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जाति प्रमाण पत्र पर सरिता ने अभिलेखों के साथ दिया जवाब

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-अब प्रशासन शिकायतकर्ता को उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेख दिखाकर एक-दो दिन में लेगा निर्णय
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 25 जनवरी 2022। नैनीताल विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी सरिता आर्य की ओर से मंगलवार को उनके जाति प्रमाण पत्र पर जतायी गई आपत्ति पर कई अभिलेखों के साथ अपना जवाब दे दिया है। अब प्रशासन उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखों को आपत्तिकर्ता को उपलब्ध कराने और इसके बाद अगले एक या दो दिन में कोई निर्णय लेने की बात कर रहा है। रिटर्निंग ऑफीसर प्रतीक जैन की ओर से तहसीलदार नवाजीश खलिक ने यह जानकारी दी है।

विदित हो कि हल्द्वानी निवासी हरीश चंद्र पुत्र गणेश राम आर्या निवासी बागजाला गौलापार ने उनके जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देते हुए जनपद के डीएम तथा नैनीताल के एसडीएम व तहसीलदार को शिकायती पत्र भेजा है। शिकायतकर्ता के अनुसार सरिता आर्य के 5 अगस्त 2008 को जारी जाति प्रमाण पत्र संख्या 3711-एमजे-2008 में सरिता आर्य के पति एनके आर्या व माँ का नाम जीवंती देवी निवासी भूमियाधार लिखा गया है, जबकि कानूनन जाति प्रमाण पत्र में पिता का नाम कुलदीप सिंह लिखा जाना चाहिए था।

उनके पिता अनुसूचित जाति में नहीं आते हैं, और पिता का नाम न लिखा जाना नियमों का उल्लंघन है। लिहाजा उनका जाति प्रमाण पत्र गलत जारी किया गया है, इसलिए उनके जाति प्रमाण पत्र को निरस्त किया जाना चाहिए। शिकायती पत्र में यह भी कहा गया है कि 2012 में विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी हेम आर्य ने भी इस विषय पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वह सही फोरम पर जाति प्रमाण पत्र को चुनौती दें।

प्रेसवार्ता के दौरान जाति प्रमाण पत्र को लेकर सफाई देते हुए रो पड़ीं सरिता आर्यइधर, सरिता आर्य का इस विषय में कहना है कि वह अपने इसी जाति प्रमाण पत्र से नैनीताल की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नैनीताल नगर पालिका की अध्यक्ष एवं अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नैनीताल विधानसभा से वर्ष 2007 में विधायक रह चुकी हैं, तथा दो बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने दो शादियां की थी। बचपन से वह अनुसूचित जाति की मां के साथ ही रही। मां ने ही उनका पालन पोषण किया। उन्होंने कभी पिता के नाम के अलावा अन्य कहीं भी उनका लाभ नहीं लिया।

2012 में मामला उच्च न्यायालय पहुंचने पर न्यायालय ने भी मां द्वारा उनका भरण पोषण करने के कारण उनकी जाति को अनुसूचित जाति माना। यह भी कहा कि मामला उच्च न्यायालय पहंुचने पर उत्तराखंड सरकार भी स्वयं इस मामले में पक्षकार थी। यह भी कहा कि भाजपा का संगठन पूरी ताकत से उनकी जीत के लिए संकल्पबद्ध होकर जुटा है, इसलिए विरोधी पुराने मामले को हवा दे रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा से जुड़े लोग उनके जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति को उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना भी बता रहे हैं। सरिता ने भी कहा कि वह इस मामले में न्यायालय की शरण लेने के साथ ही संबंधित व्यक्ति पर मानहानि का दावा भी करेंगी।

उधर, उनके जाति प्रमाण पत्र का मुद्दा एक बार पुनः उठने पर भाजपा के अन्य प्रत्याशी पर गहरी निगाह रखे हुए हैं। इस पर खुलकर तो अभी कोई कुछ नहीं बोल रहा, अलबत्ता सोशल मीडिया पर उनके द्वारा की जा रही टिप्पणियों से ऐसा लग रहा है कि एक बार पुनः उन्हें सरिता आर्य का नामांकन निरस्त होने और उनका टिकट बदलकर उन्हें मिलने की उम्मीद बन गई है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-नैनीताल की पहली महिला पालिकाध्यक्ष रहने के बाद 23 वर्ष बाद कांग्रेस के लिए जीती नैनीताल विधानसभा व बनी पहली महिला विधायक

सरिता आर्य

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जनवरी 2022। नैनीताल की पूर्व एवं पहली महिला विधायक व पहली महिला नगर पालिका अध्यक्ष तथा पिछले 7 वर्षों से महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रहीं सरिता आर्या ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए उन्होंने एक तरह से कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव एवं सोनिया गांधी के बाद दूसरे नंबर की सबसे ताकतवर महिला नेत्री प्रियंका गांधी के यूपी में चुनाव के सबसे बड़े नारे ‘लड़की हूं-लड़ सकती हूं’ पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा है, कांग्रेस पार्टी यूपी में महिलाओं को इस नारे के तहत 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने की बात कह रही है, किंतु उत्तराखंड में 20 फीसद महिलाओं को भी टिकट देने को भी तैयार नहीं है। दिवंगत डॉ. इंदिरा हृदयेश के देहावसान के बाद राज्य में कांग्रेस पार्टी का सबसे बड़ा महिला चेहरा एवं महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष होने के बावजूद उनका टिकट कट रहा है, ऐसे में वह कांग्रेस को राजनीतिक तौर पर महिला विरोधी साबित करने के लिए बड़ा हथियार हो सकती हैं।

इधर भले वह बिना शर्त भाजपा में जाने की बात कर रही हों, परंतु दो दिन पूर्व वह कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में टिकट मिलने पर भाजपा में जाने की साफ-साफ बात कह चुकी हैं, ऐसे में उन्हें टिकट मिलने की संभावना को समझा जा सकता है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि उनके भाजपा में शामिल होना का भाजपा न केवल नैनीताल विधानसभा, वरन पूरे राज्य में वरन उत्तराखंड के चुनाव के बाद पार्टी उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों में भी भी कांग्रेस के विरुद्ध महिला विरोधी होने के प्रचार के लिए प्रयोग कर सकती है।

मुख्यालय के निकटवर्ती गांव में अपनी माता के हाथों में पली एक बालिका का नैनीताल जैसी देश की दूसरी बनी नगर पालिका की पहली महिला अध्यक्ष व पहली महिला विधायक बनने के बाद महिला कांग्रेस के शीर्ष पद पहुंचने का सफर किसी परी कथा की तरह रहा है, और इस कथा में सबसे बड़ी भूमिका सरिता आर्या के मृदुभाषी होने तथा पदों की प्राप्ति के बावजूद स्वयं के व्यवहार में कोई परिवर्तन खासकर किसी तरह का दंभ रखे बिना छोटों-बढ़ों सबको सम्मान देने की रही है। किसी भी व्यक्ति से हाथ जोड़कर कुशल क्षेम पूछना और कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि होने के बावजूद पीछे की पंक्ति में बैठे परिचितों का अभिनंदन करना उनकी पहचान है।

सरिता के राजनीतिक सफर की बात करें तो अपनी मां के साथ निकटवर्ती गांव भूमियाधार में रहने वाली एक ग्रामीण बालिका किसी परी कथा की तरह एक आईएएस अधिकारी की पत्नी बनीं, और इसके बाद दो बेटों की मां व एक गृहणी के रूप में घर-गृहस्थी संभाल रही सरिता का सार्वजनिक जीवन में पदार्पण वर्ष 1990 में ऑल इंडिया वीमन कांफ्रेंस में जुड़ने के साथ हुआ। वर्ष 2003 में वह सीधे व पहले प्रयास में ही नैनीताल नगर पालिका अध्यक्ष की बड़ी भूमिका के लिए निर्वाचित हुईं और 2008 तक इस पद पर उनका बेदाग कार्यकाल रहा। आगे 2009 में ऑल इंडिया वीमन कांफ्रेंस ने उन्हें नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी सोंपी, जिसके जरिए अन्य दलों की महिला नेत्रियों के साथ भी उनके मधुर संबंध रहे।

वर्ष 2012 में उन्होंने मतदान से मात्र एक पखवाड़े पहले टिकट मिलने पर उक्रांद व भाजपा के हाथों रही नैनीताल सीट पर कांग्रेस को रिकार्ड 23 वर्षों के बाद सत्ता में वापस ला दिया। इधर राज्य की राजनीति में बदलते समीकरणों, जनपद के अन्य अनुसूचित जाति के नेता यशपाल आर्य के जनपद से बाहर से लड़ने से खाली हुई अनुसूचित नेता की जगह को बखूबी भरते हुए सरिता पहले मंत्री स्तरीय संसदीय सभा सचिव का पद प्राप्त करने के बाद महिला कांग्रेस के शीर्ष पर पहुंची। इधर खुद के साथ महिला कांग्रेस की नेत्रियों को राज्य में 20 फीसद सीटों पर टिकट दिलाने के लिए संघर्ष करते हुए व संजीव आर्य व यशपाल आर्य के भाजपा छोड़ कांग्रेस में आने के बाद बदली परिस्थितियों में उन्होंने कांग्रेस से करीब 18 वर्ष पुराना रिश्ता तोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है।

नैनीताल में दलों के साथ चुनाव के समीकरण गड़बड़ाए
नैनीताल। आसन्न विधानसभा चुनाव से पूर्व नैनीताल में राजनीतिक दलों व चुनाव के समीकरण बुरी तरह से उलझ व गड़बड़ा गए हैं। आम आदमी पार्टी ने यहां डॉ. भुवन आर्य को टिकट दिया है, जो उत्तराखंड क्रांति दल से अपनी राजनीतिक शुरुआत करने के बाद आम आदमी पार्टी में आए हैं। कांग्रेस से गत दिनों हेम आर्य ने भाजपा में और निवर्तमान विधायक संजीव आर्य ने भाजपा से कांग्रेस में ‘घर वापसी’ की है तो भाजपा के संभावित प्रत्याशियों में आगे बताए जा रहे मोहन पाल बसपा से भीमताल सीट से चुनाव लड़ चुके हैं।

अब कांग्रेस नेत्री सरिता आर्य भाजपाई हो गई हैं। इन नेताओं के साथ उनके समर्थकों में भी खासा असमंजस है। अब तक ठेठ कांग्रेसी रहे लोग भाजपा की और भाजपा के कुछ लोग कांग्रेस के गुणगान कर रहे हैं। नई-नई आम आदमी पार्टी में भी प्रत्याशी को लेकर भारी असंतोष नजर आ रहा है। ऐसे में आने वाले चुनाव में यहां राजनीतिक तौर पर कोई भी भविष्यवाणी करना कठिन होता जा रहा है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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नवीन समाचार, देहरादून, 19 जनवरी 2022। एक ओर डोईवाला सीट से चुनाव लड़ने के लिए डॉ. हरक सिंह रावत की ऐसी दुर्गति हुई है कि हमेशा सत्ता के करीब रहने वाले हरक चार दिन से सत्ता दूर, लाख मांफी मांगने के बावजूद किसी दल में जाने को भी तरस रहे हैं। वहीं इसी सीट के मौजूदा विधायक त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई है। त्रिवेंद्र ने पत्र में जो लिखा है, उस पर गौर किया जाए तो त्रिवेंद्र का जो चरित्र उभर रहा है, वह किसी भी राजनेता के लिए अनुकरणीय हो सकता है।

पत्र में त्रिवेंद्र ने लिखा है, ‘माननीय अध्यक्ष जी, विनम्रभाव से आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है व युवा नेतृत्व पुष्कर धामी के रूप में मिला है, बदली राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे विधानसभा चुनाव 2022 नहीं लड़ना चाहिए। मैं अपने भावनाओं से पूर्व में ही अवगत करवा चुका हूं। मान्यवार पार्टी ने मुझे देवभूमि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया, यह मेरा परम सौभाग्य था। मैंने भी कोशिश की कि पवित्रता के साथ राज्य वासियों की एकभाव से सेवा करुं व पार्टी के संतुलित विकास की अवधारणा को पुष्ट करूं।

प्रधानमंत्री जी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मुझे व प्रदेशवासियों को मिला जो अभूतपूर्व था। मैं उनका हृदय की गहराइयों से धन्यवाद करना चाहता हूं। उत्तराखंड वासियों का व विशेषकर डोईवाला विधानसभा वासियों का ऋण तो कभी चुकाया ही नहीं जा सकता, उनका भी धन्यवाद कृतज्ञ भाव से करता हूं। डोईवाल विधानसभा वासियों का आशीर्वाद आगे भी पार्टी को मिलता रहेगा। ऐसा मेरा विश्वास है।’

साफ है कि त्रिवेंद्र ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का त्याग कर राज्य एवं पार्टी के भविष्य के लिए युवा नेतृत्व की अगुवाई में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने का इरादा जताया है। ‘मैं और मेरा परिवार’ की आज के दौर की राजनीति में ऐसा अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर त्रिवेंद्र ने अपने तमाम आलोचनाओ से भरे-घिरे कार्यकाल के दागों को भी एक हद तक धोने का प्रयास किया है। इस और अपनी कोशिश में वह कितने सफल होते हैं, यह तो समय बताएगा। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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