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ब्लॉक प्रमुख छोटा कैलाश को कैलाश यात्रा के मार्ग से जोड़ने का करेंगे प्रयास

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       नवीन समाचार, नैनीताल, 21 मार्च 2021। भीमताल विकास खंड के क्षेत्र पंचायत प्रमुख यानी ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट ने जनपद के छोटा कैलाश धाम को आदि कैलाश व कैलाश मानसरोवर की यात्रा से जोड़ने के लिए शासन से पत्राचार करने की बात कही है। साथ ही उन्होंने छोटा कैलाश धाम में एक परिक्रमा […]

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न्याय देवता के चितई ग्वेलज्यू मंदिर के मामले में हाईकोर्ट ने निर्णय लेने से किया इंकार, निचली अदालत को भेजा अधिकार का मामला..

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       नवीन समाचार, नैनीताल, 19 नवम्बर 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में न्याय के देवता के रूप में प्रसिद्ध ग्वेलज्यू के चितई अल्मोड़ा स्थित मंदिर के प्रबंधन को लेकर जनहित याचिका व पुनर्विचार याचिका में खुद कोई निर्णय लेने से इंकार करते हुए सिविल न्यायालय अल्मोड़ा को मामले में उपासना से संबंधित अधिकार के […]

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देखें पहली डिजिटल कुमाउनी रामलीला…

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       देखें 7वें दिन की पहली डिजिटल कुमाउनी रामलीला : देखें छठे दिन की पहली डिजिटल कुमाउनी रामलीला : देखें पांचवे दिन की पहली डिजिटल कुमाउनी रामलीला :  देखें चौथे दिन की पहली डिजिटल कुमाउनी रामलीला : देखें तीसरे दिन की पहली डिजिटल कुमाउनी रामलीला :  देखें दूसरे दिन की पहली डिजिटल कुमाउनी रामलीला : देखें पहले दिन […]

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नैनीताल के हरदा बाबा-अमेरिका के बाबा हरिदास

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       सरोवरनगरी नैनीताल का साधु-संतों से सदियों से, वस्तुतः अपनी स्थापना से ही अटूट रिस्ता रहा है। इस नगर का पौराणिक नाम ‘त्रिऋषि सरोवर’ ही इसलिये है, क्योंकि इसकी स्थापना सप्तऋषियों में गिने जाने वाले तीन ऋषियों (लंकापति रावण के पितामह महर्षि पुलस्त्य के साथ ब्रह्मा पुत्र अत्रि व पुलह) ने की थी। आगे भी […]

ऐपण : उत्तराखण्ड की लोक चित्रकला

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       प्रमोद प्रसाद, इतिहास विद्यार्थी, नैनीताल। ऐपण या अल्पना एक लोक चित्रकला है। जिसका कुमाऊँ के घरों में एक विशेष स्थान है। ये उत्तराखण्ड की एक परम्परागत लोक चित्रकला है। यह चित्रकला उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र से सम्बन्धित है। ऐपण शब्द संस्कृत के शब्द अर्पण से व्युत्पादित है। ऐपण का वास्तविक अर्थ है लिखायी या […]

इस बड़े कार्य में पुरुषों से 16 गुना आगे हैं उत्तराखंड की महिलाएं

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       -राज्य में महिलाओं के मुकाबले पुरुष नशबंदी महज 6 फीसद नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जनवरी 2019। उत्तराखंड में महिला और पुरुष नसबंदी में जमीन-आसमान का अंतर होने का बड़ा खुलासा हुआ है। नवंबर 2018 में राज्य बनने के बाद से अब तक 4,79,513 महिलाओं की और केवल 29,801 पुरुषों की नसबंदी हुई है। दोनों […]

जागेश्वर मंदिर समूह बना कुमाऊं विवि का आधिकारिक प्रतीक

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       नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने सातवीं से 14वीं शताब्दी में बने देश के 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक, 125 मंदिरों के जागेश्वर मंदिर समूह को अपना आधिकारिक प्रतीक चुन लिया है। विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने बताया कि काफी सोच-विचार के बाद कुमाऊं के सबसे बड़े मंदिर समूह व पहचान के रूप में […]

आस्था के साथ ही सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर भी हैं ‘जागर’

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       इस तरह ‘जागर’ के दौरान पारलौकिक शक्तियों के वसीभूत होकर झूमते हें ‘डंगरिये’ कुमाऊं के जटिल भौगोलिक परिस्थितियों वाले दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में संगीत की मौखिक परम्पराओं के अनेक विशिष्ट रूप प्रचलित हैं। उत्तराखंड के इस अंचल की संस्कृति में बहुत गहरे तक बैठी प्रकृति यहां की लोक संस्कृति के अन्य अंगों की तरह […]

राजुला-मालूशाही और उत्तराखंड की रक्तहीन क्रांति की धरती, कुमाऊं की काशी-बागेश्वर

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       पौराणिक काल से ऋषि-मुनियों की स्वयं देवाधिदेव महादेव को हिमालय पुत्री पार्वती के साथ धरती पर उतरने के लिए मजबूर करने वाले तप की स्थली बागेश्वर कूर्मांचल-कुमाऊं मंडल का एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है। नीलेश्वर और भीलेश्वर नाम के दो पर्वतों की उपत्यका में सरयू, गोमती व विलुप्त मानी जाने वाली सरस्वती […]

प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ सदृश रामायण-महाभारतकालीन द्रोणगिरि वैष्णवी शक्तिपीठ दूनागिरि

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       हिमालय की गोद में बसे आध्यात्मिक महिमा से मंडित और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दूनागिरि शक्तिपीठ का अपार महात्म्य है। जम्मू के प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ की तरह ही यहां भी वैष्णवी माता की स्वयंभू सिद्ध पिंडि विग्रह मौजूद हैं। कहते हैं कि इन दोनों स्थानों पर अन्य शक्तिपीठों की तरह माता के […]

भगवान राम की नगरी के समीप माता सीता का वन ‘सीतावनी’

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       देवभूमि कुमाऊं-उत्तराखंड में रामायण में सतयुग, द्वापर से लेकर त्रेता युग से जुड़े अनेकों स्थान मिलते हैं। इन्हीं में से एक है त्रेता युग में भगवान राम की धर्मपत्नी माता सीता के निर्वासन काल का आश्रय स्थल रहा वन क्षेत्र-सीतावनी, जो अपनी शांति, प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ मनुष्य को गहरी आध्यात्मिकता के साथ मानो उसी […]

सच्चा न्याय दिलाने वाली माता कोटगाड़ी: जहां कालिया नाग को भी मिला था अभयदान

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       नवीन जोशी, नैनीताल। कण-कण में देवत्व के लिए प्रसिद्ध देवभूमि उत्तराखंड में कोटगाड़ी (कोकिला देवी) नाम की एक ऐसी देवी हैं, जिनके दरबार में कोर्ट सहित हर दर से मायूस हो चुके लोग आकर अथवा बिना आए, कहीं से भी उनका नाम लेकर न्याय की गुहार लगाते (स्थानीय भाषा में विरोधी के खिलाफ ‘घात’ […]

भद्रकालीः जहां वैष्णो देवी की तरह त्रि-पिंडी स्वरूप में साथ विराजती हैं माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली

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       ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।। कहते हैं आदि-अनादि काल में सृष्टि की रचना के समय आदि शक्ति ने त्रिदेवों-ब्रह्मा, विष्णु व महेश के साथ उनकी शक्तियों-सृष्टि का पालन व ज्ञान प्रदान करने वाली ब्रह्माणी यानी माता सरस्वती, पालन करने वाली वैष्णवी यानी माता लक्ष्मी और बुरी […]

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