नवीन समाचार, नैनीताल, 16 फरवरी 2026 (HC on WorkCharge Workers)। नैनीताल (Nainital) स्थित उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court) की मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Manoj Kumar Gupta) की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग (Public Works Department-PWD) और सिंचाई विभाग (Irrigation Department) के नियमित व वर्कचार्ज कर्मचारियों की पेंशन पर रोक लगाने संबंधी वित्त विभाग के 16 जनवरी के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय के इस हस्तक्षेप से प्रभावित कर्मचारियों को फिलहाल राहत मिली है।
यह याचिका सिंचाई विभाग के नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी गुलाब सिंह तोमर (Gulab Singh Tomar) ने दायर की। याचिका में कहा गया कि वित्त विभाग के 16 जनवरी के कार्यालय आदेश के तहत वर्ष 2016 के बाद नियमित हुए कर्मचारियों को पेंशन के दायरे से बाहर कर दिया गया।
साथ ही जिन कर्मचारियों को पहले से पेंशन मिल रही थी, उनकी पेंशन भी तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गयी और सेवारत कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन योजना (National Pension System-NPS) से जोड़ने की बात कही गयी।
पूर्व में भी हुई थी न्यायिक कार्यवाही
मामले में शीतकालीन अवकाश के दौरान न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Subhash Upadhyay) की पीठ कुछ कार्मिकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए इसी आदेश पर रोक लगा चुकी थी। हालांकि बाद में वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी (Manoj Kumar Tiwari) की एकलपीठ ने रोक नहीं लगाई थी और सरकार से जवाब मांगा था।
अब मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद आदेश पर रोक लगा दी है।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने वर्ष 2018 में प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Prem Singh vs State of Uttar Pradesh, 2018) मामले में वर्कचार्ज सेवा को पेंशन हेतु जोड़े जाने का निर्देश दिया था।
याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 के उदयराज सिंह बनाम बिहार राज्य (Udayraj Singh vs State of Bihar, 2023) फैसले का आधार लेकर आदेश जारी किया, जबकि बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि तीन न्यायाधीशों की पीठ का पूर्व निर्णय प्रभावी माना जाएगा।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि शासन ने इस महत्वपूर्ण तथ्य की अनदेखी करते हुए पेंशन रोकने का आदेश जारी किया।
न्यायालय का रुख
खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए वित्त विभाग के 16 जनवरी के आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही सरकार से जवाब तलब किया गया है।
अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि राज्य सरकार इस विषय में क्या पक्ष रखती है और कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था पर अंतिम निर्णय क्या होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है फैसला
यह आदेश हजारों वर्कचार्ज और नियमित कर्मचारियों के सेवा अधिकारों से जुड़ा है। यदि अंतिम निर्णय कर्मचारियों के पक्ष में जाता है तो राज्य की पेंशन नीति और वित्तीय दायित्वों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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