EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / کٲشُرКыргызKurdîKʋsaalLëblaŋoлаккулезгиLugandaLingálaລາວلۊری شومالیlüüdidxʷləšucidmadhurâमैथिलीŊmampulliMalagasyKajin M̧ajeļമലയാളംМонголᠮᠠᠨᠵᡠManipuriма̄ньсиဘာသာမန်mooreमराठीမြန်မာ閩南語 / Bân-lâm-gú閩南語(漢字)閩南語(傳統漢字)Bân-lâm-gú (Pe̍h-ōe-jī)Bân-lâm-gú (Tâi-lô)KhoekhoegowabNorsk (bokmål)नेपालीनेपाल भाषाli nihanawdmNorsk (nynorsk)ngiembɔɔnߒߞߏSesotho sa LeboaThok NaathChichewaNzemaଓଡ଼ିଆਪੰਜਾਬੀPiemontèisΠοντιακάⵜⴰⵔⵉⴼⵉⵜTarandineрусскийसंस्कृतсаха тылаᱥᱟᱱᱛᱟᱞᱤ (संताली)सिंधीکوردی خوارگDavvisámegiellaKoyraboro SenniSängöⵜⴰⵛⵍⵃⵉⵜတႆးසිංහලᠰᡞᠪᡝSlovenčinaСрпски / srpskiSesothoSENĆOŦENSundaSvenskaŚlůnskiதமிழ்ತುಳುతెలుగుไทยትግርኛትግሬцӀаӀхна мизSetswanaChiTumbukaTwiⵜⴰⵎⴰⵣⵉⵖⵜудмуртУкраїнськаاردوOʻzbekchaꕙꔤTshiVenḓaVènetoWaaleWolofLikpakpaanlYorùbá中文中文(中国大陆)中文(简体)中文(繁體)中文(香港)中文(澳門)中文(马来西亚)中文(新加坡)中文(臺灣)Help इस समाचार को सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें नवीन समाचार, देहरादून, 30 मार्च 2023 (Bad news for Rahul Gandhi from Uttarakhand, case filed)। लगता है इन दिनों कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के सितारे गर्दिश में हैं। लंदन में कथित विवादित टिप्पणी के बाद सांसदी जाने के साथ घर भी खाली करने की समस्या से घिरे राहुल पर उत्तराखंड में भी मुकदमा दर्ज हो गया है। इससे आने वाले दिनों में उनके लिए मुश्किलें और बढ़ सकती है। यह भी पढ़ें : रामनवमी पर बड़ा हादसा, 25 लोग मंदिर में 50 फिट की ऊंचाई से पानी में गिरे…राहुल पर उत्तराखंड में आरएसएस पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में मानहानि के आरोप में अभियोग दर्ज किया गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय शिव सिंह की अदालत ने मामले को प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज कर अग्रिम सुनवाई के लिए 12 अप्रैल 2023 की तिथि तय की है। दायर वाद में शिकायतकर्ता कमल भदौरिया ने कहा है कि आरएसएस से देशवासियों की भावनाएं जुड़ी है। इसके बावजूद राहुल गांधी ने 9 जनवरी 2023 में कुरुक्षेत्र अंबाला में आयोजित सभा में आरएसएस के प्रति अभद्र टिप्पणी की। यह भी पढ़ें : पति के बाहर जाने पर पत्नी ने बुला लिया प्रेमी को, पति लौट आया तो बता दिया बदमाश, फिर मोबाइल से बचा प्रेमी और खुली पूरी कहानी…नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि भाजपा सरकार देश के जिम्मेदार संगठनों का दुरुपयोग और लोकतंत्र की हत्या कर रही है। कोई सरकार से सवाल न पूछे, इसके लिए आवाज दबाने का काम किया जा रहा है। यशपाल आर्य ने कहा कि कोर्ट के फैसले के 24 घंटे के भीतर और अपील प्रक्रिया में होने के बावजूद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद करना निर्ममता से ओतप्रोत राजनीति है। डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : इसके बाद ‘चौकीदार चोर है’ कहना भूल जाएंगे राहुल गांधीयह भी पढें : कांग्रेस पार्टी के लिए ‘रही-सही कसर’ भी पूरी करने वाला हो सकता है यह बयान, आतंकी मसूद अजहर को दी इतनी इज्ज़तयह भी पढ़ें : राफेल के दस्तावेज ‘चोरी’ नहीं हुए, अवैध तरीके से फोटो स्टेट कराकर दायर की गयी थी याचिका: अटॉर्नी जनरलपढ़ें पूर्व समाचार : तो चुराये गये दस्तावेजों से दायर हुई #Rafale के खिलाफ SC में याचिका ! हो सकती है याची आप सांसद के खिलाफ कार्रवाई !बड़ा समाचार : यूपीए के मुकाबले NDA के शासनकाल में 2.86% सस्ते मिले राफेल : CAGयह भी पढ़ें : राफेल डील पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से ‘सुप्रीम’ राहत, कहा- कोई संदेह नहींयह भी पढ़ें : तब ‘ब्रूटस’ ने भी ऐसे ही आंख दबाई थी…!!चाहें तो यह भी पढ़ें : (किसी अन्य का कॉपी-पेस्ट है )यह भी पढ़ें : कांग्रेस विधायक ने राहुल गांधी को दी यह चुनौतीअब सत्ता ‘ज़हर’ नहीं रही मि. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ?राहुल की ‘साफगोई’ के मायनेइस आलेख पर कुछ प्रतिक्रियाएं :Like this:Relatedयह भी पढ़ें : इसके बाद ‘चौकीदार चोर है’ कहना भूल जाएंगे राहुल गांधीनवीन समाचार, नैनीताल, 17 मार्च 2019। कांग्रेस अध्यक्ष कई-कई बार सार्वजनिक मंचों पर ‘चौकीदार चोर है’ वाक्य राजनीतिक तौर पर स्थापित कर दिया था, और इधर तो वह इस बात पर महसूस कर रहे गर्व को भी सार्वजनिक तौर पर स्वीकार कर रहे थे कि उन्होंने इस नारे को इस तरह स्थापित कर दिया है कि अब उनके धीरे से ‘चौकीदार’ कहने पर भी दूसरी ओर से जनता ‘चोर है’ कहने लगी है। लेकिन इस नारे को स्थापित करते-करते भी वे इस बात से अंजान थे कि समाज में एक बड़ा वर्ग ‘चौकीदार’ के पद से भी अपनी आजीविका चला रहा है, और राहुल की बातें इस वर्ग को लगातार गाली की तरह लग रही थीं। यह उसी तरह था जैसे नोटबंदी के दौरान एक नोट पर ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’ लिखा मिलने के बाद सोनम गुप्ता नाम की महिलाओं के लिए और ‘मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिये’ गीत के बाद मुन्नी नाम की महिलाओं के शर्मिंदगी की स्थित बन गयी थी।आप सभी चौकीदारों को मेरी शुभकामनाएं।इतना उत्साह देखकर अच्छा लगा।आपकी चौकीदारी के कारण भ्रष्टाचार नष्ट हो रहा है और चोरों को कष्ट हो रहा है। https://t.co/UUwLbfooT4— Narendra Modi (@narendramodi) March 17, 2019 लेकिन इधर भाजपा ने राहुल के ‘चौकीदार’ नारे पर जिस तरह का पलटवार किया है, उसके बाद राहुल का ‘चौकीदार चोर है’ के मुद्दे पर बैकफुट पर आना तय माना जा रहा है, और यदि वे अब भी चौकीदार चोर हैं, कहेंगे तो उन्हें राजनीतिक तौर पर नुकसान होना तय है। यह कुछ वैसा ही हो सकता है, जैसा मोदी को पिछले चुनावों में नीच, गुजरात के गधे, मौत का सौदागर व चायवाला आदि कहने पर हो चुका है। यह भी माना जाएगा कि यदि वे अब भी चौकीदार चोर है कहते हैं तो संदेश जाएगा कि वे केवल प्रधानमंत्री मोदी के लिए नहीं वरन खुद को चौकीदार कहने वाले अन्य लोगों को भी चोर कह रहे हैं। और ऐसा कहना उनके लिए भारी पड़ सकता है।भाजपा ने पहले ‘चौकीदार’ के मुद्दे पर 16 मार्च को एक करीब तीन मिनट का वीडियो लॉंच किया जिसमें ‘मैं भी चौकीदार’ स्लोगन को आगे बढ़ाते हुए यह संदेश दिया गया कि देश के लिए देश का हर व्यक्ति चौकीदार की भूमिका निभाने को तैयार है। और इसके एक दिन बाद ही प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित कई मंत्रियों ने अपने ट्विटर हैंडल पर अपने नाम के आगे ‘चौकीदार’ शब्द जोड़ दिया है। इस तरह भाजपा ने राहुल के ‘चौकीदार-हमले’ के आगे बैकफुट पर जाने के साथ ही देश भर के चौकीदारों को भी सम्मान का भाव दिलाते हुए समाज के निचले वर्ग से आने वाले एक बड़े वर्ग को अपनी पार्टी से जोड़ लिया है। इसका असर भी दिखने लगा है, कल प्रधानमंत्री मोदी से देहरादून में इस मुद्दे पर असहज होने का प्रश्न पूछने के तत्काल बाद ही राहुल गांधी को पहली बार कहना पड़ा है कि हर चौकीदार नहीं, केवल प्रधानमंत्री चोर हैं। यानी राहुल अपनी रणनीतिक चूक को स्वीकार करने की स्थिति में आ गये हैं कि उन्हें चौकीदार चोर है की जगह सीधे तौर पर ‘नरेंद्र मोदी चोर है’ जैसा कोई नारा देते तो आज उन्हें इस तरह पीछे नहीं हटना पड़ता। यह भी पढ़ें:यह भी पढें : कांग्रेस पार्टी के लिए ‘रही-सही कसर’ भी पूरी करने वाला हो सकता है यह बयान, आतंकी मसूद अजहर को दी इतनी इज्ज़तनवीन समाचार, नई दिल्ली, 8 मार्च 2019। पुलवामा हमले पर मोदी सरकार को घेरने के चक्कर में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने फिर ‘सेल्फ गोल’ कर डाला है और बीजेपी को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका दे दिया है। दिल्ली में बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन में राहुल गांधी ने आतंकी मसूद अजहर को ‘जी’ कहकर संबोधित किया, जिसके तुंरत बाद बीजेपी ने इस बयान को अपने ट्विटर पेज पर शेयर कर दिया। राहुल के इस बयान पर उनकी पार्टी निरुत्तर हो सकती है और लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद आया उनका यह ताज़ा बयान कांग्रेस पार्टी की पहले से ही कमजोर स्थिति को और कमजोर करने वाला व रही-सही कसर भी पूरी करने वाला साबित हो सकता है। राहुल गांधी ने सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल पर तंज कसते हुए कहा, ‘पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 से 45 जवान शहीद हो गए थे। सीआरपीएफ बस पर किसने बम फोड़ा ? जैश-ए-मोहम्मद…मसूद अजहर ने… आपको याद होगा ना? यह वही मसूद अजहर है, जिसे 56 इंच वालों की तब की सरकार ने एयरक्राफ्ट में मसूद अजहर जी के साथ बैठकर अजीत डोभाल कंधार में हवाले करके आ गए थे.’Come on “Rahul Gandhi Ji”!Earlier it were the likes of Digvijay Ji who called “Osama Ji” and “Hafiz Saeed Sahab”.Now you are saying “Masood Azhar Ji”.What is happening to Congress Party? pic.twitter.com/fIB4FoOFOh— Ravi Shankar Prasad (Modi ka Parivar) (@rsprasad) March 11, 2019‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर चौकीदार चोर है कहकर निशाना साधा और कहा, ‘पांच साल पहले देश में चौकीदार आया। कहता है भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने आया हूँ। 56 इंच की छाती है। मोदी… मोदी… मोदी के नारे उनके लोग लगाते थे। अच्छे दिन आएंगे। कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते थे।’ साथ ही उन्होंने कहा कि मेक इंन इंडिया की पीएम मोदी बात करते रहते हैं लेकिन उनकी शर्ट, जूते और जिस फोन से वह सेल्फी लेते हैं, वह फोन चीन में बना है।बीजेपी का राहुल पर पटलवारआतंकी मसूद अजहर को राहुल गांधी के ‘जी’ कहकर संबोधित करने पर बीजेपी ने पलटवार किया है. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट किया, ‘कम ऑन ‘राहुल गांधी जी’! पहले यह दिग्विजय जी की पसंद थे, जिन्हें वो “ओसामा जी” और “हाफिज सईद साहब” कहते थे। अब आप कह रहे हैं “मसूद अजहर जी”। कांग्रेस पार्टी को क्या हो गया है ?राहुल के बयान पर कांग्रेस की सफाईराहुलजी के ‘मसूद’ कटाक्ष को जान-बुझ न समझने वाले भाजपाईयों व चुनिंदा गोदी मीडिया साथियों से 2 सवाल-:1. क्या NSA श्री डोभाल आतंकवादी मसूद अज़हर को कंधार जा रिहा कर नहीं आए थे?2. क्या मोदी जी ने पाक की ISI को पठानकोट आतंकवादी हमले की जाँच करने नहीं बुलाया? #BJPLovesTerrorists pic.twitter.com/custyowg5g— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) March 11, 2019राहुल के बयान पर बढ़ते विवाद को देखते हुए कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने सफाई दी है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘राहुलजी के ‘मसूद’ कटाक्ष को जान-बुझ न समझने वाले भाजपाईयों व चुनिंदा गोदी मीडिया साथियों से 2 सवाल-: 1. क्या NSA श्री डोभाल आतंकवादी मसूद अज़हर को कंधार जा रिहा कर नहीं आए थे? 2. क्या मोदी जी ने पाक की ISI को पठानकोट आतंकवादी हमले की जाँच करने नहीं बुलाया? उल्लेखनीय है कि इसी तरह बीते दिनों जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आंतकी ओसामा बिन लादेन को एक ट्वीट में ‘ओसामा जी’ कह दिया था, उस पर भी काफी हंगामा हुआ था। बीजेपी ने उस मुद्दे को लपक लिया था और पूरे देश में इस बात को प्रचारित करना शुरू कर दिया कि कांग्रेस के नेता आतंकियों के प्रति नरम रुख रखते हैं। हालाँकि दिग्विजय सिंह ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने ओसामा जी व्यंग्य के तौर पर कहा था. उन्होंने कहा था कि बीजेपी ऐसा बता रही है जैसे मैं ओसामा का समर्थक हूं। गौरतलब है कि लादेन 2001 में अमेरिका में हुए सबसे बड़े आतंकी हमले 9/11 का मास्टरमाइंड था। लादेन को अमेरिका ने मई 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया था। यह भी पढ़ें : राफेल के दस्तावेज ‘चोरी’ नहीं हुए, अवैध तरीके से फोटो स्टेट कराकर दायर की गयी थी याचिका: अटॉर्नी जनरलनवीन समाचार, नई दिल्ली, 8 मार्च 2019। देश के अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने शुक्रवार को दावा किया कि राफेल से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी नहीं हुए हैं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल किए अपने जवाब में उनका मतलब था कि याचिकाकर्ताओं ने अपनी अर्जी में ‘वास्तविक कागजातों की फोटोकॉपी’ का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा, ‘विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सर्वोच्च न्यायालय में बहस के दौरान कहा गया था कि राफेल से संबंधित कागजात रक्षा मंत्रालय से चोरी हुए हैं। यह पूरी तरह गलत है। कागजात चोरी होने संबंधित बयान पूरी तरह गलत हैं।’ वेणुगोपाल ने कहा कि यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की पुनर्विचार याचिका में राफेल डील से संबंधित तीन दस्तावेज पेश किए, जो वास्तविक दस्तावेजों की फोटोकॉपी थे। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय में वेणुगोपाल के ‘पेपर चोरी’ होने संबंधी बयान के बाद विपक्ष सरकार पर हावी हो गया है। इस बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और पीएम मोदी पर जमकर हमला बोला। राहुल ने मांग की कि इतने महत्वपूर्ण संवेदनशील कागजात पेपर के चोरी होने की आपराधिक जांच होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि ‘नवीन समाचार’ में हमने इस समाचार को बृहस्पतिवार को भी इसी रूप में प्रकाशित किया था कि याचिकाकर्ताओं ने चुराये हुए दस्तावेजों से याचिका दायर की थी, जबकि देश भर के मीडिया ने इस समाचार को इस तरह से प्रकाशित किया था कि राफेल के दस्तावेज चोरी चले गये हैं।यह भी पढ़ें : खुशखबरी ! अब घर बैठे मिलेगी सत्यापित खतौनी, छह राजस्व पोर्टल शुरूपढ़ें पूर्व समाचार : तो चुराये गये दस्तावेजों से दायर हुई #Rafale के खिलाफ SC में याचिका ! हो सकती है याची आप सांसद के खिलाफ कार्रवाई !नवीन समाचार, नई दिल्ली, 6 मार्च 2019। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को राफेल डील पर अपने फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई कर रहा है। सुनवाई के दौरान जहां रक्षा मंत्रालय से कुछ महत्वपूर्ण फाइलें चोरी होने की बात उठी, वहीं एफ-16 फाइटर जेट का भी जिक्र हुआ। सुनवाई के दौरान भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सरकार की ओर से कोर्ट को बताया कि जिन दस्तावेजों पर अधिवक्ता प्रशांत भूषण भरोसा कर रहे हैं, वे रक्षा मंत्रालय से चुराए गए हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राफेल से जुड़ी कुछ फाइलें रक्षा मंत्रालय से चोरी हुईं हैं। अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से यह भी कहा कि जिन लोगों ने रक्षा दस्तावेजों को प्रकाशित किया, उन्हें कोर्ट को यह बताना चाहिए कि उन्हें ये दस्तावेज कहां से मिले थे। उन्होंने कहा कि राफेल सौदे से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने वाला सरकारी गोपनीयता कानून के तहत और अदालत की अवमानना का दोषी है। इस पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वह भोजनावकाश के बाद यह बताएं कि राफेल डील से जुड़े दस्तावेजों के चोरी होने पर क्या कार्रवाई की गई? इस दौरान पाकिस्तान द्वारा 27 फरवरी को एफ-16 विमानों से भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले की नाकाम कोशिश का जिक्र करते हुए अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से कहा कि एफ-16 से मुकाबले के लिए राफेल जरूरी है। उन्होंने कहा कि एफ-16 उन्नत किस्म का जहाज है तो क्या हमें उससे बेहतर जहाज नहीं चाहिए। उन्होंने साथ में यह भी कहा कि मिग ने अच्छा काम किया है, जो 1960 का बना है। एजी ने कहा कि मामले में सीबीआई जांच से राफेल को लेकर डील को नुकसान होगा और देशहित में यह ठीक नहीं है।कथित गलत बयानी पर सरकार का पक्ष अटॉर्नी जनरल ने राफेल पर पुनर्विचार याचिका और गलत बयानी संबधी आवेदन खारिज करने का अनुरोध करते हुए कहा कि ये चोरी किए गए दस्तावेजों पर आधारित है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि राफेल पर ‘द हिंदू’ की आज की रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को प्रभावित करने के समान है जो अपने आप में अदालत की अवमानना है।आप सांसद की पुर्नविचार याचिका खारिज, हो सकती है कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की तरफ से दाखिल समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया है। अब सिर्फ एक समीक्षा याचिका बची है जिसे यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दायर किया है। वहीं भोजनाकवाश के बाद दोपहर 2 बजे जब सुनवाई फिर शुरू हुई तो सुप्रीम कोर्ट आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की तरफ से दाखिल समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया। इतना ही नहीं, बेंच ने आप सांसद द्वारा कोर्ट पर की गईं अपमानजनक टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाया। संजय सिंह की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फैसले के बारे में उनके द्वारा दिए गए बयान बहुत ही अपमानजनक हैं। कोर्ट ने कहा कि वह रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई पूरी होने के बाद अपमानजनक बयानों के लिए संजय सिंह के खिलाफ कार्रवाई करेगा लेकिन उससे पहले सिंह को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।बड़ा समाचार : यूपीए के मुकाबले NDA के शासनकाल में 2.86% सस्ते मिले राफेल : CAGनवीन समाचार, नई दिल्ली, 13 फरवरी 2019। राफेल डील पर जारी सियासी घमासान के बीच आज नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक यूपीए के मुकाबले NDA के शासनकाल में 2.86% सस्ती डील फाइनल की गई है। CAG रिपोर्ट के मुताबिक 126 विमानों की तुलना में भारत ने 36 राफेल कॉन्ट्रैक्ट में 17.08% पैसे बचाए हैं। आपको बता दें कि मोदी सरकार के समय में 2016 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का सौदा हुआ। इससे पहले UPA के समय में 126 राफेल का सौदा हुआ था पर कई शर्तों पर आम राय नहीं बन सकी थी।रिपोर्ट में क्या है? रिपोर्ट में 2007 और 2015 की मूल्य बोलियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। इसमें लिखा है, ‘आईएनटी द्वारा गणना किए गए संरेखित मूल्य ‘यू 1’ मिलियन यूरो था जबकि लेखापरीक्षा द्वारा आंकलित की गई संरेखित कीमत ‘सीवी’ मिलियन यूरो थी जो आईएनटी संरेखित लागत से लगभग 1.23 प्रतिशत कम थी। यह वह मूल्या था जिस पर 2015 में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए थे यदि 2007 और 2015 की कीमतों को बराबर माना जाता। लेकिन इसके जगह 2016 में ‘यू’ मिलियन यूरो के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे जो लेखापरीक्षा के संरेखित कीमत से 2.86 प्रतिशत कम थी।’हालांकि कांग्रेस ने CAG रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए हैं। 141 पेज की यह रिपोर्ट रखे जाने के बाद राज्यसभा में हंगामा शुरू हो गया जिसके कारण सभापति को सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, लोकसभा में भी TDP और TMC सदस्यों के हंगामे के कारण सुबह कामकाज नहीं हो सका और कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।राफेल डील को लेकर कांग्रेस के सांसदों ने राहुल गांधी के नेतृत्व में संसद परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान सांसदों ने ‘चौकीदार चोर है’ के नारे लगाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान सोनिया गांधी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह भी मौजूद थे। सीएजी रिपोर्ट राज्यसभा में पेश किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट कर लिखा, ‘सत्यमेव जयते-सत्य की जीत हमेशा होती है। राफेल पर CAG रिपोर्ट से यह कथन एक बार फिर सच साबित हुआ है।’ एक अन्य ट्वीट में जेटली ने कहा, ‘CAG रिपोर्ट से महाझूठबंधन के झूठ उजागर हो गए हैं।’ इससे पहले एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से राहुल गांधी ने राफेल मुद्दे को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने ‘द हिंदू’ अखबार की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पीएम का बेटर प्राइसिंग और जेट की जल्द डिलिवरी का दावा खारिज हो गया है। आपको बता दें कि बुधवार को अंग्रेजी अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि NDA सरकार के समय में हुई राफेल डील UPA के समय के ऑफर से बेहतर नहीं है। वहीं, बुधवार सुबह में कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान के मूल्यों, सिद्धांतों और प्रावधानों पर मोदी सरकार की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं। यह भी पढ़ें : किसने कहा राफेल मतलब राहुल फेलनवीन समाचार, नई दिल्ली, 8 फरवरी 2019। लगता है भाजपा के अन्य नेता भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह शब्दों का बेहतर उपयोग कर नारे गढ़ने में पीछे नहीं रहना चाहते हैं। मोदी द्वारा ‘महागठबंधन’ की धार को ‘महामिलावट’ कह कर कुंद करने के बाद अब भाजपा के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राहुल गांधी की ‘राफेल’ की तोतारटंत पर बड़ा हमला बोलते हुए राफेल का नया नामांतरण किया है। उन्होंने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, राफेल मतलब राहुल फेल। ऐसे में आने वाले दिनों में जब भी राहुल राफेल का नाम लेंगे तो उन्हें विरोधी भाजपा की ओर से ‘राहुल फेल’ सुनने को मिले तो आश्चर्य न होगा। जावडेकर ने राहुल गांधी पर राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर फिर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह एक समाचार पत्र में छपी अधूरी रिपोर्ट का हवाला देकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक विश्वसनीयता है जबकि गांधी राफेल मामले में निरंतर झूठ बोल रहे हैं. उन्होंने कहा, राफेल मतलब राहुल फेल। जावडेकर श्री गांधी झूठ बोलने की फैक्ट्री चला रहे हैं. आज फिर एक समाचार पत्र में छपी खबर का हवाला देकर उन्होंने झूठ परोसा है. राफेल सौदे को लेकर लगाया गया यह आरोप गलत है. उन्होंने कहा, मैं इस आरोप को खारिज करता हूं। खबर में रक्षा मंत्रालय की नोटिंग का एक पैराग्राफ तो प्रकाशित किया गया लेकिन रक्षा मंत्री की टिप्पणी पेश नहीं की गयी।यह भी पढ़ें : राफेल डील पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से ‘सुप्रीम’ राहत, कहा- कोई संदेह नहींनवीन समाचार, नई दिल्ली, 14 दिसंबर 2018। राफेल डील पर विपक्ष के आरोपों का सामना कर रही मोदी सरकार को तीन राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान गंवाने के बाद सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को SC ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि उसे 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के NDA सरकार के फैसले में कोई अनियमितता नहीं मिली है। इसके साथ ही कोर्ट ने राफेल डील को लेकर दाखिल की गई सारी याचिकाएं भी खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘इस प्रक्रिया को लेकर हम संतुष्ट हैं और संदेह की कोई वजह नहीं है। कोर्ट के लिए यह सही नहीं है कि वह एक अपीलीय प्राधिकारी बने और सभी पहलुओं की जांच करे।’ कोर्ट ने साफ कहा, ‘हमें कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे लगे कि कोई कॉमर्शल पक्षपात हुआ हो।’ CJI रंजन गोगोई ने कहा कि ऑफसेट पार्टनर के विकल्प में दखल देने की भी कोई वजह नहीं है।कीमतों की तुलना कोर्ट का काम नहीं: CJI SC ने कहा कि लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश लड़ाकू विमानों के बगैर नहीं रह सकता है। चीफ जस्टिस ने कहा कि हम सरकार को 126 विमानों की खरीद के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं और कोर्ट के लिए यह उचित नहीं होगा कि वह केस के हर पहलू की जांच करे। उन्होंने कहा कि कीमतों के डीटेल्स की तुलना करना कोर्ट का काम नहीं है। CJI रंजन गोगोई ने कहा कि डील पर लोगों की निजी धारणा क्या है, यह ज्यादा मायने नहीं रखता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह की डिफेंस डील्स में न्यायपालिका का अधिकार सीमित है, खासतौर से जब प्रतिद्वंद्वियों के पास चौथी और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर हों और हमारे पास नहीं है।यूं मिली क्लीन चिट SC ने NDA सरकार को निम्न तीन पहलुओं पर स्पष्ट तौर से क्लीन चिट दे दी- 1. UPA सरकार ने 126 राफेल जेट्स खरीदने का फैसला किया था लेकिन मौजूदा सरकार ने 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। 2. राफेल जेट्स की कीमतें। 3. दसॉ द्वारा अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस समेत भारतीय ऑफसेट पार्टनरों को चुनना।क्या थी मांग? आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से फ्रांस के साथ राफेल विमानों की खरीद के बहुचर्चित सौदे में कथित भ्रष्टाचार की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई थी। इससे पहले सीजेआई रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच ने 14 नवंबर को मैराथन सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। राफेल डील की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग को लेकर ऐडवोकेट एम. एल. शर्मा और विनीत ढांडा ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थी। बाद में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी ऐसी ही याचिका डाली। एक संयुक्त याचिका पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी व सीनियर ऐडवोकेट प्रशांत भूषण ने दाखिल की थी।यह है मौजूदा सौदा भारत और फ्रांस ने 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए 23 सितंबर, 2016 को 7.87 अरब यूरो (लगभग 59,000 करोड़ रुपये) के सौदे पर हस्ताक्षर किए। सौदा दोनों देशों की सरकारों के बीच हुआ है। भारतीय एयर फोर्स के अपग्रेडेशन के प्लान के तहत यह डील हुई है। इन जेट्स को फ्रांस की दसॉ कंपनी ने तैयार किया है। विमान की आपूर्ति सितंबर 2019 से शुरू होगी। इस सौदे की जमीन अप्रैल 2015 में पीएम मोदी के फ्रांस दौरे पर तैयार हुई थी। 10 अप्रैल 2015 को पीएम मोदी और तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांद ने संयुक्त बयान जारी कर बताया था कि दोनों सरकारें 36 राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के सौदे के लिए सहमत हैं।राफेल डील पर यह था विवाद राफेल डील में विमानों की कथित तौर पर बहुत ज्यादा बढ़ी हुई कीमत, सरकारी कंपनी HAL को सौदे से बाहर रखे जाने, अनिल अंबानी की कंपनी को दसॉ द्वारा ऑफसेट पार्टनर बनाए जाने और कथित तौर पर सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समति की बिना मंजूरी के ही प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सौदे के ऐलान जैसे मुद्दों को लेकर विवाद है। राफेल डील को लेकर मुख्य विपक्षी कांग्रेस काफी हमलावर है और मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है। सौदे के विवादों में घिरने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। कांग्रेस इस सौदे में भारी अनियमितताओं का आरोप लगा रही है। उसका कहना है कि सरकार प्रत्येक विमान 1,670 करोड़ रुपये में खरीद रही है जबकि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने प्रति विमान 526 करोड़ रुपये कीमत तय की थी। पार्टी ने सरकार से जवाब मांगा है कि क्यों सरकारी ऐरोस्पेस कंपनी HAL को इस सौदे में शामिल नहीं किया गया।रिलायंस डिफेंस को ऑफसेट पार्टनर चुने जाने पर विवाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का यह भी आरोप है कि दसॉ ने मोदी सरकार के दबाव में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को ऑफसेट पार्टनर चुना, जबकि उसके पास इस क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं है। उन्होंने दसॉ सीईओ पर झूठ बोलने का भी आरोप लगाया है। दूसरी तरफ दसॉ, फ्रांस और मोदी सरकार ने गांधी के आरोपों को खारिज किया है।यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के बागेश्वर में सुबह 7:25 बजे 3.5 तीव्रता का भूकंप, झटके हरिद्वार-ऋषिकेश तक महसूस, नुकसान की सूचना नहींयह है ऑफसेट क्लॉज और इसलिए है अहम? ऑफसेट क्लॉज के मुताबिक दसॉ को सौदे के बदले में उसकी कुल राशि की आधी रकम के बराबर भारत में निवेश करना है। चूंकि, 36 विमानों की खरीद का सौदा 59,000 करोड़ रुपये का है। लिहाजा दसॉ को भारतीय कंपनियों में इसके आधे यानी करीब 30,000 करोड़ रुपये के बराबर निवेश करना है। दसॉ ने ऑफसेट पार्टनर के तौर पर रिलायंस डिफेंस समेत कई भारतीय कंपनियों को चुना है। ये कंपनियां दसॉ के लिए विमानों के पार्ट्स बनाएंगे।यूपीए सरकार का यह सौदा था? भारत ने 2007 में 126 मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) को खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी। यूपीए सरकार के दौरान राफेल खरीद सौदा नहीं हो पाया था और उस समय सौदे को लेकर दोनों पक्षों में बातचीत ही चलती रही। तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने भारतीय वायु सेना से प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी। इस बड़े सौदे के दावेदारों में लॉकहीड मार्टिन के एफ-16, यूरोफाइटर टाइफून, रूस के मिग-35, स्वीडन के ग्रिपेन, बोइंग का एफ/ए-18 एस और दसॉ एविएशन का राफेल शामिल था। लंबी प्रक्रिया के बाद दिसंबर 2012 में बोली लगाई गई। दसॉ एविएशन सबसे कम बोली लगाने वाली निकली। मूल प्रस्ताव में 18 विमान फ्रांस में बनाए जाने थे जबकि 108 हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ मिलकर तैयार किये जाने थे। यूपीए सरकार और दसॉ के बीच कीमतों और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर लंबी बातचीत हुई थी। अंतिम वार्ता 2014 की शुरुआत तक जारी रही लेकिन सौदा नहीं हो सका। प्रति राफेल विमान की कीमत का विवरण आधिकारिक तौर पर कभी घोषित नहीं किया गया था, लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने संकेत दिया था कि सौदा 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर का होगा। कांग्रेस ने प्रत्येक विमान की दर एवियोनिक्स और हथियारों को शामिल करते हुए 526 करोड़ रुपये (यूरो विनिमय दर के मुकाबले) बताई थी।यह भी पढ़ें : तब ‘ब्रूटस’ ने भी ऐसे ही आंख दबाई थी…!!“एक प्रिया प्रकाश थीं, जिन्होंने आंख मारकर नाम कमा लिया था और एक राहुल गांधी हैं, जिन्होंने आंख मारकर गले लगने और अपने ‘दम’दार कहे जा रहे भाषण से कमाया भी सब गंवा दिया….” एक प्रिया प्रकाश थीं, जिन्होंने आंख मारकर नाम कमा लिया था और एक @RahulGandhi जिन्होंने आंख मारकर गले लगने और अपने 'दम'दार कहे जा रहे भाषण से कमाया भी सब गंवा दिया…😁 pic.twitter.com/LmHp4yBpcM https://t.co/r6qMJv8H3l— Navin Samachar @ deepskyblue-swallow-958027.hostingersite.com (@navinsamachar) July 21, 2018नवीन जोशी, नैनीताल। यह वह स्वाभाविक प्रतिक्रिया है जो मोदी सरकार के खिलाफ आये पहले अविश्वास प्रस्ताव के दौरान लोक सभा में हुई बहस, खासकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों, क्रिया-प्रतिक्रियाओं के बाद आती है। इस बात में कोई शक नहीं कि राहुल ने अपनी पूर्व घोषणा के अनुरूप संसद में बोलने पर ‘भूकंप’ आने की जो ‘चेतावनी’ दी थी, राफेल डील को उठाकर वह ऐसा करने में सफल रहे। इस पर उनकी पार्टी के सांसद ने भाजपाई सांसदों के ‘भूकंप कब आएगा’ पूछे जाने पर कहा भी कि ‘लो भूकंप आ गया’। मौजूदा दौर में लगने-लगाये जाने वाले राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के स्तर को देखते हुए यदि इस आरोप पर भारत व फ्रांस सरकारों द्वारा खंडन किये जाने की बात को छोड़ भी दिया जाये, और आरोपों को सही मान लिया जाये तो इन्हें पूर्व में कई बार उनके द्वारा उद्घाटित किये जाने के बावजूद, उनके पिता राजीव गांधी को सत्ता से दूर करने के लिए विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा लगाये गये ‘बोफोर्स घोटाले’ के आरोपों की श्रेणी का भूकंप लाने वाला आरोप माना जा सकता है। राहुल ने मोदी सरकार को रोजगार देने के मोर्चे पर विफल बताया, और उनके दावों को ‘जुमला स्ट्राइक’ कहकर मखौल उड़ाया। इस दौरान राहुल अपने भाषण से अपने पार्टी कैडर और प्रशंसकों को विश्वास जताते प्रतीत भी हुए कि उनमें मोदी विरोध की क्षमता है। आखिर में उन्होंने मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ की तर्ज पर अपने विरोधियों को भी ‘कांग्रेस’ बना देने की बात की। कांग्रेस का मतलब अपने विरोधियों के प्रति भी किसी तरह का द्वेष भाव न रखने की बात कहते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को गले भी लगा लिया। इस पर उन्होंने विपक्षी बेंचों से खूब तालियां भी बटोरीं। साथ ही सत्तापक्ष सहित प्रधानमंत्री मोदी को भी निश्चित ही हतप्रभ, हैरान सा भी कर दिया। यहां तक उनकी हर बात एक नेता, विपक्ष के नेता व एक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के तौर पर उनकी जिम्मेदारियों के लिहाज से कहीं से भी गलत नहीं ठहराई जा सकतीं। लेकिन कुछ ही पलों के बाद जब उनके भाषण और उनकी क्रियाओं का विश्लेषण प्रारंभ हुआ, उनका न केवल बचकानापन, बल्कि झूठा दंभ व दिखावटीपन भी बाहर आ गया। यह छोटी बात नहीं कि उनके भाषण के कुछ ही मिनट बाद पहले देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और फिर भारत व फ्रांस की सरकारों को उनके आरोपों का खंडन करना पड़ा। उनके वह बयान भी सामने आ गये जब फ्रांस के राष्ट्रपति मेक्रों से मिलने के बाद कहा गया कि राफेल डील पर कोई बात नहीं हुई थी। जबकि संसद में राहुल ने कहा कि उनकी मैक्रों से बात हुई थी और राफेल डील को सार्वजनिक करने में कोई समस्या नहीं थी। राहुल यह भी याद न रख पाये कि फ्रांस के साथ गोपनीयता का समझौता मोदी सरकार ने नहीं, बल्कि यूपीए सरकार ने किया था। यह बात राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के आज के स्तर को देखते हुए छोड़ भी दी जाये तो इससे साबित हुआ कि उनके संसद में बोलने से भूकंप आने के बावजूद स्वयं की शर्मिंदगी के अलावा कोई असर नहीं छूटा। बल्कि लगता है कि इस मुद्दे पर हुई छीछालेदर के बाद राहुल व कांग्रेस ने हमेशा के लिए इस मुद्दे को खो दिया है। बहरहाल, अब बात करते हैं राहुल की मोदी को ‘प्यार वाली झप्पी’ देने की। निस्संदेह शायद यह इतिहास हो कि विपक्ष के किसी नेता ने नेता सदन को इस तरह गले लगाया हो। ऐसे उदाहरण के तौर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा तब के युवा सांसद अटल बिहारी बाजपेई को उनके प्रभावशाली भाषण के बाद सबसे पीछे की सीट पर जाकर बधाई और एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनने की शुभकामनाएं देने की घटना जरूर स्मरण आती है। लेकिन झप्पी देने से पहले राहुल एक बहुत बड़ी चूक कर गये। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को एक-दो नहीं तीन बार अपनी सीट से उठने का इशारा किया। उनकी यह चूक कई इशारे करती है। एक-उन्हें संसदीय परंपराओं व पद की गरिमा के साथ ही भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का भी ज्ञान नहीं है। हम जब किसी को प्यार से गले मिलते हैं तब या तो वह व्यक्ति पहले से खड़ा होता है, या खडा हो जाता है। बुजुर्गों के मामले में जब गले मिलने वालों में उम्र के लिहाज से पीढ़ियों का अंतर हो, उन्हें उठाने का प्रयास नहीं किया जाता है। वहीं संसद में प्रधानमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह उठाने का प्रयत्न करने वाली शायद यह विश्व इतिहास की पहली घटना भी हो। सो, इस तरह राहुल ने न केवल बचकानी हरकत की, बल्कि इससे उनका दंभ भी प्रदर्शित हुआ कि वह उसी गांधी-नेहरू परंपरा के वंशज हैं, जिनके इशारों पर कई मुख्यमंत्री व राज्यपालों के साथ ही कुछ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी हाथ जोड़ी मुद्रा में खड़े नजर आये हैं। राहुल की इस गलती को कुछ देर के लिए, उनके मन से स्वाभाविक स्तर पर आई, बिना सोचे-समझे हो गयी क्रिया अथवा नासमझी-नादानी समझ कर भुला भी दिया जा सकता था, और माफ भी किया जा सकता था। लेकिन इसके बाद उन्होंने जो किया उससे साफ हो गया कि यह सब कुछ उन्होंने नासमझी-नादानी में नहीं वरन सोच-समझकर, अथवा पहले से लिखी स्क्रिप्ट के अनुसार किया। उन्होंने एक आंख दबाकर अपने साथियों को बताया कि जो स्क्रिप्ट में था वह वह कर आये हैं। यह उन्होंने दिल से नहीं किया है। इससे उनके द्वारा उम्र से बुजुर्ग और देश के गरिमामय सर्वोच्च पद को संभाल रहे प्रधानमंत्री के पद का मखौल उड़ाना ही नहीं ‘प्यार के नाम पर पीठ में छुरा भोंकना’ भी प्रकट हुआ है। ब्रूटस ने भी शायद इसी तरह से जूलियस सीजर के पीठ में छुरा भोंकने के बाद आंख दबाई हो। लेकिन इसे भी राहुल का बचकानापन ही कहेंगे कि उनकी पोल उनके कुछ बड़ा करने से पहले ही खुल गयी है। ऐसे में शायद ही वह वह कर पायें, वह लक्ष्य प्राप्त कर पायें, जिसकी आशा-अपेक्षा में उन्होंने यह सब किया है।चाहें तो यह भी पढ़ें : (किसी अन्य का कॉपी-पेस्ट है )लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी के नुक्कड़छाप भाषण के बाद जो हुआ, वह लोकतंत्र को कलंकित करने वाला है! यह तो हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करना चाहिए कि उन्होंने प्रधानमंत्री पद के रुतबे को झुकने नहीं दिया, अन्यथा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तो पूरी कोशिश की थी कि उन्हें अपने इशारे पर सीट से उठाकर देश को यह संदेश दे कि प्रधानमंत्री कोई भी बन जाए, आदेश तो गांधी परिवार का ही चलेगा! लोकतंत्र के चुने हुए प्रधानमंत्री ने राजतंत्र के अहंकारी युवराज को झुका दिया!झूठ के आधार पर गढ़े हुए अपने भाषण के बाद राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर बढ़े, इसे सभी ने लोकसभा चैनल पर देखा। लेकिन जनता और तथाकथित मीडिया बुद्धिजीवियों ने एक बार नोट नहीं किया, या फिर जानबूझ कर उसकी उपेक्षा की। वह एक क्षण था, जिसने साफ-साफ लोकतंत्र और राजतंत्र की मानसिकता के बीच के अंतर को स्पष्ट कर दिया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास पहुंच कर राहुल गांधी ने हाथ से बार-बार इशारा कर उन्हें अपनी सीट से उठने को कहा। एक नहीं, दो नहीं, तीन बार उन्होंने हाथ दिखाकर प्रधानमंत्री को अपनी सीट से उठने को कहा! आश्चर्य कि किसी ने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया? प्रधानमंत्री पद इस लोकतंत्र का सबसे बड़ा पद है। राजसत्ता की मानसिकता वाला कोई गांधी इसका अपमान नहीं कर सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जिस तरह से सोनिया-राहुल उठ-बैठ कराते थे, वही कोशिश राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी से कराना चाहा, लेकिन यह मोदी हैं, जिन्होंने सदन में प्रवेश करने के बाद उसे लोकतंत्र का मंदिर कहा था, उसकी चौखट को चूमा था।प्रधानमंत्री मोदी ने भी इशारा किया कि किसलिए उठूं? और क्यों उठूं? मोदी के चेहरे पर उस वक्त की कठोरता नोट करने लायक थी और वह कठोरता प्रधानमंत्री पद की गरिमा को बनाए रखने के कारण उत्पन्न हुई थी। राहुल को समझ में आ गया कि यह व्यक्ति मनमोहन सिंह नहीं है जो उसके कहने पर किसी ‘नट’ की तरह नाचे। थक-हार कर राहुल गांधी झुका और जबरदस्ती पीएम मोदी के गले पड़ गया। इसके बाद फिर वह अहंकार पीछे मुड़ कर चलने लगा। गले मिलना उसे कहते हैं, जिसमें सदाशयता हो, उसे नहीं, जिसमें अहंकार हो। अहंकार से गले मिलने को गले पड़ना कहते हैं। राहुल गांधी पीएम से गले नहीं मिला, बल्कि उनक गले पड़ा!पीएम के गले पड़कर वह मुड़ा और जाने लगा। पीएम मोदी ने उसे आवाज देकर बुलाया और सीट पर बैठे-बैठे ही उससे हाथ मिलाया, मुस्कुराए, उसकी पीठ ठोंकी, उसे शाबासी दी! बिल्कुल एक अभिभावक की तरह! राहुल गांधी पीएम मोदी से गले मिलने नहीं, बल्कि वह गले पड़ने गया था। उन्हें आदेश देकर अपनी सीट से उठने के लिए कहने गया था। मेरा मानना है कि नरेंद्र मोदी के अलावा खुद भाजपा का भी कोई दूसरा नेता होता तो गांधी परिवार के इस अहंकार उद्दंड राजनेता के कहने पर उठ कर खड़ा हो गया होता! देखा नहीं आपने, जब राहुल गांधी पीएम मोदी के पास आए तो पिछली सीट पर बैठे कितने ही सारे भाजपाई नेता उठ कर खड़े हो गये थे, ताली बजा रहे थे! दरअसल यह सब पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर जीत कर आए हैं, लेकिन बीमारी तो वही कांग्रेस वाली लगी है, किसी वंश या परिवार के चाकरी की!इस मामले को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी नोट किया कि राहुल गांधी ने सदन और प्रधानमंत्री पद की गरिमा का हनन करने का प्रयास किया है। सुमित्रा महाजन ने बाद में सदन में कहा, “जिस तरह राहुल गांधी प्रधानमंत्री के पास पहुंचे, उन्हें उठने को कहा, वह अशोभनीय था। प्रधानमंत्री अपनी सीट पर बैठे थे। वह कोई नरेंद्र मोदी नहीं हैं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं। उस पद की अपनी गरिमा है। इसके बाद राहुल उनके पास से जाकर अपनी सीट पर फिर से भाषण देने लगे और आंख मारा, यह पूरे सदन की गरिमा के खिलाफ था।”अपने अध्यक्ष की अशोभनीय आचरण को ढंकने के लिए एक गुलाम की भांति कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा अध्यक्ष के कहे पर आपत्ति दर्ज कराना चाहा। इस पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा, “मैं किसी को गले मिलने से थोड़े न रोक रहीं हूं। मैं भी एक मां हूं। मेरे लिए तो राहुल एक बेटे के समान ही हैं। लेकिन एक मां के नाते उसकी कमजोरियों को ठीक करना भी मेरा दायित्व है। सदन की गरिमा को हम सबको ही बनाए रखनी है।”इसके उपरांत गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने थोड़ा दार्शनिक अंदाज में राहुल की हरकतों पर कटाक्ष कहते हुए कहा, “जिसकी आत्मा संशय में घिर जाती है, उसके अंदर अहंकार पैदा हो जाता है। यही आज सदन में देखने को मिला है।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यह लोकतंत्र आपका आभारी है कि आप अपनी सीट पर बैठे रहे। यह हमारे वोट का सम्मान है। हमने लोकतंत्र के लिए अपना प्रधानमंत्री चुना है, कोई कठपुतली नहीं। कोई प्रधानमंत्री यदि राजशाही के अहंकार वाले किसी व्यक्ति के लिए अपनी सीट से उठ जाए तो यह न केवल प्रधानमंत्री पद के सम्मान का और सदन की गरिमा का अपमान होगा, बल्कि देश की उन सभी जनता का अपमान होगा, जिसे लोकतंत्र में आस्था है और जिसने अपने प्रधानमंत्री के लिए मतदान किया है। धन्यवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, एक अहंकारी उद्दंड को उसकी औकात दिखाने के लिए ! पुनः धन्यवाद! (Copy paste)यह भी पढ़ें : कांग्रेस विधायक ने राहुल गांधी को दी यह चुनौतीकांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कर्नाटक विधानसभा चुनावों के बाद कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले हैं। इस पर धारचूला के कांग्रेस पार्टी के विधायक हरीश धामी ने राहुल गांधी से कैलाश यात्रा के लिये उत्तराखंड के लिपूलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा करने की मांग की है।विधायक धामी का कहना है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का पौराणिक यात्रा मार्ग उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के लिपूलेख दर्रे से ही माना जाता है। लिहाजा राहुल गांधी को कैलाश मानसरोवर की यात्रा इसी मार्ग से करनी चाहिये।धामी ने अपनी मांग के समर्थन में दो तर्क देते हुए कहा है कि, पहला तो यह मार्ग पौराणिक है। दूसरा इस मार्ग से यात्रा पूरी करने के बाद राहुल गांधी देश को सच्चाई बता सकेंगे कि देश डिजीटल इंडिया से कितना जुडा़ है। जब वे इस इलाके का भम्रण करेंगे तो केन्द्र सरकार के दावों की जमीनी हकीकत से खुद रुबरु होकर देश की जनता को भी सरकार के दावों की जमीनी हकीकत से रुबरु करा सकेंगे। धामी ने कहा कि वे जल्द ही राहुल गांधी से मिलकर अपनी इस इच्छा से उनको अवगत कराएंगे। आगे देखने वाली बात होगी कि राहुल अपनी पार्टी के विधायक की इस सलाह, मांग, चुनौती को किस तरह से लेते हैं।अब सत्ता ‘ज़हर’ नहीं रही मि. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ? आखिर GDP का विरोध करते, GDP को ‘गब्बर सिंह टैक्स’ बताने वाले राहुल गांधी पहले न केवल स्वयं ‘GDP के नए अवतार’ – ‘जनेऊ धारी हिन्दू’ बने, बल्कि उनकी पार्टी की ओर से यह साबित करने के प्रयास चल रहे हैं कि वे और उनकी पार्टी बड़ी ‘प्रो हिंदूवादी’ पार्टी है। अब उनमें उन हिन्दू मंदिरों में अधिक से अधिक जाने की होड़ दिख रही है, जहाँ बकौल उनके लोग ‘लड़कियां छेड़ने’ जाते थे। अब राहुल “सत्ता ज़हर है” कहते हुए कांग्रेस अध्यक्ष बन गए हैं। इस तरह सत्ता से दूर रहने की बात करते-करते हुए वे पार्टी के अध्यक्ष बनने के साथ बहुमत मिलने पर ‘सत्ता प्रमुख’ बनने की राह पर भी चल पड़े हैं। और इस तरह वे सत्ता रूपी “ज़हर” की प्राप्ति के लिए भी तमाम प्रयास करते नजर आ रहे हैं।पेश है राहुल गांधी के उपाध्यक्ष बनने के दौरान का एक पुराना विश्लेषण, जो आज की परिस्थितियों में भी सटीक बैठता है :राहुल की ‘साफगोई’ के मायनेजनवरी 2013 में जयपुर में कांग्रेस पार्टी की चिंतन बैठक में चाहे जो और जितना नाटकीय तरीके से हुआ हो, लेकिन काफी कुछ हुआ वही, जिसकी उम्मीद कमोबेश हर कांग्रेसी कर रहा था, और बाकी देशवासियों को भी उसका अंदाजा था। यानी राहुल गांधी को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिलना, और उन्हें उपाध्यक्ष बना भी दिया गया। चिंतन शिविर से यही सबसे बड़ी खबर आई, यानी चिंतिन शिविर आयोजित ही इस लिए किया गया था कि इसके बाद राहुल को पार्टी का नंबर दो यानी सोनिया गांधी का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया जाए।राहुल को उपाध्यक्ष घोषित कर दिया गया, किंतु यह भी बहुत बड़ी घटना नहीं क्योंकि वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रहते हुए भी गांधी-नेहरू परिवार से होने और सोनिया गांधी के पुत्र होने के नाते पार्टी के नंबर दो तथा सोनिया के निर्विवाद तौर पर उत्तराधिकारी ही थे। लेकिन इससे बड़ी बात यह है कि नई जिम्मेदारी देने के साथ यह संदेश साफ कर देने की कोशिश की गई है कि वह आगामी लोक सभा चुनावों में पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार होंगे।गौर कीजिए, राहुल और सोनिया गांधी दोनों इस बात को मानते हैं, इसलिए ‘पार्टी’ की एक बड़ी जिम्मेदारी मिलने पर दोनों के मन में पार्टी से पहले ‘सत्ता’ का खयाल आता है। यह खयाल आते ही सोनिया बेहद डर जाती हैं। वह रात्रि में ही राहुल के कक्ष में जाती हैं, और पुत्र को गले लगाकर रोते हुए याद दिलाती है, “सत्ता जहर है।” इस जहर ने उनकी ‘आइरन लेडी’ कही जाने वाली दादी और मजबूत पिता को उनसे छीन लिया था। पुत्र को भी डर सताता है, उनके साथ बैडमिंटन खेलने वाले दो पुलिस कर्मी कैसे गोलियों से भूनकर उनकी दादी की हत्या कर देते हैं। यहां किस पर विश्वास किया जाए, किस पर नहीं ! कहीं सत्ता उन्हें भी…..! भगवान करे ऐसा कभी ना हो।बहरहाल, टीवी पर आने वाले एक विज्ञापन की तर्ज पर डर सभी को लगता है, गला सभी का सूखता है। मां-पुत्र भी इसके अपवाद नहीं हो सकते। दोनों बेहद डरे हुए हैं। लेकिन उनके समक्ष क्या मजबूरी है सत्ता रूपी जहर को पीने की। यह जहर उनके परिवार को इतने बड़े घाव पहले ही दे चुका है, तो उसे जानते-बूझते फिर से क्यों गटका जाए। किसी और के लिए हो सकता है, पर गांधी-नेहरू परिवार के लिए तो सत्ता कभी ‘शादी के लड्डू’ की तरह अनजानी वस्तु भी नहीं हो सकती कि उसे बिना खाए पछताने से बेहतर एक बार खा ही लिया जाए। उनके लिए यह स्वाद कोई नया नही।फिर क्या मजबूरी है कि राहुल अपने इस डर को पार्टी की भरी चिंतन सभा में उजागर कर देते हैं। क्या केवल ‘साफगोई’ का तमगा हासिल करने के लिए। और यह भी ‘साफ’ किए बगैर कि आखिर उनके समक्ष इतने बड़े डर के बावजूद विषपान करने की इतनी बड़ी मजबूरी क्या है। क्या वह पार्टी की चिंतन बैठक में देशवासियों के दुःखों पर चिंता कर रहे हैं, और देशवासियों के दुःख उनसे देखे नहीं जा रहे और वह उनके दुःखों को दूर करने के लिए उनके हिस्से के ‘विष’ को पीकर ‘शिव’ बनना चाहते हैं। ऐसा ही मौका सोनिया के पास भी तो आया था, और उन्होंने यह विष क्या पी न लिया होता, यदि उन पर ‘विदेशी’ होने का दाग न लगता ?राहुल जानते हैं, वह नेहरू-गांधी परिवार के चश्मो-चिराग हैं, जिसका नाम अपने नाम से जोड़ देने भर से उन्हें बिना किसी अन्य विशेषता के मां से उत्तराधिकार में कांग्रेस के नंबर दो की कुर्सी के साथ ही आगे पार्टी को सत्ता मिलने पर देश की नंबर एक की कुर्सी भी कमोबेस बिना प्रयास के मिलनी तय है। वह देश की सत्ता के इतने बड़े नाम हैं कि चाहें तो विपक्षी पार्टियों की सत्ता रहते भी लोकहित के जो मर्जी कार्य करवा सकते हैं। फिर क्या मजबूरी है कि वह सत्ता को जहर होने के बावजूद भी पीना ही चाहते हैं ?यहां राहुल के एक वक्तव्य से दो चीजें साफ़ हो जाती हैं। एक, देश का भावी प्रधानमंत्री होने के बावजूद वह इस कथित ‘साफगोई’ के फेर में स्वयं के डर के साथ अपनी कमजोरी भी प्रकट कर देते हैं। दूसरे, ‘पालने’ से ही सत्ता शीर्ष पर होने के बावजूद स्वयं का जहर जैसी सत्ता से न छूट पा रहा मोह भी उनकी इस ‘साफगोई’ से उजागर हो जाता है।राहुल की यह ‘साफगोई’ अनायास नहीं है, वरन सोची समझी रणनीति के तहत हैं। वह अभी भी अपना ‘चेहरा’ विकसित करने के दौर में ही हैं। कभी दाड़ी वाले बेफुरसत युवा, कभी यूपी की चुनावी सभा में पर्चा फाड़ते एंग्री यंग मैन तो कभी गरीब की झोपड़ी में रात बिताते गरीब-गुरबा के मसीहा, और अब साफगोई दिखाते, देश के दिलों को छूते नेता। उनकी पार्टी यूपी, गुजरात जैसे राज्य हारते जा रही है। उत्तर पूर्व के तीन राज्यों में भी उनकी पार्टी के लिए जीत की कम ही संभावनाएं हैं। 2014 भागा हुआ आ रहा है। जनता भ्रष्टाचार, महंगाई, सब्सिडी वापस लिए जाने, डीजल-पेट्रोल को तेल कंपनियों के हाथ में दे दिए जाने और जन लोकपाल, बलात्कार पर कड़े कानून बनाने का शोर मचाए हुए है। वह क्या करें, कौन सा रूप धरें। कौन सा चमत्कार करें कि इस सबके बावजूद सत्ता वापस कदमों में आ जाए। यह बड़ी चिंता है उनकी भी, और कांग्रेस के नेताओं की भी, जिन्हें पता है कि यही नेहरू-गांधी का नाम है जिसके बल पर वह जनता को तमाम अन्य मुद्दे भुलाकर सत्ता हासिल कर सकते हैं। और मां सोनिया की भी, बेटे के लिए दुल्हन भी तलाशें तो पूछते हैं, लड़का करता क्या है। सचमुच बड़ी मजबूरी है।लेकिन राहुल को घबराने या जल्दबाजी की जरूरत नहीं, उन्हें समझना होगा, वह अकेले दौड़ने के बाद भी पार्टी के ‘नंबर दो’ बने हैं। ऐसे ही जब चाहें नंबर -1 भी बन जायेंगे। इस पद के लिए उनके अलावा कोई और दूसरा प्रत्याशी नहीं है। वह कभी देश के प्रधानमंत्री भी बनेंगे तो ऐसी ही स्थिति में, जहां कोई दूसरा उनका प्रतिद्वंद्वी नहीं होगा या ऐसी स्थितियां बना दी जाएंगी कि कोई दूसरा उनके बराबर में खड़ा ही नहीं हो सकता। उन्हें यह प्रमोशन तब मिला है, जबकि उनके नेतृत्व में लड़े राज्यों में भी कांग्रेस लगातार हारती रही है। उनका ‘नेता बनो या नेता चुनो’ का मॉडल युवा कांग्रेस में भी फेल हो चुका है। वह न पार्टी की युवा ब्रिगेड को सुधार पाए हैं, और न ही अपनी पार्टी को अपने दम पर किसी राज्य में ही जीत दिला पाए हैं।बावजूद वह जानते हैं, कांग्रेस पार्टी में सोनिया गांधी के बाद एक वे ही हैं, जिनकी छांव तले कांग्रेसी एक छत के तले खड़े हो सकते हैं। राहुल भले कहें कि उन्हें नहीं पता कि कांग्रेस में आज के कारपोरेट प्रबंधन के दौर में भी (कमोबेस देश की तरह ही) कोई सिस्टम ही नहीं हैं, बावजूद (देश की तरह भगवान भरोसे नहीं) विपक्षी दलों की राजनीतिक अपरिपक्वता और राजनीतिक दांवपेंच में कहीं न ठहरने जैसे अनेक कारणों से वह चुनाव जीत ही जाते हैं।तो क्या, यह जल्दबाजी, यह विषपान की मजबूरी इसलिए है कि उन्हें लगने लगा है, गांधी-नेहरू जाति नाम भले कांग्रेस पार्टी में अब भी चलता हो पर देश में यह तिलिस्म लगातार टूटता जा रहा है। युवा कांग्रेस के साथ ही यूपी में ‘बदलाव’ की कोशिश कर वह थक हार चुके हैं। उनके हाथों में युवा कांग्रेस की कमान थी। उन्होंने वहां जमीनी स्तर से ‘नेता बनो या नेता चुनो’ का नारा दिया, लेकिन वह नारा भी नहीं चल पाया। कमोबेश सभी जगह वही युवा आगे आ पाए, जिनके पिता या गुट के नेता मुख्य पार्टी में बड़े ओहदे पर थे। जो भी जीता, उसने नीचे से लेकर ऊपर तक कार्यकर्ताओं को मैनेज किया। अपने सदस्य बनाए, फिर अपने लोगों को जितवाया और आखिर में अपने पक्ष में लॉबिंग की। लेकिन राहुल की सोच के मुताबिक ऐसा कुछ नहीं हुआ कि अनजान चेहरे युकां के प्रदेश अध्यक्ष बन गए।तो क्या राहुल अपनी इस साफगोई से मात्र पार्टी जनों को भावनात्मक रूप से जोड़े रखने का ही प्रयास नहीं कर रहे हैं। इसके साथ ही कहीं वह कार्यकर्ताओं को स्वयं शीर्ष पर जगह बनाने के बाद परोक्ष तौर पर चेतावनी तो नहीं दे रहे कि यह बहुत खतरनाक जगह है। यहां आने की भी न सोचें। हम बहुत बड़ी कुरबानी देने वाले लोग हैं, इसलिए यहां हैं।इससे बेहतर क्या यह न होता कि वह अपना डर दिखाने के बजाए देश की बड़ी समस्याओं, भ्रष्टाचार, महंगाई, सब्सिडी को खत्म करने, जन लोकपाल, पदोन्नति में आरक्षण जैसे विषयों पर बोलने का साहस दिखाते। देश की जनता की नब्ज, उसकी समस्याओं को समझते, और अपनी युवा ऊर्जा का इस्तेमाल पर उनका स्थाई समाधान तलाशते।राहुल को जानना होगा उन्हें प्रधानमंत्री बनना है तो उन्हें केवल कांग्रेस पार्टी का नहीं पूरे देश का नेता बनना होगा। और ऐसा केवल भावनात्मक तरीके के बजाए कुछ करके बेहतर किया सकता है। उन्हें इस पद पर आरूढ़ होने से पूर्व कुछ और समय लेना होगा। प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने की जल्दबाजी उनके कॅरियर पर भी भारी पड़ सकती है। इस पद के लिए स्वयं को तैयार भी करना होगा। उन्हें स्वयं में गंभीरता लानी होगी। केवल कांग्रेस के गैर गांधी प्रधानमंत्रियों की तरह ‘मौनी बाबा’ बनने अथवा अपने पिता के ‘हमने देखा है, हम देखेंगे’ की तरह ही ऐसा या वैसा होना चाहिए के बजाय कुछ करके दिखाने का साहस और होंसला स्वयं में विकसित करना होगा। अभी वह युवा हैं, उनकी उम्र भागी नहीं जा रही। निस्संदेह उन्हें एक न एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनना है।इस आलेख पर कुछ प्रतिक्रियाएं :Anil Mishra, January 29, 2013 at 9:25 AM2004 में सोनिया ने कहा था की अन्तरात्मा की आवाज पर पीएम नहीं बनीं। बाद में पता चला की वो बनने तो गयीं थीं पर भारतीय संविधान ने रोक लगा दी।अब राहुल कागज पर पढ़कर अपनी माँ के आँसू और दर्द बयाँ कर रहे हैं। ‘सत्ता जहर है’ क्योंकि राहुल और पीएम की कुर्सी के बीच भी संविधान खड़ा हो गया है शायद!2. रमेश जोशी, January 29, 2013 at 6:18 PMसही कहा… बल्कि राहुल को पता है कि कांग्रेसी गांधी परिवार के नाम पर ही थोडा-बहुत एकजुट और वोट खरीदने/माँगने लायक हो पाते हैं…. यह कांग्रेस और राहुल दोनों की मजबूरी है. 3. Anonymous, February 11, 2013 at 2:24 AMजोशी जी बहुत बढिया विश्लेषन किया है ! लेकिन सत्ता का जहर पीने के पीछे एक ही कारण दिखता है लालच ! एसा लालच जो स्वर्ग मे देवराज इन्द्र को भी शायद नसीब ना हो ? सोनिया जी और राहुल के साथ साथ कॉंग्रेसी जनो के राष्ट्रीय दामाद और उनके बच्चों की देख रेख मे 121 करोड़ लोगों का परधानमंत्री इतनी बड़ी हुई उम्र मे सेवा कर रहा है 24 घंटे नतमस्तक हो हाजिर रहता है केंदिय मंत्री जिनके प्राइवेट नौकर तुल्य हों ! चंदे की ऊगाही के पैसों और भ्रष्ट्राचार मे घूस के तहत अरबो रुपये की कमाई और उसके ब्याज से ही 400 करोड़ का उड़नखटोला जिसको दिया जाता हो ! यदि कोई युवक प्रश्न पूछने के लिये राहुल से मिलने के लिये हेलीपेड पर जाता हो तो खानदानी सेवक और मंत्री पोस्ट पर बैठे जितेन प्रसाद और प्रमोद तिवारी सरीखे लोग युवक को केमेरे के सामने लात घूंसे बरसाते हों सुरक्षा की दुहाई देके , आखिर सत्ता के इस जहर को जहर के बजाय अमृत कहना क्या ऊचित नही होगा ? शायद कहीं नौकरों को भान ना हो जाये इसलिये सोनिया ने उसे सत्ता का अमृत कहने के बजाय जहर कह दिया ! और रही बात अमृत से मरने की तो इसमे कौन सी बड़ी बात है मरना तो एक दिन सभी को है !!! बहरहाल कई जन्म के पूनियों का फल है सोनिया जी और उनके रिश्ते नातेदारों का उसे तो वे भोगेंगे ही और जन्म जन्मान्तर से जिन्होने सोनिया परिवार के चरणों मे प्रीति रखी है अगर वो इतनी प्रीति अपने कर्म से रखते या कह लो भगवान से रखते तो क्या पता इनका उद्धार भी हो जाता ! पर शायद असली पापी तो जनता है जो कभी अपने को सामान्य और कभी आम कहती है ! और ईर्ष्या और जलन के कारण वो जातिवादी मानसिकता मे आज तक ऊलझी है ! और छोड़िये इसे अपने उत्तराखंड का क्या हाल है कभी इस पर भी लिख डालिये ! पिछली बार आया था तो मुझे लगा कि उत्तराखंड दिनो दिन गर्त मे जा रहा है सड़क, बिजली मे बिहार बन गया है ! अब तो हर जगह मुल्ले बागलदेशी ही बसे दिखे जो कॉंग्रेस का वोट बैंक ही बन रहा है ! काठगोदाम से पंतनगर रेलवे स्टेशन तक रेलवे किनारे झुग्गी देखकर मन बड़ा दुखी हुआ आखिर वोट बैंक के लिये हरे झंडे वालों को बसा दिया गया है !! बहुगुणा जी भी विकास ना कर पा रहे है सिर्फ मुस्लिम वोट बनाने मे लगे है और अब लग रहा है की शायद अंतिम पहाड़ी मुख्यमंत्री बहुगुणा जी है इसके बाद सपा और बसपा के साथ कॉंग्रेस !!!Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp यह भी पढ़ें : हल्द्वानी : गौलापार के होटल में काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले, फेसबुक लाइव वीडियो में 4 करोड़ रुपये के भूमि विवाद और उत्पीड़न के आरोपLike this:Like Loading...Related Post navigationIndore Incident-30 March: रामनवमी पर बड़ा हादसा, 25 लोग मंदिर में 50 फिट की ऊंचाई से पानी में गिरे… hike in electricity rates-30 March : उत्तराखंड सरकार ने राज्य वासियों को दिया ‘बिजली का जोर का झटका’
नवीन समाचार, देहरादून, 30 मार्च 2023 (Bad news for Rahul Gandhi from Uttarakhand, case filed)। लगता है इन दिनों कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के सितारे गर्दिश में हैं। लंदन में कथित विवादित टिप्पणी के बाद सांसदी जाने के साथ घर भी खाली करने की समस्या से घिरे राहुल पर उत्तराखंड में भी मुकदमा दर्ज हो गया है। इससे आने वाले दिनों में उनके लिए मुश्किलें और बढ़ सकती है। यह भी पढ़ें : रामनवमी पर बड़ा हादसा, 25 लोग मंदिर में 50 फिट की ऊंचाई से पानी में गिरे…राहुल पर उत्तराखंड में आरएसएस पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में मानहानि के आरोप में अभियोग दर्ज किया गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय शिव सिंह की अदालत ने मामले को प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज कर अग्रिम सुनवाई के लिए 12 अप्रैल 2023 की तिथि तय की है। दायर वाद में शिकायतकर्ता कमल भदौरिया ने कहा है कि आरएसएस से देशवासियों की भावनाएं जुड़ी है। इसके बावजूद राहुल गांधी ने 9 जनवरी 2023 में कुरुक्षेत्र अंबाला में आयोजित सभा में आरएसएस के प्रति अभद्र टिप्पणी की। यह भी पढ़ें : पति के बाहर जाने पर पत्नी ने बुला लिया प्रेमी को, पति लौट आया तो बता दिया बदमाश, फिर मोबाइल से बचा प्रेमी और खुली पूरी कहानी…नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि भाजपा सरकार देश के जिम्मेदार संगठनों का दुरुपयोग और लोकतंत्र की हत्या कर रही है। कोई सरकार से सवाल न पूछे, इसके लिए आवाज दबाने का काम किया जा रहा है। यशपाल आर्य ने कहा कि कोर्ट के फैसले के 24 घंटे के भीतर और अपील प्रक्रिया में होने के बावजूद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद करना निर्ममता से ओतप्रोत राजनीति है। डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleयह भी पढ़ें : इसके बाद ‘चौकीदार चोर है’ कहना भूल जाएंगे राहुल गांधीयह भी पढें : कांग्रेस पार्टी के लिए ‘रही-सही कसर’ भी पूरी करने वाला हो सकता है यह बयान, आतंकी मसूद अजहर को दी इतनी इज्ज़तयह भी पढ़ें : राफेल के दस्तावेज ‘चोरी’ नहीं हुए, अवैध तरीके से फोटो स्टेट कराकर दायर की गयी थी याचिका: अटॉर्नी जनरलपढ़ें पूर्व समाचार : तो चुराये गये दस्तावेजों से दायर हुई #Rafale के खिलाफ SC में याचिका ! हो सकती है याची आप सांसद के खिलाफ कार्रवाई !बड़ा समाचार : यूपीए के 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राहुल की बातें इस वर्ग को लगातार गाली की तरह लग रही थीं। यह उसी तरह था जैसे नोटबंदी के दौरान एक नोट पर ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’ लिखा मिलने के बाद सोनम गुप्ता नाम की महिलाओं के लिए और ‘मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिये’ गीत के बाद मुन्नी नाम की महिलाओं के शर्मिंदगी की स्थित बन गयी थी।आप सभी चौकीदारों को मेरी शुभकामनाएं।इतना उत्साह देखकर अच्छा लगा।आपकी चौकीदारी के कारण भ्रष्टाचार नष्ट हो रहा है और चोरों को कष्ट हो रहा है। https://t.co/UUwLbfooT4— Narendra Modi (@narendramodi) March 17, 2019 लेकिन इधर भाजपा ने राहुल के ‘चौकीदार’ नारे पर जिस तरह का पलटवार किया है, उसके बाद राहुल का ‘चौकीदार चोर है’ के मुद्दे पर बैकफुट पर आना तय माना जा रहा है, और यदि वे अब भी चौकीदार चोर हैं, कहेंगे तो उन्हें राजनीतिक तौर पर नुकसान होना तय है। यह कुछ वैसा ही हो सकता है, जैसा मोदी को पिछले चुनावों में नीच, गुजरात के गधे, मौत का सौदागर व चायवाला आदि कहने पर हो चुका है। यह भी माना जाएगा कि यदि वे अब भी चौकीदार चोर है कहते हैं तो संदेश जाएगा कि वे केवल प्रधानमंत्री मोदी के लिए नहीं वरन खुद को चौकीदार कहने वाले अन्य लोगों को भी चोर कह रहे हैं। और ऐसा कहना उनके लिए भारी पड़ सकता है।भाजपा ने पहले ‘चौकीदार’ के मुद्दे पर 16 मार्च को एक करीब तीन मिनट का वीडियो लॉंच किया जिसमें ‘मैं भी चौकीदार’ स्लोगन को आगे बढ़ाते हुए यह संदेश दिया गया कि देश के लिए देश का हर व्यक्ति चौकीदार की भूमिका निभाने को तैयार है। और इसके एक दिन बाद ही प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित कई मंत्रियों ने अपने ट्विटर हैंडल पर अपने नाम के आगे ‘चौकीदार’ शब्द जोड़ दिया है। इस तरह भाजपा ने राहुल के ‘चौकीदार-हमले’ के आगे बैकफुट पर जाने के साथ ही देश भर के चौकीदारों को भी सम्मान का भाव दिलाते हुए समाज के निचले वर्ग से आने वाले एक बड़े वर्ग को अपनी पार्टी से जोड़ लिया है। इसका असर भी दिखने लगा है, कल प्रधानमंत्री मोदी से देहरादून में इस मुद्दे पर असहज होने का प्रश्न पूछने के तत्काल बाद ही राहुल गांधी को पहली बार कहना पड़ा है कि हर चौकीदार नहीं, केवल प्रधानमंत्री चोर हैं। यानी राहुल अपनी रणनीतिक चूक को स्वीकार करने की स्थिति में आ गये हैं कि उन्हें चौकीदार चोर है की जगह सीधे तौर पर ‘नरेंद्र मोदी चोर है’ जैसा कोई नारा देते तो आज उन्हें इस तरह पीछे नहीं हटना पड़ता। यह भी पढ़ें:यह भी पढें : कांग्रेस पार्टी के लिए ‘रही-सही कसर’ भी पूरी करने वाला हो सकता है यह बयान, आतंकी मसूद अजहर को दी इतनी इज्ज़तनवीन समाचार, नई दिल्ली, 8 मार्च 2019। पुलवामा हमले पर मोदी सरकार को घेरने के चक्कर में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने फिर ‘सेल्फ गोल’ कर डाला है और बीजेपी को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका दे दिया है। दिल्ली में बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन में राहुल गांधी ने आतंकी मसूद अजहर को ‘जी’ कहकर संबोधित किया, जिसके तुंरत बाद बीजेपी ने इस बयान को अपने ट्विटर पेज पर शेयर कर दिया। राहुल के इस बयान पर उनकी पार्टी निरुत्तर हो सकती है और लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद आया उनका यह ताज़ा बयान कांग्रेस पार्टी की पहले से ही कमजोर स्थिति को और कमजोर करने वाला व रही-सही कसर भी पूरी करने वाला साबित हो सकता है। राहुल गांधी ने सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल पर तंज कसते हुए कहा, ‘पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 से 45 जवान शहीद हो गए थे। सीआरपीएफ बस पर किसने बम फोड़ा ? जैश-ए-मोहम्मद…मसूद अजहर ने… आपको याद होगा ना? यह वही मसूद अजहर है, जिसे 56 इंच वालों की तब की सरकार ने एयरक्राफ्ट में मसूद अजहर जी के साथ बैठकर अजीत डोभाल कंधार में हवाले करके आ गए थे.’Come on “Rahul Gandhi Ji”!Earlier it were the likes of Digvijay Ji who called “Osama Ji” and “Hafiz Saeed Sahab”.Now you are saying “Masood Azhar Ji”.What is happening to Congress Party? pic.twitter.com/fIB4FoOFOh— Ravi Shankar Prasad (Modi ka Parivar) (@rsprasad) March 11, 2019‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद।
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