January 7, 2026

हरीश रावत के चुनाव लड़ने-न लड़ने पर निर्भर रहती है कॉंग्रेस की उत्तराखंड में जीत या हार-इसी आधार पर किया 2027 में चुनाव न लड़ने का ऐलान

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Harish Rawat
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नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जनवरी 2026 (Harish Rawat-Congress Impact)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद से राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने एक बयान में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में स्वयं प्रत्याशी नहीं बनेंगे। रावत ने कहा है कि वह अब चुनाव लड़ने के बजाय चुनाव लड़वाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने स्वयं अपने राजनीतिक अनुभवों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की जीत और हार को अपने चुनाव लड़ने या न लड़ने से जोड़कर देखा है।  देखें संबंधित वीडिओ :

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उत्तराखंड कांग्रेस और हरीश रावत का चुनावी अनुभव

जब नहीं लड़े चुनाव, तब मिली सफलता

(Harish Rawat-Congress Impact) उत्तराखंड: हरीश रावत बोले-गन्ना चूसना तो ठीक, किसानों को चूसना अच्छा  नहीं...खरीद मूल्य में देरी, आज मौन उपवास - Harish Rawat Silent Fast  Statement On Continuous Delay ...हरीश रावत ने पत्रकारों से बातचीत में अपने राजनीतिक सफर के उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2002 में उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था और पूरे प्रचार अभियान का समन्वय किया था, उस समय कांग्रेस को जीत मिली। वर्ष 2007 में भी उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और कांग्रेस ने मजबूत मुकाबला किया। इसी तरह 2012 में भी उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा, संगठन और प्रचार की जिम्मेदारी संभाली और कांग्रेस सत्ता में आई। रावत के अनुसार इन अनुभवों से उन्हें यह समझ मिली है कि संगठनात्मक भूमिका में रहकर वह पार्टी के लिए अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।

2027 को बताया निर्णायक चुनाव

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए करो या मरो जैसा होगा। उनका कहना है कि कांग्रेस लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव हारने की स्थिति में नहीं रह सकती। इसी कारण उन्होंने यह निर्णय लिया है कि वह स्वयं उम्मीदवार न बनकर पार्टी को जीत दिलाने के लिए रणनीतिक और संगठनात्मक भूमिका निभाएंगे। उनका लक्ष्य है कि 70 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस 40 सीटों के आंकड़े तक पहुंचे और सरकार बनाए।

चुनाव न लड़ने से क्या जाएगा गलत संदेश

इस सवाल पर कि क्या उनके चुनाव न लड़ने से जनता में गलत संदेश जाएगा, रावत ने कहा कि उत्तराखंड का राजनीतिक इतिहास इसका उत्तर देता है। उनके अनुसार, जब वह चुनाव मैदान में नहीं रहे, तब कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में चेहरे का महत्व होता है और कांग्रेस के पास प्रचार के लिए नेतृत्व और चेहरों की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में एक निर्धारित प्रक्रिया है और उसी के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

लालकुआं हार और आगे की रणनीति

2022 की हार से लिया सबक

हरीश रावत ने 2022 का विधानसभा चुनाव कुमाऊं क्षेत्र की लालकुआं सीट से लड़ा था, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। रावत ने स्वीकार किया कि वह उस चुनाव में भी प्रत्याशी नहीं बनना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों में उन्होंने चुनाव लड़ा। अब उन्होंने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं होंगे।

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अन्य मुद्दों पर भी रखी राय

पूर्व मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि सामने आए नए तथ्यों को देखते हुए इस मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो से होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ लोगों को बचाने का प्रयास किया गया है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

हरीश रावत का यह बयान उत्तराखंड कांग्रेस की रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या संगठनात्मक भूमिका में रहकर उनका अनुभव कांग्रेस को 2027 में सत्ता तक पहुंचाने में सफल हो पाता है।

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