1 Arrested Giraftar
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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जनवरी 2026 (Wildlife Trafficker Arrested)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद अंतर्गत किलबरी–पंगूट मोटर मार्ग से वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है। वन विभाग (Forest Department) और राज्य विशेष कार्यबल (Special Task Force – STF) की संयुक्त कार्रवाई में एक वन्यजीव तस्कर को दो गुलदार (Leopard) की खाल और भारी मात्रा में हड्डियों के साथ गिरफ्तार किया गया है।

यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि गुलदार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) की प्रथम अनुसूची (Schedule I) में संरक्षित प्राणी है और इसके अंगों की तस्करी वन्यजीव अपराध की गंभीर श्रेणी में आती है। इस घटना ने यह भी संकेत दिया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में वन्यजीव तस्करी हो रही है, और इसके नेटवर्क को रोकने के लिए सतर्क निगरानी और संयुक्त अभियान कितने जरूरी हैं।

गोपनीय सूचना पर निगरानी, रास्ते में दबोचा गया आरोपित

(Wildlife Trafficker Arrested)प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति गुलदार की खालें बेचने के उद्देश्य से नैनीताल पहुंचने वाला है। इसके बाद गोपनीय निगरानी (Secret Surveillance) के आधार पर नगरपालिका वन रेंज (Municipality Forest Range) और नैना वन रेंज (Naina Range) की संयुक्त टीम ने किलबरी–पंगूट मार्ग पर घेराबंदी कर संदिग्ध को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से दो गुलदार की खालें और बड़ी मात्रा में हड्डियां बरामद हुईं। प्रारंभिक जांच में अनुमान जताया जा रहा है कि बरामद खालें और हड्डियां लगभग छह माह पुरानी हो सकती हैं। 

आरोपित की पहचान और पृष्ठभूमि

गिरफ्तार आरोपित की पहचान महेश सिंह कपकोटी (Mahesh Singh Kapkoti) पुत्र स्वर्गीय जसवंत सिंह (Late Jaswant Singh) निवासी कपकोट (Kapkot), थाना कपकोट (Kapkot Police Station), जनपद बागेश्वर (Bageshwar District) के रूप में हुई है। उसकी आयु 29 वर्ष बतायी गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार वह लंबे समय से वन्यजीव अंगों की अवैध तस्करी में संलिप्त रहा है।

अभियोग दर्ज, पूछताछ जारी, अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश

वन विभाग ने आरोपित के विरुद्ध नगरपालिका वन रेंज नैनीताल (Municipality Forest Range Nainital) में अभियोग दर्ज किया है। फिलहाल पूछताछ की जा रही है और बरामद सामग्री की विधिक जांच प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में तस्करी की श्रृंखला, लेन-देन के माध्यम, खरीददारों की पहचान और तस्करी के मार्गों का पता लगाना आवश्यक होता है, ताकि केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर पूरे तंत्र पर रोक लगायी जा सके।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध कितना गंभीर

उल्लेखनीय है कि गुलदार को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) की प्रथम अनुसूची (Schedule I) में रखा गया है। इसका अर्थ यह है कि यह प्राणी उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा में आता है। इसके शिकार, खाल या अन्य अंगों के क्रय-विक्रय को गंभीर अपराध माना जाता है और इसमें कठोर दंड का प्रावधान है। इस तरह की तस्करी केवल वन्यजीवों के अस्तित्व पर संकट नहीं डालती, बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन (Ecological Balance) और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था (Tourism Economy) को भी प्रभावित कर सकती है। आखिर नैनीताल जैसे पर्यटन क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा कमजोर होगी तो प्रकृति आधारित पर्यटन पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

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किन अधिकारियों और टीमों ने की कार्रवाई

यह कार्रवाई प्रभागीय वनाधिकारी आकाश गंगवार (Divisional Forest Officer – Akash Gangwar) और उप प्रभागीय वनाधिकारी ममता चन्द (Sub Divisional Forest Officer – Mamta Chand) के निर्देश पर की गई। संयुक्त टीम में वन क्षेत्राधिकारी ललित मोहन कार्की (Forest Range Officer – Lalit Mohan Karki), आनंद लाल आर्या (Anand Lal Arya), वन दरोगा विमला नगरकोटी (Forest Sub Inspector – Vimla Nagarkoti), कुमार सौरभ (Kumar Saurabh), वन आरक्षी राजेंद्र कुमार वर्मा (Forest Guard – Rajendra Kumar Verma), गोविंद सिंह (Govind Singh) सहित नैना और नगरपालिका रेंज की टीमें शामिल रहीं।

राज्य विशेष कार्यबल (Special Task Force – STF) की ओर से निरीक्षक एमपी सिंह (Inspector MP Singh), उप निरीक्षक बृजभूषण गुरुरानी (Sub Inspector Brijbhushan Gururani) और प्रकाश भगत (Prakash Bhagat), मुख्य आरक्षी गोविंद सिंह बिष्ट (Head Constable Govind Singh Bisht), जगपाल सिंह (Jagpal Singh), रियाज अख्तर (Riyaz Akhtar) और आरक्षी मोहित वर्मा (Constable Mohit Verma) भी कार्रवाई में शामिल रहे।

इस गिरफ्तारी के बाद अब यह संभावना भी बढ़ गई है कि पूछताछ में वन्यजीव तस्करी से जुड़े अन्य नाम और संपर्क सामने आ सकते हैं। क्या यह अकेला व्यक्ति था या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा—यह तथ्य आने वाली जांच में स्पष्ट हो सकता है। क्या ये अवशेष स्थानीय क्षेत्र से जुड़े हैं या इन्हें अन्य जगह से लाया गया—यह प्रश्न भी अब जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

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यह घटना बताती है कि वन्यजीव अपराध केवल जंगल तक सीमित नहीं, बल्कि यह संगठित अवैध गतिविधि का रूप ले सकता है। ऐसे में वन विभाग और विशेष कार्यबल का समन्वय वन्यजीव संरक्षण, कानून-व्यवस्था और पर्यावरण सुरक्षा—तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है। अब आगे यह देखना होगा कि जांच में तस्करी के अन्य सूत्र क्या सामने आते हैं और क्या इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचकर निर्णायक कार्रवाई हो पाती है।

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By डॉ.नवीन जोशी

डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, 'कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन 'नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड' के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।

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