EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / کٲشُرКыргызKurdîKʋsaalLëblaŋoлаккулезгиLugandaLingálaລາວلۊری شومالیlüüdidxʷləšucidmadhurâमैथिलीŊmampulliMalagasyKajin M̧ajeļമലയാളംМонголᠮᠠᠨᠵᡠManipuriма̄ньсиဘာသာမန်mooreमराठीမြန်မာ閩南語 / Bân-lâm-gú閩南語(漢字)閩南語(傳統漢字)Bân-lâm-gú (Pe̍h-ōe-jī)Bân-lâm-gú (Tâi-lô)KhoekhoegowabNorsk (bokmål)नेपालीनेपाल भाषाli nihanawdmNorsk (nynorsk)ngiembɔɔnߒߞߏSesotho sa LeboaThok NaathChichewaNzemaଓଡ଼ିଆਪੰਜਾਬੀPiemontèisΠοντιακάⵜⴰⵔⵉⴼⵉⵜTarandineрусскийसंस्कृतсаха тылаᱥᱟᱱᱛᱟᱞᱤ (संताली)सिंधीکوردی خوارگDavvisámegiellaKoyraboro SenniSängöⵜⴰⵛⵍⵃⵉⵜတႆးසිංහලᠰᡞᠪᡝSlovenčinaСрпски / srpskiSesothoSENĆOŦENSundaSvenskaŚlůnskiதமிழ்ತುಳುతెలుగుไทยትግርኛትግሬцӀаӀхна мизSetswanaChiTumbukaTwiⵜⴰⵎⴰⵣⵉⵖⵜудмуртУкраїнськаاردوOʻzbekchaꕙꔤTshiVenḓaVènetoWaaleWolofLikpakpaanlYorùbá中文中文(中国大陆)中文(简体)中文(繁體)中文(香港)中文(澳門)中文(马来西亚)中文(新加坡)中文(臺灣)Help इस समाचार को सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें नवीन समाचार, पिथौरागढ़, 30 अक्तूबर 2023 (Mahila Mudde)। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के चंडाक स्थित सिकड़ानी गांव के योगेश्वर श्रीकृष्ण मंदिर में पहली बार दो महिला पुजारियों की नियुक्ति की गई है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष आचार्य डॉ. पीतांबर अवस्थी ने विधि-विधान से मंजुला अवस्थी को मुख्य पुजारी व सुमन बिष्ट को सहायक पुजारी का दायित्व सौंपा। इस दौरान भजन-कीर्तन के साथ पुजारी मंजुला अवस्थी व सुमन बिष्ट को मंदिर कमेटी की ओर से सम्मानित भी किया गया।मंदिर कमेटी का इस बारे में कहना है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए अधिक व्रत-उपवास रखती हैं। फिर भी उन्हें पुजारी की जिम्मेदारी नहीं दी जाती है। जबकि हमारी सनातन परंपराओं को महिलाएं जीवंत बनाए हुए हैं।वहीं डाॅ. अवस्थी ने कहा कि यह रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए महिला सशक्तिकरण का प्रयास है। ऐसे प्रयास आगे भी करते रहेंगे। यह भी बताया कि मंदिर में सभी धर्मावलंबियों के प्रवेश की अनुमति है। वहीं युवा साहित्यकार और शिक्षक नीरज चंद्र जोशी ने बताया कि पहली बार किसी मंदिर के पुजारी के रूप में महिलाओं को नियुक्त करके मंदिर कमेटी ने नारी सशक्तिकरण की मिसाल कायम की है।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : Mahila Mudde : कुमाऊं मंडल के सभी थानों में नियुक्त होंगी महिलाओं की ‘गौरा शक्ति चीता स्क्वाड’यह भी पढ़ें (Mahila Mudde) : नैनीताल जनपद की दो लड़कियों का नाम लड़कों के रूप में हुआ दर्ज, डीएम ने प्रदान किया प्रमाण पत्र…यह भी पढ़ें (Mahila Mudde) : बड़ा समाचार: महिला आरक्षण पर बाहरी राज्यों की महिला अभ्यर्थियों को सर्वोच्च न्यायालय से नहीं मिली राहत…यह भी पढ़ें : सुबह का सुखद समाचार : उत्तराखंड में ‘घर’ के बाद अब ‘गृह’ विभाग में भी ‘गृह स्वामिनी’ कही जाने वाली महिलाओं का वर्चस्व…यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में महिलाओं को आरक्षण मिलने का रास्ता साफ…..यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार : महिला आरक्षण पर उच्च न्यायालय की रोक पर सुप्रीम रोक….यह भी पढ़ें : शोध छात्र ने छात्राओं को उपलब्ध कराई मासिक धर्म की जानकारी, सैनेटरी पैड भी बांटेयह भी पढ़ें : महिलाओं का सशक्त होना भी लिंग आधारित हिंसा से बचने का उपाय: डॉ. बिष्टयह भी पढ़ें : महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर भगवामय हुई सरोवरनगरी, पर क्यों ?यह भी पढ़ें : सरकार की बड़ी पहल से असौज-कार्तिक के काम के महीनों में पहाड़ की महिलाओं के सिर से उतरा घास कटाई का बोझयह भी पढ़ें : ‘नवीन समाचार’ एक्सक्लूसिव-बिग ब्रेकिंग: राज्य की महिलाओं को आरक्षण के मुद्दे पर हाईकोर्ट से नए आदेशयह भी पढ़ें : उत्तराखंड उच्च न्यायालय का उत्तराखंड सरकार के मूल निवासी आरक्षण को लेकर बड़ा आदेश, शासनादेश पर लगाई रोकयह भी पढ़ें : नैनीताल: ‘मेहंदी रचे मेरे हाथ’ प्रतियोगिता में रूही और मुस्कान ने जीते खिताबयह भी पढ़ें : उत्तराखंड सरकार की राज्य की महिलाओं पर 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की दरियादिली को हाईकोर्ट में चुनौतीयह भी पढ़ें : ग्रामीण महिलाओं को बार-बार उपयोग किए जाने वाले सेनेटरी पैड उपलब्ध कराएयह भी पढ़ें : नैनीताल : महिलाओं को सह खातेदार बनाने की उठी मांग…यह भी पढ़ें : इस बड़े कार्य में पुरुषों से 16 गुना आगे हैं उत्तराखंड की महिलाएंयह भी पढ़ें : वट-पीपल बंधे विवाह बंधन में, गांव वाले बने बारातीLike this:Relatedयह भी पढ़ें : Mahila Mudde : कुमाऊं मंडल के सभी थानों में नियुक्त होंगी महिलाओं की ‘गौरा शक्ति चीता स्क्वाड’-कुमाऊं के 50 बालिका इंटर कॉलेजों को पुलिस थानों ने लिया गोद नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जुलाई 2023। (Mahila Mudde) कुमाऊं परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक डॉ. नीलेश आनंद भरणे ने जनपदों के सभी थानों में नियुक्त महिला चीता-स्पेशल महिला स्क्वाड को “गौरा शक्ति चीता स्क्वाड” का नाम देने और इनका सभी थानो में गठन कर उनके नाम व मोबाईल नम्बर इस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी गौरा शक्ति चीता स्क्वाड को शाम के समय एक घंटा टीम बनाकर महिला अपराधों से संबंधित हॉट स्पाट चिन्हित क्षेत्रों एवं गस्त करने को भी कहा है। कुमाऊं मंडल में पुलिस की ओर से 50 बालिका इंटर कालेजों को गोद लेने की जानकारी दी है। बताया कि इसी वर्ष 20 जून को उन्होंने इस संबंध में निर्देश दिए थे। शुक्रवार को इस संबंध में उन्होंने वीडियो क्रान्फ्रेंस के माध्यम से इस आदेश के अनुपालन की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में जानकारी मिली कि जनपद नैनताल द्वारा 14, ऊधमसिंह नगर द्वारा 15, अल्मोडा द्वारा 7, चम्पावत द्वारा 8 तथा पिथौरागढ व बागेश्वर द्वारा 3-3 विद्यालयों को गोद लिया गया है। इस दौरान उन्होंने जनपदों के महिला दस्तों एवं गौरा शक्ति मॉड्यूल की समीक्षा भी की। ‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से 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धन्यवाद। बताया गया कि कुमाऊं परिक्षेत्र के जनपदों के थानों में अब तक महिला डेस्क को कुल 6171 प्रकरण प्राप्त हुए, इनमें से 3393 प्रकरणों का मौके पर निस्तारण किया गया। इनमें सर्वाधिक जनपद ऊधमसिंह नगर द्वारा 1659 में 859 तथा नैनीताल द्वारा 2051 में 936, अल्मोडा द्वारा 891 में से 740, जनपद पिथौरागढ द्वारा 716 में से 461, जनपद बागेश्वर द्वारा 129 में से 101 तथा जनपद चम्पावत द्वारा 725 में 296 प्रकरणों का महिला हैल्प डैस्क द्वारा निस्तारण किया गया।(डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें सहयोग करें..यहां क्लिक कर हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें। यहां क्लिक कर यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से, हमारे टेलीग्राम पेज से और यहां क्लिक कर हमारे फेसबुक ग्रुप में जुड़ें। हमारे माध्यम से अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें (Mahila Mudde) : नैनीताल जनपद की दो लड़कियों का नाम लड़कों के रूप में हुआ दर्ज, डीएम ने प्रदान किया प्रमाण पत्र…नवीन समाचार, नैनीताल, 5 मार्च 2023। (Mahila Mudde) नैनीताल जनपद की दो लड़कियों को लड़कों का दर्जा मिल गया है। भारत सरकार के ‘नेशनल पोर्टल फॉर ट्रांसजेंडर पर्सन्स’ पर नाम दर्ज होने के बाद डीएम ने दोनों को पहचान पत्र व प्रमाण पत्र सौंप दिए हैं। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी : रात्रि में व्यवसायी की पत्नी की चाकू गोंदकर हत्या, व्यवसायी फरार…उल्लेखनीय हे कि देश में भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से उभयलिंगी व्यक्ति अधिनियम 2019 लागू है। इसके तहत लिंग के विपरीत जीवन जीने वाले युवक-युवतियों को ‘नेशनल पोर्टल फार ट्रांसजेंडर पर्सन्स’ पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इस पोर्टल पर जिले की दो युवतियों ने लड़के का दर्जा पाने के लिए आवेदन किया था। डीएम धीराज गर्ब्याल ने बताया कि आवेदकों को विधेयक की धारा पांच के अधीन पहचान पत्र व प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए हैं। यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार उत्तराखंड : रात्रि में फिर भूकंप के झटके, कई बार घरों से बाहर निकले लोग, आप ने महसूस किये…?इन आवेदनों के जनपद के नोडल अधिकारी-जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने बताया कि पोर्टल पर आवेदन करने के बाद लड़के व लड़कियों के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन किया जाता है, ताकि कोई गलत प्रमाण पत्र न बन सके। लोग इस पोर्टल पर सीधे आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पहचान बदलने वालों के नाम नियमानुसार सार्वजनिक नहीं किए जाते हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें (Mahila Mudde) : बड़ा समाचार: महिला आरक्षण पर बाहरी राज्यों की महिला अभ्यर्थियों को सर्वोच्च न्यायालय से नहीं मिली राहत…नवीन समाचार, नई दिल्ली, 19 फरवरी 2023। (Mahila Mudde) उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा की मेरिट में शामिल करने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय पहुंचीं बाहरी राज्य की महिला अभ्यर्थियों को राहत नहीं मिल सकी है। सर्वोच्च न्यायालय ने ने यह कहकर इस संबंध में दायर एसएलपी यानी विशेष अनुग्रह याचिका का निपटारा कर दिया है कि महिला क्षैतिज आरक्षण के लिए राज्य सरकार अधिनियम बना चुकी है और अधिनियम को दी गई चुनौती पर पहले ही उच्च न्यायालय में मामला चल रहा है। यह भी पढ़ें : शादीशुदा महिला को भारी पड़ी दूसरे धर्म के युवक से दोस्ती, 15 साल की बेटी से दुष्कर्म और 11 साल के बेटे से कुकर्म कर डाला, धर्म परिवर्तन का भी बना रहा दबावयह भी पढ़ें : किसान सुखवंत सिंह प्रकरण में उधम सिंह नगर पुलिस पर बड़ी कार्रवाई, आईटीआई कोतवाली प्रभारी सहित 2 उप निरीक्षक निलंबित और 10 पुलिसकर्मी लाइन हाजिरउल्लेखनीय है कि बाहरी राज्यों की महिला अभ्यर्थियों ने सर्वोच्च न्यायालय में राज्य सरकार की एसएलपी पर सुनवाई के दौरान मुख्य परीक्षा में शामिल होने का अनुरोध किया था। राज्य सरकार बनाम पवित्रा चौहान व अन्य के मामले में एसएलपी पर न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम व न्यायमूर्ति पंकज मित्तल ने सुनवाई की। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश में कहा उच्च न्यायालय ने राज्य की महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पर रोक लगा दी थी। न्यायालय का कहना था कि जिस मुख्य आधार पर उच्च न्यायालय ने अंतरिम रोक लगाई, वह यह थी कि सरकारी आदेश के माध्यम से ऐसा आरक्षण नहीं दिया जा सकता। यह भी पढ़ें : 16 वर्षीय नाबालिग से रात्रि में घर से उठाकर पड़ोसी युवक ने किया दुष्कर्म….राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पैरवी करते हुए उत्तराखंड लोक सेवा (महिलाओं के लिए क्षैतिज आरक्षण) अधिनियम 2022 की प्रति पेश की। बताया कि अधिनियम को राज्यपाल की अनुमति मिल चुकी है। 10 जनवरी को इसका राजपत्रित प्रकाशन भी हो चुका है। इस अधिनियम को उच्च न्यायालय में चुनौती भी दी गई है। इस पर अदालत ने एसएलपी को यह कहकर खारिज कर दिया कि अब इसमें कुछ भी नहीं बचता है। सर्वोच्च न्यायालय में उत्तराखंड सरकार के एडवोकेट ऑन रिकार्ड अभिषेक अतरे ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने एसएलपी के मध्य दखल दिया था, उन्हें न्यायालय ने राहत नहीं दी है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : सुबह का सुखद समाचार : उत्तराखंड में ‘घर’ के बाद अब ‘गृह’ विभाग में भी ‘गृह स्वामिनी’ कही जाने वाली महिलाओं का वर्चस्व…नवीन समाचार, देहरादून, 21 जनवरी 2023। देवभूमि के साथ ‘देवीभूमि’ भी कहे जा रहे उत्तराखंड में ‘गृह स्वामिनी’ कही जाने वाली महिलाएं लगातार सशक्त हो रही हैं। राज्य में महिलाओं को संपत्ति में अधिकार एवं संपत्ति क्रय करने पर स्टांप ड्यूटी में छूट तथा नौकरियों में आरक्षण व महिला अपराधों को रोकने के लिए अनेक विशेष पहलें हुई हैं, और इस तरह महिलाएं घरों में सशक्त हो रही हैं। यह भी पढ़ें : उधार दिए पांच हजार रुपए वापस लेने के ऐवज में पत्नी से की छेड़छाड़, विरोध करने पर की मारपीट…वहीं अब सुखद संयोग है कि राज्य के घर के ही पर्यायवाची ‘गृह’ विभाग में भी अब महिलाओं का दबदबा हो गया है। अपर मुख्य सचिव गृह राधा रतूड़ी, विशेष गृह सचिव रिद्धिम अग्रवाल के बाद अब अपर सचिव के पद पर भी एक महिला अधिकारी की नियुक्ति हो गई है। शासन ने अपर सचिव गृह के पद पर निवेदिता कुकरेती को तैनात कर दिया है। यह भी पढ़ें : पूर्व विधायक के पूर्व नौकर की संदिग्ध परिस्थितियों में पुलिस हिरासत में मौत…उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को पांच अधिकारियों के विभागों में बदलाव किया गया। इनमें अपर सचिव गृह के पद पर निवेदिता कुकरेती के साथ आईटीडीए की जिम्मेदारी अमित सिन्हा से लेकर आईएएस नितिका खंडेलवाल को सौंपी गई है। अमित सिन्हा निदेशक विजिलेंस के पद पर सेवाएं देते रहेंगे। यह भी पढ़ें : प्लॉट दिखाने के बहाने युवती से प्रॉपर्टी डीलर ने किया दुष्कर्म !वहीं, अपर सचिव शहरी विकास हरक सिंह रावत को स्टाफ ऑफिसर अध्यक्ष राजस्व परिषद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इनके अलावा श्याम सिंह राणा को इस जिम्मेदारी से हटाकर अब केवल स्मार्ट सिटी एडिशनल सीईओ की जिम्मेदारी दी गई है। अपर सचिव कर्मेंद्र सिंह की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में महिलाओं को आरक्षण मिलने का रास्ता साफ…..नवीन समाचार, देहरादून, 10 जनवरी 2023। उत्तराखंड की महिलाओं को आरक्षण देने वाले विधेयक को मंगलवार को राज्यपाल की मंजूरी मिल गई है। राजभवन की मंजूरी के साथ ही महिला अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का कानूनी अधिकार मिल गया है। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में 45 वर्षीय अधेड़ की पार्टी के बाद हृदयाघात से मौत…उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान सदन में सर्वसम्मति से पारित 14 बिलों, जिनमें अधिकतर संशोधित विधेयक थे, के साथ महिला आरक्षण बिल को भी राज्यपाल की मंजूरी के लिए 30 नवंबर 2022 राजभवन भेजा था। तब से राजभवन से ज्यादातर विधेयकों को मंजूरी मिल गई, लेकिन महिला क्षैतिज आरक्षण बिल विचाराधीन था। राजभवन ने विधेयक को मंजूरी देने से पहले इसका न्याय और विधि विशेषज्ञों से परीक्षण कराया। इस कारण विधेयक को मंजूरी मिलने में एक महीने का समय लग गया। यह भी पढ़ें : पत्नी ने किया नौकर प्रेमी के प्रेम में ट्रेवल्स व्यवसायी पति की गला घोंटकर हत्या करने का प्रयास, गिरफ्तार…मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले दिनों महिला क्षैतिज आरक्षण कानून के जल्द लागू होने के संकेत दिए थे। राजभवन के सूत्रों के अनुसार राज्यपाल की मंजूरी के साथ विधेयक विधायी विभाग को भेज दिया गया है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार : महिला आरक्षण पर उच्च न्यायालय की रोक पर सुप्रीम रोक….नवीन समाचार, देहरादून, 4 नवंबर 2022। सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार की नौकरियों में उत्तराखंड की महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक पर शुक्रवार को स्टे लगा दिया है, यानी स्थगनादेश दे दिया है। इसके बाद राज्य में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रभावित हुई परीक्षाओं पर एक बार पुनः संशय की स्थिति बन गई है। यह भी पढ़ें : 24 घंटे से पहले हल्द्वानी के कारोबारी पर गोली चलाने वालों के साथ पुलिस की मुठभेड़, एक बदमाश को गोली लगीसर्वोच्च न्यायालय के इस स्थगनादेश पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं। सरकार प्रदेश की महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। बताया कि सरकार की ओर से महिला आरक्षण को यथावत बनाए रखने के लिए अध्यादेश लाने की भी पूरी तैयारी कर ली गई थी। साथ ही हमने उच्च न्यायालय में भी समय से अपील करके प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की थी। यह भी पढ़ें : गजब: पति की मौत के बाद लाचारी में बैंक खाता बंद करने पहुंची मजदूरी करने को मजबूर महिला, बैंक ने थमा दिया 2 लाख का चेकविदित हो कि उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर राज्य की महिलाओं के लिए क्षैतिज आरक्षण वाले शासनादेशों पर रोक लगा दी थी। अदालत की रोक के बाद प्रदेश सरकार पर क्षैतिज आरक्षण को बनाए रखने के लिए दबाव बन गया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में दिन दहाड़े बड़ी वारदात, पुलिस कर्मी की पत्नी की घर में घुसकर हत्यासाथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आश्वस्त किया था कि सरकार महिलाओं के क्षैतिज आरक्षण को बरकरार रखने के लिए कानून बनाएगी और सर्वोच्च न्यायालय में जाएगी। प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में इन दोनों विकल्पों पर सहमति बनीं थी और अध्यादेश लाने का फैसला हुआ था।यह भी पढ़ें : नैनीताल में पिछले दिनों हुई बाइक, टीवी, मंगलसूत्र, लैपटॉप आदि की चोरियों का खुलासामहिला क्षैतिज आरक्षण के लिए प्रदेश मंत्रिमंडल ने भी अध्यादेश लाने पर सहमति दी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अध्यादेश के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कार्मिक व सतर्कता विभाग ने प्रस्ताव विधायी को भेज दिया है। जानकारों का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय में दायर एसएलपी यानी विशेष अनुमति याचिका से पहले अध्यादेश लाने से पैरवी को मजबूती मिल सकती थी। मौजूदा स्थिति में अब राज्य सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में क्षैतिज आरक्षण वाले शासनादेशों के लिए पैरवी करेगी। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : शोध छात्र ने छात्राओं को उपलब्ध कराई मासिक धर्म की जानकारी, सैनेटरी पैड भी बांटेनवीन समाचार, नैनीताल, 12 दिसंबर 2022। अल्मोड़ा की वीरा संस्था की सहायता से शोद्यार्थी आशीष पंत ने सोमवार को नैनीताल जनपद के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज बेतालघाट में छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान स्वास्थ्य एवं साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जागरूकता अभियान आयोजित किया। इस दौरान छात्राओं को माहवारी के बारे में आशीष के शोध कार्य पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाकर माहवारी के दौरान ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष को दिखाया गया एवं जागरूक किया गया। इसके उपरांत छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान प्रयोग किए जाने वाले सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध करवाए गए। यह भी पढ़ें : भारी पड़ा अपनी पत्नी से उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाना, मिली बड़ी सजा…शोधार्थी आशीष ने बताया कि वह पिछले 3 वर्षों से प्रो. इला साह के निर्देशन में इस विषय पर कार्य कर रहे हैं, और इस दौरान विभिन्न संस्थाओं में जाकर बिना किसी सरकारी सहायता के लोगों को जागरूक करने हेतु भी प्रयासरत हैं। पर इस दौरान उन्हें सरकार या किसी भी सरकारी संस्था द्वारा कोई मदद प्रदान नहीं की गयी।उन्होंने सैनिटरी पैड उपलब्ध करवाने के लिए वीरा संस्था का धन्यवाद व्यक्त किया। यह भी पढ़ें : डॉक्टर को पेट दर्द दिखने गई छात्रा, उसने कर दिया दुष्कर्म, , निबंधित, संबद्ध, मुकदमा दर्ज….मुख्य वक्ता डॉ. रवि उप्रेती ने छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़ी एवं इस दौरान स्वास्थ्य के प्रति विशेष ध्यान रखने के संबंध में आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवाई। साथ ही अनियमित मासिक धर्म होने पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की बात कही। कार्यक्रम में वीरा संस्था की ओर से राहुल जोशी, विमला उप्रेती, चंपा जलाल, भगवती बोरा शिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : महिलाओं का सशक्त होना भी लिंग आधारित हिंसा से बचने का उपाय: डॉ. बिष्ट-25 नवंबर से 23 दिसंबर तक चलेगा लिंग आधारित हिंसा के विरुद्ध अभियान नवीन समाचार, नैनीताल, 23 नवंबर 2022। ब्लॉक सभागार भीमताल में बुधवार को 25 नवंबर से 23 दिसंबर तक चलने वाले लिंग आधारित हिंसा के विरुद्ध अभियान के तहत ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में डॉ. बिष्ट ने कहा कि लिंग आधारित हिंसा व्यक्ति के आत्ममूल्य और आत्मसम्मान की भावना को कमजोर करती है। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड ब्रेकिंग: कल की छुट्टी पर आया बड़ा अपडेटयह भी पढ़ें : उत्तराखंड में नई समस्या बने नीले ड्रम, ‘देशी गीजर’ बनाकर हो रही बिजली चोरी, रुड़की ऊर्जा निगम की कार्रवाई में 148 नीले ड्रम बरामद...इसके अलावा उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से अधिक से अधिक आत्मनिर्भर बनने व स्वरोजगार से जुड़ने तथा सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने को कहा। कहा कि महिलाएं स्वयं सशक्त बनेंगी तो लिंग आधारित हिंसा से भी बचेंगी। यह भी पढ़ें : पति को बांधकर विवाहिता के साथ चार युवकों ने किया सामूहिक दुष्कर्म, नाबालिग भतीजी के साथ भी की छेड़छाड़बैठक में प्रधान संगठन की अध्यक्ष हेमा आर्या, प्रधान जया बोरा, राधा कुल्याल, लता पलड़िया, क्षेत्र पंचायत सदस्य अनीता आर्या, कमल गोस्वामी, हर्षिता सनवाल, बबीता मेहर, एमएस अधिकारी, डॉ. नवीन तिवारी, प्रधान धर्मेंद्र रावत, विपिन जंतवाल, नवीन क्वीरा, राजेंद्र कोटलिया आदि उपस्थित रहे। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर भगवामय हुई सरोवरनगरी, पर क्यों ?-रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर शोभायात्रा निकाल दिया नारी सशक्तीकरण का संदेश नवीन समाचार, नैनीताल, 19 नवंबर 2022। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की नैनीताल इकाई ने शनिवार को रानी लक्ष्मीबाई की जयंती के अवसर पर भगवा ध्वजों के साथ शोभा यात्रा का आयोजन किया। शोभायात्रा पंत पार्क मल्लीताल से शुरू होकर तल्लीताल तक निकली। बताया गया कि इस दिन को परिषद पूरे देश में नारी सशक्तिकरण दिवस के रूप में मनाती है। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड: कल 12 की मौत के बाद अब एक और बड़ी दुर्घटना, आधा दर्जन लोग हताहतइस अवसर पर परिषद के नगर अध्यक्ष डॉ. रमेश जोशी ने कहा कि हमारे देश में प्राचीनकाल से ही देवियों की पूजा की जाती है। देश को सशक्त बनाने में महिलाओं की अहम भूमिका रही है। शोभायात्रा में नैनीताल की विधायक सरिता आर्या बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड: सरकारी विद्यालय में भारी मात्रा में जिलेटिन की छड़ों सहित विष्फोटक सामग्री मिली, हड़कंप, बम निरोधक दस्ता बुलाया गयासाथ ही परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अभिषेक मेहरा, नगर मंत्री दिनेश रावत, जिला संगठन मंत्री दीपक रावत, डीएसबी परिसर अध्यक्ष तुषार गोस्वामी, मंत्री उत्कर्ष बिष्ट, नगर मीडिया प्रमुख आशीष कांडपाल, मोहित पंत, शुभम कुमार, भास्कर आर्य, वर्णिका तिवारी, यशोदा बिष्ट, नीरज टनवाल, कारूणिया सावंत, करन अधिकारी, बीसू चंदेल, राहुल तिवारी, हिमांशु भंडारी, भूपेश आर्य व भरत लडवाल आदि शामिल रहे। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : सरकार की बड़ी पहल से असौज-कार्तिक के काम के महीनों में पहाड़ की महिलाओं के सिर से उतरा घास कटाई का बोझ-सरकार से मिल रहे अनुदान का फायदा उठाकर खरीदी घास काटने की मशीन, जो एक लीटर पेट्रोल में करती है 20 महिलाओं के बराबर घास की कटाई नवीन समाचार, चंपावत, 30 अक्तूबर 2022। असौज या आश्विन तथा कार्तिक मास पहाड़ की महिलाओं के कंधों पर भारी बोझ लेकर आता रहा है। असौज में घास काटने में सुबह से शाम तक महिलाएं पालतू मवेशियों के लिए साल भर की घास काटती हैं। घास काटने के बाद सुखाकर उसके लूटे लगाए जाते हैं। यह भी पढ़ें : अचानक शव मिलने से सनसनीकरीब दो माह तक महिलाएं व बेटियां धूप में घास काटती हैं तो इससे उनको अत्यधिक श्रम करना होता है। मगर अबकी बार विकास खंड स्तर पर घास काटने वाली मशीनों ने महिलाओं के जीवन को आसान बना दिया तो काम का बोझ भी एक तिहाई हो गया है। यह बोझ कम हुआ है घास काटने की मशीन से। यह भी पढ़ें : मात्र 2800 रुपए पर भी टपकी रजिस्ट्रार कानूनगो की लार, रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार…चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत गंगनौला की प्रधान कमला जोशी व पूर्व प्रधान ललित मोहन जोशी के प्रयासों ने ग्राम पंचायत के तोक गांव चनोड़ा, गल्लागांव, रुपदे, अनुसूचित बस्ती बचकड़िया, गंगनौला की महिलाओं के जीवन में नया सवेरा आया है। यह भी पढ़ें : दो बच्चों की मां को तीन बच्चों के पिता मकान मालिक से हुआ प्यार, फिर जो हुआ….पूर्व प्रधान ललित ने बताया कि उन्हें पता चला कि ब्लॉक के माध्यम से समूहों को 90 प्रतिशत अनुदान में घास काटने की मशीन मिल रही है। जुलाई माह में उन्होंने भूमिधर किसानों के नाम से दो समूह बनाये। इसके बाद समूहों के माध्यम से सब्सिडी के बाद घास काटने की प्रति मशीन के लिए चार हजार और ट्रेक्टर के लिए 15 या 19 हजार जमा कराकर मशीनें खरीदी गईं। यह भी पढ़ें : दिल्ली की कुमाऊं गली में रहने वाले 17 वर्षीय किशोर की बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर चाकुओं से गोंदकर हत्यामशीन मिलने के बाद घास कटाई शुरू हुई तो महिलाओं के काम का बोझ 25 प्रतिशत से भी कम रह गया। हाथ से चलने वाली मशीन को पुरुष चलाने लगे तो एक दिन में 20 महिलाओं के बराबर घास कटने लगी। अब तक ग्राम पंचायत में 40 मशीनें और 5 ट्रेक्टर आ गए हैं। यह भी पढ़ें : नैनीताल : पत्नी रूठ कर मायके आई तो पति ने कर दिया हंगामा, गिरफ्तार…एक लीटर पेट्रोल से 20 महिलाओं की बराबरी घास काटने की मशीन एक लीटर पेट्रोल की कटाई से एक दिन में 200 से अधिक तक घास की गठिया बन जाती हैं। जो 20 महिलाओं के बराबर श्रम है। गांव की लक्ष्मी जोशी, अनिता, भैरवी राय, कविता जोशी, उर्मिला आदि महिलाओं का कहना है कि इस मशीन ने उनके काम का बोझ बेहद कम हो गया है। पुरुष ही घास काटते हैं, उन्हें सिर्फ समेटना पड़ता है। जिन घरों में मशीन चलाने के लिए पुरूष नहीं हैं, आपसी सहभागिता से घास काटी जा रही है। इससे पहले असौज माह हमारे लिए बेहद कष्टकारी होता था। अब घास के साथ खेत जुताई के लिए बैल पालने की जरूरत नहीं है। इससे बंजर खेतों को भी आबाद करने का अवसर मिल गया है। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड-बड़ा समाचार : कूड़ा बीनने वाली निकली विदेशी आतंकी की पत्नीचनोड़ा के योगेश जोशी ने कहा, पहले घास काटने में घर की महिलाओं को एक माह तक व्यस्त रहता पड़ता था, लेकिन अब उनका काम सीमित हो गया। जो पुरुष पहले कभी घास के खेतों तक नहीं जाते थे, अब मशीन लेकर घास काटकर महिलाओं के काम को कर रहे हैं। गंगनौला के साथ ही पास के गांव भूमलाई, ईड़ाकोट, कोयाटी में भी घास काटने की मशीन ने कामकाजी महिलाओं के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : ‘नवीन समाचार’ एक्सक्लूसिव-बिग ब्रेकिंग: राज्य की महिलाओं को आरक्षण के मुद्दे पर हाईकोर्ट से नए आदेशडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अगस्त 2022। राज्य की महिलाओं को उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में आरक्षण देने के मुद्दे पर पिछली सुनवाई पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के वर्ष 2006 के संबंधित शासनादेश पर रोक लगा दी थी, और याचिकाकर्ता महिला अभ्यर्थियों को भी लाभ देने को कहा था।इधर मंगलवार को इसी मामले से संबंधित दो अन्य महिला अभ्यर्थियों की याचिका पर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से महिला अभ्यर्थियों की मैरिट लिस्ट यानी वरीयता सूची को संशोधित करने और उत्तराखंड मूल की महिलाओं को गैर आरक्षित श्रेणी में डालकर सामान्य वर्ग की महिलाओं की ‘कट ऑफ’ अंक जारी करने को कहा है। इस मामले में सरकार से दो सप्ताह में प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने को भी कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 11 अक्टूबर को होगी।गौरतलब है कि इस आदेश के बाद सामान्य महिलाओं की नई वरीयता सूची जारी हो जाने से सभी पात्र महिलाओं को उच्च न्यायालय के आदेश का लाभ मिलेगा, जबकि इससे पहले केवल याचिकाकर्ताओं को ही लाभ देकर मुख्य परीक्षा में शामिल करने के आदेश जारी हुए थे। आज का आदेश रिचा शाही व प्राची रश्मि की याचिकाओं पर आया है। उनकी ओर से अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने पैरवी की। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : उत्तराखंड उच्च न्यायालय का उत्तराखंड सरकार के मूल निवासी आरक्षण को लेकर बड़ा आदेश, शासनादेश पर लगाई रोक-प्रतियोगी परीक्षाओं में राज्य की मूल निवासी महिलाओं को दिया गया था 30 प्रतिशत आरक्षण डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अगस्त 2022। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने उत्तराखंड सरकार के गत 24 जुलाई के राज्य की मूल निवासी महिलाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण देने के शासनादेश पर रोक लगा दी है और याचिकाकर्ताओं को मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है।उल्लेखनीय है कि पवित्रा चौहान और अन्य याचिकाकर्ताओं ने गत 24 जुलाई के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उत्तराखंड राज्य की मूल निवासी महिलाओं को राज्य सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया था। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता डॉ. कार्तिकेय हरि गुप्ता ने न्यायालय को बताया कि उन्होंने न्यायालय के समक्ष अनुरोध किया कि राज्य सरकार को मूल निवास आधारित आरक्षण प्रदान करने की कोई शक्ति नहीं है। भारत का संविधान केवल संसद के एक अधिनियम द्वारा मूल निवास के आधार पर आरक्षण की अनुमति देता है।राज्य सरकार का गत 24 जुलाई का आदेश भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 का उल्लंघन है। सभी याचिकाकर्ताओं ने प्रारंभिक परीक्षा में उत्तराखंड की महिलाओं के लिए निर्धारित कट ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। सभी याचिकाकर्ता महिलाएं हैं और उन्हें उत्तराखंड राज्य द्वारा प्रतिकूल भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है, जो उत्तराखंड से अधिक अंक होने के बावजूद उन्हें विफल कर देता है। इस आधार पर न्यायालय ने 24 जुलाई के शासनादेश पर रोक लगा दी और याचिकाकर्ताओं को मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति भी दे दी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : नैनीताल: ‘मेहंदी रचे मेरे हाथ’ प्रतियोगिता में रूही और मुस्कान ने जीते खिताबडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अगस्त 2022। नगर की महिलाओं के संगठन लेक सिटी वेलफेयर क्लब द्वारा ‘मेहंदी रचे मेरे हाथ’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। आयोजन में जूनियर वर्ग में रूही ओर सीनियर वर्ग में मुस्कान ने खिताब जीता। जूनियर वर्ग में मेहतसा द्वितीय ओर नेहा तृतीय रहे जबकि सीनियर वर्ग में फिजा द्वितीय और रुकसाना तृतीय रहे। दिव्या, काजल और सकीना को सांत्वना पुरस्कार दिये गये।इससे पूर्व विधायक सरिता आर्या ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रतियोगिता में जूनियर ओर सीनियर ग्रुप में 125 से अधिक बच्चो ने प्रतिभाग किया। सोनू बाफिला और सरस्वती बिष्ट निर्णायक की भूमिका में रहे। क्लब की अध्यक्ष रानी साह, दीपिका बिनवाल दीपा रौतेला, सोनू साह, हेमा भट्ट, प्रेमा अधिकारी, विनीता पांडे, आभा साह, नीरू साह, गीता साह, रमा भट्ट, सीमा सेठ, आशा पांडे व मधुमिता आदि उपस्थित रहे। संचालन मीनाक्षी कीर्ति ने किया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : 'टीम इंडिया' में उत्तराखंड मूल के एक और युवा खिलाड़ी ‘बेबी एबी’-आयुष बड़ोनी की एंट्री, मौका मिलने-खेलने और गंभीर के पूर्व बयान पर चर्चा तेजयह भी पढ़ें : उत्तराखंड सरकार की राज्य की महिलाओं पर 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की दरियादिली को हाईकोर्ट में चुनौतीडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 6 जुलाई 2022। उत्तराखंड राज्य लोक सेवा आयोग के द्वारा डिप्टी कलक्टर सहित अन्य पदों के लिए हुई उत्तराखंड सम्मिलित सिविल अधीनस्थ सेवा परीक्षा में उत्तराखंड मूल की महिलाओं को अनारक्षित श्रेणी में 30 प्रतिशत आरक्षण देने को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।इस परीक्षा के लिए आवेदन करने वाली हरियाणा व उत्तर प्रदेश आदि की महिला अभ्यर्थियों ने उत्तराखंड सरकार के उत्तराखंड मूल की महिलाओं को क्षैतिज आरक्षण देने को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की है। उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार व राज्य लोक सेवा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी।बुधवार को हरियाणा के भिवानी निवासी पवित्रा चौहान व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने यह आदेश दिए। याचिका में कहा गया है कि आयोग ने 31 विभागों के 224 रिक्तियों के लिए पिछले साल दस अगस्त को विज्ञापन जारी किया था। इधर 26 मई 2022 को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम आया। परीक्षा में अनारक्षित श्रेणी की दो कट आफ लिस्ट निकाली गई। उत्तराखंड मूल की महिला अभ्यर्थियों की कट आफ 79 थी, जबकि याचिकाकर्ता महिलाओं का कहना था कि उनके अंक 79 से अधिक थे, लेकिन उन्हें अयोग्य करार दे दिया गया।याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने अदालत को बताया कि 18 जुलाई 2001 और 24 जुलाई 2006 के शासनादेश के अनुसार, उत्तराखंड मूल की महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है, जो असंवैधानिक है। संविधान के अनुच्छेद-16 के अनुसार आवास के आधार पर कोई राज्य आरक्षण नहीं दे सकता, यह अधिकार केवल संसद को है। राज्य केवल आर्थिक रूप से कमजोर व पिछले तबके को आरक्षण दे सकता है। कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद राज्य सरकार व राज्य लोक सेवा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : ग्रामीण महिलाओं को बार-बार उपयोग किए जाने वाले सेनेटरी पैड उपलब्ध कराएडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 22 मई 2022। नगर के आशा फाउंडेशन संस्था की ओर से रविवार को जिला मुख्यालय के निकटवर्ती ग्राम खमारी में महिलाओं को उनके स्वास्थ्य एवं साफ-सफाई, स्तन, बच्चेदान व मुंह के कैंसर तथा सेनेटरी पैड के प्रयोग आदि के प्रति जागरूक किया गया। संस्था की अध्यक्ष आशा शर्मा ने कहा कि संस्था का प्रयास रहता है कि धरातल पर पहुंचकर समस्याओं को जानें और उनका समाधान उपलब्ध कराएं।इस दौरान उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को पुनः धो व सुखाकर ढाई से तीन वर्ष तक उपयोग किये जा सकने योग्य सेनेटरी पैड एवं पैंटी भी उपलब्ध कराए। इस पहल पर ग्राम प्रधान मंजू बुधलाकोटीने संस्था का आभार जताया। आयोजन में स्थानीय आशा कार्यकत्री नीमा जोशी का भी सहयोग रहा। आयोजन में संस्था की मुन्नी तिवारी, ईशा साह, डॉ. गीतिका गंगोला, नीलू एल्हेंस, मीनाक्षी कीर्ति, हेमंत बिष्ट, संभव शर्मा आदि भी उपस्थित रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : नैनीताल : महिलाओं को सह खातेदार बनाने की उठी मांग…-भीमताल से कांग्रेस के दावेदार बिष्ट ने महिलाओं को लेकर किया प्रदर्शनडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 16 नवंबर 2021। एक दिन पहले ही कांग्रेस के विधानसभा पर्यवेक्षक के समक्ष भीमताल सीट से दावेदारी करते हुए गोपाल बिष्ट ने मंगलवार को मुख्यालय के महिलाओं को संपत्ति में सहखातेदार बनाने की मांग पर ग्रामीण महिलाओं को साथ लेकर ताकत दिखाई। उन्होंने पत्नी-जिला पंचायत सदस्य पूनम बिष्ट के साथ क्षेत्र की ग्रामीण महिलाओं को लेकर यूपी जमीदारी अधिनियम 1950 में हुए संशोधन के अनुरूप अब तक महिलाओं को सह खातेदार बनाए जाने को लेकर तल्लीताल गांधी मूर्ति से जिला कलक्ट्रेट तक जुलूस निकाला और जिलाधिकारी को ज्ञापन सोंपा।ज्ञापन के माध्यम से कहा गया कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकांश पुरुष सरकारी या निजी सेवाओं में अन्य प्रदेशों में कार्यरत हैं, जबकि गांवों मंे महिलाएं ही रहती हैं। लेकिन भूमि-संपत्ति पर पुरुषों का अधिकार होने के कारण महिलाएं स्वरोजगार-उद्यम करने के लिए वित्तीय संस्थानों से ऋण आदि लेने में असमर्थ रहती हैं। इस अधिनियम में 31 मई 2021 में हुए संशोधन के माध्यम से धारा 3, 130 क एवं 171 का अंतःस्थापन कर दिया गया है, किंतु आज तक इसे लागू नहीं किया जा सका है। इसे लागू किये जाने से जमीन की खरीद-फरोख्त के साथ गांवों में प्रचलित शराब पर भी लगाम लग सकेगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : इस बड़े कार्य में पुरुषों से 16 गुना आगे हैं उत्तराखंड की महिलाएं-राज्य में महिलाओं के मुकाबले पुरुष नशबंदी महज 6 फीसद नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जनवरी 2019। उत्तराखंड में महिला और पुरुष नसबंदी में जमीन-आसमान का अंतर होने का बड़ा खुलासा हुआ है। नवंबर 2018 में राज्य बनने के बाद से अब तक 4,79,513 महिलाओं की और केवल 29,801 पुरुषों की नसबंदी हुई है। दोनों आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चलता है कि महिलाओं की तुलना में केवल 6.21 फीसद पुरुषों के द्वारा ही नसबंदी कराई गयी है। इसे इस तरह भी कह सकते हैं कि राज्य की महिलाएं परिवार नियोजन में नसबंदी का स्थाई तरीका अपनाने में पुरुषों से 16 गुना से भी अधिक आगे हैं। जबकि आबादी, जागरूकता सहित अन्य सभी अन्य क्षेत्रों में पुरुष महिलाओं से कहीं आगे बताये जाते हैं। यह खुलासा जनपद के सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना से हुआ है। सूचना के अधिकार में विभाग द्वारा न दी गयी जानकारी से इस स्थिति का बड़ा कारण भी स्पष्ट होता है कि विभाग इस गंभीर विषय में कितना गैरजिम्मेदार है। विभाग के पास मुख्यालय स्तर पर नसबंदी में खर्च हुई धनराशि के आंकड़े ही उपलब्ध नहीं हैं। राज्य बनने के बाद से अब तक परिवार नियोजन में कितने कर्मचारियों को कितनी धनराशि दी गयी है, इस प्रश्न पर निदेशालय का सूचना के अधिकार के तहत जवाब है-वांछित सूचना राज्य मुख्यालय में धारित नहीं है। सूचना के लिए पृथक-पृथक जनपदों के लोक सूचना अधिकारियों से आवेदन करें। यानी आवेदक से अनावश्यक तौर पर अतिरिक्त खर्च करने को भी कहा जा रहा है। इसके अतिरिक्त यह बताया गया है कि पुरुष एवं महिला दोनों की नसबंदी पर करीब बराबर धनराशि दी जाती है। अलबत्ता नसबंदी करने वाले पुरुष को 2000 एवं महिला को 1400, जबकि आशा कार्यकत्रियों को पुरुषों को नसबंदी करने के लिए प्रोत्साहित करने वाली 300 व महिलाओं को प्रोत्साहित करने पर 200 रुपए प्रोत्साहन के लिए दिये जाते हैं। जबकि एक पुरुष की नसबंदी करने पर विभागीय स्तर पर 2700 एवं महिला की नसबंदी करने पर 2000 रुपये खर्च होते हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यह भी पढ़ें : वट-पीपल बंधे विवाह बंधन में, गांव वाले बने बारातीधूमधाम से हुआ बरगद व पीपल के पेड़ों का विवाहहल्द्वानी रोड चील चक्कर के पास स्थित शिवालय में हुआ आयोजनपुरानी चुंगी से बैंड बाजे के साथ निकली बारात, कुमाउनी परिधानों में ताकुला व रूसी की महिलाओं ने निकाली कलशयात्रामानव स्वरूप में किये गये विवाह संस्कार के साथ इन्हें कभी न काटे जाने का के संकल्प के साथ यह विवाह पेड़-पौधों के संरक्षण की अनूठी पहल भी हैबरगद एवं पीपल के विवाह समारोह में शगुन आखर, मंगलगान गाती महिलाएं।नैनीताल। जी हां, धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध देवभूमि उत्तराखंड में युवा वट यानी बरगद और पीपल के वृक्षों ने आपस में ब्याह रचा लिया है। नगर के समीपवर्ती हल्द्वानी रोड चील चक्कर के पास स्थित शिवालय में लोग एक अनोखे विवाह समारोह के साक्षी बने। यह विवाह था मंदिर में लगे करीब 6 वर्ष की उम्र के वर के रूप में पीपल एवं करीब 4 वर्ष के कन्या के रूप में बट यानी बरगद के वृक्षों के बीच। 11 फ़रवरी को आयोजित हुए इस अनोखे विवाह में बाराती बने ताकुला और रूसी गांव के लोग, जिन्होंने न केवल बैंड बाजे पर युवक-युवतियों, बच्चों ने कुमाउनी नृत्य के साथ पुरानी चुंगी से मंदिर तक बारात निकाली तथा महिलाओं ने पारंपरिक कुमाउनी परिधानों में कलश यात्रा निकाली, वहीं हल्द्वानी मार्ग से गुजरते लोगों, सैलानियो जिसने भी इस अनूठे विवाह के बारे में सुना, ठिठक गया। इस प्रकार सैकड़ो लोग इस अनूठे विवाह के साक्षी बने। खास बात यह भी है कि इस धार्मिक आयोजन के बाद बरगद व पीपल के मंदिर में लगे धार्मिक आयोजनों, पूजा आदि के योग्य हो गये हैं, तथा इस प्रकार इन्हें मानव स्वरूप में किये गये विवाह संस्कार के साथ कभी न काटे जाने का संकल्प भी लिया गया है, जिसके साथ यह विवाह आयोजन पेड़-पौधों के संरक्षण का भी एक उपक्रम है।यह भी पढ़ें : गौरा-महेश को बेटी-जवांई के रूप में विवाह-बंधन में बांधने का पर्व: सातूं-आठूं (गंवरा या गमरा) कुछ अंश : गौरा से यहां की पर्वत पुत्रियों ने बेटी का रिश्ता बना लिया हैं, तो देवों के देव जगत्पिता महादेव का उनसे विवाह कराकर वह उनसे जवांई यानी दामाद का रिश्ता बना लेती हैं। यहां बकायदा वर्षाकालीन भाद्रपद मास में अमुक्ताभरण सप्तमी को सातूं, और दूर्बाष्टमी को आठूं का लोकपर्व मना कर (गंवरा या गमरा) गौरा-पार्वती…बारात में बकायदा कुमाउनी विवाहों की धूलिअर्घ्य, शगुन आंखर व मंगलगान गाने, कन्या दान व फेरे सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान एवं भोज का आयोजन हुआ। वर पीपल के माता-पिता की भूमिका दीपा जोशी व पूरन जोशी ने, जबकि जबकि कन्या बरगद के माता पिता की भूमिका जानकी जोशी व सतीश जोशी ने निभा। आचार्य कैलाश चंद्र सुयाल ने मंत्रोच्चारण के साथ विवाह की सभी रस्में पूरी कराईं। आयोजन में नीरज जोशी, पान सिंह खनी, कैलाश जोशी, भगवती सुयाल, पान सिंह परिहार, अमन जोशी, गोविंद सिंह, चन्दन सिंह, हितेश, भाष्कर, चेतन, महेंद्र रावत, देवेश मेहरा, नवीन शर्मा, पान सिंह सिजवाली, महेश जोशी, विशाल व चन्दन बिष्ट सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने भागीदारी की।विवाह आयोजन के आचार्य पंडित कैलाश चन्द्र सुयाल ने बताया की उम्र में बड़े वृक्ष को वर एवं छोटे की कन्या के रूप में प्रतिष्ठा की जाती है। इसके बाद एक व्यक्ति वर एवं दूसरे कन्या के पिता के रूप में आयोजन को संपन्न कराते हैं, बाकायदा कन्या के पिता कन्यादान की परम्परा का निर्वाह भी करते हैं। यह पूरा आयोजन प्रकृति के अंगों को मानव स्वरुप में संरक्षित करने की भी पहल है। बरगद और पीपल के पेड़ों को काटे जाने की धार्मिक मनाही भी है।इस आयोजन के लिए क्षेत्रवासी पखवाड़े भर पूर्व से ही पूर्ण विधि-विधान के साथ इस आयोजन की तैयारियों में उत्साहपूर्वक जुटे थे। नैनीताल के निकटवर्ती गांधी ग्राम ताकुला के युवा सामाजिक कार्यकर्ता नीरज कुमार जोशी ने बताया कि क्षेत्र में इस तरह का आयोजन पहली बार किया गया। आयोजन की तैयारियों में आदि ग्रामीण जुटे हुए हैं।बरगद एवं पीपल का धार्मिक महत्व उल्लेखनीय है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद एवं पीपल के वृक्षों का धार्मिक महत्व व पर्यावरण की दृष्टि से विशेष महत्व है। बरगद को ब्रह्मा समान माना जाता है। वट-सावित्री सहित अनेक व्रत व त्यौहारों में वटवृक्ष की पूजा की जाती है। वहीं पीपल के वृक्ष में देवताओं का वास बताया जाता है। गीता में भगवान कृष्ण ने पीपल को स्वयं अपना स्वरूप बताया है। जबकि स्कंदपुराण में पीपल की विशेषता और उसके धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए इसके मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में हरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत देवों का निवास बताया गया है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मनुश्य के अंतिम संस्कार पीपल के वृक्ष के नीचे किए जाते हैं ताकि आत्मा को मुक्ति मिले और वह बिना किसी भटकाव के अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच जाए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationLand matters : हल्द्वानी में 100-500 रुपये में बाहरी लोगों को बेची गयी सरकारी भूमि, हाईन्यायालय में पेश किये गये सबूत, न्यायालय ने सरकार से 10 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट… कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारी ने महिला कर्मी से की छेड़छाड़ (Chhedchhad), विरोध करने पर दी नौकरी से निकालने व जान से मारने की धमकी !
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