती पकड़ने को नुकसान पहुंचाने की मंशा से जोड़ने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि यदि समाज में गलत संदेश गया है तो ज्योति अधिकारी वीडियो के माध्यम से क्षमा मांगने को तैयार हैं।

जमानत मिलने के बाद परिजन रिहाई की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन खटीमा प्रकरण में बी-वारंट आने से रिहाई टल गई। जेल अधीक्षक प्रमोद पांडे (Pramod Pandey) ने इसकी पुष्टि की।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति की जमानत तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठाता है कि सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वाले व्यक्तियों की भाषा और प्रस्तुति की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए। साथ ही बहु-जनपदीय अभियोगों में बी-वारंट, पेशी और जमानत की प्रक्रिया आम नागरिकों के लिए कितनी जटिल हो जाती है—यह पक्ष भी सामने आता है। कानून के स्तर पर यह विषय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोक व्यवस्था और धार्मिक-सांस्कृतिक संवेदनशीलता के संतुलन से जुड़ा है।

दूसरा मामला : अंकिता भंडारी प्रकरण में उर्मिला सनावर मोबाइल जमा नहीं कर सकीं, “अस्वस्थ” होने का दावा

Ankita Bhandari VIP Case Urmila sanawar not submit evidence to police  reason share on social media अंकिता केस के सबूत उर्मिला सनावर ने अब तक  पुलिस को नहीं सौंपे, सोशल मीडिया परउधर, अंकिता भंडारी (Ankita Bhandari) हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी नाम के विषय को लेकर चर्चा बढ़ाने वाली अभिनेत्री उर्मिला सनावर (Urmila Sanawar) से जुड़ा एक अन्य घटनाक्रम भी सामने आया है। बताया गया है कि उन्हें पुलिस और विशेष जांच दल (Special Investigation Team—SIT) के समक्ष साक्ष्य के रूप में अपना मोबाइल जमा करना था, लेकिन इससे पहले उन्होंने स्वयं को अस्वस्थ बताते हुए मोबाइल जमा नहीं कराया।

उर्मिला ने अपने सोशल मीडिया खातों पर उपचार के दौरान की तस्वीरें साझा कर कहा कि स्वास्थ्य ठीक होते ही वह जांच में पूरा सहयोग करेंगी। हालांकि इस विषय में पुलिस या एसआईटी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन जांच एजेंसियां घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

एसआईटी का कहना है कि मोबाइल का फॉरेंसिक परीक्षण (Forensic Test) होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग में किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई है या नहीं।

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पूर्व विधायक सुरेश राठौर पर नया अभियोग, वाहन वापस न करने का आरोप

Haridwar: पूर्व विधायक सुरेश राठौर 6 साल के लिए भाजपा से निष्कासित, दूसरी  शादी को लेकर हुई थी कॉन्ट्रोवर्सी - Uttarakhand Ex BJP MLA Suresh Rathore  Expelled from party for ...इसी बीच भाजपा (BJP) से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर (Suresh Rathore) की मुश्किलें भी बढ़ी हैं। जानकारी के अनुसार उनके विरुद्ध हरिद्वार (Haridwar) के ज्वालापुर थाना (Jwalapur Police Station) में एक ठेकेदार की शिकायत पर वाहन वापस न करने के आरोप में नया अभियोग दर्ज कराया गया है। यह मुकदमा अदालत के आदेश पर दर्ज होने की बात कही गई है।

गौरतलब है कि स्वयं को राठौर की पत्नी बताने वाली उर्मिला सनावर द्वारा वीडियो और कथित ऑडियो सामने आने के बाद से ही यह विषय सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा में बना हुआ है।

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